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आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भारत पूर्ण रूप से सक्षम है : मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज आतंकवाद एक विचारधारा बन गया है जिसकी जड़ें हमारे पड़ोस में फलफूल रही हैं। आतंकवादियों को पनाह और प्रशिक्षण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भारत पूर्ण रूप से सक्षम है और हमने इसे करके दिखाया भी है।

मथुरा (एजेंसी )। प्रधानमंत्री ने कहा, कि आज आतंकवाद एक विचारधारा बन गया है जो किसी सरहद से नही बंधा है और एक वैश्विक समस्या है जिसकी जड़ें हमारे पड़ोस में विषबेल की तरह फलफूल रही हैं । इस विचारधारा को आगे बढ़ाने वालों, आतंकवादियों को पनाह और प्रशिक्षण देने वालों के खिलाफ आज पूरे विश्व को संकल्प लेने और कड़ी कार्रवाई की जरूरत हैं। उन्‍होंने कहा कि आतंकवादियों को पनाह और प्रशिक्षण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भारत पूर्ण रूप से सक्षम है और हमने इसे करके दिखाया भी है।

प्रधानमंत्री ने कहा, 'भारत अपने स्तर पर इस चुनौती से निपटने में पूरी तरह सक्षम है और हमने यह दिखाया भी है और आगे भी दिखायेंगे । आतंकवादी कानून को कड़ा करने का फैसला भी इसी दिशा में किया गया एक प्रयास है । अब संगठनों का नाम बदलकर अपने कारनामों को नही छुपा पायेंगे । समस्या चाहे आतंक की हो, प्रदूषण की हो, बीमारी की हो, हमें मिलकर इनको पराजित करना है। आइए, हम इसका संकल्प लें ।' 

मथुरा में मोदी ने बुधवार को राष्ट्रीय पशु रोग उन्मूलन कार्यक्रम लॉन्च किया। उन्होंने पशुओं के पैर और मुंह के रोगों को दूर करने और टीकाकरण की व्यवस्था कर, स्वास्थ्य से जुड़ी परियोजनाओं का लोकार्पण किया ।(भाषा)

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तिहाड़ की जेल नंबर सात में चिदंबरम, हल्के नाश्ते के साथ की दिन की शुरुआत

 नयी दिल्ली, (एजेंसी)। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का नया ठिकाना एशिया की सबसे बड़ी जेल के तौर पर पहचान रखने वाली तिहाड़ जेल है जहां उन्होंने बृहस्पतिवार को पहली रात काटी और शुक्रवार को अपने दिन की शुरुआत अहाते में टहलकर तथा चाय और दलिये के हल्के नाश्ते के साथ की।सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस नेता को बृहस्पतिवार को जेल में लाया गया और वह ज्यादा सो नहीं सके।सूत्रों ने बताया कि पूर्व मंत्री ने जेल के अहाते में टहलकर और कुछ धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के बाद सुबह करीब छह बजे चाय, दलिये और दूध का हल्का नाश्ता किया। उन्हें अखबार भी दिए गए।आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में एक अदालत ने उन्हें दो सप्ताह की न्यायिक हिरासत में भेजा है।उन्होंने बताया कि उनका वकील दोपहर में उनसे मुलाकात कर सकता है।जेल के अधिकारियों ने बताया कि कांग्रेस नेता को अलग कोठरी और वेस्टर्न शौचालय के अलावा कोई विशेष सुविधाएं नहीं मिलेगी। ये विशेष सुविधाएं उन्हें उनके अनुरोध पर अदालत ने दी हैं।अदालत ने उन्हें जेल में अपने साथ चश्मा, दवाएं ले जाने की अनुमति दी और निर्देश दिया कि उन्हें तिहाड़ जेल में अलग कोठरी में रखा जाए क्योंकि उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है।
अन्य कैदियों की तरह वह जेल के पुस्तकालय में जा सकते हैं और निश्चित अवधि के लिए टेलीविजन देख सकते हैं।सूत्रों ने बताया कि चिदंबरम ने आज हल्का नाश्ता किया। गत रात को उन्होंने जेल के मेन्यू के अनुसार रोटियां, दाल, सब्जी और चावल खाए।पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री चिदंबरम को राउज एवेन्यू में एक विशेष सीबीआई अदालत से बृहस्पतिवार को नीले रंग की पुलिस बस में जेल में लाया गया। यह अजीब इत्तेफाक है कि उन्हें जेल नंबर 7 में बंद किया गया है जहां उनका बेटा आईएनएक्स मीडिया मामले में ही पिछले साल 12 दिनों तक रहा था।अधिकारियों ने बताया कि जेल को पहले ही तैयार कर दिया गया था क्योंकि जेल अधिकारियों को आभास था कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के खिलाफ चल रहे अदालती मामलों के मद्देनजर उन्हें यहां लाया जा सकता है।जेल नंबर 7 में दरअसल वे कैदी रहते हैं जो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामलों का सामना करते हैं।मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को भी इस जेल में बंद किया गया है। ईडी अगस्ता वेस्टलैंड और एक बैंक धोखाधड़ी के मामले में उनकी जांच कर रही है। 

