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छत्तीसगढ़ के वनांचलों और ग्रामीण इलाकों के हाट.बाजारों में स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमों ने अब तक 81 लाख 89 हजार 806 लोगों का ईलाज

Date : 03-Feb-2023

रायपुर। छत्तीसगढ़ के वनांचलों और ग्रामीण इलाकों के हाट-बाजारों में स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमों द्वारा अब तक कुल 81 लाख 89 हजार 806 लोगों को इलाज मुहैया कराया गया है। मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना के माध्यम से प्रदेश के 1749 हाट-बाजारों में क्लीनिक लगाकर लोगों की निःशुल्क जांच व उपचार कर दवाईयां दी जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा योजना की शुरूआत के बाद से अब तक प्रदेश भर में कुल एक लाख 44 हजार 962 हाट-बाजार क्लीनिक आयोजित कर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। योजना के अंतर्गत राज्य में 429 डेडिकेटेड ब्राडिंग वाहन तथा चिकित्सा दलों के माध्यम से दूरस्थ अंचलों में लोगों का इलाज किया जा रहा है।

हाट-बाजार क्लीनिकों में जरूरतमंदों को निःशुल्क उपचार, चिकित्सकीय परामर्श और दवाईयां उपलब्ध कराने के साथ ही मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा मलेरिया, एचआईव्ही, मधुमेह, एनीमिया, टीबी, कुष्ठ रोग, उच्च रक्तचाप और नेत्र विकारों की जांच भी की जा रही है। इन क्लीनिकों में शिशुओं और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण भी किया जा रहा है। हाट-बाजार क्लीनिकों में ओ.पी.डी. आधारित आठ प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जांच के बाद व्याधिग्रस्त पाए गए लोगों को निःशुल्क दवाईयां भी दी जाती हैं। जिन मरीज़ों को उच्च स्तरीय जाँच अथवा उपचार की आवश्यकता होती है उन्हें हाट-बाज़ार क्लीनिक से सीधे स्वास्थ्य केंद्र में रिफर भी किया जा रहा है ताकि उनका सम्पूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 23 लाख 13 हजार 461 लोगों के उच्च रक्तचाप, 19 लाख 88 हजार 675 लोगों की मधुमेह, छह लाख 19 हजार 015 लोगों की मलेरिया जांच, चार लाख 73 हजार 560 लोगों की रक्त-अल्पता (एनीमिया) और दो लाख 90 हजार 047 लोगों में नेत्र विकारों की जांच की गई है। इन क्लीनिकों में 58 हजार 681 लोगों की टीबी, 31 हजार 700 लोगों की कुष्ठ और 45 हजार 640 लोगों की एचआईव्ही जांच भी की गई है। इस दौरान एक लाख चार हजार 273 गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच भी की गई है। हाट-बाजारों में आयोजित क्लीनिकों में दो लाख दो हजार 371 डायरिया पीड़ितों का भी उपचार किया गया है।

अब तक इतनों का इलाज...

मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिकों के माध्यम से अब तक बालोद जिले में तीन लाख 42ह जार 323, बलौदाबाजार-भाटापारा में एक लाख 56 हजार 109, बलरामपुर-रामानुजगंज में एक लाख 66 हजार 047, बस्तर में दो लाख 18 हजार 282, बेमेतरा में चार लाख 48 हजार 697, बीजापुर में एक लाख 42 हजार 373, बिलासपुर में चार लाख 51 हजार 751, दंतेवाड़ा में एक लाख 34 हजार दो, धमतरी में 85 हजार 351, दुर्ग में तीन लाख 15 हजार 596, गरियाबंद में तीन लाख 23 हजार 129, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में एक लाख 32 हजार 432, जांजगीर-चांपा में दो लाख 60 हजार 650 और जशपुर में चार लाख 44 हजार 576 लोगों का इलाज किया गया है।

