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पाकिस्तान के एफडीई ने एक अधिसूचना जारी कर महिला शिक्षकों के जींस और टाइट कपड़े पहनने पर लगा दी रोक

Date : 10-Sep-2021

इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान के संघीय शिक्षा निदेशालय (एफडीई) ने एक अधिसूचना जारी कर महिला शिक्षकों के जींस और टाइट कपड़े पहनने पर रोक लगा दी है। इसके अलावा पुरुष शिक्षकों को जींस और टी-शर्ट पहनने से रोकने के लिए भी अधिसूचना जारी की है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में शिक्षा निदेशक ने सोमवार को स्कूल और कॉलेजों के प्राचार्यों को एक पत्र भेजा है। पत्र में प्राचार्यों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि प्रत्येक स्टाफ अपना पहनावा सही करे जिससे कि समाज में एक अच्छा संदेश जाए। पत्र में नियमित बाल कटवाने, दाढ़ी ट्रिमिंग, नाखून काटने, शॉवर और इत्र के उपयोग जैसे अच्छे उपायों के बारे में भी कहा गया है।

00 पाकिस्तान शिक्षा विभाग ने दी सफाई

पाकिस्तान शिक्षा विभाग का कहना है कि हमने रिसर्च के दौरान यह पाया है कि पहनावे का असर लोगों के विचार पर उससे कहीं ज्यादा होता है, जितना  समझा जाता है। पहला प्रभाव तो छात्रों के व्यक्तित्व पर ही होता है। हमने यह तय किया है कि महिला शिक्षक अब से जींस या टाइट्स नहीं पहन सकेंगी। पुरुष शिक्षकों के भी जींस और टी-शर्ट पहनने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जा रही है। उन्हें क्लास रूम और लैब्स में टीचिंग गाउन्स या कोट्स पहनना जरूरी होगा।

00 शुरू हुआ विरोध

शिक्षा विभाग के इस फरमान के खिलाफ विरोध की आवाजें उठने लगी हैं । कुछ लोगों का कहना है कि जिस मुल्क का प्रधानमंत्री ही यौन शोषण के लिए महिलाओं के लिबास को दोष देता हो, वहां तो इस तरह के फरमान जारी होने ही थे। लेकिन, उन्हें यह बताना चाहिए कि तीन साल की बच्चियों के साथ होने वाले रेप और मर्डर के लिए कौन से नियम लागू होते हैं।

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इंडोनेशिया के बैंटन प्रांत की जेल में लगी आग, 40 लोगों की मौत

Date : 08-Sep-2021

बैंटन (एजेंसी)। इंडोनेशिया के बैंटन प्रांत की एक जेल में आग लगने से 40 लोगों की मौत हो गई है, कानून और मानवाधिकार मंत्रालय के जेल विभाग की एक प्रवक्ता रीका अपरिंती ने इस घटना की जानकारी देते हुए कहा, ” फिलहाल आग लगने के कारण की जांच की जा रही है. ” उन्होंने कहा कि आग बुधवार तड़के एक से दो बजे के बीच लगी और अधिकारी अभी भी जेल को खाली करा रहे हैं।

दरअसल एक सरकारी प्रवक्ता और मीडिया रिपोर्टों ने कहा कि इंडोनेशिया के बैंटन प्रांत की एक जेल में बुधवार की सुबह एक भीड़भाड़ वाले ब्लॉक में आग लग गई, जिसमें कम से कम 40 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए. रिका अपरिंती ने कहा कि आग तंगेरंग जेल ब्लॉक सी में दोपहर 1 से 2 बजे लगी आग बुझा दी गई थी और अधिकारी अभी भी उस जगह को खाली कर रहे थे।

नशीली दवाओं से संबंधित अपराधियों को रखा गया था

उन्होंने कहा कि घटना वाले ब्लॉक में नशीली दवाओं से संबंधित अपराधियों को रखा गया था और उनकी क्षमता 122 लोगों की थी. हालांकि उसने यह नहीं बताया कि आग लगने के समय घटनास्थल पर कितने लोग मौजूद थे, लेकिन पुष्टि की कि जेल में भीड़भाड़ थी।

