Health

जानें किन बीमारियों में बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए

Date : 23-Nov-2020

हेल्थ डेस्क (एजेंसी) । बैंगन सालों भर आसानी से मिल जाती है। ऐसा माना जाता है कि दुनिया में सबसे अधिक बैंगन की खेती चीन में होती है। जबकि दूसरे स्थान पर भारत है। भारत में आलू के बाद बैंगन की खेती सबसे अधिक की जाती है। इसकी सब्जी, चोखा और भर्ता बनाई जाती है। विशेषज्ञों की मानें तो बैंगन सेहत के लिए फायदेमंद भी है। इससे कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल में रहता है। साथ ही पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। हालांकि, कई रोगों में बैंगन का सेवन नुकसानदेह साबित हो सकता है। अगर आपको इस बारे में नहीं पता है, तो आइए जानते हैं कि किन बीमारियों में बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए-

खून की कमी

डॉक्टर्स हमेशा खून की कमी रहने पर बैंगन न खाने की सलाह देते हैं। इससे रक्त बनने में परेशानी होती है। वहीं, रक्त दान करने वालों को भी बैंगन नहीं खाना चाहिए।

बुखार में न खाएं

बुखार होने पर बैंगन की सब्जी न खाएं। इससे शरीर की गर्मी बढ़ जाती है। इसके लिए अपनी डाइट में बैंगन शामिल बिल्कुल न करें। एलर्जी होने पर भी बैंगन का सेवन न करें। ऐसा माना जाता है कि एलर्जी में बैंगन के सेवन से इसमें वृद्धि होती है। जबकि दाद, खाज और खुजली में भी बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए।

पथरी में न खाएं

अगर आपको पथरी की शिकायत है, तो बैंगन का सेवन न करें। डॉक्टर्स की मानें तो पानी की कमी अथवा दूषित पानी पीने से पथरी की समस्या होती है। पथरी के मरीजों को बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। बैंगन में ऑक्सलेट पाया जाता है जो किडनी के लिए नुकसानदेह होता है।

लो ब्लड प्रेशर में न खाएं

जिन लोगों को लो ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है। उन्हें लगातार बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके लिए डॉक्टर से जरूर सलाह लें। अगर बिना डॉक्टर सलाह के बैंगन का सेवन करते हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

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क्या आप भी बालों के झडने से हैं परेशान, तो आजमाएं ये 4 रामबाण इलाज

Date : 22-Nov-2020

हेल्थ डेस्क (एजेंसी) । हर दिन कंघी में सैंकड़ों बाल देखकर अगर आप भी घबरा जाती हैं तो समय है अपने किचन का कमाल देखने का।

कंघी करते हुए चंद बाल टूटना सामान्य है। लेकिन अगर आपको तकिया, तौलिया समेत हर जगह अपने बाल नजर आने लगें तो यह चिंता का विषय हो सकता है। और यह तो आप जानती ही हैं कि चिंता आपके बालों की सबसे बड़ी दुश्मन है। यानी झड़ते बालों की चिंता के कारण भी आपके बाल झड़ते हैं। इसलिए चिंता त्यागिए और अपने किचन में मौजूद चीजों से हेयर फॉल से निजात पाइए।

इन पोषक तत्वों की कमी से झड़ रहे हैं आपके बाल-

ज़िंक – ज़िंक बालों की ग्रोथ के लिए जिम्मेदार है। अगर आपकी बॉडी में जिंक की कमी है तो आपके नए बाल निकलना बंद हो जाएंगे।

आयरन– आयरन बालों की जड़ों में ऑक्सीजन पहुंचाने में सहायक होता है। जड़ों में ऑक्सीजन होगा तो बाल नहीं टूटेंगें। जब आपके शरीर में आयरन की कमी हो जाती है तो बाल टूटने लगते हैं।

बायोटिन– हमारे बाल केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं। बायोटिन हमारी बॉडी में केराटिन बनाने के लिए आवश्यक होता है। इसकी कमी से बाल पतले और बेजान हो जाते हैं और बीच से टूटने लगते हैं।

