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चीन के लिए ये दवा बन गई है वरदान, कोरोना संक्रमित मरीज मात्र चार दिन में ठीक होकर वापस जा रहे है घर

नई दिल्ली(एजेंसी). कोरोना वायरस (Corona Virus) के कोहराम के बीच एक बेहद ही अच्छी खबर सामने आई है. चीन ने एक दवा से अपने हजारों मरीजों को कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक कर लिया है. खुद चीनी सरकार ने माना है कि ये दवा इतनी इफेक्टिव है कि कोई भी कोरोना वायरस का मरीज मात्र चार दिन में ठीक होकर घर चला जा रहा है. 

चीन के साइंट व टेक्नोलॉजी मंत्री झांग शिनमिन ने पुष्टि की है कि जापानी दवा ‘फाविपिराविर’ (Favipiravir) नाम की दवा चीनी कोरोना वायरस मरीजों पर काफी असरदार साबित हुई है. चीनी अस्पतालों में आने वाले कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीज को यही दवा दी जा रही है. चीनी मंत्री का कहना है कि इस दवा से कोई भी मरीज मात्र चार दिनों के भीतर ठीक होकर घर वापस जा रहा है. उन्होने आगे ये भी बताया कि इससे पहले किसी मरीज को ठीक करने में 11 दिन या उससे अधिक का समय लग रहा था. 
बताते चलें कि चीन में अभी तक 81,193 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. लेकिन इनमें से लगभग 71,258 लोग ठीक होकर घर भी जा चुके हैं. अब तक चीन में 3,252 लोग इस वायरस की वजह से दम भी तोड़ चुके हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन से मिले मरीजों के एक्सरे रिपोर्ट से भी ये साबित हुआ है. जिन मरीजों को कोरोना वायरस इलाज के लिए जापानी दवा फेविपिराविर दिया गया उनके फेफड़े दोबारा से ठीक हो गए. दवा 91 प्रतिशत तक सटीक काम कर रही है. इसके उलट जिन मरीजों का इलाज अन्य दवाओं से किया गया उनमें मात्र 62 प्रतिशत के ही फेफड़े ठीक हो पाए. बताते चलें कि कोरोना वायरस सबसे ज्यादा फेफड़ों पर हमला करता है.  अभी तक भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से लगभग 2.44 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. इनमें से 86,025 लोग ठीक भी हो चुके हैं. भारत में अब तक कुल 270  लोग संक्रमित हो चुके हैं. देश में इसकी वजह से 4 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है.

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आयुर्वेद की वो औषधियां जो वजन कम करने में करती हैं मदद

हेल्थ न्यूज़। वजन कम करने वाली आयुर्वेदिक दवा को लोग सर्च करते हैं। मोटापा कम करने और तेजी से वजन कम करने में आयुर्वेद की ये औषधियां बहुत फायदेमंद हैं। अगर आप भी वजन कम करने के लिए आयुर्वेदिक दवा खोज रहे हैं, तो इन हर्ब को अपनी डाइट में शामिल करें। वजन कम करने के लिए हेल्दी डाइट की जरूरत होती है। पेट की चर्बी कम करने के लिए वजन कम करने वाले फूड जरूरी होते हैं। मोटापा कम करने में आयुर्वेदिक उपाय व औषधि भी कारगर होती है। वजन कम करने में ऐसी हर्ब या औषधि की जरूरत होती है, जो मेटाबॉलिक रेट को तेज करती हों। आयुर्वेदिक औषधियों में पाचन तंत्र को ठीक करने के साथ वजन कम करने के गुण पाये जाते हैं। बेली फैट कम करने के लिए आयुर्वेद की कुछ औषधि बेहद कारगर हैं। हम यहां पर कुछ ऐसी औषधियों के बारे में बता रहे हैं जो तेजी से वजन कम करने में मदद करती हैं। मोटापा कम होने से डायबिटीज, हार्ट स्ट्रोक और ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है। डायबिटीज रोगियों के लिए आयुर्वेद की औषधि ब्लड शुगर कम करने में भी मदद करती हैं। तो देर किस बात कि आइए जानते हैं वजन कम करने वाली आयुर्विदक औषधियों के बारे में..

