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आज का राशिफल 22 सितंबर मंगलवार

Date : 22-Sep-2020

मेष : राहु का परिवर्तन आर्थिक रूप से आपके लिए अच्छा होगा। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। यश, कीर्ति में वृद्धि होगी। संतान के संबंध में सुखद समाचार मिलेगा।
वृषभ : आपकी राशि पर कुछ महीने के लिए आज से प्रारंभ हो रहे हैं राहू। अज्ञात भय रहेगा। नए अनुबंध की दिशा में सफलता मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलेगी।
मिथुन : आपकी राशि से बारहवें होंगे राहु जिस कारण से झगड़ा, विवाद की स्थिति में समझौता करना ही हितकर होगा। पारिवारिक सहयोग मिलेगा, लेकिन धैर्य से काम लें।
कर्क : राहु का परिवर्तन आर्थिक दृष्टि से उत्‍तम होगा। नया अनुबंध प्राप्त होगा। शिक्षा के क्षेत्र में केतु सफलता देगा। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे।
सिंह : पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। राहु राजनैतिक महात्वाकांक्षा की पूर्ति कराएगा। राजनेता या उच्च अधिकारी का सहयोग मिलेगा। यश, कीर्ति में वृद्धि होगी।
कन्या : आपके भाग्य भाव में राहु आ रहा है। अगले कुछ महीनों में आर्थिक और प्रतिष्ठा की दृष्टि से उत्‍तम परिणाम देगा। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिलेगी।
तुला :राहु का अष्टम आना लंबी यात्राएं देगा, लेकिन यात्रा के दौरान सतर्क रहना होगा। परिश्रम अधिक करना पड़ेगा, लेकिन केतु आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा।
वृश्चिक : आपकी राशि पर केतु का प्रवेश एक महीने के लिए हो गया है। महात्वाकाक्षाएं बढेंगी। महिला अधिकारी का सहयोग मिलेगा। आर्थिक सफलता मिलेगी।
धनु : स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। केतु बारहवें और राहु छठे होगा। राजनैतिक महात्वाकांक्षा की पूर्ति होगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी।
मकर : जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। राहु पांचवें होगा। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। व्यावसायिक सफलता मिलेगी। पारिवारिक स्तर पर निरंतर सहयोग मिलेगा।
कुंभ : राहु केतु का परिवर्तन आपके लिए उत्‍तम होगा। राजनैतिक प्रभाव बढ़ेगा। व्यावसायिक प्रतिष्‍ठा बढेगी। धन, सम्मान में वृद्धि होगी। मित्रों से सहयोग मिलेगा।
मीन : आपकी राशि से तीसरे राहु होगा। किया गया पुरुषार्थ सार्थक होगा, लेकिन किसी रिश्तेदार या अधीनस्थ कर्मचारी से समय-समय पर कष्ट मिलता रहेगा।

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 22-Sep-2020

हिन्दू पंचांग 
दिनांक 22 सितम्बर 2020
दिन - मंगलवार
विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - शरद
मास - अधिक अश्विन
पक्ष - शुक्ल
तिथि - षष्ठी रात्रि 09:30 तक तत्पश्चात सप्तमी
नक्षत्र - अनुराधा रात्रि 07:19 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा
योग - प्रीति 23 सितम्बर रात्रि 01:57 तक तत्पश्चात आयुष्मान्
राहुकाल - शाम 03:33 शाम 05:04 तक
सूर्योदय - 06:28
सूर्यास्त - 18:33
दिशाशूल - उत्तर दिशा में
व्रत पर्व विवरण -
विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

अनिद्रा से छुटकारा 
१० मिनट विधिवत शवासन करने से या जीभ के अग्रभाग को दाँतो से थोडा दबाकर १० मिनट तक ज्ञान मुद्रा लगा के बैठने से शारीरिक – मानसिक तनाव व अनिद्रा आदि की बीमारी दूर होती है |

तुलसी को क्या न करें 
 कोई तुलसी को लाल चुनरी उड़ा देते है | वो शास्त्र ना कहते है | तुलसी पर लाल कपड़ा कभी नहीं पहनना चाहिये | सूर्य उदय के पहले और सूर्यास्त के बाद तुलसी को छूना नहीं चाहिये |

इनका रखें ध्यान
 दोनों हाथो से सिर नहीं खुजलाना चाहिए | जूठे हाथों से सिर को स्पर्श नहीं करना चाहिए | नहीं तो बुद्धि मंद होती है |
 ए जो गलती छुपाता है उसका गिरना चालू रहता है और जो गिरने की बात को भगवान के आगे, गुरु के आगे, अपने नजदीकी सत्संगी, विश्वासपात्र मित्र के आगे बोल के, रोकर पश्चाताप करके रास्ता खोजता है उसको भगवान बचा भी लेते हैं |

