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जिला चिकित्सालय में एक से बढ़कर पांच हुई डायलिसिस मशीनें

Date : 24-Sep-2022

बैकुंठपुर। किडनी से संबंधित रोगों के इलाज में गम्भीर मरीजों के लिए डायलिसिस बेहद जरूरी होता है। एक बार डायलिसिस कराने के लगभग 2500 रुपये तक खर्च हो जाते हैं। ऐसे में मरीज और उनके परिजन के लिए मेडिकल खर्च वहन कर पाना मुश्किल हो जाता है। आमजन की सहूलियत और उनकी समस्याओं के निराकरण के मद्देनजर राज्य शासन के नेतृत्व में जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार करते हुए अब 05 मशीनें डायलिसिस के लिए जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर में उपलब्ध हैं। राहत की बात है कि यहां डायलिसिस की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है।

बता दें कि जिले में पूर्व से ही 01 डायलिसिस मशीन के ज़रिए यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अब 04 मशीनें और स्थापित की गई हैं जिससे एक ही दिन में अब 10 मरीजों को डायलिसिस की सुविधा मिल सकेगी।

कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में जिला चिकित्सालय में नयी मशीनें स्थापित की गयी हैं। दिसम्बर 2020 में जिला चिकित्सालय में एक मशीन के साथ डायलिसिस सेवा शुरू हुई थी। गत 10 सितंबर को स्थापित 04 नवीन मशीनों के साथ अब वर्तमान में कुल 5 मशीनों के माध्यम से डायलिसिस किया जा रहा है।

प्रतिदिन 10 मरीजों को मिल सकेगी सुविधा
सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि पूर्व में संचालित एक मशीन से प्रतिदिन 02 मरीजों को डायलिसिस की सुविधा दी जा रही थी, अब जिला अस्पताल में मशीनों की संख्या बढ़ने से प्रतिदीन 10 मरीजों का डायलिसिस किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि सितंबर 2022 तक जिला चिकित्सालय में कुल 536 डायलिसिस किए गए, किडनी रोगियों में डायलिसिस की बढ़ती आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए मशीनों की संख्या में वृद्धि की गयी, जिसके बाद विगत 15 दिवस में ही 24 जरूरतमंदों का निःशुल्क डायलिसिस किया गया।

जिला चिकित्सालय में डायलिसिस हेतु भर्ती मरीज 60 वर्षीय नारायण दुबे के परिजनों ने बताया कि वे पहले डायलिसिस हेतु अम्बिकापुर जाते थे, सप्ताह में तीन बार डायलिसिस कराना पड़ता है। एक डायलिसिस का खर्च लगभग 2500 रुपये होता था, इस तरह सप्ताह में डायलिसिस का खर्च 7500 रुपए हो जाता था। इसके साथ आवागमन और दवाइयों का भी खर्च होता था। जिला चिकित्सालय में निःशुल्क डायलिसिस की सुविधा से हमें बेहद राहत मिली है।

इसी प्रकार बैकुंठपुर के 68 वर्षीय रियाजुद्दीन ने बताया कि वे जून माह से जिला अस्पताल में लगातार डायलिसिस करवा रहें हैं, एक मशीन की वजह से पहले थोड़ा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब नयी मशीन लगने से यह समस्या खत्म हुई है। चरचा की 60 वर्षीय प्रेमकुमारी बताती हैं कि मैं पहले निजी अस्पतालों में डायलिसिस करवातीं थीं, जिसमें बहुत खर्च होता

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सर्दी, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द, थकावट, कभी कभी दस्त व उल्टी होना दिखने पर तत्काल अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जाए

Date : 24-Sep-2022

सूरजपुर। संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें छ.ग. के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन्फ्लूएंजा वायरस एच1एन1  के आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए है। इसके अनुपालन में संक्रमण के दौरान लक्षण, बचाव, रोकथाम और सतर्कता को लेकर बिंदुवार जानकारी दी है ताकि संक्रमित होने पर त्वरित उपचार किया जा सके एवं फैलने से रोका जा सके ।