गुग्‍गुल मेटाबॉलिक रेट ठीक करता है 
मोटापा कम करने के लिए गुग्‍गुल का सेवन आयुर्वेद में बताया गया है। कई दवाओं में गुग्‍गुल का उपयोग किया जाता है। शरीर के मेटाबॉलिक रेट तेज करने में गुग्‍गुल मददगार है। शरीर के खराब कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में गुग्‍गुल मददगार है। गुग्‍गलका सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है। वजन घटाने के लिए बाजार में गुग्‍गुल कैप्सुल का सेवन भी आप कर सकते हैं।

त्रिफला पाचन तंत्र ठीक कर दूर करता है मोटापा 
पाचन तंत्र को ठीक करने के लिए आयुर्वेद में त्रिफला का सेवन करने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेदिक औषधियों में त्रिफला सबसे ज्यादा सेवन की जाने वाली दवा है। रात में सोने से पहले त्रिफला का सेवन वजन कम करने में मदद करता है। त्रिफला में आमला, हरड़ और बहेरा शामिल होता है। सुबह के समय गरम पानी में त्रिफला का सेवन तेजी से वजन कम करने में मदद करता है।

विजयसार तेजी से वजन कम करता है
डायबिटीज रोगियों को ब्लड शुगर कम करने के लिए आयुर्वेद में विजयसार को दवा के रूप में दिया जाता है। शरीर में जमी चर्बी को कम करने में विजयसार काफी मददगार होता है। पेट की चर्बी कम करने के लिए विजयसार एक आयुर्वेदिक औषधि है। वजन कम करने के लिए विजयसार की हर्बल चाय का सेवन आप कर सकते हैं।

दालचीनी वेट लॉस हर्ब 
तेजी से मोटापा घटाने के लिए दालचीनी का सेवन सबसे ज्यादा होता है। शहद और दालचीनी की चाय वजन कम करने में मददगार है। पेट की चर्बी कम करना हो या बढ़ते मोटापे को रोकना हो दालचीनी लाभदायक है। अगर आप सुबह के समय दालचीनी की चाय पीते हैं तो तेजी से मोटापा कम करते हैं।

पुनर्नवा से तेजी से मोटापा घटता है 
वैसे तो पुनर्नवा का उपयोग यूरिन इंफेक्शन और किडनी की सफाई में किया जाता है. लेकिन आयुर्वेद के अनुसार पुनर्नवा में मूत्रवर्धक गुण पाये जाते हैं, जो वजन कम करने में भी मददगार होता है।

मेथी बेली फैट कम करने में मददगार 
मेथी के सेवन से डायबिटीज रोगी ब्लड शुगर लेवल को कम करते हैं। जो लोग मोटापा के शिकार हैं उनके लिए मेथी दाने का पानी बहुत फायदेमंद होता है। अगर आप भी तेजी से वजन कम करना चाहते हैं तो मेथी का सेवन कर सकते हैं। जल्दी वजन कम करना चाहते हैं तो रात में मेथी दाने को पानी में डालकर रख दें। सुबह उठकर इस पानी का सेवन करें। कुछ ही सप्ताह में वजन कम होने लगता है। इसके अलावा आप मेथी पाउडर का सेवन भी अपनी डाइट में कर सकते हैं।

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कैंसर जितना ही खतरनाक है डायबिटीज

निम्मी मूलवानी
डॉ. निम्मीज डायबिटिक केयर,
चांदखेड़ा, अहमदाबाद

डायबिटीज मेलिटस एक ऐसी अवस्था है जिसमें रक्त में शर्करा की मात्रा स्वस्थ स्तर से ज्यादा हो जाती है। यह सुनने में जितना सरल लगता है दरअसल है उतना ही जटिल। इसकी उपस्थिति के प्रमाण 3000 साल से भी अधिक पुराने हैं। इसका उल्लेक चरक संहिता में भी मिलता है। यह शब्द यूनानी भाषा का है जिसमें डायबिटीज का अर्थ है प्रवाह और मेलिटस का अर्थ है शर्करा। यह एक जीर्ण रोग है जो जीवन भर साथ चलता है। यह कैंसर या हृदय रोग जितना ही घातक है पर इसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता। लोग इसकी तरफ ध्यान तब देते हैं जब ये शरीर के आवश्यक कल पुर्जों को खराब करने लगते हैं। डायबिटीज से किडनी, हार्ट, ब्रेन, तंत्रिका तंत्र और रक्त धमनियां सभी खराब होने लगती हैं। डायबिटीज की वजह से हमारी शारीरिक व मानसिक यहां तक की वित्तीय सेहत भी बिगड़ सकती है। डायबिटीज के मरीजों की संख्या विश्वभर में बढ़ रही है। टाइप -2 डायबिटीज के मामलों में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है। टाइप-1 डायबिटीज के मामले में हम पूरी दुनिया में सबसे आगे हैं।

