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पुरुष शादीशुदा महिलाओं की और क्यों आकर्षित होते है, जानिये क्या है कारण ?

Date : 26-May-2020

शादीशुदा यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पुरुषों शादीशुदा महिलाओं की और ज्यादा आकर्षित होते है। शादीशुदा महिलाओं में कुछ बहुत आकर्षक होता है जिसकी और पुरुष बहुत आकर्षित होते है। सिंगल महिलाएं भी खूबसूरत होती हैं, लेकिन वे एक शादीशुदा महिला की भव्यता से मेल नहीं कर सकती है। तो आज हम आपको बताएंगे कि पुरुष शादीशुदा महिलाओं की ओर आकर्षित क्यों होते है।पुरुष शादीशुदा महिलाओं की और क्यों आकर्षित होते है, इसके पीछे है कई कारण। .

महिलाओं में आत्मविश्वास बहुत ज्यादा होता है:
लड़कियों की तुलना में शादीशुदा महिलाओं में अधिक आत्मविश्वास होता है। इसकी वजह से वे पुरुषों को अधिक आकर्षक लगती है। ये ही उनका असली राज है ।

शादीशुदा महिलाओं को ज्यादा अनुभव होता है
सच कहें तो शादीशुदा महिलाओं को लड़कियों से ज्यादा अनुभव होता है जिसकी वजह से वे पुरुषों की मनोविज्ञान और उनकी इच्छा को समझ लेती हैं।

 पुरुषों के साथ असुरक्षित महसूस नहीं करती शादीशुदा महिलाएं
वैसे देखा जाएँ तो युवा लड़कियों की तरह शादीशुदा महिलाएं किसी भी प्रकार की असुरक्षा महसूस नहीं करती है।

 शादीशुदा महिलाएं अच्छी तरह से विकसित होती है:
पुरुषों को आकर्षित करने वाली सबसे पहली बात यह है कि ज्यादातर शादीशुदा महिलाएं पतली नहीं होती है। वे पूरी तरह से विकसित होती है।

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महिलाओ के शरीर के ऐसे अंग जिसे छूते ही शरीर में होती है गज़ब की उत्तेजना ??

Date : 26-May-2020

जब आपका दिल कुछ शरारती हो रहा हो और आपको अपने साथी को भी उत्तेजित करना हो। ऐसे मौके पर वो आपसे कुछ कहेंगी नहीं पर वो चाहती है कि आप उसे कुछ ऐसे छुए उन्हें कि आपकी साथी के अंग प्रत्यंग में रोमांच की एक लहर दौड़ जाये। हम बताते हैं आपको लड़कियों के एक ऐसे अंग जिन्हें छूते ही वो होंगी आपकी बाहों में आ जाएगी…. 
कान के पीछे चुम्बन लेने से शरीर में गज़ब की उत्तेजना आती है। और शरीर का रोम-रोम खड़ा हो जाता हैं। अगर उससे भी बात ना बने तो अपनी गर्म गर्म साँसे उनके गर्दन पर छोड़ते हुए उनके कान के निचले हिस्से को हलके से काटे। अगर यह काम आपने सही ढंग से कर दिया तो शायद आपको और कुछ करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी। आगे जो भी होगा वो सब आपकी साथी ही करेगी। वैसे आप उनके कान के पास चुम्बन करते हुए उनके कान में कुछ ऐसा भी कह सकते है जिसे सुनकर उनके रोम रोम में तरंगे उठने लगे। 
साथ ही गर्दन शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है। एक हलके से स्पर्श से ही पुरे बदन में झुरझुरी दौड़ जाती है। अब जऱा सोचिये आपने उन्हें पीछे से अपनी बाँहों में भर रखा है और गर्दन पर हल्के हल्के अपने होठ फिर रहे है। आपकी गर्म साँसे उनकी गर्दन पर अपने प्यार की मोहर लगा रही है। अब ऐसी हालत में बताइए कौन बेकाबू होकर हदें पार नहीं करेगा.

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भारतीय पुरुष आज भी कंडोम के इस्तेमाल से कतराते हैं, 95 प्रतिशत भारतीय नहीं करते कंडोम का इस्तेमाल

Date : 27-Apr-2020

नई दिल्ली (एजेंसी).  भारत की जनसंख्या जिस गति से बढ़ती जा रही है, उतनी गति से उस जनसंख्या को आधारभूत शिक्षा दी जा रही है या नहीं, यह कहना मुश्किल है। भारत में आज भी सेक्स के बारे में बात करना या यौन शिक्षा देना अलग नजरों से ही देखा जाता है। सही उम्र से अगर इस बारे में हर व्यक्ति को जानकारी दी जाए तो जनसंख्या में कमी के साथ-साथ कई और परेशानियां भी दूर होने की उम्मीद है। बच्चे ही नहीं यहां तो वयस्कों को भी इसके बारे में या तो पूर्ण जानकारी नहीं है या वो अपनी ही जानकारी को पूरा मानकर अपने मन के अनुसार चल रहे हैं। 

