Chhattisgarh

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कांकेर जिले के बांदे अंचल से निकला कोरोना का संदिग्ध मरीज

Date : 26-May-2020
पखांजुर- कांकेर जिले के बांदे थाना क्षेत्र के अंतर्गत पाडेंगा गाँव मे एक संदिग्ध व्यक्ति जिसे कोरोना होने की जानकारी प्राप्त होते ही स्थानीय प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम मध्यरात्रि बांदे की ओर रवाना हुई है, परलकोट क्षेत्र में कोरोना मरीज का पहला संदिग्ध मामला की खबर से लोगो मे हड़कंप मचा हुआ है।
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मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने बूढ़ा तलाब की साफ -सफाई व्यवस्था की अवलोकन किया ,एजाज की पीठ थपथपाई

Date : 26-May-2020
रायपुर:- मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज दोपहर राजधानी रायपुर के बूढ़ातालाब का साफ-सफाई के बाद अवलोकन कर सराहना की कहा कि हमारे पूर्वजों द्वारा बनवाए गए प्राचीन तालाब शहर की सुंदरता की पहचान हैं। बूढ़ातालाब सहित शहर के अन्य तालाबों को भी सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनकी साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। तालाबों को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए जनभागीदारी जरूरी है। तालाबों के आसपास के मोहल्लों में लोगों को इसके लिए जागरूक करना होगा । एजाज ढेबर महापौर रायपुर के द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छ्ता मुहिम की काफी सराहना की ।
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रायपुर का ऐतिहासिक बूढ़ा तालाब बनेगा शहर के आकर्षण का केन्द्र, मुख्यमंत्री ने किया बूढ़ा तालाब का अवलोकन

Date : 26-May-2020

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि राजधानी रायपुर का ऐतिहासिक बूढ़ा तालाब विवेकानंद सरोवर आने वाले समय में तेलीबांधा तालाब जैसे ही शहर के आकर्षण का केन्द्र बनेगा। बूढ़ा तालाब की साफ-सफाई के बाद योजनाबद्ध रूप से बूढ़ा तालाब का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आज दोपहर राजधानी रायपुर के बूढ़ा तालाब का साफ-सफाई के बाद अवलोकन किया। श्री बघेल ने इस माह की 11 तारीख से नगर निगम रायपुर द्वारा बूढ़ा तालाब की साफ सफाई के लिए चलाए गए अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि दिन-रात मेहनत कर बूढ़ा तालाब से जलकुंभी और कचरा निकाला गया है। अब तालाब का पानी साफ दिख रहा है।
 ज्ञातव्य है कि नगर निगम रायपुर द्वारा 11 मई से 25 मई तक प्रतिदिन 6 घंटे बूढ़ा तालाब से जलकुंभी और गाद निकालने का काम किया गया। इस काम में 11 ट्रक और सात पोकलेन मशीनें लगाई गई थी, 85 सफाई कर्मी, 30 ठेका कर्मी, 50 मछुआरों सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों, दुर्गा कॉलेज के विद्यार्थियों की टीम ने श्रम दान किया। नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, नगर निगम रायपुर के महापौर एजाज ढेबर सहित पार्षदों ने भी तालाब की साफ-सफाई के लिए श्रम दान किया। अब तक बूढ़ा तालाब से लगभग 1100 डंपर से अधिक जलकुंभी और गाद बाहर निकाला जा चुका है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम रायपुर को इसके पहले रायपुर शहर को टैंकर मुक्त शहर बनाने के निर्देश दिए गए थे, जिसमें काफी हदतक सफलता मिली है। अब शहर में टैंकरों की संख्या काफी कम हो गई है। हमारे पूर्वजों द्वारा बनवाए गए प्राचीन तालाब शहर की सुंदर पहचान हैं। बूढ़ा तालाब सहित शहर के अन्य तालाबों को भी सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनकी साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। तालाबों को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए जनभागीदारी जरूरी है। तालाबों के आसपास के मोहल्लों में लोगों को इसके लिए जागरूक करना होगा। तालाबों में आने वाले सीवरेज के पानी को भी रोका जाना चाहिए।    

 

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छत्तीसगढ़ में लाख की खेती को मिलेगा कृषि का दर्जा: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दी सहमति

