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भारत सेवाश्रम संघ में माघी पूर्णिमा महोत्सव 27 को

Date : 26-Feb-2021

रायपुर। वीआईपी रोड भारत सेवाश्रम संघ प्रणवानंद अकादमी में 27 फरवरी शनिवार को भारत सेवाश्रम संघ के अधिष्ठाता युगाचार्य स्वामी प्रणवानंद महाराज के 126 वें आविर्भाव जयंती समारोह का एक दिवसीय कार्यक्रम प्रातः 9:00 बजे से आयोजित किया जाएगा। भारत सेवाश्रम संघ वैदिक धर्म एवं संस्कृति पर आधारित धर्मार्थ देश प्रेमी सेवा संस्थान है, जिसके महान प्रतिष्ठाता स्वामी प्रणवानंद महाराज ने संपूर्ण मानव जाति के उत्थान व आध्यात्मिक शक्तिशाली राष्ट्र गठन के उद्देश्य से वर्ष 1917 ईस्वी में संघ की स्थापना की थी। स्वामी जी ने कठोर संयम, अल्पाहार व अनिद्रा में रहकर शक्ति की साधना एवं ब्रह्मचर्य की रक्षा करते हुए कठोर तपस्या करके 20 वर्ष की आयु में ही साधना में महा सिद्धि प्राप्त की थी।

माघी पूर्णिमा महोत्सव के तहत 27 फरवरी को प्रातः 9:00 से 10:00 तक भजन कीर्तन, प्रातः 10:00 से 11:00 तक विश्व शांति यज्ञ हवन, पूर्वान्ह 11:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक धार्मिक प्रवचन स्वामी शिवरूपानंद महाराज के आशीर्वचन, वक्ता स्वामी सुरेशानंद महाराज, वक्ता स्वामी प्रानानंद महाराज के प्रवचन होंगे। दोपहर 12:00 बजे से 12:30 बजे तक वस्त्र वितरण, दोपहर 12:30 से 1:00 बजे तक पूजा आरती, दोपहर 1:00 बजे से संध्या 4:00 बजे तक भोज प्रसाद वितरण, नेत्र परीक्षण शिविर बैंकर्स बंधु द्वारा किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री एवं रायपुर ग्रामीण विधायक सत्यनारायण शर्मा तथा समारोह के अध्यक्ष महंत लक्ष्मीनारायण मंदिर ट्रस्ट रायपुर के महंत वेद प्रकाश महाराज, विशिष्ट अतिथि नगर पालिक निगम रायपुर जोन क्रमांक 10 के अध्यक्ष आकाशदीप शर्मा, एमआईसी सदस्य सहदेव व्यवहार तथा पार्षद श्रीमती संध्या नानू ठाकुर होंगी।

भारत सेवाश्रम संघ के सचिव स्वामी शिवरूपानंद ने बताया कि माघी पूर्णिमा महोत्सव में सम्माननीय अतिथियों एवं समाज के प्रबुद्ध जन और संघ के अनुयाई संन्यासी गण की गरिमामय उपस्थिति में यज्ञ हवन प्रवचन एवं 1000 पुरुषों तथा 500 मातृशक्ति को वस्त्र वितरण एवं पूजा आरती के पश्चात भोग प्रसाद का कार्यक्रम संपन्न होगा। उन्होंने समस्त जनमानस से निवेदन किया है कि इस सेवा यज्ञ में अपनी उपस्थिति दे कर कार्यक्रम को सफल बनाएं।

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वसंत पंचमी 16 को, इस दिन वाणी और ज्ञान की देवी मां शारदा की विधि विधान से की जाती है पूजा

Date : 15-Feb-2021

इस वर्ष सरस्वती पूजा 16 फरवरी दिन मंगलवार को है। इस दिन वाणी और ज्ञान की देवी मां शारदा की विधि विधान से पूजा की जाती है। पूजा के समय सरस्वती देवी से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है, जिसे पढ़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में कथा का पाठ करने से उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। जागरण अध्यात्म में आज हम जानते हैं सरस्वती पूजा की प्रसि​द्ध कथा।