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आज का राशिफल सोमवार 21 सितंबर

Date : 21-Sep-2020

मेष : क्रोध पर नियंत्रण रखें। नया पद या नया अनुबंध प्राप्त हो सकता है। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। पारिवारिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। रिश्तों में मधुरता आएगी
वृषभ : आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। शासन सत्‍ता से सहयोग लेने में सफल होंगे। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में प्रगति होगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे
मिथुन : व्यावसायिक मामलों में सफलता मिलेगी। दांपत्य जीवन सुखमय होगा। पारिवारिक प्रतिष्‍ठा बढ़ेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। यश, कीर्ति में वृद्धि होगी
कर्क : उच्च अधिकारी या घर के मुखिया का सहयोग मिलेगा। किया गया पुरुषार्थ सार्थक होगा। दांपत्य जीवन सुखमय होगा। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी
सिंह : जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति होगी। किसी कार्य के संपन्न होने से आत्मविश्‍वास में वृद्धि होगी। पारिवारिक सहयोग मिलेगा
कन्या : पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। दूसरे से सहयोग लेने में सफल होंगे। चल या अचल संपत्ति के मामले में लाभ मिलेगा
तुला : व्यावसायिक मामलों में सफलता मिलेगी। पारिवारिक जीवन सुखमय होगा, लेकिन नेत्र या उदर विकार के प्रति सचेत रहें। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा
वृश्चिक : किसी रिश्तेदार के कारण तनाव मिल सकता है। व्यावसायिक योजना फलीभूत होगी। शासन सत्‍ता से सहयोग लेने में सफल होंगे। वाणी पर संयम रखें
धनु : यात्रा या देशाटन की स्थिति सुखद होगी, लेकिन सचेत होकर यात्रा करें। व्यावसायिक स्थिति में सुधार होगा। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी
मकर : शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद होगी, लेकिन सतर्क होकर यात्रा करें। जीवनसाथी का सहयोग रहेगा
कुंभ : आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे
मीन : पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। रचनात्मक कार्य में सफलता मिलेगी। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। आर्थिक और व्यावसायिक पक्ष मजबूत होगा

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 21-Sep-2020

हिन्दू पंचांग 
दिनांक 21 सितम्बर 2020
दिन - सोमवार
विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - शरद
मास - अधिक अश्विन
पक्ष - शुक्ल
तिथि - पंचमी रात्रि 11:42 तक तत्पश्चात षष्ठी
नक्षत्र - विशाखा - रात्रि 08:49 तक तत्पश्चात अनुराधा
योग - वैधृति सुबह 07:59 तक तत्पश्चात विष्कम्भ
राहुकाल - सुबह 07:58 से सुबह 09:29 तक
सूर्योदय - 06:28
सूर्यास्त - 18:34
दिशाशूल - पूर्व दिशा में
व्रत पर्व विवरण -
विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

श्रीमद्भागवत पुराण
श्रीमद्भागवत पुराण हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है। इस ग्रंथ की रचना आज से लगभग 5000 साल पहले कर दी गई थी। आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि कलयुग में क्या-क्या घटित होगा इसकी भविष्यवाणी भागवत पुराण में पहले ही दे दी गई थी। जानिए श्रीमद्भागवत पुराण में की गई कलियुग से जुड़ी 10 भविष्यवाणियां..
ततश्चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया ।
कालेन बलिना राजन् नङ्‌क्ष्यत्यायुर्बलं स्मृतिः ॥
अर्थ - कलयुग में धर्म, स्वच्छता, सत्यवादिता, स्मृति, शारीरक शक्ति, दया भाव और जीवन की अवधि दिन-दिन घटती जाएगी.
वित्तमेव कलौ नॄणां जन्माचारगुणोदयः ।
धर्मन्याय व्यवस्थायां कारणं बलमेव हि ॥
अर्थ - कलयुग में वही व्यक्ति गुणी माना जायेगा जिसके पास ज्यादा धन है. न्याय और कानून सिर्फ एक शक्ति के आधार पे होगा !
दाम्पत्येऽभिरुचि र्हेतुः मायैव व्यावहारिके ।
स्त्रीत्वे पुंस्त्वे च हि रतिः विप्रत्वे सूत्रमेव हि ॥
अर्थ - कलयुग में स्त्री-पुरुष बिना विवाह के केवल रूचि के अनुसार ही रहेंगे.
व्यापार की सफलता के लिए मनुष्य छल करेगा और ब्राह्मण सिर्फ नाम के होंगे.
लिङ्‌गं एवाश्रमख्यातौ अन्योन्यापत्ति कारणम् ।
अवृत्त्या न्यायदौर्बल्यं पाण्डित्ये चापलं वचः ॥
 अर्थ - घूस देने वाले व्यक्ति ही न्याय पा सकेंगे और जो धन नहीं खर्च करेगा उसे न्याय के लिए दर-दर की ठोकरे खानी होंगी. स्वार्थी और चालाक लोगों को कलयुग में विद्वान माना जायेगा.
 क्षुत्तृड्भ्यां व्याधिभिश्चैव संतप्स्यन्ते च चिन्तया ।
त्रिंशद्विंशति वर्षाणि परमायुः कलौ नृणाम.।।
 अर्थ - कलयुग में लोग कई तरह की चिंताओं में घिरे रहेंगे. लोगों को कई तरह की चिंताए सताएंगी और बाद में मनुष्य की उम्र घटकर सिर्फ 20-30 साल की रह जाएगी.
दूरे वार्ययनं तीर्थं लावण्यं केशधारणम् ।
उदरंभरता स्वार्थः सत्यत्वे धार्ष्ट्यमेव हि॥ 