Date : 25-May-2020

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लाख की खेती को अब कृषि का दर्जा मिलेगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लाख की खेती को फायदेमंद बनाने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा इस संबंध में प्रस्तुत प्रस्ताव को उपयुक्त और किसानों के लिए लाभकारी मानते हुए अपनी सहमति प्रदान कर दी है। मुख्यमंत्री ने सहमति प्रदान करते हुए कृषि, वन और सहकारिता विभाग को समन्वय कर लाख और इसके जैसी अन्य लाभकारी उपज को कृषि में शामिल करने का प्रस्ताव मंत्रीपरिषद की अगली बैठक में रखने के निर्देश दिए है। प्रदेश में लाख की खेती को कृषि का दर्जा मिलने से लाख उत्पादन से जुड़े कृषकों को भी सहकारी समितियों से अन्य कृषकों की भांति सहजता से ऋण उपलब्ध हो सकेगा।  यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में लाख की खेती की अपार संभावनाएं है। यहां के कृषकों के द्वारा कुसुम, पलाश और बेर के वृक्षों में परंपरागत रूप से लाख की खेती की जाती रही है। परंतु व्यवस्थित एवं आधुनिक तरीके से लाख की खेती न होने की वजह से कृषकों को लागत के एवज में अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता है। वन विभाग ने लाख की खेती को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से इसे कृषि का दर्जा देने तथा कृषि सहकारी समितियों के माध्यम से अन्य कृषकों की तरह लाख की खेती करने वाले किसानों को भी ऋण उपलब्ध कराने का सुझाव देते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को प्रेषित प्रस्ताव को मान्य किए जाने का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने वन विभाग के इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति देने के साथ ही लाख उत्पादन एवं अन्य कोई ऐसी उपज जिसे कृषि की गतिविधियों में शामिल करना हो तो कृषि, वन एवं सहकारिता विभाग के साथ समन्वय कर प्रस्ताव मंत्रिपरिषद की आगामी बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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वनोपज संग्रहण से वनवासियों को रोजगार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिल रही गति,देश भर में हुए वनोपज संग्रहण में छत्तीसगढ़ की सर्वाधिक भागीदारी

Date : 25-May-2020

रायपुर।वनों को सहेजने में छत्तीसगढ राज्य आज पूरे़ देश में अग्रणी है। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान जहां पूरे देश में वन आधारित आर्थिक गतिविधियां जहां ठप रहीं, वहीं मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने इस दौरान अच्छी उपलब्धि हासिल की। लॉकडाउन के दौरान देशभर में हुए वनोपज संग्रहण में छत्तीसगढ़ की सर्वाधिक भागीदारी रही। वहीं, इस कार्य से वनवासियों को सलाना लगभग 2500 करोड़ की आय होने की संभावना है। ट्राईफेड से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक एक लाख क्विंटल वनोपजों का संग्रहण हो चुका है, जिसके लिए संग्राहकों को लगभग 30 करोड़ 20 लाख रुपए का भुगतान किया गया है। जहाँ कोरोना वायरस महामारी ने सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है, ऐसे समय में छत्तीसगढ़ में आदिवासी वनोपजों के संग्रहण से जीवकोपार्जन के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गतिमान बनाये हुए हैं।लॉक डाउन में जहाँ फैक्ट्रियों के बन्द होने से देश दुनिया में रोजगार की समस्या गहरा गयी है, वहीं छत्तीसगढ़ में इस संकट काल में भी वनवासियों को वनोपज और वनोषधि संग्रहण में रोजगार उपलब्ध हो रहा है, जिससे प्रदेश में आत्मनिर्भरता के साथ ही अर्थव्यवस्था के पहिये भी सुचारू रूप से चल रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन की नयी आर्थिक रणनीति वनों के जरिये इस बड़ी जनसंख्या के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। राज्य में हर साल 15 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण होता है। इससे 12 लाख 65 हजार संग्राहक परिवारों को रोजगार मिल रहा है। राज्य शासन द्वारा तेंदूपत्ता का मूल्य बढ़ाकर अब 4000 रुपए प्रति मानक बोरा कर दिया गया है, जिससे उन्हें 649 करोड़ रुपए का सीधा लाभ प्राप्त हो रहा है। 

 छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर अब 25 कर दी है। योजना के दायरे में लाए गए वनोपजों का कुल 930 करोड़ रुपए का व्यापार राज्य में होता है। वनोपजों की खरीदी 866 हाट बाजारों के माध्यम से की जा रही है। प्रदेश में काष्ठ कला विकास, लाख चूड़ी निर्माण, दोना पत्तल निर्माण, औषधि प्रसंस्करण, शहर प्रसंस्करण, बेल मेटल, टेराकोटा हस्तशिल्प कार्य आदि से 10 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन हो रहा है। वन विकास निगम के जरिये बैंम्बू ट्री गार्ड निर्माण, बांस फर्नीचर निर्माण, वनौषधि बोर्ड के जरिये औषधीय पौधों का रोपण आदि से करीब 14 हजार युवकों को रोजगार दिया जा रहा है। इसी तरह सीएफटीआरआई मैसूर की सहायता से महुआ आधारित एनर्जी बार, चाकलेट, आचार, सैनेटाइजर, आंवला आधारित डिहाइड्रेटेड प्रोड्क्ट्स, इमली कैंडी, जामुन जूस, बेल शरबत, बेल मुरब्बा, चिरौंजी एवं काजू पैकेट्स आदि के उत्पादन की योजना बनाई जा रही है। इससे 5 हजार से ज्यादा परिवारों को रोजगार मिलेगा। 
छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज संग्रहण से वनवासियों की आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जशपुर और सरगुजा जिलों में चाय बागान से हितग्राहियों को सीधे लाभ मिल रहा है। कोविड-19 के संकट काल में 50 लाख मास्क की सिलाई से एक हजार महिलाओं को रोजगार मिला है। चालू वर्ष में लगभग 12 हजार महिलाओं को इमली के प्राथमिक प्रसंस्करण से 3 करोड़ 23 लाख रूपए की अतिरिक्त आमदनी हुई है। वनवासियों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2019 में 10 हजार 497 वनवासियों की स्वयं की भूमि पर 18 लाख 56 हजार फलदार और लाभ कारी प्रजातियों के पौधे रोपे गए। वर्ष 2020 में वनवासियों की स्वयं की भूमि पर 70 लाख 85 हजार पौधे के रोपण का लक्ष्य है। लाख उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत् 164 उत्पादन क्षेत्रों में 36 हजार मुख्य कृषकों का चयन किया गया है। लगभग 800 हितग्राहियों द्वारा हर वर्ष लगभग 12 हजार क्विंटल वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन किया जा रहा है। 
इसके अलावा वन आधारित अन्य गतिविधियों से भी वन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर निर्मित हुए हैं। राज्य में वर्ष भर में भूजल संरक्षण, बिगड़े वनों का सुधार, कूप कटाई आदि गतिविधियों से 30 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित हो रहे है। वन रोपणी, नदी तट रोपण आदि से 20 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित हो रहे है। इसी तरह कैंपा के तहत नरवा विकास कार्यक्रम से करीब 50 लाख मानव दिवस रोजगार उपलब्ध मिलता है। आवर्ती चरई योजना, जैविक खाद उत्पादन, सीड बॉल का निर्माण आदि से 7 हजार से ज्यादा आदिवासी युवकों को रोजगार मिला है।

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बस्तर अंचल में पुरातन काल से चली आ रही है सोशल डिस्टेंसिंग की परंपरा , जिसे आज अपना रही है पूरी दुनिया

Date : 25-May-2020

नारायणपुर। पूरी दुनिया कोविड-19 की महामारी से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन कर रही है। लेकिन तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, उड़िसा एवं महाराष्ट्र की सरहदों से घिरा तथा लोक संस्कृतियों और सामाजिक परंपराओं का जीवन्त उदाहरण रहा छत्तीसगढ़ का दक्षिण वनांचल बस्तऱ क्षेत्र इस मामले में पुरातन काल से आगे रहा है। प्रकृति के उपहारों से घिरा समूचे बस्तर (Bastar) क्षेत्र में उन्मुक्त प्राकृतिक परिवेश के बीच दूर-दूर घरों में निवास का चलन वनांचल क्षेत्र में पुरातन काल से चली आ रही परंपरा का अहम् हिस्सा है, जो वर्तमान समय में कोरोना संक्रमण सामाजिक दूरी (social Distancing) के वैश्विक संदेश का पुरातन संकेत दर्शा रहा है। इस परम्परा के तहत अबूझमाड़िया जनजाति बाहुल्य क्षेत्र नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में निवास करने वाले जनजाति वर्ग के परिवार पुरातन काल से ही दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित वन भूमि पर निवास बनाकर अपना जीवनयापन करने की महत्वाकांक्षी परम्परा वर्तमान समय में उपयोगी साबित हो रही है।