अब जबकि हम जानते हैं कि डायबिटीज खामोशी से हमारे अंगों को क्षति पहुंचा रहा है जिससे हम गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं तो हमें सचेत हो जाना चाहिए। हमें अपने शुगर लेवल की जांच नियमित रूप से कराकर शुगर लेवल को सुरक्षित दायरे में रखना चाहिए। यहां एक सवाल उठता है कि डायबिटीज से हम भारतीयों को ही इतना खतरा क्यों? पहली बात यह है कि हमारे जीन्स में गड़बड़ी है जिसके कारण वंशानुगत क्रम में हम मधुमेह के संभावित मरीज हैं। दूसरी बात यह कि बदले हुए खान-पान, आरामतलब जिन्दगी के कारण हम डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। भारतीयों पर किये गये एक शोध में पाया गया कि हममे डायबिटीज के लक्षण दूसरे देशों के लोगों के मुकाबले पहले प्रकट हो जाते हैं। जागरूकता के अभाव में 60 फीसदी डायबिटीज मरीजों का पता दुर्घटनावश चलता है। रोगी किसी और कारण से रक्त की जांच कराता है और डायबिटीज निकल आता है। पता लगने के बाद भी वे किसी विशेषज्ञ से सम्पर्क नहीं करते बल्कि स्वयं ही उसका नियंत्रण करने के टोटके अपनाने लगते हैं। देर से पता लगने और शुगर लेवल के अनियंत्रित रहने के कारण शरीर के अंग चुपचाप नष्ट होते रहते हैं और इसका गंभीर नतीजा सामने आता है।
तो डायबिटीज होने पर क्या करें? डायबिटीज होने पर घबराने की कतई जरूरत नहीं है। सही इलाज से डायबिटीज को नियंत्रण में रखा जा सकता है। आपको एक मधुमेह विशेषज्ञ से सम्पर्क करना चाहिए जो आपकी चिंता, भय, मिथक और अविश्वास को दूर कर आपको सही स्थिति की जानकारी दे सके। आपका चिकित्सक आपको लाइफ स्टाइल में सुधार करने, आहार चर्या में परिवर्तन करने और वर्जिश करने की सलाह देगा ताकि ब्लड शुगर का सही स्तर बनाए रखा जा सके। 
संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि डायबिटीज का पता लगने के बाद घबराने की जरूरत नहीं है।  सही दिनचर्या एवं औषधियों के योग से आप न केवल डायबिटीज को रोक सकते हैं बल्कि किसी किसी मामले में इससे हुई क्षति की भरपाई भी कर सकते हैं। यहां तक कि अपनी भावी पीढ़ी को डायबिटीज से बचाना भी संभव है। एक डायबिटीज विशेषज्ञ के तौर पर मेरी सलाह यही होगी कि आप डायबिटीज के प्रति जागरूक रहें, नियमित ब्लड शुगर टेस्ट करते रहें, बचाव के तरीके अपनाएं और एक दीर्घ स्वस्थ जीवन जिएं।

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क्या है कोरोना वायरस, जिससे घबराई है पूरी दुनिया

