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महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह और नंदीहाल में अब श्रद्धालु नहीं कर पाएंगे फोटोग्राफी

महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह और नंदीहाल में अब श्रद्धालु नहीं कर पाएंगे फोटोग्राफी

उज्जैन (एजेंसी)। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के पंडे पुजारियों को निर्देश दिया गया है कि, वह 2 मिनट में श्रद्धालुओं को दर्शन करा कर बाहर करें, ताकि दूसरे श्रद्धालुओं को भी मौका मिल सके। पीछे से दर्शन करने वालों को कोई असुविधा न हो। वहीं महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह और नंदीहाल में अब श्रद्धालु फोटोग्राफी नहीं कर पाएंगे। श्रद्धालुओं द्वारा फोटोग्राफी करने के कारण अन्य श्रद्धालुओं को परेशानी होती थी। इस बात को लेकर श्रद्धालुओं का हंगामा रोज सामने आ रहा था। इसको लेकर प्रशासन ने बैठक की और सीमित समय के लिए श्रद्धालुओं को गर्भगृह में दर्शन कराय जाने का निर्णय लिया। गर्भगृह में फोटोग्राफी को प्रतिबंधित कर दिया गया है।

शनिवार को कलेक्टर आशीष सिंह ने व्यवस्थाओं को लेकर बैठक की। अब सुबह 6 से दोपहर 1 बजे तथा शाम 6 से 8 बजे तक के निर्धारित समय में केवल 1200 भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश मिलेगा। अब तक इसकी संख्या तय नहीं थी। कलेक्टर ने बताया कि 1500 रुपए वाली व्यवस्था में ज्यादा भीड़ होने से पीछे वाले दर्शनार्थियों को दर्शन नहीं हो पाते थे। इसलिए रोजाना टिकट की संख्या 580 तक कर दी थी। इनमें करीब 300 टिकट पंडे अपने यजमान के लिए रखते थे। महज 280 टिकट ही सामान्य लोगों के लिए बचते थे।

1500 रुपए देकर गर्भगृह में जाने वाले श्रद्धालु फोटोग्राफी करने लगते हैं। इससे अधिक समय लगता है। अब ऐसा नहीं होगा। गर्भगृह में फोटोग्राफी को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया है। बैठक में तय किया गया कि 1500 की टिकट वाले श्रद्धालुओं को दर्शन होते ही बाहर निकाला जाएगा, ताकि पीछे आने वाले श्रद्धालुओं को समय मिल सके। 580 टिकट के कोटे की व्यवस्था को खत्म कर इसे अनलिमिटेड करने पर भी चर्चा की गई। हालांकि अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।

बता दें, मंदिर में पिछले कुछ समय से 1500 रुपये की रसीद पर दिनभर प्रवेश दिया जा रहा था। असीमित संख्या में टिकट दिए जाने से गर्भगृह में एक समय में 20-20 की संख्या में श्रद्धालु खड़े रहते थे। दर्शनार्थियों के लगातार प्रवेश व निर्गम से भगवान महाकाल के दर्शन बाधित हो रहे थे। इससे सबसे अधिक परेशानी गणेश व कार्तिकेय मंडपम् से दर्शन करने वाले आम दर्शनार्थियों को हो रही थी। दर्शनार्थी सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर भगवान महाकाल के दर्शन करने मंदिर आते हैं और उन्हें भगवान के सुविधा से दर्शन ना हो यह मंदिर समिति नहीं चाहती। इसलिए 1500 रुपये की सशुल्क रसीद दर्शन सुविधा को समिति कर दिया गया है।

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