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आज का राशिफल मंगलवार 24 नवंबर

Date : 24-Nov-2020

मेष - मांगलिक या सांस्कृतिक उत्सव में हिस्सेदारी रहेगी। ससुराल पक्ष का सहयोग मिलेगा। आपसी संबंध मधुर होंगे। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है।

वृष - आर्थिक मामलों में जोखिम न उठाएं। मन अज्ञात भय से ग्रसित रहेगा। जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। शासन सत्ता का सहयोग रहेगा। मधुर संबंध बनेंगे।

मिथुन - व्यावसायिकप्रतिष्ठा बढ़ेगी। धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव में हिस्सेदारी रहेगी। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी, लेकिन दांपत्य जीवन में तनाव रहेगा।

कर्क - बुद्धि कौशल से किया गया कार्य संपन्न होगा। मौसम के रोग के प्रति सचेत रहें। पिता या धर्म गुरु का सहयोग मिलेगा। जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी।

सिंह - रचनात्मक कायोर्ं में सफलता मिलेगी। मांगलिक या सांस्कृतिक उत्सव में हिस्सेदारी रहेगी। शासन सत्ता का सहयोग रहेगा। जीवनसाथी का सहयोग रहेगा।

कन्या - बुद्धि कौशल से किया गया कार्य संपन्न होगा। चल या अचल संपत्ति में वृद्धि होगी। पारिवारिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। शासन सत्ता से आपेक्षित सहयोग मिलेगा।

तुला - सामाजिक कायोर्ं में रुचि लेंगे। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिलेगी।

वृश्चिक - दांपत्य जीवन सुखमय होगा। बुद्धि कौशल से किया गया कार्य संपन्न होगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। किसी कार्य के पूर्ण होने से आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।

धनु - उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी, लेकिन किसी रिश्तेदार के कारण तनाव भी मिलेगा।वाणी पर संयम रखें। ऐसा कोई कार्य न करें जिससे प्रतिष्ठा प्रभावित हो।

मकर - किसी कार्य के संपन्न होने से आत्मविश्र्वास में वृद्धि होगी। पारिवारिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। व्यावसायिक मामालें में सफलता मिलेगी।

कुंभ - धन, यश, कीर्ति में वृद्धि होगी। शासन सत्ता का सहयोग रहेगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। व्यर्थ की भागदौड़ रह्वहेगी। रचनात्मक प्रयासों में सफलता मिलेगी।

मीन - जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी, लेकिन पारिवारिक समस्या से ग्रसित हो सकते हैं। स्वास्थ्य एवं प्रतिष्ठा के प्रति सचेत रहें। जीवनसाथी का सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा।

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 24-Nov-2020

हिन्दू पंचांग 
दिनांक 24 नवम्बर 2020
दिन - मंगलवार
विक्रम संवत - 2077
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - हेमंत
मास - कार्तिक
पक्ष - शुक्ल 
तिथि - दशमी 25 नवम्बर रात्रि 02:42 तक तत्पश्चात एकादशी
नक्षत्र - पूर्व भाद्रपद शाम 03:32 तक तत्पश्चात उत्तर भाद्रपद
योग - वज्र 25 नवम्बर प्रातः 06:46 तक तत्पश्चात सिद्धि
राहुकाल - शाम 03:11 से शाम 04:33 तक
सूर्योदय - 06:56 
सूर्यास्त - 17:54 
दिशाशूल - उत्तर दिशा में

व्रत पर्व विवरण -

अकाल मृत्यु से रक्षा हेतु विशेष आरती 

विशेष ~ 26 नवम्बर 2020 गुरुवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।
देवउठी एकादशी देव-जगी एकादशी के दिन को संध्या के समय कपूर आरती करने से आजीवन अकाल-मृत्यु से रक्षा होती है; एक्सीडेंट, आदि उत्पातों से रक्षा होती है l
 

भीष्म पंचक व्रत 
 25 नवम्बर 2020 बुधवार से 29 नवम्बर 2020 रविवार तक भीष्म पंचक व्रत है ।
 कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूनम तक का व्रत 'भीष्म-पंचक व्रत' कहलाता है l जो इस व्रत का पालन करता है, उसके द्वारा सब प्रकार के शुभ कृत्यों का पालन हो जाता है l यह महापुण्य-मय व्रत महापातकों का नाश करने वाला है l
 कार्तिक एकादशी के दिन बाणों की शय्या पर पड़े हुए भीष्मजी ने जल कि याचना कि थी l तब अर्जुन ने संकल्प कर भूमि पर बाण मारा तो गंगाजी कि धार निकली और भीष्मजी के मुंह में आयी l उनकी प्यास मिटी और तन-मन-प्राण संतुष्ट हुए l इसलिए इस दिन को भगवान् श्री कृष्ण ने पर्व के रूप में घोषित करते हुए कहा कि 'आज से लेकर पूर्णिमा तक जो अर्घ्यदान से भीष्मजी को तृप्त करेगा और इस भीष्मपंचक व्रत का पालन करेगा, उस पर मेरी सहज प्रसन्नता होगी l'