जानकारी के अनुसार, एक इमारत के ऊपर से आग की लपटों को बुझाने की कोशिश कर रहे अग्निशामकों के फुटेज दिखाए. प्रसारक ने बताया कि आग की लपेटो में 40 लोग मारे गए थे और 8 गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

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शिक्षा मंत्री नूरल्लाह मुनीर का विवादित बयान, कहा आज के वक्त में पीएचडी या किसी दूसरी मास्टर डिग्री का कोई फायदा नहीं

Date : 08-Sep-2021

काबुल (एजेंसी)। अफगानिस्तान में तालिबान ने अपनी अंतरिम सरकार का एलान कर दिया है। मुल्ला मुहम्मद हसन अखुंद को जहां देश का नया प्रधानमंत्री बनाया गया है, वहीं शेख मौलवी नूरल्लाह मुनीर को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है। इस बीच सरकार गठन के साथ ही तालिबानी फरमान भी आने शुरू हो गए हैं जिसमें नए शिक्षा मंत्री नूरल्लाह मुनीर का विवादित बयान भी शामिल है। मुनीर ने कहा है कि आज के वक्त में पीएचडी या किसी दूसरी मास्टर डिग्री का कोई फायदा नहीं है। मुनीर ने कहा कि हमलोगों के पास कोई डिग्री नहीं है फिर भी हम सरकार चला रहे हैं। ऐसे में आज के वक्त में किसी तरह की पीएचडी या मास्टर डिग्री की जरूरत नहीं है।

00 तालिबान ने शिक्षा के क्षेत्र में शुरू किया भेदभाव

बता दें कि तालिबान ने सत्ता में आने से पहले ही शिक्षा के क्षेत्र में कई बदलाव करने शुरू कर दिए थे। कॉलेज में लड़के-लड़कियों के बीच में पर्दा डाल दिया गया। कई जगहों पर लड़कियों और महिलाओं को सिर्फ बुजुर्ग या महिलाएं ही पढ़ा रही हैं। इसके अलावा तालिबान उन निजी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज पर नकेल कसना शुरू कर दिया है जिसने 2001 में तालिबान के शासन के खत्म होने के बाद आधुनिक शिक्षा पर बल दिया है।

तालिबान ने अपने फरमान में आगे लिखा है कि विश्वविद्यालय को अपनी सुविधाओं के अनुसार छात्राओं के लिए महिला शिक्षकों की भर्ती करने की जरूरत है। अगर ऐसा संभव नहीं है तो उन्हें ऐसे `बुजुर्ग पुरुषों` को नियुक्त करने की कोशिश करनी चाहिए जिनका चरित्र अच्छा हो। महिलाओं को अब पुरुषो से अलग होकर पढ़ना होगा, इसलिए वो पुरुष छात्रों से 5 मिनट पहले अपना काम निपटा लें ताकि उन्हें बाहर पुरुषों का सामना न करना पड़े।

00 जानिए अफगानिस्तान में किसे कौन सा मंत्रालय मिला

अफगानिस्तान में राजनीतिक संकट के बीच तालिबान ने मंगलवार देर शाम नई सरकार का एलान कर दिया। मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार के नए प्रधानमंत्री होगा। इसके अलावा मुल्ला बरादर को उप-प्रधानमंत्री, सिराजुद्दीन हक्कानी को कार्यवाहक गृहमंत्री, मुल्ला याकूब को रक्षा मंत्री और अमीर मुत्तकी को विदेश मंत्री बनाया गया है। खास बात यह है कि इस एलान के बाद तालिबान के सर्वोच्च नेता ने नई सरकार से शरिया कानून बनाए रखने के लिए कहा है।

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भूकंप के तेज झटकों से कांप उठा मेक्सिको, तीव्रता 7.0 के झटके किए गए महसूस

Date : 08-Sep-2021

मेक्सिको (एजेंसी)। भूकंप के तेज झटकों से मंगलवार रात मेक्सिको शहर कांप उठा। झटके इतने तेज थे कि दक्षिणी मेक्सिको शहर की ज्यादातर इमारतें हिलती हुईं दिखाई पड़ीं। इसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। अमेरिकी जियोलॉजिक सर्वे का कहना है कि ग्युरेरो से 11 किलोमीटर दूर अकापुल्को में 7.0 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। 

