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एक बूढ़ी मां को घर से बाहर निकाला भाजपा नेता, दर दर भटकने को मजबूर

Date : 14-Jun-2021

हमीरपुर (एजेंसी)। यूपी के हमीरपुर जिले के एक भाजपा नेता ने अपनी बूढ़ी मां को घर से निकाल दिया, इसके बाद उनकी बूढ़ी मां वृंदावन में दर दर भटकती रही, जब उनके बारे में एक भक्ति चैनल को पता चला तो उन्होंने बूढ़ी मां की कहानी सबको सुनाने का फैसला किया, इसके बाद भक्ति चैनल के कथा वाचक ने मां के दर्द को लाइव दिखाया।

मिली जानकारी के अनुसार बुजुर्ग महिला के बेटे का नाम प्रमोद अग्रवाल है, वह भाजपा नेता मंडल अध्यक्ष है, वे तीन भाई हैं और सम्पन्न हैं, फिर भी तीनों बेटों ने अपनी बूढ़ी मां को घर में नहीं रखा, नतीजा यह निकला कि बूढ़ी मां वृंदावन में भटक रही है।

एक भक्ति चैनल के कथा वाचक ने बीजेपी नेता की बूढ़ी मां के दर्द की दास्तां सुनाई, जिसे सुनकर लोग हैरान गए, कथा वाचक ने बताया कि किस तरह उस बूढ़ी मां के बेटों ने उसे वृंदावन के वृद्ध आश्रम में भटकने के लिए छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि न सिर्फ तीनों बेटों ने उनको घर से निकाला बल्कि उन्होंने अपनी बूढ़ी मां के साथ मारपीट करने की कोशिश भी की, अब यह मां दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर है।

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राजिम में बड़ी सड़क दुर्घटना, हादसे में 5 लोगों की मौके पर मौत, वहीं 7 लोग घायल

Date : 13-Jun-2021

रायपुर। राजधानी रायपुर से लगे राजिम इलाके में बड़ी सड़क दुर्घटना सामने आ रही है, हादसे में 5 लोगों की मौके पर मौत हो गयी वहीं 7 लोग घायल बताये जा रहे हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक रायपुर से गरियाबंद जा रही तेज रफ्तार ईको स्पोर्ट्स कार राजिम के कोपरा बस्ती के पास पेड़ से टकरा गई। घटना में कार में सवार 5 महिलाओं की मौके पर मौत हो गई। जबकि 7 लोगो को गंभीर चोटें आई है। 6 गंभीर घायलों को रायपुर के मेकाहारा रेफर किया गया हैं।

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केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की हुई बैठक, ब्लैक फंगस की दवाओं पर कोई भी टैक्स न लेने का लिया गया फैसला

Date : 13-Jun-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में शनिवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई। बैठक में जीएसटी काउंसिल ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैठक में ब्लैक फंगस की दवाओं पर कोई भी टैक्स न लेने का फैसला लिया गया है। बैठक में कोविड की वैक्सीन पर 5 फीसदी जीएसटी को जारी रखने का फैसला किया गया है।

इसके अलावा कोरोना से जुड़ी दवाओं समेत अन्य उपकरणों जैसे मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन, बीआईपीएपी मशीनों, ऑक्सीजन कन्सनट्रेटर, वेंटिलेटर, पल्स ऑक्सीमीटर पर टैक्स की दर 12 से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है। हैंड सेनेटाइजर पर जीएसटी 18 फीसदी से कम होकर 5 फीसदी कर दिया गया है। रेमडेसिविर और हेपारिन पर जीएसटी की दर 12 से घटाकर 5 फीसदी की गई है।

कोविड जांच किट पर अब 5 फीसदी टैक्स देना होगा। अभी तक इस पर 12 प्रतिशत टैक्स लगता था। वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि काउंसिल ने एंबुलेंस पर जीएसटी की दर को 28 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी करने का फैसला किया है।
ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं टोसिलुजुमैबऔर एम्फोथ्रेसिन-बी पर जीएसटी न लेने का फैसला किया है, इसके साथ ही जीएसटी काउंसिल ने ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की सिफारिशों को मंजूरी दी है।

