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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 07-Jul-2020

 दिनांक 07 जुलाई 2020
दिन - मंगलवार
विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - वर्षा
मास - श्रावण (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार आषाढ़)
पक्ष - कृष्ण 
तिथि - द्वितीया सुबह 09:02 तक तत्पश्चात तृतीया
नक्षत्र - श्रवण रात्रि 11:56 तक तत्पश्चात धनिष्ठा
योग - विष्कम्भ रात्रि 08:34 तक तत्पश्चात प्रीति
राहुकाल - शाम 03:52 से शाम 05:33 तक
सूर्योदय - 06:03
सूर्यास्त - 19:23 
दिशाशूल - उत्तर दिशा में
व्रत पर्व विवरण - जयापार्वती व्रत समाप्त-जागरण (गुजरात)
विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
हिन्दू पंचांग 

श्रावण में सूर्य पूजा 
06 जुलाई 2020 सोमवार से भगवान शिव का पवित्र श्रावण (सावन) मास शुरू हो चुका है, जो 03 अगस्त सोमवार तक रहेगा (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार अषाढ़ मास चल रहा है वहां 21 जुलाई मंगलवार से श्रावण (सावन) मास आरंभ होगा)
शिवपुराण के अनुसार श्रावण मास के प्रत्येक रविवार को, हस्त नक्षत्र से युक्त सप्तमी तिथि को सूर्य भगवान की पूजा विशेष फलदायी होती है ऐसा स्वं हावी ने बताया है। श्रावण के रविवार को शिवपूजा पाप नाशक कही गयी है। अतः12 जुलाई 2020, 19 जुलाई 2020, 26 जुलाई 2020, 02 अगस्त 2020 को सूर्य भगवान की पूजा जरूर करें। श्रावण में हस्त नक्षत्र से युक्त सप्तमी तिथि मिलना बहुत मुश्किल है। यह योग 26 जुलाई 2031 को बनेगा।
अग्निपुराण के अनुसार
" कृता हस्ते सूर्यवारं नतेन्नाब्दं स सर्वभाक " अर्थात हस्तनक्षत्रीकृत रविवार को एक वर्ष तक नक्तव्यत द्वारा मनुष्य सब कुछ पा लेता है |
कहते हैं सूर्य शिव के मंदिर में निवास करता है अतः शिव मंदिर में भोलेनाथ तथा सूर्य दोनों की की पूजा अर्चना करनी चाहिए।
शिवपुराण में सूर्यदेव को शिव का स्वरूप व नेत्र भी बताया गया है, जो एक ही ईश्वरीय सत्ता का प्रमाण है। सूर्य और शिव की उपासना जीवन में सुख, स्वास्थ्य, काल भय से मुक्ति और शांति देने वाली मानी गई है।
श्रावण में सूर्य पूजा कैसे करें :
सूर्योदय के समय सूर्य को प्रणाम करें, सूर्य को ताम्बे (ताम्र) के लोटे से “जल, गंगाजल, चावल, लाल फूल(गुडहल आदि), लाल चन्दन" मिला कर अर्घ्य दें | सूर्यार्घ्य का मन्त्र: “ॐ एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर” है। अगर यह नहीं बोल सकते तो  ॐ अदित्याये नमः अथवा ॐ घृणि सूर्याय नमः का जप करे ।
प्रतिदिन 12 ज्योतिर्लिंगों के नामों का स्मरण करें।
शिवलिंग पर घी, शहद, गुड़ तथा लाल चन्दन अर्पित करें । सभी चीज़ें अर्पित न कर पाओ तो कोई भी एक अर्पित करें। लाल रंग के पुष्प जरूर अर्पित करें।
शिव मंदिर में ताम्बे के दीपक में ज्योत जलाएं।
प्रतिदिन अत्यन्त प्रभावशाली आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करें। भविष्यपुराण के अनुसार जो रविवार को नक्त-व्रत एवं आदित्यह्रदय का पाठ करते है वे रोग से मुक्त हो जाते हैं और सूर्यलोक में निवास करते हैं।
युधिष्ठिरविरचितं सूर्यस्तोत्र का पाठ करें।
12 मुखी रुद्राक्ष भगवान सूर्य के बारह रूपों के ओज, तेज और शक्ति का केन्द्र बिन्दू है। इसे जो भी पहनता है उसे हर तरह का धन वैभव ज्ञान और सभी तरह के भौतिक सुख मिलते है।
सूर्य यदि शनि या राहू के साथ हो तो रविवार को रुद्राभिषेक करवायें।
प्रतिदिन गायत्री मंत्र का कम से कम 108 बार पाठ करें
निम्न मंत्र से शिव का ध्यान करें - "नम: शिवाय शान्ताय सगयादिहेतवे। रुद्राय विष्णवे तुभ्यं ब्रह्मणे सूर्यमूर्तये।।"
शिवप्रोक्त सूर्याष्टकम का नित्य पाठ करें ।
दोनों नेत्रों तथा मस्तक के रोग में और कुष्ठ रोग की शान्ति के लिये भगवान् सूर्य की पूजा करके ब्राह्मणों को भोजन कराये। शिवलिंग पूजन आक के पुष्पों, पत्तों एवं बिल्व पत्रों से करें। तदनंतर एक दिन, एक मास, एक वर्ष अथवा तीन वर्षतक लगातार ऐसा साधन करना चाहिये।  इससे यदि प्रबल प्रारब्धका निर्माण हो जाय तो रोग एवं जरा आदि रोगों का नाश हो जाता हैं।
सूर्याष्टकम
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर ।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तुते ॥
सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपमात्मजम् ।
श्वेत पद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम ॥
लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥
त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥
बृंहितं तेजःपुञ्जं च वायुमाकाशमेव च ।
प्रभुं च सर्व लोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥
बन्धुकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् ।
एकचधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥
तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेज: प्रदीपनम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥
तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥
॥इति श्री शिवप्रोक्तं सूर्याष्टकं सम्पूर्णम्॥

