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चरम (ऑर्गैज़्म) तक पहुंचने के  चार रास्ते, जहां मिलेगा आपके पार्टनर को मल्टी-ऑर्गैज़्म

चरम (ऑर्गैज़्म) तक पहुंचने के चार रास्ते, जहां मिलेगा आपके पार्टनर को मल्टी-ऑर्गैज़्म

सेक्स के साथ दिक़्क़त यह हो गई है कि हम इस प्रोसेस को एन्जॉय करने के बजाय चरम तक पहुंचने यानी आर्गैज़्म के बारे में बहुत ही ज़्यादा सोचते हैं. यूं तो सेक्स के हर पल को एन्जॉय करना ही सबसे सही होता है, पर अगर आप चरम सुख की तलाश में हैं तो आपको उस सुख का रास्ता ज़रूर दिख सकता है. पर हां, वहां तक पहुंचना आपके काम और क़ाबिलियत पर निर्भर है. राह ज़िंदगी की हो या सेक्स लाइफ़ की बात करने से ही बात बन सकती है. दुनियाभर के सेक्सोलॉजिस्ट कहते हैं कि पार्टनर्स के बीच क्यूनिकेशन का होना बहुत ज़रूरी है. अगर आप अपने पार्टनर से हर बारे में खुलकर बात कर लेते हैं तो इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि बिस्तर पर आप दोनों बेहतर परफ़ॉर्म करेंगे. क्योंकि बात करने से आप एक-दूसरे की पसंद- नापसंद और चाहतों से वाकि़फ़ हो सकते हैं. बेशक यहां पसंद-नापसंद में सेक्शुअल पसंद- नापसंद की बातें भी हैं.

सेक्स को लेकर हम सभी के मन में ज़िंदगी में कभी न कभी, कोई न कोई ग़लतफ़हमी या पूर्वाग्रह होते ही हैं. आमतौर पर भारत में महिलाओं का इनिशिएटिव लेना ख़ुद ज़्यादातर महिलाएं तक सही नहीं मानतीं. अब इससे ग़लत बात और क्या हो सकती है. देखा जाए तो ऑर्गैज़्म पाने का रास्ता तब अधिक आसान होता है, जब आप मूड में होती हैं. तो उम्मीद है आप समझ ही गई होंगी, जब आपका सेक्स करने का मन कर रहा हो तब पार्टनर को बताने में, सेक्स की इच्छा जताने में कुछ भी ग़लत नहीं है. आख़िर आनंद पर आपका भी हक़ है.

हस्तमैथुन अपने शरीर को जानने, उसकी ज़रूरतों को पहचानने और उसको लेकर कॉन्फ़िडेंट होने का एक बेहद आसान और सुरक्षित तरीक़ा है. पर दिक़्क़त यह है कि हस्तमैथुन को अब तक ज़्यादातर महिलाएं टैबू ही समझती हैं. उस बारे में बात करना तो दूर, सोचने को भी पाप की कैटेगरी में रखती हैं. अमेरिका के मर्सर यूनिवर्सिटी मेडिकल स्कूल के सेक्शुअल थेरैपी और सेक्शुअल डिस्फ़ंक्शन के प्रोफ़ेसर रह चुकीं डॉ मैत्री चंद कहती हैं,‘‘महिलाओं के लिए हस्तमैथुन बहुत ज़रूरी चीज़ है. इससे महिलाएं यह पता लगा पाती हैं कि किस बात से, किस तरीक़े से उन्हें चरम की प्राप्ति हो सकती है. इससे असल सेक्स के दौरान ऑर्गैज़्म मिलने में आसानी होती है.’’

भले ही यह कहा जाता हो कि महिलाएं मल्टी-ऑर्गैज़्म प्राप्त कर सकती हैं, असल ज़िंदगी में अधिकतर महिलाएं चरम पर पहुंचने से पहले ही सेक्स की क्रिया को बंद कर देती हैं. ऐसा फ़ॉल्स ऑर्गैज़्म के चलते होता है. जब हमें अच्छा लगने लगता है, उसके कुछ सेकेंड में लगता है कि यही आर्गैज़्म है और दिमाग़ संतुष्ट महसूस करता है, पर देखा जाए तो चरम तो उससे आगे का पड़ाव है. इसके लिए ज़रूरी है अपने एक्साइटमेंट पर क़ाबू पाना और सेक्स की क्रिया को लंबा खींचने की कोशिश करना, कुछ-कुछ तांत्रिक सेक्स की तरह. तांत्रिक सेक्स में भी ऑर्गैज़्म आने-आने का आभास होते ही हल्का सा ब्रेक लेकर या प्रोसेस को धीमा करके सेक्स के ड्यूरेशन को बढ़ाया जाता है. अंत में जब क्लाइमेक्स पर आप दोनों पहुंचेंगे, तब पता चलेगा कि सेक्स का असली मतलब क्या होता है.