कौन यह व्रत करें 
 निःसंतान व्यक्ति पत्नीसहित इस प्रकार का व्रत करें तो उसे संतान कि प्राप्ति होती है l
 जो अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं, वैकुण्ठ चाहते हैं या इस लोक में सुख चाहते हैं उन्हें यह व्रत करने कि सलाह दी गयी है l
 जो नीचे लिखे मंत्र से भीष्मजी के लिए अर्घ्यदान करता है, वह मोक्ष का भागी होता है l
 वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृतप्रवराय च l
अपुत्राय ददाम्येतदुद्कं भीष्म्वर्मणे ll
वसूनामवताराय शन्तनोरात्मजाय च l
अर्घ्यं ददामि भीष्माय आजन्मब्रह्मचारिणे ll
 'जिनका व्याघ्रपद गोत्र और सांकृत प्रवर है, उन पुत्ररहित भीश्म्वार्मा को मैं यह जल देता हूँ l वसुओं के अवतार, शांतनु के पुत्र आजन्म ब्रह्मचारी भीष्म को मैं अर्घ्य देता हूँ l ( स्कन्द पुराण, वैष्णव खंड, कार्तिक महात्मय )

व्रत करने कि विधि 
इस व्रत का प्रथम दिन देवउठी एकादशी है l इस दिन भगवान् नारायण जागते हैं l इस कारण इस दिन निम्न मंत्र का उच्चारण करके भगवान् को जगाना चाहिए :
 उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द उत्तिष्ठ गरुडध्वज l
उत्तिष्ठ कमलाकान्त त्रैलोक्यमन्गलं कुरु ll
 'हे गोविन्द ! उठिए, उठए, हे गरुडध्वज ! उठिए, हे कमलाकांत ! निद्रा का त्याग कर तीनों लोकों का मंगल कीजिये l'
➡ इन पांच दिनों में अन्न का त्याग करें l कंदमूल, फल, दूध अथवा हविष्य (विहित सात्विक आहार जो यज्ञ के दिनों में किया जाता है ) लें l
➡ इन दिनों में पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, गोझरण व् गोबर-रस का मिश्रण )का सेवन लाभदायी है l पानी में थोडा-सा गोझरण डालकर स्नान करें तो वह रोग-दोषनाशक तथा पापनाशक माना जाता है l
➡ इन दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए l
➡ भीष्मजी को अर्घ्य-तर्पण -
इन पांच दिनों निम्नः मंत्र से भीष्म जी के लिए तर्पण करना चाहिए :
 सत्यव्रताय शुचये गांगेयाय महात्मने l
भीष्मायैतद ददाम्यर्घ्यमाजन्मब्रह्मचारिणे ll
 'आजन्म ब्रह्मचर्य का पालन करनेवाले परम पवित्र, सत्य-व्रतपरायण गंगानंदन महात्मा भीष्म को मैं यह अर्घ्य देता हूँ l'

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 23-Nov-2020

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक 23 नवम्बर 2020
दिन - सोमवार
विक्रम संवत - 2077
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - हेमंत
मास - कार्तिक
पक्ष - शुक्ल
तिथि - नवमी रात्रि 12:32 तक तत्पश्चात दशमी
नक्षत्र - शतभिषा दोपहर 01:05 तक तत्पश्चात पूर्व भाद्रपद
योग - हर्षण 24 नवम्बर प्रातः 06:10 तक तत्पश्चात वज्र
राहुकाल - सुबह 08:17 से सुबह 09:40 तक
सूर्योदय - 06:55
सूर्यास्त - 17:54
दिशाशूल - पूर्व दिशा में

 व्रत पर्व विवरण -

ब्रह्मलीन भगवत्पाद साँई श्री लीलाशाहजी महाराज महानिर्वाण दिवस, कुष्मांड नवमी, अक्षय-आँवला नवमी
विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