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 06-Jul-2020


दिनांक 06 जुलाई 2020
दिन - सोमवार
विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - वर्षा
मास - श्रावण  (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार आषाढ़)
पक्ष - कृष्ण 
तिथि - प्रतिपदा सुबह 09:21 तक तत्पश्चात द्वितीया
नक्षत्र - उत्तराषाढा रात्रि 11:12 तक तत्पश्चात श्रवण
योग - वैधृति रात्रि 09:35 तक तत्पश्चात विष्कम्भ
राहुकाल - सुबह 07:31 से सुबह 09:11 तक 
सूर्योदय - 06:03
सूर्यास्त - 19:23 
दिशाशूल - पूर्व दिशा में
व्रत पर्व विवरण -  
विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड(कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
हिन्दू पंचांग

श्रावण सोमवार 
06 जुलाई 2020 सोमवार से भगवान शिव का पवित्र श्रावण (सावन) मास शुरू हो चुका है, जो 03 अगस्त सोमवार तक रहेगा (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार अषाढ़ मास चल रहा है वहां 21 जुलाई मंगलवार से श्रावण (सावन) मास आरंभ होगा)
भगवान शिव श्रावण सोमवार के बारे में कहते हैं “मत्स्वरूपो यतो वारस्ततः सोम इति स्मृतः। प्रदाता सर्वराज्यस्य श्रेष्ठश्चैव ततो हि सः। समस्तराज्यफलदो वृतकर्तुर्यतो हि सः।।”
अर्थात सोमवार मेरा ही स्वरूप है, अतः इसे सोम कहा गया है। इसीलिये यह समस्त राज्य का प्रदाता तथा श्रेष्ठ है। व्रत करने वाले को यह सम्पूर्ण  राज्य का फल देने वाला है।
भगवान शिव यह भी आदेश देते हैं कि श्रावण में “सोमे मत्पूजा नक्तभोजनं” अर्थात सोमवार को मेरी पूजा और नक्तभोजन करना चाहिए।
पूर्वकाल में सर्वप्रथम श्रीकृष्ण ने ही इस मंगलकारी सोमवार व्रत को किया था। “कृष्णे नाचरितं पूर्वं सोमवारव्रतं शुभम्”
स्कन्दपुराण, ब्रह्मखण्ड में सूतजी कहते हैं,
शिवपूजा सदा लोके हेतुः *स्वर्गापवर्गयोः ।। सोमवारे विशेषेण प्रदोषादिगुणान्विते ।।
केवलेनापि ये कुर्युः सोमवारे शिवार्चनम् ।। न तेषां विद्यते किंचिदिहामुत्र च दुर्लभम् ।।
उपोषितः शुचिर्भूत्वा सोमवारे जितेंद्रियः ।। वैदिकैर्लौकिकैर्वापि विधिवत्पूजयेच्छिवम् ।।ब्रह्मचारी गृहस्थो वा कन्या वापि सभर्त्तृका।। विभर्तृका वा संपूज्य लभते वरमीप्सितम्।।
प्रदोष आदि गुणों से युक्त सोमवार के दिन शिव पूजा का विशेष महात्म्य है। जो केवल सोमवार को भी भगवान शंकर की पूजा करते हैं, उनके लिए इहलोक और परलोक में कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं। सोमवार को उपवास करके पवित्र हो इंद्रियों को वश में रखते हुए वैदिक अथवा लौकिक मंत्रों से विधिपूर्वक भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। ब्रह्मचारी, गृहस्थ, कन्या, सुहागिन स्त्री अथवा विधवा कोई भी क्यों न हो, भगवान शिव की पूजा करके मनोवांछित वर पाता है।
शिवपुराण, कोटिरुद्रसंहिता के अनुसार
निशि यत्नेन कर्तव्यं भोजनं सोमवासरे । उभयोः पक्षयोर्विष्णो सर्वस्मिञ्छिव तत्परैः ।।
दोनों पक्षों में प्रत्येक सोमवार को प्रयत्नपूर्वक केवल रात में ही भोजन करना चाहिए। शिव के व्रत में तत्पर रहने वाले लोगों के लिए यह अनिवार्य नियम है।
अष्टमी सोमवारे च कृष्णपक्षे चतुर्दशी।। शिवतुष्टिकरं चैतन्नात्र कार्या विचारणा।।
सोमवार की अष्टमी तथा कृष्णपक्ष चतुर्दशी इन दो तिथियों को  व्रत रखा जाए तो वह भगवान शिव को संतुष्ट करने वाला होता है, इसमें अन्यथा विचार करने की आवश्यकता नहीं है।

