Chhattisgarh

राज्यपाल अनुसुईया ने किया अस्पताल में इलाज करा रहे कोरोना मरीजों की मदद के लिए रोबोट भारती का ऑनलाइन शुभारंभ

Date : 27-Sep-2020

रायपुर।  राज्यपाल अनुसुईया उइके ने आज अस्पताल में इलाज करा रहे कोविड-19 मरीजों की मदद के लिए विशेष रूप से निर्मित रोबोट ‘भारती’ का ऑनलाइन शुभारंभ किया। इस अवसर राज्यपाल ने कहा कि यह अविष्कार कोविड-19 के इस संकट काल में निश्चित ही क्रांतिकारी और लाभदायक साबित होगा। इससे कोविड-19 की इलाज कर रहे चिकित्सकों को काफी मदद मिलेगी। कभी कभी चिकित्सक कोविड-19 के इलाज के दौरान संक्रमित हो जाते हैं, वे संक्रमित होने से बच पाएंगे और वे इलाज प्रभावी ढंग से कर सकेंगे। साथ ही मरीजो को भी मदद मिलेगी।

राज्यपाल ने इस खोज के लिए SPAN VY research initiative के युवा वैज्ञानिक आदित्य और वी.वाई. हास्पिटल के डाइरेक्टर डॉ. पूर्णेन्दू सक्सेना को बधाई दी। उन्होंने आदित्य को आत्मनिर्भर होते भारत के युवा के रूप मे देखा और डॉ. सक्सेना से कहा कि आप में सेवा भावना है और चिकित्सक होने के साथ-साथ समाज सेवा का कार्य करते हैं। इसी सोच के कारण यह अविष्कार संभव हो पाया है जो कोविड-19 के लिए इलाज के लिए मददगार साबित होगा और हम जल्द ही छत्तीसगढ़ को कोरोना मुक्त कर पाएंगे।

आज इस रोबोट के माध्यम से महामहिम राज्यपाल महोदया ने VY अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती मरीज से बात की। उन्होंने उसका हाल चाल पूछा और ये भी पूछा की रोबोट से बात कर के कैसा लग रहा है? मरीज ने कहा कि अच्छा लग रहा है।
उन्होंने मरीज को हर हाल में सकारात्मक बने रहने की समझाइश दी और मनोबल बढ़ाया।

डॉ. सक्सेना ने बताया कि हमारा देश इस समय कोविड-19 के संक्रमण से ग्रसित है। कोविड-19 के मरीजों के इलाज के दौरान हमने यह महसूस किया कि ऐसा उपकरण बनाया जाए, जो चिकित्सकों और मरीजों की सहायता कर सके। तद्नुरूप, इसका निर्माण SPAN VY रिसर्च इनिशिएटिव द्वारा किया गया है। इसको बनाने वाली टीम का नेतृत्व आदित्य करते हैं जो BIT Raipur के युवा अभियंता है। उनके साथ आशीष शर्मा, शुभम साहू और धनंजय पूरी गोस्वामी उनके सहयोगी रहे हैं। इस टीम का मार्गदर्शन VY के मेडिकल डायरेक्टर्स डॉ पूर्णेन्दु सक्सेना और डॉ आनंद जोशी ने किया।

इसके निर्माण में 45 दिन लगे। कोई भी इसे स्मार्ट फ़ोन के माध्यम से रिमोट संचालित कर सकता है। ये रोबोट मरीज तक पहुच सकता है। इसके माध्यम से मरीज की डॉक्टर, नर्स या परिजन के साथ सीधी बात हो सकती है। उसकी समस्याओं को समझा जा सकता है व उसके मॉनीटर्स का अवलोकन किया जा सकता है।

मरीज तक दवा और खाना आदि लाने ले जाने का काम इसके माध्यम से संभव है। ये सब बिना संपर्क में आये हो सकता है।
इसकी एक विशेषता ये है कि इसके भीतर अल्ट्रा वायोलेट लाइट्स भी फिट होती है। इसको इन्फेक्टेड जगहों में रिमोट संचालित कर भेजा जा सकता और उस जगह को जीवाणुरहित किया जा सकता है। इस रोबोट की खासियत यह है कि नेटवर्क न होने या अच्छा नेटवर्क न होने के बावजूद डॉक्टर और उनके परिजन वीडियो कॉलिंग के माध्यम से बात कर सकते हैं।

