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बीमा आपकी बचत नहीं है !

बीमा आपकी बचत नहीं है !

-सीए सिंघई संजय जैन
”बीमा आग्रह की विषयवस्तु है“यह सन्देश आपने अनेकों बार बीमा कम्पनी के विज्ञापन के नीचे पढ़ा होगा किन्तु जैसे सिगरेट पर छपी चेतावनी स्मोकर के लिए फिजूल है, सब इसकी अनदेखी ही करते हैं। नब्बे फीसद लोगों ने बीमा इसलिए लिया होता है कि ”एजेन्ट का दबाव था - और मना करना ठीक नहीं लगा, सो जो पॉलिसी उसने दी हमने ले ली!“ बाकी दस फीसदी इसे बचत का उपकरण  मान कर इस भाव से लेते हैं कि ”चलो इसी बहाने कुछ तो बचने लगेगा!“ ये दोनो ही भाव अनुपयुक्त हैं। बीमा कभी भी बचत नहीं होता और यह दुर्घटना और मृत्यु जैसे आकस्मिक आघात से बचने का ही उपकरण होता है। इस भाव को न समझने और अपनी फाइनेन्शियल हेल्थ की अनदेखी करने के कारण अक्सर बीमा समय पड़ने पर या तो होता ही नहीं है और अगर होता भी है तो अपर्याप्त!

बीमा एक समझदारी भरा कदम है जिसे पूरी सावधानी और आकलन के बाद ही उठाया जाना चाहिये। सामान्यतया बीमे के समय जिन तथ्यों और सावधानियों की उपेक्षा की जाती है समय आने पर वे ही उसे सर्वथा अनुपयुक्त बना देते हैं और फिर यह भाव उपजता है कि ऐसे बीमे का क्या लाभ ? अच्छी फाइनेन्शियल हेल्थ के लिए यह बहुत आवश्यक है कि जब कभी भी आप किसी इन्श्योरेन्स एजेन्ट से मिलें तो उससे जल्दी से जल्दी छुटकारा पाने के भाव के बजाय अपनी अनुकूलता के हिसाब से उससे अप्वाइन्टमेन्ट फिक्स करें और पूरी रिसर्च के बाद ही अपनी जरूरत के हिसाब से प्लान का चयन करें। आजकल इन्टरनेट पर भी ऐसी बहुत सी साईट्स उपलब्ध हैं जो आपकी सहायता कर सकती हैं किन्तु व्यक्तिगत चर्चा से आपको अपने उन प्रश्नों के उत्तर भी मिल सकेंगे जिन्हे आप इन साईट्स पर नहीं खोज पाते हैं।

कितना प्रीमियम होना चाहिए ?
बीमा वह आर्थिक सुरक्षा है जो आपको किसी सम्भावित अनहोनी की दशा में एक छोटे से प्रीमियम, जो कि बीमित रकम से कई गुना छोटी राशि होती है, के एवज में मिलती है। अतः इसे ठीक से समझ लें कि यदि प्रीमियम बहुत कम है तो जरूरी नहीं है कि सुरक्षा भी उतनी ही कम हो। इसके लिए जरूरी यह समझना है कि वास्तव में प्रीमियम तय करने का आधार क्या है? दूसरे यह कि यह प्रीमियम आपको कितने समय तक देना होगा? सामान्य तौर पर मासिक, त्रैमासिक, अर्द्ध वार्षिक एवं वार्षिक विकल्प के साथ ही एकल प्रीमियम भी लिए जाते हैं जिसमें एक बार ही रकम अदा करके आप निश्चित अवधि के लिए बीमा सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं। ध्यान रहे कि प्रीमियम लम्बे समय तक बाकी रहने पर सुरक्षा कवच में छेद हो सकता है, इसलिए बीमा अपनी मासिक आय का 10 प्रतिशत से अधिक न चुनें। बहुत बड़ी आय वाले व्यक्ति भी इस सिद्धान्त का पालन करें और अधिकतम कवरेज के लिए एन्डोमेन्ट या फिर टर्म इन्श्योरेन्स का रूख करें।