इससे पहले ग्यूरेरो सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि शुरू में यूएसजीएस की ओर से रिएक्टर स्कूल पर 7.4 की तीव्रता मापी गई थी। इस कारण चट्टानों में दरार आ गई और कई जगह सड़कें धंस गईं। 

तेज भूकंप के झटकों के बाद लोग घरों से बाहर निकलकर सड़क पर आ गए। झटके रुकने के बाद भी लोग काफी देर तक घरों के अंदर नहीं गए। मीडिया सूत्रों के मुताबिक लोग एक दूसरे को पकड़कर खुद को संभालने की कोशिश करते हुए दिखाई दिए। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह भूकंप सतह से 12 किलोमीटर नीचे टकराया। 

00 अब सुनामी का भी खतरा 

7.0 तीव्रता के झटकों के बाद अब मेस्किको में सुनामी का खतरा भी मंडरा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों की ओर से इसको लेकर चेतावनी जारी की गई है और लोंगों को सतर्क रहने को कहा गया है। हालांकि,मेक्सिको सिटी मेयर क्लॉडिया शेनबम का कहना है कि अभी तक किसी भारी नुकसान की जानकारी नहीं मिली है।

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सेना के विद्रोही गुट ने की तख्तापलट की साजिश, राष्ट्रपति लापता

Date : 06-Sep-2021

कोनाक्री (एजेंसी)। दुनियाभर में कई देश अपने निजी संकटों से जूझ रहे हैं। हाल ही में अफगानिस्तान में अशरफ गनी को देश से भगाकर तालिबान ने यहां कब्जा कर लिया और नई सरकार के गठन की तैयारी कर रहा है। वहीं कई मीडिया सूत्रों के मुतबिक अफ्रीकी देश गिनी में तख्तापलट की खबर सामने आई है। वहां के राष्ट्रपति अल्फा कोंडे का कुछ अता-पता नहीं हैं।

गिनी की राजधानी कोनाक्री में राष्ट्रपति भवन के पास सैनिकों द्वारा भारी गोलीबारी की खबर सामने आई है। यहां सेना के विद्रोही गुट ने सरकार को हटाकर तख्तापलट की साजिश की है यहां की सरकार भंग कर दी गई है। साथ ही देश की सीमाओं को भी सील कर दिया गया है।

कोनाक्री शहर में एक पश्चिमी राजनयिक ने इस घटना को तख्तापलट का प्रयास बताया। रविवार सुबह गिनी की राजधानी कोनाक्री में गोलियों की आवाज सुनी गई और सैनिकों को सड़कों पर देखा गया।

गिनी में चल रहे हालिया हालातों पर एक सीनियर पत्रकार जॉयस करम ने अपने ट्वीट कर कहा कि कथित तौर पर गिनी में सैन्य तख्तापलट चल रहा है। राष्ट्रपति अल्फा कोंडे को कथित तौर पर गिरफ्तार किया गया, संविधान को रोका गया, राज्य संस्थानों को भंग किया गया, सार्वजनिक प्रसारण को रोक दिया गया है। साथ ही ट्विटर पर उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया है।

विद्रोही सैनिकों ने अपने कब्जे की घोषणा के बाद देश में लोकतंत्र बहाली का संकल्प व्यक्त किया और खुद को ‘द नेशनल कमेटी ऑफ गैदरिंग एंड डवेलपमेंट’ नाम दिया। रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि हमले को विफल कर दिया गया है, लेकिन जब सरकारी टेलीविजन या रेडियो पर कोंडे की तरफ से कोई संदेश नहीं आया तो अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो गई। बाद में बताया गया कि कोंडे को हिरासत में ले लिया गया है।

कोंडे के तीसरे कार्यकाल को लेकर पिछले कुछ समय से आलोचना हो रही थी। वहीं, कोंडे का कहना था कि उनके मामले में संवैधानिक अवधि की सीमाएं लागू नहीं होतीं। अंततः उन्हें फिर से चुन लिया गया, लेकिन इस कदम ने सड़क पर हिंसक प्रदर्शन भड़का दिए थे।