विटामिन ई- विटामिन ई बाल और त्वचा के लिए बहुत आवश्यक होता है। यह बालों को डैमेज से बचाता है।

आपके किचन में हर समस्या का इलाज है। और हम जो नुस्खे आपको बताने जा रहे हैं, वह आसानी से आपको घर पर उपलब्ध होगा।

1. प्याज का रस

प्याज का रस बालों का झड़ना रोकने और बालों को फिर से उगाने में सबसे ज्यादा असरदार है। इस विषय पर बहुत सी रिसर्च मौजूद हैं।

PMC जर्नल में प्रकाशित स्टडी में भी यह पाया गया कि प्याज हेयर फॉल का सबसे बेहतरीन उपाय है। एलोपेसिया एरिएटा के मरीजों को खास तौर पर प्याज का रस लगाने की सलाह दी जाती है। प्याज में भरपूर मात्रा में सल्फर होता है। यही सल्फर बालों का गिरना रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कैसे करें इस्तेमाल- 

प्याज को कद्दूकस करके उसका रस निकाल लें। इस रस को रुई की मदद से स्कैल्प पर लगा लें। आधे घण्टे तक इसे शॉवर कैप से ढक दें और फिर बाल धो लें। यह आपको हफ्ते में कम से कम दो बार करना है।

2. आंवला का तेल

बालों के लिए वरदान है आंवला। आंवला में भरपूर मात्रा में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह डैमेज हो चुके बालों की मरम्मत करता है और फ्री रेडिकल्स को खत्म करते हैं।बालों का झड़ना और गंजापन सभी समस्याओं का इलाज है आंवला।

कैसे करें इस्तेमाल

5 से 7 आंवलों को कद्दूकस कर लें और बीज हटा दें। इस गूदे को किसी सूती कपड़े या महीन छन्नी से छान कर रस निकाल लें। इस रस को दस से बारह चम्मच नारियल तेल में मिला लें। और तेल को कुछ देर गर्म पानी में रख कर छोड़ दें। आपका आंवले का तेल तैयार है। इसको आप दो हफ्तों तक इस्तेमाल कर सकते हैं। हफ्ते में कम से कम दो बार इस तेल से मसाज करें और एक घण्टे बाद बाल धो लें।

3. अंडा

प्रोटीन से भरपूर अंडा ना सिर्फ आपके शरीर को पोषण देता है बल्कि आपके बालों के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है। प्रोटीन के साथ साथ अंडे में ढेरों विटामिन और मिनरल होते हैं। इसमें सेलेनियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फॉस्फोरस होता है। ये बालों का गिरना रोकता है। यही नहीं, अंडे के पीले हिस्से यानी योक में लेसिथिन होता है जो बालों की ग्रोथ बढ़ाता है।

कैसे करें इस्तेमाल
दो अंडों के योक को दो चम्मच जैतून के तेल के साथ मिलाएं। इसमें एक कप पानी डालें और इस मिश्रण को बालों में लगाएं। इसे 15 से 20 मिनट रखने के बाद शैम्पू से धो डालें।

बालों की सभी परेशानी से चाहते है छुटकारा तो अपनाए अंडे। चित्र: शटरस्टॉक

4. करी पत्ता

करी पत्ते में ढेर सारे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो ब्लड को साफ कर के ऑक्सीजन का फ्लो बढ़ाते हैं। करी पत्ता बालों को सफेद होने से रोकता है। हर सुबह खाली पेट 5 से 6 करी पत्ते चबाएं।

कैसे करें इस्तेमाल

5 करी पत्तों को पेस्ट बना लें। इसमें एक चम्मच मेथी के पेस्ट और एक चम्मच दही मिलाकर बालों में लगाएं। 30 मिनट बाद बाल धो डालें।

 

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ज़्यादा अंडे खाने से बढ़ जाता है डायबिटीज होने का जोखिम, जानें कितना खाना है सही

Date : 18-Nov-2020

हेल्थ डेस्क (एजेंसी) । दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में हुई एक नई रिसर्च में देखा गया कि ज़्यादा अंडे खाने से डायबिटीज़ होने का जोखिम बढ़ जाता है। चीन मेडिकल और कतार विश्वविद्यालय के साथ मिलकर हुई ये ऐसी पहली रिसर्च थी, जिसमें एक बड़े पैमाने पर चीनी वयस्कों की अंडे की खपत का आकलन किया गया।

कितने अंडे खाना है सही? 