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि ब्लैक फंगस और कोरोना इलाज से जुड़े उपकरण और दवाइयों पर जीएसटी दर को तर्कसंगत बनाने को लेकर GoM की सिफारिशों को जीएसटी काउंसिल ने स्वीकार कर लिया है। वित्त मंत्री ने कहा कि बैठक में लिए गए फ़ैसले 30 सितंबर तक मान्य रहेंगे।

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कोरोना काल में भी राज्य में पकडी विकास कार्य में गति, चार दिनों में ही आठ जिलों को मिले 2660 करोड़ की सौगात

Date : 12-Jun-2021

रायपुर। कोरोना संक्रमितों की संख्या राज्य में घटने के साथ विकास कार्यों को प्रदेश में एक बार फिर गति मिल गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महज चार दिनों में ही आठ जिलों को 2660 करोड़ रुपए की सौगात देने के साथ 3433 नए विकास कार्यों का लोकार्पण तथा भूमिपूजन किया है। नये कार्यों के लोकार्पण तथा भूमिपूजन से जहां जिलों में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, वहीं निर्माण कार्यों से रोजगार की नई संभावनाएं बनने के साथ राज्य की प्रगति सुनिश्चित हो रही है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कोरोनाकाल में भी प्रदेश के लोगों से लगातार संवाद बनाए हुए हैं और प्रदेशवासियों को विकास कार्यों की सौगात दे रहे हैं। बीते चार दिनों में मुख्यमंत्री श्री बघेल ने राज्य के आठ जिलों को 2660 करोड़ रूपए की सौगात दिया है। इसी कड़ी में उन्होंने दुर्ग, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, गरियाबंद, कबीरधाम, राजनांदगांव और धमतरी में जनसुविधा के विकास और निर्माण से कुल 3433 कार्यों का वर्चुअल लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया है। मुख्यमंत्री श्री बघेल जिलों में विकास एवं निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करने के साथ-साथ उस जिलों के लोगों के बीच संवाद भी स्थापित कर रहे हैं। वे शासन की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों से जुड़कर लाभ उठाने वाले हितग्राहियों, किसानों, ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों और विभिन्न श्रेणी के हितग्राहियों के चर्चा भी कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने 8 जून को दुर्ग और बालोद जिले को 685 करोड़ रूपए की लागत वाले 244 कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया, जिसमें दुर्ग जिले में 285.87 करोड़ की लागत वाले 57 कार्यों और बालोद जिले में 399.32 करोड़ रूपए की लागत वाले 187 विकास एवं निर्माण कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने 9 जून को अपने निवास कार्यालय में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में बलौदाबाजार-भाटापारा और महासमुन्द जिले में लगभग 565 करोड़ रूपए की लागत के 1430 कार्योें का लोकार्पण और भूमिपूजन किया है, जिसमें बलौदाबाजार जिले के लिए 295 करोड़ रूपए की लागत के 1172 कार्यों का और महासमुन्द जिले के लिए 270 करोड़ रूपए की लागत के 258 कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन शामिल है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 10 जून को गरियाबंद और कबीरधाम जिले में 581 करोड़ 97 लाख रूपए की लागत के 1270 कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन किया, जिसमें गरियाबंद जिले में 176 करोड़ 94 लाख रूपए के 211 कार्यों का लोकार्पण और 180 करोड़ 29 लाख रूपए के 305 कार्यों का भूमिपूजन और कबीरधाम जिले में 98 करोड़ 73 लाख रूपए के 415 कार्यों का लोकार्पण और 126 करोड़ एक लाख रूपए के 339 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 11 जून को राजनांदगांव और धमतरी जिले को लगभग 828 करोड़ 37 लाख रूपए की लागत के 462 कार्यों की सौगात दिया। श्री बघेल ने राजनांदगांव जिले में 556 करोड़ 86 लाख रूपए की लागत के 192 विभिन्न निर्माण कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया।