आँवला (अक्षय) नवमी
➡ 23 नवम्बर 2020 सोमवार को आँवला (अक्षय) नवमी है ।

 नारद पुराण के अनुसार
 कार्तिके शुक्लनवमी याऽक्षया सा प्रकीर्तता । तस्यामश्वत्थमूले वै तर्प्पणं सम्यगाचरेत् ।। ११८-२३ ।।*
देवानां च ऋषीणां च पितॄणां चापि नारद । स्वशाखोक्तैस्तथा मंत्रैः सूर्यायार्घ्यं ततोऽर्पयेत् ।। ११८-२४ ।।
ततो द्विजान्भोजयित्वा मिष्टान्नेन मुनीश्वर । स्वयं भुक्त्वा च विहरेद्द्विजेभ्यो दत्तदक्षिणः ।। ११८-२५ ।।
एवं यः कुरुते भक्त्या जपदानं द्विजार्चनम् । होमं च सर्वमक्षय्यं भवेदिति विधेर्वयः ।। ११८-२६ ।।
 कार्तिक मास के शुक्लपक्ष में जो नवमी आती है, उसे अक्षयनवमी कहते हैं। उस दिन पीपलवृक्ष की जड़ के समीप देवताओं, ऋषियों तथा पितरों का विधिपूर्वक तर्पण करें और सूर्यदेवता को अर्घ्य दे। तत्पश्च्यात ब्राह्मणों को मिष्ठान्न भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा दे और स्वयं भोजन करे। इस प्रकार जो भक्तिपूर्वक अक्षय नवमी को जप, दान, ब्राह्मण पूजन और होम करता है, उसका वह सब कुछ अक्षय होता है, ऐसा ब्रह्माजी का कथन है।
 कार्तिक शुक्ल नवमी को दिया हुआ दान अक्षय होता है अतः इसको अक्षयनवमी कहते हैं।
 स्कन्दपुराण, नारदपुराण आदि सभी पुराणों के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी युगादि तिथि है। इसमें किया हुआ दान और होम अक्षय जानना चाहिये । प्रत्येक युग में सौ वर्षों तक दान करने से जो फल होता है, वह युगादि-काल में एक दिन के दान से प्राप्त हो जाता है “एतश्चतस्रस्तिथयो युगाद्या दत्तं हुतं चाक्षयमासु विद्यात् । युगे युगे वर्षशतेन दानं युगादिकाले दिवसेन तत्फलम्॥”
 देवीपुराण के अनुसार कार्तिक शुक्ल नवमीको व्रत, पूजा, तर्पण और अन्नादिका दान करनेसे अनन्त फल होता है।
 कार्तिक शुक्ल नवमी को ‘धात्री नवमी’ (आँवला नवमी) और ‘कूष्माण्ड नवमी’ (पेठा नवमी अथवा सीताफल नवमी) भी कहते है। स्कन्दपुराण के अनुसार अक्षय नवमी को आंवला पूजन से स्त्री जाति के लिए अखंड सौभाग्य और पेठा पूजन से घर में शांति, आयु एवं संतान वृद्धि होती है।
 आंवले के वृक्ष में सभी देवताओं का निवास होता है तथा यह फल भगवान विष्णु को भी अति प्रिय है। अक्षय नवमी के दिन अगर आंवले की पूजा करना और आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन बनाना और खाना संभव नहीं हो तो इस दिन आंवला जरूर खाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि को आंवले के पेड़ से अमृत की बूंदे गिरती है और यदि इस पेड़ के नीचे व्यक्ति भोजन करता है तो भोजन में अमृत के अंश आ जाता है। जिसके प्रभाव से मनुष्य रोगमुक्त होकर दीर्घायु बनता है। चरक संहिता के अनुसार अक्षय नवमी को आंवला खाने से महर्षि च्यवन को फिर से जवानी यानी नवयौवन प्राप्त हुआ था।

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आज का राशिफल रविवार 22 नवंबर

Date : 22-Nov-2020

मेष -

पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। जीवनसाथी का सहयोग और सानिध्य मिलेगा।

वृषभ-

भागदौड़ रहेगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे। शासन सत्ता का सहयोग रहेगा। जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। संतान के संबंध में सुखद समाचार मिलेगा।

मिथुन-

स्वास्थ्य और मौसम के रोग से प्रभावित हो सकते हैं।आर्थिक मामलों में जोखिम न उठाएं। किसी कार्य के संपन्न होने से आपके प्रभाव में वृद्धि होगी।

कर्क-

व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होगा। रिश्तों में निकटता आएगी। पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहे। जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी।

सिंह-

आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। धार्मिक प्रवृत्ति में वृद्धि होगी। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। किसी कार्य के संपन्न होने से आपके प्रभाव तथा वर्चस्व में वृद्धि होगी।

कन्या-

शासन सत्ता का सहयोग रहेगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। जीवनसाथी का सहयोग एवं सानिध्य प्राᄍा होगा।

