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पवार की नजर अब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश पर : संगठन को करेंगे मजबूत

लखनऊ (एजेंसी)।  महाराष्ट्र में भाजपा को पटखनी देने के बाद राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की नजर अब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश पर है और वह पार्टी का संगठन यहां मजबूत करना चाहते हैं।प्रदेश कार्यकर्ता सम्मेलन में पवार ने कहा, 'देश में अलग तरह का माहौल है। जिनके हाथ में हुकूमत है, उन्होंने आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज किया। देश के इतिहास में उत्तर प्रदेश का अलग स्थान है। स्वतंत्रता आंदोलन में काफी बड़ा योगदान है। सबसे ज्यादा नेता उत्तर प्रदेश से पैदा हुए। उत्तर प्रदेश में देश को सही रास्ते पर लाने की क्षमता है।' 
उन्होंने कहा, '2004 में जब मैं कृषि मंत्री बना तो शपथ के पहले ही दिन एक फाइल मेरे सामने आयी। उसमें था कि देश के पास गेहूं नहीं है और आयात करना होगा। यह जानकर बहुत दु:ख हुआ। इतना बड़ा देश और हमें अमेरिका, ब्राजील या आस्ट्रेलिया से गेहूं खरीदने की नौबत आये। फाइल दूर रख दी। अगले दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का फोन आया कि गोदामों में अनाज काफी कम है। जितनी जल्दी संभव हो, इंतजाम किया जाए। मैंने अपने मन के खिलाफ विदेश से गेहूं मंगाया। तभी तय किया कि स्थिति में बदलाव लाना है। 2014 में मैंने कृषि मंत्री का पद छोडा तो खुशी इस बात की थी कि 2004 में आयात किया था लेकिन 2014 में जब छोड़ा तो भारत दुनिया के देशों को अनाज भेजने वाला देश बन गया। भारत ने पहले नंबर पर चावल पैदा किया और निर्यात किया। दूसरे नंबर पर गेहूं पैदा किया और निर्यात किया।पवार ने कहा कि आज किसान आत्महत्या करने पर मजबूत हो रहे हैं। खाद और तेल के दाम बढ़ रहे हैं। बैंकों और साहूकारों का पैसा वापस नहीं कर पाने की स्थिति में बेइज्जती से बचने के लिए कभी कभी किसान आत्महत्या कर लेते हैं। यह देश का दुर्भाग्य है।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में हर क्षेत्र में बेरोजगारी बढी। बेरोजगारी रहेगी तो मुल्क में शांति कैसे रहेगी। आज का नौजवान रोजी रोटी के लिए दूसरे राज्यों का रूख करता है। ये स्थिति ठीक नहीं है। सरकार जवाब दे कि बेरोजगारी कैसे जाएगी।
राकांपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा एक के बाद राज्यों में चुनाव हारती गयी, चाहे मध्य प्रदेश हो, राजस्थान हो या दिल्ली। दिल्ली में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी जुटे। भाजपा नेताओं की डयूटी लगायी गयी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री लगाये गये । लेकिन दिल्ली की जनता ने दिखाया कि देश में बदलाव की शुरूआत हुई है। (भाषा)

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गृह मंत्री अमित शाह से की मुलाकात

नयी दिल्ली (एजेंसी )। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बुधवार को मुलाकात की।हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में केजरीवाल के कामकाज संभालने के बाद यह उनकी शाह के साथ पहली बैठक है। यह बैठक करीब 20 मिनट तक शाह के आवास पर चली। पहले यह बैठक गृह मंत्रालय में होनी थी।
केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘ माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी से मुलाकात की। काफी सार्थक और अच्छी बैठक रही। दिल्ली से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। हम दोनों ही इस बात पर सहमत हुए कि दिल्ली के विकास के लिए हम साथ काम करेंगे।’’ 
शाह ने विधानसभा चुनाव के दौरान केजरीवाल पर आक्रामक निशाना साधा था। इस चुनाव में हालांकि भाजपा सिर्फ आठ सीटें ही जीत पाई और आम आदमी पार्टी के खाते में 62 सीटें आईं। (भाषा)

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जम्मू-कश्मीर: पुलवामा में मुठभेड़ में हिजबुल के तीन आतंकवादी ढेर

श्रीनगर (एजेंसी )।  जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल इलाके में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन के तीन आतंकवादी मारे गए। मारे गए आतंकवादियों में संगठन का एक स्वयंभू कमांडर भी शामिल है।पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के बारे में सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों ने मंगलवार देर रात त्राल में तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई।पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा कि त्राल क्षेत्र में अभियान में हिजबुल मुजाहिदीन के तीन आतंकवादी मारे गए।सिंह ने कहा कि मारे गए आतंकवादियों की पहचान जहांगीर अहमद वानी, राजा उमर मकबूल और सदात अहमद के रूप में हुयी है। वानी ने हम्माद के मारे जाने के बाद क्षेत्र में संगठन की कमान संभाली थी।
उन्होंने बताया कि मुठभेड़ स्थल से दो एके राइफल, एक पिस्तौल और दो हथगोले सहित अन्य हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं।डीजीपी ने कहा कि पिछले महीने से विभिन्न मुठभेड़ों में 23 आतंकवादियों का सफाया किया गया है। (भाषा) 