जिनमें 231 करोड़ 18 लाख रूपए की लागत से 135 कार्यों का शिलान्यास तथा 325 करोड़ 68 लाख 20 हजार रूपए की लागत के 57 कार्यों का लोकार्पण हुआ। मुख्यमंत्री ने धमतरी जिले में 271 करोड़ 51 लाख रूपए की लागत के 270 कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें से 115 करोड़ 77 लाख रूपए की लागत के 146 कार्यों का लोकार्पण और 155 करोड़ 74 लाख रूपए की लागत के 124 कार्यों का शिलान्यास का कार्य शामिल है।

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केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य को दिया 1909 करोड़ का अनुदान

Date : 12-Jun-2021

रायपुर। हर घर में नल से शुद्ध पेय जल पहुँचाने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को ‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत 2021-22 के लिए अनुदान की राशि बढ़ा कर 1,908.96 करोड़ रुपये कर दी है। पिछले वर्ष केन्द्रीय अनुदान की यह राशि 445.52 करोड़ रुपये थी। राष्ट्रीय जल जीवन मिशन, जल शक्ति मंत्रालय, ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 453.71 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी भी कर दी है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, गजेन्द्र सिंह शेखावत ने राज्य के आवंटन में चार गुना वृद्धि को मंजूरी प्रदान करते हुए छत्तीसगढ़ को भरोसा दिया है कि राज्य में प्रत्येक ग्रामीण घर में 2023 तक नल से शुद्ध पेय जल पहुंचाने के लिए उसे हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

2019 में ‘जल जीवन मिशन’ के शुभारंभ के समय देश में कुल मौजूद 19.20 करोड़ ग्रामीण घरों में से केवल 3.23 करोड़ घरों, यानि मात्र 17% के यहाँ घरेलू नल कनेक्शन था। और, उसके बाद के 21 महीनों के दौरान - कोविड-19 महामारी की विभीषिका और उसके कारण लगे अनेक लॉकडाउन के बावजूद - ‘जल जीवन मिशन’ ने पूरी निष्ठा, समर्पण और कार्यकुशलता से काम करते हुए सवा चार करोड़ नए घरों तक नल से शुद्ध जल पहुंचाया है। यानि इन 21 महीनों में 22% प्रगति हासिल की गयी जिसके फलस्वरूप आज देश के ग्रामीण इलाकों के 7.50 करोड़ घरों में (अर्थात 39%) पीने के साफ पानी की सप्लाई नल से होने लग गयी है। गोवा, तेलंगाना, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और पुदुचेरी ने अपने यहाँ के सभी ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन पहुंचा कर 100% कामयाबी हासिल कर ली है और वे ‘हर घर जल’ प्रदेश बन गए हैं। प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ सिद्धान्त में अंतर्निहित मूल भावना के ही अनुरूप ‘जल जीवन मिशन’ का भी संकल्प है कि ‘कोई भी छूटे ना’ और हर गाँव के हर घर में नल से जल उपलब्ध कराया जाए। आज देश के 62 जिलों और 92 हज़ार से ज़्यादा गावों में हर घर में नल से पेय जल मिल रहा है।

छत्‍तीसगढ़ में 19,684 गावों में रह रहे कुल 45.48 लाख परिवारों में से केवल 5.69 लाख ग्रामीण परिवारों (12.51%) को ही नल से जल की आपूर्ति हो पा रही है। 15 अगस्त 2019 को ‘जल जीवन मिशन’ के शुभारंभ के समय राज्य में 3.19 लाख ग्रामीण घरों (7.03%) में ही नल जल कनेक्शन था। और, इन 21 महीनों के दौरान भी छत्तीसगढ़ में केवल 2.49 लाख (5.49%) ग्रामीण घरों तक ही नए नल जल कनेक्शन पहुंचाए जा सके- जो धीमी गति के मामले में पूरे देश में दूसरे नंबर पर है। राज्य को ‘हर घर जल’ बनने के लिए अभी शेष 39.78 ग्रामीण घरों में नल जल कनेक्शन पहुंचाना बाकी है। छत्तीसगढ़ के 5,530 गावों में नल जल कनेक्शन देने के लिए तो अब तक जल आपूर्ति संबंधी कार्य भी शुरू नहीं हुए हैं। ‘हर घर जल’ बनने के लिए राज्य ने 2021-22 के दौरान 22.14 लाख घरों में नल जल कनेक्शन देने की योजना बनाई है, जबकि 2022-23 में 11.37 लाख घरों को तथा 2023-24 में शेष बचे 6.29 लाख घरों तक नल कनेक्शन से पीने का पानी पहुंचाया जाएगा।

