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आज का हिन्दू पंचांग

आज का हिन्दू पंचांग

हिन्दू पंचांग

दिनांक - 20 सितम्बर 2022
दिन - मंगलवार
विक्रम संवत् - 2079
शक संवत् - 1944
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - शरद
मास - आश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र में भाद्रपद)
पक्ष - कृष्ण
तिथि - दशमी रात्रि 09:26 तक तत्पश्चात एकादशी
नक्षत्र - पुर्नवसु रात्रि 09:07 तक तत्पश्चात पुष्य
योग - वरियान सुबह 08:25 तक तत्पश्चात परिघ
राहु काल - अपरान्ह 03:36 से 05:05 तक
सूर्योदय - 06:28
सूर्यास्त - 06:38
दिशा शूल - उत्तर दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:53 से 05:40 तक
निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:09 से 12:57 तक

व्रत पर्व विवरण - दशमी का श्राद्ध
 विशेष - दशमी को कलम्बिका शाक खाना सर्वथा त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

प्रकृति अनुसार विहार

वात प्रकृति

त्याज्य : अति परिश्रम, अति व्यायाम, सतत अध्ययन, अधिक बोलना, अधिक पैदल चलना अथवा वाहनों में घूमना, तैरना, अति उपवास, रात्रि जागरण, भय, शोक, चिंता, मल-मूत्र आदि वेगों को रोकना, पश्चिम दिशा से आनेवाली हवा का सेवन ।

हितकर : सर्वांग मालिश (विशेषतः सिर व पैर की), कान-नाक में तेल डालना, आराम, सुखशीलता, निश्चिंतता व शांत निद्रा ।

पित्त प्रकृति 

त्याज्यः तेज धूप में घूमना, अग्नि के निकट रहना, रात्रि जागरण, अति परिश्रम, अति उपवास, क्रोध, शोक, भय ।
हितकर : शीत, सुगंधित द्रव्यों (जैसे चंदन, अगरु) का लेप, शीत तेलों से मालिश ।

कफ प्रकृति

त्याज्य : दिन में शयन, आरामप्रियता, आलस्य ।
हितकर : घूमना-फिरना, दौड़ना, तैरना, व्यायाम, आसन, प्राणायाम ।
( त्रिदोष सिद्धांत पृ.क्र. ४)

सुख-शांतिप्रदायक ईशान-स्थल

सुख-शांति और कल्याण चाहनेवाले बुद्धिमानों को अपने घर, दुकान या कार्यालय में ईशान-स्थल पर अपने इष्टदेव, सदगुरु का श्रीचित्र लगा के वहाँ धूप-दीप, मंत्रोच्चार तथा साधना-ध्यान पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके करना चाहिए । यह विशेष सुख-शांतिदायक है ।

ज्ञानार्जन में सहायता व सत्प्रेरणा हेतु
विद्यार्थियों के लिए भी ईशान कोण बड़े महत्त्व का है । पूर्व एवं उत्तर दिशाएँ ज्ञानवर्धक दिशाएँ तथा ईशान-स्थल ज्ञानवर्धक स्थल है । जो विद्यार्थी ईशान-स्थल पर बैठ के पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पढ़ता है, उसे ज्ञानार्जन में विशेष सहायता मिलती है । पूर्व की ओर मुख करने से विशेष लाभ होता है । अध्ययन-कक्ष में सदगुरु या ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों के श्रीचित्र लगाने चाहिए, इससे सत्प्रेरणा मिलती है ।

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