सरस्वती पूजा की कथा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने मनुष्यों की योनी बनाई। एक समय की बात है वे एक दिन पृथ्वी पर भ्रमण कर रहे थे, तो उन्होंने अपने द्वारा रचे गए सभी जीवों को देखा। उनको लगा कि पृथ्वी पर काफी शांति है। अभी भी कहीं कुछ कमी रह गई है। उसी समय उन्होंने अपने कमंडल से जल निकाला और धरती पर छिड़का, तभी वहां पर चार भुजाओं, श्वेत वर्ण वाली, हाथों में पुस्तक, माला और वीणा धारण किए हुए एक देवी प्रकट हुईं। ब्रह्मा जी ने सर्वप्रथम उनको वाणी की देवी सरस्वती के नाम से संबोधित किया और सभी जीवों को वाणी प्रदान करने को कहा। तब मां सरस्वती ने अपनी वीणा के मधुर नाद से जीवों को वाणी प्रदान की।

मां शारदा माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को प्रकट हुई थीं, इस वजह से उस तिथि को वसंत पंचमी या श्री पंचमी कहा जाने लगा। इस दिन को सरस्वती देवी के प्रकाट्य दिवस या जन्मदिवस के रुप में भी मनाते हैं। उन्होंने अपनी वीणा से संगीत की उत्पत्ति की, जिस वजह से वह कला और संगीत की देवी कही जाती हैं। उनके भक्त मां शारदा को वाग्देवी, बागीश्वरी, भगवती, वीणावादनी आदि नामों से पुकारते हैं। उनको पीला रंग काफी प्रिय है। पूजा के समय में उनको पीली वस्तु और पुष्प अर्पित किया जाता है।

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शनिवार को करे शनिदेव के ये मंत्र का जाप, आपके हर कष्टों का होगा निवारण

Date : 13-Feb-2021

शनिवार को की गई शनि उपासना का अन्य दिनों से कई गुणा प्रभावशाली असर होता है लेकिन हर रोज बोला गया एक मंत्र आपके जीवन में दिखाएगा कमाल। किसी भी इच्छा को पूरी करने की क्षमता रखते हैं शनि मंत्र। फिर चाहे भरनी हो तिजोरी या पानी हो मनचाही नौकरी, सौभाग्य, दौलत, सफलता या सम्मान। खुश होकर शनि बनाएंगे मालामाल। यदि आप बार-बार किसी दुर्घटना का शिकार होने से बच रहे हैं, धन आने के बावजूद तिजोरी खाली पड़ी है या बनते-बनते बिगड़ रहे हैं काम। तो शनि मंत्र जाप दिलाएगा आपको हर संकट से निजात। इसके अतिरिक्त कुंडली में शनि अशुभ दे रहे हों, साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव चल रहा हो तो ऐसे में भी इन शनि मंत्रों में से कोई भी 1 मंत्र कम से कम108 बार हर रोज बोलें।

 

शनिदेव का मंत्र

ॐ शं शनैश्चराय नम:

शनि वैदिक मंत्र

ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शंयो‍रभि स्रवन्तु न:।।

शनि पौराणिक मंत्र

नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामी शनैश्चरम्।।

शनि बीज मंत्र

ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:

इसके अतिरिक्त शनिवार के दिन शनि प्रतिमा पर सरसों का तेल अर्पित करते वक्त इन मंत्रों का जाप अवश्य करें-

शनि पूजा मंत्र

ॐ नीलांजन नीभाय नम:

ॐ नीलच्छत्राय नम:

ज्योतिष विद्वान मानते हैं, इन मंत्रों का जाप करने से हर तरह की समस्या का समाधान हो जाता है। शनिवार के दिन घर में तेल से बने पकवान बनाकर शनि देव को अर्पित करें। फिर उन्हें गरीबों में बांटने के उपरांत पारिवारिक सदस्यों को खिलाएं, अंत में स्वंय ग्रहण करें।

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माघ मास में मनाई जाने वाली गुप्त नवरात्रि आज से शुरू

Date : 12-Feb-2021

रायपुर। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। माघ मास में मनाई जाने वाली गुप्त नवरात्रि आज से शुरू हो रही है और 21 फरवरी तक चलेगी। साल में चार बार नवरात्रि आती हैं। चौत्र और आश्विन माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तक दो प्रकट नवरात्रि होती हैं और माघ व आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक दो गुप्त नवरात्रि होती हैं।

पुराणों की मान्यता के अनुसार गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गे की 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। मान्यता हैं कि गुप्त नवरात्रि का फल हजारों गुना ज्यादा होता है। यह नवरात्रि तंत्र मंत्र सिद्धि साधना के सर्वश्रेष्ठ के लिए मानी जाती है। इससे इनकी पूजा करने का फल भी कई गुना मिलता है। इस दौरान ध्यान साधना कर दुर्लभ शक्तियां प्राप्त की जा सकती हैं।

