Spiritual

जानें क्यों जलाया जाता है दीया, जानें महत्‍व

Date : 16-Jun-2021

हमेशा भगवान  की पूजा करते समय उनके सामने दीप प्रज्‍वलित किया जाता है. यहां तक कि तुलसी, बरगद आदि के पेड़ के नीचे भी दीया जलाया जाता है. शाम के वक्‍त दीया लगाकर ही संध्‍यावंदना किया जाता है. कभी सोचा है कि दीया क्‍यों जलाया जाता है. धर्म-शास्‍त्रों समेत ज्‍योतिष में भी दीया जलाने के कई महत्‍व बताए गए हैं. आज दीया जलाने के कारण और लाभ जानते हैं. 

इसलिए जलाते हैं दीया 

दरअसल, दीपक की रोशनी में भगवान खुद होते हैं और अग्नि पंच तत्‍वों में से एक है. ऐसे में भगवान की पूजा करते समय दीया जलाने से सारी परेशानियां, दुख, अंधकार दूर हो जाते हैं. भगवान सारे दुख हर लेते हैं और जिंदगी में खुशियां भर जाती हैं. दीपक जलाने से माहौल में सकारात्‍मकता आती है. 

 

दीया जलाने के हैं कई लाभ 

- हर शुभ कार्य या पूजन-पाठ करते समय देसी घी या तेल का दीया लगाकर भगवान की प्रार्थना करना चाहिए. 
- ज्योतिष के अनुसार बिना कारण डर लगने या अनजान डर सताने पर हर सोमवार और शनिवार को सरसों के तेल का दीया जलाएं. इससे डर और शत्रु दोनों का नाश होता है.  
- बाल गोपाल के आगे रोजाना दीपक जलाने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. 
- राहु-केतु के दोष से मुक्ति के लिए सुबह-शाम घर के मंदिर में अलसी के तेल का दीपक जलाएं. 
-शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि के प्रकोप से मुक्ति मिलती है.
-  घर के मंदिर में रोजाना दीपक जलाने से समाज में मान-सम्‍मान मिलता है. सूर्य को जल चढ़ाकर दीप दिखाने से बहुत लाभ होता है. 
- मां लक्ष्मी के सामने सात मुखी यानी सात बत्तियों वाला दीपक जलाने से धन संबंधी सारी परेशानियां दूर होती है. 
- मां सरस्वती के सामने दो बत्तियों जलाने से बुद्धि तेज होती है और यश मिलता है. 
- बुधवार के दिन भगवान गणेश के सामने तीन मुखी देसी घी का दीपक जलाने से घर-धान्‍य बढ़ता है. धन लाभ के नए रास्‍ते खुलते हैं. 

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विनायक चतुर्थी आज, विघ्नहर्ता की पूजा और व्रत से होते हैं कष्ट दूर

Date : 14-Jun-2021

भगवान गणेश प्रथम पूजनीय देव हैं। हर माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता है। सोमवार को विनायक चतुर्थी है। यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन भक्त एक दिन का उपवास रखते हैं और आशीर्वाद लेने के लिए भगवान गणेश की पूजा करते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार गणेश को विघ्नहर्ता के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों के दर्द और कष्टों को दूर करते हैं। 

विनायक चतुर्थी का महत्व
भगवान गणेश को विनायक, विघ्नहर्ता, एकदंत, पिल्लयार और विनायक हेरम्बा जैसे कई नामों से जाना जाता है। भगवान गणेश को बल, बुद्धि और समृद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति विनायक चतुर्थी के दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करता है उसके सभी संकंट दूर हो जाते हैं। उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

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शाहजहांपुर शहर के प्राचीन ब्रह्मदेव बाबा के मंदिर में एक क्विंटल का शिवलिंग स्थापित

Date : 14-Jun-2021

शाहजहांपुर (एजेंसी)। यूपी के शाहजहांपुर शहर के घंटाघर के पास लकड़ी मंडी में ब्रह्मदेव बाबा के प्राचीन मंदिर पर अखिल भारतीय विश्वकर्मा महासंघ के जिलाध्यक्ष अमित शर्मा व क्षेत्रवासियों के सहयोग से एक कुंतल का शिवलिंग व नंदी महाराज, गणेश, दुर्गा माता, बजरंगबाली महाराज, शनि देव महाराज की मूर्ति स्थापना की जा रही है।