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 05-Jul-2020

 
दिनांक 05 जुलाई 2020
दिन - रविवार
विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - वर्षा
मास - आषाढ़
पक्ष - शुक्ल 
तिथि - पूर्णिमा सुबह 10:13 तक तत्पश्चात प्रतिपदा
नक्षत्र - पूर्वाषाढा रात्रि 11:02 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा
योग - इन्द्र रात्रि 11:03 तक तत्पश्चात वैधृति
राहुकाल - शाम 05:33 से शाम 07:13 तक
सूर्योदय - 06:02
सूर्यास्त - 19:23 
दिशाशूल - पश्चिम दिशा में
व्रत पर्व विवरण -  गुरुपूर्णिमा, व्यासपूर्णिमा, ऋषि प्रसाद जयंती, संन्यासी चतुर्मासारम्भ, विद्यालाभ योग (05 एवं 06 जुलाई को केवल गुजरात एवं महाराष्ट्र में)
विशेष - रविवार और पूर्णिमा के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)
रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)
स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।
हिन्दू पंचांग

श्रावणमास 
श्रावण हिन्दू धर्म का पञ्चम महीना है। इस वर्ष 06 जुलाई 2020 सोमवार (उत्तर भारत हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार) से श्रावण का आरम्भ हो रहा है। श्रावण मास शिवजी को विशेष प्रिय है । भोलेनाथ ने स्वयं कहा है—
द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो मेऽतिवल्लभ: । श्रवणार्हं यन्माहात्म्यं तेनासौ श्रवणो मत: ।।
श्रवणर्क्षं पौर्णमास्यां ततोऽपि श्रावण: स्मृत:। यस्य श्रवणमात्रेण सिद्धिद: श्रावणोऽप्यत: ।।
अर्थात मासों में श्रावण मुझे अत्यंत प्रिय है। इसका माहात्म्य सुनने योग्य है अतः इसे श्रावण कहा जाता है। इस मास में श्रवण नक्षत्र युक्त पूर्णिमा होती है इस कारण भी इसे श्रावण कहा जाता है। इसके माहात्म्य के श्रवण मात्र से यह सिद्धि प्रदान करने वाला है, इसलिए भी यह श्रावण संज्ञा वाला है।
श्रावण मास में शिवजी की पूजाकी जाती है | “अकाल मृत्यु हरणं सर्व व्याधि विनाशनम्” श्रावण मास में अकालमृत्यु दूर कर दीर्घायु की प्राप्ति के लिए तथा सभी व्याधियों को दूर करने के लिए विशेष पूजा की जाती है। मरकंडू ऋषि के पुत्र मारकण्डेय ने लंबी आयु के लिए श्रावण माह में ही घोर तप कर शिव की कृपा प्राप्त की थी, जिससे मिली मंत्र शक्तियों के सामने मृत्यु के देवता यमराज भी नतमस्तक हो गए थे।
श्रावण मास में मनुष्य को नियमपूर्वक नक्त भोजन करना चाहिए ।
श्रावण मास में सोमवार व्रत का अत्यधिक महत्व है
स्वस्य यद्रोचतेऽत्यन्तं भोज्यं वा भोग्यमेव वा। सङ्कल्पय द्विजवर्याय दत्वा मासे स्वयं त्यजेत् ।।”
श्रावण में सङ्कल्प लेकर अपनी सबसे प्रिय वस्तु (खाने का पदार्थ अथवा सुखोपभोग) का त्याग कर देना चाहिए  और उसको ब्राह्मणों को दान देना चाहिए।
केवलं भूमिशायी तु कैलासे वा समाप्नुयात”
श्रावण मास में भूमि पर शयन का विशेष महत्व है। ऐसा करने से मनुष्य कैलाश में निवास प्राप्त करता है।
शिवपुराण के अनुसार श्रावण में घी का दान पुष्टिदायक है।

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सावन का महीना, पवन करें शोर …पर्व मनाये और रहे सतर्क…