हेल्थ न्यूज़। दुनिया में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 2 लाख  से ऊपर  हो गया। 170 देश प्रभावित हैं। मरने वालों की संख्या 8 हजार 231 पहुंच गई है। 82,866 संक्रमित स्वस्थ भी हुए हैं।  यूरोप में एशिया से ज्यादा मौतें हो गई हैं। यूरोप में कुल 3,421 और एशिया में 3,384 मौतें हो चुकी हैं। यूरोपियन यूनियन ने संक्रमण को रोकने के लिए  अपनी सीमाओं को सील कर दिया। उधर, पाकिस्तान में संक्रमित लोगों की संख्या 254 हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही इसे इमर्जेंसी घोषित कर चुका है। भारत में भी अब तक इसके 156 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए इसे फैलने से रोकना एक बड़ी चुनौती बन गई है। हालांकि, चीन इसे रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। दुनिया भर में कोरोना वायरस के केस लगातार सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लूएचओ ने कोरोना वायरस को अंतर्राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है। चीन से बाहर 170 देशों में कोरोना वायरस के कई मामलों की पुष्टि हुई है. 

क्या है कोरोना वायरस?
कोरोना वायरस (सीओवी) का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है। इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान में शुरू हुआ था। डब्लूएचओ के मुताबिक, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं. अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना है।

यह वायरस कैसे फैलता है ?
अभी तक इस वायरस के फैलने के माध्यम, साधन की स्पष्ट जानकारी नहीं है। यह एक नया विषाणु है और संभवत: यह पशुओं से उत्पन्न हुआ और अब यह मनुष्य से मनुष्य में फैल रहा है। 2019 नॉवेल कोरोना वायरस कैसे एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में जाता है यह भी अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छीकनें से यह फैलता है, उसी तरह जैसे सर्दी-जुकाम या फिर श्वास संबंधी रोग का कारण बनने वाले पैथेजन फैलाते हैं।  

क्या हैं इस बीमारी के लक्षण?
इसके संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है। यह वायरस दिसंबर में सबसे पहले चीन में पकड़ में आया था। इसके दूसरे देशों में पहुंच जाने की आशंका जताई जा रही है।

क्या हैं इससे बचाव के उपाय?
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से धोना चाहिए। अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है। खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्‍यू पेपर से ढककर रखें. जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें। अंडे और मांस के सेवन से बचें. जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें।

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स्वस्थ आहार एवं जीवनशैली अपना कर कम कर सकते हैं कैंसर के खतरे

हेल्थ डेस्क। कैंसर एक ऐसा रोग है जो रोगी के साथ साथ उसके पूरे परिवार को प्रभावित करता है। कैंसर के लगातार बढ़ते मामलों के बीच जीवन एवं आहार शैली में आवश्यक बदलाव कर हम न केवल इस रोग की संभावना को कम कर सकते हैं बल्कि रोग हो जाने पर इसकी चिकित्सा को सुगम बना सकते हैं। यहां हम चर्चा कर रहे हैं कुछ ऐसे भोजन की जो कैंसर का मुकाबला करने में सहयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

अत्यधिक धूम्रपान और शराब कैंसर का कारण बन सकते हैं, अत: इनसे बचना चाहिए। इसके अलावा आनुवांशिक कारक, कार्यस्थल पर विकीरण, रासायनिक तत्वों से सम्पर्क भी कैंसर का कारण बन सकते हैं।स्वस्थ आहार एवं जीवनशैली अपनाकर हम कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। एंटीआॅक्सिडेंट और फाइटो न्यूट्रिएंट्स से सम्पन्न खाद्य पदार्थ कैंसर का मुकाबला करने में हमारी मदद करते हैं। इसके लिए कुछ फल एवं सब्जियों को  अपने आहार में शामिल करना चाहिए। ये ज्यादा महंगे भी नहीं हैं।
कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी का उपयोग किया जाता है। इसके दौरान एवं बाद में आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
सब्जियां : फूलगोभी, ब्रोकली एवं  पत्तागोभी में स्थित रसायन खराब एस्ट्रोजन को अच्छे एस्ट्रोजन में बदलकर कैंसर के जोखिम को कम करते हैं।
कैल्शियम एवं आयरन से भरपूर हरी पत्तेदार सब्जियों, जवारा रस का सेवन लाभकारी है।टमाटर, मटर, कद्दू, शलजम, ओट्स जैसे फाइबर से भरपूर सब्जियां भी कैंसर में फायदेमंद हैं।