कोंडे वर्ष 2010 में सबसे पहले राष्ट्रपति चुने गए थे जो 1958 में फ्रांस से आजादी मिलने के बाद देश में पहला लोकतांत्रिक चुनाव था। कई लोगों ने उनके राष्ट्रपति बनने को देश के लिए एक नयी शुरुआत के तौर पर देखा था लेकिन उनके शासन पर भ्रष्टाचार, निरंकुशता के आरोप लगे।

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काबुल में आज होगा सरकार का ऐलान, मुल्ला बरादर को मिलेगी कमान

Date : 04-Sep-2021

काबुल (एजेंसी)। अमेरिकी सेना के जाने के बाद संकट में घिरे अफगानिस्तान में आज तालिबान सरकार का एलान होगा। तालिबान का सह-संस्थापक मुल्ला बरादर इस सरकार का नेतृत्व करेगा। हालांकि नई सरकार का गठन शुक्रवार को होना था, लेकिन इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि नई सरकार के गठन की घोषणा शनिवार को होगी। 

तालिबान सूत्रों ने बताया कि दोहा स्थित तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के चेयरमैन मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को सरकार का प्रमुख बनाने की सार्वजनिक घोषणा जल्द ही होगी। मुल्ला बरादर के साथ तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला मोहम्मद याकूब व शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई की भी सरकार में अहम भूमिका होगी। तालिबान के सूचना व संस्कृति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी मुफ्ती इनामुल्लाह सामंगानी ने कहा कि सभी शीर्ष नेता काबुल पहुंच चुके हैं और नई सरकार का एलान करने की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। सरकार के गठन को लेकर आपसी सहमति बन चुकी है, और अब मंत्रिमंडल को लेकर कुछ आवश्यक बातचीत हो रही है।

00 अखुंदजादा बनाएगा इस्लामिक सरकार का ढांचा

एक वरिष्ठ तालिबान अधिकारी के मुताबिक, संगठन का सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा धार्मिक मामलों और इस्लाम के दायरे में ईरान की तर्ज पर राजव्यवस्था का ढांचा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। मौजूदा जानकारी के मुताबिक नई तालिबानी सरकार में 12 मुस्लिम विद्वानों के सूरा या सलाहकारी परिषद के साथ 25 मंत्री होंगे।

00 छह से आठ महीन में लोया जिरगा बुलाने की योजना 

छह से आठ महीने के भीतर एक लोया जिरगा यानी महासभा बुलाने की भी योजना बनाई जा रही है, जिसमें संविधान और भविष्य की सरकार की संरचना पर चर्चा करने के लिए अफगान समाज के बुजुर्गों और प्रतिनिधियों को एक साथ लाया जाएगा।

एक वरिष्ठ तालिबान अधिकारी के मुताबिक, संगठन का सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा धार्मिक मामलों और इस्लाम के दायरे में ईरान की तर्ज पर राजव्यवस्था का ढांचा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

मौजूदा जानकारी के मुताबिक नई तालिबानी सरकार में 12 मुस्लिम विद्वानों के सूरा या सलाहकारी परिषद के साथ 25 मंत्री होंगे।

छह से आठ महीने के भीतर एक लोया जिरगा यानी महासभा बुलाने की भी योजना बनाई जा रही है, जिसमें संविधान और भविष्य की सरकार की संरचना पर चर्चा करने के लिए अफगान समाज के बुजुर्गों और प्रतिनिधियों को एक साथ लाया जाएगा।

00 जानें कौन है मुल्ला अब्दुल गनी…

1968 में अफगानिस्तान के उरुजगान प्रांत में जन्मा बरादर शुरू से ही धार्मिक रूप से कट्टर था। वह तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर का साला है। बरादर ने 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ लड़ाई लड़ी। 1992 में रूसी सेना को खदेड़ने के बाद अफगानिस्तान देश के प्रतिद्वंद्वी सरदारों के बीच गृहयुद्ध में घिर गया था। बरादर ने अपने पूर्व कमांडर मुल्ला उमर के साथ कंधार में एक मदरसा स्थापित किया था। इसके बाद मुल्ला उमर और मुल्ला बरादर ने तालिबान की स्थापना की।