अधिकारियों ने बताया कि अभी तिहाड़ जेल में 17,400 कैदी हैं जिनमें करीब 14,000 विचाराधीन कैदी शामिल हैं।31 दिसंबर 2018 तक तिहाड़ जेल में 14,938 पुरुष और 530 महिलाएं बंद थी जो 31 दिसंबर 2017 के मुकाबले 2.20 प्रतिशत अधिक संख्या है।विचाराधीन कैदियों की संख्या बढ़ने के कारण यह बढ़ोत्तरी हुई है।तिहाड़ जेल में दिवंगत कांग्रेस नेता संजय गांधी, पूर्व जेएनयूएसयू नेता कन्हैया कुमार, राजद प्रमुख लालू यादव, उद्योगपति सुब्रत रॉय, गैंगस्टर छोटा राजन और चार्ल्स शोभराज, सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई हाई-प्रोफाइल कैदी रह चुके हैं। निर्भया सामूहिक दुष्कर्म के दोषी भी इसी जेल में बंद हैं। (भाषा)

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आप को गुड बॉय बोलने का समय आ गया : अलका लांबा

 नई दिल्ली, (एजेंसी)। कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से मुलाकात के कुछ दिनों बाद आप की असंतुष्ट विधायक अलका लांबा ने शुक्रवार को कहा कि अब आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का समय आ गया है।लांबा ने मंगलवार को सोनिया से मुलाकात की थी जिससे उनकी कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।लांबा ने शुक्रवार को ट्वीट किया, बा को आप को अलविदा कहने और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का समय गया है। मेरे लिए पिछले छह साल का सफ़र बड़े सबक सीखने वाला रहा। सभी का शुक्रिया। "चांदनी चौक से आप विधायक लांबा ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वे पार्टी छोड़ने और आगामी विधानसभा चुनाव निर्दलीय के रूप में लड़ने का मन बना चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि लांबा पिछले कुछ समय से आप विशेष रूप से पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कार्यशैली से नाराज़ चल रहे थे। केजरीवाल पर पार्टी में मनमानी करने का आरोप लगता है कि वह कई बार मुखर विरोध कर चुका है।
लांबा और आम आदमी पार्टी के बीच पिछले कुछ समय से टकराव की स्थिति जो शुरू हुई, वह किसी न किसी रूप में चलती रही है। लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्होंने अपने राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से जवाबदेही पूछा था। इसके बाद उन्हें पार्टी विधायकों के आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया गया था।
उन्होंने लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार करने से इनकार कर दिया था और उन्होंने केजरीवाल के रोडशो के दौरान मुख्यमंत्री की कार के पीछे चलने के लिए कहे जाने के बाद रोडशो में भाग नहीं लिया था।लांबा और आप के बीच सबसे पहले टकराव राजीव गांधी को दिए गए भारत रत्न सम्मान को वापस जाने के लिए संबंधित प्रस्ताव पारित करने के पार्टी के फैसले को लेकर हुआ था। लांबा ने पार्टी के प्रस्ताव पर आपत्तियां उठाई थीं।
उन्होंने दिसंबर 2018 में ट्वीट किया था कि आपने उन्हें प्रस्ताव का समर्थन करने को कहा, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया। लांबा ने कहा था कि वह इसके लिए किसी भी सजा का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक करियर कांग्रेस से शुरू किया था और आप में शामिल होने से पहले उन्होंने लगभग 20 साल विभिन्न भूमिकाओं में पार्टी की सेवा की। दिल्ली में अगले साल जनवरी में संभावित विधानसभा चुनाव के पहले लांबा ने आप छोड़ने की घोषणा कर कांग्रेस में एक बार फिर शामिल होने की अटकलों को हवा दे दी है।(भाषा)