डुरेक्स ने साल 2018 में एक ट्वीट किया था कि 95 प्रतिशत भारतीय कंडोम का इस्तेमाल नहीं करते। अब इसके पीछे भारतीय पुरुषों की क्या सोच है, यह अलग मुद्दा है, लेकिन इससे यह जरूर जाहिर होता है कि भारत में यौन शिक्षा के बारे में बात करने की सख्त जरूरत है। UN की एक रिपोर्ट के अनुसार, आंकड़ों के आधार पर यह माना गया है कि 2027 तक भारत जनसंख्या के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ देगा। भारत में स्टेट ऑफ हेल्थ- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण ने यह दिखाया था कि 15 से 49 साल तक के मध्य करीब 95 प्रतिशत शादीशुदा कपल कंडोम्स का इस्तेमाल नहीं करते, जब बच्चा होने कि सबसे अधिक संभावना होती है।

सेक्स विशेषज्ञ के अनुसार, भारतीयों को ऐसा लगता है कि सेक्स करते समय कंडोम के इस्तेमाल से उनके अनुभव में बदलाव होगा और वो चर्म सीमा का आनंद नहीं ले पाएंगे। लेकिन इसी के कारण STI यानि बिना सुरक्षा के संभोग यानि सेक्स करने पर यौन रोग होने की सबसे अधिक संभावना रहती है। आप कभी भी किसी को देख कर या उनके द्वारा दी गई जानकारी पर यह सुनिश्चित नहीं कर सकते कि बिना सुरक्षा आगे बढ़ने से आपको यौन रोग लगेगा या नहीं। इसलिए पहले से ही इसके लिए सही कदम उठा लेना सही है। यौन रोगों से बचने का सबसे अच्छा और लगभग एकमात्र तरीका कंडोम ही है। इसलिए भी इसका इस्तेमाल जरूरी है। 

आप कितना भी अपने अनुभव पर विश्वास कर लें, लेकिन किसी एक कमजोर पल के कारण आप अनियोजित प्रेगनेंसी को बुलावा दे सकते हैं। अनियोजित प्रेगनेंसी न सिर्फ चिंता का कारण बनती है बल्कि इससे आपको मानसिक और शारीरिक तौर काफी फर्क पड़ सकता है। अगर आप दो बच्चे ही चाहते थे या आगे बच्चे नहीं चाहते थे और अब बिना सुरक्षा के साथ होने पर आपकी पार्टनर प्रेग्नेंट हो गई तो बच्चा रखने या न रखने दोनों स्थितियों में काफी परेशानियों का सामना पड़ता है। ऐसी स्थिति आए ही न, इसके लिए सुरक्षित संभोग होना जरूरी है। 

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क्या महिलाओं के लिए हस्तमैथुन लाभप्रद है या हानिकारक ?

Date : 27-Apr-2020

पुरुषों का हस्तमैथुन करना बहुत आम बात मानी जाती है पर लड़कियों के लिए इसे असामान्य माना जाता है. हालांकि सच्चाई यह नहीं है. महिलाएं में भी कामुकता होती है और कई बार यह पुरुषों से ज्यादा होती है. हस्तमैथुन को अक्सर अश्लीलता के नजरिए से देखा जाता है जबकि इसके स्वास्थ्य के नजरिए से इस पर गौर कम ही किया जाता है. महिलाओं के लिए हस्तमैथुन लाभप्रद है या फिर खतरनाक, यह जानना जरूरी है.
एक रिसर्च के मुताबिक, 18 से ऊपर उम्र की अधिकतर महिलाओं ने कम से कम एक बार हस्तमैथुन किया था, लेकिन कुछ महिलाएं इसे नियमित तौर पर करती हैं. इंडियाना यूनिवर्सिटी के नैशनल सर्वे के अनुसार, 25 से 29 के बीच 7.9 प्रतिशत महिलाएं एक सप्ताह में 2-3 बार हस्तमैथुन करती हैं.  वहीं 23.4 प्रतिशत पुरुष एक सप्ताह में 3-4 बार हस्तमैथुन करते हैं.हस्तमैथुन सामान्य, आनंददायक और हेल्दी एक्सपीरियंस है. ऑर्गैजम से एंडॉरफिन्स डोपामाइन और ऑक्सीटोसिन रिलीज होता है जिससे आपके मूड को अच्छा बनाने में मदद मिलती है. 
ऑर्गैजम से शारीरिक और भावानात्मक तनाव से मुक्ति मिल जाती है जिससे आपको बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है. बिस्तर पर जाते ही आपको नींद आ जाती है. डॉक्टरों के मुताबिक, एक किताब पढ़ने से जिस तरह अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है, उतनी ही मदद हस्तमैथुन करने से भी मिलती है. आप बिल्कुल शांत और तनावरहित हो जाते हैं.
कई लोगों को हस्तमैथुन करने से पीरियड्स के दौरान कम दर्द होता है. अगर आपके साथ भी ऐसा है तो हस्तमैथुन आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है.