योजना के तहत कबीरधाम में चार लाख दस हजार 064, कांकेर में तीन लाख 72 हजार 770, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 65 हजार 429, कोंडागांव में दो लाख छह हजार 042, कोरबा में दो लाख 25 हजार 441, कोरिया में एक लाख 25  हजार 436, महासमुंद में चार लाख 22 हजार 519, मनेन्द्रगढ़–चिरमिरी-भरतपुर में 76 हजार 658, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में एक लाख 16 हजार 291, मुंगेली में एक लाख 99 हजार 478, नारायणपुर में 61 हजार 239, रायगढ़ में पांच लाख 71 हजार 943, रायपुर में तीन लाख 14 हजार 992, राजनांदगांव में दो लाख 78 हजार 243, सक्ती में एक लाख 40 हजार 357, सारंगढ-बिलाईगढ़ में एक लाख 74 हजार 193, सुकमा में 74 हजार 515, सूरजपुर में चार लाख 35 हजार 721 तथा सरगुजा जिले में दो लाख 97 हजार 157 लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

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वायु प्रदूषण से हो सकता है आंखों को नुकसान

Date : 01-Feb-2023

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। आंख हमारे शरीर का बहुत नाजुक व महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में वायु प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। वायु प्रदूषण का आंखों पर दुष्प्रभाव बिना किसी लक्षण से लेकर गंभीर जलन और पुराने दर्द तक हो सकता है। कॉन्टैक्ट लेंस के उपयोग के बावजूद आंखें इन दुष्प्रभावों के प्रति संवेदनशील होती हैं। वायु प्रदूषण फेफड़ों, हृदय और हड्डियों सहित हमारे लगभग सभी अंगों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से आंखों का सामान्य स्वास्थ्य और दृष्टि क्षमता भी खराब हो रही है। यदि आंखें नियमित रूप से प्रदूषित वायु के संपर्क में रहती हैं, तो ड्राई आई सिंड्रोम, आंखों में पानी व जलन और धुंधली दृष्टि जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के खतरनाक रूप से उच्च स्तर पर पहुंचने से यह हमारी आंखों को बहुत ही गंभीर रूप से प्रभावित करता है। यह हमारी आंखों के स्वास्थ्य और इनकी रोशनी या दृष्टि के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।

वायु प्रदूषण के संपर्क से आंखें इस तरह से हो सकती हैं प्रभावित

वायु प्रदूषण से मुख्य रूप से आंखों में लाली और जलन, आंखों से पानी बहना, आंखों में खुजली, डिस्चार्ज, आंखों में सूजन और आंखें खोलने में कठिनाई के साथ एलर्जी, आंखों में सूखेपन का रोग या ड्राई आई डिसीज जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इन लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

प्रदूषण से आंखों को बचाना जरूरी

अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि कुछ निवारक क्रियाओं जैसे धूप का चश्मा पहनने और वायुजनित दूषित पदार्थों के साथ आंखों के संपर्क को सीमित करने से आंखों को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है। आई ड्राप आंखों को चिकनाई देने और जलन को दूर रखने में सहायक हो सकते हैं।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि आंखों के संक्रमण के जोखिम को कम करने ज्यादा प्रदूषण के दिनों में आंखों की सुरक्षा का विशेष खयाल रखना चाहिए। कोशिश करें कि बाहर से आने के बाद अपनी आंखों को सीधे न छुएं और बार-बार हाथ धोते रहें। किसी भी बीमारी या प्रतिकूल परिस्थिति से लड़ने के लिए फिट रहना बहुत ज़रूरी है। आंखों की अच्छी सेहत के लिए जरूरी पोषक तत्व जैसे विटामिन 'ए', प्रोटीन एवं ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार लें। हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, बादाम, जामुन, गाजर और मछली आंखों के लिए काफी फायदेमंद हैं। इनका नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।

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ज्यादा गुस्सा करना सेहत के लिए हो सकता हैं खतरनाक, इन तरीको से पा सकते हैं खुद पर काबू

Date : 01-Feb-2023

नई दिल्‍ली (एजेंसी)। बिगड़ती लाइफस्टाइल और बढ़ते वर्कलोड के चलते लोगों के व्यवहार में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है. लेकिन जो सबसे बड़ा चेंज युवाओं में देखने को मिल रहा है वह है उनका बढ़ता गुस्सा. वैसे तो गुस्सा हम सभी को आता है और यह एक इंसानी प्रवृत्ति है लेकिन कई बार यह गुस्सा सेहत के लिए खतरनाक साबित होता है. खास तौर पर तब जब बार-बार और कई बार गुस्सा आए. कुछ लोगों को इतना तेज गुस्सा आता है जिसके बाद वह खुद पर भी काबू नहीं रख पाते. इस गुस्से से खुद का शरीर तो नुकसान झेलता ही है इसके अलावा मुंह से लोगों के लिए उस वक्त भला बुरा निकल जाता है जिसका बाद में रिग्रेट होता है. आपको बता दें कि गुस्सा करने से स्ट्रेस बढ़ता है और दिल की बीमारियों का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है. अगर आपको भी बार-बार ज्यादा गुस्सा आता है और आप इसे कंट्रोल नहीं कर पाते तो यह खबर आपके लिए है. हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ बेहद आसान तरीके जिससे आप अपने गुस्से को महज़ 5 मिनट में शांत कर पाएंगे