स्वाईन फ्लू के लक्षण जैसे सर्दी, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द, थकावट, कभी कभी दस्त व उल्टी होना दिखने पर तत्काल अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जाए एवं केवल कैटेगरी-सी के मरीज जैसे कोमोर्बिङ मरीज, गर्भवती महिलाएं एवं 5 वर्ष से छोटे बच्चे इनमें लक्षण पाये जाने पर अनिवार्य रूप से जांच करायें। यही स्वाईन फ्लू की जांच रिपोर्ट आने तक स्वयं को आइसोलेट कर लेवें एवं प्रोटोकॉल का पालन किया जाए जैसे कि मास्क का उपयोग, सैनिटाइजर का उपयोग तथा बार बार साबुन से हाथ धोएं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि स्वाईन फ्लू मौसमी इन्फ्लूएंजा ए एच एम 1 श्वसन तन का संक्रमण है जो मनुष्यों में इन्फ्लूएंजा वायरस एच1एन1 के कारण होता है।

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डिप्रेशन की प्रॉब्लम को बूस्ट कर देते है ये फूड्स, लेकिन भूलकर भी ना करें सेवन

Date : 19-Sep-2022

न्युज डेस्क (एजेंसी)। आजकल की दुनिया में स्ट्रेस का लेवल बढ़ते जा रहा है, जिसके चलते चाहकर भी नजरअंदाज नहीं कर पाते हैं. तनाव को वक्त रहते कम न किया जाए, तो ये डिप्रेशन का कारण बन सकता है. डिप्रेशन की वजह कई हो सकती हैं, लेकिन इस परिणाम सिर्फ एक है और वो है बिगड़ा हुआ मानसिक स्वास्थ्य. एक्सपर्ट्स के मुताबिक अच्छी नींद और सही खानपान इस परेशानी को काफी हद तक कम कर सकता है.

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि खानपान से डिप्रेशन का इलाज हो जाए, इसका कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन खाने पीने की कुछ चीजों का सेवन कम या बंद करने से काफी फर्क महसूस किया जा सकता है. दरअसल, कई ऐसे फूड्स हैं, जो डिप्रेशन की प्रॉब्लम को और ज्यादा बढ़ा सकते हैं. यहां हम आपको इन्हीं फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं.

फास्ट फूड 

कई अध्ययनों में सामने आया है कि जिन्हें स्ट्रेस या डिप्रेशन रहता है उन्हें फूड क्रेविंग ज्यादा परेशान करती है. ये अपनी क्रेविंग को कम करने के लिए ऐसे फूड्स खाते हैं, जो बॉडी को नुकसान पहुंचाते हैं. फास्ट फूड भले ही टेस्टी हो, लेकिन इनमें आर्टिफिशियल ट्रांस फैट, रिफाइंड कार्ब्स और चीनी मौजूद होती है. रिसर्च में ये भी सामने आया है कि जो लोग फास्ट फूड ज्यादा खाते हैं उनके डिप्रेशन से ग्रसित होने के आसार ज्यादा बने रहे हैं. फ्राई मोमोज, बर्गर, पिज्जा जैसे फूड्स का कम से कम सेवन करें.

शराब

पूरी दुनिया में दुख या अपने साथ कुछ भी बुरा होने पर ज्यादातर लोग शराब को अपना साथी बना लेते हैं. शराब से भले ही नींद आ जाए, लेकिन ये आपके डिप्रेशन को खत्म होने के बजाय और बढ़ा सकती है. डिप्रेशन से पीड़ितों को भूल से भी शराब का सेवन नहीं करना चाहिए. एक रिसर्च में सामने आया है कि शराब शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करती है और इसी वजह से किसी का भी मूड खराब हो सकता है.

रिफाइंड ग्रेन 

वैसे ग्रेन यानी अनाजों का सेवन शरीर के लिए अच्छा होता है, लेकिन कुछ लोगों को रिफांइड ग्रेन को खाने की आदत होती है. कहा जाता है कि इन्हें रिफाइंड करने से इनमें पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं. रिसर्च में ये भी सामने आया है कि जो लोग रिफाइंड ग्रेन का सेवन करते हैं, उनमें डिप्रेशन के होने की अधिक संभावना बन जाती है. होल ग्रेन यानी जौं, गेहूं, चना को मिक्स करके फ्लोर तैयार करवाएं और उसका सेवन करें.