9/11 हमलों के बाद जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर धावा बोला तब तालिबान के सभी बड़े नेताओं को पाकिस्तान में पनाह मिली थी। इन नेताओं में मुल्ला उमर और अब्दुल गनी बरादर भी शामिल थे। बताया जाता है कि बरादर को पाकिस्तान ने फरवरी 2010 में पाकिस्तान के कराची में गिरफ्तार किया था। हालांकि, इसका खुलासा करीब एक हफ्ते बाद किया गया था। इसके बाद बरादर को अक्टूबर 2018 तक पाकिस्तान की जेल में रखा गया और बाद में अमेरिका के दखल पर उसे छोड़ दिया गया।

00 काबुल में अफगान महिलाओं ने किया प्रदर्शन

अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार में भागीदारी मांगने के लिए अफगान महिलाओं के एक समूह ने शुक्रवार को राजधानी काबुल में प्रदर्शन किया। सीएनएन के मुताबिक, वुमंस पॉलीटिक्ल पार्टिसिपेशन नेटवर्क नामक इस समूह ने अफगानिस्तान वित्त मंत्रालय के बाहर सड़कों पर हाथों में बैनर लेकर नारे लगाते हुए पैदल मार्च निकाला। मार्च में शामिल महिलाओं ने देश में अपने लिए निर्णय लेने वाली राजनीतिक भूमिका दिए जाने की मांग की। 

00 भारत अपने पत्ते नहीं खोल रहा

तालिबान से औपचारिक बातचीत के बावजूद अफगानिस्तान की नई सरकार के मामले में भारत अपने पत्ते नहीं खोल रहा। तालिबान में कई गुटों के कारण भारत फैसला नहीं ले पा रहा। नई सरकार में मुल्ला बरादर गुट हावी रहा, तो भारत अफगानिस्तान से बातचीत की प्रक्रिया शुरू करेगा, लेकिन हक्कानी गुट प्रभावी रहा तो जांच-परख के बाद फैसला होगा।

विदेश मंत्रालय ने कहा था कि दोहा बैठक को सरकार को मान्यता और बातचीत से नहीं जोड़ना चाहिए। हक्कानी गुट अधिक कट्टर है व उसके पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और अलकायदा से गहरे रिश्ते हैं। हक्कानी अपनी शर्तों पर भारत से रिश्ते चाहता है। इसके एजेंडे में कश्मीर भी है।

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तालिबान में दोपहर की नमाज के बाद की जाएगी नए प्रशासन की घोषणा

Date : 03-Sep-2021

काबुल (एजेंसी)। अमेरिकी सेना के कब्जे से मुक्त होने के बाद अफगानिस्तान में अब तालिबान प्रशासन नई सरकार की घोषणा करने तैयारी कर रहा है। सोशल मीडिया पर तालिबान के एक अधिकारी अहमदुल्ला मोत्ताकी ने कहा कि आज काबुल के प्रेसिडेंशियल पैलेस में एक समारोह आयोजित किया जा रहा है।

पंजशीर प्रांत को छोड़कर अफगानिस्तान के लगभग सभी हिस्सों पर कब्जा करने के बाद, तालिबान ने दुनिया के सामने खुद को एक उदारवादी व्यक्ति के रूप में पेश करने की कोशिश की है। तालिबान के सूत्रों ने एएफपी को बताया कि एक नए प्रशासन की घोषणा शुक्रवार दोपहर की नमाज के बाद की जा सकती है। नए शासकों ने 1996 से 2001 तक सत्ता में अपने पहले कार्यकाल की तुलना में अधिक मिलनसार होने का वादा किया है। अब, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तालिबान युद्धग्रस्त अर्थव्यवस्था का प्रबंधन करने में सक्षम कैबिनेट प्रदान कर सकता है और अधिक `समावेशी` सरकार के आंदोलन के वादों का सम्मान कर सकता है।

तालिबान के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार तड़के ट्वीट किया कि चीन के विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान में अपने दूतावास को खुला रखने और संबंधों और मानवीय सहायता को `सुदृढ़` करने का वादा किया है।