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एनआरसी की अंतिम सूची जारी, 19 लाख से अधिक लोग सूची से बाहर

गुवाहाटी, (एजेंसी)। असम में बहुप्रतीक्षित नेशनल सिटिजन रजिस्टर यानि एनआरसी की अंतिम सूची शनिवार को जारी कर दी गई हैं ।  एनआरसी में 19 लाख से अधिक आवेदक अपना स्थान बनाने में विफल रहे। सूची से बाहर रखे गए इन आवेदकों का भविष्य अधर में लटक गया है क्योंकि एनआरसी असम में वैध भारतीय नागरिकों की पुष्टि से संबंधित है। इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने कोई दावा पेश नहीं किया था।अंतिम सूची में उन लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जो 25 मार्च 1971 से पहले असम के नागरिक हैं या उनके पूर्वज राज्य में रहते आए हैं।

एनआरसी के राज्य समन्वयक कार्यालय ने एक बयान में कहा कि 3,30,27,661 लोगों ने एनआरसी में शामिल होने के लिए आवेदन दिया था। इनमे से 3,11,21,004 लोगों को दस्तावेजों के आधार पर एनआरसी में शामिल किया गया है और 19,06,657 लोगों को बाहर कर दिया गया है।जिन लोगों के नाम एनआरसी से बाहर रखे गये है, वे इसके खिलाफ 120 दिन के भीतर विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) में अपील दर्ज करा सकते हैं। यदि वे न्यायाधिकरण के फैसलों से संतुष्ट नहीं होते हैं तो वे उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का रूख कर सकते है।असम सरकार पहले ही कह चुकी है जिन लोगों को एनआरसी सूची में शामिल नहीं किया गया उन्हें किसी भी स्थिति में हिरासत में नहीं लिया जाएगा, जब तक एफटी उन्हें विदेशी ना घोषित कर दे।

शामिल किए गए लोगों की पूरक सूची एनआरसी सेवा केंद्रों (एनएसके), उपायुक्त के कार्यालयों और क्षेत्राधिकारियों के कार्यालयों में उपलब्ध है, जिसे लोग कामकाज के घंटों के दौरान देख सकते हैं।
सूची जारी किये जाने की सूचना मिलने के बाद सैकड़ों की संख्या में लोग कार्यालयों के बाहर जमा होना शुरू हो गए। जिन लोगों के नाम सूची में थे, वे प्रसन्न थे और जिनके नाम नहीं थे, वे दुखी थे। सत्तारूढ़ भाजपा, विपक्षी कांग्रेस और आल असम स्टूडेंट यूनियन ने कहा है कि वे अंतिम नागरिकता सूची से असंतुष्ट हैं । असम सरकार में भाजपा के वरिष्ठ मंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि 1971 से पहले बांग्लादेश से भारत आए कई शरणार्थियों को एनआरसी सूची से बाहर निकाला गया।

असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने आरोप लगाया कि केन्द्र त्रुटिरहित एनआरसी लाने के लिए अपने कर्तव्य को निभाने में विफल रही है और असम के लोग ‘‘असहाय’’ महसूस कर रहे है।असम सरकार ने शनिवार को दावा किया कि कई वास्तविक भारतीय एनआरसी की अंतिम सूची से छूट गये है लेकिन उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि उनके पास एफटी में अपील करने का विकल्प उपलब्ध है।असम के संसदीय कार्य मंत्री चन्द्रमोहन पटवारी ने कहा कि सरकार एनआरसी सूची में स्थान नहीं पाने वाले भारतीय नागरिकों को कानूनी मदद उपलब्ध करायेगी।
पटवारी ने कहा, ‘‘एक बात निश्चित है कि कई वास्तविक भारतीय एनआरसी में छूट गये है। हालांकि उन्हें घबराने और चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। वे एफटी में अपील कर सकते हैं।’’ 
एनआरसी सूची जारी होने के मद्देनजर असम में स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए गुवाहाटी और दिसपुर समेत राज्य के कई क्षेत्रों में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगाई गई थी और शहरों तथा गांवों की सड़कों पर राज्य पुलिस के कर्मियों के अलावा केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों के 20 हजार से अधिक जवान गश्त कर रहे थे। (भाषा)

 

 

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मच्छर जनित बीमारी की रोकथाम के लिए केजरीवाल ने की डेंगू के खिलाफ विशेष अभियान की घोषणा