इस रिसर्च के मुताबिक जो लोग नियमित रूप से रोज़ाना एक या एक से अधिक अंडे (50 ग्राम के बराबर) का सेवन करते हैं, उनमें मधुमेह का ख़तरा 60 प्रतिशत बढ़ जाता है। यानि दिन में एक से ज़्यादा अंडे खाना नुकसानदेह हो सकता है। चीन में मधुमेह की व्यापकता अब 11 प्रतिशत से अधिक है, जो वैश्विक औसत 8.5 प्रतिशत से ऊपर है, यही वजह है कि वहां मधुमेह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन गया है।

मधुमेह का आर्थिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है, जो वैश्विक स्वास्थ्य व्यय (USD $760 बिलियन) का 10 प्रतिशत है। चीन में, डायबिटीज़ से संबंधित लागत 109 बिलियन यूएस डॉलर से अधिक हो गई है। महामारी एक्सपर्ट और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, डॉ. मिंग ली कहते हैं कि डायबिटीज़ के बढ़ते मामले चिंता को बढ़ा रहे हैं, खासकर चीन में जहां पारंपरिक चीनी आहार में परिवर्तन स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।

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क्या आपके मुंह से भी आती है दुर्गन्ध, तो करें ये घरेलू नुस्खें

Date : 18-Nov-2020

हेल्थ डेस्क (एजेंसी) । अक्सर देखा जाता हैं कि कुछ लोग अपने दांतों की अच्छे सफाई करते हैं लेकिन उसके बावजूद भी मुंह से दुर्गन्ध आती रहती हैं। जरूरी नहीं हैं कि इसका कारण मुंह कि सफाई ही हो बल्कि यह पेट से जुड़ी बीमारी के कारण भी हो सकता हैं। मुंह से निकलने वाली दुर्गंध के चलते कई बार दूसरों के सामने शर्मिंदा भी होना पड़ जाता हैं। ऐसे में जरूरी हैं कि इसे जड़ से दूर किया जाए। इसलिए आज इस कड़ी में हम आपके लिए कुछ घरेलू नुस्खें लेकर आए हैं जिनकी मदद से मुंह से आती दुर्गंध की समस्या को दूर किया जा सकता हैं। तो आइये जानते हैं इन नुस्खों के बारे में।

नमक के पानी से करें कुल्ला

मुंह से निकलने वाली दुर्गंध को दूर करने के लिए आप प्राथमिक उपचार के रूप में नमक पानी का कुल्ला कर सकते हैं। नमक में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह में मौजूद दुर्गंध के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया को मारने के लिए प्रभावी रूप से कार्य करता है और ओरल हेल्थ को मेंटेन बनाने में भी काफी मददगार साबित होता है। इसलिए जब भी आपको मुंह से दुर्गंध आने की समस्या हो तो आप इस घरेलू नुस्खे को ट्राय कर सकते हैं।

नींबू पानी का करें सेवन

मुंह से आने वाली दुर्गंध को दूर करने के लिए नींबू पानी भी बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। इसके लिए एक गिलास पानी में 1 नींबू का रस मिलाएं और फिर इस पानी का सेवन रोज सुबह उठने के बाद करें। इस बात का ध्यान दें कि ब्रश करने से पहले ही इस पानी का सेवन करना है।