फल : संतरा, नींबू जैसे साइट्रस फल विटामिन सी प्रदान करते हैं। विटामिन के लिए कीवी, आडू, आम, नाशपाती जैसे फल भी भोजन में शामिल करना चाहिए। अंगूर के सेवन से एंटीआॅक्सिडेन्ट फाइटो न्यूट्रीएंट्स का उत्पादन बढ़ता है जो कैंसर कोशिकाओं के उत्पादन को रोकता है।

लहसुन और प्याज : लहसुन और प्याज में मौजूद सल्फर कम्पाउंड, बड़ी आंत, स्तन, फेफड़े और प्रोस्टेट ग्रंथि के कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। लहसुन इंसुलिन का उत्पादन बढ़ाकर कैंसर कोशिकाओं के निर्माण को रोकता है।
अदरक : अदरक का अर्क कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी से होने वाली परेशानियों को कम करता है।

हल्दी : हल्दी सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक कैंसर रोधी तत्व है जो कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती है। यह कीमोथेरेपी के असर को बढ़ाती है।

फलियां एवं दालें : ये प्रोटीन से भरपूर होती हैं एवं अग्नाशय (पैंक्रियाज) तथा बड़ी आंत की कोशिकाओं में होने वाले कैंसर की रोकथाम में सहायक हैं।
गाजर, आम, कद्दू : अल्फा और बीटा कैरोटीन्स कैंसर प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाते हैं एवं गर्भाशय, मूत्राशय, पेट और स्तन कैंसर की रोकथाम में लाभकारी होते हैं। टमाटर एवं तरबूज में मिलने वाला लाइकोपिन एंटीआॅक्सिडेंट का स्रोत होता है जो कोशिकाओं की क्षति को रोकता है और प्रोस्टेट कैंसर से बचाता है। 

परहेज :
शराब का अत्यधिक सेवन मुंह एवं खाने की नली, सांस की नली एवं पेट के कैंसर का मुख्य कारण है। इससे बचना चाहिए। संरक्षित खाद्य पदार्थ जिसमें काफी मात्रा में नमक होता है का सेवन नहीं करना चाहिए।
डिब्बाबंद फल, प्रोसेस्ड मीट, रेड मीट, डीप फ्रीजर में रखी गई मांस-मछली, कच्ची दाल, अंकुरित सलाद, मसालेदार भोजन, गाढ़ी ग्रेवी वाली सब्जियों से परहेज करें।
कैंसर के मरीजों को बहुत मीठा, चिकनाई युक्त भोजन भी नहीं लेना चाहिए। कैफीन, कॉफी, चाय, कोला और चॉकलेट का सेवन भी कम करना चाहिए। सी फूड एवं सैचुरेटेड फैट्स युक्त भोजन का उपयोग करने से बचना चाहिए।

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अत्याधिक चिंता और तनाव से बढ़ता है अलसर का खतरा