Date : 04-Jul-2020

रायपुर। सावन का महीना हर साल बड़े धूम धाम से मनाया जाता है। इस साल कोरोना महामारी के चलते बहुत से कार्यक्रम आयोजिन को सिमित किया गया है। इस साल 6 जुलाई से सावन महीने की शुरुवात होने जा रही है। इस वर्ष सावन त्यौहार बनाने के लिए कुछ नए परिवर्तन किये गए है। एनजीओ सांस्कृतिक विवेकानंद उत्कर्ष परिषद् द्वारा हर साल बड़ी धूम धाम और उल्लास के साथ यह पर्व सभी के साथ मनाया जाता है। परन्तु कोरोना काल के चलते इसे सिमित लोगो में किया जा रहा है। परिषद द्वारा यह देखते हुए इस आयोजन को पूरी तरह से ऑनलाइन करने का फैसला किया गया है। और इस साल इनका नाम डिजिटल सावन महोत्सव रखा गया है।

इस महोत्सव में संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत के साथ और भी कई बड़े कलाकार शामिल होंगे। यह आयोजन पिछले 5 वर्षों से बड़े ही धूम धाम से मनाया जा रहा है। और इस वर्ष भी मनाया जायेगा। यह कार्यक्रम ठीक शाम 6 : 30 बजे से फेसबुक के माध्यम से प्रसारित होना शुरू होगा। सावन महोत्सव 2020 की आयोजक दीप्ती दुबे ने बताया की यह आयोजन अपने आप में एक अनोखा कार्यक्रम है , जिसे छत्तीसगढ़ की जनता घर बैठे फेसबुक के माधयम से देख सकते है। 

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 04-Jul-2020

 
 दिनांक 04 जुलाई 2020
 दिन - शनिवार
 विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)
 शक संवत - 1942
 अयन - दक्षिणायन
 ऋतु - वर्षा
 मास - आषाढ़
 पक्ष - शुक्ल 
 तिथि - चतुर्दशी दोपहर 11:33 तक तत्पश्चात पूर्णिमा
 नक्षत्र - मूल रात्रि 11:22 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढा
 योग - ब्रह्म रात्रि 12:56 तक तत्पश्चात इन्द्र
 राहुकाल - सुबह 09:11 से सुबह 10:51 तक 
 सूर्योदय - 06:02
 सूर्यास्त - 19:23 
 दिशाशूल - पूर्व दिशा में
 व्रत पर्व विवरण -  व्रत पूर्णिमा
 विशेष - चतुर्दशी और पूर्णिमा के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
 हिन्दू पंचांग

विद्यालाभ के लिए मंत्र 
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं वाग्वादिनि सरस्वति मम जिव्हाग्रे वद वद ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं नम: स्वाहा |’
➡ यह मंत्र केवल गुजरात महाराष्ट्र के लोग 5 जुलाई को रात्रि 11:02 से 11:45 बजे तक या 6 जुलाई को प्रात : 03:00 बजे से रात्रि 11:12 तक 108 बार जप लें और फिर मंत्रजप के बाद उसी दिन रात्रि 11 से 12 के बीच जीभ पर लाल चंदन से ‘ह्रीं’ मंत्र लिख दें |
जिसकी जीभ पर यह मंत्र इस विधि से लिखा जायेगा उसे विद्यालाभ व अदभुत विद्वत्ता की प्राप्ति होगी |
हिन्दू पंचांग 

इसलिए जरूरी है जीवन में गुरु का होना 
हिंदू धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा गुरु भक्ति को समर्पित गुरु पूर्णिमा का पवित्र दिन भी है। भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु को सर्वोपरि माना है। वास्तव में यह दिन गुरु के रूप में ज्ञान की पूजा का है। गुरु का जीवन में उतना ही महत्व है, जितना माता-पिता का।
माता-पिता के कारण इस संसार में हमारा अस्तित्व होता है। किंतु जन्म के बाद एक सद्गुरु ही व्यक्ति को ज्ञान और अनुशासन का ऐसा महत्व सिखाता है, जिससे व्यक्ति अपने सतकर्मों और सद्विचारों से जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद भी अमर हो जाता है। यह अमरत्व गुरु ही दे सकता है। सद्गुरु ने ही भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बना दिया, इसलिए गुरु पूर्णिमा को अनुशासन पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।
इस प्रकार व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास गुरु ही करता है। जिससे जीवन की कठिन राह को आसान हो जाती है। सार यह है कि गुरु शिष्य के बुरे गुणों को नष्ट कर उसके चरित्र, व्यवहार और जीवन को ऐसे सद्गुणों से भर देता है। जिससे शिष्य का जीवन संसार के लिए एक आदर्श बन जाता है। ऐसे गुरु को ही साक्षात ईश्वर कहा गया है इसलिए जीवन में गुरु का होना जरूरी है।
हिन्दू पंचांग 