भुनी हुई लौंग का करें सेवन

मुंह से आने वाली दुर्गंध को दूर करने के लिए आप दूसरे प्राथमिक उपचार के रूप में भुनी हुई लौंग का सेवन कर सकते हैं। इसके लिए लौंग को चबाकर खाने के लिए इस्तेमाल करना है। वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार भी लौंग का सेवन करने के कारण ओरल हेल्थ से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है।

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सर्दियों के दिनों में एड़ियों की फटने की समस्या है परेशान तो आप इन 5 टिप्स को जरूर करें फॉलो

Date : 12-Nov-2020

हेल्थ डेस्क (एजेंसी) । सर्दियों के दिनों में एड़ियों की फटने की समस्या लोगों को काफी परेशान करती है। ऐसे में यदि सही समय पर इसको ठीक नहीं किया गया तो फटी एड़ियों में दरारों के बढ़ने से कई बार सूजन और चलने में परेशानी भी होने लगती हैं।

यदि आप इस समस्या से बचना चाहते है, तो आप इन 5 टिप्स को जरूर फॉलो करें।

1 पेट्रोलियम जैली का प्रयोग इसका सबसे आसान तरीका है। इसके लिए डेढ़ चम्मच वैसलीन में एक छोटा चम्मच बोरिक पावडर डालकर अच्छी तरह मिला लें और इसे रात को सोते समय फटी एड़ियों पर अच्छी तरह से लगा लें, ताकि रातभर यह असर कर पाए। कुछ ही दिनों में फटी एड़ियां फिर से भरने लगेंगी।

2 अमचूर का तेल, फटी एड़ियों के इलाज के लिए रामबाण औषधी है। यह गाढ़ा होता है जिसे पिघलाकर आप रात में एड़ियों पर लगाएं और सुबह धो लें। कुछ ही दिनों में एड़ियां बिल्कुल चिकनी हो जाएंगी।

3 अगर एड़ियां ज्यादा फटी हुई हों तो मैथिलेटिड स्पिरिट में रुई के फाहे को भिगोकर फटी एड़ियों पर रखें। ऐसा दिन में तीन-चार बार करें, इससे एड़ियां ठीक होने लगेंगी। लेकिन एड़ियों को धूल-मिट्टी से बचाना बहुत जरूरी है, इस बात का ध्यान रखें।

4 गुनगुने पानी में थोड़ा शैंपू, एक चम्मच सोड और कुछ बूंदें डेटॉल की डालकर मिला लें। इस पानी में पैरों को 10 मिनट तक भिगोकर रखें। त्वचा फूलने पर मैथिलेटिड स्पिरिट लगाकर एड़ियों को प्यूमिक स्टोन या झांवे से रगड़कर साफ कर लें। इससे एड़ियों कीमृत त्वचा साफ हो जाएगी। फिर साफ तौलिए से पोंछकर गुनगुने जैतून या नारियल के तेल से मालिश करें।

5 पैरों को साफ व खूबसूरत बनाए रखने के लिए पैडिक्योर अवश्य कराएं। यह पैरों के नाखून, एड़ी व तलवों की सफाई का बेहतर तरीका है, जिसे नियमित रूप से कराने पर यह समस्या कम हो जाएगी। इसे आप खुद घर पर भी कर सकती हैं या फिर ब्यूटी स्पेशलिस्ट से ही करवाना मुनासिब होगा।

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कोरोना अपडेट : देश में कोरोना के 86 लाख से भी अधिक लोग हुए संक्रमित, बीते 24 घंटों में मिले 44 हजार 281 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज, 512 लोगों ने गवाई अपनी जान

Date : 11-Nov-2020

नई दिल्ली (एजेंसी)। देश में कोरोना के मामले तो लगातार सामने आ रहे हैं लेकिन अब इनमें कुछ स्थिरता देखने को मिल रही है। पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना वायरस के 44,281 नए मामले सामने आए हैं और कुल संक्रमण के मामले बढ़कर 86 लाख 36 हजार 12 पर जा पहुंचे हैं।