रविवार को मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा व प्रसाद वितरण हुआ। इस दौरान शुक्रवार को महिलाओं द्वारा कलश यात्रा निकाली गई और कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए मंदिर पर विद्वान ब्राह्मणों ने मूर्ति की स्थापना का कार्यक्रम संपन्न किया। शुक्रवार शनिवार और रविवार 3 दिन मंत्र उच्चारण के बीच भगवान भोलेनाथ के मूर्ति की स्थापना होने के अलावा अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

जिलाध्यक्ष अमित शर्मा ने बताया कि ब्रह्मदेव बाबा के इस स्थान पर लोगों में बड़ी श्रद्धा है। और अब भोले नाथ भगवान की एक बड़ी मूर्ति स्थापित होने के बाद श्रद्धालुओं में श्रद्धा बढ़ेगी उन्होंने बताए कि सच्चे मन से मांगी मुराद इस मंदिर पूरी होती है। अमित शर्मा ने बताया कि रविवार को और उनके चलते भंडारा का कार्य कर रखा गया है जिसमें लोगों को प्रसाद के रूप में हलवा पूड़ी सब्जी आदि पैक करवाकर दी जाएगी। जो अपने घर पर जाकर खा सकते हैं।

मूर्ति स्थापना कार्यक्रम में सहयोग करने वालों में आकाश शर्मा, सूर्य शर्मा, एकांत साहू, शिवम बाजपेई, तुषार शर्मा, पवन मिश्रा, प्रकाश शर्मा, सुधीर सैनी, शिवनंदन साहू, राधारमन शर्मा, गोपाल सक्सेना, राजू रस्तोगी, राम अवतार शर्मा, दीपक शर्मा मोहन, सत्यपाल सिंह यादव, राजेश शर्मा, अनिल वर्मा, सुनील वर्मा आदि का सहयोग रहा है।

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हज यात्रियों के लिये टीका लगवाना अनिवार्य : मंत्रालय

Date : 14-Jun-2021

दुबई (एजेंसी) । सऊदी अरब ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते इस साल 60 हजार से अधिक लोगों को हज की अनुमति नहीं होगी और वे सभी स्थानीय होंगे। सरकार द्वारा संचालित सऊदी प्रेस एजेंसी पर हज एवं उमरा मंत्रालय का हवाला देते हुए एक बयान में यह घोषणा की गई है।

बयान में कहा गया है कि इस साल हज जुलाई के मध्य में शुरू होगा। इसमें 18 से 65 वर्ष की आयु के लोग हिस्सा ले सकेंगे। मंत्रालय ने कहा कि हज यात्रियों के लिये टीका लगवाना अनिवार्य है।

बयान में कहा गया है, ''सऊदी अरब इस बात की पुष्टि करता है कि उसने हाजियों के स्वास्थ्य व सुरक्षा और उनके देशों की सुरक्षा के बारे में निरंतर विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया है। '

पिछले साल, सऊदी अरब में पहले से रह रहे लगभग एक हजार लोगों को ही हज के लिये चुना गया था। सामान्य हालात में हर साल लगभग 20 लाख मुसलमान हज करते हैं।

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इस साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा 10 जून को, गलती से भी न करें 4 काम

Date : 10-Jun-2021

इस साल का पहला सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) 10 जून को लगेगा. यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। यह खगोलीय घटना तब होती है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि सूर्य ग्रहण की घटना को सीधे देखने से आंखों को नुकसान हो सकता है। इतना ही नहीं इससे सेहत पर भी कई प्रभाव पड़ते हैं। चलिए जानते हैं आपको किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

इस सूर्य ग्रहण को भारत में केवल अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के कुछ हिस्सों में ही सूर्यास्त से कुछ समय पहले देखा जा सकेगा। एमपी बिरला तारामंडल के निदेशक देबीप्रसाद दुरई ने बताया कि सूर्य ग्रहण भारत में अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के कुछ हिस्सों से ही दिखाई देगा।