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चरम (ऑर्गैज़्म) तक पहुंचने के चार रास्ते, जहां मिलेगा आपके पार्टनर को मल्टी-ऑर्गैज़्म

Date : 27-Apr-2020

सेक्स के साथ दिक़्क़त यह हो गई है कि हम इस प्रोसेस को एन्जॉय करने के बजाय चरम तक पहुंचने यानी आर्गैज़्म के बारे में बहुत ही ज़्यादा सोचते हैं. यूं तो सेक्स के हर पल को एन्जॉय करना ही सबसे सही होता है, पर अगर आप चरम सुख की तलाश में हैं तो आपको उस सुख का रास्ता ज़रूर दिख सकता है. पर हां, वहां तक पहुंचना आपके काम और क़ाबिलियत पर निर्भर है. राह ज़िंदगी की हो या सेक्स लाइफ़ की बात करने से ही बात बन सकती है. दुनियाभर के सेक्सोलॉजिस्ट कहते हैं कि पार्टनर्स के बीच क्यूनिकेशन का होना बहुत ज़रूरी है. अगर आप अपने पार्टनर से हर बारे में खुलकर बात कर लेते हैं तो इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि बिस्तर पर आप दोनों बेहतर परफ़ॉर्म करेंगे. क्योंकि बात करने से आप एक-दूसरे की पसंद- नापसंद और चाहतों से वाकि़फ़ हो सकते हैं. बेशक यहां पसंद-नापसंद में सेक्शुअल पसंद- नापसंद की बातें भी हैं.

सेक्स को लेकर हम सभी के मन में ज़िंदगी में कभी न कभी, कोई न कोई ग़लतफ़हमी या पूर्वाग्रह होते ही हैं. आमतौर पर भारत में महिलाओं का इनिशिएटिव लेना ख़ुद ज़्यादातर महिलाएं तक सही नहीं मानतीं. अब इससे ग़लत बात और क्या हो सकती है. देखा जाए तो ऑर्गैज़्म पाने का रास्ता तब अधिक आसान होता है, जब आप मूड में होती हैं. तो उम्मीद है आप समझ ही गई होंगी, जब आपका सेक्स करने का मन कर रहा हो तब पार्टनर को बताने में, सेक्स की इच्छा जताने में कुछ भी ग़लत नहीं है. आख़िर आनंद पर आपका भी हक़ है.

हस्तमैथुन अपने शरीर को जानने, उसकी ज़रूरतों को पहचानने और उसको लेकर कॉन्फ़िडेंट होने का एक बेहद आसान और सुरक्षित तरीक़ा है. पर दिक़्क़त यह है कि हस्तमैथुन को अब तक ज़्यादातर महिलाएं टैबू ही समझती हैं. उस बारे में बात करना तो दूर, सोचने को भी पाप की कैटेगरी में रखती हैं. अमेरिका के मर्सर यूनिवर्सिटी मेडिकल स्कूल के सेक्शुअल थेरैपी और सेक्शुअल डिस्फ़ंक्शन के प्रोफ़ेसर रह चुकीं डॉ मैत्री चंद कहती हैं,‘‘महिलाओं के लिए हस्तमैथुन बहुत ज़रूरी चीज़ है. इससे महिलाएं यह पता लगा पाती हैं कि किस बात से, किस तरीक़े से उन्हें चरम की प्राप्ति हो सकती है. इससे असल सेक्स के दौरान ऑर्गैज़्म मिलने में आसानी होती है.’’

भले ही यह कहा जाता हो कि महिलाएं मल्टी-ऑर्गैज़्म प्राप्त कर सकती हैं, असल ज़िंदगी में अधिकतर महिलाएं चरम पर पहुंचने से पहले ही सेक्स की क्रिया को बंद कर देती हैं. ऐसा फ़ॉल्स ऑर्गैज़्म के चलते होता है. जब हमें अच्छा लगने लगता है, उसके कुछ सेकेंड में लगता है कि यही आर्गैज़्म है और दिमाग़ संतुष्ट महसूस करता है, पर देखा जाए तो चरम तो उससे आगे का पड़ाव है. इसके लिए ज़रूरी है अपने एक्साइटमेंट पर क़ाबू पाना और सेक्स की क्रिया को लंबा खींचने की कोशिश करना, कुछ-कुछ तांत्रिक सेक्स की तरह. तांत्रिक सेक्स में भी ऑर्गैज़्म आने-आने का आभास होते ही हल्का सा ब्रेक लेकर या प्रोसेस को धीमा करके सेक्स के ड्यूरेशन को बढ़ाया जाता है. अंत में जब क्लाइमेक्स पर आप दोनों पहुंचेंगे, तब पता चलेगा कि सेक्स का असली मतलब क्या होता है.

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