Chhattisgarh

रोजाना जान जोखीम में डालकर पढ़ाई करने पहुंचते है स्कूली बच्चें, शिक्षक छोड़ते है घर तक सुरक्षित

रोजाना जान जोखीम में डालकर पढ़ाई करने पहुंचते है स्कूली बच्चें, शिक्षक छोड़ते है घर तक सुरक्षित

दिपेश शाह की रिपोर्ट (कापसी)। कांकेर जिले के ब्लाक कोयलीबेड़ा संकुल आलोर, प्राथमिक शाला गोटिनबेड़ा स्कूल के बच्चे रोजाना अपनी जान जोखीम में डालकर अध्धयन करने पहुच रहे है। क्योंकि यह गांव में दो बस्ती है । बड़ेपारा से कुल 12 बच्चे रोजना सुनसान घने जंगल को पार कर स्कूल पहुचते है। जो खतरों से खाली नही है । जिसे शिक्षको ने गंभीरता से लेते हुए के बच्चो को अकेले स्कूल आने -जाने से करने मना किया है। शिक्षको ने स्कूल में बैठक बुलाकर ग्रामीणों को स्कूली बच्चो को घर से लाने ओर घर तक छोड़ने जैसे जबाबदारी काम सौपा । बता दे कि पूर्व में बच्चे जान खतरे में डालकर समूह बनाकर जंगल को पार कर स्कूल पहुचते थे । लेकिन अब बच्चो को सुरक्षित घर तक पहुचाने का काम ग्रामीणों के साथ स्कूल के शिक्षक कर रहे है ।  गोटिनबेड़ा गांव चारो ओर से घने पहाड़ी से घिरा हुआ है । कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने जंगली जानवर लकड़बग्गे ,तेंदुवे को बस्ती के आसपास घूमते हुए देखा ।गर्मी बढ़ने के कारण जंगल के जलश्रोत सुख गए है जिसके वजह से जानवर पानी व भोजन की तलाश में गांव के आसपास  मंडराते देखा जा रहा । जिसके वजह से  लोग डरे ओर सहमे हुए है ।

स्कूल बच्चो को लग रहा डर 
 गांव के लोगो का कहना है कि  जंगली जानवर बड़े खूंखार है। जो हमारे बच्चो पर भी हमला कर सकते है जिसके वजह से बच्चो को अकेला नही छोड़ा जा रहा ।  विदित हो कि  प्राथमिक शाला स्कूल में कुल 22 बच्चो की दर्ज संख्या है।  बड़ेपारा से कुल 12 बच्चे व बोगनभोण्डिया के 2 बच्चे प्रतिदिन 2 किमी जंगल पहाड़ को पार कर अकेले  बच्चो की टोली स्कूल पहुच रहे थे । जिन्हें ग्रामीणों ने अकेले जाने से मना किया अभी सभी बच्चो को स्कूल के शिक्षकों व ग्रामीणों  के सहयोग से रोजाना घर तक लाने और पहुचाने का काम किया जा रहा । सभी बच्चे हाथो में डंडा लिये थाली को बजाते हुए शोर हल्ला करते हुए शिक्षक व ग्रामीणों के अगुवाई में पहाड़ को पार करते है ।


योगेश कोडोपी हेडमास्टर ने बतलाया कि गोटिनबेड़ा गांव चारो ओर से खेरकट्टा व हांकेर के जंगल से घिरा हुआ है।। गांव के दाएं व बाए ओर घना बीहड़ इलाका है। भोजन और पानी की तलाश में  जानवर गर्मी के दिनों में भटककर बस्ती की ओर आ जाते है । जिससे कि बच्चो पर जानवरो के हमले की आशंका बनी हुई है ।


मवेशियों को अपना निशाना बना रहा तेंदुआ

 ग्रामीण अपने मवेशी को चढ़ाने के लिए जंगल की ओर जाते है ।सुबह गिनती कर मवेशी को चढ़ाते है। शाम को अक्सर गिनती में एक या दो बकरी कम हो रहे जिससे कि ग्रामीणों ने  घने जंगल की ओर अब बकरी चढ़ाना बंद कर दिया ।अभी समूह में लोग पालतू जानवरों को मैदानी इलाकों में चढ़ाते है। जहाँ उनके साथ कुत्ते भी मवेशियों की पहरेदारी करते है।।

ग्राम पटेल अर्जुन ताराम ने बतलाया की तेंदुआ बकरियों को खाने घर के बाड़ी तक पहुच जाता है । मवेशीयो के आवाज करने के बाद हम लोग मसाल जलाकर मवेशी की रक्षा कर रहे है।

भुवनेश्वर यादव ,बलसिंह ने बतलाया कि उसके घर के मुर्गियों को लकड़बग्घे ने हमला कर खा लिया । उस समय वे घर के अंदर थे । खिड़की खोलकर देखा तो 3 लकड़बग्घे द्वारा बॉडी में घुसकर मुर्गियों पर हमलाकर उसे अपने जबड़े में दबाए जंगलकर की ओर ले गए । उसके बाद से घर के बाहर आग जलाकर रखा जाता है।। एवम सभी घरों में जानवरों को सुरक्षा घेरे में रखा जाता है ।

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