रोबोट भारती ऑनलाइन प्रदर्शन के दौरान वी.वाय. हास्पिटल के कोविड वार्ड में गई और मरीज के समक्ष उपस्थित हुई। इसके माध्यम से मरीजों ने राज्यपाल और उनके परिजनों से बातचीत की। इस अवसर पर अस्पताल के चिकित्सकगण और कर्मचारीगण उपस्थित थे।

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ट्यूशन फीस को लेकर हाईकोर्ट में कल होगी सुनवाई

Date : 27-Sep-2020

दुर्ग। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल की याचिका पर 28 सितंबर को ट्यूशन फीस को परिभाषित करने मा. उच्च न्यायालय बिलासपुर में सुनवाई किया जाना है।

पॉल का कहना है कि ट्यूशन फीस को लेकर जन सामान्य में भ्रांतियां है कि ट्यूशन फीस है क्या, क्योंकि प्रायवेट स्कूलों के द्वारा अपने-अपने तरीके से ट्यूशन फीस को परिभाषित कर फीस वसूला जा रहा है। ट्यूशन फीस को स्कूल शिक्षा विभाग ने भी परिभाषित नहीं किया है। हमारे द्वारा अनेकों बार स्कूल शिक्षा विभाग और जिला शिक्षा अधिकारियों से आग्रह किया गया था कि ट्यूशन फीस को परिभाषित किया जाना उचित होगा, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस विषय पर रूचि नहीं लिया। जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव ने भी हमारी शिकायत पर लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र लिखकर ट्यूशन फीस को परिभाषित करने का निवेदन किया गया, लेकिन डीपीआई ने भी ट्यूशन फीस को परिभाषित करने में कोई रूचि नहीं दिखाया। पालकों और प्रायवेट स्कूलों के बीच हो रही टकराव को एक दिन में दूर किया जा सकता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ऐसा नहीं चाहते है इसलिए हमें हाईकोर्ट जाना पड़ा, क्योंकि हम चाहते है, पालक और प्रायवेट स्कूलों की बीच टकराव समाप्त हो और बच्चों की पढ़ाई बाधित ना हो, क्योंकि ट्यूशन फीस को लेकर पालकों और प्रायवेट स्कूलों की बीच हो रही टकराव में बच्चे पीस रहे है।

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कोरोना पॉजिटिव मरीज घूम रहे थे बिना मास्क लगाए, केस दर्ज

Date : 27-Sep-2020

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या बीती रात से 1 लाख के पार हो चुकी है। मगर अब भी लापरवाही का खेल नहीं थम रहा। आरंग थाने में लापरवाही की शिकायत आई है। यहां समोदा गांव में दो कोरोना पॉजीटिव मरीज बिना मास्क लगाए घूम रहे थे। जब इन्हें रोका गया तो उल्टे मारपीट की धौंस दिखाई। मामला पुलिस के पास पहुंचा तो अब इस केस में एफआईआर की गई है। रायपुर में इस वक्त 10 हजार 367 कोरोना के एक्टिव मरीज हैं।

आरंग पुलिस के मुताबिक कोरोना संक्रमित दो युवकों की जानकारी गांव के कोटवार (पंचायत स्तर का सुरक्षाकर्मी) रवि रात्रे के पास थी। उसने दोनों लड़कों को गली में घूमते देखा। रवि ने दूर से ही युवकों को घर जाने और मास्क पहनने के लिए कहा तो पॉजीटिव युवकों ने उसे ही धमका दिया। अब पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया है। पॉजीटिव युवकों को कोविड सेंटर ले जाने की तैयारी है। रायपुर के शहरी इलाके में राजेंद्र नगर में सुशांत गजेंद्र नाम के युवक पर लॉकडाउन उल्लंघन करने का केस दर्ज किया गया है।

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दुर्ग जिले में होम आइसोलेशन के मरीजों की उचित देखभाल के लिए जिला प्रशासन ने की होम आईसोलेशन ऐप्लिकेशन एप लॉन्च

Date : 27-Sep-2020

दुर्ग। कोरोना के नियंत्रण एवं रोकथाम कार्यक्रम के तहत दुर्ग जिले में एक नवाचार किया गया है। होम आइसोलेशन के मरीजों की उचित देखभाल के लिए दुर्ग जिला प्रशासन ने होम आईसोलेशन ऐप्लिकेशन निर्मित किया है जिसके माध्यम से कोरोना मरीजों की मॉनिटरिंग एवं देखभाल की जा रही है।