नई दिल्ली, (एजेंसी )। मच्छर जनित बीमारी की रोकथाम के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने  डेंगू के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करने की घोषणा की जिसमें लोगो  की व्यापक भागीदारी होगी। केजरीवाल ने कहा कि मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए वह खुद अपने मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के साथ कार्य करेंगे।केजरीवाल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, '' मैं दिल्ली के लोगों से अपील करता हूं कि वह एक सितंबर से 15 नवंबर तक प्रत्येक रविवार को अपना 10 मिनट का समय यह सुनिश्चित करने में दें कि उनके घर या आसपास में पानी को जमा होने से रोके क्यूकि  ऐसे पानी में ही डेंगू वाले मच्छर (dengue mosquito) पैदा होते हैं। '' मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल में मोहल्ला क्लीनिक और फीवर क्लीनिक स्थापित करने से डेंगू और चिकनगुनिया के मामलों में 80 प्रतिशत कमी आई है। उन्होंने कहा, यह यह हम यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि इस साल डेंगू और चिकनगुनिया से किसी की मौत न हो। ''(भाषा)

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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश शरद बोबड़े ने मुकदमे से पहले मध्यस्थता पर दिया जोर

नागपुर,( एजेंसी )। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश शरद बोबड़े ने मुकदमा दायर करने से पूर्व मध्यस्थता की जरूरत और लोगों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए कानूनी सहायता प्रणाली की भूमिका पर जोर दिया।
वह यहां 17वें अखिल भारतीय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में शनिवार को बोल रहे थे।न्यायाधीश बोबड़े ने कहा कि अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के बीच मध्यस्थता के जरिए 1,07,587 मामले निपटाए गए। गुजरात में हाल ही में एक दिन में 24,000 मामले निपटाए गए।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मध्यस्थता करने पर हमारा जोर है। इसलिए हम ‘मुकदमे से पूर्व मध्यस्थता’ करने की अनिवार्यता पर विचार कर रहे हैं जो केवल वाणिज्यिक विवादों तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए।’’ 
उन्होंने कहा कि देश में विधि विश्वविद्यालयों में मध्यस्थता में डिग्री, डिप्लोमा पाठ्यक्रम होने चाहिए।उन्होंने कहा, ‘‘समाज के कई वंचित वर्गों को यह तक नहीं पता है कि उनके पास कानून एवं कल्याणकारी योजनाओं के तहत कानूनी अधिकार हैं।’’ आंकड़ों का हवाला देते हुए न्यायाधीश बोबड़े ने कहा कि देश में करीब 80 फीसदी लोगों को कानूनी सहायता लेने का अधिकार है लेकिन यह आबादी के 0.05 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने राज्य विधि सेवा प्राधिकरणों की उनके काम के लिए प्रशंसा की और कहा कि इसे देशभर में उच्च न्यायालयों का सहयोग मिल रहा है। (भाषा)

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प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान के छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा- भूटान के छात्रों में असाधारण शक्ति और क्षमता है

थिम्पू (एजेंसी )। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को भूटान के रॉयल विश्वविद्यालय ’में छात्रों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भूटान के छात्रों में अतिरिक्त चीजें करने की असाधारण शक्ति और क्षमता है, जो कि पीढ़ी पीढ़ी को प्रभावित करेगा।प्रधानमंत्री ने इस दौरान अंतरिक्ष और डिजिटल भुगतान जैसे नए क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग का प्रस्ताव भी रखा।भूटान के विश्वविद्यालय रॉयल विश्वविद्यालय ’में छात्रों को संबोधित करते हुए मोदी ने उन्हें लगन से काम करने और हिमालयी देश को ऊंचाइयों पर ले जाने को कहा।