वेस्टर्न यूनियन और मनीग्राम ने कहा कि वे धन ट्रांसफर फिर से शुरू कर रहे हैं, जिस पर कई अफगान जीवित रहने के लिए विदेशों में रिश्तेदारों से भरोसा करते हैं। कतर ने कहा कि यह काबुल में हवाई अड्डे को फिर से खोलने के लिए काम कर रहा है।

समूह ने मानवाधिकारों का सम्मान करने और अपने विरोधियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने से परहेज करने की कसम खाई है, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य ने संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा तालिबान के नेतृत्व वाली नई सरकार की मान्यता समूह के प्रदर्शन पर निर्भर करती है।

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न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी सहित कई राज्यों में इडा तूफान का कहर, भारी बारिश.बाढ़ में 40 लोगों की मौत

Date : 03-Sep-2021

न्यूयॉर्क (एजेंसी)। अमेरिका के न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी सहित कई राज्यों में इडा तूफान ने कहर मचाया हुआ है। इस तूफान में अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई। दोनों ही जगहों पर आपातकाल की घोषणा की गई है। वहीं तूफान और अधिक खतरनाक होते हुए न्यू इंग्लैंड की तरफ बढ़ गया है।

न्यूयॉर्क शहर में पुलिस ने सात लोगों की मौत की पुष्टि की है जबकि न्यूजर्सी में एक व्यक्ति की मौत हुई है। न्यूयॉर्क एफडीआर ड्राइव, मैनहट्टन के पूर्व की ओर एक बड़े हिस्से और ब्रोंक्स नदी पार्कवे बुधवार देर शाम तक पानी में डूबे थे। सबवे स्टेशनों और रास्तों पर पानी भरने से मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी को सभी सेवाओं को निलंबित करना पड़ा।

न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय मौसम सेवा कार्यालय ने बुधवार रात बाढ़ को लेकर अचानक आपात स्थिति की पहली चेतावनी जारी की थी। यह चेतावनी विशेष परिस्थितियों में तब जारी की जाती है, जब बाढ़ से विनाशकारी क्षति हो रही हो या फिर होने वाली हो। बारिश की वजह से न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी दोनों ही जगह कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। मूसलाधार बारिश के कारण बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसकी वजह से हजारों लोग घरों में बिजली से वंचित हैं।

तूफान और बारिश की वजह से न्यूजर्सी के सभी 21 काउंटियों में आपातकाल की स्थिति की घोषणा की हई है। लोगों को चेतावनी जारी कर बाढ़ वाली सड़कों से दूर रहने का आग्रह किया गया है। मौसम विज्ञानियों ने बाढ़ के और विकराल होने की चेतावनी जारी की है।

अमेरिका में इडा चक्रवात का कहर अभी थमा नहीं है। सोमवार को लुइसियाना के तट से टकराने के बाद यहां के तटीय क्षेत्रों में हवाओं की रफ्तार 241 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच गई थीं। इसे अमेरिका के सबसे ताकतवर तूफानों में से एक माना गया था। इसकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चक्रवात के कमजोर पड़ने के दो दिन बाद भी अमेरिका के कई शहरों में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। आलम यह है कि न्यूयॉर्क, मिसिसिप्पी, अलाबामा और फ्लोरिडा जैसे राज्यों में तो सड़कों पर ही तालाब बन गए हैं और लोगों को बचाने के लिए राहत-बचावकर्मी नाव लेकर निकले हैं।

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वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी, भविष्य में एक ऐसा भयावह सौर तूफान आएगा, जिससे धरती पर इंटरनेट आ सकता है प्रलय

Date : 02-Sep-2021

न्यूयॉर्क (एजेंसी)। वैज्ञानिकों ने हाल ही में चेतावनी दी है कि भविष्य में एक ऐसा भयावह सौर तूफान आएगा, जिससे धरती पर इंटरनेट प्रलय आ सकता है।सौर तूफान यानी सूरज से निकलने वाला कोरोनल मास. यह बेहद खतरनाक और नुकसानदेह होता है। यानी पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो सकता है या फिर कई दिनों तक बाधित हो सकता है।

यह स्टडी की है यूनिवर्सिटी आॅफ कैलिफोर्निया की शोधकर्ता संगीता अब्दू ज्योति ने। उन्होंने पिछले हफ्ते हुए सिगकॉम 2021 डेटा कम्यूनिकेशन कॉन्फ्रेंस में अपनी स्टडी वैज्ञानिकों को दिखाई थी।

