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प्रदेश के बिलासपुर में किसान ने खास तरह की उगाई गोभी, जिसको तीन गुना दाम पर लोग खरीदने के लिए तैयार

प्रदेश के बिलासपुर में किसान ने खास तरह की उगाई गोभी, जिसको तीन गुना दाम पर लोग खरीदने के लिए तैयार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक किसान ने खास तरह की गोभी उगाई है, जिसको  तीन गुना दाम पर लोग खरीदने के लिए तैयार है. इस गोभी की खासियत क्या है, इसके बारे में हम आपको बताएं इससे पहले हम आपको किसान के बारे में बता रहे हैं।

बिलासपुर जिले के मल्हार के किसान जदुनंदन वर्मा इन दिनों चर्चा में हैं, क्योंकि उन्होंने अपने खेत में कुछ ऐसा किया है जो अमूमन देखने को नहीं मिलता. जदुनंदन वर्मा ने अपने खेतों पर कुदरती तौर पर गुलाबी और पीले रंग की गोभी उगाकर सभी को चौंका दिया है. खास बात यह है कि इनमें किसी भी तरह का बाहरी कलर इस्तेमाल नहीं किया गया है।

गुलाबी और पीले रंग की एक फूलगोभी पूरी तरह से नैचुरल है और ऑर्गेनिक खेती के जरिए इसे तैयार किया गया है. वर्मा ने बताया कि फिलहाल प्रयोग के तौर पर 60 डिसमिल में उन्होंने 300 पौधे लगाए थे. कुछ समय पहले उन्होंने स्विटजरलैंड की सिजेंटा कंपनी के बीज लिए थे और इसके बाद उन्होंने अपने खेतों में लगाया. वर्मा ने बताया कि उन्हें खेती में नए-नए प्रयोग करने का शौक है और इसी के चलते यह मुमकिन हो पाया है।

तीन गुना कीमत देकर गोभी खरीदने को तैयार हैं लोग

गुलाबी और पीले रंग की फूलगोभी की तस्वीरें जब सोशल मीडिया में आने लगी तो इलाके में जदुनंदन वर्मा की यह फसल चर्चा में आ गई. लोग वर्मा से यह फूल गोभी 3 गुना कीमत पर खरीदना चाहते हैं. जदुनंदन वर्मा ने बताया कि 6 से 7 रुपए प्रति किलो के हिसाब से वह सामान्य सफेद फूल गोभी बेचा करते थे, लेकिन अब इसे लोग 20 रुपए किलो तक का दाम देने के लिए तैयार हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में इसी तरह की फूलगोभी 80 रुपए किलो के दाम में बाजार में बिकती है. वर्मा की फसल तैयार है जल्द ही बाजार में भी आ जाएगी।

इम्यूनिटी बढ़ाने में ममदगार है ये फूलगोभी

वर्मा ने बताया कि कंपनी और कुछ एक्सपर्ट से चर्चा में पता चला कि अन्य फूलगोभी में प्रोटीन न के बराबर होता है, जबकि इसमें अधिक मात्रा में प्रोटीन होता है. इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, जिंक जैसे गुण पाए जाते हैं. यह बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद जरूरी हैं. यह गुण लोगों की इम्यूनिटी के लिए भी अहम माने गए हैं।

जदुनंदन ने बताया कि मैंने खुद इस गोभी को खाकर देखा है. प्रयोग के तौर पर इसका असल स्वाद समझने के लिए मैंने इसे सलाद के तौर पर खाया. इसके स्वाद में मुझे हल्कापन लगा जैसे सामान्य गोभी हल्की सी स्वाद में तेज होती है उसकी एक गंध होती है, मगर इस गोभी में ऐसा नहीं है।

कभी दूसरों के खेतों में थे मजदूर, आज कमा रहे लाखों रुपये

जदुनंदन वर्मा अपने गांव में अपनी खेती को लेकर बेहद मशहूर हैं, लेकिन कुछ साल पहले तक वह दूसरे के खेतों में मजदूरी करते थे. पलायन करके आसपास के जिलों में मजदूरी करने जाते थे. मगर अपनी मेहनत के दम पर इन्होंने 7 एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती शुरू की. धीरे-धीरे अपने काम को आगे बढ़ाया और अब इनका खुद का खेत है।

बनना चाहते थे वैज्ञानिक, अब बेटा पूरा करेगा सपना

जदुनंदन वर्मा बताते हैं कि इन्हें पढ़ने और खेती किसानी के नए-नए प्रयोगों को करने का बेहद शौक था. इसी वजह से वह कृषि वैज्ञानिक बनना चाहते थे. मगर गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले वर्मा को जिस उम्र में पढ़ाई करनी थी, तब हाथ में फावड़ा और कुदाली आ गई और वह मजदूरी करने लगे. मगर अब अपने बेटे को पढ़ा रहे हैं. कृषि वैज्ञानिक बनने का सपना बेटा रोहन पूरा करेगा. 12वीं के बाद अब वो एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी में एडमिशन की तैयारी में जुटा हुआ है।

जदुनंदन वर्मा ने बताया कि उनके पास गाय नहीं है, इस वजह से उनके पास गोबर नहीं होता. ऐसे में वो पड़ोसियों से गोबर लाकर ना सिर्फ खाद तैयार करते हैं बल्कि नीम के पत्ते और दूसरी चीजों से कुदरती कीटनाशक भी तैयार करते हैं. उन्होंने बताया कि उनके खेत में अब पहले के मुकाबले कम कीड़े लगते हैं. यह प्रयोग वो आसपास के दूसरे किसानों को भी सिखा रहे हैं, लेकिन यह थोड़ा मेहनत और समय देने वाला काम है इसलिए किसान अक्सर रासायनिक प्रोडक्ट की तरफ भागते हैं. वर्मा ने कहा कि मेरी कोशिश है कि मैं ऑर्गेनिक काम ही करूं यदि शासन की तरफ से कोई सहयोग मिले तो मैं शायद अपने काम को और बेहतर तरीके से कर पाऊंगा।

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