अर्थ - लोग दूर के नदी-तालाबों और पहाड़ों को तीर्थ स्थान की तरह जायेंगे लेकिन अपनी ही माता पिता का अनादर करेंगे. सर पे बड़े बाल रखना खूबसूरती मानी जाएगी और लोग पेट भरने के लिए हर तरह के बुरे काम करेंगे.
अनावृष्ट्या विनङ्‌क्ष्यन्ति दुर्भिक्षकरपीडिताः । शीतवातातपप्रावृड् हिमैरन्योन्यतः प्रजाः ॥
अर्थ - कलयुग में बारिश नहीं पड़ेगी और हर जगह सूखा होगा.मौसम बहुत विचित्र अंदाज़ ले लेगा. कभी तो भीषण सर्दी होगी तो कभी असहनीय गर्मी. कभी आंधी तो कभी बाढ़ आएगी और इन्ही परिस्तिथियों से लोग परेशान रहेंगे.
 अनाढ्यतैव असाधुत्वे साधुत्वे दंभ एव तु ।
स्वीकार एव चोद्वाहे स्नानमेव प्रसाधनम् ॥
 अर्थ - कलयुग में जिस व्यक्ति के पास धन नहीं होगा उसे लोग अपवित्र, बेकार और अधर्मी मानेंगे. विवाह के नाम पे सिर्फ समझौता होगा और लोग स्नान को ही शरीर का शुद्धिकरण समझेंगे.
 दाक्ष्यं कुटुंबभरणं यशोऽर्थे धर्मसेवनम् ।
एवं प्रजाभिर्दुष्टाभिः आकीर्णे क्षितिमण्डले ॥
 अर्थ - लोग सिर्फ दूसरो के सामने अच्छा दिखने के लिए धर्म-कर्म के काम करेंगे. कलयुग में दिखावा बहुत होगा और पृथ्वी पे भृष्ट लोग भारी मात्रा में होंगे. लोग सत्ता या शक्ति हासिल करने के लिए किसी को मारने से भी पीछे नहीं हटेंगे.
 आच्छिन्नदारद्रविणा यास्यन्ति गिरिकाननम् ।
शाकमूलामिषक्षौद्र फलपुष्पाष्टिभोजनाः ॥
 अर्थ - पृथ्वी के लोग अत्यधिक कर और सूखे के वजह से घर छोड़ पहाड़ों पे रहने के लिए मजबूर हो जायेंगे. कलयुग में ऐसा वक़्त आएगा जब लोग पत्ते, मांस, फूल और जंगली शहद जैसी चीज़ें खाने को मजबूर होंगे.

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आज का राशिफल रविवार 20 सितंबर

Date : 20-Sep-2020

मेष : पारिवारिक समस्या को मिलबैठकर निपटाएं। संतान का व्यवहार या आपका क्रोध दोनों परिवार के लिए नुकसानदेह साबित होंगे।
वृषभ : बुद्धि कौशल से किया गया कार्य संपन्न होगा। पारिवारिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद होगी।
मिथुन : संपत्ति में वृद्धि होगी। शासन सत्‍ता का सहयोग रहेगा। पारिवारिक प्रतिष्ठा बढेगी। प्रयास फलीभूत होंगे।
कर्क : भावुकता में नियंत्रण रखें। मानसिक क्लेश मिल सकता है। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी।
सिंह : सामाजिक कार्यों में रुचि लेंगे। उच्च अधिकारी का सहयोग मिलेगा। किसी कार्य के संपन्न् होने से आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।
कन्या : रचनात्मक प्रयास सार्थक होंगे। जीवनसाथी का सहयोग रहेगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
तुला : समस्या का समाधान होगा। माता या महिला अधिकारी के कारण तनाव मिल सकता है, लेकिन जीवनसाथी का सहयोग एवं प्रोत्साहन मिलेगा।
वृश्चिक : आर्थिक मामलों में सुधार होगा। शासन सत्ता का सहयोग रहेगा। सम्मान में वृद्धि होगी। पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे।
धनु : यात्रा के दौरान सतर्क रहें। रिश्तों में मधुरता आएगी। व्यावसायिक मामलों में प्रगति होगी। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।
मकर : स्वास्थ्य में सुधार होगा। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। सामाजिक कार्य में रुचि लेंगे। जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी।
कुंभ : पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। व्यावसायिक और आर्थिक योजना फलीभूत होगी।
मीन : आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद होगी, लेकिन सतर्कता से यात्रा करें।