जनजाति बाहुल्य जिलों के ग्रामीण क्षेत्र ( tribals in rural areas) में जनजाति वर्ग के आदिवासी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होकर भी वन भूमि पर निवास बनाकर निवास करते आ रहे हैं एवं इसी अरण्य स्थल में निवास के साथ जीवन का आनन्द उठाते रहे हैं। वर्तमान समय में दूर-दूर निवास की परम्परा सोशल डिस्टेसिंग (social Distancing)  के मूलभूत सिद्धान्त को पूरा करती नजर आ रही है। जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में आज भी सोशल डिस्टेसिंग पालन के जीवन्त उदाहरणों को आसानी से देखा जा सकता है।  
आदिवासी परिवार में यह चलन है कि परिवार में जितने भी बच्चे हैं उनका अपना अलग घर होता है। परिवार में बड़े बेटे की शादी होने के तुरन्त बाद ही अपने घर से थोड़ी दूरी पर उसका घर बना दिया जाता है और इसी प्रकार अन्य लड़कों का भी शादी के बाद उनका अपना घर अलग बना दिया जाता है। यह अपने आप में आत्मनिर्भर एवं स्वतंत्र जीवनयापन के साथ ही परम्परा सोशल डिस्टेंिसंग (tradition social distancing) को ही अभिव्यक्त करता रहा है। जनजाति क्षेत्र के ग्रामीण इलाको में आज भी अलग-अलग घर बनाकर रहते हैं।

सेहत के लिहाज से भी बेहतर व्यवस्था ( better system for health)
सेहत की दृष्टि से भी इनके घर अत्यन्त अनुकूल और सादगीपूर्ण हैं। घर के आगे खुला आँगन, चारों तरफ हरियाली ही हरियाली और सूरज की भरपूर रोशनी इनके स्वास्थ्य और शारीरिक दृष्टि से प्रभावकारी होते हैं। आज कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेसिंग का होना ही आवश्यक है। कोविड 19 के बचाव व सुरक्षा के लिए जहां सोशल डिस्टेसिंग को अपनाना सर्वाेपरि प्राथमिकता हो गई है और विश्व स्तर पर माना गया है कि मौजूदा परिप्रेक्ष्य में सामाजिक दूरी ही इस महामारी के प्रसार को रोकने का बेहतर और सहज-सरल एवं स्वीकार्य उपाय है। 

इस दृष्टि से जनजाति अंचलों को इस मायने में आदर्श परंपराओं का आदि संवाहक कहा जा सकता है कि उनमें संक्रमण को रोकने के लिए बचाव के उपाय सदियों से चले आ रहे हैं और यह सामाजिक परंपराओं का हिस्सा रहे हैं। मौजूदा समय में सोशल डिस्टेंसिंग के मामले में जनजाति क्षेत्रों को अग्रणी माना जा सकता है, आज पूरी दुनिया इसे अपना रही है। कोरोना वायरस के संक्रमण से जनजाति क्षेत्र के लोग भी अपनी जागरूकता दिखा रहे हैं तथा मास्क का उपयोग, साबुन से हाथ धोने सहित बहुत जरूरी होने पर ही अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं। 

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मवेशियों का सड़क पर जमावड़ा , हो सकता है बड़ी दुर्घटना