किसके लिए है ऐप और कैसे करें डाऊनलोड- यह मोबाइल एप केवल जिला प्रशासन के डेटा बेस में मौजूद कोरोना मरीजों के लिए है। जिनको अंडर टेकिंग डॉक्टर की अनुमति के बाद होम आइसोलेशन में भेजा गया है। इसके अलावा इस एप का उपयोग केवल एक्टिव मरीज कर सकते हैं। प्रतिदिन जिला प्रशासन की तकनीकी टीम कोरोना मरीजों की लिस्ट डेटा बेस में डालती है। इसके बाद लिस्ट के सभी मरीजों को बल्क मेसेज के माध्यम से एक लिंक https://play.google.com/store/apps/details?id=techsail.app.cg_health_check भेजी जाती है। एंड्रॉयड यूजर्स के इस लिंक पर क्लिक करने पर सीधे प्ले स्टोर के पेज खुलता है। जिसके बाद एप्लिकेशन डाउनलोड किया जा सकता है। इसके अलावा एंड्रॉयड फोन उपयोग करने वाले मरीज प्ले स्टोर में जाकर सर्च बार में दुर्ग होम केयर (Durg home care)लिखें एप लिस्ट में नजर आने लगेगा यहां इस ऐप को डाउनलोड किया जा सकता है। इसके बाद मरीज अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के माध्यम से लॉग इन कर सकते हैं। इसके बाद स्क्रीन पर उपलब्ध ‘हेल्थ‘(Helath) टैब पर क्लिक करना होगा। जो अगला पेज खुलेगा उसमें प्रति दिन मरीज को दिन में 2 बार सुबह और शाम अपना बॉडी टेम्प्रेचर, पल्स रेट, ऑक्सीजन सेचुरेशन के साथ साथ अन्य डिटेल भरनी होती है। मरीज द्वारा भरी गई सभी डिटेल्स की मॉनिटरिंग चिकित्सकीय टीम करेगी।
क्या क्या जानकारी मिलेगी इस ऐप में- इस ऐप में जिले के शासकीय अस्पताल, कोविड केयर सेंटर में उपलब्ध बेड और आपात कालीन नम्बर भी उपलब्ध होगा।

मरीज भी कर सकते हैं अपनी सेहत की निगरानी - जैसे ही कोई मरीज अपनी डिटेल भरेगा कलर कोडिंग के माध्यम से दी गई जानकारी हाइलाइट हो जाती है। जैसे- यदि शरीर का तापमान सामान्य है तो पीले रंग से और यदि सामान्य से अधिक है तो की गई एंट्री लाल रंग से हाई लाइट हो जाएगी। जिसके आधार पर मरीज खुद अपने स्वास्थ्य की निगरानी कर सकता है। साथ ही जरूरत पड़ने पर तत्काल होम आइसोलेशन के लिए डेडिकेटेड कोविड सहायता केंद्र के नम्बरों 0788-2215151/52/53 और 0788-2960077 पर सम्पर्क किया जा सकता है। इसके अलावा यदि निगरानी करने वाली टीम को मरीज के स्वास्थ्य से जुड़ी कोई चिंता की बात लगती है तो टेलिकॉलिंग टीम द्वारा भी मरीज को कॉल किया जाएगा। तकनीकी टीम से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक दुर्ग होम केयर ऐप को 1000 से अधिक लोग डाउनलोड कर चुके हैं।

मरीजों को नोटिफिकेशन के माध्यम से मिलेगा रिमाइंडर- होम आइसोलेशन के मरीजों को बीच बीच मे पुश नोटिफिकेशन के माध्यम से दवाई लेने, ऑक्सीमीटर से जांच करने, तबियत बिगड़ने पर कहाँ कॉल करना है आदि की जानकारी भी मिलती रहेगी।
हिंदी, अंग्रेजी और छत्तीसगढ़ी में उपलब्ध होगी जानकारी- एप में हिंदी, अंग्रेजी और छत्तीसगढ़ी के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। समय समय पर अपडेट उपलब्ध होगा इसके अलावा बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी आमंत्रित किए जाएंगे ।

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कानून किसान और श्रमिकों के खिलाफ है और सविधान के विरुद्ध बनाये गए है : सीएम भूपेश बघेल