देश में पिछले 24 घंटों में 512 लोगों ने कोरोना संक्रमण के कारण अपनी जान गंवाई है और कुल आंकड़ा देखें तो अब तक 12,75,71 लोग कोरोना संक्रमण के कारण अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं। देश में कोरोना के इस समय कुल 4 लाख 94 हजार 657 एक्टिव केस हैं और पिछले 24 घंटे में 6557 लोग इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं।

00 सोमवार को क्या था आंकड़ा
भारत में कोविड-19 के 38074 नए मामले सामने आने के बाद रविवार को देश में संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 85,91,731 हो गए। इनमें से 79 लाख से अधिक लोगों के संक्रमण मुक्त होने के साथ ही देश में मरीजों के ठीक होने की दर 92.64 प्रतिशत हो गई है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आकंड़ों के अनुसार रविवार को देश में संक्रमण से 448 और लोगों की मौत हो गई। देश में संक्रमण के कारण कल तक 1,27,059 लोगों की मौत हो चुकी थी।

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जमीन, साफ घास पर नंगे पांव टहलने से सेहत होता है फायदेमंद, जाने कैसे पहुंचाता है हमारे शरीर को लाभ

Date : 11-Nov-2020

हेल्थ डेस्क (एजेंसी) । क्या कभी आपने सोचा है हरे-भरे बाग, पहाड़ी इलाके या समुद्र किनारे चलना क्यों अच्छा लगता है? ऐसा इसलिए है क्योंकि आपकी निकटता प्रकृति के साथ होती है. कहा जाता है कि जितना करीब आप प्रकृति के साथ होंगे, उतना ही ज्यादा खुश और स्वस्थ होंगे. लेकिन, हमारी आधुनिक जीवन शैली इस तरह के संपर्क से अलग करती है।

सभी जीवित प्राणी अपना जुड़ाव जमीन के साथ रखते हैं. जमीन या साफ घास पर नंगे पांव टहलने की आदत आपको प्रकृति के साथ जोड़ने में मदद करती है। मगर इसका ये मतलब नहीं कि जमीन पर सोया जाए। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि प्रकृति और इंसानों के बीच अलगाव शारीरिक शिथिलता और रोग का प्रमुख सहयोगी होता है।

ब्लड प्रेशर कम करता है

जमीन पर नंगे पांव टहलने से हमें ताजगी, शांति और सुरक्षा का एहसास मिलता है। इसलिए, उसका ब्लड प्रेशर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. प्राकृतिक चिकित्सा में ब्लड प्रेशर को सामान्य करने के लिए 10-15 मिनट पैदल चलने की सलाह दी जाती है.

सूजन और दर्द कम करता है

जमीन के पास खास विद्युत शक्ति होती है. ये जमीन पर नंगे पांव टहलनेवाले को महत्वपूर्ण बल देता है. विज्ञान के मुताबिक, नंगे पांव टहलने से पृथ्वी के निगेटिव आयन के अवशोषण में मदद मिलती है और सीधा शारीरिक संपर्क स्थापित होने की वजह से जमीन की सतह से इलेक्ट्रॉन की विशाल आपूर्ति होता है।

इम्यूनिटी, आंत के स्वास्थ्य को बढ़ाता है

खुद को मिट्टी और जमीन के संपर्क में लाने के फायदे हो सकते हैं क्योंकि जमीन में पाए जानेवाले शक्तिशाली सूक्ष्म जीव प्राकृतिक तरीके से इम्यूनिटी बनाने में मदद करते हैं. सूक्ष्म जीव हमारे शरीर में त्वचा और नाखुनों के जरिए दाखिल होते हैं. शरीर में पहुंचकर ये हमारे आंत की अच्छे बैक्टीरिया को खुराक मुहैया कराते हैं।

आंतों में उपस्थित माइक्रोफ्लोरा सूक्ष्मजीवी बैक्टीरिया के कारण बनती है और ये इम्यून सिस्टम को बढ़ाकर हमें ज्यादा मजबूत और ज्यादा स्वस्थ बनाता है. अगर आपके पास प्रकृति तक पहुंचने की सुविधा हो, तो आदत को अपनाएं वरना जब कभी मौका मिले ते एक बार जरूर नंगे पांव पैदल चलें।