सूर्य ग्रहण 2021 का समय

अरुणाचल प्रदेश में दिबांग वन्यजीव अभयारण्य के पास से शाम लगभग 5:52 बजे इस खगोलीय घटना को देखा जा सकेगा। वहीं, लद्दाख के उत्तरी हिस्से में जहां, शाम लगभग 6.15 बजे सूर्यास्त होगा, शाम लगभग 6 बजे सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा। दुरई ने बताया कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया के बड़े क्षेत्र में सूर्य ग्रहण को देखा जा सकेगा।

सूर्य ग्रहण के नुकसान

माना जाता है कि बिना सुरक्षा ग्रहण देखने से आंखों पर बुरा असर पड़ता है। इससे आंखों की रोशनी खत्म होने और पूरी तरह से अंधेपन होने का खतरा होता है।

वैज्ञानिक मानते हैं कि सूर्य ग्रहण पर मून फुल मून की तुलना में चार लाख गुना ज्यादा चमकदार होता है, जो सीधे रूप से आंखों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि कुछ सावधानियां अपनाकर आप इस दृश्य का आनंद ले सकते हैं।

नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) के अनुसार, हर किसी को ग्रहण के समय चश्मा पहनना चाहिए या आंशिक सूर्यग्रहण देखने पर अप्रत्यक्ष रूप से देखने की विधि का उपयोग करना चाहिए। सूरज की किरणों को सीधे देखना कभी भी सुरक्षित नहीं है, भले ही सूर्य आंशिक रूप से अस्पष्ट हो।

नासा का यह भी मानना है कि यह नियम कुल ग्रहण (total eclipse) के दौरान भी लागू होता है जब तक कि सूरज पूरी तरह से अवरुद्ध न हो।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के अनुसार, बिना सुरक्षा थोड़े समय के लिए भी सूरज को देखना आपके रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप अंधापन हो सकता है जिसे सौर रेटिनोपैथी कहा जाता है।

ऑस्ट्रेलियाई विकिरण सुरक्षा और परमाणु सुरक्षा एजेंसी (ARPANSA) ने चेतावनी दी है कि आपको सूर्य ग्रहण देखने के लिए सीधे सूर्य ग्रहण चश्मे का उपयोग नहीं करना चाहिए।

हेल्थ ऑफिसियल की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 1999 में सूर्य ग्रहण के बाद आंखों की हानि से जुड़े कई मामले सामने आये थे। एक हफ्ते बाद कम से कम 14 लोगों की आंखों के रोशनी हमेशा के लिए चली गई।

सूर्य को सीधे देखने से नुकसान

आंखों की रोशनी कम हो सकती है
अंधेपन का खतरा
धुंधलापन होना
रेटिना को नुकसान होना
आंखों में जलन या दर्द होना

सूर्य ग्रहण को देखते समय इन बातों का रखें ध्यान

गलती से भी सूर्य को सीधे रूप से न देखें
सूर्य देखते समय हमेशा चश्मे का इस्तेमाल करें
सूर्य देखने के बाद अपनी आंखों की जांच जरूर कराएं
इस तरह के लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें

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महिलाओं ने पति की लंबी आयु के लिए वट वृक्ष की परिक्रमा

Date : 10-Jun-2021

गरियाबंद। अपने पति के प्राण यमराज से वापस लेने वाली देवी सावित्री भारतीय संस्कृति में संकल्प और साहस का प्रतीक हैं। यमराज के सामने खड़े होने का साहस करने वाली सावित्री की पौराणिक कथा भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। सावित्री के दृढ़ संकल्प का ही उत्सव है वट सावित्री व्रत।

नगर समेत ग्रामीण इलाकों में सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु के लिए रखा गया वट सावित्री का व्रत धूमधाम के साथ मनाया गया। कोरोना संक्रमण का असर बुधवार को महिलाओं के प्रमुख व्रत वट सावित्री में भी नजर आया। नगर समेत ग्रामीण इलाकों में सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु के लिए रखा गया वट सावित्री का व्रत मनाया गया।  भीषण गर्मी के बावजूद व्रती महिलाओं ने मास्क का उपयोग कर तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन करते हुए वट यानि बरगद के वृक्ष की पूजा कर अखंड सुहाग की कामना की।