पिछले वित्त वर्ष के दौरान छत्तीसगढ़ ‘जल जीवन मिशन’ के तहत केवल 1.51 लाख नल जल कनेक्शन ही उपलब्ध करा पाया था। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, गजेन्द्र सिंह शेखावत ने इस सिलसिले में राज्य के मुख्य मंत्री को पत्र कर छत्तीसगढ़ से आग्रह किया है कि ग्रामीण घरों में नल जल कनेक्शन देने के काम में तेज़ी लायी जाए तथा इस दिशा में हर गाँव में कार्य शुरू कर दिया जाए ताकि राज्य 2023 तक ‘हर घर जल’ बन जाए।

2020-21 के दौरान छत्तीसगढ़ को ‘जल जीवन मिशन’ के तहत केन्द्रीय अनुदान के रूप में 445.52 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन कार्यान्वयन की धीमी रफ्तार के कारण राज्य केवल 334.14 करोड़ रुपये ही आहरित कर पाया, जिस कारण उसे गाँव-देहात की जल आपूर्ति जैसे जनसेवी कार्य के लिए दिए गए 111.48 करोड़ रुपये लौटाने पड़े। छत्तीसगढ़ के लिए केंद्रीय आवंटन (1,908.96 करोड़ रुपये) में इस वित्त वर्ष में हुई इस चार गुना वृद्धि, पिछले वित्त वर्ष के अंत में खर्च न हो पाए 168.52 करोड़ रुपये की राशि और राज्य के समतुल्य अंश के रूप में दी गई राशि में 113.04 करोड़ रुपये की कमी वाली राशि के साथ मौजूदा वित्त वर्ष के लिए राज्य के समतुल्य अंश की राशि को जोड़ कर राज्य के पास ‘जल जीवन मिशन’ से जुड़े कार्यों के लिए 2021-22 में समग्र रूप से 4,268 रुपये पक्के तौर पर उपलब्ध हैं। यानि, ‘हर घर जल’ के लिए धन की कोई कमी नहीं है। गजेन्द्र सिंह शेखावत ने उम्मीद जताई है कि छत्तीसगढ़ सरकार इस विशाल धनराशि का भरपूर उपयोग कर राज्य के प्रत्येक ग्रामीण घर में नल जल कनेक्शन सुनिश्चित कर पाएगी।

इसके अलावा, 15वें वित्‍त आयोग के तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों/ पंचायती राज संस्‍थाओं को जलापूर्ति एवं स्‍वच्‍छता के लिए दी जाने वाली राशि के रूप में छत्तीसगढ़ को 2021-22 में 646 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके फलस्वरूप, राज्य को अगले पांच वर्षों यानी 2025-26 तक 3,402 करोड़ रुपये का पक्का आश्वासन है। राज्य के ग्रामीण इलाकों में इस विशाल राशि के निवेश से निश्चित तौर पर रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई तेज़ी और मजबूती आएगी।

स्कूलों, आंगनवाड़ी केन्द्रों और आश्रमशालाओं में बच्चों के लिए शुद्ध पेय जल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सौ दिन के विशेष अभियान की घोषणा की थी, जिसका शुभारंभ केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत तथा राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने 2 अक्तूबर 2020 को किया था। इसके परिणामस्वरूप अनेक राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों: हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, आंध्र प्रदेश, गोवा, तमिल नाडु, तेलंगाना तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह ने स्कूलों, आंगनवाड़ी केन्द्रों और आश्रमशालाओं में भी नल से शुद्ध पेय जल उपलब्ध करने का प्रावधान किया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, गजेन्द्र सिंह शेखावत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि छत्तीसगढ़ में केवल 11,521 स्कूलों (25%) और 4,810 आंगनवाड़ी केन्द्रों (10%) में ही नल से पेय जल की व्यवस्था है। उन्होने राज्य का आह्वान किया है कि अगले कुछ महीनों में सभी शेष स्कूलों, आंगनवाड़ी केन्द्रों और आश्रमशालाओं में भी नल से पेय जल पहुंचाया जाए ताकि बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छ माहौल उपलब्ध कराया जा सके।

‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत राज्यों को जल संकटग्रस्त/ सूखाप्रभावित क्षेत्रों, जल गुणवत्ता प्रभावित गांवों, आकांक्षी जिलों, अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों, सांसद आदर्श ग्राम योजना गांवों, आदि को प्राथमिकता प्रदान करनी होती है।

इसी प्रकार, जल-गुणवत्ता निगरानी तथा पर्यवेक्षण से जुड़ी गतिविधियों को प्राथमिकता देना भी जरूरी है, जैसे कि प्रत्येक गांव में 5 महिलाओं को प्रशिक्षित करना, पेयजल-स्रोत की जांच करवाना, नियमित स्वच्छता सर्वेक्षण करवाना, जल-जांच प्रयोगशालाओं को आम जनता के लिए खोलना, जल-जांच प्रयोगशालाओं को और बेहतर बनाना, आदि। छत्तीसगढ़ में मौजूद 68 जल जांच प्रयोगशालाओं में से केवल 3 ही एनएबीएल से प्रमाणीकृत हैं। राज्य को शेष प्रयोगशालाओं को भी और बेहतर बनाना होगा तथा ज़्यादा से ज़्यादा प्रयोगशालाओं को एनएबीएल प्रमाणीकरण दिलाने का प्रयास करना होगा।

‘जल जीवन मिशन’ अपनी कार्यप्रणाली में विकास के ‘नीचे से ऊपर की ओर’ के दृष्टिकोण को अपनाए हुये है, जिसमें स्थानीय लोगों को समूची प्रक्रिया के प्रारम्भ से ही साझीदार के रूप में शामिल किया जाता है। इसे हासिल करने के लिए राज्य सरकार को कुछ और सहयोग गतिविधियां भी चलानी होंगी जैसे कि ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति/ पानी समिति को सुदृढ़ और अधिकारसमपन्न बनाना, अगले पाँच वर्षों के लिए ग्राम कार्य योजना बनाना तथा स्वयंसेवी संस्थाओं को ‘कार्यान्वयन सहयोग एजेंसियों’ (आई.एस.ए.) के रूप में शामिल करना ताकि वे सामुदायिक जागृति पैदा करने, ग्रामीणों के प्रशिक्षण और आईईसी गतिविधियों, आदि में मदद कर सकें। छत्तीसगढ़ में गावों की विशाल संख्या के मद्देनजर उसे 2021-22 के लिए निर्धारित 14 की बजाय और ज़्यादा संख्या में कार्यान्वयन सहयोग एजेंसियां शामिल करनी होंगी। ग्रामीण लोगों को इस प्रकार से सहयोग प्रदान करना और उनकी क्षमता में वृद्धि करना हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए चलाई जा रही जल आपूर्ति प्रणाली को लंबे समय तक चलाने तथा उनके प्रचालन और रखरखाव के लिए निर्णायक साबित होती हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2019 को लाल किले की प्राचीर से घोषित ‘जल जीवन मिशन’ का लक्ष्य देश के सभी ग्रामीण घरों को 2024 तक नल के जरिये शुद्ध पेय जल उपलब्ध कराना है। इस मिशन को राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों की साझेदारी में चलाया जा रहा है। ‘जल जीवन मिशन’ के लिए इस वित्त वर्ष में 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि उपलब्ध है (केंद्रीय अनुदान के 50,011 करोड़ रुपये, राज्यों का समतुल्य अंश, तथा 15वें वित्त आयोग के तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों/ पंचायती राज संस्थाओं को जल एवं स्वच्छता कार्यों के लिए निर्धारित 26,940 करोड़ रुपये) जो गाँव-देहात की पेय जल आपूर्ति परियोजनाओं पर खर्च की जानी है। निश्चित तौर पर इस विशाल धनराशि से देश के ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, और गाँव-देहात की अर्थव्यवस्था को नई शक्ति, नई ऊंचाई हासिल हो रही है।