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जीरा और धनिया, औषधीय गुणों से है भरपूर, वजन घटाने में ज्यादा फायदेमंद

Date : 09-Nov-2020

हेल्थ डेस्क (एजेंसी) । जीरा और धनिया दोनों ही खाने का जायका बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं. पर आयुर्वेद की मानें, तो ये दोनों कई औषधीय गुणों की भरमार हैं. जीरे और धनिये का उपयोग खाना बनाने में जितना असरदार है उससे कही ज़्यादा फायदेमंद है इनका पानी जिसे आयुर्वेद में पचान तंत्र को ठीक रखने का सबसे सटीक उपाय बताया गया है. ये तो सिर्फ एक झलक भर है आइये आज आपको इन दोनों की विशेषताओं के साथ साथ कौन है वज़न घटाने में ज़्यादा बेहतर- इसकी जानकारी भी विस्तार से देते हैं.

जीरे और धनिये के चमत्कारी गुण
एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, जहां एक तरफ जीरे में डाइजेस्टिव एंजाइम की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो पाचन क्रिया को तेज़ करने का काम करता है. जीरे के सेवन से आहार को पचाने और मल के ज़रिये शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है. वहीं दूसरी ओर धनिया न सिर्फ पेट की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है, बल्कि यह आपकी पाचन शक्ति को बढ़ाने में भी लाभकारी माना जाता है.

जीरा और धनिया- वज़न घटाने में कौन ज़्यादा फायदेमंद

1. फैट बर्न करने के लिए
जीरा और धनिया दोनों ही मसाले अपने पाचन गुणों के लिए जाने जाते हैं. यहाँ तक कि जीरे का पानी पाचन के लिए ज़्यादा बेहतर माना जाता है क्योंकि ये आपके आंत के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हुए फैट लॉस में मदद करता है और पाचन में सुधार करता है. हालांकि धनिया भी पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है पर ये जीरे की तरह फैट बर्न नहीं कर पाता.

2. शरीर को डिटॉक्सीफाई करने के लिए
सुबह-सुबह धनिये और जीरे का पानी पीना आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को छोड़ने में मदद करता है. इसके अलावा, इन दोनों में एंटीऑक्सीडेंट तत्व उच्च मात्रा में पाया जाता है. आप चाहें, तो इन दोनों को एक साथ मिलाकर पाउडर बना कर इस्तेमाल कर सकते हैं.

3. कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए
धनिया न सिर्फ खाने को महक देता है बल्कि यह आपके कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में फायदेमंद होता है. जिन लोगों का वज़न तेजी से बढ़ रहा है, उनके लिए ज़रूरी है कि वो अपने कोलेस्ट्रॉल को ठीक रखें. दरअसल, मोटापे से पीड़ित लोगों के लिए कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करना उन्हें कई सारी बीमारियों से बचा सकता है. इसलिए ऐसी स्थिति में धनिये के बीजों को उबालकर उसका पानी पीना कारगार उपाय साबित हो सकता है.

4. भूख कम करने के लिए
जीरे का इस्तेमाल आपकी भूख कम करने में मदद करता है क्योंकि यह आपके पेट को लंबे समय तक भरा रखता है जिसकी वजह से ये आपके लिए मोटापा कम करने में भी सहायक है. साथ ही, जीरा शरीर में उन हेल्दी इंजाइम्स को बढ़ावा देता है, जो कि खाना पचाने में मदद करते हैं. इस तरह अगर आप खाने में जीरा पीस कर इस्तेमाल करें, तो खाना आराम से पचेगा और ये शरीरे में फैट के संचय को भी रोकेगा.