रिसर्च में हुआ खुलासा

University Of Wisconsin में गुस्से के दौरान दिमाग के पैर्टन को समझने की कोशिश कि जिसमें सामने आया कि अगर आप गुस्से वाली परिस्थिति से कुछ सेकेंड या मिनट के लिए अपना ध्यान भटका लें तो आपका गुस्सा अपने आप शांत हो जाएगा साथ ही आपको सुकून भी मिलेगा.

गुस्सा शांत करने के आसान तरीके

1. तीन बार लें लंबी सांस

वैसे को खराब मूड को कई तरीकों से ठीक किया जा सकता है, लेकिन जब आपको बहुत ज्यादा ही गुस्सा आ रहा हो तो बस तीन बार गहरी सांस लीजिए. आपका सारा गुस्सा और स्ट्रेस ख़त्म हो जाएगा और आपको पता भी नहीं चलेगा.

2. खुद पर कंट्रोल रखें

अगर सामने ऐसा कुछ हो रहा है कि आपको गुस्सा आ जाए, तो सबसे पहले खुद पर कंट्रोल रखें. उसके बाद एक गहरी सांस लें और सोचे कि इस सिचुएशन में और किस तरह से रिएक्ट किया जा सकता है.

3. वॉक पर जाएं

अगर आपक किसी वजह से बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा है तो आप एक वॉक पर जाएं ,ज्यादा नहीं मात्र 5 से 10 मिनट की वॉक. वॉक करने से आप अच्छा फील करेंगे. आप चाहे तो योग भी कर सकते हैं. योगा भी आपके मूड को बहुत जल्दी ठीक कर देगा.

4. जोर जोर से गाना गाएं

अपने गूस्से को अंदर से निकालने के लिए गाने से अच्छा ऑप्शन क्या हो सकता है. जब गुस्सा आ रहा हो तो जोर जोर से गाना गाएं या फिर नाचें. ऐसा करने से आप गुस्से की वजह ही भूल जाएंगे.

5. खुद को करें पिंच

थोड़ा सा अजीब है लेकिन उपाय बड़ा असरदार है. ऐसा करने से आपका मेंटल स्ट्रेस कम होता है और आप अपने काम पर फोकस कर पाते हैं. अब जब भी गुस्सा आएं को खुुद को चिमटी काट लें.

नोट- उपरोक्‍त दी गई जानकारी व सुझाव सिर्फ सामान्‍य सूचना के उद्देश्‍य से पेश की गई है हम इन पर किसी भी प्रकार का दावा नहीं करते हैं. इन्‍हें अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.

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अजवाइन एसिडिटी, कब्ज को मिनटों में करेगा दूर, जाने कैसे करें अजवाइन का सेवन

Date : 30-Jan-2023

हेल्थ न्यूज़ (एजेंसी) । अजवाइन का इस्तेमाल सर्दी के दिनों में अधिक होता है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है, और इसे खाने से शरीर में गरमाहट बनी रहती है. पेट के लिए अजवाइन बहुत कारगर मानी जाती है. सब्जियों के कई भरवे में भी अजवाइ को मिलाया जाता है. अजवाइन में फाइबर, मिनरल्स, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं. जिसके सेवन से शरीर कई बीमारियों से महफूज रखता है. नियमित रूप से अगर इसका सेवन करें तो पेट दर्द, एसिडिटी, कब्ज जैसी कई समस्याओं से लाभ मिलेगा. तो आज जानेंगे अजवाइन के फायदों के बारे में. आइए बताएं कैसे करें इसका सेवन.