विदित हो कि वट सावित्री का पर्व हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्यौहार है। इस दिन परंपरा अनुसार सुहागिनें स्त्री पुराने वट (बरगद) वृक्ष की पूजा कर उसे पीले धागे से बांधकर उसका फेरा लगाती हैं। पुराणों के अनुसार वट सावित्री के ही दिन सती ने यमराज से अपने पति के प्राण बचाकर लाए थे। वट सावित्री का त्यौहार सुहागिन स्त्रीयों के द्वारा काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। कोरोना संक्रमण के देखते हुए पूजन के दौरान पूरी तरह से सावधानी रखी गई। महिलाओं ने वट वृक्ष में भीड़ लगाने की बजाए सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन किया और अधिकांश महिलाओं ने मास्क लगाकर पूजा की।

वट सावित्री के पर्व के लिए नगर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक महिलाओं में उत्साह रहा। नगर के काली मंदिर , बालक शाला के पास, पुरानी बस्ती समेत कई पुराने बरगद के पेड़ों के पास सुबह से महिलाओं ने पहुंचकर वट वृक्ष में कच्चे सूत को लपेटते हुए 12 बार परिक्रमा की अखंड सुहाग की कामना की। पारंपरिक व्रत को पूरे विधि विधान-लगन के साथ करने के साथ ही साथ कोरोना संक्रमण का भी पूरी तरह से ध्यान रखने को लेकर नगरवासियों ने महिलाओं की प्रशंसा की। कोरोना संक्रमण को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से नगर की कई महिलाओं ने घरों पर ही पूजा करना श्रेष्ठ समझा। महिलाओं ने अपने घरों पर गमले में लगाकर रखे वट वृक्ष की ही पूजा की।

क्या हैं व्रत का महत्व

अपने पति के प्राण यमराज से वापस लेने वाली देवी सावित्री भारतीय संस्कृति में संकल्प और साहस का प्रतीक हैं> यमराज के सामने खड़े होने का साहस करने वाली सावित्री की पौराणिक कथा भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। सावित्री के दृढ़ संकल्प का ही उत्सव है वट सावित्री व्रत। इस व्रत की उत्तर भारत में बहुत मान्यता है,

इस दिन बरगद के वृक्ष की पूजा कर महिलाएं देवी सावित्री के त्याग,पतिप्रेम एवं पतिव्रत धर्म की कथा का स्मरण करती हैं। यह व्रत स्त्रियों के लिए सौभाग्यवर्धक,पापहारक,दुःखप्रणाशक और धन-धान्य प्रदान करने वाला होता है।जो स्त्रियां सावित्री व्रत करती हैं वे पुत्र-पौत्र-धन आदि पदार्थों को प्राप्त कर चिरकाल तक पृथ्वी पर सब सुख भोग कर पति के साथ ब्रह्मलोक को प्राप्त करती हैं। ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा,तने में भगवान विष्णु एवं डालियों में त्रिनेत्रधारी शंकर का निवास होता है एवं इस पेड़ में बहुत सारी शाखाएं नीचे की तरफ लटकी हुई होती हैं जिन्हें देवी सावित्री का रूप माना जाता है। इसलिए इस वृक्ष की पूजा से सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।

वट वृक्ष पूजा में आज,श्यामकली तिवारी सुमन लता केला संध्या सोनी रेणुका सिन्हा भारती सिन्हा वर्षा तिवारी मिलेश्वरी साहू पुष्पा साहू किरण सिन्हा पूनम सोनी लालिमा ठाकुर मंजु निर्मलकर रूपाली सोनी सहित और अन्य महिलायें उपस्थित रही।

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10 जून ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या को होगा सूर्य ग्रहण, जानिए भारत में कैसा होगा असर

Date : 08-Jun-2021

26 मई 2021 वैशाख सुदी पूर्णिमा के बाद 10 जून ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या को सूर्य ग्रहण होगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में अमान्य होगा। इसका सूतक मान्य नहीं होगा। लिहाजा ग्रहण को लेकर आमतौर पर होने वाली पाबंदियों से भी भारत मुक्त रहेगा। कंकणाकृति सूर्य ग्रहण दक्षिणी अमेरिका, अंटार्कटिका, दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका, प्रशांत महासागर और आइसलैंड क्षेत्र में दिखाई देगा।