तुला-

आर्थिक मामलों में जोखिम न उठाएं। संतान या शिक्षा के संबंध में सुखद समाचार मिलेगा। व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होगा। आर्थिक मामलों में प्रगति होगी।

वृश्चिक-

सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। यश, कीर्ति बढ़ेगी। जीवनसाथी का सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा। गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी।

धनु-

शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। किसी दूसरे से भी सहयोग मिल सकता है। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। यश, कीर्ति बढ़ेगी। जीविकाके क्षेत्र मे प्रगति होगी।

मकर-

आर्थिक मामलों में सफलता मिलेगी। पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। जीवनसाथी का सहयोग एवं सानिध्य मिलता रहेगा।

कुम्भ-

व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। धार्मिक प्रवृत्ति में वृद्धि होगी। उपहार या सम्मान का लाभ मिलेगा। किसी कार्य के संपन्न होने से आपके प्रभाव तथा वर्चस्व में वृद्धि होगी।

मीन-

पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे।

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 22-Nov-2020

हिन्दू पंचांग 
दिनांक 22 नवम्बर 2020
दिन - रविवार
विक्रम संवत - 2077
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - हेमंत
मास - कार्तिक
पक्ष - शुक्ल
तिथि - अष्टमी रात्रि 10:51 तक तत्पश्चात नवमी
नक्षत्र - धनिष्ठा सुबह 11:10 तक तत्पश्चात शतभिषा
योग - व्याघात 23 नवम्बर प्रातः 05:52 तक तत्पश्चात हर्षण
राहुकाल - शाम 04:33 से शाम 05:56 तक
सूर्योदय - 06:54
सूर्यास्त - 17:54
दिशाशूल - पश्चिम दिशा में

व्रत पर्व विवरण - गोपाष्टमी
विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

अक्षय फल देनेवाली अक्षय नवमी 
 कार्तिक शुक्ल नवमी (23 नवम्बर 2020) सोमवार को ‘अक्षय नवमी’ तथा ‘आँवला नवमी’ कहते हैं | अक्षय नवमी को जप, दान, तर्पण, स्नानादि का अक्षय फल होता है | इस दिन आँवले के वृक्ष के पूजन का विशेष महत्व है | पूजन में कर्पूर या घी के दीपक से आँवले के वृक्ष की आरती करनी चाहिए तथा निम्न मंत्र बोलते हुये इस वृक्ष की प्रदक्षिणा करने का भी विधान है :
 यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च |
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे ||
 इसके बाद आँवले के वृक्ष के नीचे पवित्र ब्राम्हणों व सच्चे साधक-भक्तों को भोजन कराके फिर स्वयं भी करना चाहिए | घर में आंवलें का वृक्ष न हो तो गमले में आँवले का पौधा लगा के अथवा किसी पवित्र, धार्मिक स्थान, आश्रम आदि में भी वृक्ष के नीचे पूजन कर सकते है | कई आश्रमों में आँवले के वृक्ष लगे हुये हैं | इस पुण्यस्थलों में जाकर भी आप भजन-पूजन का मंगलकारी लाभ ले सकते हैं |

आँवला (अक्षय) नवमी है फलदायी 
 भारतीय सनातन पद्धति में पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए महिलाओं द्वारा आँवला नवमी की पूजा को महत्वपूर्ण माना गया है। कहा जाता है कि यह पूजा व्यक्ति के समस्त पापों को दूर कर पुण्य फलदायी होती है। जिसके चलते कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को महिलाएं आँवले के पेड़ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करती हैं।
 आँवला नवमी को अक्षय नवमी के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था। कहा जाता है कि आंवला भगवान विष्णु का पसंदीदा फल है। आंवले के वृक्ष में समस्त देवी-देवताओं का निवास होता है। इसलिए इसकी पूजा करने का विशेष महत्व होता है।

 व्रत की पूजा का विधान 
???????? नवमी के दिन महिलाएं सुबह से ही स्नान ध्यान कर आँवला के वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा में मुंह करके बैठती हैं।
???????? इसके बाद वृक्ष की जड़ों को दूध से सींच कर उसके तने पर कच्चे सूत का धागा लपेटा जाता है।
???????? तत्पश्चात रोली, चावल, धूप दीप से वृक्ष की पूजा की जाती है।
???????? महिलाएं आँवले के वृक्ष की १०८ परिक्रमाएं करके ही भोजन करती हैं।