ऐसे करें अजवाइन का सेवन 

1. हर रोज नियमित रूप से अगर आप अजवाइन का पानी पीते हैं तो दिल से जुड़ी बीमारियों से बचे रह सकते हैं. अजवाइन हार्ट को हेल्दी रखता है और सही तरीके से फंक्शन करने में मदद करता है. डेली रात को थोड़ी सी अजवाइन पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इस पानी को खाली पेट पी लें.  

2. सर्दियों में अजवाइन का पानी पीने से अस्थमा से लेकर सर्दी-जुकाम और कफ जैसी समस्याओं से भी निजात मिलता है. सर्दियों में खांसी, सर्दी-जुकाम की दिक्कत अधिक बढ़ जाती है. इसके लिए आप सुबह पानी में अजवाइन, अदरक, काली मिर्च, लौंग और तुलसी डालकर उबालें. फिर इसे छानकर पी लें. इससे बहुत फायदा मिलता है.

3. अजवाइन का पानी पीने से डायबिटीज को भी कंट्रोल में रखा जा सकता है. अजवाइन का पानी हफ्ते में दो से तीन बार पीने से डायबिटीज होने की संभावनाओं को भी कम किया जा सकता है. साथ ही गैस जैसी दिक्कतों में भी आराम मिलती है.  

4. अधिकतर लोगों को खाना खाने के तुरंत बाद एसिडिटी की समस्या होती है. ऐसे में आप एक गिलास गरम पानी में एक चम्मच जीरा और अजवाइन मिलाकर कुछ देर उबालकर, फिर इसे छानकर पी लें. इससे एसिडिटी की समस्या जल्द दूर होगी.   

5. अगर आपको कब्ज की समस्या रहती है, सुबह पेट ठीक तरह से साफ नहीं होता तो अजवाइन इसमें बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है. कब्ज की समस्या में अजवाइन के सेवन से बहुत आराम मिलता है. रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म पानी के साथ अजवाइन खा लें. इससे कब्ज की समस्या दूर होती है.

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अंगदान के लिए एसओपी बनाए जाने की आवश्यकता : एम्स

Date : 29-Jan-2023

रायपुर। अंगदान और अंग प्रत्यारोपण को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें देशभर के प्रमुख विशेषज्ञों ने देश में बढ़ती अंग प्रत्यारोपण की मांग को देखते हुए एक प्रक्रिया (एसओपी) बनाए जाने की जरूरत पर बल दिया जिससे चिकित्सकों, रोगियों, अंगदान करने वालों और अंग प्रत्यारोपण कराने वालों को सुनिश्चित प्रक्रिया के बारे में अवगत कराया जा सके।

नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ऑफ एम्स के तत्वावधान में यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और नेत्र रोग विभाग के चिकित्सकों ने कार्यशाला में अंगदान के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने कहा कि देश में बढ़ती जनसंख्या के साथ लाखों रोगियों को अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ रही है। समाज में जागरूकता फैलाकर अंगदान के प्रति सकरात्मक नजरिया अपनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एम्स में किडनी और कॉर्निया ट्रांसप्लांट के बाद लीवर और बोनमैरो के प्रत्यारोपण की सुविधा भी प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

कार्यशाला में अंगदान के विभिन्न पहलुओं, आवश्यकता, अनुशंसा और अनुमति की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्रदान की गई। साथ ही अंगदाता को प्राप्त अधिकार और विशेष सुविधाओं पर भी प्रकाश डाला गया। बांबे हॉस्पिटल, इंदौर के उप-चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित जोशी ने मृतक के अंगदान के विधिक पक्ष की जानकारी दी। एम्स दिल्ली के न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. दीपक गुप्ता ने ब्रेन डैड रोगी के अंगदान के बारे में बताया। मोहन फांउडेशन के डॉ. सुनील श्रॉफ ने ऑर्गन डोनेशन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्रदान की। डॉ. विजया साहू ने कॉर्निया प्रत्यारोपण के बारे में बताया।

कार्यशाला में 400 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस अवसर पर दो किडनी दानदाताओं को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. आलोक चंद्र अग्रवाल, उप-निदेशक (प्रशासन) अंशुमान गुप्ता, डॉ. अमित शर्मा, डॉ. विनय राठौर, डॉ. बीनू मैथ्यू, एसोसिएशन के विशोक एन., बंटी कुमार, जसीम पी, अर्पित कुमार शर्मा आदि ने भी भाग लिया।