( Note : इस लेख में दी गई जानकारियां सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं.TCP24 News इनकी पुष्टि नहीं करता है. किसी विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही इस पर अमल करें.)

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रक्तदान-महादान परिकल्पना साकार : एमबीडीडी ने एक बार फिर रचा इतिहास

Date : 19-Sep-2022

रायपुर। रक्तदान : जीवनदान की परिकल्पना को साकार कर एक बार फिर मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव एमबीडीडी ने इतिहास रच डाला है। आचार्य महाश्रमण के मंगल आशीर्वाद से सेवा संस्कार संगठन के क्षेत्र में कार्यरत अग्रणी संगठन अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् ने शनिवार को पूरे भारत और साथ ही 22 अन्य देशों में एक साथ रक्तदान के 6185 शिविरों का आयोजन कर 1,68,000 यूनिट से ज्यादा रक्त एकत्र कर रक्तदान के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। देश भर में हुए शिविरों में राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने मौजूद रह कर रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाया। वहीं कई व्यक्तियों ने खुद भी रक्तदान कर इस पुनीत भागीरथी प्रयास में अपना सहयोग दिया। शिविर में युवाओं ने जहां बढ़-चढ़  कर भाग लिया, वहीं महिलाएं भी किसी से पीछे नजर नहीं आई। शिविरों में एकत्र ब्लड के स्टोरेज की व्यवस्था के लिए स्थानीय स्तर पर ब्लड बैंक के साथ तालमेल रखा गया था। शिविर में एकत्र ब्लड ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों के काम में आ सके इसके लिए अभातेयुप अपनी सभी इकाइयों में मॉनिटरिंग करने के साथ-साथ तालमेल बैठाने में सहयोग भी करेगी।

अभातेयुप  राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज डागा ने बताया कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश ने कोविड की जंग को जीता। सम्पूर्ण देश की जनता को वेक्सीनेशन किया गया। अब इस रक्तदान अभियान के माध्यम से सम्पूर्ण भारत में एकता व रक्तदान के प्रति जागरूकता का संदेश प्रसारित करने के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अभातेयुप जैसी गौरवशाली संस्था को प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्रदान किया था। शनिवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव में सहयोग दिया गया।

 एमबीडीडी राष्ट्रीय संयोजक हितेश भांडिया ने बताया कि इस मेगा आयोजन में  भारत के विभिन्न शहरों, जिला मुख्यालयों तथा 22 अन्य राष्ट्रों में भी रक्तदान शिविर आयोजित किए गए। इस महाअभियान के साथ सैंकड़ों की संख्या में स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग अभातेयुप को मिला। रक्तदान कैंप में डाटा संकलन का काम भी ऑनलाइन किया गया। सभी शिविरों के आंकड़े देर रात तक अपडेट होते रहे।

रायपुर शहर में यह शिविर 21 जगह आयोजित किया गया। सवेरे से लेकर देर शाम तक चले शिविर में 1383 यूनिट ब्लड एकत्र किया गया। रक्तदान शिविर के आयोजन में छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स, रायपुर मिल मशीनरी मर्चेंट एसोसिएशन,  रायपुर इलेक्ट्रिकल मर्चेंट एसोसिएशन, वर्धमान मित्र मंडल, छत्तीसगढ़ कंप्यूटर डीलर एसोसिएशन, पंडित रवि शंकर विश्वविद्यालय, कलिंगा विश्वविद्यालय आदि द्वारा सहयोग  किया गया। स्थानीय प्रवक्ता  निर्मल बेंगाणी , अध्यक्ष मनीष दूगड़ एवं मंत्री महेश गोलछा ने बताया कि शिविर में मुख्य रूप से सुनील सोनी (सांसद रायपुर), कुलदीप जुनेजा (विधायक रायपुर उत्तर), बृजमोहन अग्रवाल (विधायक रायपुर दक्षिण), संजय शर्मा  (ए आई जी ट्राफिक) , गौतम चंद चौरसिया (पूर्व न्यायाधीश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय) मौजूद रहे।

