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क्या कार की AC से भी फैल रहा है कोरोना, जानिए सच ?

Date : 04-Jul-2020

कोरोना वायरस संक्रमण की मौजूदा स्थिति में कई तरह के मिथक भी चल रहे हैं। इससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति है। खासतौर से एयरकंडीशनर के उपयोग को लेकर कई भ्रांतियां फैल गई है। इसी कड़ी में केरल सरकार की एक विशेषज्ञ पैनल ने कार में AC के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाला है। यदि राज्य सरकार पैनल के प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो ड्राइविंग करते समय कार में AC के उपयोग पर पाबंदी लगाई जा सकती है। बता दें कि पैनल की रिपोर्ट में तथ्य सामने आया है कि ड्राइविंग करते समय यदि कार में AC का उपयोग किया जाता है तो ये कोरोनो वायरस को प्रसारित करने में मदद कर सकता है। इससे कार में बैठे लोग संक्रमित हो सकते हैं।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा- 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय मूल्यांकन बैठक के दौरान एक्सपर्ट पैनल के चेयरमेन बी. इकबाल ने ये सुझाव दिया है। इसके बाद तय किया गया कि एयर कंडीशंड की दुकानों को कार्य करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। एक अन्य प्रस्ताव था कि यदि कारों और अन्य वाहनों में AC का उपयोग होता है तो इसे नियंत्रित किया जाए। हालांकि सरकार ने अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं किया है।

इस तरह फैल सकता है वायरस

केंद्र सरकार स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी दस्तावेज के मुताबिक संक्रामण फैलाने वाले तत्व एयरोसोल एयर-वेंटिलेशन या एयर-कंडीशनिंग सिस्टम की मदद से लंबी दूरी पर फैल सकते है। एक विशेषज्ञ के मुताबिक जिस तरह लोग हाथ धो रहे हैं, फेस मास्क और ग्ल्वस पहन रहे हैं और सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं, ठीक वैसे ही कार और भवनों में एयर कंडीशनिंग सिस्टम को भी बंद रखा जाना चाहिए।

पर्याप्त सबूत हैं

विशेषज्ञ पैनल का ये भी कहना है कि एयर-वेंटिलेशन या एयर-कंडीशनिंग सिस्टम से कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) के संचरण को साबित करने के लिए पर्याप्त अध्ययन नहीं हैं, लेकिन इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि ये वायरस ऐसी ही प्रणालियों से प्रसारित हो सकते हैं। यदि कोई संक्रमित व्यक्ति कार में बैठा हो तो ये एयर कंडीशनिंग सिस्टम केबिन के चारों ओर वायरस को प्रसारित कर सकता है। इसी तरह की स्थिति उन इमारतों के साथ भी हो सकती हैं जहां हवा आने-जाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

ये सुझाव दिया

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि प्राकृतिक वेंटिलेशन सिस्टम ही प्रभावी तरीके से संक्रमण नियंत्रण को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में ड्राइविंग करते समय AC चलाने से ज्यादा बेहतर है कि कार के सारे शीशे खोल दिए जाए और प्राकृतिक हवा को कार में प्रवेश करने दिया जाए। इससे संक्रमण की आशंका बहुत कम हो जाती है।

सिंगापुर में हुआ अध्ययन

सिंगापुर में हुए एक अध्ययन में भी दावा किया गया कि कोरोना वायरस ठंडे और शुष्क जलवायु में ज्यादा असरकारक होते हैं, इसलिए एयर कंडीशनिंग सिस्टम के उपयोग से बचना होगा। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने लोगों को एसी का उपयोग ना करने की सलाह दी है।

ये स्टडी भी कहती है

इसके अलावा अमेरिका सहित कुछ अन्य देशों में हुई स्टडी के मुताबिक एयर कंडीशन वाले स्पेस में वायरस युक्त सूक्ष्म बूंदे हवा में जाकर एक मीटर से ज्यादा दूरी तक भी जा सकती हैं और अन्य लोगों को संक्रमित कर सकती हैं। कोरोना वायरस भले ही हवा के जरिए ना फैले लेकिन एसी में नमी और हवा के कारण ये कुछ दूर तक सफर करते हुए अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है।

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वर्ल्ड मिल्क डे विशेष : कोरोना वायरस से लड़ने में दूध करेगा मदद, सबके लिए एक ग्लास दूध है जरूरी