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 20-Sep-2020

हिन्दू पंचांग
दिनांक 20 सितम्बर 2020
दिन - रविवार
विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - शरद
मास - अधिक अश्विन
पक्ष - शुक्ल
तिथि - चतुर्थी 21 सितम्बर रात्रि 02:26 तक तत्पश्चात पंचमी
नक्षत्र - स्वाती - रात्रि 10:52 तक तत्पश्चात विशाखा
योग - इन्द्र सुबह 11:39 तक तत्पश्चात वैधृति
राहुकाल - शाम 05:05 से शाम 06:37 तक
सूर्योदय - 06:28
सूर्यास्त - 18:35
दिशाशूल - पश्चिम दिशा में
व्रत पर्व विवरण - विनायक चतुर्थी
विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)
रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)
स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।

बाल काले व मजबूत बनाने के लिए
नींबू रस और आँवला रस मिलाकर सिर पर लगा दो अथवा तो केवल आँवले का रस लगा दो। 15 - 20 मिनट बाद नहाओ तो आँवले का रस सिर की गर्मी खींच लेगा। बाल जल्दी सफेद नहीं होंगे और बालों की जड़ें कमजोर नहीं होंगी, बाल बने रहेंगे। यदि आँवले का रस नहीं मिले तो आँवले के चूर्ण को रात को पानी में भिगो दो और सुबह उसी का उपयोग कर लो।

 वास्तु शास्त्र 
बिना स्नान किये किचन में प्रवेश करने से किचन में नेगेटिव एनर्जी आती है और घर के सदस्यों में चिड़चिड़ापन और आलस्य बढ़ता हैं।

धन, आरोग्य एवं शांति की प्राप्ति के लिए
जो व्यक्ति चतुर्मास में अथवा अधिक (पुरुषोत्तम) मास में भगवान् विष्णु पर कनेर के पुष्प अर्पित करता है, उस पर लक्ष्मीजी की सदैव कृपा बनी रहती है | उसे आरोग्य एवं शांति की प्राप्ति होती है तथा उसके संकट दूर होते है |

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आज का राश्फिल शनिवार 19 सितंबर

Date : 19-Sep-2020

मेष : स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। संतान के व्यवहार से चिंतित हो सकते हैं। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में अधिक परिश्रम करना होगा।
वृषभ : किसी कार्य के संपन्न होने से आत्मविश्‍वास में वृद्धि होगी। पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। यात्रा की स्थिति आ सकती है, लेकिन सचेत रहकर ही यात्रा करें।
मिथुन : धार्मिक प्रवृत्ति में वृद्धि होगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे। दूसरे से सहयोग लेने में सफलता मिलेगी, लेकिन मन अज्ञात भय से ग्रसित रहेगा।
कर्क : ग्रह योग आर्थिक रूप से मजबूत करेगा। किया गया पुरुषार्थ सार्थक होगा। शासन सत्‍ता का सहयोग मिलेगा। रचनात्मक कार्यों में मन लगाएं, सफलता मिलेगी।
सिंह : उच्च अधिकारी से सहयोग लेने में सफल होंगे। पिता या धर्म गुरु का सहयोग मिलेगा। दांपत्य जीवन में कुछ तनाव आ सकता है। वाणी पर संयम रखें।
कन्या : पारिवारिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। चल या अचल संपत्ति में वृद्धि होगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होगा। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक सहयोग मिलेगा।
तुला : स्वास्थ्य में सुधार होगा। पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। संतान के संबंध में सुखद समाचार मिलेगा। संबंध मधुर बनेंगे।
वृश्चिक : आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। दूसरे से सहयोग लेने में सफलता मिलेगी। व्यावसायिक कार्य मे व्यस्त होंगे। शिक्षा के क्षेत्र में किया गया प्रयास सार्थक होगा।
धनु : पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। रिश्तों में मधुरता आएगी, लेकिन अज्ञात भय से ग्रसित रहेंगे। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे।
मकर : किसी कार्य के संपन्न होने से आत्मविश्‍वास में वृद्धि होगी। पारिवारिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। व्यावसायिक मामलों में सफलता मिलेगी।
कुंभ : आप पर ग्रहों की युति स्वास्थ्य को प्रभावित् कर रही है। छाया दान करें। स्वास्थ्य के प्रति उदासीन न रहें। ईश्वर की आराधना करें, तो शांति मिलेगी।
मीन : दांपत्य जीवन में सुधार होगा। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। राजनैतिक महत्वकांक्षा की पूर्ति होगी। संबंधों में मधुरता आएगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 19-Sep-2020