????गुरु पूजन ????
???? गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः |
गुरुर्साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ||
ध्यानमूलं गुरुर्मूर्ति पूजामूलं गुरोः पदम् |
मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा ||
अखंडमंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् |
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः ||
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव |
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव ||
ब्रह्मानंदं परम सुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिं |
द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं तत्त्वमस्यादिलक्षयम् ||
एकं नित्यं विमलं अचलं सर्वधीसाक्षीभूतम् |
भावातीतं त्रिगुणरहितं सदगुरुं तं नमामि ||
ऐसे महिमावान श्री सदगुरुदेव के पावन चरणकमलों का षोड़शोपचार से पूजन करने से साधक-शिष्य का हृदय शीघ्र शुद्ध और उन्नत बन जाता है | मानसपूजा इस प्रकार कर सकते हैं |
मन ही मन भावना करो कि हम गुरुदेव के श्री चरण धो रहे हैं … सर्वतीर्थों के जल से उनके पादारविन्द को स्नान करा रहे हैं | खूब आदर एवं कृतज्ञतापूर्वक उनके श्रीचरणों में दृष्टि रखकर … श्रीचरणों को प्यार करते हुए उनको नहला रहे हैं … उनके तेजोमय ललाट में शुद्ध चन्दन से तिलक कर रहे हैं … अक्षत चढ़ा रहे हैं … अपने हाथों से बनाई हुई गुलाब के सुन्दर फूलों की सुहावनी माला अर्पित करके अपने हाथ पवित्र कर रहे हैं … पाँच कर्मेन्द्रियों की, पाँच ज्ञानेन्द्रियों की एवं ग्यारहवें मन की चेष्टाएँ गुरुदेव के श्री चरणों में अर्पित कर रहे हैं …
कायेन वाचा मनसेन्द्रियैवा बुध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात् |
करोमि यद् यद् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि ||
शरीर से, वाणी से, मन से, इन्द्रियों से, बुद्धि से अथवा प्रकृति के स्वभाव से जो जो करते  हैं वह सब समर्पित करते हैं | हमारे जो कुछ कर्म हैं, हे गुरुदेव, वे सब आपके श्री चरणों में समर्पित हैं … हमारा कर्त्तापन का भाव, हमारा भोक्तापन का भाव आपके श्रीचरणों में समर्पित है |
इस प्रकार ब्रह्मवेत्ता सदगुरु की कृपा को, ज्ञान को, आत्मशान्ति को, हृदय में भरते हुए, उनके अमृत वचनों पर अडिग बनते हुए अन्तर्मुख हो जाओ … आनन्दमय बनते जाओ …
ॐ आनंद ! ॐ आनंद ! ॐ आनंद !

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आज का हिन्दू पंचांग

Date : 03-Jul-2020

 दिनांक 03 जुलाई 2020
 दिन - शुक्रवार
 विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)
 शक संवत - 1942
 अयन - दक्षिणायन
 ऋतु - वर्षा
 मास - आषाढ़
 पक्ष - शुक्ल 
 तिथि - त्रयोदशी दोपहर 01:16 तक तत्पश्चात चतुर्दशी
 नक्षत्र - ज्येष्ठा रात्रि 12:08 तक तत्पश्चात मूल
 योग - शुक्ल 04 जुलाई रात्रि 03:10 तक तत्पश्चात ब्रह्म
 राहुकाल - सुबह 10:51 से दोपहर 12:31 तक 
 सूर्योदय - 06:02
 सूर्यास्त - 19:23 
 दिशाशूल - पश्चिम दिशा में
 व्रत पर्व विवरण - जयापार्वती व्रत (गुजरात)
  विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
 हिन्दू पंचांग 
 पुण्यदायी तिथियाँ 
 5 जुलाई : गुरुपूर्णिमा, ऋषि प्रसाद जयंती, विद्यालाभ योग ( 05 व 06 जुलाई को केवल गुजरात व महाराष्ट्र में )
 12 जुलाई : रविवारी सप्तमी (सूर्योदय से दोपहर 03:49 तक)
 16 जुलाई : कामिका एकादशी (इसका व्रत व रात्रि – जागरण करनेवाला मनुष्य न तो कभी भयंकर यमराज का दर्शन करता है और न कभी दुर्गति में ही पड़ता है |)
  18 जुलाई : चतुर्दशी-आर्द्रा नक्षत्र योग
  20 जुलाई : सोमवती अमावस्या (सूर्योदय से रात्रि 11:03तक ) (तुलसी की 108 परिक्रमा करने से दरिद्रता-नाश )
 