Date : 24-May-2020
पखांजूर :- पखांजुर कृषि प्रधान इलाका है । पशु पालन कृषकों की जीवनी का प्रमुख अंग है। अंचल में प्रायः रबी फसल की कटाई होने को है । भीषण गर्मी में पशुओं के लिए चारा जुटा पाना कृषकों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है । छत्तीसगढ़ सरकार ने तो नरूवा गरवा घुरूवा बॉडी योजना का शुभारंभ कर प्रदेश में नई क्रांति के सूत्रपात का दावा किया था लेकिन योजना का क्रियान्वन परलकोट में विफल नजर आ रहा है। बता दे कि स्टेट हाइवे क्रमांक 25 बड़े कापसी में इन दिनों मवेशियो का जमावड़ा देखने को मिल रहा है जो अक्सर हादसे को बुलावा देते नजर आते है । सरकार सड़क दुर्घटना को रोकने ,कमी लाने के लिए कई प्रकार से मुहीम चला रही है लेकिन बड़े कापसी के मुख्य सड़क मार्ग पर मवेशी सड़को पर आवारा घूम रहे है उन्हें सड़को पर विचरण करते देखा जा रहा है । रात्रि में सड़क पर अपनी पैठ जमाए मवेशी इस कदर बैठे रहते है मानो सड़क ही उनका गौठान हो । सड़क पर से गुजरने वाले वाहन चालकों को इससे बड़ी परेशानी हो रही है मवेशी हादसे को न्यौता देते नजर आ रहे है। ज्ञात हो कि सड़कों पर आवारा पशु भी विचरण करते नजर आ जाते है जो दिन भर खुले तौर पर सड़को पर मंडराते हादसों को न्यौता दे रहे हैं इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में कृषकों ने फसल काटने के बाद (मवेशियी) पशुओं को चारे के अभाव में खुला छोड़ा हैं । सड़क पर मवेशी सोये हुए है जिससे यातायात सेवा बाधित होती है कई साइकिल व बाइक चालक रात में मवेशी नही दिख पाने से दुर्घटना का शिकार हो चुके है उन्हें चोटे भी पहुची है। जो चिंता का विषय है मवेशी सड़को में खुले न घूमे ? इस मसले पर प्रशासन को विचार करना चाहिए । मवेशी जगह-जगह भटकते चारे की तलाश में घूम रहे है । गौर करने की बात है कि कूड़े करकट में पड़े पालीथिन को भी मवेशी निगल जाते है जो उनके लिए भी खतरा साबित हो सकता है प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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डीएफओ ने वन अपराध पर नकेल कसने वाले कापसी परिक्षेत्र अधिकारी दिनेश तिवारी की सराहना की

Date : 25-May-2020

पखांजुर।  पश्चिम वन मंडलाधिकारी आर.सी मेश्राम ने अपने दौरे में छत्तीसगढ और महाराष्ट्र सीमा को जोड़ने वाली बॉर्डर सील एरिया का निरीक्षण किया। बॉर्डर सील एरिया के मुख्य सड़क मार्ग को कोरोना आपदा के मद्देनजर सुरक्षा की दॄष्टि से पूरी तरह से अवरुद्ध करने को कहा । वन मण्डलाधिकारी आर सी मेश्राम ने तेदूपत्ता संग्रहण के लिए जंगलों में जाने के पूर्व लोगो को अच्छी तरह से पूरी तैयारी करने को कहा । तेंदूपत्ता संग्रहको को भीषण गर्मी में सावधानी बरतने , तेज धूप से बचने के लिए गमछा, टोपी चश्मा ,शीतल पेय , नंगे पैर जंगल मे जाने की मनाही के साथ जहरीले जीवो सर्प , बिच्छु देखने पर उनसे दूरी बनाकर सावधानी बरतने को कहा ।

छत्तीसगढ़ सीमा अंचल से ही तेंदूपत्ता की तोड़ाई करने के निर्देश- महाराष्ट्र सीमावर्ती जंगलों में प्रवेश कर तेंदूपत्ता संग्रहण नही करने की ग्रामीणों को समझाईश दी कि फड़ो में केवल छत्तीसगढ़ सीमा के वनों से ही तेंदूपत्ता का संग्रहण कार्य करवाया जाए।  मेश्राम ने लोगो को कोरोना बीमारी की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि देश मे कोरोना पॉजिटिव मरीजो की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। कांकेर जिले में कोरोना संक्रमित मरीज पाए जाने पर प्रशासन ने पूरी तरह से चौकन्ना है। मेश्राम ने सभी को सतर्कता बरतने को कहा साथ ही ग्रामीणो से परिचर्चा में बतलाया कि कोरोना बीमारी वैश्विक महामारी के रूप में उभर सामने आई है जो समूचे विश्व के लिए, मानव जाति के लिए खतरा साबित हो रहा हैं । इससे बचने के लिए सरकारी गाइड लाइन (दिशा निर्देशों ) का पालन करे । वन अपराध पर नकेल कसने वाले परिक्षेत्र अधिकारी की जमकर तारीफ - कापसी वन परिक्षेत्र अधिकारी दिनेश तिवारी द्वारा लगातार क्षेत्र में गश्ती करने से वन अपराधियो के हौसले पस्त हैं। वही वन अपराध के मामले में भारी गिरावट आई है। परिक्षेत्र अधिकारी के जस्बे को देखकर उनकी काफी सराहना की गई। वन मण्डलाधिकारी आर सी मेश्राम ने सभी वन कर्मियों का हौसला अफजाई किया। इस दौरान कुंजबिहारी पोया ,डीडी ताराम भरत सलाम, जेआर जुर्री , अरविंद वाल्डे ,यमुना सार्वा समेत अन्य उपस्थित रहे।