अभातेयुप के नाम है पहले से रक्तदान शिविर लगवाने का रिकॉर्ड

अभातेयुप के राष्ट्रीय महामंत्री पवन मांडोत ने बताया कि संस्था ने 17 सितम्बर 2012 को एक दिन में देश के 276 शहरों एवं कस्बों में 651 रक्तदान शिविरों के माध्यम से 96,600 यूनिट रक्त संग्रह का कीर्तिमान रचा था। संस्था ने 6 सितंबर 2014 को देश के 286 स्थानों पर 682 रक्तदान शिविरों के माध्यम से 100212 यूनिट रक्तदान के साथ अपना नाम गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया था। सन् 2016 में एक वर्ष तक निरंतर 366 दिन तक 410 स्थानों पर 468 रक्तदान शिविरों के साथ विश्व के सबसे लंबे समय तक निरंतर चलने वाले रक्तदान अभियान के रूप में इण्डिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज हुआ। सन् 2020 में कोविड-19 की विकट परिस्थितियों व लॉकडाउन की स्थिति में भारत सरकार के अनुरोध पर 55000 यूनिट रक्तदान एवं एक माह में 2000 प्लाज्मा डोनेशन के साथ एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, ग्लोबल रिकॉर्ड एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन, एशिया पेसिफिक रिकॉर्ड्स और ग्लोबल रिकॉर्ड्स में अभातेयुप का नाम दर्ज हुआ।

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शाकाहारी लोग डाइट में जरूर शामिल करें प्रोटीन से भरपूर ये सलाद

Date : 17-Sep-2022

न्युज डेस्क (एजेंसी)। प्रोटीन सेहत के लिए बहुत ही जरूरी पोषक तत्व होता है. ये मांसपेशियों का निर्माण करने में मदद करता है. अगर आप वर्कआउट करते हैं तो खासतौर से प्रोटीन से भरपूर फूड्स डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है. ये आपकी इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है. ये हार्मोन को संतुलित रखता है. ये हमें ऊर्जावान बनाए रखने में भी मदद करता है. फिट और हेल्दी रहने के लिए आप प्रोटीन से भरपूर कई तरह के फूड्स डाइट में शामिल कर सकते हैं. अगर आप वेजिटेरियन हैं तो प्रोटीन से भरपूर कई तरह के सालद भी डाइट में शामिल कर सकते हैं. आइए जानें आप कौन से सलाद डाइट में शामिल कर सकते हैं.

काबुली चने का सलाद

एक बाउल में डेढ़ कप छोले लें. इसमें आधा कप प्याज डालें. इसमें एक कप खीरा डालें. इसमें 1 कप टमाटर, थोड़ा कटा हुआ हरा धनिया, 1 बड़ा चम्मच जैतून का तेल, आधा चम्मच नींबू का रस, स्वादानुसार काली मिर्च और स्वादानुसार नमक डालें. इन सारी चीजों को मिलाकर परसें. ऐसे तैयार हो जाएगा काबुली चने का सलाद. ये बहुत ही हेल्दी और स्वादिष्ट होता है.

टोफू का सलाद

टोफू को सोया दूध का इस्तेमाल करके बनाया जाता है. ये प्रोटीन से भरपूर होता है. इसे बनाने के लिए एक कढ़ाई में मध्यम आंच पर आधा चम्मच जैतून का तेल गर्म करें. इसमें 4 लहसुन कटे हुए डालें. इसे हल्का सुनहरा होने तक भून लें. गैस को बंद कर दें. एक बड़ा बाउल लें. इसमें लेटस को फैलाएं. अब बाउल में 10 से 15 पीस टोफू के डालें. इसमें कटे हुए दो टमाटर डालें. इसके ऊपर भूना हुए लहसुन डालें. इसे अच्छे से मिलाएं. इसके ऊपर 2 बड़े चम्मच सिरका, 2 चम्मच सोया सॉस, 2 बड़े चम्मच मिरिन, 2 बड़े चम्मच तिल का तेल डालें. इसके ऊपर थोड़े लेटस डालकर इसे अच्छे से मिला लें. अब इसे परोसें.