नहीं होता कोई शुभ कार्य

सामान्यतः सूर्य ग्रहण मान्य होने पर इसका सूतक 12 घंटे पहले लग जाता है। इसमें कोई भी यज्ञ अनुष्ठान नहीं किए जाते हैं। मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं। केवल हरिभजन की बात शास्त्रोक्त मानी गई है। सूर्य ग्रहण पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा के आ जाने से बनता है। इसे खुली आखों से नहीं देखा जाता है। चंद्र ग्रहण के समान ही यह भी विभिन्न भौगोलिक घटनाक्रमों का कारक हो सकता है। इसलिए ग्रहण के दौरान सतर्कता बरती जाती है। खाना नहीं पकाया जाता है। श्रमशील कार्य से बचा जाता है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल की आशंका

सूर्य को पिता प्रबंधन और प्रशासन का कारक माना जाता है। ग्रहण के प्रभाव से आगामी एक से छह माह तक राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ सकती है। विभिन्न देशों के सत्ता केंद्रो में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सूर्य ग्रहण को खुली आंखों से देखने से बचना चाहिए। इसके लिए रंगीन फिल्म ओर ग्लास का प्रयोग किया जाना चाहिए।

यह कंकणाकृति सूर्य ग्रहण कहलाता है

हालांकि कंकणाकृति सूर्य ग्रहण में इसकी जरूरत नहीं रह जाती है। यह सूर्य ग्रहण गुरुवार को होगा। इसके प्रभाव से समाज के प्रतिष्ठित लोगों को यश मान की हानि हो सकती है। सूर्य ग्रहण के प्रभाव से आगजनी, उपद्रव और विभिन्न प्रकार के भौगोलिक एवं राजनीतिक घटनाक्रम बन सकते हैं।

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शनि जयंती 10 जून को, जानें पूजा मुहूर्त व महत्व

Date : 04-Jun-2021

हिन्दी पंचांग के अनुसार, प्रति वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या तिथि को शनि जयंती मनाई जाती है। इस साल शनि जयंती 10 जून को मनाई जाएगी। शनि जयंती को शनि अमावस्या के नाम से भी जानते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन न्याय के देवता शनि देव का जन्म हुआ था। मान्यता के अनुसार, शनि देव भगवान सूर्य और माता छाया के पुत्र हैं। शनि दोष की शांति के उपाय के लिए ज्येष्ठ अमावस्या का दिन बेहद ही शुभ दिन होता है। इसीलिए इस दिन शनि महाराज की विधिपूर्वक पूजा की जाती है।

शनि जयंती 2021 मुहूर्त

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या तिथि का प्रारम्भ 09 जून 2021 दिन बुधवार को दोपहर 01 बजकर 57 मिनट पर हो रहा है। इसका समापन 10 जून 2021 दिन गुरुवार को शाम 04 बजकर 22 मिनट पर हो रहा है। उदया ति​थि 10 जून को प्राप्त हो रही है, ऐसे में शनि जयंती या शनि देव का जन्मोत्सव 10 जून को मनाया जाएगा।

शनि जयंती का महत्व

शनि अमावस्या या शनि जयंती के दिन शनि देव की पूजा करने से लोगों पर शनि की बुरी दृष्टि नहीं पड़ती है। जो लोग शनि की ढैय्या या साढेसाती से पीड़ित होते हैं, उनको आज के दिन पूजा से राहत मिलती है। शनि देव को कर्म फलदाता कहा जाता है। वे लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल देने के लिए जाने जाते हैं। शनि जयंती को शनि देव की पूजा से कुंडली के शनि दोष, ढैय्या, साढ़ेसाती आदि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

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गुरुवार को भूलकर भी इन चीजों का न करें दान, पूजा हो जाएगा निष्फल

Date : 03-Jun-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। गुरुवार को भगवान विष्णु का दिन माना जाता है. इस दिन उनकी पूजा करके दान-पुण्य किया जाता है. ऐसा करने से श्रद्धालुओं सुख-स्वास्थ्य और धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