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वैक्सीनेशन शेड्यूल में बड़ा बदलाव, दो डोज के बीच गैप का अंतर रखा जाएगा अब कितना

Date : 11-Jun-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। कोरोना वैक्सीनेशन के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। वैक्सीनेशन शेड्यूल में बड़ा बदलाव कया गया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने वैक्सीनेशन शेड्यूल फिर से एक बार जारी किया है। जारी शेड्यूल में पहले व दूसरे डोज के बीच का गेप 84 दिन या 12 से 16 करने का निर्णय लिया गया है। दो डोज का गैप सिर्फ कोवीशील्ड के लिए घटाया गया है। कोवैक्सिन के दो डोज का गैप 28 दिन था। उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

यह अब तक का कोवीशील्ड के डोज के गैप में तीसरा बदलाव है। इसके पहले 16 जनवरी को देशभर शुरू हुआ तो 28-42 दन का गैप रखा गया था। 22 मार्च को कोवीशील्ड के डोज के अंतर 4-6 हफ्ते से बढ़ाकर 6-8 हफ्ते किया गया। फिर 13 मई को यह गैप बढ़ाकर 12-16 हफ्ते कर दिया गया।

नई गाइडलाइन उन लोगों के लिए है जिन्हें पहला डोज लग चुका है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर जाना है। यह यात्रा उन्हें पढ़ाई, रोजगार या ओलिंपिक टीम के हिस्से के तौर पर करनी पड़ सकती है। ऐसे लोगों को कोवीशील्ड के दूसरे डोज के लिए 84 दिन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे इससे पहले भी दूसरा डोज लगवा सकते हैं।

यह बदलाव भारत के बाहर यात्रा कर रहे लोगों के लिए जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) में किया गया है। दरअसल, कोवीशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका ने मिलकर विकसित किया है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अपनी मंजूरी दे चुका है। ऐसे में इसके दो डोज लगे होने पर लोग भारत के बाहर सुरक्षित यात्रा कर सकते हैं। उन्हें इन्फेक्शन होने का खतरा कम होगा। साथ ही वे नए तेजी से फैलने वाले म्यूटेंट वायरस स्ट्रेन्स से भी सुरक्षित रहेंगे।

पर यह पॉलिसी सभी पर लागू नहीं होगी। अगर कोई व्यक्ति 84 दिनों के अंदर विदेश जाने वाला हो तो ही जल्दी दूसरा डोज लगाया जा सकेगा। अन्य लोगों को यह राहत नहीं मिलने वाली। उन्हें दूसरा डोज लेने के लिए 84 दिनों का इंतजार करना ही होगा।

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कोलकाता के एक वैज्ञानिक ने बनाया जेब में रखा जाने वाला पॉकेट वेंटिलेटर

Date : 11-Jun-2021

कोलकाता (एजेंसी)। भारत में जब कोरोना वायरस अपने पीक पर था तब देश में वेंटिलेटर को लेकर संकट काफी बढ़ गया था जिसकी वजह से हाहाकार मचा था। लेकिन अब चिंता की कोई बात नहीं क्योंकि अब कोलकाता के एक वैज्ञानिक ने इस समस्या का हल निकाल दिया और एक पॉकेट वेंटिलेटर का आविष्कार किया है।

डॉ. रामेंद्र लाल मुखर्जी नाम के एक इंजीनियर ने एक बैटरी से चलने वाला पॉकेट वेंटिलेटर तैयार किया है, जो किसी मरीज को तुरंत राहत दे सकता है। ये आसानी से काम करता है और सस्ता भी है, ऐसे में अगर किसी मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है उसके लिए ये लाभदायक हो सकता है।

डॉ. मुखर्जी का कहना है कि कोरोना संकट के बीच मेरा ऑक्सीजन लेवल 88 तक पहुंच गया था, तब मेरा परिवार मुझे अस्पताल ले जाना चाहता था। मैं संकट से बाहर आ गया, लेकिन इसके बाद मेरे दिमाग में मरीजों की मदद करने के लिए आइडिया आया। ठीक होने के बाद उन्होंने इसपर काम भी शुरू कर दिया और 20 दिनों में ये तैयार हो गया।