स्प्राउट्स सलाद

एक बड़ा बाउल लें. इसमें डेढ़ कप मूंग दाल स्प्राउट्स डालें. इन्हें 6 मिनट तक गर्म पानी में उबाल लें. इसके बाद छान लें. इन्हें अच्छे से ठंडा होने दें. इसके बाद बाउल में स्प्राउट्स, आधा कप कटे हुए प्याज और टमाटर डालें. इसमें आधे कप से भी कम गाजर डालें. आधा कप खीरा डालें. थोड़ा कटा हुआ हरी धनिया डालें. इन सारी चीजों को अच्छे से मिलाएं. अब एक दूसरे बाउल में जैतून का तेल, जीरा पाउडर , नमक, लाल मिर्च पाउडर और नींबू का रस डालें. इन्हें अच्छे से मिलाएं. सलाद के ऊपर ड्रेसिंग डालें. आधा कप अनार डालें. इसमें 2 बड़े चम्मच भुनी हुई मूंगफली और हरा धनिया डालें. सलाद को टॉस करें. अब इसे परोसें.

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दिल्ली में मिला एक और मंकीपॉक्स केस, दिल्ली में मंकीपॉक्स का 8वां मामला

Date : 17-Sep-2022

नई दिल्ली (एजेंसी)। दिल्ली में मंकीपॉक्स का एक और केस मिला है। नाइजीरिया की एक महिला पॉजिटिव पाई गई है। ये दिल्ली में मंकीपॉक्स का 8वां मामला है। संक्रमित महिला 30 साल की है। भारत में मंकीपॉक्स के संक्रमणों की कुल संख्या अब 13 हो गई है। महिला का लोक नायक अस्पताल (लोक नायक अस्पताल) में इलाज चल रहा है। मंकीपॉक्स से पीड़ित एक अन्य संदिग्ध व्यक्ति को भी दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक अधिकारी ने कहा, “दिल्ली में अब तक मंकीपॉक्स के कुल आठ मामले सामने आए हैं। नवीनतम एक नाइजीरियाई महिला है, जिसकी उम्र 30 वर्ष है और उसे एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।”

जिस मरीज के संक्रमण की अभी पुष्टि नहीं हुई है वह भी नाइजीरियाई महिला है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि उसे 14 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसमें सातवें और आठवें मामले की पुष्टि हुई है और संदिग्ध मामले का इलाज चल रहा है। “तीनों मरीज ठीक कर रहे हैं।

मंकीपॉक्स का पहला मामला केरल के कोल्लम जिले में 14 जुलाई को सामने आया था। मरीज को पिछले हफ्ते अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। केरल में सभी पांच मंकीपॉक्स रोगियों का संयुक्त अरब अमीरात का यात्रा इतिहास था। बता दें कि मंकीपॉक्स एक वायरल ज़ूनोसिस (जानवरों से मनुष्यों में प्रसारित होने वाला वायरस) है जिसमें चेचक के रोगियों के समान लक्षण होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 23 जुलाई को इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था।

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सेब का ज्यादा सेवन सेहत बनाने की जगह बिगाड़ भी सकता है, जानें नुकसान

Date : 15-Sep-2022

नई दिल्ली (एजेंसी)। ‘वन एप्पल अ डे कीप्स द डॉक्टर अवे’ ये कहावत तो आप बचपन से सुनते आ रहे होंगे। डॉक्टर भी सेहतमंद बने रहने के लिए व्यक्ति को रोजाना एक सेब खाने की सलाह देते हैं। सेब में विटामिन, पोटेशियम, फॉस्फोरस, मैग्रीशियम और आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जो कई रोगों को दूर रखने में मदद करते हैं। सेहत के लिए बेहद गुणकारी होने के बावजूद क्या आप जानते हैं इसका जरूरत से ज्यादा सेवन आपको फायदे की जगह नुकसान तक पहुंचा सकता है। आइए जानते हैं कैसे-