आपने देखा कि विभिन्न तरीकों से जीरा और धनिया वज़न घटाने के लिए फायदेमंद हैं. पर इन दोनों में से सबसे ज़्यादा फायदेमंद चीज़ की बात करें, तो वो जीरा है. जीरा आपके शरीर में ग्लूकोज और खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है. साथ ही, यह वसा और अन्य पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में भी असरदार है, जो कि मेटाबॉलिज्म को ठीक रखता है. तो अगर आपको तेज़ी से अपना वज़न घटाना है, तो रोज़ सुबह जीरे का पानी ज़रूर पियें. 

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सीने के दर्द को अनदेखा करना पड सकता हैं महंगा

Date : 08-Nov-2020

हेल्थ डेस्क (एजेंसी) । सीने में दर्द के कई कारण होते हैं, जैसे कि- मांसपेशियों में दर्द, हड्डी में दर्द, एसिड-रिफ्लक्स, एनजाइना, दिल का दौरा आदि. इनमें से कुछ समस्याएं मामूली हैं तो कुछ गंभीर. लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि ज़्यादातर मरीजों को सीने में उठने वाले दर्द का कारण पता ही नहीं चलता. कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो सीने में सुई की तरह चुभते हैं तो कुछ मंद-मंद होते हैं. ऐसे में इन्हें नज़रंदाज़ करना गलत है. इसीलिए आज हम आपको इस समस्या के बारे में विस्तार से बताते हुए, आपके साथ इसके लक्षणों और इससे बचाव की जानकारी साझा करेंगे.


किस तरह के दर्द की अनदेखी न करें
जब कभी आपको सीने के बीच में यानि सेंटर में दर्द हो या भारीपन महसूस हो तो समझ जाइए कि ये दर्द गंभीर है. इसके आलावा कंधे, हाथ, जबड़े या पीठ में झनझनाहट होना, पसीना आना, थकावट से होने वाले दर्द आदि पर ध्यान दिया जाना भी ज़रूरी है. इन लक्षणों को नज़रंदाज़ करने से आपको गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है.

दर्द से राहत पाने के उपाय
अगर घरेलू उपचारों की बात करें तो हल्का खाना खाना ज़्यादा फायदेमंद होता है. इसके अलावा यदि कारण मस्कुलोस्केलेटल है, तो आस-पास किसी मेडिकल स्टोर से पेनकिलर ले सकते हैं. इससे आपके दर्द में आराम मिल जाएगा. वहीं अगर एसिड-रिफ्लक्स आपके दर्द का कारण है, तो एंटासिड आपके काम आ सकती है. ध्यान दें कि, अगर ये दर्द कार्डियक है, तो जीभ के नीचे नाइट्रेट जैसी दवा रखें, इसकी मदद से सीने में दर्द से राहत मिलेगी.

दर्द का कारण
बता दें कि, सीने में दर्द के कई कारण होते हैं. यह मस्कुलोस्केलेटल हो सकता है, जो त्वचा, मांसपेशियों, हड्डी या जोड़ों से पैदा होता है. इसके अलावा, ये एसिड-रिफ्लक्स हो सकता है जो फूड-पाइप या पेट में बनने वाले एसिड से पैदा होता है. सीने में दर्द फेफड़े से भी उत्पन्न हो सकता है. दर्द का एक कारण धमनियां भी हैं. मतलब सीने में दर्द हृदय की धमनियों में रुकावट आने से भी हो सकता है, जिससे हृदय की मांसपेशियों में रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है.

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विद्युत-चुम्बकीय क्षेत्र से मधुमेह के उपचार की संभावना

Date : 06-Nov-2020

हेल्थ डेस्क (एजेंसी) । अब तक मधुमेह के उपचार में औषधियों का या इंसुलिन का उपयोग किया जाता है। लेकिन अब सेल मेटाबॉलिज़्म पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन एक अन्य तरीके से मधुमेह के उपचार की संभावना जताता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित चूहों को स्थिर विद्युत और चुम्बकीय क्षेत्र के संपर्क में लाने पर उनमें इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ गई और रक्त शर्करा के स्तर में कमी आई। टाइप-2 मधुमेह वह स्थिति होती है जब शरीर में इंसुलिन बनता तो है लेकिन कोशिकाएं उसका ठीक तरह से उपयोग नहीं कर पातीं। दूसरे शब्दों में कोशिकाएं इंसुलिन-प्रतिरोधी हो जाती हैं, इंसुलिन के प्रति उनकी संवेदनशीलता कम हो जाती है।