Date : 01-Jun-2020

आज दुनिया भर में बीसवाँ विश्व दुग्ध दिवस मनाया जा रहा है। इस उत्सव के माध्यम से दूध के महत्व को लोगों के सामने लाया जाता है ,जो बड़ी  जनसंख्या पर असर डालता है। जहां पूरा विश्व कोरोना (कोविड-19) महामारी से जूझ रहा है। अभी तक न तो कोई सटीक दवा बन पाई है और न ही कोई वैक्सीन। इस महामारी में कोई आस नहीं दिख रही है। इस बीच आयुष मंत्रालय ने भी हल्दी वाले दूध के जरिये इम्यूनिटी बढ़ाने की सलाह दी है। इस महामारी में लोग दूध और हल्दी  का प्रयोग कर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता(इम्यूनिटी) को बढ़ा रहे हैं। पशुधन विकास विभाग उपसंचालक डॉ अजमेर सिंह कुशवाहा ने बताया कि दूध में कैल्शियम,  मैग्नीशियम, जिंक, फास्फोरस,  आयोडीन,  आयरन,  पोटैशियम,  फोलेट्स, विटामिन ए, विटामिन डी, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी-12, प्रोटीन आदि मौजूद होते हैं। गाय के दूध में प्रति ग्राम 3.14 मिली ग्राम कोलेस्ट्रॉल होता है। गाय का दूध पतला होता है। जो शरीर मे आसानी से पच जाता है। पोषण के दृष्टिकोण से दूध हमारे लिए सबसे साफ सुथरा भोजन है। खाद्य आपूर्ति में शरीर को तीस से अधिक विशिष्ट सामग्रियों की आवश्यकता होती है। एक भी खाद्य पदार्थ सभी की आपूर्ति नहीं करता है, लेकिन दूध लगभग सभी की आपूर्ति करता है। आयुर्वेद के अनुसार गाय के ताजा दूध को ही उत्तम माना जाता है। पुराणों में दूध की तुलना अमृत से की गई हैं, जो शरीर को स्वस्थ मजबूत बनाने के साथ-साथ कई सारी बीमारियों से बचाता है। अथर्व वेद में लिखा है कि दूध एक सम्पूर्ण भोज्य पदार्थ है। इसमें मनुष्य शरीर के लिए आवश्यक वे सभी तत्व हैं जिनकी हमारे शरीर को आवश्यकता होती है। 

दूध एक ऐसी खाद्य वस्तु जो दुनिया के लगभग सभी देशों में उपलब्ध है। आज दूध से निर्मित न सिर्फ दही, धी और पनीर के अलावा कई और खाद्य पदार्थ दुनिया भर में मौजूद हैं। दूध और उससे बने उत्पाद की महत्ता के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए ही हर साल 1 जून को विश्व दूध दिवस मनाया जाता । इस बार विश्व दूध दिवस यानी वर्ल्ड मिल्क डे की 20वीं वर्षगांठ है। मालूम हो कि साल 2001 में पहला विश्व दुग्ध दिवस आयोजित किया गया। दुनियाभर के कई देश इसमें हिस्सा लेते हैं और हर साल संख्या बढ़ती ही जा रही है।

एक जून ही क्यों चुना गया ?
विश्व दूध दिवस पहली बार साल 2001 में एफएओ (संयुक्त राष्ट्र का खाद्य और कृषि संगठन) द्वारा स्थापित किया गया था। दुनियाभर के कई देश इसी तिथि के आसपास राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाते थे, इसलिए 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस के लिए चुना गया। एफएओ की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, ‘‘दुग्ध दिवस एक दिन दूध पर ध्यान केंद्रित करने, दूध और दुग्ध उद्योग से जुड़ी गतिविधियों को प्रचारित करने का अवसर प्रदान करता है।दूध को वैश्विक भोजन के रूप में मान्यता देते हुए कई देश 1 जून को ही विश्व दुग्ध दिवस मनाते हैं। एफएओ की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में 72 देशों में 586 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। विश्व दुग्ध दिवस दुग्ध उद्योग से जुड़ी गतिविधियों को सार्वजनिक करने में बेहतर और प्रभावी काम करता है। मालूम हो कि भारत में 26 नवंबर को दुग्ध दिवस मनाया जाता है।

विश्व दुग्ध दिवस का उद्देश्य
 दुनियाभर में दूध के महत्व के बारे में आम लोगों के बीच विश्व दुग्ध दिवस एक असरदार क्रांति लाया है। अंतरराष्ट्रीय डेयरी संघ भी ढेर सारे विज्ञापन संबंधी क्रिया-कलापों के तहत एक स्वस्थ और नियंत्रित भोजन के रूप में दूध के महत्व को बताने की शुरुआत की है। दूध शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्वों का एक बहुत अच्छा स्रोत है, जिसमें कैल्सियम, मैग्नीशियम, जिंक, फॉसफोरस, आयोडीन, आयरन, पोटैशियम, फोलेट्स, विटामिन ए, विटामिन डी, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी12, प्रोटीन, फैट आदि मौजूद होता है। ये बहुत ही ऊर्जायुक्त आहार होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। इसमें उच्च गुणवत्ता के प्रोटीन समेत आवश्यक और गैर-आवश्यक अमीनो एसिड और फैटी एसिड मौजूद होता है। दूध की महत्ता लोगों को समझाने के लिये विश्व दुग्ध दिवस उत्सव बड़ी जनसंख्या पर असर डालता है।

दूध क्यों है जरूरी
दूध का हर किसी के दैनिक जीवन में खास महत्व है। यह प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरा है, जो जीवन के सभी चरणों में विकास के लिए आवश्यक है। हर व्यक्ति के लिए दिन में कम से कम एक वक्त दूध जरूरी बताया गया है। इस वक्त कोरोना वायरस की वजह से लोगों को इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सलाह दी जा रही है। यह एक सिद्ध तथ्य है कि प्रतिदिन एक गिलास दूध पीने से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यूनिटी में सुधार होता है और यह बीमारियों को दूर रखता है।  इसके अलावा दूध में हल्दी डालकर पीने से भी शरीर की इम्यूनिटी बढ़ती है। विदेशों में हल्दी वाला दूध गोल्डन मिल्क के नाम काफी प्रचलित है।  गौरतलब है कि सादा दूध नहीं पीने के बदले आप दही, पनीर, मक्खन, आइसक्रीम, पनीर या फ्लेवर्ड मिल्क के तौर पर अन्य तरीके से इसको अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।