ज्यादा सेब खाने से हो सकती हैं ये 5 परेशानियां-

पाचन से जुड़ी परेशानियां- व्यक्ति को सेहतमंद बनाए रखने में फाइबर का अहम रोल होता है। सेब में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। लेकिन अगर शरीर में फाइबर की मात्रा बढ़ती है तो इससे पाचन से जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। फाइबर का अधिक सेवन पेट में सूजन और कब्ज की समस्या पैदा कर सकता है। एक दिन में अगर आप 70 ग्राम से अधिक फाइबर का सेवन करते हैं तो पाचन से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

मोटापा- एक सामान्य सेब में लगभग 25 ग्राम कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। अगर आप रोजाना अधिक मात्रा में सेब का सेवन करते हैं तो आप मोटापे का शिकार हो सकते हैं। स्वस्थ रहने के लिए नियमित रूप से एक सेब का सेवन काफी होता है।

असंतुलित ब्लड शुगर- सेब में शुगर और कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। सेब का अधिक सेवन से आपका ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।

खराब हो सकते हैं दांत- अगर आप ज्यादा सेब खाते हैं तो इससे आपके दांत भी खराब हो सकते हैं। सेब में एसिड मौजूद होते हैं इसलिए इनका ज्यादा सेवन दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है।

एलर्जी- जिन लोगों को फल के सेवन से एलर्जी होती हैं अगर ऐसे लोग ज्यादा सेब का सेवन करते हैं तो इसकी वजह से एलर्जी से जूझना पड़ सकता है। एलर्जी होने की समस्या में सेब के सेवन से आपको पेट में दर्द, उल्टी, मतली और मरोड़ जैसी समस्या हो सकती है।

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स्‍टडी में खुलासा : कोरोना वायरस के लिए घातक साबित हो सकती है नाक से दी जाने वाली दवा

Date : 15-Sep-2022

लॉस एंजिलिस (एजेंसी)। शोधकर्ताओं ने कोविड-19 के लिए नाक से दी जाने वाली एंटी-वायरल दवा विकसित की है, जो संक्रमित पशुओं से सार्स-सीओवी2 के प्रसार को कम तथा इसके संक्रमण को सीमित कर सकती है. जब लोगों की जांच में कोविड-19 होने का पता चलता है तब तक वायरस उनके श्वसन तंत्र में पैठ बना चुका होता है. वहीं लोग हर सांस के साथ अदृश्य संक्रामक तत्वों को शरीर से बाहर निकालते हैं. इस समय कोविड-19 के उपचार वाली दवाएं वायरस के प्रकोप से होने वाले लक्षणों पर केंद्रित हैं लेकिन उनसे संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में बहुत ज्यादा सफलता नहीं मिलती.

अमेरिका के ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के अनुसंधानकर्ताओं ने पूर्व में संक्रामक रोगों के उपचार के लिए अनोखा तरीका इजाद किया जिसमें एक खुराक में नाक से दवा दी जाती है जो सार्स-सीओवी2 के गंभीर संक्रमण से बचाव करती है. ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडेमी ऑफ साइंसेस’ पत्रिका में प्रकाशित एक नये अध्ययन में वे दर्शाते हैं कि ‘थेरप्यूटिक इंटरफियरिंग पार्टिकल’ (टीआईपी) नामक यह उपचार संक्रमित पशुओं से वायरस के संक्रमण को कम करता है और इसके प्रसार को सीमित भी करता है. अनुसंधानकर्ता लियोर वीनबर्गन ने कहा, ‘‘ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो एंटीवायरल और टीकों के लिए सांस के जरिये फैलने वाले वायरस के संक्रमण को सीमित करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह अध्ययन दिखाता है कि टीआईपी की एक खुराक में नाक से दी जाने वाली दवा पशुओं से वायरस के प्रसार को कम करती है.’’