 
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मौनी अमावस्या आज, जानें मौनी अमावस्या का विशेष महत्व

Date : 11-Feb-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। ज्योतिष शास्त्रों में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। माघ महीने में पड़ने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या के नाम से भी जानते हैं। इस साल मौनी अमावस्या आज 11 फरवरी 2021 को है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है क्योंकि पीपल वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है। ज्योतिषाचार्या साक्षी शर्मा के अनुसार, इस बार की मौनी अमावस्या काफी खास है। आइये जानते हैं कि इस दिन किन दो बातों को जरूर करना चाहिए।

मौनी अमावस्या पर रखें मौन

शास्त्रों की मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन मौन रहने और कटु शब्दों को न बोलने से मुनि पद की प्राप्ति होती है।

करें पवित्र नदी में स्नान

मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदी या कुंड में स्नान करना शुभ फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माघ अमावस्या के दिन संगम तट और गंगा पर देवी-देवताओं का वास होता है।

महोदय योग का मिलेगा लाभ

मौनी अमावस्या के दिन श्रवण नक्षत्र में चंद्रमा और छह ग्रह मकर राशि में होने से महासंयोग का निर्माण कर रहे हैं। इस शुभ संयोग को महोदय योग कहते हैं। मान्यता है कि महोदय योग में कुंभ में डुबकी और पितरों का पूजन करने से अच्छे फलों की प्राप्ति होती है।

अमावस्या का शुभ मुहूर्त-

फरवरी 11, 2021 को 01:10:48 से अमावस्या आरम्भ।

मौनी अमावस्या के दिन करें ये उपाय:

1. अगर इस दिन अगर चींटियों को शक्कर मिलाकर आटा खिलाया जाए तो व्यक्ति के पाप-कर्म कम हो जाते हैं। वहीं, उनके पुण्य-कर्म में बढ़ोत्तरी होती है।

2. इस दिन सुबह के समय स्नान करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं फिर इन्हें मछलियों को खिलाए। यह बेहद शुभ होता है। अगर ऐसा किया जाए तो व्यक्ति के जीवन की परेशानियां खत्म हो जाती हैं।

3. इस दिन अगर स्नान के बाद चांटी से बने नाग या नागिन की पूजा की जाए तो व्यक्ति को कालसर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है। इसके बाद सफेद पुष्प के साथ इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।

4. इस दिन शाम के समय अगर घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक जलाया जाए तो मां लक्ष्मी बेहद प्रसन्नो हो जाती हैं।

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आज के दिन करें भगवान श्रीगणेश की पूजा, प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय

Date : 10-Feb-2021

न्युज डेस्क (एजेंसी)। आज बुधवार है और आज के दिन भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है। गणपति बप्पा को सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है। हर शुभ कार्य से पहले इनकी पूजा की जाती है। सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि देवता भी अपने कार्यों को बिना किसी विघ्न के पूरा करने के लिए गणेश जी की अराधना करते हैं। गणेश जी को बुध का कारक देव कहा जाता है। यही कारण है कि इस दिन को गणेश जी का वार कहा जाता है। इस दिन जो व्यक्ति गणेश जी की विधि-विधान के साथ पूजा करता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। शास्त्रों में कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जिन्हें करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी हो जाती है। आइए जानते हैं इन उपायों को।

गणेश जी प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय:

दूर्वा: गणेश जी को दुर्वा घास बेहद प्रिय है। इसमें अमृत मौजूद होता है। गणेश जी दुर्वा चढ़ानी चाहिए। इससे गणेश जी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। गणपति अथर्वशीर्ष के अनुसार, अगर कोई भी भक्त गणेश जी की पूजा दुर्वांकुर से संपन्न करता है तो वहकुबेर के समान हो जाता है यानी उसके पास किसी भी चीज की कमी नहीं रहती है।

मोदक: गणेश जी को मोदक भी बेहद पसंद है। गणपति अथर्वशीर्ष के अनुसार, पूजा के दौरान गणेश जी को मोदक अवश्य चढ़ाने चाहिए। इससे व्यक्ति की मनोकामना गणेश जी जरूर पूरी करते हैं। शास्त्रों में मोदक की तुलना ब्रह्म से की गयी है। माना गया है कि मोदक में भी अमृत होता है।

घी: इसे भी अमृत समान ही माना जाता है। घी को पुष्टिवर्धक और रोगनाशक कहा जाता है। इसे गणेश जी को चढ़ाया जाना चाहिए। इससे बुद्धि प्रखर होती है। साथ ही व्यक्ति अपनी योग्यता और ज्ञान से संसार में सब कुछ हासिल कर लेता है।