हिन्दू पंचांग 
दिनांक 19 सितम्बर 2020
दिन - शनिवार
विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - शरद
मास - अधिक अश्विन
पक्ष - शुक्ल
तिथि - द्वितीया सुबह 09:10 तक तत्पश्चात तृतीया
नक्षत्र - चित्रा - 20 सितम्बर रात्रि 01:21 तक तत्पश्चात स्वाती
योग - ब्रह्म दोपहर 03:36 तक तत्पश्चात इन्द्र
राहुकाल - सुबह 09:29 से सुबह 11:01 तक
सूर्योदय - 06:27
सूर्यास्त - 18:36
दिशाशूल - पूर्व दिशा में
व्रत पर्व विवरण
- तृतीया क्षय तिथि
विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

पुरुषोत्तम मास
 18 सितम्बर से 16 अक्टूबर तक अधिक - पुरुषोत्तम मास
पुरुषोत्तम मास में रोज़ एक बार एक श्लोक बोल सकें तो बहुत अच्छा है
गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोपरुपिणम |
गोकुलोत्सवमीशानं गोविन्दं गोपिका प्रियं | |
हे भगवान ! हे गिरिराज धर ! गोवर्धन को अपने हाथ में धारण करने वाले हे हरि ! हमारे विश्वास और भक्ति को भी तू ही धारण करना | प्रभु आपकी कृपा से ही मेरे जीवन में भक्ति बनी रहेगी, आपकी कृपा से ही मेरे जीवन में भी विश्वास रूपी गोवर्धन मेरी रक्षा करता रहेगा | हे गोवर्धनधारी आपको मेरा प्रणाम है आप समर्थ होते हुए भी साधारण बालक की तरह लीला करते थे | गोकुल में आपके कारण सदैव उत्सव छाया रहता था मेरे ह्रदय में भी हमेशा उत्सव छाया रहे साधना में, सेवा-सुमिरन में मेरा उत्साह कभी कम न हो |
मै जप, साधना सेवा,करते हुए कभी थकूँ नहीं | मेरी इन्द्रियों में संसार का आकर्षण न हो, मैं आँख से तुझे ही देखने कि इच्छा रखूं, कानों से तेरी वाणी सुनने की इच्छा रखूं, जीभ के द्वारा दिया हुआ नाम जपने की इच्छा रखूं ! हे गोविन्द ! आप गोपियों के प्यारे हो ! ऐसी कृपा करो, ऐसी सदबुद्धि दो कि मेरी इन्द्रियां आपको ही चाहे ! मेरी इन्द्रियरूपी गोपीयों में संसार की चाह न हो, आपकी ही चाह हो !