वीनबर्गर और अनुसंधानकर्ता सोनाली चतुर्वेदी ने सार्स-सीओवी2 से ग्रस्त चूहों का उपचार एंटीवायरल टीआईपी से किया और फिर उनकी नाक में रोजाना वायरस की संख्या मापी. उन्होंने देखा कि जिन चूहों का उपचार नहीं किया गया है, उनकी तुलना में उपचार वाले चूहों की नाक में हर बार वायरस कम गिने गये. ‘डब्ल्यूएचओ‘ के चीफ ट्रेडोस एडनॉम घेब्रेयसस ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर हर 44 सेकेंड में अभी भी एक शख्स की जान कोविड 19 के चलते हो रही है. डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने इसको लेकर कहा, ‘यह वायरस आसानी से खत्म नहीं होगा. रिपोर्ट किए गए मामलों और मौतों में वैश्विक गिरावट जारी है. यह बहुत उत्साहजनक है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि ये रुझान बने रहेंगे.’ घेब्रेयियस ने जो आंकड़ा जारी किया वह कम चौंकाने वाला नहीं है. उन्होंने कहा, ‘फरवरी के बाद से साप्ताहिक रिपोर्ट की मौतों की संख्या में 80 फीसद से अधिक की गिरावट हो सकती है.

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चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर महिला और नवजात को दिया नया जीवन, पेट से निकाला 2 किलो का फ्राईब्राइड ट्यूमर

Date : 10-Sep-2022

दुर्ग। चिकित्सा सुविधा के क्षेत्र में लगातार जिले में बेहतर प्रदर्शन किया जा रहा है, इसी कड़ी में जिला चिकित्सालय के मातृत्व एवं शिशु वार्ड में नीतू यादव नामक गर्भवती महिला के गर्भाशय से 2 किलोग्राम के फ्राईब्राइड ट्यूमर को संबंधित चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर सफलतापूर्वक निकाला।

नीतू यादव जो की जलेबी चौक की निवासी है, डिलीवरी के लिए लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय सुपेला भिलाई में अपना रेगुलर चेकअप करा रही थी। जहां  सोनोग्राफी जांच के पश्चात उनके गर्भाशय में फ्राईब्राइड ट्यूमर डायग्नोज किया गया।इसके पश्चात लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय के डॉक्टरों द्वारा मरीज को जिला अस्पताल दुर्ग के मातृत्व शिशु वार्ड में रिफर किया गया। यहां स्त्री एवं  प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ ममता पाण्डे, के अधीन मरीज की अवस्था की  जांच की गई और जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए आपरेशन करने का निर्णय लिया गया क्योकि आपरेशन की प्रक्रिया जटिल थी इसलिए 8 सदस्यों वाली चिकित्सकीय दल का गठन किया गया।

इस पर जानकारी देते हुए डॉ. ममता पाण्डे ने बताया कि ट्यूमर की आकृति बड़े होने के कारण मां और बच्चें दोनों को क्षति से बचाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण  था परंतु जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों की दक्ष टीम ने इस 2 किलो के फ्राईब्राइड ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालकर, सिजेरियन डिलीवरी को अंजाम दिया। वर्तमान में मां और नवजात दोनों ही पूर्ण रूप से स्वस्थ्य है और नवजात का टीकाकरण भी किया जा चुका है।

चिकित्सकीय दल की टीम में डॉ.ममता पाण्डेय स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, डॉ. विनिता ध्रुव, डॉ. अर्चना, वरिष्ठ चिकित्सक, डॉ. पूजा (निश्चेतना) स्टॉफ नर्स सीमा, कीर्ति, ममता शर्मा, शोभना कुमार ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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मुख्यमंत्री हाट.बाजार क्लीनिक योजना : प्रदेश में अब तक 1.1 लाख क्लीनिक में 51 लाख लोगों का हुआ इलाज