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सेहत के लिए बेहद लाभकारी है काली गाजर, मिलते है ये जबरदस्‍त फायदे

Date : 27-Jan-2023

नई दिल्ली (एजेंसी) । गाजर सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद है, इसलिए लोग सर्दियों के मौसम में इसे किसी ना किसी रूप में अपने भोजन में शामिल करते हैं. कोई मीठी डिश बनाता है तो कोई ऐसे ही सलाद के रूप में गाजर खाता है, लेकिन क्या आपने कभी काली गाजर खाई है. जी हां गाजर सिर्फ लाल या नारंगी नहीं होती बल्कि काली या पर्पल कलर की भी होती है. काली गाजर को देसी गाजर भी कहा जाता है इससे कई तरह के लाभ मिलते हैं. गाजर शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है जो स्वास्थ्य स्थितियों में लाभ देने के लिए जानी जाती है. आइए जानते हैं काली गाजर से मिलने वाले फायदे के बारे

पाचन तंत्र मजबूत बनाए-

सर्दियों में काली गाजर खाने से पाचन तंत्र मजबूत होता है. डाइजेशन में सुधार होता है, काली गाजर में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो कब्ज एसिडिटी की समस्याओं को आसानी से दूर करती है.

कैंसर से लड़ने में असरदार-

शोध से पता चलता है कि काली गाजर में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स में कैंसर से लड़ने वाले गुण होते हैं. चूहों पर एक रिसर्च किया गया इस रिसर्च में चूहों को कैंसर को बढ़ावा देने वाले कंपाउंड के संपर्क में लाया गया और फिर कुछ चूहों को डाइट में काली गाजर का अर्क दिया गया तो कुछ चूहों को सामान्य डाइट. स्टडी के नतीजे में पता चला कि जिन चूहों को काली गाजर खिलाई गई है उनमें सामान्य डाइट खाने वाले चूहों की तुलना में कैंसर का विकास कब हुआ है.

वजन घटाने में मददगार-

काली गाजर एक ऐसी सब्जी है जिसमें कैलोरी कम होती है लेकिन यह सबसे ज्यादा पौष्टिक होती है, जिस कारण वजन कम करने के लिए यह अच्छे भोजन के तौर पर माना जाता है.काली गाजर में घुलनशील फाइबर होते हैं, जो आपकी भूख और भोजन का सेवन दोनों कम करने में मदद करते हैं.

आंखों के लिए बेहतरीन-

काली गाजर से आंखें हेल्दी रहती है इसमें विटामिन ए और बीटा कैरोटीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आंखों की रोशनी को बढ़ाकर आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं.

इम्यूनट सिस्टम मजबूत करे-

सर्दियों में काली गाजर खाने से इम्यूनिटी मजबूत होती है, काली गाजर में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो मौसमी बीमारियों से शरीर की रक्षा करता है.

अर्थराइटिस में फायदेमंद-

काली गाजर में एक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जिसका नाम है एंथोसाइनिन पॉलीफेनॉल एंटीऑक्सीडेंट. इससे सेहत को बहुत लाभ है. इस एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर काली गाजर अर्थराइटिस के लिए बहुत ही फायदेमंद है. इससे इन्फ्लेमेशन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है.यह एक एंटी एजेंट के रूप में काम करता है, जो हानिकारक कंपाउंड pro-inflammatory साइटोकींस को कम करने में मदद करता है. काली गाजर का यही गुण शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करके अर्थराइटिस के लक्षणों को कम करने में मदद करता है.

दिल के लिए फायदेमंद-

सर्दियों में काली गाजर खाने से दिल सेहतमंद रहता है.इसमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करके दिल को हेल्थी रखने में मदद करते हैं. काली गाजर खाने से हार्ट संबंधी बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है.

नोट– उपरोक्‍त दी गई जानकारी व सुझाव सिर्फ सामान्‍य सूचना के उद्देश्‍य से पेश की गई है, हम इन पर किसी भी प्रकार का दावा नहीं करते है.

