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एपल ने Iphone11 शुरुआती कीमत घटाकर 699 डॉलर करने की घोषणा

अमेरिका (एजेंसी)। दुनिया को बेहतरीन स्मार्टफोन देने वाली कंपनी apple ने  नया Iphone11 मॉडल प्रदर्शित किया। कंपनी ने अधिकांश बेसिक मॉडलों के दाम में कटौती की भी घोषणा की। कंपनी ने Iphone11 की शुरुआती कीमत घटाकर 699 डॉलर करने की घोषणा की। कंपनी ने प्रो मॉडलों समेत आईफोन11 के तीन मॉडल को प्रदर्शित किया। इनमें ट्रिपल कैमरा के साथ अल्ट्रा-वाइड कैमरा लेंसों समेत कई अन्य उन्नत फीचर होंगे। इनकी कीमतें 999 डॉलर और 1,099 डॉलर से शुरू होंगी।  इसके साथ ही एपल ने ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के उभरते बाजार में भी उतरने की घोषणा की।

apple ने एपल टीवी प्लस नाम से ऑनलाइन स्ट्रीमिंग क्षेत्र में उतरने की भी घोषणा की। कंपनी ने दर महज पांच डॉलर प्रति माह रखने की घोषणा की। कंपनी इस सेवा की शुरुआत एक नवंबर से करेगी। एपल के साथ ही नवंबर से वाल्ट डिज्नी भी ऑनलाइन स्ट्रीमिंग में उतर रही है। वाल्ट डिज्नी के प्लान की दर सात डॉलर मासिक होगी।(भाषा)

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इलेक्ट्रिक स्कार्फ जो सर्दी और गर्मी को देता है मात

 

गैजेट न्यूज़।  डोएल कंपनी ने एक इलेक्ट्रिक स्कार्फ पेश किया है। इसे पर्सनल एसी के तौर पर जाना जाता है जो एक हीटिंग और कूलिंग वियरेबल डिवाइस है। यह एक बाहरी बैटरी पैक पर काम करता है और इसे कैम्पिंग, बाइकिंग, एयर ट्रैवलिंग, खेलने आदि के समय कहीं भी साथ ले जाया जा सकता है। जिन्हें मौसम के तापमान में बदलाव के कारण कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है, उनके लिये यह एक बड़ी राहत दे सकता है।

आॅटोमैटिक सेफ्टी शट आॅफ डिवाइस, ओवरकरेंट और ओवरहीटिंग रोकता है। यह बेहतरीन डिजाइन किया गया स्मार्ट उपकरण ऊर्जा किफायती है, जो वातावरण के हिसाब से निजी तापमान को नियंत्रित करता है। 

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Exclusive/ भारत में स्मार्टफोन उपयोग करने वालो की गोपनीयता कही खतरे में तो नहीं ?

Bangbandhu Exclusive
सरकार देश में कैशलेस व्यवस्था को तेजी के साथ आगे बढ़ाने के लिये जोरशोर से जुटी है लेकिन यहां एक गंभीर मुद्दा यह भी है कि डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित बनाने के लिये जो व्यवस्था होनी चाहिये वह हमारे देश में नहीं है। भारत में जबकि स्मार्टफोन का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है और करीब 30 से 40 करोड़ लोगों के पास अब स्मार्टफोन पहुंच चुके है एैसे में एप के डाउनलोड के लिए गूगल प्ले स्टोर की ही जरूरत क्यों? आखिर भारत के साफ्टवेयर विशेषज्ञ अभी तक भारत का अपना प्ले स्टोर क्यों नहीं बना पाए या उसे बाजार में स्मार्ट फोन के लिए उपलब्ध नहीं करा पाए। क्या गूगल प्ले स्टोर से भारत में स्मार्टफोन का उपयोग करने वालो की गोपनीयता खतरे में नहीं है?