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अव्यवस्थित जीवनशैली तथा मोटापा डायबिटीज डायबिटीज़ का प्रमुख कारण : डॉ. तिवारी

Date : 26-May-2020

हेल्थ डेस्क। यह स्पष्ट है कि मोटापा टाइप—2 डायबिटीज़ का प्रमुख कारण है। अव्यवस्थित जीवनशैली व खान-पान इसमें मुख्य भूमिका निभाते है। ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ, विशेष रूप से परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट, रक्त में इंसुलिन का स्तर बढ़ाते हैं। पेट का मोटापा (ट्रंकल ओबेसिटी), लगातार बढ़ रहा इंसुलिन का स्तर, शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध (resistance) पैदा करता है। भोजन के बाद अग्नाशय (पैंक्रियास) बढ़े शुगर स्तर का सामना करने के लिए अधिक इंसुलिन का उत्पादन करता है अतिरिक्त इंसुलिन का उत्पादन करने से अग्नाशय पर उत्पन्न लगातार उच्च मांग अग्नाशय (पैंक्रियास) में इंसुलिन पैदा करने वाली बीटा सैल्स को नुकसान पहुंचाता है। 

क्या मधुमेह होने से रोका जा सकता है? 
हां, Swedish   diabetes prevention program and Indian diabetes prevention program, और LOOK AHEAD trial से इसके प्रमाण मिलते हैं कि डायबिटीज़ को संयमित जीवनशैली से रोका जा सकता है। फीनिश डीपीपी में पाया गया कि संयमित जीवन शैली से से 58 प्रतिशत सापेक्ष जोखिम में कमी हुईऔर डायबिटीज़ के होने को 5 वर्ष आगे बढ़ाया। 

प्री—डायबिटीज को डायबिटीज में बदलने से रोकने के आसान उपाय
-5 प्रतिशत से अधिक वजन घटाना
-भोजन में फैट की मात्रा कुल कैलोरीज़ की 30 प्रतिशत से कम
-सैचुरेटेड फैट कुल कैलोरीज़ खपत में 10 प्रतिशत से कम
-भोजन में रेशे (फाइबर) कि मात्रा 15 ग्राम/एक हजार कैलोरीज़ से ज्यादा
-30 मिनट से ज्यादा का शारीरिक व्यायाम

क्या मधुमेह से मुक्ति संभव है? 
क्या मधुमेह होने के बाद वापस सामान्य होना संभव है? इसका सबूत डायरेक्ट ट्रायल स्टडी से मिलता है जिसको यूनाइटेड किंग्डम में प्राथमिक उपचार केंद्रों में किया गया।  इस अध्ययन  में टाइप—2 मधुमेह के रोगियों का कैलोरी प्रतिबंधित तरल आहार के माध्यम से तेज़ी से वज़न घटाया गया और श्रंखलाबद्ध तरीके से खाद्य पदार्थ जोड़ें गए व वज़न कम बनाए रखने के कार्यक्रम पर रखा गया। 
डायबिटीज रेमिशन क्लिनिकल ट्रायल (डायरेक्ट ट्रायल) में लगभग 300 रोगियों ने हिस्सा लिया, कैम्ब्रिज वेट प्लान  से वजन घटाने  व एक समर्पित वज़न नियंत्रण कार्यक्रम से, 36 प्रतिशत टाइप—2 डायबिटीज़ के रोगी 2 वर्ष तक बिना दवाई लिए अपनी बीमारी को नियंत्रण में रख सके। 
यह इंटरवेंशन मधुमेह और बीपी की दवाओं को बंद करने से शुरू हुआ कम कैलोरी वाले तरल आहार के साथ 3 से 5 महीनों के लिए प्रतिदिन 825 से 853 कैलोरीज का भोजन दिया गया।इसके बाद श्रृंखलाबद्ध तरीके से भोज्य पदार्थ जोड़े गए ,उस घटे हुए  वजन को बनाए रखने के लिए 2 सालों में औसतन 7.7 समर्पित सहयोग परामर्श दिए गए। इस अध्ययन से इस अवधारणा को हमेशा के लिए विश्राम मिल गया की डायबिटीज कभी न खत्म होने वाली बीमारी है।

बीमारी का सुसुप्त अवस्था में जाना इन चीजों पर निर्भर 
1. जिन लोगों ने 10 किलो से ज्यादा वजन घटाया उनमें 64 प्रतिशत मरीज सुसुप्त अवस्था (रैमिशन) प्राप्त करने में कामयाब रहे।
2. वजन घटाने के बावजूद भी जिन मरीजों में बीमारी की अवधि औसतन 2.7 साल से ज्यादा थी उनमें बीमारी सुसुप्त अवस्था (रैमिशन) में नहीं गई।

