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वर्ल्ड मिल्क डे विशेष : कोरोना वायरस से लड़ने में दूध करेगा मदद, सबके लिए एक ग्लास दूध है जरूरी

वर्ल्ड मिल्क डे विशेष : कोरोना वायरस से लड़ने में दूध करेगा मदद, सबके लिए एक ग्लास दूध है जरूरी

आज दुनिया भर में बीसवाँ विश्व दुग्ध दिवस मनाया जा रहा है। इस उत्सव के माध्यम से दूध के महत्व को लोगों के सामने लाया जाता है ,जो बड़ी  जनसंख्या पर असर डालता है। जहां पूरा विश्व कोरोना (कोविड-19) महामारी से जूझ रहा है। अभी तक न तो कोई सटीक दवा बन पाई है और न ही कोई वैक्सीन। इस महामारी में कोई आस नहीं दिख रही है। इस बीच आयुष मंत्रालय ने भी हल्दी वाले दूध के जरिये इम्यूनिटी बढ़ाने की सलाह दी है। इस महामारी में लोग दूध और हल्दी  का प्रयोग कर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता(इम्यूनिटी) को बढ़ा रहे हैं। पशुधन विकास विभाग उपसंचालक डॉ अजमेर सिंह कुशवाहा ने बताया कि दूध में कैल्शियम,  मैग्नीशियम, जिंक, फास्फोरस,  आयोडीन,  आयरन,  पोटैशियम,  फोलेट्स, विटामिन ए, विटामिन डी, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी-12, प्रोटीन आदि मौजूद होते हैं। गाय के दूध में प्रति ग्राम 3.14 मिली ग्राम कोलेस्ट्रॉल होता है। गाय का दूध पतला होता है। जो शरीर मे आसानी से पच जाता है। पोषण के दृष्टिकोण से दूध हमारे लिए सबसे साफ सुथरा भोजन है। खाद्य आपूर्ति में शरीर को तीस से अधिक विशिष्ट सामग्रियों की आवश्यकता होती है। एक भी खाद्य पदार्थ सभी की आपूर्ति नहीं करता है, लेकिन दूध लगभग सभी की आपूर्ति करता है। आयुर्वेद के अनुसार गाय के ताजा दूध को ही उत्तम माना जाता है। पुराणों में दूध की तुलना अमृत से की गई हैं, जो शरीर को स्वस्थ मजबूत बनाने के साथ-साथ कई सारी बीमारियों से बचाता है। अथर्व वेद में लिखा है कि दूध एक सम्पूर्ण भोज्य पदार्थ है। इसमें मनुष्य शरीर के लिए आवश्यक वे सभी तत्व हैं जिनकी हमारे शरीर को आवश्यकता होती है। 

दूध एक ऐसी खाद्य वस्तु जो दुनिया के लगभग सभी देशों में उपलब्ध है। आज दूध से निर्मित न सिर्फ दही, धी और पनीर के अलावा कई और खाद्य पदार्थ दुनिया भर में मौजूद हैं। दूध और उससे बने उत्पाद की महत्ता के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए ही हर साल 1 जून को विश्व दूध दिवस मनाया जाता । इस बार विश्व दूध दिवस यानी वर्ल्ड मिल्क डे की 20वीं वर्षगांठ है। मालूम हो कि साल 2001 में पहला विश्व दुग्ध दिवस आयोजित किया गया। दुनियाभर के कई देश इसमें हिस्सा लेते हैं और हर साल संख्या बढ़ती ही जा रही है।

एक जून ही क्यों चुना गया ?
विश्व दूध दिवस पहली बार साल 2001 में एफएओ (संयुक्त राष्ट्र का खाद्य और कृषि संगठन) द्वारा स्थापित किया गया था। दुनियाभर के कई देश इसी तिथि के आसपास राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाते थे, इसलिए 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस के लिए चुना गया। एफएओ की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, ‘‘दुग्ध दिवस एक दिन दूध पर ध्यान केंद्रित करने, दूध और दुग्ध उद्योग से जुड़ी गतिविधियों को प्रचारित करने का अवसर प्रदान करता है।दूध को वैश्विक भोजन के रूप में मान्यता देते हुए कई देश 1 जून को ही विश्व दुग्ध दिवस मनाते हैं। एफएओ की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में 72 देशों में 586 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। विश्व दुग्ध दिवस दुग्ध उद्योग से जुड़ी गतिविधियों को सार्वजनिक करने में बेहतर और प्रभावी काम करता है। मालूम हो कि भारत में 26 नवंबर को दुग्ध दिवस मनाया जाता है।

विश्व दुग्ध दिवस का उद्देश्य
 दुनियाभर में दूध के महत्व के बारे में आम लोगों के बीच विश्व दुग्ध दिवस एक असरदार क्रांति लाया है। अंतरराष्ट्रीय डेयरी संघ भी ढेर सारे विज्ञापन संबंधी क्रिया-कलापों के तहत एक स्वस्थ और नियंत्रित भोजन के रूप में दूध के महत्व को बताने की शुरुआत की है। दूध शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्वों का एक बहुत अच्छा स्रोत है, जिसमें कैल्सियम, मैग्नीशियम, जिंक, फॉसफोरस, आयोडीन, आयरन, पोटैशियम, फोलेट्स, विटामिन ए, विटामिन डी, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी12, प्रोटीन, फैट आदि मौजूद होता है। ये बहुत ही ऊर्जायुक्त आहार होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। इसमें उच्च गुणवत्ता के प्रोटीन समेत आवश्यक और गैर-आवश्यक अमीनो एसिड और फैटी एसिड मौजूद होता है। दूध की महत्ता लोगों को समझाने के लिये विश्व दुग्ध दिवस उत्सव बड़ी जनसंख्या पर असर डालता है।

दूध क्यों है जरूरी
दूध का हर किसी के दैनिक जीवन में खास महत्व है। यह प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरा है, जो जीवन के सभी चरणों में विकास के लिए आवश्यक है। हर व्यक्ति के लिए दिन में कम से कम एक वक्त दूध जरूरी बताया गया है। इस वक्त कोरोना वायरस की वजह से लोगों को इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सलाह दी जा रही है। यह एक सिद्ध तथ्य है कि प्रतिदिन एक गिलास दूध पीने से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यूनिटी में सुधार होता है और यह बीमारियों को दूर रखता है।  इसके अलावा दूध में हल्दी डालकर पीने से भी शरीर की इम्यूनिटी बढ़ती है। विदेशों में हल्दी वाला दूध गोल्डन मिल्क के नाम काफी प्रचलित है।  गौरतलब है कि सादा दूध नहीं पीने के बदले आप दही, पनीर, मक्खन, आइसक्रीम, पनीर या फ्लेवर्ड मिल्क के तौर पर अन्य तरीके से इसको अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।

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