Date : 27-Sep-2020

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज राजीव भवन में पत्रकारवार्ता लेकर केंद्र सरकार की ओर से कृषि पर लाए गए तीन कानून, दूसरा श्रम कानून में परिवर्तन और तीसरा शांता कुमार की रिपोर्ट पर सवाल किये। उन्होंने कहा यह कानून किसान और श्रमिकों के खिलाफ है और सविधान के विरुद्ध बनाये गए है ।

भारत में कोई भी संस्था या व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं है। हम सब संविधान के बनाए और बताए हुए दायरे में रहकर अपना-अपना काम करते हैं। चाहे वह संसद हो या राज्य विधान मंडल, कानून बनाने की शक्ति संविधान ने कुछ खास विषयों और सीमाओं के अंतर्गत प्रदान की है। अनुच्छेद 246 से लगी हुई सातवीं अनुसूची में तीन सूचियां दी गई हैं, जिन पर संसद और विधान मंडल कानून बना सकते हैं। संविधान द्वारा बनाई गई संघीय ढांचे की व्यवस्था में सूची एक अर्थात संघ सूची में दिए गए विषयों पर कुल 97 प्रविष्टियां हैं जिन पर केंद्र कानून बनाता है ।इसी तरह सूची दो में बताए गए कुल 66 विषयों पर राज्य विधान मंडल कानून बना सकते हैं। तीसरी अर्थात समवर्ती सूची में दिखाए गए 47 विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन विरोध की सीमा तक ऐसे मामलों में केंद्र का कानून लागू होगा। जहां तक कृषि संबंधी मामलों पर कानून बनाने का अधिकार है संघ सूची में एक भी विषय ऐसा नहीं है जिसके अंतर्गत एकमेव रूप से कृषि से संबंधित मामलों पर केंद्र को कोई कानून बनाने का अधिकार है।

राज्य सूची की प्रविष्टि 14, 18 ,30 ,46, 47, 48 में कृषि से संबंधित अनेक विषय ऐसे हैं जिन पर कानून बनाने का अधिकार राज्यों को ही है। रही समवर्ती सूची की बात तो उसमें प्रविष्टि 6 कृषि भूमि से भिन्न संपत्ति का अंतरण ,अभिलेखों और दस्तावेजों का रजिस्ट्री कराने तथा प्रविष्टि 33 में खाद्य पदार्थ जिनके अंतर्गत खाद्य तिलहन और तिल पशुओं के चारे जिसके अंतर्गत खली और अन्य चारे हैं ,कच्ची कपास, कच्चा जूट का व्यापार वाणिज्य, प्रोसेसिंग, प्रदाय और वितरण इतना भर संसद द्वारा विनियमित किया जा सकता है।

अध्यादेश का स्थान लेने वाले और संसद द्वारा पारित विधेयकों में दिए गए प्रावधानों के अनुसार किन किन विषयों का स्पर्श होता है। पहली नजर में पाएंगे आप कि कृषि कर्म, उसका उत्पादन,कृषि उपज का प्रसंस्करण ,उसका विपणन सभी कुछ इस कानून द्वारा कवर किया जा रहा है।
ऐसे में विचार किया जाएगा कि जिन विषयों पर संसद को कानून बनाने की शक्ति ही नहीं है उन विषयों पर केंद्र कैसे तो अध्यादेश जारी कर सकता है? कैसे इन अध्यादेशों को प्रतिस्थापित करने वाले विधेयक संसद के सदनों द्वारा पारित किए जा सकते हैं और किस प्राधिकार के अंतर्गत राष्ट्रपति उन्हें अपनी मंजूरी देकर पूरे देश में लागू करा सकते हैं। सारा मामला अधिकारातीत कार्यवाही का है। अर्थात जिस विषय पर कानून बनाने का और उसे लागू करने का अधिकार संसद को नहीं है उस विषय पर भी प्रक्रिया नियमों को शिथिल करके कानून बनाना कहां तक तर्कसंगत और संविधान सम्मत है।