नोटबंदी के बाद सरकार का ध्यान कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और कैशलेस टांजेक्शन करने वालों को प्रत्सोहित भी कर रहे है। इंटरनेट तकनीक के वर्तमान दौर मे आजकल अधिकांश कामकाज ऑनलाईन होने लगे है। देश में पिछले कुछ वर्षो के दौरान स्मार्टफोन का उपयोग बढऩे से अब कई तरह के एप भी बन चुके है जो आम आदमी की जिंदगी का हिस्सा बनने लगे है। नोटबंदी के बाद अधिकांश लेनदेन मोबाईल एप के माध्यम से ऑनलाईन होने लगा । अधिकांश शासकीय विभागीय काम-काज भी एप के माध्यम से हो रहे है। कुछ एप स्मार्टफोन में पहले से ही इंस्टाल होते है। जबकि अन्य जरूरत के एप को डाउनलोड करना पड़ता है। एप को डाउनलोड करने के लिए मुख्य रूप से गूगल प्ले स्टोर का सहारा लिया जाता है। लेकिन यहां एक प्रश्न खड़ा होता है कि भारत में जबकि स्मार्टफोन का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है और करीब 30 से 40 करोड़ लोगों के पास अब स्मार्टफोन पहुंच चुके है एैसे में एप के डाउनलोड के लिए गूगल प्ले स्टोर की ही जरूरत क्यों? आखिर भारत के साफ्टवेयर विशेषज्ञ अभी तक भारत का अपना प्ले स्टोर क्यों नहीं बना पाए या उसे बाजार में स्मार्ट फोन के लिए उपलब्ध नहीं करा पाए। क्या गूगल प्ले स्टोर से भारत में स्मार्टफोन का उपयोग करने वालो की गोपनीयता खतरे में नहीं है? 

गौरतलब है कि हमारे पड़ोसी देश चीन ने कुछ साल पहले ही गूगल प्ले स्टोर को अपने यहां प्रतिबंधित कर दिया था क्योंकि चीन के प्रशासको को यह लगता था कि उससे गोपनीयता भंग हो सकती है। वहां की सरकार ने गूगल पर कुछ कड़े नियम लगाए लेकिन उसका पालन करने के कारण वहां गूगल प्ले स्टोर को प्रतिबंधित कर दिया गया। हालांकि एण्ड्राइड फोन का उपयोग करने वालों की संख्या चीन में सर्वाधिक है उसके  बावजूद वहां के लोग गूगल प्ले स्टोर के बजाय चीन के ही साफ्टवेयर विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न प्ले स्टोरों पर निर्भर है और उन्हीं के जरिए एप डाउनलोड करते है। 

फर्जी एप्प से देश को खतरा
यदि कुछ शोधकतार्ओं ने सेक्युरिटी रिसर्च को अंजाम नहीं दिया होता तो यह बात हमें कभी पता ही नहीं चलती कि हम जिस फेसबुक, या व्हाट्सअप का प्रयोग कर रहे हैं वह असली है या नकली। शोधकतार्ओं के अनुसार यदि एक बार इस तरह का कोई नकली एप स्मार्टफोन में डाउनलोड हो गया तो आप इसे डिलीट नहीं कर सकते।मतलब यह कि इसे डिलीट करने का कोई उपाय नहीं है।मोबाइल सेक्यूरिटी एप ने कहा है कि उन्हें भी अभी इस तरह के फर्जी एप्प डिलीट करने का उपाय नहीं मिल पाया है। इसलिए यह बहुत खतरनाक स्थिति है। आजकल थर्ड पार्टी एप स्टोर फर्जी एप्पस के लिए शरण स्थली बने हुए हैं। इन थर्ड पार्टी एप स्टोर पर हैकर फेक एप बनाकर डाल देते हैं। जिसके बाद जब यूजर्स इन्हें डाउन लोड करते हैं। यूजर्स की सारी जानकारी इन एप को बनाने वाले हैकर्स के पास पहुंच जाती है। आजकल हम अपने स्मार्टफोन से मोबाइल बैंकिंग व अन्य बैंकिंग गतिविधियां भी करते हैं। पर्सनल डाटा किसी हैकर के हाथ में जाना मुसीबत बन सकता है। म्यूचअल फंड और बीमा संबधित कार्य भी मोबाइल के जरिए करना बहुत खतरनाक साबित ह७ो सकता है।

सावधान!
यदि आप गुगल प्ले स्टोर के जरिए एप डाउनलोड कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए क्योंकि एप की शक्ल में खतरनाक वायरस आपके स्मार्टफोन में जगह बना रहे हैं। एक सेक्युरिटी रिसर्च में पता चला कि है फेसबुक, व्हाट्सअप, कैंडीक्रश, सागा, टिव्टर, और के आफीशिसल एप बनाकर लोगों को धोखा दिया जा रहा है। क माल की बात यह है कि ऐसे फर्जी एप आॅरिजनल एप्प की तरह ही काम कर रहे हैं। सामान्य तौर तो कोई फर्जी एप और आफीशिसल एप में भेद ही नहीं कर सकता है। हलाकि पिछले दिनों गूगल ने फर्जी एप्स पर बड़ी कार्रवाई करते हुए प्ले स्टोर से करीब 7 लाख एप्स को हटा दिए हैं। अधिकतर हटाया गया एप्स ऐसे थे  जो एंड्रॉयड यूजर्स को वायरस से या किसी अन्य प्रकार से नुकसान पहुंचाते थे।

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