संगीता की रिसर्च के मुताबिक स्थानीय स्तर के इंटरनेट प्रणाली पर कम असर होगा क्योंकि वो ज्यादातर फाइबर आॅप्टिक्स पर चलते हैं। फाइबर आॅप्टिक्स पर जियोमैग्नेटिक करेंट का सीधा असर नहीं होता। लेकिन दुनिया भर के समुद्रों में फैली इंटरनेट केबल पर इसका असर पड़ सकता है।

ये केबल दुनिया के अलग-अलग देशों को आपस में जोड़ते हैं। कई देश इन केबल को अपने फाइबर आॅप्टिक्स से जोड़ते हैं, यानी सौर तूफान आने पर समुद्री इंटरनेट केबल के जरिए फाइबर आॅप्टिक्स पर भी असर पड़ेगा।

संगीता कहती हैं कि इसकी सबसे बड़ी वजह है सौर तूफान को लेकर हमारी जानकारी की कमी और पर्याप्त डेटा का न होना। सौर तूफान जब आते हैं तब वो इलेक्ट्रिकल ग्रिड्स को नुकसान पहुंचा देते हैं।

जिसकी वजह से बड़े इलाकों में अंधेरा हो जाता है। लेकिन इनका असर इंटरनेट प्रणाली पर भी पड़ता है। अगर इस प्रणाली को सौर तूफान की वजह से चोट पहुंचती है तो दुनिया भर में इंटरनेट बंद हो सकता है या फिर कई दिनों तक बाधित भी हो सकता है।

संगीता ने बताया कि समुद्री इंटरनेट केबल में करेंट के बहाव को बनाए रखने के लिए रिपीटर्स लगे होते हैं, जो सौर तूफान के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं। यानी सौर तूफान आने पर इन रिपीटर्स की हालत खराब हो सकती है. ये फेल भी हो सकते हैं। यानी केबल में बहाव खत्म होते ही इंटरनेट की सप्लाई दुनियाभर में रुक जाएगी। इंटरनेट नेटवर्क आॅफलाइन हो जाएगा।

अगर इंटरनेट बंद होता है तो कई ऐसे देश हैं जिनकी पूरी की पूरी अर्थव्यवस्था, संचार प्रणाली, डिफेंस आदि सेक्टर थम सकते हैं। संगीता ने कहा कि हम इसके बारे में इसलिए ज्यादा गंभीर हैं क्योंकि हम कोरोना महामारी के लिए तैयार नहीं थे। उसने पूरी दुनिया को खस्ताहाल कर दिया। ठीक इसी तरह हम सौर तूफान और उससे पड़ने वाले असर को लेकर तैयार नहीं हैं। साथ ही हमें उसके असर की कोई जानकारी भी नहीं है।

संगीता ज्योति कहती हैं कि अगर बड़े भयावह स्तर का सौर तूफान आता है तो उसके लिए एकदम तैयार नहीं है। जिस दिन पूरी दुनिया का इंटरनेट या कुछ देशों का इंटरनेट भी बंद हुआ तो उससे पूरी दुनिया पर असर पड़ेगा। हम वो झटका बर्दाश्त ही नहीं कर पाएंगे. कई देशों की इकोनॉमी मुंह के बल नीचे गिर पड़ेगी। इससे होने वाले नुकसान का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है

संगीता बताती हैं कि सबसे बड़ा डर ये है कि हमारे पास सौर तूफान और उससे पड़ने वाले असर को लेकर डेटा बहुत कम है। इसलिए हम ये अंदाजा नहीं लगा सकते कि नुकसान कितना बड़ा होगा। दुनिया में सबसे भयावह सौर तूफान 1859, 1921 और 1989 में आए थे। इनकी वजह से कई देशों में बिजली सप्लाई बाधित हुई थी। ग्रिड्स फेल हो गए थे। कई राज्य घंटों तक अंधेरे में थे।