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शरीर में इन दिक्‍कतों को भूलकर भी करें अनदेखा, हार्ट अटैक के हो सकते है संकेत

Date : 27-Jan-2023

नई दिल्ली (एजेंसी) । आज के समय में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है. इसके लिए जो चीजें जिम्मेदार हैं उनमें शामिल हैं- स्ट्रेस, गलत खानपान, बेकार लाइफस्टाइल, नींद पूरी ना होना, शराब और सिगरेट का अत्यधिक मात्रा में सेवन. हार्ट अटैक और स्ट्र्रोक के खतरे से बचने के लिए जरूरी है कि आप शरीर में दिखने वाले संकेतों और लक्षणों पर खास ध्यान दें. आज हम आपको कुछ ऐसी समस्याओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है. ऐसे में जरूरी है कि आप सावधान रहें. आइए जानते हैं उन दिक्कतों के बारे में जिन्हें लोग मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन ये दिक्कतें बढ़ने पर हृदय से संबंधित बीमारियों का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है.

कोलेस्ट्रॉल-

कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर में मौजूद वैक्स के जैसा पदार्थ होता है. शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ने पर यह धमनियों को ब्लॉक कर देता है जिससे हृदय तक खून की सही मात्रा में नहीं पहुंत पाती, और इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है. ऐसे में जरूरी है कि आप डाइट में डाइट्री फाइबर, लो फैट फूड्स को शामिल करें और रोजाना एक्सरसाइज करें.

डायबिटीज-

जब आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं रहता तब यह आपके हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में जरूरी है कि आप एक हेल्दी डाइट लें और समय-समय पर अपना ब्लड शुगर लेवल चेक कराते रहें.

हाइपरटेंशन-

हाइपरटेंशन के कारण हार्ट अटैक का खतरा काफी ज्यादा बढ़ता है. हाइपरटेंशन के कारण ब्लड प्रेशर का लेवल काफी ज्यादा हाई हो जाता है. जब आपका ब्लड प्रेशर का लेवल हाई होता है तो आपके दिल को ज्यादा काम करना पड़ता है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपने ब्लड प्रेशर के लेवल को कंट्रोल में रखें. आप लो सोडियम और लो-फैट डाइट, एक्सरसाइज करके ब्लड प्रेशर के लेवल को कंट्रोल में रख सकते हैं. इसके साथ ही जरूरी है कि आप शराब का सेवन कम से कम करें और स्ट्रेस ना लें और हेल्दी वेट को मेनटेन करें.

मोटापा-

मोटापे की वजह से आपका कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर का लेवल काफी ज्यादा बढ़ जाता है जिसके चलते हार्ट अटैक का खतरा होता है. ऐसे में जरूरी है कि आप एक हेल्दी वेट को मेनटेन करें. इसके लिए बैलेंस डाइट लें और फिजिकल एक्टिविटीज करते रहें.

स्मोकिंग-

स्मोकिंग के कारण हार्ट अटैक का खतरा काफी ज्यादा होता है. कई स्टडीज में यह दावा किया गया है कि जो लोग स्मोकिंग करते हैं उनमें हार्ट अटैक का खतरा 2 से 4 गुना ज्यादा होता है. स्मोकिंग करने से हृदय तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है, रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है और ब्लड क्लॉटिंग का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है.

एक्सरसाइज ना करना-

एक्सरसाइज और कोई फिजिकल एक्टिविटीज ना करने के कारण भी हृदय से संबंधित बीमारियों का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है. रोजाना एक्सरसाइज करने से कार्डियोवस्कुलर बीमारियों का खतरा काफी कम होता है. फिजिकल एक्टिविटीज करके आप मोटापा, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल से भी छुटकारा पा सकते हैं. एक्सरसाइज करने से शरीर में ब्लड प्रेशर का लेवल भी कम होता है. ऐसे में माना जाता है कि व्यस्कों को रोजाना 75 मिनट एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए.

नोट- उपरोक्‍त दी गई जानकारी व सुझाव सिर्फ सामान्‍य सूचना के उद्देश्‍य से पेश की गई है, हम इन पर किसी भी प्रकार का दावा नहीं करते है.