मोदी ने कहा, ने आज विश्व आज पहले से कई और अवसर मुहैया और है। आप में अतिरिक्त चीजें करने की शक्ति और क्षमता है, जो खोज पीढ़ी को प्रभावित करेगी। अपनी रुचि को पहचानें और पूरे जुनून के साथ किपर काम करें। ''मोदी ने कहा, ने कि जैसा कि भूटान अपने प्रयासों में उच्च स्तर पर है, आपके 1.3 अरब भारतीय मित्र केवल आपको अपमान और खुशी के साथ नहीं दिखेंगे। बल्कि वे आपके साथी बनेंगे, आपका साथ देंगे और आप सीखेंगे। ''प्रधानमंत्री ने आगे आने वाली कई कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा, का का हर चुनौती का उन्नत समाधान निकालने के लिए, उबरने के लिए हमारे पास अपना युवा मस्तिष्क है। ''उन्होंने छात्रों से कहा, ‘सीमा कोई सीमा आपको रोक नहीं पाई गई। मैं कहता हूँ कि मैं चाहता हूँ कि युवा होने के लिए सही समय कोई भी नहीं हो सकता है। ''प्रधानमंत्री ने भारत के कई क्षेत्रों में ऐतिहासिक होने का सामना करने का जिक्र करते हुए कहा कि भारत स्कूलों, अंतरिक्ष से लेकर डिजिटल भुगतान, आपदा प्रबंधन तक नए मोर्चे पर बड़े पैमाने पर सहयोग करने को तैयार है।उन्होंने कहा, दक्षिण दक्षिण हमने दक्षिण एशिया उपग्रह के थिम्पू ग्राउंड स्टेशन का उद्घाटन किया और अपने अंतरिक्ष सहयोग का विस्तार किया। उपग्रहों के माध्यम से, टेली मेडिसिन, दूरस्थ शिक्षा, संसाधन मापन, मौसम की भविष्यवाणी और यहां तक ​​कि प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी के लाभ भी कई क्षेत्रों तक पहुंचेंगे। ''

भारत के चंद्रयान -2 मिशन और अंतरिक्ष कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि भूटान भी अपने उपग्रह हासिल करने की दिशा में जा रहा है।भूटान की दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचे मोदी ने शनिवार को भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल अग्रचुक, भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग से मुलाकात की थी।मई में दूसरी बार सरकार का गठन करने के बाद मोदी का यह पहला विदेश दौरा है। (भाषा)

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देशवासियों ने जो काम दिया, हम उसे पूरा कर रहे हैं : प्रधानमंत्री

नयी दिल्ली, (एजेंसी )। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर  गुरुवार की सुबह लालकिले पर तिरंगा फहराया और देश को संबोधित किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा की तीनो सेनाओ को एक साथ चलना होगा। तीनो सेनाओ को तालमेल बढ़ाने के लिए  ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ’ (सीडीएस) का पद की महत्वपूर्ण घोषणा की और साथ ही देश में जनसंख्या नियंत्रण और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की जरूरत पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हम समस्याओं को टालते भी नहीं और पालते भी नहीं हैं। अब न टालने का समय है और न ही पालने का समय है। सरकार बनने के 70 दिनों भीतर संसद के दोनों सदनों ने अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने के निर्णय का अनुमोदन किया।’’ मोदी ने कहा, ‘‘देशवासियों ने जो काम दिया, हम उसे पूरा कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन को लेकर हर सरकार ने कुछ न कुछ प्रयास किया, लेकिन इच्छा के अनुरूप परिणाम नहीं मिले हैं।मोदी ने कहा, ‘‘ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सपनों को पंख लगें, यह हम सबकी जिम्मेदारी है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जो लोग अनुच्छेद 370 की वकालत कर रहे हैं उनसे देश पूछ रहा है कि अगर यह इतना ही महत्वपूर्ण था तो इसे आप लोगों ने स्थायी क्यों नहीं किया, अस्थायी क्यों बनाए रखा ?’’ उन्होंने कहा, ‘‘नयी सरकार को 10 हफ्ते भी नहीं हुए हैं, लेकिन इस छोटे से कार्यकाल में सभी क्षेत्रों में हर प्रयास को बल दिया गया है, हम पूरे समर्पण के साथ सेवारत हैं।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने देश में जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताते हुए कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए नयी चुनौतियां पेश करता है।मोदी ने कहा कि इससे निपटने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों को कदम उठाने चाहिए।