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षट्तिला एकादशी आज, जानें मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल

Date : 07-Feb-2021

हिन्दी पंचांग के अनुसार, आज माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। आज 07 फरवरी 2021 और दिन रविवार है। आज षट्तिला एकादशी है। यह माघ मास की पहली एकादशी भी है। षट्तिला एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की विधि विधान से पूजा की जाती है। उनकी कृपा से व्यक्ति को धन, धान्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आज सर्वार्थ सिद्धि योग शाम से लग रहा है, जो कल सुबह तक रहेगा। आज के पंचांग में राहुकाल, शुभ मुहूर्त, दिशाशूल के अलावा सूर्योदय, चंद्रोदय, सूर्यास्त, चंद्रास्त आदि के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

आज का पंचांग

दिन: रविवार, माघ मास, कृष्ण पक्ष, एकादशी तिथि।

आज का दिशाशूल: पश्चिम।

आज का राहुकाल: शाम 04:30 बजे से 06:00 बजे तक।

आज का पर्व एवं त्योहार: षट्तिला एकादशी स्मार्त।

विक्रम संवत 2077 शके 1942 उत्तरायन, दक्षिणगोल, शिशिर ऋतु माघ मास कृष्ण पक्ष की एकादशी 28 घंटे 48 मिनट तक, तत्पश्चात् द्वादशी ज्येष्ठा नक्षत्र 16 घंटे 15 मिनट तक, तत्पश्चात् मूल नक्षत्र व्याघात योग 14 घंटे तक, तत्पश्चात् हर्षण योग वृश्चिक में चंद्रमा 16 घंटे 14 मिनट तक तत्पश्चात् धनु में।

सूर्योदय और सूर्यास्त

आज के दिन सूर्योदय प्रात:काल 07 बजकर 06 मिनट पर हुआ है, वहीं सूर्यास्त शाम को ठीक 06 बजकर 05 मिनट पर होगा।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

आज का चंद्रोदय 08 फरवरी को प्रात: 04 बजकर 10 मिनट पर होगा। चंद्र का अस्त उसी दिन दोपहर 01 बजकर 43 मिनट पर होगा।

आज का शुभ समय

अभिजित मुहूर्त: आज दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक।

सर्वार्थ सिद्धि योग: आज शाम 04 बजकर 15 मिनट से 08 फरवरी को सुबह 07 बजकर 05 मिनट तक।

अमृत काल: सुबह 07 बजकर 50 मिनट से शाम 09 बजकर 22 मिनट तक।

विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 25 मिनट से दोपहर 03 बजकर 09 मिनट तक।

आज माघ कृष्ण एकादशी है। आज रविवार के दिन आपको सूर्य देव की आराधना करनी चाहिए। पूजा के समय उनको जल अर्पित करें और मन्त्रों का जाप करें। ऐसा करना व्यक्ति के लिए कल्याणकारी होता है। आज आप कोई नया कार्य करना चाहते हैं तो शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें।

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शनिवार के दिन न खरीदें ये चीजें, जीवन में बढ़ सकती हैं समस्याएं

Date : 31-Jan-2021

शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है। इस दिन शनिदेव की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ की जाती है। मान्यता है कि शनिदेव अपने भक्त से प्रसन्न होकर उसके सभी कष्ट दूर कर देते हैं। शनिदेव को कर्मों का देवता कहा जाता है जो जैसा कर्म करता है उसे वैसा ही फल मिलता है। कई बार लोग शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान होते हैं। ऐसे में इससे निजात पाने के लिए शनिदेव की पूजा करने के साथ-साथ व्रत भी किया जाता है। साथ ही शनिवार के दिन कुछ बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी हो जाता है। तो आइए जानते हैं इन बातों को।

शनिवार के दिन न खरीदें ये चीजें:

1. शनिवार के दिन काले तिल को नहीं खरीदना चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपके कामों में विघ्न आने शुरू हो जाते हैं। अगर आपके घर में काले तिल रखे हैं तो इसका दान अवश्य करना चाहिए। यह शुभ होता है।

2. शनिवार को गलती से भी सरसों का तेल नहीं खरीदना चाहिए। इसके अलावा कोई अन्य तेल भी नहीं खरीदना चाहिए। ऐसा करने से रोग बढ़ने लगते हैं।