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मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक : 2.60 लाख से अधिक लोगों का हुआ इलाज

Date : 21-Jan-2023

महासमुंद। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक योजना के तहत महासमुन्द सहित विकासखण्ड बागबाहरा, बसना, सरायपाली और पिथौरा में हर हफ्ते लगने वाली हाट-बाजार में क्लिनिक स्वास्थ्य शिविर में जांच और इलाज की सुविधा मुहैया कराया जा रहा है। वहीं मरीजों को त्वरित रूप से आधारभूत स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही है। जिले 1 अप्रैल 2022 से 16 जनवरी 2023 तक (साढ़े 9 माह में) 84 हाट बाजारों में 3159 चिकित्सक दल की टीम गयी। 2 लाख 60 हजार 559 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनको दवाइयां दी गई।

इस योजना से ग्रामीणों को अधिक से अधिक लाभ हो इसके लिए समय-समय पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर नुक्कड़ नाटक/कलाजत्था के माध्यम से स्थानीय भाषाओं में शिविर के बारे में लोगों को जानकारी देकर जन जागरूकता निर्मित की जाती है। कोरोना काल के चलते चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मी इस महामारी से लोगों के स्वास्थ्य रक्षा में लगे होने एवं लॉकडाउन के कारण इस योजना पर भी असर पड़ा।

जिले के विकासखंड बागबाहरा के अंतर्गत आने वाले ग्राम चुरकी, खट्टी, तुसदा आदि के साप्ताहिक हाट-बाजार में आये ग्रामीणों से बात करने पर उन्होंने बताया कि शासन की यह योजना बहुत ही फायदेमंद है। इस योजना के बारे में ग्रामीणों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब हमारे स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार ने खुद उठा ली है। परिवार के सदस्यों को भी स्वास्थ्य जांच के लिए बाजार में लगे हाट-बाजार में भी लाते हैं। हाट-बाजार में नियमित क्लिनिक लगने से अब पहले की अपेक्षा भीड़ बढ़ी है। ग्रामीण अपनी दैनिक उपयोग की सामग्री क्रय करने हेतु साप्ताहिक बाजार में आते हैं। जहां खरीदी के साथ-साथ वे अपने स्वास्थ्य की भी जांच करवा लेते हैं। दुर्गम इलाकों के लिए मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना किसी देवदूत से कम नहीं है।

छत्तीसगढ़ राज्य में शुरू की गई मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक योजना मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने जन-जन तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से महात्मा गांधी की 150वीं जयंती (2 अक्टूबर 2019) पर पूरे प्रदेश में यह योजना लागू की। प्रदेश के कई जिले की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में न जाने कितने ऐसे इलाके हैं, कितने गांव हैं, जहां से निकलकर जिला मुख्यालय तक की दूरी तय कर इलाज के लिए अस्पताल आना लोगों के लिए बेहद कठिन काम होता था। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं को लेकर होती थी, यहां प्रत्येक दिन मलेरिया से लेकर दूसरी अन्य बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले लेती है। गर्भवती महिलाओं के लिए इन इलाकों से निकलकर अस्पताल आना बेहद कठिन काम होता था। इस योजना में स्वास्थ्य अमला हाट-बाजारों में शिविर लगाकर लोगों का इलाज करने के साथ ही निःशुल्क दवाइयां भी उपलब्ध कराते हैं। इससे ग्राम के ही नजदीक ग्रामवासी अपने स्वास्थ्य का परीक्षण और उपचार कराते हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.आर. बंजारे ने बताया कि कोरोना काल के चलते पहले महासमुंद जिले के 15 हाट-बाजारों में क्लिनिक का संचालन किया जा रहा था। लेकिन कोरोना की तीव्रता कम होने के साथ-साथ दूरस्थ अंचलों में लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजारों सहित शिविरों की संख्या बढ़ती-घटती रही। वर्तमान में 84 हाट बाजारों में मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक  योजनांतर्गत स्वास्थ्य शिविर लगाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य स्वास्थ्य लाभ पहुंचाना, गर्भवती महिलाओं का पंजीयन, प्रसवपूर्व संपूर्ण जांच एवं पूर्ण टीकाकरण सहित बी.पी, शुगर, मलेरिया, जांच किट के माध्यम से पैथोलॉजी जांच, नेत्र जांच, जागरूकता के अभाव में होने वाले अकाल मृत्यु को रोकना, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना, कुपोषण दर कम करना आदि है।