तीनों विधेयकों के संबंध में संसद के प्राधिकार और वैधानिक सक्षमता का परीक्षण करा कर राजनीतिक और विधिक कार्यवाही की जा सकती है।
वर्तमान विपदा के काल में केन्द्र सरकार द्वारा जून 2020 में 3 अध्यादेश लाये गये जिसमें कथित रूप से किसानों को अपनी उपज को देश के किसी भी भाग में विक्रय की आजादी, कान्ट्रेक्ट फार्मिंग की अनुमति तथा अनाजों के निजी व्यापारियों के भंडारण की सीमा समाप्त करने जैसे बातें कही गयी है।
इसी दौरान संसद के दोनों सदनों में तीनों विधेयकों को बिना किसी बहस एवं बिना मतदान के ही पूर्णतः गैर लोकतांत्रिक ढंग से पारित करा लिया गया।
उक्त तीनों विधेयकों के दुष्परिणाम को देखते हुये देश भर के क्षुब्ध किसान आंदोलनरत है।
केन्द्र सरकार न तो कथित ‘‘किसान हितैषी विधेयक को संसद में लाने के पूर्व तथा न ही उसके बाद किसानों से चर्चा की गयी। किसान इस कारण भयभीत है कि आने वाले समय में केन्द्र सरकार एमएसपी की व्यवस्था को ही समाप्त कर सकती है क्योंकि निजी क्षेत्र के व्यक्तियों को सामानांतर मंडी खोलने की अनुमति दी जा रही है।
किसानों को यह आशंका है कि ‘‘कांटेक्ट फार्मिंग’’ की आड़ में किसानों की भूमि कार्पोरेट घराने को दिये जाने की तैयारी की जा रही है।केन्द्र सरकार द्वारा उक्त तीनों विधेयक शांता कुमार समिति की सिफारिशों (2015) के क्रियान्वयन हेतु लाये गये हैं। शांता कुमार समिति द्वारा यह भी सिफारिश की गयी है कि धीरे-धीरे एफसीआई खाद्यान्न की खरीदी बंद करें, एमएसपी पर खाद्यान्न क्रय करने के बजाय किसानों को उनके खातों में नकद राशि ट्रांसफर की जाये।खाद्य सुरक्षा का लाभ 67 प्रतिशत आबादी के स्थान पर मात्र 40 प्रतिशत लोगों को ही मिले तथा उपभोक्ताओं को भी नकद राशि दी जाये ताकि वे खुले बाजार से खाद्यान्न क्रय कर सकें।
आने वाले समय में गरीब, किसान एवं मजदूरों को असंख्य कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि केन्द्र सरकार कृषि उपज के उत्पादन, संग्रहण एवं विपणन की पूरी व्यवस्था निजी क्षेत्र के हवाले करना चाहती है।

प्रदेश/देश वासियों को इस आसन्न संकट से बचाने के लिये समय की मांग है कि एकजुट होकर केन्द्र सरकार के षड़यंत्र के विरूद्ध सशक्त आंदोलन आरंभ किया जाये, जिससे केन्द्र सरकार को विवश होकर उक्त अधिनियमों को वापस लेना पड़े।
भाजपा एवं डॉ. रमन सिंह से चंद सवाल

केन्द्र द्वारा किसानों को बोनस दिये जान पर प्रतिबंध लगाये जाने का समर्थन करते है अथवा विरोध?
2016 से 2022 की 6 वर्षो की अवधि में किसानों की आय दुगनी करने का लक्ष्य रखा गया था। 2016-2020 तक की 4 वर्षो की अवधि में किसानो की आमदनी मात्र 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी है। क्या प्रधानमंत्री जी से यह अनुरोध करेंगे कि वे आगामी 2 वर्षो में किसानो की आय दुगनी करने हेतु तत्काल आपतिक कदम उठाये ?
यूपीए के शासनकाल में 6 वर्षो 2004-2010 के बीच खाद्यान्नों की एमएसपी मोदी के कार्यकाल के 6 वर्षो 2014-2020 की तुलना में अधिक बढ़ी थी। क्या प्रधानमंत्री से यह अपील करेगे कि किसानो के हित का देखते हुये आगामी वर्ष में खाद्यान्नों की एमएसपी में इतनी वृद्धि करेंगे कि कम से कम यूपीए कार्यकाल से वृद्धि अधिक हो सके?