हिन्दू पंचांग 

गुरु का मानस-पूजन कैसे करें गुरु पूर्णिमा को
गुरुपूनम की सुबह उठें । नहा-धोकर थोडा-बहुत धूप, प्राणायाम आदि करके श्रीगुरुगीता का पाठ कर लें ।
फिर इस प्रकार मानसिक पूजन करें
‘मेरे गुरुदेव ! मन-ही-मन, मानसिक रूप से मैं आपको सप्ततीर्थों के जल से स्नान करा रहा हूँ । मेरे नाथ ! स्वच्छ वस्त्रों से आपका चिन्मय वपु (चिन्मय शरीर) पोंछ रहा हूँ । शुद्ध वस्त्र पहनाकर मैं आपको मन से ही तिलक करता हूँ, स्वीकार कीजिये । मोगरा और गुलाब के पुष्पों की दो मालाएँ आपके वक्षस्थल में सुशोभित करता हूँ ।
आपने तो हृदयकमल विकसित करके उसकी सुवास हमारे हृदय तक पहुँचायी है लेकिन हम यह पुष्पों की सुवास आपके पावन तन तक पहुँचाते हैं, वह भी मनसे, इसे स्वीकार कीजिये । साष्टांग दंडवत् प्रणाम करके हमारा अहं आपके श्रीचरणों में धरते हैं ।
हे मेरे गुरुदेव ! आज से मेरी देह, मेरा मन, मेरा जीवन मैं आपके दैवी कार्य के निमित्त पूरा नहीं तो हररोज २ घंटा, ५ घंटा अर्पण करता हूँ, आप स्वीकार करना । भक्ति, निष्ठा और अपनी अनुभूति का दान देनेवाले देव ! बिना माँगे कोहिनूर का भी कोहिनूर आत्मप्रकाश देनेवाले हे मेरे परम हितैषी ! आपकी जय-जयकार हो ।’
इस प्रकार पूजन तब तक बार-बार करते रहें जब तक आपका पूजन गुरु तक, परमात्मा तक नहीं पहुँचे । और पूजन पहुँचने का एहसास होगा, अष्टसात्त्विक भावों (स्तम्भ १ , स्वेद २ , रोमांच, स्वरभंग, कम्प, वैवण्र्य ३ , अश्रु, प्रलय ४ ) में से कोई-न-कोई भाव भगवत्कृपा, गुरुकृपा से आपके हृदय में प्रकट होगा ।
इस प्रकार गुरुपूर्णिमा का फायदा लेने की मैं आपको सलाह देता हूँ । इसका आपको विशेष लाभ होगा, अनंत गुना लाभ होगा । 

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क्या आपने भी सपने में दांत टूटते हुए देखा है? जानें सपने में दांत टूटना देखने के शुभ-अशुभ संकेत

Date : 02-Mar-2020

ज्योतिषी। क्या आपने भी सपने में दांत टूटते हुए देखा है? हम सभी सपने देखते हैं. कभी अच्छे तो कभी बुरे, लेकिन सपने आते ज़रूर हैं. ज़्यादातर सपने देखकर हम भूल भी जाते हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हमारा देखा हुआ सपना हमें याद भी रहता है ओर किसी घटना को भी दर्शाता है. ऐसे विशेष सपनों का दिखना और उनका हमें याद रहना या तो आनेवाली किसी विशेष घटना की तरफ़ संकेत देता है या हमारे साथ हो चुकी घटना या हमारे आसपास के माहौल को दर्शाता है. ऐसा ही एक सपना है दांत टूटने का, जो अक्सर लागों को दिखाई देता है. आइए, जानते हैं दांत टूटने के सपने से जुड़े कुछ अर्थ. हम अक्सर अपने घर के बड़े-बुज़ुर्गों को कहते सुनते हैं कि सुबह के सपने अक्सर सच होते हैं. लेकिन सही मायने में ऐसा कोई भी सपना जिसमें कोई विशेष घटना या कोई वस्तु दिखाई दे, तो ऐसा सपना किसी ख़ास परिस्थिति जो हो घटित हो चुकी है या होनेवाली है, उसकी ओर संकेत देता है. 

 क्या होता है सपने में दांत टूटते देखना ?

आपने भी अक्सर ऐसा सुना होगा कि दांत टूटने का स्वप्न आनेवाली बीमारी, संकट या किसी कष्ट को दर्शाते हैं, पर क्या यह सच है? क्या सही में दांत टूटना आनेवाली किसी परेशानी की ओर संकेत करता है? नहीं, ये सच नहीं है. बचपन में जब हमारे दूध के दांत गिरते हैं, तो हमें उनके बदले नए और मज़बूत दांत मिलते हैं और ये नए दांत ज़िंदगीभर हमारे साथ रहते हैं. नए दांत तभी आते हैं, जब पुराने दांत टूट जाएं.

इसी तरह जब कोई व्यक्ति दांत टूटने का सपना देखता है, तो वह उसके जीवन में आनेवाले नए अवसरों की ओर इशारा करता है.