कम कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार (मेडिटरेनियन डायट)
कम कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार शरीर में इन्सुलिन रेजिस्टेंस को कम करते हैं 2014 में प्रकाशित नेपल्स की सेकंड यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार 1 साल तक कम कार्बोहाइड्रेट वाली भूमध्यसागरीय आहार लेने से 15 प्रतिशत टाइप टू डायबिटीज के मरीज, अपनी बीमारी को सुसुप्त अवस्था मैं लाने में कामयाब रहे इसके विपरीत एक साल में कम वसा वाले वाले आहार पर केवल 4 प्रतिशत मरीज अपनी बीमारी को सुसुप्त अवस्था मैं ला पाए और 6 साल में इनका प्रतिशत शून्य था।

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दुनिया भर में प्रतिवर्ष हेपेटाइटिस-ई वायरस से संक्रमित होते हैं 2 करोड़ से अधिक लोग

Date : 26-May-2020

हेल्थ डेस्क। हेपेटाइटिस-ई का संक्रमण जच्चा बच्चा की जान ले सकता है। दुनिया भर में प्रतिवर्ष 2 करोड़ से अधिक लोग हेपेटाइटिस-ई वायरस से संक्रमित होते हैं। यह वायरस लिवर (यकृत/जिगर) पर आक्रमण करता है। पहली बार 1978 में कश्मीर की घाटियों में इस वायरस का पता लगा था। इस संक्रमण से लिवर फेल हो सकता है जिससे रोगी की मृत्यु हो सकती है। ऐसे मरीजों की चिकित्सा ऐसे केन्द्रों में करना आवश्यक हो जाता है जहां लिवर ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) की सुविधा उपलब्ध हो। लिवर फेलर के मामले में लिवर ट्रांसप्लांट ही रोगी को बचाने का एकमात्र तरीका होता है।हेपेटाइटिस-ई का वायरस मानव मल के द्वारा फैलता है। इसलिए साफ पेयजल, भोज्य पदार्थों (सब्जी-भाजी) की स्वच्छता एवं हाथों की स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। हेपेटाइटिस-ई वायरस से संक्रमित होने के बाद इसके लक्षण कुछ सप्ताह या महीने में उभर सकते हैं। कभी कभी इसके कोई विशेष लक्षण सामने नहीं आते और रोगी अपने आप 6 से 8 सप्ताह में स्वस्थ हो जाता है। कुछ मरीजों में बुखार, चक्कर आना, उल्टियां होना, आंखों में पीलापन, भूख न लगना, थकान महसूस होना, पेट में दर्द होना शामिल है। हेपेटाइटिस-ई एक आरएनए वायरस है। इसके चार जीनोटाइप पाए जाते हैं। एशिया में जीनोटाइप-1 के ही मामले ज्यादातर सामने आते हैं। यह गर्भावस्था के दौरान ज्यादा परेशान कर सकता है। गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में संक्रमण गर्भवती तथा गर्भस्थ शिशु की मृत्यु का कारण बन सकता है।

गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के विकास के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं हारमोन में कुछ परिवर्तन होते हैं। इसके चलते गर्भवती के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में हेपेटाइटिस-ई का संक्रमण होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। संक्रमित मरीजों में से 15 से 25 फीसद रोगियों की मृत्यु हो जाती है। 15 से 60 फीसदी मरीजों में एक्यूट लिवर फेल्यर की स्थिति बन सकती है। ऐसी स्थिति में कैडेवेरिक लिवर (शव का जिगर) प्रत्यारोपित किया जा सकता है। पर यह उपलब्ध नहीं होने पर परिवार के किसी भी स्वैच्छिक दानदाता के लिवर का एक हिस्सा निकालकर प्रत्यारोपण किया जा सकता है। ऐसे मरीजों की चिकित्सा केवल ऐसे ही संस्थानों में सफलतापूर्वक की जा सकती है जहां लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध हो।

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लॉकडाउन के कारण भारत में बढ़ सकती है मानसिक रोगी, अवसाद को दूर करने के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरुरी

Date : 26-May-2020

हेल्थ डेस्क। देश अब लॉकडाउन के चौथे चरण में प्रवेश कर चुका है। कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए, सरकार ने तालाबंदी का सहारा लिया जब देश में कोरोना रोगियों की संख्या सिर्फ पांच सौ से अधिक थी। आज, जब हम लॉकडाउन के चौथे चरण में हैं, तो कोरोना पॉजिटिव रोगियों की संख्या एक लाख से ज्यादा पहुंच चुकी है।ऐसे में यह संकेत साफ है कि लोगों को जल्द ही तालाबंदी से राहत नहीं मिलने वाली है और सरकार अब खुद ही संकेत दे रही है। लॉकडाउन 3 के दौरान कई ऐसी रिपोर्ट और अध्ययन सामने आए हैं जिसमें लोगों ने लॉकडाउन के कारण होने वाली समस्याओं के कारण अपनी जान दे दी। पिछले हफ्ते इंदौर में राज्याभिषेक होने के डर से एक बुजुर्ग ने अस्पताल से कूद कर अपनी जान दे दी, जबकि भोपाल में एक व्यवसायी ने तालाबंदी के कारण नुकसान के कारण आत्महत्या कर ली। एक अध्ययन के अनुसार, 19 मार्च से 2 मई तक देश में लॉकडाउन के दौरान 338 लोगों की मौत हुई, जिसमें 168 मामले आत्महत्या से संबंधित थे। मनोचिकित्सक डॉक्टरों का कहना है कि लॉकडाउन के लगातार बढ़ने के कारण आने वाले वर्षों में मानसिक रोगियों की एक सुनामी आने वाली है। अवसाद इतना बढ़ गया है कि लोग आत्मघाती कदम उठाने से नहीं हिचकिचा रहे हैं। हाल ही में, भोपाल में कई ऐसे आत्महत्या के मामले सामने आए, जिसके पीछे केवल तालाबंदी थी।कोरोना और उसके बाद के लॉकडाउन ने अचानक मानसिक रोगियों की संख्या में वृद्धि की है। उनके पास आने वाले रोगियों में से कई ऐसे हैं, जो मूल कारण हैं जिनके पीछे वित्तीय संकट और भविष्य की चिंता है। किसी को नौकरी जाने का डर है तो किसी को बिजनेस में लगातार हो रहे नुकसान से परेशान है। इसके साथ ही, भविष्य की चिंताओं को लेकर लोगों में एक अलग प्रकार का चिंता विकार देखा जा रहा है।डॉ। सत्यकांत का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान, उन्हें फोन और इन-पर्सन द्वारा ऐसे कई लोगों से संपर्क किया गया, जो घर पर रहते हुए कोरोना संक्रमण से डरते हैं। वह कोर्न संक्रमण के डर से सामाजिक भेदभाव के बारे में चिंतित है। कई ऐसे मरीज फिर से उसके पास पहुंच गए जो पिछले एक से दो साल से पूरी तरह से ठीक थे।
 
कोरोना संक्रमण का डर मानसिक स्वास्थ्य के मामलों में वृद्धि का सबसे बड़ा कारण है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें लोग केवल इस डर से अस्पताल पहुंच रहे हैं कि वे कोरोना बन गए हैं। इस लॉकडाउन के कारण, कई लोग हैं जो विभिन्न शहरों में फंस गए हैं और उनके परिवार अलग-अलग हैं। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें ऐसे लोगों को अस्पतालों में मानना ​​पड़ा, जो अपने परिवार से दूर थे। उनमें से कई ने अपनी जान गंवा दी। इनमें 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या अधिक है।
लगातार बढ़ते लॉकडाउन के कारण, आर्थिक अस्थिरता और भविष्य के कारण लोगों में अवसाद के मामले बढ़ रहे हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन ने संकेत दिया कि यदि लॉकडाउन एक सप्ताह तक विस्तारित होता है, तो भारत के एक तिहाई से अधिक परिवार अपना जीवन जीने के लिए आवश्यक संसाधनों को खो देंगे। इसके साथ, देश में बेरोजगारी का आंकड़ा अब लॉकडाउन के तहत 30 प्रतिशत के करीब पहुंच गया है।


मनोचिकित्सक की सलाह
ऐसे में समय की जरूरत है कि हमें कोरोना के साथ रहना सीखना होगा। वह कहता है कि अब 'हमें कोरोना को हराना है, कोरोना के साथ जीना सीखो'। वह कहता है कि कोरोना को हराने के लिए, स्लोगन ने कोरोना को शक्तिशाली होने का गौरव दिलाया, जबकि दूसरे ने स्वीकृति लाकर जागरूकता ला दी।
अब जब लॉकडाउन की चौथी किस्त आ गई है, मनोचिकित्सक अधिक ध्यान देने का आह्वान करते हुए कहते हैं कि ऐसी स्थिति में, हमें अपने पुराने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ-साथ घर के सदस्यों के साथ लगातार संपर्क में रहना चाहिए ताकि तनाव और अवसाद से राहत मिल सके। इसके साथ ही तनाव को दूर करने के लिए आप इस अवधि के दौरान योग, संगीन के साथ-साथ अपनी पसंद के नए कौशल सीखने के साथ खुद को व्यस्त रख सकते हैं।

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पांच करोड़ से अधिक भारतीयों के पास हाथ धोने की सुविधा नहीं, उन्हें जोखिम बहुत ज्यादा: अध्ययन

Date : 21-May-2020

नयी दिल्ली, (एजेंसी). भारत में पांच करोड़ से अधिक भारतीयों के पास हाथ धोने की ठीक व्यवस्था नहीं है जिसके कारण उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने और उनके द्वारा दूसरों तक संक्रम फैलाण फैलने का जोखिम बहुत अधिक है।अमेरिका में वाशिंगटन विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ मैट्रिक्स ऐंड इवेल्यूएशन (आईएचएमई) के शोधकर्ताओं ने कहा कि निचले एवं मध्यम आय वाले देशों के दो अरब से अधिक लोगों में साबुन और साफ पानी की उपलब्धता नहीं होने के कारण अमीर देशों के लोगों की तुलना में संक्रमण फैलने का जोखिम अधिक है। यह संख्या दुनिया की आबादी का एक चौथाई है।जर्नल एन्वर्मेंटल हैल्थ पर्सपेक्टिव्ज में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक उप सहारा अफ्रीका और ओसियाना के 50 फीसदी से अधिक लोगों को अच्छे से हाथ धोने की सुविधा नहीं है।
आईएचएमई के प्रोफेसर माइकल ब्राउऐर ने कहा, ‘‘कोविड-19 संक्रमण को रोकने के महत्वपूर्ण उपायों में हाथ धोना एक महत्वपूर्ण उपाय है। यह निराशाजनक है कि कई देशों में यह उपलब्ध नहीं है। उन देशों में स्वास्थ्य देखभाल सुविधा भी सीमित है।’’ 
शोध में पता चला कि 46 देशों में आधे से अधिक आबादी के पास साबुन और साफ पानी की उपलब्धता नहीं है।इसके मुताबिक भारत, पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, नाइजीरिया, इथियोपिया, कांगो और इंडोनेशिया में से प्रत्येक में पांच करोड़ से अधिक लोगों के पास हाथ धोने की सुविधा नहीं है।ब्राउऐर ने कहा, ‘‘हैंड सैनिटाइजर जैसी चीजें तो अस्थायी व्यवस्था है। कोविड से सुरक्षा के लिए दीर्घकालक उपायों की जरूरत है। हाथ धोने की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हर साल 700,000 से अधिक लोगों की मौत हो जाती है।’’ (भाषा)