स्वमीनाथन समिति द्वारा लागत (Input Cost+Family Labour+Rent on Lease) के डेढ़ गुना एमएसपी निर्धारित करने के बदले Input Cost+Family Labour के आधार पर एमएसपी निर्धारित की जा रही है। क्या प्रधानमंत्री से यह अनुरोध करेगे कि अपने वादे के अनुसार स्वमीनाथन समिति की सिफारिशों को सही मायने में लागू करेंगे।

शान्ताकुमार समिति की अनुशंसा 2015 मे उन्होने यह निष्कर्ष निकाला था कि केवल 6 प्रतिशत किसानो को एमएसपी का लाभ मिलता है तथा पीडीएस अंतर्गत 67 प्रतिशत आबादी के स्थान पर केवल 40 प्रतिशत लोगो का रियायती दर पर खाद्यान्न दिया जाना चाहिये। शांताराम समिति दर पर खाद्यान्न वितरण के स्थान पर नकद राशि डीबीटी के माध्यम से दी जाये। क्या आप उक्त अनुशंसाओं का समर्थन करेगें अथवा विरोध?
शांताकुमार समिति की अनुशंसा है कि किसानो की उपज क्रय में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाया जाना चाहिये तथा शासन द्वारा केवल क्षतिपूर्ति की राशि किसानों को दिया जाना चाहिये। आप लोग इससे सहमत है अथवा नही?

किसानों से एमएसपी पर खाद्यान्न क्रय करने के स्थान पर प्रति हेक्टेयर 5000 रूपये से 10000 नकद सब्सिडी दिये जाने की भी अनुशंसा शांताकुमार समिति द्वारा की गयी है। आप लोग इस तर्क से सहमत है अथवा इसके विरोध में?

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नगर पालिक निगम रायपुर लॉकडाउन में कर रहे दुकानदारी, निगम ने 15 दुकानों को किया गया सील

Date : 27-Sep-2020

रायपुर। नगर पालिक निगम रायपुर के जोन क्रमांक 5 के नगर निवेश विभाग और स्वास्थ्य विभाग की उड़नदस्ता टीम ने निगम जोन 5 के बाजारों में आकस्मिक निरीक्षण कर टोटल लॉकडाउन के नियम के व्यवहारिक परिपालन की वस्तुस्थिति की जानकारी ली।

उड़नदस्ता में नगर निवेश विभाग प्रभारी मोहम्मद खान एवं स्वास्थ्य विभाग उड़नदस्ता प्रभारी प्रेम मानिक के नेतृत्व में दो दिनों में निगम जोन 5 के जोन कमिश्नर के आदेशानुसार सम्पूर्ण जोन 5 के बाजारों में अभियान चलाया गया। इस दौरान लॉकडाउन के नियम का उल्लंघन करते हुए दुकान खोलकर व्यापार करते मिले 15 दुकानदारों की दुकानों को जोन 5 उड़नदस्ता टीम ने तत्काल ताला लगाकर पुलिस प्रशासन की पेट्रोलिंग टीम की उपस्थिति में सीलबंद करने की कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही की. इन 15 दुकानों के सम्बंधित संचालको से कुल 15700 रुपये जुर्माना वसूला गया।

निगम जोन 5 की नगर निवेश एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त उड़नदस्ता टीम ने पुलिस पेट्रोलिंग टीम के साथ लॉकडाउन नियम का उल्लंघन कर दुकान खोलकर व्यापार करते पाए जाने पर प्रमुख रूप से रायपुर नगर निगम जोन 5 के तहत आने वाले डी. डी. नगर में गुरुदेव दूध डेयरी पर 10000 रूपये, चंगोराभाटा में दीपक पोल्ट्री फॉर्म पर 1000 रूपये, चंगोराभाटा में ही स्थित भारत किराना स्टोर्स, भारत प्राविजन, संजय प्रोविजन, ओम फर्नीचर दुकान पर 500 -500 रूपये का जुर्माना किया एवं सम्बंधित दुकानों को स्थल पर तत्काल ताला लगाकर सीलबंद करने की कड़ी कार्यवाही की गई ।

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व मंत्री जसवंत सिंह के निधन पर किया शोक व्यक्त

Date : 27-Sep-2020

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व मंत्री जसवंत सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया। अपने ट्विटर अकाउंट पर उन्होंने ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा `वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह जी के निधन का समाचार दुखद है। मैं ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति एवं परिवारजनों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना करता हूँ।

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रायपुर के होम आइसोलेशन मॉडल को लोगों ने सराहा, सर्वे में सामने आया ये आंकड़ा