3. शनिवार को लोहा नहीं खरीदना चाहिए। साथ ही लोहे का कोई सामान भी नहीं बनवाना चाहिए। अगर ऐसा किया जाता है तो व्यक्ति को उसके जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

4. इस दिन नमक खरीदने से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति खराब होती है। वहीं, शरीर रोगी होने लगता है। ऐसे में शनिवार के दिन नमक की खरीदारी से बचना चाहिए।

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जानिए बसंत पंचमी का पर्व का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्त्व

Date : 31-Jan-2021

बसंत पंचमी 2021 : इस वर्ष बसन्त पंचमी या श्रीपंचमी 16 फरवरी को मनाई जाएगी। हिन्दू धर्म में बसंत पंचमी पर्व को विशेष महत्व है। इस दिन मां सरस्वती की आराधना की जाती है। इन्हें श्री पंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी कई स्थानों पर जाना जाता है। सनातन धर्म में सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई जगहों पर बेहद ही हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है।

पीले कपड़े पहनना होता है शुभ

इस दिन पीले वस्त्र पहनना शुभ होता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल बसन्त पंचमी का शुभ मुहूर्त और महत्व इस प्रकार है –

बसन्त पंचमी शुभ मुहूर्त:

मंगलवार, फरवरी 16, 2021

बसन्त पंचमी मध्याह्न का क्षण- 12:35

पञ्चमी तिथि प्रारम्भ- फरवरी 16, 2021 को 03:36 बजे

बसन्त पंचमी का महत्व:

हिंदू पंचांग के मुताबिक माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसन्त पंचमी मनाई जाती है। यह भी धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्माण्ड के रचयिता ब्रह्माजी ने सरस्वती की रचना की थी और ब्रह्मांड की रचना का कार्य शुरू किया था। पुराणों के अनुसार, विष्णु जी की आज्ञा से ब्रह्माजी ने मनुष्य योनी की रचना की। अपनी आरंभिक अवस्था में मनुष्य मूक था, इसलिए तब धरती एकदम शांत थी। इससे धरती पर नीरसता बढ़ रही थी। तब ब्रह्माजी ने यह देखा तो उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का। इससे एक अद्भुत शक्ति के रूप में एक सुंदर स्त्री प्रकट हुईं जो चतुर्भुजी थीं। एक हाथ में वीणा तो दूसरे में वर मुद्रा थी। इनकी वीणा की आवाज से तीनों लोकों में कंपन हुआ। इन्हें सरस्वती कहा गया। इसी कंपन से सभी को शब्द और वाणी मिली। सनातन धर्म में मां सरस्वती को शब्द और वाणी की देवी भी माना जाता है।

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जानें कौन से महिने में भगवान धरती पर आकर करते हैं जप, तप और दान

Date : 31-Jan-2021

अंग्रेजी कलेंडर के मुताबिक नए साल का पहला माह जारी है, जबकि हिन्दी माह के मुताबिक साल के अंतिम दो माह माघ और फागुन शेष हैं। शेष बचे ये दोनों महीने बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसी मान्यता है कि माघ माह में स्वयं भगवान धरती पर मानव रुप लेकर आते हैं। प्रयाग में स्नान कर जप, तप और दान करते हैं। इस माह दान का अपना अलग महत्व है, जिसे देवता भी छोड़ना नहीं चाहते।

यूं तो हिन्दू नववर्ष चैत्र माह से मां दुर्गा की उपासना के साथ शुरू होता है और पूरे 12 मास पवित्रता लिए होते हैं। लेकिन सही मायने में चैत्र के 6 माह बाद आने वाले क्वांर नवरात्रि से धर्म और आस्था का जो सिलसिला शुरू होता है, वह फागुन मास में होली त्यौहार के साथ समाप्त होता है। इसी बीच माघ का महीना जिसे साल का 11 वां मास कहा जाता है, सबसे ज्यादा पुण्य का होता है। इसका फल दानकर्म से मिलता है, इसलिए इस मास में दान की सार्थकता को प्रमाणित किया गया है, जिसमें देवताओं की भी सहभागिता होती है।

माघ माह को अत्यंत पवित्र माह माना जाता है। मघा नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इस माह का नाम माघ पड़ा। माघ शब्द का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से है। इस माह कई धार्मिक पर्व आते हैं। मान्यता है कि माघ माह में देवता पृथ्वी पर आते हैं और मनुष्य रूप धारण कर प्रयाग में स्नान, दान और जप करते हैं। माघ माह को स्नान, जप, तप का माह माना जाता है। इस माह दान अवश्य करना चाहिए।

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