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जिले में अब तक 1060 प्रवासी श्रमिकों को किया गया क्वारेंटाइन,भानुप्रतापपुर में 112 में राज्य के बाहर से आये श्रमिकों में से 87 को क्वांरेंटाईन

Date : 24-May-2020
* * कांकेर 24 मई 2020:- प्रवासी श्रमिकों को राज्य सरकार द्वारा वापस लाने की अभियान चलाया गया, जिसके तहत देश के विभिन्न राज्यों से अब तक कांकेर जिले में 1060 श्रमिकों को वापस लाया गया है तथा ग्राम पंचायतों में क्वारेंटाइन किया जा रहा है। कलेक्टर श्री के.एल. चौहान ने जिले के सभी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा है कि क्वारेंटाइन सेंटर में प्रवासी मजदूरों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना करना न पडे़े इसके लिए पुख्ता इंतजाम करना सुनिश्चित करें। उन्होंने ग्राम पंचायतों में क्वारेंटाइन सेंटर बनाकर भोजन, पेयजल, विद्युत, दवाईयां, इत्यादि की व्यवस्था सुनिश्चित करने निर्देशित किये हैं। क्वारेंटाइन सेंटर में रखे गये श्रमिकों में से कांकेर विकासखण्ड के 140 से में पुरूष 120, महिला 18 एवं 02 बच्चे, कोयलीबेड़ा में 429 में से 395 पुरूष तथा 31 महिला और 03 बच्चे, नरहरपुर में 82 में से 47 पुरूष तथा 35 महिला, चारामा में 89 में से 62 पुरूष, 24 महिला एवं 03 बच्चें, दुर्गूकोंदल 116 में से 102 पुरूष तथा 14 महिला, अंतागढ़ 94 में से 77 पुरूष तथा 17 महिला, भानुप्रतापपुर में 112 में राज्य के बाहर से आये श्रमिकों में से 87 को क्वांरेंटाईन में रखा गया है। ग्राम पंचायतवार क्वारेंटाइन सेंटर बनाकर उन्हें आइसोलेट किया गया है तथा मास्क का उपयोग तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने की जानकारी देने कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
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दुकानों को प्रातः 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक खोलने की अनुमति

Date : 24-May-2020
  कांकेर ब्यूरो दिपेश साहा :- कांकेर 24 मई 2020 कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री के.एल. चौहान द्वारा अध्यक्ष चेम्बर ऑफ कामर्स, अध्यक्ष किराना संघ एवं व्यापारिक संगठन के प्रतिनिधियों द्वारा दिये गये सहमति के आधार पर नोवल कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति सामान्य होने अथवा आगामी आदेश पर्यन्त जिले में चिन्हित कन्टेमेंट जोन को प्रतिबंधित करते हुए सामान्य क्षेत्रों में दुकान एवं प्रतिष्ठानों के संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। जिसके अनुसार प्रातः 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक किराना, सब्जी, दुग्ध, मछली, मटन, चिकन, अण्डा इत्यादि दुकानों को खोलने तथा प्रातः 10 बजे से दोपहर 01 बजे तक कुलर, बिजली के पंखे एवं इलेक्ट्रॉनिक दुकानों को खोलने की अनुमति प्रदान की गई है। मेडिकल दुकान, पेट्रोल पंप एवं गैस एजेंसी जिला प्रशासन द्वारा पूर्व निर्धारित समय अनुसार संचालित की जाएगी। उपरोक्त दुकानों एवं प्रतिष्ठानों को सोशल, फिजीकल डिस्टेंशिंग एवं मास्क पहनने की अनिवार्यता के साथ निर्धारित समय तक ही संचालन की अनुमति दी गई है। नोवेल कोरोना प्रोटोकॉल के तहत् जारी आदेश का उल्लंघन किये जाने की दशा में ऐपिडेमिक एक्ट 1897 भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188, भारतीय दण्ड संहिता 1973 की धारा 144 (1), पब्लिक एक्ट 1949, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से 60 छत्तीसगढ़ ऐपीडेमिक डीसीजेज कोविड-19 विनियम 2020 एवं अन्य सुसंगत प्रावधानों के तहत् जैसे लागू हो, के अंतर्गत विधिक दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभावशील हो गया है।
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