आँवला नवमी की कथा 
वहीं पुत्र रत्न प्राप्ति के लिए आँवला पूजा के महत्व के विषय में प्रचलित कथा के अनुसार एक युग में किसी वैश्य की पत्नी को पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हो रही थी। अपनी पड़ोसन के कहे अनुसार उसने एक बच्चे की बलि भैरव देव को दे दी। इसका फल उसे उल्टा मिला। महिला कुष्ट की रोगी हो गई।
 इसका वह पश्चाताप करने लगे और रोग मुक्त होने के लिए गंगा की शरण में गई। तब गंगा ने उसे कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आँवला के वृक्ष की पूजा कर आँवले के सेवन करने की सलाह दी थी।
 जिस पर महिला ने गंगा के बताए अनुसार इस तिथि को आँवला की पूजा कर आँवला ग्रहण किया था, और वह रोगमुक्त हो गई थी। इस व्रत व पूजन के प्रभाव से कुछ दिनों बाद उसे दिव्य शरीर व पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, तभी से हिंदुओं में इस व्रत को करने का प्रचलन बढ़ा। तब से लेकर आज तक यह परंपरा चली आ रही है।

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आज का राशिफल शनिवार 21 नवंबर

Date : 21-Nov-2020

मेष - उच्च अधिकारी से सहयोग मिल सकता है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होगा। आर्थिक मामलों में सफलता मिलेगी।

वृष - यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद होगी, लेकिन सचेत रहें। दांपत्य जीवन सुखमय होगा। अज्ञातभय कहीं न कहीं तनाव देगा। किसी भी तरह का जोखिम न उठाएं।

मिथुन - बुद्धि कौशल से किया गया कार्य सफलता की ओर ले जाएगा, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। जीवनसाथी का सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा।

कर्क - आर्थिक मामलों में सफलता मिलेगी। व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होंगे। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में चल रहा प्रयास सफल होगा। यश, कीर्ति में वृद्धि होगी।

सिंह - जीवनसाथी के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। मौसम के रोग या प्रदूषण से सचेत रहें। किया गया पुरुषार्थ सार्थक होगा। रचनात्मक कार्यों में मन लगाएं, सफलता मिलेगी।

कन्या - आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। शासनसत्ता का सहयोग रहेगा। यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद होगी, लेकिन सचेत रहकर यात्रा करें।

तुला - आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। संबंधोंमें मधुरता आएगी।

वृश्चिक - आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। संबंधोंमें मधुरता आएगी।

धनु - स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। भावुकता में नियंत्रण रखें। कोई ऐसा कार्य न करें जिससे पारिवारिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो। वाणी पर संयम रखें।

मकर - शासन सत्ता का सहयोग रहेगा। जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी, लेकिन मौसम के रोग के प्रति सचेत रहें।

कुंभ - व्यावसायिक योजना फलीभूत होगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। रचनात्मक कार्यों में प्रगति होगी। पारिवारिक सहयोग मिलेगा।

मीन - आर्थिक मामलों में सफलता मिलेगी। व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होंगे। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में चल रहा प्रयास सफल होगा। यश, कीर्ति में वृद्धि होगी।

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 21-Nov-2020

हिन्दू पंचांग 
 दिनांक 21 नवम्बर 2020
 दिन - शनिवार
 विक्रम संवत - 2077
 शक संवत - 1942
 अयन - दक्षिणायन
 ऋतु - हेमंत
 मास - कार्तिक
 पक्ष - शुक्ल
 तिथि - सप्तमी रात्रि 09:48 तक तत्पश्चात अष्टमी
 नक्षत्र - श्रवण सुबह 09:54 तक तत्पश्चात धनिष्ठा
 योग - वृद्धि 22 नवम्बर प्रातः 06:02 तक तत्पश्चात व्याघात
 राहुकाल - सुबह 09:39 से सुबह 11:02 तक
 सूर्योदय - 06:54
 सूर्यास्त - 17:54
 दिशाशूल - पूर्व दिशा में

 व्रत पर्व विवरण - संत जलारामजी जयंती विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है था शरीर का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

 गौ-पूजन से सौभाग्यवृद्धि 
➡ 22 नवम्बर 2020 रविवार को गोपाष्टमी पर्व है ।
 कार्तिक शुक्ल अष्टमी को ‘गोपाष्टमी’ कहते हैं | यह गौ-पूजन का विशेष पर्व है | इस दिन प्रात:काल गायों को स्नान कराके गंध-पुष्पादि से उनका पूजन किया जाता है | इस दिन गायों को गोग्रास देकर उनकी परिक्रमा करें और थोड़ी दूर तक उनके साथ जायें तो सब प्रकार की अभीष्ट सिद्धि होती है | सायंकाल जब गायें चरकर वापस आयें, उस समय भी उनका आतिथ्य, अभिवादन और पंचोपचार-पूजन करके उन्हें हरी घास, भोजन आदि खिलाएं और उनकी चरणरज ललाट पर लगायें | इससे सौभाग्य की वृद्धी होती है |