अधिक मास का माहात्म्य 
 अधिक मास में सूर्य की संक्रान्ति (सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश) न होने के कारण इसे "मलमास (मलिन मास)" कहा गया। स्वामीरहित होन से यह मास देव-पितर आदि की पूजा तथा मंगल कर्मों के लिए त्याज्य माना गया। इससे लोग इसकी घोर निंदा करने लगे।
 तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहाः “मैं इसे सर्वोपरि – अपने तुल्य करता हूँ। सदगुण, कीर्ति, प्रभाव, षडैश्वर्य, पराक्रम, भक्तों को वरदान देने का सामर्थ्य आदि जितने गुण मुझमें हैं, उन सबको मैंने इस मास को सौंप दिया।
 अहमेते यथा लोके प्रथितः पुरुषोत्तमः।
तथायमपि लोकेषु प्रथितः पुरुषोत्तमः।।
 उन गुणों के कारण जिस प्रकार मैं वेदों, लोकें और शास्त्रों में ‘पुरुषोत्तम’ नाम से विख्यात हूँ, उसी प्रकार यह मलमास भी भूतल पर ‘पुरुषोत्तम’ नाम से प्रसिद्ध होगा और मैं स्वयं इसका स्वामी हो गया हूँ।”
 इस प्रकार अधिक मास, मलमास, ‘पुरुषोत्तम मास’ के नाम से विख्यात हुआ।
 भगवान कहते हैं- ‘इस मास में मेरे उद्देश्य से जो स्नान (ब्राह्ममुहूर्त में उठकर भगवत्स्मरण करते हुए किया गया स्नान), दान, जप, होम, स्वाध्याय, पितृतर्पण तथा देवार्चन किया जाता है, वह सब अक्षय हो जाता है। जो प्रमाद से इस बात को खाली बिता देते हैं, उनका जीवन मनुष्यलोक में दारिद्रय, पुत्रशोक तथा पाप के कीचड़ से निंदित हो जाता है इसमें संदेह नहीं है।
 सुगंधित चंदन, अनेक प्रकार के फूल, मिष्टान्न, नैवेद्य, धूप, दीप आदि से लक्ष्मी सहित सनातन भगवान तथा पितामह भीष्म का पूजन करें। घंटा, मृदंग और शंख की ध्वनि के साथ कपूर और चंदन से आरती करें। ये न हों तो रूई की बत्ती से ही आरती कर लें। इससे अनंत फल की प्राप्ति होती है। चंदन, अक्षत और पुष्पों के साथ ताँबे के पात्र में पानी रखकर भक्ति से प्रातःपूजन के पहले या बाद में अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय भगवान ब्रह्माजी के साथ मेरा स्मरण करके इस मंत्र को बोलें
देवदेव महादेव प्रलयोत्पत्तिकारक।
गृहाणार्घ्यमिमं देव कृपां कृत्वा ममोपरि।।
स्वयम्भुवे नमस्तुभ्यं ब्रह्मणेऽमिततेजसे।
नमोऽस्तुते श्रियानन्त दयां कुरु ममोपरि।।
 ‘हे देवदेव ! हे महादेव ! हे प्रलय और उत्पत्ति करने वाले ! हे देव ! मुझ पर कृपा करके इस अर्घ्य को ग्रहण कीजिए। तुझ स्वयंभू के लिए नमस्कार तथा तुझ अमिततेज ब्रह्मा के लिए नमस्कार। हे अनंत ! लक्ष्मी जी के साथ आप मुझ पर कृपा करें।’
 पुरुषोत्तम मास का व्रत दारिद्रय, पुत्रशोक और वैधव्य का नाशक है। इसके व्रत से ब्रह्महत्या आदि सब पाप नष्ट हो जाते हैं।
 विधिवत् सेवते यस्तु पुरुषोत्तममादरात्।
फुलं स्वकीयमुदधृत्य मामेवैष्यत्यसंशयम्।।
 प्रति तीसरे वर्ष में पुरुषोत्तम मास के आगमन पर जो व्यक्ति श्रद्धा-भक्ति के साथ व्रत, उपवास, पूजा आदि शुभकर्म करता है, वह निःसन्देह अपने समस्त परिवार के साथ मेरे लोक में पहुँचकर मेरा सान्निध्य प्राप्त करता है।”
 इस महीने में केवल ईश्वर के उद्देश्य से जो जप, सत्संग व सत्कथा – श्रवण, हरिकीर्तन, व्रत, उपवास, स्नान, दान या पूजनादि किये जाते हैं, उनका अक्षय फल होता है और व्रती के सम्पूर्ण अनिष्ट हो जाते हैं। निष्काम भाव से किये जाने वाले अनुष्ठानों के लिए यह अत्यंत श्रेष्ठ समय है। ‘देवी भागवत’ के अनुसार यदि दान आदि का सामर्थ्य न हो तो संतों-महापुरुषों की सेवा सर्वोत्तम है, इससे तीर्थस्नानादि के समान फल प्राप्त होता है।
 इस मास में प्रातःस्नान, दान, तप नियम, धर्म, पुण्यकर्म, व्रत-उपासना तथा निःस्वार्थ नाम जप – गुरुमंत्र का जप अधिक महत्त्व है।
 इस महीने में दीपकों का दान करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। दुःख – शोकों का नाश होता है। वंशदीप बढ़ता है, ऊँचा सान्निध्य मिलता है, आयु बढ़ती है। इस मास में आँवले और तिल का उबटन शरीर पर मलकर स्नान करना और आँवले के वृक्ष के नीचे भोजन करना यह भगवान श्री पुरुषोत्तम को अतिशय प्रिय है, साथ ही स्वास्थ्यप्रद और प्रसन्नताप्रद भी है। यह व्रत करने वाले लोग बहुत पुण्यवान हो जाते है।
 अधिक मास में वर्जित
इस मास में सभी सकाम कर्म एवं व्रत वर्जित हैं। जैसे – कुएँ, बावली, तालाब और बाग आदि का आरम्भ तथा प्रतिष्ठा, नवविवाहिता वधू का प्रवेश, देवताओं का स्थापन (देवप्रतिष्ठा), यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, नामकर्म, मकान बनाना, नये वस्त्र एवं अलंकार पहनना आदि।
अधिक मास में करने योग्य
प्राणघातक रोग आदि की निवृत्ति के लिए रूद्रजप आदि अनुष्ठान, दान व जप-कीर्तन आदि, पुत्रजन्म के कृत्य, पितृमरण के श्राद्धादि तथा गर्भाधान, पुंसवन जैसे संस्कार किये जा सकते हैं।