जानकारी के मुताबिक, इस डिवाइस में दो यूनिट हैं पावर और वेंटिलेटर जो कि मास्क से अटैच है। एक बटन दबाते ही वेंटिलेटर काम करना शुरू कर देता है और साफ हवा को मरीज तक पहुंचाता है। मुखर्जी के मुताबिक, अगर किसी मरीज को कोविड है तो यूवी फिल्टर वायरस मारने में मदद करता है और हवा की सफाई करता है।
इस वेंटिलेटर की मदद से वायरस कम फैलेगा, मरीजों-डॉक्टरों को राहत मिलेगी। उन्होंने ये भी दावा किया कि ब्लैक फंगस के मामले जब बढ़ रहे हैं, तब ऐसे वक्त में ये मरीजों के लिए मददगार हो सकता है।

खास बात ये है कि पॉकेट वेंटिलेटर में एक कंट्रोल नॉब है, जो कि हवा के फ्लो को कंट्रोल कर सकती है। इसका वजह सिर्फ 250 ग्राम है, जबकि ये बैटरी से चल सकता है। एकबार चार्ज करने पर ये 8 घंटे तक काम कर सकता है। इतना ही नहीं, एंड्रॉयड फोन के चार्जर से इसे चार्ज किया जा सकता है। कोरोना संकट के बीच जब वेंटिलेटर को लेकर इतनी समस्या थी, ऐसे वक्त में अगर ये आविष्कार सच में कारगर साबित होता है तो काफी लाभदायक होगा।

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कोवैक्सीन को अमेरिका में नहीं मिली आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी

Date : 11-Jun-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। स्वदेशी वैक्सीन निर्माता कंपनी भारत बायोटेक को अमेरिका में इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। अमेरिका ने अभी कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल पर मंजूरी न देने का फैसला किया है। अमेरिकी फूड और एडमिनिस्ट्रेशन यानी एफडीए ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन टीके के आपातकालीन इस्तेमाल के आवेदन को खारिज कर दिया है। 

अब इससे कंपनी को अमेरिका में अपनी वैक्सीन को लॉन्च करने के लिए और थोड़ा इंतजार करना होगा। बता दें कि कुछ दिनों पहले कोवैक्सीन के लिए अमेरिकी साझेदार ऑक्यूजेन ने अमेरिकी दवा नियामक एफडीए के पास मास्टर फाइल भेजकर इस टीके के आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति मांगी थी। 

00 अमेरिका ने की एक और परीक्षण की मांग
ऑक्यूजेन ने कहा कि कंपनी अमेरिका से कोवैक्सीन की पूरी मंजूरी मांगेगी। बता दें कि अमेरिका कंपनी को एक और अतिरिक्त परीक्षण शुरू करने के लिए कह रहा है, ताकि कंपनी एक बायोलॉजिकल लाइसेंस आवेदन (बीएलए) के लिए फाइल कर सके, जो कि एक पूर्ण मंजूरी है। 

00 कोवैक्सीन को अमेरिका में मंजूरी मिलने में होगी देरी
वहीं एफडीए ने सिफारिश की थी कि ऑक्यूजेन अपनी वैक्सीन के लिए इमरजेंसी यूज ऑथोराइजेशन आवेदन की बजाय बीएलए पर ध्यान दे। इधर ऑक्यूजेन के मुख्य कार्यकारी शंकर मुसुनीरी ने कहा कि इससे भले ही वैक्सीन लाने में देरी होगी लेकिन हम कोवैक्सीन को अमेरिका लाने में प्रतिबद्ध हैं। 

ऑक्यूजेन ने एफडीए के पास समीक्षा के लिए प्रीक्लिनिकल अध्ययन, रसायन, विनिर्माण और नियंत्रण और क्लिनिकल अध्ययन के नतीजों को मास्टर फाइल के रूप में भेजा था। बता दें कि भारत बायोटेक ने अभी तक तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल का डाटा साझा नहीं किया है, जिसकी देश में खूब आलोचना हो रही है। कंपनी ने ट्विटर पर जानकारी दी कि अब तक कोवैक्सीन के नौ प्रकाशन हुए हैं और तीसरे चरण-3 ट्रायल की प्रभावित के बारे में 10वां प्रकाशन होगा।