हेल्थ डेस्क। सन् 1956 में रूसी वैज्ञानिकों ने अनेक प्रयागों के द्वारा यह सिद्ध कर दिया था कि चिंता और अत्याधिक तनाव के फलस्वरूप ही पेट में अलसर या घाव होते है। निरंतर भय, तनाव तथा चिंता का शरीर पर भयानक प्रभाव होता है। इनके फलस्वरूप रोग से शरीर की रक्षा करने वाली श्वेत रक्त कणिकाओं का काफी नुकसान हो जाता है। इसके विपरीत सकारात्मक चिंतन, प्रसन्नता, मानसिक बल और आनंद से श्वेत रक्त कणिकाओं में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होने लगती है। नकारात्मक भावनाएं हमें ठेस पहुंचाती है। चिंता बढ़ जाने पर पेट में अलसर से रक्तस्त्राव आरंभ हो सकता है। डॉक्टर अलवारिस द्वारा मेयो क्लीनिक में किए गए प्रयोगों ने यह बात सिद्ध कर दी है। डॉ. अलवारिस ने विभिन्न प्रकार के उदर-रोग से पीडि़त 15 हजार रोगियों का निरीक्षण किया। जिसमें उन्होंने उनके पेट दर्द का कारण पता किया। इसमें सबसे रोचक बात यही रही कि लगभग 12 हजार रोगियों की पीड़ा का मूल कारण उनके शरीर में नहीं बल्कि उनके मन में था। रोगियों की समस्या का कारण प्रदूषित जल या वातावरण आदि नहीं थे । भय, चिंता, असुरक्षा की भावना, ईष्र्या और बदलती परिस्थितियों के साथ सामंजस्य स्थापित करने में असमर्थता ही एक साथ मिलकर उनके पेट में दर्द उत्पन्न कर रहे थे।
डॉ. जॉन शिलडर ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने 20 वर्षों तक हजारों रोगियों का उपचार किया और चिंता, दु:ख एवं तनाव के कारण हुई उनकी शारीरिक क्षति के आंकड़े एकत्र किए।अपने दीर्घकाल के अनुभाव की सहायता से उन्होंने नकारात्मक विचारों से मुक्त होने में रोगियों की मदद की। उनके अनुसार हमारी आधी बीमारियों का मूल हमारे मन में ही विद्यवान है। डॉ. ब्लेथ ने अपनी तनाव संबंधी रोग: एक बढ़ती महामारी नामक पुस्तक में बताया कि उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, मधुमेह, दमा, गठिया, वातरोग, मस्तिष्क में रक्त अवरोध, एलर्जी, भूख न लगना तथा त्वचा संबंधी बीमारियां मनोदैहिक गड़बडिय़ों से ही उत्पन्न होती है। हम में से अधिकांश लोग नकारात्मक विचारों और भावनाओं के हानिकारक प्रभावों को जानते तक नहीं है। सुखी, स्वास्थ्य और सर्थक जीवन जीनके लिए हमें चिंता, भय, तनाव से छुटकारा पाना ही होगा।

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कई रोगों से निजात दिलाएगा ततांबे के बर्तन में रखा पानी

हेल्थ डेस्क (bangbandhu patrika )। आयुर्वेद में तांबे के बर्तन को काफी महत्व दिया गया है. हमारे प्राचीन काल में तांबे से बना वर्तन का अधिक उपयोग होता था. क्योकि  तांबे के बर्तन में रखे पानी में जीवाणुरोधी, एंटीऑक्सीडेट , कैंसररोधी (anti-cancer) और एंटीइन्फ्लेमेटरी  गुण आ जाते हैं. तांबे का पानी शरीर में तीनों दोषों (वात, कफ और पित्त) को संतुलित रखने में सक्षम है। यह पानी शरीर के कई रोग बिना दवा के ठीक करने की क्षमता रखता हैं और शरीर के जहरीले तत्वों को बाहर निकालता हैं। हालांकि इस पानी का स्वाद थोड़ा अलग होता है लेकिन यह पानी कभी बासी नहीं होता। आइये है तांबे के बर्तन में पानी पीने के क्या फायदे हैं.

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता (Controls blood pressure)
तांबे का पानी पीने से हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है। यह ब्लड प्रेशर प्रैशर को नियंत्रित रखता है और बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार है। जिससे दिल से जुडी बीमारियां दूर हो जाती हैं।
कैंसर लड़ने में सहायक (Helpful in fighting cancer)
इस पानी में एंटी-आक्सीडेंट गुण कैंसर से लडऩे की शक्ति प्रदान करते हैं। अध्य्यन के अनुसार, तांबे में कैंसर विरोधी प्रभाव मौजूद होते है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने में शरीर की मदद करते हैं।
पाचन क्रिया बेहतर ( Improved digestion)
रात के समय तांबे के बर्तन में पानी डालकर रख दें और सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से पाचन क्रिया में सुधार होता है। रोजाना इस पानी को पीने से पेट दर्द, गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं।
यादाशत मजबूत (improved Memory )
हर रोज तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना दिमाग के लिए बहुत लाभकारी होता है। इस पानी से याददाशत तेज होता है।
इसके अलावा तांबे की अंगूठी पहनने से हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता( increases our immunity) बढ़ती है और त्वचा की चमक (brightness of the skin) बढ़ती है।यह खून को साफ करने में भी मदद करती है साथ ही पेट की बीमारियां डायरिया और पीलिया मे लाभकारी है। तांबे को धारण करने से शरीर में खून की कमी नहीं होती ऐसे में तांबा आपके लिए सुरक्षा कवच साबित हो सकता I 