इसके अतिरिक्त यह भी मायने रखता है कि व्यक्ति ने सपना किन परिस्थितियों में देखा है. अगर हम सामान्य रूप से दांत टूटने का सपना देखें, तो दांत टूटने का स्वप्न एक बहुत अच्छा और नवीनता दर्शानेवाला स्वप्न माना गया है. अत: आपने भी यदि सपने में दांत टूटते देखा है, तो डरें नहीं, ये आपके लिए बहुत अच्छा संकेत है.

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भविष्य और चरित्र के कई राज खोलते हैं शरीर पर मौजूद ये तिल

Date : 06-Sep-2019

ज्योतिषशास्त्र।हर इंसान के शरीर के किसी न किसी हिस्से पर कोई तिल जरूर होता है। यह तिल किसी के होटों के ऊपर  उसकी खूबसूरती को बढ़ाने का काम करता है तो किसी के आकर्षण को काम करने की वजह भी बनता है। कई सारे  ऐसे लोग होते हैं जिनकी आंखों के अंदर भी तिल होता है।ज्योतिषशास्त्र की मानें तो व्यक्ति के शरीर पर मौजूद ये तिल उसके भविष्य और चरित्र के कई सारे राज खोलते हैं तो आइए जानते हैं कि मनुष्य के शरीर पर मौजूद तिल आखिर क्या कहते हैं और उनका क्या मतलब होता है। 
नाक पर तिल
नाक पर तिल होने का मतलब होता है। ऐसे लोग काफी फ्लर्ट करते हैं। उन्हें गुस्सा भी जल्दी से आ जाता है।
आंखों पर तिल
कई सारे  ऐसे लोग होते हैं जिनकी आंखों के अंदर भी तिल होता है। अगर आप भी उनमें  से एक हैं  और आपकी दाहिने आंख के सफेद हिस्से के अंदर एक तिल है, तो यह दौलत आसानी से मिल जाने का संकेत देता है। लेकिन बाएं आंख में तिल होना, घमंडी होने की ओर संकेत देता है।
कान पर तिल
कान पर तिल का होना अच्छा माना जाता है यदि आपके दाहिने कान के निचले हिस्से पर होता है। तो ऐसे में यह व्यक्ति को  अपने परिवार की जिम्मेदारियां अच्छे से निभाने का संकेत देता है।
गाल पर तिल
अगर आपके दाहिने गाल पर तिल है, तो आप काफ़ी भावुक क़िस्म के हो सकते हैं। वहीं अगर तिल आपके बाएं गाल पर है, तो आप धैर्य रखने वाले इंसान हो सकते हैं।
गर्दन पर तिल 
यदि आपकी गर्दन का तिल दोनों ओर से नजर आए तो इसे बहुत अच्छा माना जाता है। क्योंकि ये आपके  अच्छे व्यक्तित्व का संकेत देता है।
कंधे पर तिल 
किसी के कंधे पर तिल होना दर्शाता है कि  उस इंसान पर कई सारी जिम्मेदारियां हैं। इसके साथ ही वो एक समझदार और व्यवहारिक व्यक्ति है।
छाती पर तिल
छाती पर तिल होने का अर्थ होता है कि व्यक्ति आलसी है। वह अपने जीवन के सुख-साधनों का अधिक आनंद लेना पसंद करता है।
अंगुलियों पर तिल 
उंगलियों पर तिल होना जीवन में बाधाओं को दर्शाता है। इतना ही नहीं ये भविष्य में दिवालिया होने की ओर इशारा करता है।
हथेलियों पर तिल
दाहिनी हथेली पर तिल होने का मतलब होता है की वो व्यक्ति अपना पूरा धनी जीवन जी सकेगा। जबकि हथेली के बाएं ओर मौजूद तिल खर्चीले स्वभाव की ओर इशारा करता है।
पैरों पर तिल 
पैरों पर तिल होने का अर्थ होता है कि उस व्यक्ति को अपने जीवन में दुनिया घूमने और नई-नई जगहों पर जाने के कई सारे अवसर मिलेंगे। 

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कल है साँपो की देवी माँ मनसा की पूजा, जाने क्यों करते है पूजा