 

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चीन के लिए ये दवा बन गई है वरदान, कोरोना संक्रमित मरीज मात्र चार दिन में ठीक होकर वापस जा रहे है घर

Date : 21-Mar-2020

नई दिल्ली(एजेंसी). कोरोना वायरस (Corona Virus) के कोहराम के बीच एक बेहद ही अच्छी खबर सामने आई है. चीन ने एक दवा से अपने हजारों मरीजों को कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक कर लिया है. खुद चीनी सरकार ने माना है कि ये दवा इतनी इफेक्टिव है कि कोई भी कोरोना वायरस का मरीज मात्र चार दिन में ठीक होकर घर चला जा रहा है. 

चीन के साइंट व टेक्नोलॉजी मंत्री झांग शिनमिन ने पुष्टि की है कि जापानी दवा ‘फाविपिराविर’ (Favipiravir) नाम की दवा चीनी कोरोना वायरस मरीजों पर काफी असरदार साबित हुई है. चीनी अस्पतालों में आने वाले कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीज को यही दवा दी जा रही है. चीनी मंत्री का कहना है कि इस दवा से कोई भी मरीज मात्र चार दिनों के भीतर ठीक होकर घर वापस जा रहा है. उन्होने आगे ये भी बताया कि इससे पहले किसी मरीज को ठीक करने में 11 दिन या उससे अधिक का समय लग रहा था. 
बताते चलें कि चीन में अभी तक 81,193 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. लेकिन इनमें से लगभग 71,258 लोग ठीक होकर घर भी जा चुके हैं. अब तक चीन में 3,252 लोग इस वायरस की वजह से दम भी तोड़ चुके हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन से मिले मरीजों के एक्सरे रिपोर्ट से भी ये साबित हुआ है. जिन मरीजों को कोरोना वायरस इलाज के लिए जापानी दवा फेविपिराविर दिया गया उनके फेफड़े दोबारा से ठीक हो गए. दवा 91 प्रतिशत तक सटीक काम कर रही है. इसके उलट जिन मरीजों का इलाज अन्य दवाओं से किया गया उनमें मात्र 62 प्रतिशत के ही फेफड़े ठीक हो पाए. बताते चलें कि कोरोना वायरस सबसे ज्यादा फेफड़ों पर हमला करता है.  अभी तक भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से लगभग 2.44 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. इनमें से 86,025 लोग ठीक भी हो चुके हैं. भारत में अब तक कुल 270  लोग संक्रमित हो चुके हैं. देश में इसकी वजह से 4 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है.

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आयुर्वेद की वो औषधियां जो वजन कम करने में करती हैं मदद

Date : 19-Mar-2020

हेल्थ न्यूज़। वजन कम करने वाली आयुर्वेदिक दवा को लोग सर्च करते हैं। मोटापा कम करने और तेजी से वजन कम करने में आयुर्वेद की ये औषधियां बहुत फायदेमंद हैं। अगर आप भी वजन कम करने के लिए आयुर्वेदिक दवा खोज रहे हैं, तो इन हर्ब को अपनी डाइट में शामिल करें। वजन कम करने के लिए हेल्दी डाइट की जरूरत होती है। पेट की चर्बी कम करने के लिए वजन कम करने वाले फूड जरूरी होते हैं। मोटापा कम करने में आयुर्वेदिक उपाय व औषधि भी कारगर होती है। वजन कम करने में ऐसी हर्ब या औषधि की जरूरत होती है, जो मेटाबॉलिक रेट को तेज करती हों। आयुर्वेदिक औषधियों में पाचन तंत्र को ठीक करने के साथ वजन कम करने के गुण पाये जाते हैं। बेली फैट कम करने के लिए आयुर्वेद की कुछ औषधि बेहद कारगर हैं। हम यहां पर कुछ ऐसी औषधियों के बारे में बता रहे हैं जो तेजी से वजन कम करने में मदद करती हैं। मोटापा कम होने से डायबिटीज, हार्ट स्ट्रोक और ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है। डायबिटीज रोगियों के लिए आयुर्वेद की औषधि ब्लड शुगर कम करने में भी मदद करती हैं। तो देर किस बात कि आइए जानते हैं वजन कम करने वाली आयुर्विदक औषधियों के बारे में..