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साउथ अफ्रीका की 37 वर्षीय महिला ने एक साथ 10 बच्चों को दिया जन्म, तोड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड

Date : 10-Jun-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। जुड़वा बच्चे होना आज के समय में आम बात है, क्योंकि कभी-कभी एक ही बार कई बच्चों के जन्म लेने की खबरें आ चुकी हैं। मगर इस बार एक महिला ने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए एक साथ 10 बच्चों को जन्म दिया है। साउथ अफ्रीका की 37 वर्षीय महिला ने दावा किया है कि उसने 10 बच्चों को जन्म दिया है। अगर यह बात सही होती है और डॉक्टर्स इसकी पुष्टि करते हैं तो यह अपने आप में एक बड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड होगा। क्योंकि इससे पहले 9 बच्चे जन्म देने का रिकॉर्ड माली की महिला के नाम है, जिसने मई में ही यह रिकॉर्ड कायम किया था।

गोसियामे थमारा सिथोले ने दावा किया है कि उसने 7 लड़के और 3 बेटियों को जन्म दिया है। उसके पति टेबेगो त्सोतेत्सी के मुताबिक, 7 जून को प्रिटोरिया के एक अस्पताल में सिजेरियन सर्जरी द्वारा बच्चों को जन्म दिया गया। हालांकि, प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टरों ने शुरुआत में कहा था कि सिथोले के पेट में 6 बच्चे पल रहे थे, मगर बाद में स्कैन से 8 बच्चों की बात सामने आई और जब महिला की डिलीवरी हुई तो दस बच्चे पाए गए।

बता दें कि रिटेल स्टोर मैनेजर का काम करने वाली सिथोले को पहले ही 6 साल के जुड़वा बच्चे हैं। फिलहाल, सभी बच्चे सेफ हैं और पूरी तरह से स्वस्थ हैं मगर अभी उन्‍हें कुछ दिन इन्‍क्‍यूबेटर्स में ही रहना होगा। इन बच्चों के जन्म से सिथोले और उनके पति दोनों काफी खुश हैं।

त्सोतेत्सी ने कहा कि जिन बच्चों को जन्म दिया है, उनमें सात लड़के और तीन लड़कियां हैं। उनकी पत्नी सात महीने सात दिन की गर्भवती थी। उन्होंने कहा कि मैं खुश हूं। मैं भावुक हूं। मैं ज्यादा बात नहीं कर सकता। बता दें कि इससे पहले माली की 25 साल की हलीमा सीजे ने मोरक्को में एक साथ 9 बच्चों को जन्म देकर सबको चौंका दिया था।

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प्लेन हाइजैक कर पाकिस्तान ले जाने की धमकी देने वाले युवक को पुलिस ने किया गिरफ्तार

Date : 10-Jun-2021

भोपाल (एजेंसी)। प्लेन हाइजैक कर पाकिस्तान ले जाने की धमकी देने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किये गए युवक का नाम उज्जवल जैन बताया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक मंगलवार को एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास एक फोन आया जिसमें आरोपी ने प्लेन को हाइजैक कर पाकिस्तान ले जाने की धमकी दी। प्लेन हाइजैक की सूचना पर एयरपोर्ट अथॉरिटी में हड़कंप मच गया। एयरपोर्ट से रवाना होने वाले तमाम जहाजों के साथ ही यात्रियों और उनके सामान की बारिकी से तलाशी ली गई। जब तलाशी पूरी हो गई उसके बाद ही विमान को रवाना गया। इस वजह से कई फ्लाइटें लेट हो गई।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ने फोन कॉल की सूचना पुलिस को दी। हाईजेक की बात सुनते ही पुलिस के भी हाथ पांव फूल गए। फोन करने वाले का पुलिस ने जब लोकेशन ट्रेस किया वह शुजालपुर में मिला। जिसके बाद पुलिस आरोपी के घर पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को पुलिस भोपाल लेकर आ गई है, जहां उससे पूछताछल की जा रही है। पुलिस के आला अधिकारी दोपहर को प्रेसवार्ता लेकर पूरे मामले का खुलासा करेंगे।

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