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अत्याधिक चिंता और तनाव से बढ़ता है अलसर का खतरा

अत्याधिक चिंता और तनाव से बढ़ता है अलसर का खतरा

हेल्थ डेस्क। सन् 1956 में रूसी वैज्ञानिकों ने अनेक प्रयागों के द्वारा यह सिद्ध कर दिया था कि चिंता और अत्याधिक तनाव के फलस्वरूप ही पेट में अलसर या घाव होते है। निरंतर भय, तनाव तथा चिंता का शरीर पर भयानक प्रभाव होता है। इनके फलस्वरूप रोग से शरीर की रक्षा करने वाली श्वेत रक्त कणिकाओं का काफी नुकसान हो जाता है। इसके विपरीत सकारात्मक चिंतन, प्रसन्नता, मानसिक बल और आनंद से श्वेत रक्त कणिकाओं में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होने लगती है। नकारात्मक भावनाएं हमें ठेस पहुंचाती है। चिंता बढ़ जाने पर पेट में अलसर से रक्तस्त्राव आरंभ हो सकता है। डॉक्टर अलवारिस द्वारा मेयो क्लीनिक में किए गए प्रयोगों ने यह बात सिद्ध कर दी है। डॉ. अलवारिस ने विभिन्न प्रकार के उदर-रोग से पीडि़त 15 हजार रोगियों का निरीक्षण किया। जिसमें उन्होंने उनके पेट दर्द का कारण पता किया। इसमें सबसे रोचक बात यही रही कि लगभग 12 हजार रोगियों की पीड़ा का मूल कारण उनके शरीर में नहीं बल्कि उनके मन में था। रोगियों की समस्या का कारण प्रदूषित जल या वातावरण आदि नहीं थे । भय, चिंता, असुरक्षा की भावना, ईष्र्या और बदलती परिस्थितियों के साथ सामंजस्य स्थापित करने में असमर्थता ही एक साथ मिलकर उनके पेट में दर्द उत्पन्न कर रहे थे।
डॉ. जॉन शिलडर ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने 20 वर्षों तक हजारों रोगियों का उपचार किया और चिंता, दु:ख एवं तनाव के कारण हुई उनकी शारीरिक क्षति के आंकड़े एकत्र किए।अपने दीर्घकाल के अनुभाव की सहायता से उन्होंने नकारात्मक विचारों से मुक्त होने में रोगियों की मदद की। उनके अनुसार हमारी आधी बीमारियों का मूल हमारे मन में ही विद्यवान है। डॉ. ब्लेथ ने अपनी तनाव संबंधी रोग: एक बढ़ती महामारी नामक पुस्तक में बताया कि उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, मधुमेह, दमा, गठिया, वातरोग, मस्तिष्क में रक्त अवरोध, एलर्जी, भूख न लगना तथा त्वचा संबंधी बीमारियां मनोदैहिक गड़बडिय़ों से ही उत्पन्न होती है। हम में से अधिकांश लोग नकारात्मक विचारों और भावनाओं के हानिकारक प्रभावों को जानते तक नहीं है। सुखी, स्वास्थ्य और सर्थक जीवन जीनके लिए हमें चिंता, भय, तनाव से छुटकारा पाना ही होगा।

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