गुग्‍गुल मेटाबॉलिक रेट ठीक करता है 
मोटापा कम करने के लिए गुग्‍गुल का सेवन आयुर्वेद में बताया गया है। कई दवाओं में गुग्‍गुल का उपयोग किया जाता है। शरीर के मेटाबॉलिक रेट तेज करने में गुग्‍गुल मददगार है। शरीर के खराब कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में गुग्‍गुल मददगार है। गुग्‍गलका सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है। वजन घटाने के लिए बाजार में गुग्‍गुल कैप्सुल का सेवन भी आप कर सकते हैं।

त्रिफला पाचन तंत्र ठीक कर दूर करता है मोटापा 
पाचन तंत्र को ठीक करने के लिए आयुर्वेद में त्रिफला का सेवन करने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेदिक औषधियों में त्रिफला सबसे ज्यादा सेवन की जाने वाली दवा है। रात में सोने से पहले त्रिफला का सेवन वजन कम करने में मदद करता है। त्रिफला में आमला, हरड़ और बहेरा शामिल होता है। सुबह के समय गरम पानी में त्रिफला का सेवन तेजी से वजन कम करने में मदद करता है।

विजयसार तेजी से वजन कम करता है
डायबिटीज रोगियों को ब्लड शुगर कम करने के लिए आयुर्वेद में विजयसार को दवा के रूप में दिया जाता है। शरीर में जमी चर्बी को कम करने में विजयसार काफी मददगार होता है। पेट की चर्बी कम करने के लिए विजयसार एक आयुर्वेदिक औषधि है। वजन कम करने के लिए विजयसार की हर्बल चाय का सेवन आप कर सकते हैं।

दालचीनी वेट लॉस हर्ब 
तेजी से मोटापा घटाने के लिए दालचीनी का सेवन सबसे ज्यादा होता है। शहद और दालचीनी की चाय वजन कम करने में मददगार है। पेट की चर्बी कम करना हो या बढ़ते मोटापे को रोकना हो दालचीनी लाभदायक है। अगर आप सुबह के समय दालचीनी की चाय पीते हैं तो तेजी से मोटापा कम करते हैं।

पुनर्नवा से तेजी से मोटापा घटता है 
वैसे तो पुनर्नवा का उपयोग यूरिन इंफेक्शन और किडनी की सफाई में किया जाता है. लेकिन आयुर्वेद के अनुसार पुनर्नवा में मूत्रवर्धक गुण पाये जाते हैं, जो वजन कम करने में भी मददगार होता है।

मेथी बेली फैट कम करने में मददगार 
मेथी के सेवन से डायबिटीज रोगी ब्लड शुगर लेवल को कम करते हैं। जो लोग मोटापा के शिकार हैं उनके लिए मेथी दाने का पानी बहुत फायदेमंद होता है। अगर आप भी तेजी से वजन कम करना चाहते हैं तो मेथी का सेवन कर सकते हैं। जल्दी वजन कम करना चाहते हैं तो रात में मेथी दाने को पानी में डालकर रख दें। सुबह उठकर इस पानी का सेवन करें। कुछ ही सप्ताह में वजन कम होने लगता है। इसके अलावा आप मेथी पाउडर का सेवन भी अपनी डाइट में कर सकते हैं।

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कैंसर जितना ही खतरनाक है डायबिटीज

Date : 19-Mar-2020

निम्मी मूलवानी
डॉ. निम्मीज डायबिटिक केयर,
चांदखेड़ा, अहमदाबाद

डायबिटीज मेलिटस एक ऐसी अवस्था है जिसमें रक्त में शर्करा की मात्रा स्वस्थ स्तर से ज्यादा हो जाती है। यह सुनने में जितना सरल लगता है दरअसल है उतना ही जटिल। इसकी उपस्थिति के प्रमाण 3000 साल से भी अधिक पुराने हैं। इसका उल्लेक चरक संहिता में भी मिलता है। यह शब्द यूनानी भाषा का है जिसमें डायबिटीज का अर्थ है प्रवाह और मेलिटस का अर्थ है शर्करा। यह एक जीर्ण रोग है जो जीवन भर साथ चलता है। यह कैंसर या हृदय रोग जितना ही घातक है पर इसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता। लोग इसकी तरफ ध्यान तब देते हैं जब ये शरीर के आवश्यक कल पुर्जों को खराब करने लगते हैं। डायबिटीज से किडनी, हार्ट, ब्रेन, तंत्रिका तंत्र और रक्त धमनियां सभी खराब होने लगती हैं। डायबिटीज की वजह से हमारी शारीरिक व मानसिक यहां तक की वित्तीय सेहत भी बिगड़ सकती है। डायबिटीज के मरीजों की संख्या विश्वभर में बढ़ रही है। टाइप -2 डायबिटीज के मामलों में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है। टाइप-1 डायबिटीज के मामले में हम पूरी दुनिया में सबसे आगे हैं।