आयोवा युनिवर्सिटी की वाल शेफील्ड लैब में कार्यरत केल्विन कार्टर कुछ समय पूर्व शरीर पर ऊर्जा क्षेत्र के प्रभाव का अध्ययन कर रहे थे। इसके लिए उन्होंने ऐसे उपकरण बनाए जो ऐसा चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करें जो पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र से 10 से 100 गुना अधिक शक्तिशाली और एमआरआई के चुम्बकीय क्षेत्र के हज़ारवें हिस्से के बीच का हो। चूहे इन धातु-मुक्त पिंजरों में उछलते-कूदते और वहां एक स्थिर विद्युत-चुम्बकीय क्षेत्र बना रहता। इस तरह चूहों को प्रतिदिन 7 या 24 घंटे चुम्बकीय क्षेत्र के संपर्क में रखा गया।

एक अन्य शोधकर्ता सनी हुआंग को मधुमेह पर काम करते हुए चूहों में रक्त शर्करा का स्तर मापने की ज़रूरत थी। इसलिए कार्टर ने अपने अध्ययन के कुछ चूहे, जिनमें टाइप-2 मधुमेह पीड़ित चूहे भी शामिल थे, हुआंग को अध्ययन के लिए दे दिए। हुआंग ने जब चूहों में रक्त शर्करा का स्तर मापा तो पाया कि जिन चूहों को विद्युत-चुम्बकीय क्षेत्र के संपर्क में रखा गया था उन चूहों के रक्त में अन्य चूहों की तुलना में ग्लूकोज़ स्तर आधा था।

कार्टर को आंकड़ों पर यकीन नहीं आया। तब शोधकर्ताओं ने चूहों में शर्करा स्तर दोबारा जांचा। लेकिन इस बार भी मधुमेह पीड़ित चूहों की रक्त शर्करा का स्तर सामान्य निकला। इसके बाद हुआंग और उनके साथियों ने मधुमेह से पीड़ित तीन चूहा मॉडल्स में विद्युत-चुम्बकीय क्षेत्र का प्रभाव देखा। तीनों में रक्त शर्करा का स्तर कम था और वे इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील थे। और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा कि चूहे विद्युत-चुम्बकीय क्षेत्र के संपर्क में सात घंटे रहे या 24 घंटे।

पूर्व में हुए अध्ययनों से यह पता था कि कोशिकाएं प्रवास के दौरान विद्युत-चुम्बकीय क्षेत्र का उपयोग करती हैं, जिसमें सुपरऑक्साइड नामक एक अणु की भूमिका होती है। सुपरऑक्साइड आणविक एंटीना की तरह कार्य करता है और विद्युत व चुंबकीय संकेतों को पकड़ता है। देखा गया है कि टाइप-2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में सुपरऑक्साइड का स्तर अधिक होता है और इसका सम्बंध रक्त वाहिनी सम्बंधी समस्याओं और मधुमेह जनित रेटिनोपैथी से है।

आगे जांच में शोधकर्ताओं ने चूहों के लीवर से सुपरऑक्साइड खत्म करके उन्हें विद्युत-चुम्बकीय क्षेत्र में रखा। इस समय उनके रक्त शर्करा के स्तर और इंसुलिन की संवेदनशीलता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इससे लगता है कि सुपरऑक्साइड कोशिका-प्रवास के अलावा कई अन्य भूमिकाएं निभाता है। शोधकर्ताओं की योजना मनुष्यों सहित बड़े जानवरों पर अध्ययन करने और इसके हानिकारक प्रभाव जांचने की है। यदि कारगर रहता है तो यह एक सरल उपचार साबित होगा।
-स्रोत फीचर्स

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