Health

कुष्ठ रोग पर नियंत्रण के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रयासों की आवश्यकता

कुष्ठ रोग पर नियंत्रण के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रयासों की आवश्यकता

Date : 22-Feb-2023

रायपुर। कुष्ठ रोग विशेषज्ञों ने इस पर नियंत्रण पाने के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय सीएमई में छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा कुष्ठ रोगियों की संख्या को चुनौतीपूर्ण बताते हुए इसे नियंत्रित करने के लिए सघन अभियान चलाए जाने पर जोर दिया गया।

'एलिफेंट एट लार्ज' शीर्षक की इस सीएमई का उद्घाटन करते हुए निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने कहा कि कुष्ठ रोग को दूर करने के लिए समाज के सभी वर्गों को साथ आना होगा। यह एक सामुदायिक चुनौती है जिसे जागरूकता के माध्यम से दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोगी इसे छिपाने का प्रयास करते हैं जिससे संक्रमण और अधिक फैलता है। इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता है। एम्स के त्वचा रोग विभाग में इसके उपचार की समस्त सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं। इसके साथ ही एम्स के चिकित्सक इस दिशा में सतत् शोध और अनुसंधान भी कर रहे हैं।

राज्य के कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार ने राज्य में कुष्ठ रोग की स्थिति और इससे बचाव एवं उपचार के लिए राज्य स्तर पर किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि जिला और ब्लॉक स्तर पर कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। एम्स के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सत्याकी गांगुली ने बताया कि प्रदेश में देश के औसत से अधिक कुष्ठ रोगी हैं। राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत इस पर नियंत्रण पाने का प्रयास किया जा रहा है। पिछले वर्ष एम्स में लगभग 150 कुष्ठ रोगियों की पहचान कर इनका उपचार किया गया।

डॉ. नम्रता छाबड़ा शर्मा ने बताया कि एम्स में प्रत्येक सोमवार, मंगलवार और बुधवार को राज्य सरकार के निर्देश में एमडीटी किट प्रदान की जा रही है। कुष्ठ रोग को खत्म करने के लिए कोर्स पूरा करना आवश्यक होता है अन्यथा विकलांगता आ सकती है। साथ ही ऐसे रोगी कुष्ठ रोग को और फैला सकते हैं। इसके प्रारंभिक लक्षणों में त्वचा का रंग हल्का पड़ना और उस स्थान का सुन्न पड़ जाना शामिल है। कुष्ठ रोगी के संपर्क में आने से भी यह रोग फैलता है।

सीएमई में अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. आलोक चंद्र अग्रवाल, डॉ. संतोष देव राठौड़ (अहमदाबाद), डॉ. संतोष घोरपड़े (भिलाई), विभाग की डॉ. नील प्रभा, डॉ. शोमिल खरे, डॉ. नवनीत कौर सहित 70 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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