उन्होंने कहा कि बेतहाशा बढ़ रही जनसंख्या चिंता का विषय है और समाज का एक छोटा वर्ग जो अपना परिवार छोटा रखता रहा है, वह सम्मान का हकदार है। जो वे कर रहे हैं वह एक प्रकार की देशभक्ति है। यह पहली बार है जब मोदी ने जनसंख्या का मुद्दा उठाया है। हालांकि भाजपा के कुछ नेता इस पर खुल कर बात करते हैं।मोदी ने कहा कि अगर जनता शिक्षित और स्वस्थ है तो देश भी शिक्षित और स्वस्थ बनेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने देश में आबादी नियंत्रण के लिये छोटे परिवार पर जोर दिया और कहा कि आबादी समृद्ध हो, शिक्षित हो तो देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।तीन तलाक के खिलाफ हाल ही में संसद से पारित विधेयक का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया गया और आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ने के लिए आतंकवाद विरोधी कानून में संशोधन भी किया गया।लाल किले के प्राचीर से दिए गए भाषण में मोदी ने महत्वपूर्ण ऐलान करते हुए कहा कि सेना के तीन अंगों के प्रमुख के तौर पर ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ’ (सीडीएस) का पद सृजित किया जाएगा।

मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से अपने भाषण में यह महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सीडीएस सेना के तीनों अंगों के बीच तालमेल सुनिश्चित करेगा और उन्हें प्रभावी नेतृत्व देगा।प्रधानमंत्री ने लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने की जरूरत पर एक बार फिर जोर देते हुए कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा देश को महान बनाने के लिए आवश्यक है।मोदी ने कहा, ‘‘आज देश में 21वीं सदी की आवश्यकता के मुताबिक, आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण हो रहा है। देश के बुनियादी ढांचे के निर्माण पर 100 लाख करोड़ रुपए का निवेश करने का फैसला किया गया है।’’  (भाषा) 

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जम्मू-कश्मीर में धारा 144 हटाने की याचिका पर SC का इनकार

नई दिल्ली, (एजेंसी ).जम्मू-कश्मीर में धारा 144 हटाने की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला संवेदनशील है. इसमें सरकार को वक्त मिलना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दो हफ्ते बाद मामले की सुनवाई करेंगे.इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि ये कब तक चलेगा. इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जैसी ही स्थिति सामान्य होगी, व्यवस्था भी सामान्य हो जाएगी. हम कोशिश कर रहे हैं कि लोगों को कम से कम असुविधा हो. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या आप स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं ? इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हम रोज समीक्षा कर रहे हैं. सुधार आ रहा है. उम्मीद है कि कुछ दिनों में हालात सामान्य हो जाएंगे.
सुनवाई के दौरान एजी ने कहा कि पिछले साल जुलाई में 40 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि इस बार किसी की भी मौत नहीं हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने बेहद गलत ढंग से याचिका दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी को नहीं पता कि कश्मीर क्या हो रहा है. सरकार पर विश्वास करना होगा. यह मामला बेहद संवेदनशील है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे पास वास्तविक तस्वीर होनी चाहिए, कुछ समय के लिए यह मामला रुकना नहीं चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस मामले की सुनवाई 2 सप्ताह बाद की जाएगी.
याचिकाकर्ता की वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि मूलभूत सुविधाओं को बहाल किया जाना चाहिए. कम से कम अस्पतालों में संचार सेवा को बहाल किया जाना चाहिए. इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि स्थिति संवेदनशील है. हम मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने पर काम कर रहे हैं.
गौरतलब है कि घाटी में अभी भी मोबाइल फोन, मोबाइल इंटरनेट और टीवी-केबिल पर रोक लगी हुई है. हालांकि, जम्मू में धारा 144 को पूरी तरह से हटा दिया गया है और कुछ क्षेत्रों में फोन की सुविधा चालू की गई है. अभी सिर्फ मोबाइल कॉलिंग की सुविधा ही शुरू की गई है.

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कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के फैसले का चीन समर्थन करता है : कुरैशी

इस्लामाबाद, (एजेंसी )। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने शनिवार को कहा कि कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जाने के पाकिस्तान के फैसले का चीन पूरी तरह समर्थन करता है।कुरैशी आनन-फानन में शुक्रवार को चीन गए थे जहां उन्होंने विदेश मंत्री वांग यी और चीन के अन्य शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर बातचीत की।  चीन से वापसी के बाद इस्लामाबाद में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कुरैशी ने कहा, ‘‘मैंने चीन को बताया कि हम मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाना चाहते हैं। मैं देश को बताना चाहता हूं कि उन्होंने पूर्ण समर्थन का वादा किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘चीन ने न्यूयॉर्क में अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे इस मुद्दे पर पाकिस्तानी राजनयिकों के साथ बातचीत करें।’’ कुरैशी ने कहा कि चीन चाहता है कि कश्मीर मसले का समाधान संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के अनुसार किया जाए । (भाषा) 

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