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परलकोट : ग्रामीण जान जोखिम में डालकर खुले में शौच जाने को मजबूर,  हितग्राहियों को अब तक  नहीं मिली शौचालय निर्माण की राशि

परलकोट : ग्रामीण जान जोखिम में डालकर खुले में शौच जाने को मजबूर, हितग्राहियों को अब तक नहीं मिली शौचालय निर्माण की राशि

दीपेश शाहा की रिपोर्ट  (कापसी )। परलकोट अंचल के ग्राम  पिव्ही 125 के लगभग 70 % महिलाएं एवं  पुरुष खुले में  शौच जाते है.  यह उनकी मजबूरी है क्योंकि हितग्राहियों को अब तक शौचालय निर्माण की राशि नही दी गयी । ग्रामीण जान जोखिम में डालकर खुले जंगल में शौच के लिए निकल जाते है. जंगली जानवरों के डर से गांव की महिलाएं एवं पुरुष झुंड बनाकर हाथों में डंडा लिए शौच के लिए जंगल में जाते है । एक पहाड़ी छोर पर महिलाए तो दूसरे पहाड़ी छोर को पुरुष शौच के लिए निकलते है । यह वाकया सुनने में जरा अटपटा लग रहा हो लेकिन ग्रामपंचायत  बैकुंठपुर में कुछ ऐसा ही दृश्य हमे देखने को मिला । विदित हो कि पूरा गांव ओडीएफ घोषित है बावजूद  ग्राम पंचायत बैकुंठपूर के आश्रित ग्राम पिव्ही 125 में लगभग 70 % महिलाएं एवम पुरुष जंगल मे शौच के लिए जा रहे है। महाराष्ट्र राज्य सीमा से सटे पहाडी पर शौच के लिए जाते समय सभी लोग हाथों में डंडा लिए निकलते है क्योंकि पहाड़ी इलाका और घने जंगल होने के कारण जंगली जानवर से खतरे का आशंका बनी रहती है । ज्यादातर लकरबग्गा , जंगली सुअर  सियार तेंदुआ, जहरीली साँप के काटने का डर बना रहता है । बाबजूद इसके ग्रामीण जान जोखिम में डालकर खुले में शौच करने निकल जाते है यह उनकी मजबूरी है क्यों कि हितग्राहियों को अब तक शौचालय निर्माण की राशि नही दी गयी । आधे अधूरे निर्मित शौचालय को ब्लॉक कॉर्डिनेटर ने पूर्ण बतला दिया  ओर पूरे ग्राम को खुले में शौच मुक्त ग्राम का दर्जा से नवाजा गया । गांव के ग्रामीण मलय मण्डल सुकेंन मोहाली, सुदेव सेन कौशल्या विश्वास ,बलाई बढ़ई ने बतलाया कि गांव में पंचायत के तरफ से शौचालय निर्माण करना था परंतु सरपंच ने हम ग्रामीणों को शौचालय निर्माण की स्वीकृत राशि का अब तक भुगतान नही किया गया । जिसके चलते शौचालय निर्माण की प्रक्रिया अब तक पूरी नही हो पाई जो अभी अधूरी है । 

अब तक नही मिली शौचालय निर्माण की राशि
श्रीमती बैरागी, अनिक मण्डल, रेखा दास ,केशव कॉर्निया,,रवि कीर्तनिया ,रंजन दास ,विष्णु दास ,निर्मल बढ़ई, सनेका बैरागी, मृत्युंजय गाईंन, संजय मण्डल, अमित हीरा अनिमा हालदार ,पलाश ढाली, रीता दत्ता ,रमेन् दत्ता ने बताया कि सरपंच सचिव के भ्रष्टाचार के कारण हमें शौचालय निर्माण की राशि अब तक पूरी नही मिली जिसके चलते निर्माण अधूरी पड़ी हुई है। मजबूरन हम खुले में शौच करने पहाड़ी  की ओर रुख करने बाध्य है । कई बार तो शौच के दौरान लकड़बग्गे ने ग्रामीणों पर हमला करने की कोशिश भी की । जिसके डर से ग्रामीणों  समूह बनाकर पहाड़ी में शौच करने जाते है। बता दे की पिव्ही 125 ग्राम की कुल जनसंख्या 460 है । 70 से 100  की संख्या में लोग प्रतिदिन खुले में शौच जाते हैं ।

ओडीएफ घोषित ग्राम पंचायत बैकुंठपुर की अगर बात करे तो स्थिति ऐसी है कि यह लोग रोजाना लोटा लिए जंगल की ओर शौच करने बढ़ते है।  सिर्फ कागजो में अधिकारीयो ने वाहवाही बटोरने के लिए ओडीएफ ग्राम घोषित कर दिया ।लेकिन वास्तविकता कुछ ओर ही ब्या करती नजर आ रही है लेकिन जमींनी स्तर पर लोगो को योजना का लाभ नही मिल पा रहा । कोयलीबेड़ा ब्लाक हमेशा से ही भ्रष्टाचार के मामले में अग्रणी रहा, कई गबन के मामलो में  ग्रामीणों द्वारा सरपंच के नाम से शिकायत भी की जा चुकी है । 

मंजू कीर्तनिया ,कृष्ण प्रामाणिक ने कहा कि सरपंच ने मात्र 5 हजार रू का भुगतान किया । इस पैसे में थोड़ी कोई शौचालय का निर्माण कर सकता है । मृत्युंजय गोलदार ओर सरस्वती कीर्तनिया ने कहा कि हमारे नाम से स्वीकृत राशि को सरपंच ने गबन कर लिया पैसे की मांग करने पर गुमराह करता है ।

ग्रामीणों ने विधायक से की शिकायत
वार्ड पंच प्रियंका मण्डल रीता दत्ता ने बतलाया कि सरपंच द्वारा हितग्राहियों को अधूरा भुगतान किया गया जिसके वजह से लोगो के शौचालय अधूरा पड़ा है। सरपंच अधिकारियो को घूस  देना पड़ता है का हवाला देकर लोगो की स्वीकृत राशि से भुगतान में कटौती करते है । ग्रामीणों ने उसकी शिकायत जनदर्शन से लेकर वर्तमान विधायक अनूप नाग से भी है । लेकिन अब तक सरपंच सचिव के ऊपर जबाबी कार्रवाही नही हो पाई है अगर ग्रामीणो  को न्याय नही मिला तो वे जनपद कार्यालय में धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।।

इस संबंध में ब्लाक कॉर्डिनेटर  स्वच्छ भारत मिशन के मिलन सिकदर ने बतलाया कि पहले एक ही परिवार में एक राशन कॉर्ड था और अब परिवार के बटने पर  परिवारो में अब राशन कार्ड भी बढ़ गया है । इसलिए उनको शौचालय नही  मिल पाया होगा जो  लोग जंगल शौच के लिये जाते होंगे।

इस संबंध में सरपंच दिलीप मिस्त्री से पूछा गया तो उन्होंने ने कहा कि जितने रुपये देना था हमने हितग्राही को दे दिया है।

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