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सफेद बालों से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो रोज़ खाये लौकी

हेल्थ डेस्क । लौकी में एक या दो नहीं बल्कि कई तरह के न्यूट्रिशन्स मौजूद होते हैं जो सेहत से जुड़ी कई सारी समस्याओं को दूर करने में कारगर हैं। तो आइए जानते हैं इनके अनगिनत फायदों के बारे में। 100 ग्राम लौकी में लगभग 96% पानी और 1 ग्राम फैट होता है। फाइबर, विटामिन, राइबोफ्लेविन, जिंक, थायमीन, आयरन, मैग्नीशियम और मैग्नीज़ जैसे न्यूट्रिशन से भरपूर लौकी को पकाकर खाएं या इसका जूस पीएं, दोनों ही बहुत फायदेमंद है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के साथ ही ये मोटापा कम करने में भी है कारगर। 

पाचन में बेहतर
कब्ज होने की एक वजह भोजन में फाइबर की कमी भी होती है। लौकी को अपनी डाइट में शामिल कर आप काफी हद तक कब्ज से निजात पा सकते हैं। इसमें मौजूद फाइबर पेट की अंदरूनी सफाई करता है। इसके साथ ही अगर आपको एसिडिटी की प्रॉब्लम है तो लौकी का जूस पीना फायदेमंद रहेगा।

वजन कम करने में कारगर
लौकी में 96 प्रतिशत पानी होता है और प्रति 100 ग्राम लौकी में मात्र 12 कैलोरी। फाइबर की मौजूदगी बार-बार भूख लगने की समस्या को दूर करती है। तो अगर आप जल्द वजन कम करने की सोच रहे हैं तो लौकी को अपनी डाइट में करें शामिल और साथ ही इसका जूस भी पिएं।

रखें तरोताजा
लौकी का जूस पीने से सोडियम की कमी, मोटापे की समस्या, धूप में बार-बार प्यास लगने की समस्या को भी दूर किया जा सकता है। बहुत ज्यादा देर तक धूप में ट्रैवल करते हैं तो लौकी का सेवन आपको रखेगा तरोताजा और एक्टिव। 

तनाव करता है कम 
बिजी लाइफस्टाइल के साथ काम का प्रेशर बढ़ते तनाव की सबसे बड़ी वजहें हैं जिसे कम करने के लिए लोग तमाम तरह के ट्रीटमेंट्स पर डिपेंड हो रहे हैं लेकिन, क्या आप जानते हैं खानपान में भी जरूरी बदलाव करके इसे दूर किया जा सकता है। लौकी में मौजूद पानी की मात्रा बॉडी को रिफ्रेश रखता है जिससे तनाव में राहत मिलती है। इसके साथ ही कई सारे न्यूट्रिएंट्स शरीर को अंदरूनी रूप से स्ट्रॉन्ग रखते हैं। इससे तनाव और चिंता जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।

सफेद बालों की समस्या करे दूर
रोजाना सुबह एक गिलास लौकी का जूस पीना बहुत ही फायदेमंद होता है। इससे बालों के असमय सफेद होने की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

खूबसूरत स्किन के लिए
लौकी का जूस पेट की अंदरूनी सफाई करता है जिससे चेहरे पर धूप, धूल, और प्रदूषण से होने वाले कील-मुहांसों से छुटकारा मिलता है। जिससे स्किन खिली-खिली और खूबसूरत नजर आती है।

ब्लड प्रेशर करे कंट्रोल
खाने को पका कर खाना या इसका जूस पीना, दोनों ही सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। ब्लड प्रेशर ही नहीं डायबिटीज़ के मरीजों के लिए भी लौकी है लाभकारी।

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वात, पित्त एवं कफ दोष से भी बढ़ता है मोटापा, आयुर्वेद में छिपा है निदान