गोपाष्टमी विशेष 
 गौ माता धरती की सबसे बड़ी वैद्यराज
 भारतीय संस्कृति में गौमाता की सेवा सबसे उत्तम सेवा मानी गयी है, श्री कृष्ण गौ सेवा को सर्व प्रिय मानते हैं ..
 शुद्ध भारतीय नस्ल की गाय की रीढ़ में सूर्यकेतु नाम की एक विशेष नाढ़ी होती है जब इस नाढ़ी पर सूर्य की किरणे पड़ती हैं तो स्वर्ण के सूक्ष्म काणों का निर्माण करती हैं , इसीलिए गाय के दूध, मक्खन और घी में पीलापन रहता है , यही पीलापन अमृत कहलाता है और मानव शरीर में उपस्थित विष को बेअसर करता है l
 गाय को सहलाने वाले के कई असाध्य रोग मिट जाते हैं क्योंकि गाय के रोमकोपों से सतत एक विशेष ऊर्जा निकलती है ..
 गाय की पूछ के झाडने से बच्चों का ऊपरी हवा एवं नज़र से बचाव होता है ..
 गौमूत्र एवं गोझारण के फायदे तो अनंत हैं , इसके सेवन से केंसर व् मधुमय के कीटाणु नष्ट होते हैं ..
 गाय के गोबर से लीपा पोता हुआ घर जहाँ सात्विक होता है वहीँ इससे बनी गौ-चन्दन जलाने से वातावरण पवित्र होता है इसीलिए गाय को पृथ्वी पर सबसे बड़ा वैद्यराज माना गया है ,सत्पुरुषो का कहना है की गाय की सेवा करने से गाय का नहीं बल्कि सेवा करने वालो का भला होता है ..

 संत श्री जलाराम बापा जयंती 
➡ 21 नवम्बर 2020 शनिवार को संत श्री जलाराम बापा जयंती है ।
 जलाराम बापा का जन्म सन्‌ 1799 में गुजरात के राजकोट जिले के वीरपुर गॉंव में हुआ था। उनके पिता का नाम प्रधान ठक्कर और मॉं का नाम राजबाई था। बापा की माँ एक धार्मिक महिला थी, जो साधु-सन्तों की बहुत सेवा करती थी। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर संत रघुवीर दास जी ने आशीर्वाद दिया कि उनका दुसरा प़ुत्र जलाराम ईश्वर तथा साधु-भक्ति और सेवा की मिसाल बनेगा।
 16 साल की उम्र में श्री जलाराम का विवाह वीरबाई से हुआ। परन्तु वे वैवाहिक बन्धन से दूर होकर सेवा कार्यो में लगना चाहते थे। जब श्री जलाराम ने तीर्थयात्राओं पर निकलने का निश्चय किया तो पत्नी वीरबाई ने भी बापा के कार्यो में अनुसरण करने में निश्चय दिखाया। 18 साल की उम्र में जलाराम बापा ने फतेहपूर के संत श्री भोजलराम को अपना गुरू स्वीकार किया। गुरू ने गुरूमाला और श्री राम नाम का मंत्र लेकर उन्हें सेवा कार्य में आगे बढ़ने के लिये कहा, तब जलाराम बापा ने ‘सदाव्रत’ नाम की भोजनशाला बनायी जहॉं 24 घंटे साधु-सन्त तथा जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया जाता था। इस जगह से कोई भी बिना भोजन किये नही जा पाता था। वे और वीरबाई मॉं दिन-रात मेहनत करते थे।
 बीस वर्ष के होते तक सरलता व भगवतप्रेम की ख्याति चारों तरफ फैल गयी। लोगों ने तरह-तरह से उनके धीरज या धैर्य, प्रेम प्रभु के प्रति अनन्य भक्ति की परीक्षा ली। जिन पर वे खरे उतरे। इससे लोगों के मन में संत जलाराम बापा के प्रति अगाध सम्मान उत्पन्न हो गया। उनके जीवन में उनके आशीर्वाद से कई चमत्कार लोगों ने देखें। जिनमे से प्रमुख बच्चों की बीमारी ठीक होना व निर्धन का सक्षमता प्राप्त कर लोगों की सेवा करना देखा गया। हिन्दु-मुसलमान सभी बापा से भोजन व आशीर्वाद पाते। एक बार तीन अरबी जवान वीरपुर में बापा के अनुरोध पर भोजन किये, भोजन के बाद जवानों को शर्मींदगी लगी, क्योंकि उन्होंने अपने बैग में मरे हुए पक्षी रखे थे। बापा के कहने पर जब उन्होंने बैग खोला, तो वे पक्षी फड़फड़ाकर उड़ गये, इतना ही नही बापा ने उन्हें आशीर्वाद देकर उनकी मनोकामना पूरी की। सेवा कार्यो के बारे में बापा कहते कि यह प्रभु की इच्छा है। यह प्रभु का कार्य है। प्रभु ने मुझे यह कार्य सौंपा है इसीलिये प्रभु देखते हैं कि हर व्यवस्था ठीक से हो सन्‌ 1934 में भयंकर अकाल के समय वीरबाई मॉं एवं बापा ने 24 घंटे लोगों को खिला-पिलाकर लोगों की सेवा की। सन्‌ 1935 में माँ ने एवं सन्‌ 1937 में बापा ने प्रार्थना करते हुए अपने नश्वर शरीर को त्याग दिया।
  आज भी जलाराम बापा की श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करने पर लोगों की समस्त इच्छायें पूर्ण हो जाती है। उनके अनुभव ‘पर्चा’ नाम से जलाराम ज्योति नाम की पत्रिका में छापी जाती है। श्रद्धालुजन गुरूवार को उपवास कर अथवा अन्नदान कर बापा को पूजते हैं।