Date : 27-Sep-2020

रायपुर। राजधानी में एडीएम विनीत नंदनवार के मार्गदर्शन में संचालित कोविड केयर सेंटर 24x7 निरंतर होम आइसोलेशन वाले मरीजों से संपर्क में रहते है। इस मॉडल से राजधानी के कोरोना संक्रमित काफी संतुष्ट नजर आ रहे है। ताजा सर्वे में यह बात सामने आई है कि कम से कम 80 फीसदी मरीज इसके तहत स्वास्थ्य कर्मियों के कार्य, सलाह व मार्गदर्शन का लाभ ले रहे है, व इस मॉडल से संतुष्ट है । इस मॉडल की काफी सराहना की जा रही है। ताजा सर्वे में मरीजों द्वारा फीडबैक लिया गया, जिसमे उनसे उनके दैनिक दिनचर्या से लेकर दवाई, खान-पान, साफ़-सफाई, इलाज के लिए डॉक्टरों की उपलब्धता, अगर उनके संपर्क में कोई डॉक्टर नहीं है तो टीम द्वारा डॉक्टर नियुक्त किया गया कि नहीं, उनसे नियमित संपर्क हो रहा है कि नहीं, ऑक्सीजन व पल्स की जानकारी, आपात काल में सलाह व चिकित्सा सेवा, आइसोलेशन के दौरान कमरे की साफ़-सफाई से जुड़े प्रश्न पूछे गए, जिसमे लगभग 80 फीसदी मरीज इस सेवा से काफी संतुष्ट थे।

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राजधानी रायपुर में निकाला गया मोटरसाइकिल मार्च, शहर में अनावश्यक घर से बाहर निकलने वाले लोगों पर होगी कार्यवाही

Date : 27-Sep-2020

रायपुर। कोरोना संक्रमण की रोकथाम हेतु जिला प्रशासन रायपुर द्वारा लगाए गए लॉकडाउन को सफल बनाए जाने हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जिला रायपुर अजय यादव द्वारा शहर में अनावश्यक घर से बाहर निकलने वाले लोगों पर कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया है।

उक्त निर्देश के परिपालन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर रायपुर लखन पटले के मार्गदर्शन में लॉकडाउन के पांचवें दिन कोतवाली, पुरानी बस्ती एवं सिविल लाइन अनुविभाग में मोटरसाइकिल मार्च निकाला गया जो शास्त्री चौक से 4;30 बजे प्रारम्भ हुआ जो शाम 7:30 तक चला ,इस दौरान तीनों अनुविभाग कोतवाली सीएसपी, सिविल लाइन सीएसपी, पुरानी बस्ती सीएसपी, एवं उप पुलिस अधीक्षक यातायात रायपुर के नेतृत्व में 30-30 की संख्या में अधिकारी एवं जवान मोटरसाइकिल मार्च निकालते हुए तंग गलियों में पेट्रोलिंग किया इस दौरान गलियों में बिना कारण के निकलने वाले लोगों में पुलिस पेट्रोलिंग गाड़ी को देखकर हड़कंप मच गया जीसे सख्त हिदायत दी गई , लॉक्डाउन के दौरान नियमों के उल्लंघन करने वाले वाहन 45 वाहन चालकों का वाहन जप्त क़र mv act के तहत कार्यवाही की गई एवं अनावशक रूप से घूमने वाले पर धारा 188 के तहत 18 व्यक्तियों पर कार्यवाही की गई।

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प्रदेश सरकार की जनहितैषी नीतियों और कार्यक्रमों की वजह से कोरोना संकट काल में भी राज्य की अर्थव्यवस्था गतिशील बनी रही : सीएम भूपेश

Date : 27-Sep-2020

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार कोरोना संकट के समय में गरीबों किसानों, आदिवासियों, मजदूरों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि संकट के समय में देश-दुनिया में लोगों को आर्थिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ा, लेकिन छत्तीसगढ़ इससे अछूता रहा है।

भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश सरकार की जनहितैषी नीतियों और कार्यक्रमों की वजह से कोरोना संकट काल में भी राज्य की अर्थव्यवस्था गतिशील बनी रही है। इस मौके पर उन्होंने प्रदेश सरकार की कई जनहितैषी कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने तथा फसल उत्पादकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तीसरी किश्त की राशि किसान भाईयों को राज्य स्थापना दिवस एक नवम्बर को दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की कर्जमाफी, धान खरीदी, गोधन न्याय योजना, लघु वनोपजों का संग्रहण एवं समर्थन मूल्य पर खरीदी तथा मनरेगा के माध्यम से नियमित रूप से ग्रामीणों को रोजगार एवं आय का साधन उपलब्ध कराकर प्रदेश सरकार ने लोगों को आर्थिक संबल प्रदान किया है।

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