हेल्थ डेस्क । सुन्दर छरहरी काया किसे अच्छी नहीं लगती। लोग मोटापा कम करने के लिए घंटों जिम में पसीना बहाते हैं। डायटिंग करते हैं और सप्लीमेंट पर जीने लगते हैं। इसके बाद भी वह परिणाम नहीं आते, जिनकी उन्हें अपेक्षा होती है। आयुर्वेद (दीर्घ जीवन का विज्ञान) मोटापे के लिए कुछ अन्य कारकों को भी जिम्मेदार मानता है। आयुर्वेद के अनुसार अन्य रोगों की तरह मोटापा भी वात-पित्त-कफ के अंसतुलन से उत्पन्न होता है। इस संतुलन को ठीक किए बिना मोटापा से मुक्ति पाना संभव नहीं है।

आयुर्वेद के अनुसार भोजन और चयापचय के बीच असंतुलन के कारण वजन बढ़ने या घटने लगता है। कुछ अन्य रोग भी मोटापे का कारण हो सकते हैं। कफ दोष वाले लोगों में मोटापा या अधिक वजन की समस्या होती है। वात दोष होने पर वजन कम हो जाता है। आयुर्वेद में शरीर की प्रकृति का आकलन करने के बाद ही उसका उपचार किया जाता है। आधुनिक नाड़ी वैद्य-वेदा पल्स (रशियन तकनीक) से मन, शरीर एवं आत्मा का आकलन करते हैं और इसीके आधार पर चिकित्सा की जाती है।

आयुर्वेद में मोटापे का इलाज
आयुर्वेद का मानना है कि कफ उद्दीप्त होने पर शरीर का वजन बढ़ने लगता है। मेद में वृद्धि होती है जबकि ऊतक कुपोषित रह जाते हैं। कफ संचय से चयापचय कमजोर पड़ जाती है जिसके कारण मोटापा बढ़ने लगता है। ऐेसे लोगों को वजन कम करने के लिए नियमित रूप से भोजन करना चाहिए। वात प्रकृति के लोग आम तौर पर दुबले पतले होते हैं और उनके लिए वजन बढ़ाना एक समस्या होती है। पित्त (अग्नि) प्रकृति का शरीर गठीला होता है। ऐसे लोगों में खान पान का असंतुलन वजन बढ़ने का कारण बन सकता है।

वजन घटाने का आदर्श तरीका
वजन कम करने के साथ बेहतर स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद पंचकर्म, योग, प्राणायाम, पावर योगा, साइको न्यूरोबिक्स, हेल्थ डायट प्लान, कसरत, वाष्प स्नान, आयुर्वेदाचार्य परामर्श एवं औषधि का उपयोग किया जाता है। इस चिकित्सा पद्धति का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

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पाचन क्रिया को कमजोर करती हैं नकारात्मक विचार

हेल्थ न्यूज़ 
जब भी हम कोई नकारात्मक विचार करते हैं या उग्र, तनाव में रहता है तब हमारे शरीर के मस्तिष्क में स्थित न्यूरोकेमिकल्स सही तरह से काम नहीं करते लिहाजा पाचन क्रिया सहित शरीर की अन्य क्रिया में भी गड़बड़ी शूरू हो जाती है। इस पीरियड में आंतों में खून की आपूर्ति घट जाती है और एसिड का तनाव बढ़ जाता है। जिससे एसिडीटी, पेट में दर्द, गैस बनना, अपच, कब्ज आदि की समस्या पैदा होती है। अधिक्तर लोग किसी मुसिबत के बारे में सोचकर या फिर किसी जिम्मेदारी से घबराकर नकारात्मक विचारों से घिर जाते हैं तो ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जिसमें पेट में गैस बनना, भोजन का न पचना, कब्ज बनना, भूख न लगना, कमजोरी लगना आदि कई समस्या उत्पन्न होती हैं। हो जाता है। कुछ लोग अपने विचारों को नियत्रित न कर पाने और बार-बार एक ही विचार करने जैसी समस्या से ग्रसित हो जाते है और इस समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए हमेशा डॉक्टर, बैद्य से परामर्श करते रहते है। और काई न कोई दवा का सेवन करते रहना है। फिर भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। दिनों दिन उनकी बीमारी और भी गंभीर हो जाती है। आपको ज्ञात होना चाहिए कि आज मेडिकल साइंस भी मानती है ज्यादा तनाव की स्थिति में पेट में उल तक होने की अधिक संभवना बनी रहती है।

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