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सुप्रीम कोर्ट ने एक झटके में ख़त्म किए 13 हजार से ज्यादा पुराने अपंजीकृत मामले

सुप्रीम कोर्ट ने एक झटके में ख़त्म किए 13 हजार से ज्यादा पुराने अपंजीकृत मामले

नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने भारी संख्या में लंबित मामलों के बोझ को घटाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए एक झटके में 13,147 पुराने डायरी संख्या वाले, लेकिन अपंजीकृत मामलों को खत्म कर दिया है। इनमें एक मामला तीन दशक से भी ज्यादा पुराना है।

रजिस्ट्रार न्यायिक-1 चिराग भानु सिंह द्वारा गुरुवार को जारी एक आदेश में कहा गया है कि ये सभी मामले आठ साल से अधिक समय पहले दायर किए गए थे, लेकिन रजिस्ट्री द्वारा संबंधित वकील या याचिकाकर्ताओं को व्यक्तिगत रूप से बताए गए दोषों को ठीक नहीं किया गया। इन मामलों को 19 अगस्त, 2014 से पहले डायरी संख्याएं मिली थीं और इस सूची में 1987 में दाखिल एक मामला भी शामिल था। ये याचिकाएं रजिस्ट्री में निष्क्रिय पड़ी थीं और लंबित मामलों की संख्या बढ़ा रही थीं।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए आंकड़ों के अनुसार एक सितंबर, 2022 तक 70,310 मामले लंबित थे। इनमें 51,839 मिसलेनियस मामले (प्रारंभिक आवेदन) और 18,471 मामले नियमित सुनवाई से संबंधित थे। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार के आदेश में कहा गया है कि इन मामलों के पक्षकारों का आगे मुकदमा चलाने का इरादा नहीं लगता क्योंकि उन्होंने कई वर्षों में भी दोषों को ठीक नहीं किया। रजिस्ट्रार ने कहा कि पहले की प्रथा के अनुरूप रजिस्ट्री द्वारा दोषों को सूचित करते हुए कोई कागजात नहीं रखे गए थे। इस प्रकार, बताए गए सभी दोषों को ठीक करने के बाद वकील याचिकाओं का एक पूरा सेट दाखिल करेगा।

हालांकि, 19 अगस्त, 2014 के बाद वादपत्र और अदालती शुल्क टिकटों की एक प्रति रजिस्ट्री के पास रखने का प्रविधान किया गया था। पुराने नियमों के तहत, संबंधित पक्षों को 28 दिनों के भीतर दोषों को ठीक करना था, जिसे 90 दिनों तक बढ़ा दिया गया था। इस तरह दोषों को ठीक करने की वैधानिक अवधि भी समाप्त हो गई है। एक सितंबर, 2022 तक शीर्ष अदालत में लंबित 70,310 मामलों में से 17.28 प्रतिशत या 12,092 मामले मिसलेनियस हैं जो अधूरे हैं या तैयार नहीं हैं और जिनमें प्रारंभिक औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न संविधान पीठों के समक्ष 493 मामले लंबित हैं। इनमें से 343 पांच-न्यायाधीशों की पीठों के समक्ष, 15 सात-न्यायाधीशों की पीठों के समक्ष और 135 मामले नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठों के समक्ष लंबित हैं। मालूम हो कि 27 अगस्त को भारत के 49वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालने के बाद जस्टिस यूयू ललित ने लंबित मामलों को निपटाने पर विशेष जोर दिया है और उनके नेतृत्व में शीर्ष अदालत ने मामलों को सूचीबद्ध करने की एक नई प्रणाली को अपनाया है।

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