महासमुंद विकासखंड सहित सभी बागबाहरा, पिथौरा, बसना और सरायपाली में लगने वाली हाट बाजारों में मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक शिविर का संचालन किया जा रहा है। साप्ताहिक हाट बाजारों में चिकित्सक, पैरा मेडिकल टीम के द्वारा स्वास्थ्य शिविर लगाकर स्वास्थ्य उपचार किया जा रहा है। जिले में लगाये जा रहे हाट-बाजार में लगाए गए स्वास्थ्य शिविरों में मलेरिया, फाइलेरिया, टीबी, डायरिया, कुपोषण, एनीमिया, सिकल सेल, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज के साथ ही गर्भवती महिलाओं के ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन के अलावा गर्भधारण परीक्षण भी किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त चर्म रोग और एच.आई.वी. की भी जॉच की गई। पहले जानकारी एवं अशिक्षा के कारण अंदरूनी इलाके के ग्रामीण आसपास के बैगा-गुनिया और सिरहा से झाड़-फूक के जरिये अपना इलाज करवाते थे। सही इलाज के अभाव में उनकी मृत्यु तक हो जाती थी। उन दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना अब बेहद लाभदायक सिद्ध हो रहा है।

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निशुल्क कैंसर जांच शिविर में 100 से अधिक लोगों ने कराया जांच

Date : 21-Jan-2023

खरसिया। अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच एवं जागृति शाखा के 38वें स्थापना दिवस के उपलक्ष में सिविल अस्पताल खरसिया में निशुल्क कैंसर जांच शिविर तथा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।

प्रांतीय उपाध्यक्ष तथा जागृति शाखा खरसिया की अध्यक्ष आशा अग्रवाल ने सर्वप्रथम कैंसर जांच करवाकर अन्य लोगों को जांच करवाने की प्रेरणा दी। वहीं नपा अध्यक्ष राधासुनील शर्मा सहित 100 से अधिक लोगों ने कैंसर की निशुल्क जांच करवाई। कैंसर जांच के लिए अत्याधुनिक मशीनों से सुसज्जित कैंसर जांच वैन में कुशल डॉक्टर्स उपलब्ध रहे। इस दौरान रक्तदान भी किया गया।

इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ युवा नेता सुनील शर्मा ने कहा कि मारवाड़ी युवा मंच के हर एक कार्यक्रम में नगर पालिका विशेष रूप से सहयोगी रहेगी।

वहीं रूक्मणी पावर प्लांट के चेयरमैन बजरंग अग्रवाल ने कहा कि युवा मंच के हर कार्यक्रम में हम कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। कार्यक्रम में सिविल अस्पताल प्रभारी डॉ.दिलेश्वर पटेल, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कैलाश दवाईवाला, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कमल गर्ग, महेश साहू, जगदीश मित्तल, प्रहलाद अग्रवाल, राम शर्मा तथा बिजली विभाग से संतोष साहू, मनोज राठौर, जयप्रकाश डनसेना सम्मिलित हुए। वहीं मारवाड़ी युवा मंच एवं जागृति शाखा की सभी सदस्यों की उल्लेखनीय भूमिका रही। कार्यक्रम में नगरपालिका की सभी पार्षदगण सम्मिलित हुईं।

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आने वाले समय में भारत को करना पड़ सकता कैंसर जैसी घातक बीमारियों का सामना

Date : 20-Jan-2023

तिरुवनंतपुरम (एजेंसी) । आने वाले समय में भारत को कैंसर जैसी घातक बीमारियों की सुनामी झेलनी पड़ सकती है। वैश्वीकरण, बढ़ती अर्थव्यवस्था, बढ़ती उम्र की आबादी और बदलती जीवनशैली इसका कारण बनेगी। अमेरिका के ओहियो स्थित क्लीवलैंड क्लिनिक के हेमेटोलॉजी एंड मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जामे अब्राहम ने एक रिपोर्ट में यह दावा किया है।

अब्राहम ने कहा कि इसकी रोकथाम और उपचार के लिए कैंसर के टीके, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा डिजिटल तकनीक का विस्तार और तरल बायोप्सी को नया रूप देना होगा। डॉ. अब्राहम ने लिखा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी और टेलीहेल्थ रोगियों और विशेषज्ञों के बीच की खाई को कम करेंगे। यह संभावित रूप से हमारे देश के दूरदराज के हिस्सों में विशेषज्ञों की देखभाल की उपलब्धता को बढ़ाएगा। विशेष रूप से इसकी व्यवस्था गांवों में उपलब्ध कराई जाएगी। डॉ. अब्राहम ने कहा कि भारत के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती लाखों लोगों के लिए महंगे इलाज को किफायती बनाना होगी।

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