Date : 09-Sep-2022

रायपुर। छत्तीसगढ़ के वनांचलों और ग्रामीण इलाकों के हाट-बाजारों में स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमों द्वारा 51 लाख 15 हजार 132 लोगों को इलाज मुहैया कराया गया है। मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना के माध्यम से प्रदेश के 1824 हाट-बाजारों में क्लीनिक लगाकर लोगों की निःशुल्क जांच व उपचार कर दवाईयां दी जा रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा योजना की शुरूआत के बाद से अब तक प्रदेश भर में कुल एक लाख दस हजार 988 हाट-बाजार क्लीनिक आयोजित कर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। योजना के अंतर्गत राज्य में 425 डेडिकेटेड ब्राडिंग वाहन तथा चिकित्सा दलों के माध्यम से दूरस्थ अंचलों में लोगों का इलाज किया जा रहा है। 

हाट-बाजार क्लीनिकों में जरूरतमंदों को निःशुल्क उपचार, चिकित्सकीय परामर्श और दवाईयां उपलब्ध कराने के साथ ही मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा मलेरिया, एचआईव्ही, मधुमेह, एनिमिया, टीबी, कुष्ठ रोग, उच्च रक्तचाप और नेत्र विकारों की जांच भी की जा रही है। इन क्लीनिकों में शिशुओं और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण भी किया जा रहा है। हाट-बाजार क्लीनिकों में ओ.पी.डी. आधारित आठ प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जांच के बाद व्याधिग्रस्त पाए गए लोगों को निःशुल्क दवाईयां भी दी जाती हैं। जिन मरीज़ों को उच्च स्तरीय जाँच अथवा उपचार की आवश्यकता होती है उन मरीज़ो को हाट-बाज़ार क्लीनिक से सीधे स्वास्थ्य केंद्र में रिफर भी किया जा रहा है जिससे उनका सम्पूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 12 लाख 51 हजार 020 लोगों के उच्च रक्तचाप, 10 लाख 54 हजार 717 लोगों की मधुमेह, 4 लाख 09 हजार 439 लोगों की मलेरिया जांच, 2 लाख 76 हजार 727 लोगों की रक्त-अल्पता (एनीमिया) और एक लाख 614 लोगों में नेत्र विकारों की जांच की गई है। इन क्लीनिकों में 39 हजार 699 लोगों की टीबी, 15 हजार 631 लोगों की कुष्ठ और 30 हजार 147 लोगों की एचआईव्ही जांच भी की गई है। इस दौरान 75 हजार 978 गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच भी की गई है। हाट-बाजारों में आयोजित क्लीनिकों में एक लाख 33 हजार 829 डायरिया पीड़ितों का भी उपचार किया गया है।

मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिकों के माध्यम से अब तक बालोद जिले में 2 लाख 52 हजार 66, बलौदाबाजार-भाटापारा में 1 लाख 15 हजार 998, बलरामपुर-रामानुजगंज में 1 लाख 24 हजार 238, बस्तर में 1 लाख 28 हजार 82, बेमेतरा में 3 लाख 5 हजार 816, बीजापुर में 1 लाख 18 हजार 356, बिलासपुर में 2 लाख 82 हजार 338, दंतेवाड़ा में 1 लाख 11 हजार 616, धमतरी में 46 हजार 365, दुर्ग में 1 लाख 71 हजार 509, गरियाबंद में 2 लाख 19 हजार 597, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 88 हजार 741, जांजगीर-चांपा में 2 लाख 24 हजार 573 और जशपुर में 2 लाख 50 हजार 951 लोगों का इलाज किया गया है।

योजना के तहत कबीरधाम में 1 लाख 97 हजार 651, कांकेर में 1 लाख 84 हजार 572, कोंडागांव में 1 लाख 8 हजार 525, कोरबा में 1 लाख 42 हजार 801, कोरिया में 1 लाख 27 हजार 848, महासमुंद में 2 लाख 92 हजार 645 मुंगेली में 1 लाख 11 हजार 804, नारायणपुर में 47 हजार 150, रायगढ़ में 4 लाख 89 हजार 733, रायपुर में 1 लाख 38 हजार 38, राजनांदगांव में 3 लाख 6 हजार 9, सुकमा में 57 हजार 737, सूरजपुर में 3 लाख 17 हजार 113 तथा सरगुजा जिले में 1 लाख 53 हजार 260 लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

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