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कैंसर जितना ही खतरनाक है डायबिटीज

कैंसर जितना ही खतरनाक है डायबिटीज

निम्मी मूलवानी
डॉ. निम्मीज डायबिटिक केयर,
चांदखेड़ा, अहमदाबाद

डायबिटीज मेलिटस एक ऐसी अवस्था है जिसमें रक्त में शर्करा की मात्रा स्वस्थ स्तर से ज्यादा हो जाती है। यह सुनने में जितना सरल लगता है दरअसल है उतना ही जटिल। इसकी उपस्थिति के प्रमाण 3000 साल से भी अधिक पुराने हैं। इसका उल्लेक चरक संहिता में भी मिलता है। यह शब्द यूनानी भाषा का है जिसमें डायबिटीज का अर्थ है प्रवाह और मेलिटस का अर्थ है शर्करा। यह एक जीर्ण रोग है जो जीवन भर साथ चलता है। यह कैंसर या हृदय रोग जितना ही घातक है पर इसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता। लोग इसकी तरफ ध्यान तब देते हैं जब ये शरीर के आवश्यक कल पुर्जों को खराब करने लगते हैं। डायबिटीज से किडनी, हार्ट, ब्रेन, तंत्रिका तंत्र और रक्त धमनियां सभी खराब होने लगती हैं। डायबिटीज की वजह से हमारी शारीरिक व मानसिक यहां तक की वित्तीय सेहत भी बिगड़ सकती है। डायबिटीज के मरीजों की संख्या विश्वभर में बढ़ रही है। टाइप -2 डायबिटीज के मामलों में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है। टाइप-1 डायबिटीज के मामले में हम पूरी दुनिया में सबसे आगे हैं।

अब जबकि हम जानते हैं कि डायबिटीज खामोशी से हमारे अंगों को क्षति पहुंचा रहा है जिससे हम गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं तो हमें सचेत हो जाना चाहिए। हमें अपने शुगर लेवल की जांच नियमित रूप से कराकर शुगर लेवल को सुरक्षित दायरे में रखना चाहिए। यहां एक सवाल उठता है कि डायबिटीज से हम भारतीयों को ही इतना खतरा क्यों? पहली बात यह है कि हमारे जीन्स में गड़बड़ी है जिसके कारण वंशानुगत क्रम में हम मधुमेह के संभावित मरीज हैं। दूसरी बात यह कि बदले हुए खान-पान, आरामतलब जिन्दगी के कारण हम डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। भारतीयों पर किये गये एक शोध में पाया गया कि हममे डायबिटीज के लक्षण दूसरे देशों के लोगों के मुकाबले पहले प्रकट हो जाते हैं। जागरूकता के अभाव में 60 फीसदी डायबिटीज मरीजों का पता दुर्घटनावश चलता है। रोगी किसी और कारण से रक्त की जांच कराता है और डायबिटीज निकल आता है। पता लगने के बाद भी वे किसी विशेषज्ञ से सम्पर्क नहीं करते बल्कि स्वयं ही उसका नियंत्रण करने के टोटके अपनाने लगते हैं। देर से पता लगने और शुगर लेवल के अनियंत्रित रहने के कारण शरीर के अंग चुपचाप नष्ट होते रहते हैं और इसका गंभीर नतीजा सामने आता है।
तो डायबिटीज होने पर क्या करें? डायबिटीज होने पर घबराने की कतई जरूरत नहीं है। सही इलाज से डायबिटीज को नियंत्रण में रखा जा सकता है। आपको एक मधुमेह विशेषज्ञ से सम्पर्क करना चाहिए जो आपकी चिंता, भय, मिथक और अविश्वास को दूर कर आपको सही स्थिति की जानकारी दे सके। आपका चिकित्सक आपको लाइफ स्टाइल में सुधार करने, आहार चर्या में परिवर्तन करने और वर्जिश करने की सलाह देगा ताकि ब्लड शुगर का सही स्तर बनाए रखा जा सके। 
संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि डायबिटीज का पता लगने के बाद घबराने की जरूरत नहीं है।  सही दिनचर्या एवं औषधियों के योग से आप न केवल डायबिटीज को रोक सकते हैं बल्कि किसी किसी मामले में इससे हुई क्षति की भरपाई भी कर सकते हैं। यहां तक कि अपनी भावी पीढ़ी को डायबिटीज से बचाना भी संभव है। एक डायबिटीज विशेषज्ञ के तौर पर मेरी सलाह यही होगी कि आप डायबिटीज के प्रति जागरूक रहें, नियमित ब्लड शुगर टेस्ट करते रहें, बचाव के तरीके अपनाएं और एक दीर्घ स्वस्थ जीवन जिएं।

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