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भारत ने पाकिस्तान से सबसे तरजीही राष्ट्र का दर्जा लिया वापस , व्यापार प्रतिबंध पर विचार

भारत ने पाकिस्तान से सबसे तरजीही राष्ट्र का दर्जा लिया वापस , व्यापार प्रतिबंध पर विचार

नयी दिल्ली, (एजेंसी ). जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान से व्यापार में 'सबसे तरजीही राष्ट्र (एमएफएन)' का दर्जा वापस ले लिया है। सूत्रों के मुताबिक, भारत सीमा शुल्क में वृद्धि, बंदरगाह से जुड़े प्रतिबंध और पाकिस्तान से आयातित वस्तुओं पर प्रतिबंध जैसे दंडात्मक कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है। सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पाकिस्तान का सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र यानी मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा वापस ले लिया गया है। 

इस कदम से पाकिस्तान द्वारा भारत को किए जाने वाले 48.8 करोड़ डॉलर (करीब 3,482.3 करोड़ रुपये) के सामान के निर्यात पर असर पड़ सकता है। तरजीही राष्ट्र का दर्जा वापस लेने के बाद भारत, पाकिस्तान से आने वाली वस्तुओं पर सीमा शुल्क बढ़ा सकेगा। सूत्रों ने कहा, "सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में तरजीही देश का दर्जा वापस लेने का फैसला किया गया है। सरकार सीमा शुल्क अधिनियम और विदेशी व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है।" 

उन्होंने कहा कि इन कानून के तहत सरकार कुछ सामानों के व्यापार को प्रतिबंधित कर सकती है, सीमा शुल्क में बड़ी वृद्धि कर सकती है और पाकिस्तानी वस्तुओं पर बंदरगाह से संबंधित प्रतिबंध लगा सकती है। पाकिस्तान से जो चीजें आयात की जाती हैं, उनमें मुख्य रूप से फल, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, खनिज संसाधन, लौह अयस्क और तैयार चमड़ा शामिल हैं।भारत ने पाकिस्तान को 1996 में यह दर्जा दिया था, लेकिन पाकिस्तान की ओर से भारत को ऐसा कोई दर्जा नहीं दिया गया। 

व्यापार एवं शुल्क पर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के आम समझौते (जीएटीटी) के तहत एमएफएन का दर्जा दिया गया था। भारत और पाकिस्तान दोनों ने इस पर हस्ताक्षर किए थे और दोनों डब्ल्यूटीओ के सदस्य हैं। तरजीही राष्ट्र समझौते के तहत, डब्लयूटीओ के सदस्य देश अन्य व्यापारिक देशों के साथ बिना किसी भेदभाव के व्यापार करने के लिए बाध्य हैं। खासकर सीमाशुल्क और अन्य शुल्कों के मामले में।इस दर्जे को वापस लेने का अर्थ है कि भारत अब पाकिस्तान से आने वाली वस्तुओं पर किसी भी स्तर तक सीमा शुल्क को बढ़ा सकता है।

पाकिस्तान ने 2012 में भारत को तरजीही देश का दर्जा देने की प्रतिबद्धता जताई थी लेकिन अंदरूनी विद्रोह के चलते बाद में मुकर गया था। पाकिस्तान ने कहा था कि वह भारत को एमएफएन के बजाए गैर-भेदभावपूर्ण बाजार पहुंच (एनडीएमए) का दर्जा देने पर काम कर रहा है। हालांकि, इसकी भी घोषण नहीं की गई। 

भारत-पाकिस्तान का कुल व्यापार 2016-17 में 2.27 अरब डॉलर से मामूली बढ़कर 2017-18 में 2.41 अरब डॉलर हो गया है। भारत ने 2017-18 में 48.8 करोड़ डॉलर का आयात किया था और 1.92 अरब डॉलर का निर्यात किया था।एक अन्य अधिकारिक सूत्र ने कहा, "भारत अपने फैसले के बारे में डब्ल्यूटीओ को सूचित करने के लिए बाध्य नहीं क्योंकि उसने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। भारत ने डब्ल्यूटीओ के अनुच्छेद 21 को लागू किया है।" 

सरकार जल्द ही पाकिस्तान से आने वाली वस्तुओं की एक सूची तैयार करेगी, जिनपर भारत सीमा शुल्क बढ़ाएगा।भारत मुख्य रूप से पाकिस्तान को कच्चा कपास, सूती धागे, डाई, रसायन, प्लास्टिक का निर्यात करता है।व्यापार विशेषज्ञों ने कहा कि इस फैसले का देश के द्विपक्षीय व्यापार पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि दोनों देशों के बीच का कारोबार सालाना तीन अरब डॉलर से भी कम का है। निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस फैसले का असर पाकिस्तान के उन उद्योगों पर पड़ेगा, जो कि भारत में निर्यात कर रहे हैं।

भारतीय विदेश व्‍यापार संस्‍थान (आईआईएफटी) के अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ राकेश मोहन जोशी ने कहा, "सरकार को सावधानीपूर्वक कदम उठाना चाहिए क्योंकि भारत का निर्यात, आयात की तुलना में अधिक है। यदि पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई करेगा तो इसका भारत पर ज्यादा असर होगा।" 

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