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आज का राशिफल शुक्रवार 20 नवंबर

Date : 20-Nov-2020

मेष : व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे। महिला अधिकारी से सहयोग मिल सकता है। आपसी संबंध मधुर होंगे।

वृषभ : स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। धार्मिक प्रवृत्तिमें वृद्धि होगी। सामाजिक कायोर्ं में रुचि लेंगे। यात्रा देशाटन की स्थिति बन रही है, लेकिन सचेत रहें

मिथुन : उच्च अधिकारी या घर के मुखिया से तनाव मिल सकता है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। जीवनसाथी का सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा।

कर्क : संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। धार्मिक यात्रा या सांस्कृतिक उत्सव में हिस्सेदारी रहेगी, लेकिन सतर्कता बरतने की जरूरत है।

सिंह : चल या अचल संपत्ति में वृद्धि होगी। व्यावसायिक योजना फलीभूत होगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। शासन सत्ता का सहयोग रहेगा। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी।

कन्या : किया गया पुरुषार्थ सार्थक होगा। धन, यश, कीर्ति में वृद्धि होगी। शासन सत्ता का सहयोग रहेगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आर्थिक मामलों में प्रगति होगी।

तुला : जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। चल या अचल संपत्ति में वृद्धि होगी। वाहन चलाते समय सावधानी रखें। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। आपसी संबंध मधुर बनेंगे।

वृश्चिक : क्रोध पर नियंत्रण रखें। निमार्ण कार्य की दिशा में सफलता मिलेगी। व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होगा। आर्थिकपक्ष मजबूत होगा। सामाजिक कार्यों में रुचि लेंगे।

धनु : यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद होगी, लेकिन सचेत रहें। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। किसी कार्य के संपन्न होने से आपके प्रभाव तथा वर्चस्व में वृद्धि होगी।

मकर : महिला अधिकारी से सहयोग मिल सकता है। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र मे आशातीत सफलता मिलेगी। मधुर संबंध बनेंगे।

कुंभ : पारिवारिक और सामाजिक दायित्व की पूर्ति होगी। रिश्तों में मधुरता आएगी। शासन सत्ता से सहयोग मिलेगा, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है।

मीन : अधीनस्थ कर्मचारी, पड़ोसी आदि के कारण तनाव मिल सकता है। व्यावसायिक मामलों में जोखिम न उठाएं। क्रोध में आकर कोई निर्णय लेने से बचने की जरूरत है।

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 20-Nov-2020

हिन्दू पंचांग 
दिनांक 20 नवम्बर 2020
दिन - शुक्रवार
विक्रम संवत - 2077
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - हेमंत
मास - कार्तिक
पक्ष - शुक्ल
तिथि - षष्ठी रात्रि 09:29 तक तत्पश्चात सप्तमी
नक्षत्र - उत्तराषाढा सुबह 09:23 तक तत्पश्चात श्रवण
योग - गण्ड सुबह 08:03 तक तत्पश्चात वृद्धि
राहुकाल - सुबह 11:01 से दोपहर 12:24 तक
सूर्योदय - 06:53
सूर्यास्त - 17:54
दिशाशूल - पश्चिम दिशा में
 