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आज का राशिफल शुक्रवार 18 सितंबर

Date : 18-Sep-2020

मेष : महिला अधिकारी से सहयोग मिलेगा। यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद होगी। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी।
वृषभ : निजी संबंध प्रगाढ होंगे। धर्म गुरु या पिता का सहयोग मिलेगा। रुका हुआ कार्य संपन्न होगा।
मिथुन : शाही खर्च से नुकसान होगा। स्वास्थ्य को लेकर सचेत रहें। ग्रहों का योग होने के कारण खाने पीने में सावधानी रखें।
कर्क : व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। दांपत्य जीवन सुखमय होगा। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। किसी कार्य के संपन्न होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा।
सिंह : जीवनसाथी का सहयोग और सानिध्य मिलेगा। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
कन्या : यात्रा देशाटन की दिशा में सफलता मिलेगी। धार्मिक प्रवृत्ति में वृद्धि होगी। उपहार या सम्मान का सुख मिल सकता है।
तुला : गुरु अथवा पिता का सहयोग मिलेगा लेकिन ग्रह योग होने के कारण वाणी पर संयम रखें, खाने पीने में संयम रखें। कुछ ऐसा न करें जिससे आपकी प्रतिष्ठा धूमिल हो जाए।
वृश्चिक : प्रतिष्ठा बढ़ेगी। धन, यश, कीर्ति में वृद्धि होगी। शासन सत्ता से सहयोग मिलेगा। किया गया पुरुषार्थ फलीभूत होगा।
धनु : आर्थिक पक्ष मजबूत होगा लेकिन किसी रिश्‍तेदार या पारिवारिक सदस्य से वाद-विवाद की स्थिति आ सकती है, संयम बरतें।
मकर : आपकी राशि पर ग्रह योग है जिस कारण वाणी पर संयम रखना आवश्यक होगा। रिश्ते टूट और बिखर भी सकते हैं।
कुंभ : पारिवारिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। लेकिन खाने पीने में सचेत रहें। कहीं विष योग आपको कष्ट दे सकता है। चल या अचल संपत्ति के मामले में सफलता मिलेगी।
मीन : पारिवारिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद हो सकती है। धर्म गुरु का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 18-Sep-2020

हिन्दू पंचांग 
दिनांक 18 सितम्बर 2020
दिन - शुक्रवार
विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - शरद
मास - अधिक अश्विन
पक्ष - शुक्ल
तिथि - प्रतिपदा दोपहर 12:50 तक तत्पश्चात द्वितीया
नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी सुबह 07:00 तक तत्पश्चात हस्त
योग - शुक्ल शाम 07:43 तक तत्पश्चात ब्रह्म
राहुकाल - सुबह 11:01 से दोपहर 12:33 तक
सूर्योदय - 06:27
सूर्यास्त - 18:36
दिशाशूल - पश्चिम दिशा में
व्रत पर्व विवरण - अधिक-षुरूषोत्तम-मल मास प्रारंभ, चन्द्र-दर्शन
विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड(कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

अमिट पुण्य अर्जित करने का अवसर-पुरुषोत्तम मास 
18 सितम्बर से 16 अक्टूबर तकपुरुषोत्तम/अधिक मास
 अधिक मास में सूर्य की सक्रांति (सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश) न होने से इसे ‘मल मास’ (मलिन मास) कहा गया है। स्वामीरहित होने से यह मास देव-पितर आदि की पूजा तथा मंगल कर्मों के लिए त्याज्य माना गया। इससे लोग इसकी घोर निंदा करने लगे।
 मल मास ने भगवान को प्रार्थना की, भगवान बोले- “मल मास नहीं, अब से इसका नाम पुरुषोत्तम मास होगा। इस महीने जो जप, सत्संग, ध्यान, पुण्य आदि करेंगे, उन्हें विशेष फायदा होगा। अंतर्यामी आत्मा के लिए जो भी कर्म करेंगे, तेरे मास में वह विशेष फलदायी हो जायेगा। तब से मल मास का नाम पड़ गया ‘पुरुषोत्तम मास’।”
 विशेष लाभकारी
 अधिक मास में आँवला और तिल के उबटन से स्नान पुण्यदायी है और स्वास्थ्य प्रसन्नता में बढ़ोतरी करने वाला है अथवा तो आँवला, जौ तिल का मिश्रण बनाकर रखो और स्नान करते समय थोड़ा मिश्रण बाल्टी में डाल दिया। इससे भी स्वास्थ्य और प्रसन्नता पाने में मदद मिलती है। इस मास में आँवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करना अधिक प्रसन्नता और स्वास्थ्य देता है।
 आँवले व पीपल के पेड़ को स्पर्श करने से स्नान करने का पुण्य होता है, सात्त्विकता और प्रसन्नता की बढ़ोतरी होती है। इन्हें स्नान करने के बाद स्पर्श करने से दुगुना पुण्य होता है। पीपल और आँवला सात्विकता के धनी हैं।
 इस मास में धरती पर (बिस्तर बिछाकर) शयन व पलाश की पत्तल पर भोजन करे और ब्रह्मचर्य व्रत पाले तो पापनाशिनी ऊर्जा बढ़ती है और व्यक्तित्व में निखार आता है। इस पुरुषोत्तम मास को कई वरदान प्राप्त हैं और शुभ कर्म करने हेतु इसकी महिमा अपरम्पार है।