1859 में इलेक्ट्रिकल ग्रिड्स नहीं थे, इसलिए उनपर असर नहीं हुआ लेकिन कम्पास का नीडल लगातार कई घंटों तक घूमता रहा था। जिसकी वजह से समुद्री यातायात बाधित हो गई थी. उत्तरी ध्रुव पर दिखने वाली नॉर्दन लाइट्स यानी अरोरा बोरियेलिस को इक्वेटर लाइन पर मौजूद कोलंबिया के आसमान में बनते देखा गया था। नॉर्दन लाइट्स हमेशा ध्रुवों पर ही बनता है।

1989 में आए सौर तूफान की वजह से उत्तर-पूर्व कनाडा के क्यूबेक में स्थित हाइड्रो पावर ग्रिड फेल हो गया था। आधे देश में 9 घंटे तक अंधेरा कायम था। कहीं बिजली नहीं थी। पिछले दो दशकों से सौर तूफान नहीं आया है। सूरज की गतिविधि काफी कमजोर है। इसका मतलब ये नहीं है कि सौर तूफान आ नहीं सकता। ऐसा लगता है कि सूरज की शांति किसी बड़े सौर तूफान से पहले का सन्नाटा है।

संगीता ने बताया कि फिलहाल हमारे पास या दुनिया के किसी भी वैज्ञानिक के पास सौर तूफान को मापने या उससे होने वाले असर की भविष्यवाणी करने वाली कोई प्रणाली या मॉडल नहीं है। हमें नहीं पता कि कोई भयावह सौर तूफान आता है तो इसका हमारे पावर ग्रिड्स, इंटनरेटन प्रणाली, नेविगेशन और सैटेलाइट्स पर क्या और कितना असर पड़ेगा। अगर एक बार फिर इंटरनेट प्रणाली बंद हुई तो उसे रीस्टार्ट करने या रीरूट करने में अरबों रुपयों का नुकसान हो जाएगा।

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कोविड सेंटर में खुलेआम होता है ग्रुप सेक्स, सीसी टीवी से हुआ खुलासा

Date : 31-Aug-2021

बैंकाक (एजेंसी)। देश में कोरोना मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने के लिए कोविड सेंटर बनाए गए है। लेकिन इसका दुरुपयोग करते नजर आ रहे है। ऐसा ही मामला थाइलैंड से सामने आया है। जहां एक कोरोना अस्पताल में कुछ पेशेंट्स के ड्रग्स (Drugs) लेने और अस्पताल के बेड पर ग्रुप सेक्स करने की खबरें सामने आ रही हैं।

CCTV से हुआ खुलासा

रिपोर्ट के अनुसार, अस्पतालों में अय्याशी की इस खबर से अधिकारी भी सतके में हैं। पेशेंट्स की इस हरकत को रोकने के लिए जगह-जगह कोविड अस्पतालों में रेड मारी जा रही है। हाल ही में थाईलैंड के इंटरनल सिक्योरिटी ऑपेरशन कमांड ऑफिसर्स ने PPE किट पहन कर कई सेंटर्स पर छापा मारा है। इस दौरान सेंटर में मौजूद करीब 1000 पेशेंट्स से पूछताछ भी की गई। लेकिन सेंटर से ड्रग्स नहीं मिला। हालांकि, काफी मात्रा में सिगरेट और हुक्का मिला, जो वहां प्रतिबंधित है। टीम ने हॉस्पिटल के CCTV कैमरे भी खंगाले जिसमे मेल-फीमेल मरीजों को एक-दूसरे के वार्ड में जाते देखा गया।

खुलेआम हो रही है अय्याशी

सेंट्रल थाईलैंड में कोविड के पीक दौर में कई इमरजेंसी सेंटर्स बनाए गए थे। उस समय यहां मरीजों का इलाज किया जाता था। लेकिन कोरोना केस कम होते ही इन सेंटर्स में इलाज की जगह अय्याशी करने के मामले सामने आ रहे हैं। यहां सेंट्रल थाईलैंड के कोविड सेंटर्स में मरीज सेक्स और ड्रग्स लेते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा पेशेंट्स के बीच लड़ाइयां तक होने की खबरें सामने आ रही हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें बैंकाक के डॉन मुआंग एयरपोर्ट के वेयरहाउस में बनाए गए 1800 बेड वाले अस्पताल से सामने आ रही हैं। हालांकि अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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