Date : 18-Aug-2019

दिपेश साहा . कहा जाता है कि ये भगवान शिव की मानस पुत्री है. वहीं पुराने ग्रंथो में ये भी कहा गया है कि मनसा देवी का जन्म कश्यप के मस्तिष्क से हुआ है. कुछ ग्रंथो की मानें तो उन्हें नागराज वासुकी की एक बहन पाने की इच्छा को पूर्ण करने के लिए, भगवान शिव ने उन्हें भेंट किया था. वासुकी इनके तेज को संभाल ना सके और इनके पोषण की ज़िम्मेदारी नागलोक के तपस्वी हलाहल को दे दी .| इनकी रक्षा करते करते हलाहल ने अपने प्राण त्याग दिए. अपने माता पिता में भ्रम होने के कारण इन्हे देवों द्वारा उठाए गए आनंद से वांछित रखा गया,इसलिए, वह उन लोगों के लिए बेहद उग्र देवी है, जो पूजा करने से इनकार करते हैं, जबकि उनके लिए बेहद दयालु और करुणामयी जो भक्ति के साथ उनकी पूजा करते हैं. मनसा देवी का पंथ मुख्यतः भारत के उत्तर-पूर्व क्षेत्र में केंद्रित है. मनसा देवी मुख्यत: सर्पों से आच्छादित तथा कमल पर विराजित हैं, सात नाग उनके रक्षण में सदैव विद्यमान हैं. इनके सात नामों के जाप से सर्प का भय नहीं रहता. ये इस प्रकार है: जरत्कारू, जगतगौरी, मनसा, सियोगिनी, वैष्णवी, नागभगिनी, शैवी, नागेश्वरी, जगतकारुप्रिया, आस्तिकमाता और विषहरी. देवी मनसा की आमतौर पर बरसात के दौरान पूजा की जाती है, क्योंकि साँप उस दौरान अधिक सक्रिय होते हैं. मनसा पूजा के लिए व्यवस्था वे प्रजनन के लिए एक महत्वपूर्ण देवी मानी जाती है, उनके पूजन से साँप का काटना ठीक हो जाता है और श्वासपटल, चिकन पॉक्स आदि जैसी बीमारियों से छुटकारा पाया जाता है. बंगाल कि लोक कथाओ में भी इनका नाम काफी प्रचलित है. माना जाता है, कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान् शिव ने जब हलाहल विष का पान किया था, तो इन्होने ही भगवान शिव कि हलाहल विष से रक्षा की थी .

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शिवलिंग पर बेल का पत्ता चढ़ाने से दूर होती है धन संबंधी समस्याएं, पूरी होती है मनोकामनाएं

Date : 16-Aug-2019

ज्योतिषी। प्राचीन भारत में कई तरह से शिव भगवन की आराधना एवं पूजा की जाती थी. आज भी शिव भगवन को प्रसन्न करने के लिए शिव की कई तरह से पूजा की जाती है। जिससे भगवान अलग-अलग कामनाओं की पूर्ति करते हैं।श्रावण सोमवार को शिव कि विशेष पूजा की जाती है। हिन्दू धर्म में इसे बहुत ही पवित्र माह माना गया है। श्रावण माह के सोमवार को आप बेलपत्र से भगवान शिव की विशेष पूजा करें। जिससे आपके धन की दिक्कतें हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। इस श्रावण सोमवार को, आपको विशेष विधि के तहत भगवान शिव को बेल पत्र के साथ प्रार्थना करनी चाहिए। क्योंकि भगवान शिव की विशेष पूजा का दिन श्रवण का सोमवार है। शिवलिंग पर बेल-पत्र चढ़ाने से वैवाहिक जीवन सुखी हो जाती है, सबसे बड़ी बीमारी दूर हो जाती है, संतान सुख दुख होता है।  बेलपत्र को संस्कृत में 'बिल्वपत्र' कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार एक  करोड़ कन्यादान के बराबर है एक बिल्वपत्र को चढ़ाने का पुण्य। शिवलिंग पर गंगाजल के साथ-साथ बेलपत्र चढ़ाने से देवों के देव महादेव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। श्रावण मास में भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से अधूरी कामनाएं पूरी हो जाती है।  मान्यता है कि बेलपत्र और जल से भगवान शंकर का मस्तिष्क शीतल रहता है। पूजा में इनका प्रयोग करने से वे बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं।

आज हम आपको बेलपत्र के साथ भगवान शिव की पूजा करने की विशेष विधि बताते हैं। श्रावण सोमवार को, यदि आप इस विधि से शिवलिंग को बेल-पत्र चढ़ाते हैं, तो आपकी धन संबंधी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। सबसे पहले, आप पेड़ से मतपत्र लाते हैं। ये पृष्ठ 11 या 21 बेल शीट्स को शुद्ध पानी से विभाजित किए बिना साफ कर रहे हैं। जिसके बाद हम एक कटोरे में गाय का दूध बनाते हैं। जिसमें आपका स्वच्छ मतपत्र डाला जाएगा। इसलिए जिस विधि से आप शिवलिंग पर पूजा करते हैं वह कर रहे हैं। अब आप दूध के कटोरे से सिरका निकाल रहे हैं और उन्हें गंगा जल से साफ करें। 11 या 21 बेलपत्र, जो आपने साफ किए हैं, "हर पत्ते पर चंदन लगाएं और इत्र छिड़कें और शिव लिंग पर" आह नमः शिवाय "मंत्र का जाप करें। एक सप्ताह के बाद, आप परिणाम देखें। यह भी एक प्रकार का टोटका है जो श्रवण सोमवार को किया जाता है। आप चाहते हैं तो इस विधि का उपयोग करके शिवलिंग को बेलपत्र की माला भी अर्पित कर सकते हैं।

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