व्रत पर्व विवरण -
विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

धन-सम्पत्ति के लिए क्या करें 
घर के अंदर, लक्ष्मी जी बैठी हों ऐसा फोटो रखना चाहिए और दुकान के अंदर, लक्ष्मी जी खड़ी हों ऐसा फोटो रखना चाहिए।
ईशान कोण में तुलसी का पौधा लगाने से तथा पूजा के स्थान पर गंगाजल रखने से घर में लक्ष्मी की वृद्धि होती है।
 नौकरी-धंधे के लिए जाते हों और सफलता नहीं मिल पाती हो तो इक्कीस बार 'श्रीमद् भगवद् गीता' का अंतिम श्लोक बोलकर फिर घर से निकलें तो सफलता मिलेगी। श्लोकः
 यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम।।
पीपल के पेड़ में शनिवार और मंगलवार को दूध, पानी और गुड़ मिलाकर चढ़ायें और प्रार्थना करें कि 'भगवान! आपने गीता में कहा है 'वृक्षों मे पीपल मैं हूँ।' तो हमने आपके चरणों में अर्घ्य अर्पण किया है, इसे स्वीकार करें और मेरी नौकरी धंधे की जो समस्या है वह दूर हो जाय।'
 श्रीहरि.... श्रीहरि... श्रीहरि – ऐसा थोड़ी देर जप करें। तीन बार जपने से एक मंत्र हुआ। उत्तराभिमुख होकर इस मंत्र की 1-2 माला शांतिपूर्वक करें और चलते-फिरते भी इसका जप करें तो विशेष लाभ होगा और रोजी रोटी के साथ ही शांति, भक्ति और आनंद भी बढ़ेगा। बस, अपने-आप समस्या हल हो जायेगी।
 लक्ष्मी चाहने वाला मनुष्य भोजन और दूध को बिना ढके न रखे।

वास्तु शास्त्र 
 ऐसी चीजें न रखें पर्स में
देखने में आता है कि कुछ लोग पर्स में बहुत सी ऐसी चीजें रख लेते हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं होता और लंबे समय तक पर्स में रखे रहने से उनमें नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए जो भी कागजात या अन्य कोई चीज जो गैरजरूरी हो, उसे तुरंत अपने पर्स से निकाल दें।
 पर्स में कभी भी कोई अश्लील चित्र या अन्य अश्लील सामग्री भी नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से पर्स की बरकत खत्म हो जाती है और जीवन में नकारात्मकता बढ़ने लगती है।

हृष्ट - पुष्ट शरीर 
 जौ को पानी में भिगोकर, कूट के, छिलकारहित कर उसे दूध में खीर की भांति पकाकर सेवन करने से शरीर हृष्ट-पुष्ट और मोटापा कम होता है l

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आज का राशिफल गुरुवार 19 नवंबर

Date : 19-Nov-2020

मेष : गुरु और शनि की युति उच्च अधिकारी से सहयोग दिलाती है। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। आर्थिक मामलों में प्रगति होगी।

वृषभ : सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होगा। जीवनसाथी का सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा।

मिथुन : सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। जीविका के क्षेत्र में प्रगतिहोगी। शासन सत्ता का सहयोग रहेगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिलेगी।

कर्क : धन, यश, कीर्ति में वृद्धि होगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। किसी कार्य के संपन्न होने से आपके प्रभाव तथा वर्चस्व में वृद्धि होगी।

सिंह : राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति होगी। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। धन, यश, कीर्ति में वृद्धि होगी। रिश्तों में मधुरता आएगी। जीवनसाथी का सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा।

कन्या : पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। किया गया पुरुषार्थ सार्थक होगा। धन, सम्मान, यश, कीर्ति में वृद्धि होगी। रचनात्मक कार्यों में प्रगति होगी। मधुर संबंध बनेंगे।

तुला : आर्थिक पक्ष मजबूत होगा, लेकिन कुछ पारिवारिक समस्या रहेगी। रचनात्मक कार्य में प्रगति होगी। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

वृश्चिक : जीविका के क्षेत्र में आशातीत सफलता मिलेगी। ससुराल पक्ष से तनाव मिलेगा। बुद्धि कौशल से किया गया कार्य संपन्न होगा। रचनात्मक कार्यों में प्रगति होगी।

धनु : रिश्तों में मधुरता आएगी। पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। आर्थिक पक्ष मजबूतहोगा। गृह उपयोगी वस्तुओं में भी वृद्धि होगी। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

मकर : शासन सत्ता से सहयोग मिल सकता है। क्रोध पर नियंत्रण रखें। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे।

कुंभ : सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। उच्च अधिकारी या पिता का सहयोग मिलेगा। राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति होगी। सामाजिक कायोर्ं में रुचि लेंगे। मधुर संबंध बनेंगे।

मीन : उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। किसी कार्य के संपन्न होने से आपके प्रभाव में वृद्धि होगी। रिश्तों में मधुरता आएगी। गृह उपयोगी वस्तुओं में भी वृद्धि होगी।

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