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वात, पित्त एवं कफ दोष से भी बढ़ता है मोटापा, आयुर्वेद में छिपा है निदान

वात, पित्त एवं कफ दोष से भी बढ़ता है मोटापा, आयुर्वेद में छिपा है निदान

हेल्थ डेस्क । सुन्दर छरहरी काया किसे अच्छी नहीं लगती। लोग मोटापा कम करने के लिए घंटों जिम में पसीना बहाते हैं। डायटिंग करते हैं और सप्लीमेंट पर जीने लगते हैं। इसके बाद भी वह परिणाम नहीं आते, जिनकी उन्हें अपेक्षा होती है। आयुर्वेद (दीर्घ जीवन का विज्ञान) मोटापे के लिए कुछ अन्य कारकों को भी जिम्मेदार मानता है। आयुर्वेद के अनुसार अन्य रोगों की तरह मोटापा भी वात-पित्त-कफ के अंसतुलन से उत्पन्न होता है। इस संतुलन को ठीक किए बिना मोटापा से मुक्ति पाना संभव नहीं है।

आयुर्वेद के अनुसार भोजन और चयापचय के बीच असंतुलन के कारण वजन बढ़ने या घटने लगता है। कुछ अन्य रोग भी मोटापे का कारण हो सकते हैं। कफ दोष वाले लोगों में मोटापा या अधिक वजन की समस्या होती है। वात दोष होने पर वजन कम हो जाता है। आयुर्वेद में शरीर की प्रकृति का आकलन करने के बाद ही उसका उपचार किया जाता है। आधुनिक नाड़ी वैद्य-वेदा पल्स (रशियन तकनीक) से मन, शरीर एवं आत्मा का आकलन करते हैं और इसीके आधार पर चिकित्सा की जाती है।

आयुर्वेद में मोटापे का इलाज
आयुर्वेद का मानना है कि कफ उद्दीप्त होने पर शरीर का वजन बढ़ने लगता है। मेद में वृद्धि होती है जबकि ऊतक कुपोषित रह जाते हैं। कफ संचय से चयापचय कमजोर पड़ जाती है जिसके कारण मोटापा बढ़ने लगता है। ऐेसे लोगों को वजन कम करने के लिए नियमित रूप से भोजन करना चाहिए। वात प्रकृति के लोग आम तौर पर दुबले पतले होते हैं और उनके लिए वजन बढ़ाना एक समस्या होती है। पित्त (अग्नि) प्रकृति का शरीर गठीला होता है। ऐसे लोगों में खान पान का असंतुलन वजन बढ़ने का कारण बन सकता है।

वजन घटाने का आदर्श तरीका
वजन कम करने के साथ बेहतर स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद पंचकर्म, योग, प्राणायाम, पावर योगा, साइको न्यूरोबिक्स, हेल्थ डायट प्लान, कसरत, वाष्प स्नान, आयुर्वेदाचार्य परामर्श एवं औषधि का उपयोग किया जाता है। इस चिकित्सा पद्धति का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।