धर्म शास्त्रों के मुताबिक गुरुवार को पूजा करने से भगवान विष्णु अति प्रसन्न होते हैं. इस दिन देव गुरु बृहस्पति की भी पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए पीले कपड़े पहनने चाहिए. पूजा में सभी चीजों का पीले रंग का होना बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. पीली वस्तु दान करने से मन को शांति और घर में सुख आता है।

गुरुवार को इन चीजों को न करें दान

ध्यान रखें कि गुरुवार को काली या दूसरे रंग की चीजें दान न करें. ऐसे करने से आपको भगवान विष्णु की पूजा निष्फल हो जाती है और आपकी साधना बेकार हो जाती है. ऐसे में सवाल आता है कि आप किन चीजों को जान करें, जिससे आपके बिगड़े काम बन जाएं और आपकी मनोकामना पूर्ण हों.

इन वस्तुओं का दान कर कमाएं पुण्य:-

- गुरुवार के दिन पीले रंग के वस्त्रों को दान करना शुभ माना जाता है. इससे बिगड़े काम पूरे हो जाते हैं.

- किसी की शादी में अड़चने आ रही हैं, तो भगवान विष्णु (Lord Vishnu) को प्रसन्न करने के लिए उसे हल्दी का दान करना चाहिए. ऐसा करने से विवाह में आने वाली बाधा दूर हो सकती है.

- गुरुवार के दिन किसी मंदिर में सुराही दान करने से जीवन में आ रही मुश्किलें खत्म हो जाती है.

- गुरुवार के दिन पीले रंग के अन्न दान करने से भाग्योदय होता है. इससे नौकरी संबंधित परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है.

- व्यापार को सुचारू रुप से चलाने के लिए गुरुवार को पान के पत्ते के अंदर हल्दी की दो साबुत गांठे रखकर चढ़ाएं. इससे जल्द लाभ होता है।

- आज के दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के मंदिर में आम दान करने से जीवन में खुशहाली आती है. परिवारिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है और जीवन सुखमय होता है।

- गुरुवार के दिन विष्णु मंदिर (Lord Vishnu) में केवड़े और केसर का दान करने से मां लक्ष्मी की अपार कृपा होती है, जिससे धन प्राप्ति होती है।

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शुभ मुहूर्त में खुले केदारनाथ के कपाट, पूजा में केवल तीर्थ पुरोहित हुए शामिल

Date : 17-May-2021

रुद्रप्रयाग (एजेंसी)। केदारनाथ धाम के कपाट आज सुबह पांच बजे मेष लग्न में विधि विधान से खोल दिए गए। इस दौरान मंदिर परिसर में तीर्थ पुरोहित, पंडा समाज और हकहककूधारियों की उपस्थित रही। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए घरों में ही रह कर पूजा अर्चना करने की अपील की है। 

कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष भी केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के बिना ही खुले। कोरोना संक्रमण के कारण सरकार ने चारधाम यात्रा स्थगित की है। मंदिर में सिर्फ रावल, तीर्थ पुरोहित, पंडा समाज व हकहककूधारियों को पूजा अर्चना की अनुमति होगी। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि देवस्थानम बोर्ड एवं मंदिर समितियों द्वारा चारों धामों में पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जनकल्याण के लिए की जा रही है। शनिवार शाम को केदारनाथ भगवान की पंचमुखी डोली केदारनाथ धाम पहुंची। 

देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीडी सिंह केदारनाथ धाम में व्यवस्थाओं को देख रहे हैं। गढ़वाल आयुक्त एवं देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने चारधाम के कपाट खुलने के अवसर पर कोविड गाइडलाइन का पालन करने को कहा है। 

00 बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया भी शुरू
बदरीनाथ धाम के कपाट 18 मई को प्रात: 4 बजकर 15 बजे खुल रहे हैं। रविवार को नृसिंह मंदिर से आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी, रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी के साथ योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर पहुंच गए हैं। आज शाम उद्धव एवं कुबेर के साथ ही आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी बदरीनाथ धाम पहुंचेगी।

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