सुरक्षा कवच कैसा हो ?
बीमा वास्तव में तब काम आता है जब आप काम के नहीं रहते। इसलिए सुरक्षा कवच इस तरह का चुनें जो कि आपके परिवार वाले समझ सकें और समय आने पर उसका लाभ भी ले सकें। यदि आप मध्यम आय के व्यक्ति हैं तो आपकी सालाना आय का कम से कम 14 गुना सुरक्षा आपको लेना चाहिये। ताकि बीमे की रकम के ब्याज से आपके परिवार का काम वैसा ही चलता रहे जैसा कि आपके रहने पर चल रहा है। वर्तमान में कई पेन्शन योजनाऐं भी आ गई हैं जिनमें एक तय रकम की ग्यारन्टी होती है। आप इन्हें भी चुन सकते हैं। किन्तु यह स्मरण रखें कि बीमे का कुल उद्येश्य संकट की घड़ी में आपके परिवार की आर्थिक सुरक्षा ही है, अतः मनी बैक, स्टाक बेस्ड जैसे लुभावने नारों से बच कर सही सुरक्षा चुनें।

क्या बीमे का लक्ष्य टैक्स बचत हो ?
यदि आपका बीमा आपको टैक्स में बचत देता है तो यह सोने में सुहागा है। यदि वह अच्छा रिटर्न देता है तो क्या कहने ! किन्तु कभी भी मात्र इन्ही लक्ष्यों के लिए बीमे का चयन अदूरदर्शी सोच सिद्ध होगी। बीमा लेते समय जांच लें कि वह आय कर विधान की किस धारा में छूट की पात्र है और छूट वास्तव में कितनी मिलेगी। किन्तु यदि आप धारा 80-सी के सभी विकल्पों में रुपये 1.50 लाख लगा चुके हैं तो मात्र इस कारण बीमे से नहीं बचिये कि जब टैक्स में छूट नहीं मिलनी तो बीमे का क्या लाभ ? बीमा का लक्ष्य टैक्स से छूट मात्र नहीं उससे बहुत ज्यादा है।

सुरक्षा अवधि कितनी हो ?
सामान्यतया 25-30 वर्ष की आयु वाले युवा यह सोचते हैं कि अभी मेरी उम्र ही क्या है जो मैं बीमे के बारे में सोचूं ? अभी तो मेरी शादी ही नहीं हुई! यह सोच हानिकारक ही है। बीमा सुरक्षा आप जितनी कम आयु में प्राप्त कर लेते हैं उतनी ही सस्ती पड़ती है। जैसे-जैसे आपकी आयु बढ़ती है प्रीमियम की दर बढ़ती जाती है। इसलिए आप जैसे ही नियमित रूप से कमाई करने लगें पहला अच्छा काम बीमा करना ही करें। स्मरण रहे कि कम आयु में भले ही आपका अपना परिवार न बना हो किन्तु जिन मां-बाप के परिवार के आप अंग हैं उन्हें अपने बुढ़ापे की सुरक्षा आपकी आर्थिक मजबूती ही में प्राप्त हो सकती है। बीमे की अवधि हमेशा सर्वाधिक ही चुनें। स्मरण रहे कि अपने रिटायरमेन्ट की आयु में आप बीमा सुरक्षा ले नहीं सकेंगे, क्योंकि अधिक आयु में बीमा सबसे मंहगा शगल हो जाता है। सो वैसे भी आप उस समय बीमा नहीं खरीद सकेंगे। इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि यदि आयु अधिक हो तो बीमा लेना नहीं है, वरन् इस आयु में तो बीमे की आवश्यकता सर्वाधिक होती है। बीमा सदैव उपलब्ध सर्वाधिक आयु तक का ही लेना चाहिये।

बीमे हेतु सावधानियां
- अपने बीमे की किश्त का भुगतान समय पर करें। यदि पॉलिसी बन्द भी हो गई हो तो जल्द से जल्द वापस चालू करा लें। सामान्यतया त्रैमासिक किश्त ठीक रहती है।
- यदि आवश्यक हो तो बीमा से पहले होने वाली स्वास्थ्य की जांच ठीक तरह से करायें। यह आपको आने वाली परेशानी से आगाह भी कर सकती है।
- बीमे में अपना नाम, पता, जन्मतिथि ही नहीं फोन नम्बर भी जांच लें। किसी गल्ती की दशा में तुरन्त सुधार करायें। वरना क्लेम में उलझन हो सकती है।

- बीमे में नामांकन अवश्य करायें। विवाह के बाद नामांकन में पत्नी का नाम दर्ज करालें। नामांकन की जानकारी ले लें कि क्या वह वही दर्ज है जो आपने चाहा।
- बीमे की पालिसी को सम्भाल कर ऐसी जगह रखें जहां से यह सुलभता से मिल सके। स्मरण रहे कि पालिसी पेमेन्ट की रसीद उतनी जरूरी नहीं है जितनी पालिसी का डाक्यूमेन्ट। हो सके तो उसे लॉकर में रखें जहां से वह आपके परिवार को तुरन्त मिल सकेगी।

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