 अधिक मास में वर्जित 
 पुरुषोत्तम मास व चतुर्मास में नीच कर्मों का त्याग करना चाहिए। वैसे तो सदा के लिए करना चाहिए लेकिन आरम्भ वाला भक्त इन्हीं महीनों में त्याग करे तो उसका नीच कर्मों के त्याग का सामर्थ्य बढ़ जायेगा। इस मास में शादी-विवाह अथवा सकाम कर्म एवं सकाम व्रत वर्जित हैं। जैसे कुएँ, बावली, तालाब और बाग़ आदि का आरम्भ तथा प्रतिष्ठा, नवविवाहिता वधू का प्रवेश, देवताओं का स्थापन (देव-प्रतिष्ठा), यज्ञोपवीत संस्कार, नामकरण, मकान बनाना, नये वस्त्र एवं अलंकार पहनना आदि। इस मास में किये गये निष्काम कर्म कई गुना विशेष फल देते हैं।

 अधिक मास में करने योग्य 
 जप, कीर्तन, स्मरण, ध्यान, दान, स्नान आदि तथा पुत्रजन्म के कृत्य, पितृस्मरण के श्राद्ध आदि एवं गर्भाधान, पुंसवन जैसे संस्कार किये जा सकते हैं।
 देवी भागवत के अनुसार यदि आदि की सामर्थ्य न हो तो संतों-महापुरुषों की सेवा (उनके दैवी कार्य में सहभागी होना) सर्वोत्तम है। इससे तीर्थ, तप आदि के समान फल प्राप्त होता है। इस माह में दीपकों का दान करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। दुःख-शोकों का नाश होता है। वंशदीप बढ़ता है, ऊँचा सान्निध्य मिलता है, आयु बढ़ती है। इस मास में गीता के 15वें अध्याय का अर्थसहित प्रेमपूर्वक पाठ करना चाहिए। भक्तिपूर्वक सदगुरु से अध्यात्म विद्या का श्रवण करने से ब्रह्महत्याजनित पाप नष्ट हो जाते हैं तथा दिन प्रतिदिन अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। निष्काम भाव से यदि श्रवण किया जाय तो जीव मुक्त हो जाता है।

व्रत विधि
 भगवान श्रीकृष्ण इस मास की व्रत विधि एवं महिमा बताते हुए कहते हैं- “इस मास में मेरे उद्देश्य से जो स्नान (ब्राह्ममुहूर्त में उठकर भगवत्स्मरण करते हुए किया गया स्नान), दान, जप, होम, गुरु-पूजन, स्वाध्याय, पितृतर्पण, देवार्चन तथा और जो भी शुभ कर्म किये जाते हैं, वे सब अक्षय हो जाते हैं। जो प्रमाद से इस मास को खाली बिता देते हैं, उनका जीवन मनुष्यलोक में दारिद्र्य पुत्रशोक तथा पाप के कीचड़ से निंदित हो जाता है, इसमें संदेह नहीं।
 शंख की ध्वनि के साथ कपूर से आरती करें। ये न हों तो रूई की बाती से ही आरती कर लें। इससे अनंत फल की प्राप्ति होती है। चंदन, अक्षत और पुष्पों के साथ ताँबे के पात्र में पानी रखकर भक्ति से प्रातःपूजन के पहले या बाद में अर्घ्य दें।
 पुरुषोत्तम मास का व्रत दारिद्र्य, पुत्रशोक और वैधव्य का नाशक है। इसके व्रत से ब्रह्महत्या आदि सब पाप नष्ट हो जाते हैं।
 विधिवत सेवते यस्तु पुरुषोत्तममादरात्।
कुलं स्वकीयमुद्धृत्य मामेवैष्यत्यसंशयम्।।
 पुरुषोत्तम मास के आगमन पर जो व्यक्ति श्रद्धा-भक्ति के साथ व्रत, उपवास, पूजा आदि शुभ कर्म करता है, वह निःसंदेह अपने समस्त परिवार के साथ मेरे लोक में पहुँचकर मेरा सान्निध्य प्राप्त कर लेता है।

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