अब जबकि हम जानते हैं कि डायबिटीज खामोशी से हमारे अंगों को क्षति पहुंचा रहा है जिससे हम गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं तो हमें सचेत हो जाना चाहिए। हमें अपने शुगर लेवल की जांच नियमित रूप से कराकर शुगर लेवल को सुरक्षित दायरे में रखना चाहिए। यहां एक सवाल उठता है कि डायबिटीज से हम भारतीयों को ही इतना खतरा क्यों? पहली बात यह है कि हमारे जीन्स में गड़बड़ी है जिसके कारण वंशानुगत क्रम में हम मधुमेह के संभावित मरीज हैं। दूसरी बात यह कि बदले हुए खान-पान, आरामतलब जिन्दगी के कारण हम डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। भारतीयों पर किये गये एक शोध में पाया गया कि हममे डायबिटीज के लक्षण दूसरे देशों के लोगों के मुकाबले पहले प्रकट हो जाते हैं। जागरूकता के अभाव में 60 फीसदी डायबिटीज मरीजों का पता दुर्घटनावश चलता है। रोगी किसी और कारण से रक्त की जांच कराता है और डायबिटीज निकल आता है। पता लगने के बाद भी वे किसी विशेषज्ञ से सम्पर्क नहीं करते बल्कि स्वयं ही उसका नियंत्रण करने के टोटके अपनाने लगते हैं। देर से पता लगने और शुगर लेवल के अनियंत्रित रहने के कारण शरीर के अंग चुपचाप नष्ट होते रहते हैं और इसका गंभीर नतीजा सामने आता है।
तो डायबिटीज होने पर क्या करें? डायबिटीज होने पर घबराने की कतई जरूरत नहीं है। सही इलाज से डायबिटीज को नियंत्रण में रखा जा सकता है। आपको एक मधुमेह विशेषज्ञ से सम्पर्क करना चाहिए जो आपकी चिंता, भय, मिथक और अविश्वास को दूर कर आपको सही स्थिति की जानकारी दे सके। आपका चिकित्सक आपको लाइफ स्टाइल में सुधार करने, आहार चर्या में परिवर्तन करने और वर्जिश करने की सलाह देगा ताकि ब्लड शुगर का सही स्तर बनाए रखा जा सके। 
संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि डायबिटीज का पता लगने के बाद घबराने की जरूरत नहीं है।  सही दिनचर्या एवं औषधियों के योग से आप न केवल डायबिटीज को रोक सकते हैं बल्कि किसी किसी मामले में इससे हुई क्षति की भरपाई भी कर सकते हैं। यहां तक कि अपनी भावी पीढ़ी को डायबिटीज से बचाना भी संभव है। एक डायबिटीज विशेषज्ञ के तौर पर मेरी सलाह यही होगी कि आप डायबिटीज के प्रति जागरूक रहें, नियमित ब्लड शुगर टेस्ट करते रहें, बचाव के तरीके अपनाएं और एक दीर्घ स्वस्थ जीवन जिएं।

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क्या है कोरोना वायरस, जिससे घबराई है पूरी दुनिया

Date : 18-Mar-2020

हेल्थ न्यूज़। दुनिया में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 2 लाख  से ऊपर  हो गया। 170 देश प्रभावित हैं। मरने वालों की संख्या 8 हजार 231 पहुंच गई है। 82,866 संक्रमित स्वस्थ भी हुए हैं।  यूरोप में एशिया से ज्यादा मौतें हो गई हैं। यूरोप में कुल 3,421 और एशिया में 3,384 मौतें हो चुकी हैं। यूरोपियन यूनियन ने संक्रमण को रोकने के लिए  अपनी सीमाओं को सील कर दिया। उधर, पाकिस्तान में संक्रमित लोगों की संख्या 254 हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही इसे इमर्जेंसी घोषित कर चुका है। भारत में भी अब तक इसके 156 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए इसे फैलने से रोकना एक बड़ी चुनौती बन गई है। हालांकि, चीन इसे रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। दुनिया भर में कोरोना वायरस के केस लगातार सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लूएचओ ने कोरोना वायरस को अंतर्राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है। चीन से बाहर 170 देशों में कोरोना वायरस के कई मामलों की पुष्टि हुई है. 

क्या है कोरोना वायरस?
कोरोना वायरस (सीओवी) का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है। इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान में शुरू हुआ था। डब्लूएचओ के मुताबिक, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं. अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना है।

यह वायरस कैसे फैलता है ?
अभी तक इस वायरस के फैलने के माध्यम, साधन की स्पष्ट जानकारी नहीं है। यह एक नया विषाणु है और संभवत: यह पशुओं से उत्पन्न हुआ और अब यह मनुष्य से मनुष्य में फैल रहा है। 2019 नॉवेल कोरोना वायरस कैसे एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में जाता है यह भी अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छीकनें से यह फैलता है, उसी तरह जैसे सर्दी-जुकाम या फिर श्वास संबंधी रोग का कारण बनने वाले पैथेजन फैलाते हैं।  

क्या हैं इस बीमारी के लक्षण?
इसके संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है। यह वायरस दिसंबर में सबसे पहले चीन में पकड़ में आया था। इसके दूसरे देशों में पहुंच जाने की आशंका जताई जा रही है।

क्या हैं इससे बचाव के उपाय?
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से धोना चाहिए। अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है। खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्‍यू पेपर से ढककर रखें. जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें। अंडे और मांस के सेवन से बचें. जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें।

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