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छत्तीसगढ़ में आईटी, आयुर्वेद और सर्विस इंडस्ट्री में निवेश की बेहतर संभावनाएं : मुख्यमंत्री

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अमेरिका प्रवास के दौरान न्यूयॉर्क में कांसुलेट जनरल ऑफ इंडिया में यूएस इण्डिया स्ट्रेटिजिक पार्टनरशिप फोरम के साथ एक बिजनेस मीटिंग में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ में आईटी, इलेक्ट्रानिक्स, बायोे फ्यूल, टेक्सटाईल, फार्मा, आयुर्वेद और सर्विस इंडस्ट्री में निवेश की बेहतर संभावनाएं मौजूद है। उन्होंने राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कांसुलेट जनरल संदीप चक्रबर्ती ने मीटिंग की औपचारिक शुरूआत की।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने उद्बोधन में छत्तीसगढ़ और राज्य सरकार के नवाचारों और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी । उन्होंने छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए इन सेक्टरों में निवेश हेतु उपस्थित निवेशकों को आमंत्रित किया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़, उड़ीसा और झारखंड तीन ऐसे राज्य हैं जहां लोहा, कोयला और बाक्साइट है। हमारे छत्तीसगढ़ में हीरा भी है लेकिन उसकी खुदाई अभी शुरू नहीं हुई है।
श्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधन पर्याप्त मात्रा में है। हमारे यहां कोर सेक्टर में बहुत से उद्योग हैं। यहां पहले साढे 4 हजार मेगावाट विद्युत का उत्पादन होता था जो बढ़कर 22 हजार मेगावाट हो चुका है। यहां से गोवा, तेलंगाना, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट सहित अनेक राज्यों को बिजली की आपूर्ति की जाती है। उन्होंनेे कहा कि हमारे यहां सीमेंट प्लांट बहुत हैं। कोरबा जहां कोल ब्लाक भी है। यह जिला अकेले दस हजार मेगावाट विद्युत का उत्पादन करता है। यहां एल्युमिनियम प्लांट भी है। श्री बघेल ने राज्य की भौगोलिक, प्राकृतिक संसाधनों, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विशेषताओं की विस्तार से जानकारी देते हुए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। इस मौके पर छत्तीसगढ़ राज्य पर बनी फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

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आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भारत पूर्ण रूप से सक्षम है : मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज आतंकवाद एक विचारधारा बन गया है जिसकी जड़ें हमारे पड़ोस में फलफूल रही हैं। आतंकवादियों को पनाह और प्रशिक्षण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भारत पूर्ण रूप से सक्षम है और हमने इसे करके दिखाया भी है।

मथुरा (एजेंसी )। प्रधानमंत्री ने कहा, कि आज आतंकवाद एक विचारधारा बन गया है जो किसी सरहद से नही बंधा है और एक वैश्विक समस्या है जिसकी जड़ें हमारे पड़ोस में विषबेल की तरह फलफूल रही हैं । इस विचारधारा को आगे बढ़ाने वालों, आतंकवादियों को पनाह और प्रशिक्षण देने वालों के खिलाफ आज पूरे विश्व को संकल्प लेने और कड़ी कार्रवाई की जरूरत हैं। उन्‍होंने कहा कि आतंकवादियों को पनाह और प्रशिक्षण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भारत पूर्ण रूप से सक्षम है और हमने इसे करके दिखाया भी है।

प्रधानमंत्री ने कहा, 'भारत अपने स्तर पर इस चुनौती से निपटने में पूरी तरह सक्षम है और हमने यह दिखाया भी है और आगे भी दिखायेंगे । आतंकवादी कानून को कड़ा करने का फैसला भी इसी दिशा में किया गया एक प्रयास है । अब संगठनों का नाम बदलकर अपने कारनामों को नही छुपा पायेंगे । समस्या चाहे आतंक की हो, प्रदूषण की हो, बीमारी की हो, हमें मिलकर इनको पराजित करना है। आइए, हम इसका संकल्प लें ।' 

मथुरा में मोदी ने बुधवार को राष्ट्रीय पशु रोग उन्मूलन कार्यक्रम लॉन्च किया। उन्होंने पशुओं के पैर और मुंह के रोगों को दूर करने और टीकाकरण की व्यवस्था कर, स्वास्थ्य से जुड़ी परियोजनाओं का लोकार्पण किया ।(भाषा)

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तिहाड़ की जेल नंबर सात में चिदंबरम, हल्के नाश्ते के साथ की दिन की शुरुआत

 नयी दिल्ली, (एजेंसी)। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का नया ठिकाना एशिया की सबसे बड़ी जेल के तौर पर पहचान रखने वाली तिहाड़ जेल है जहां उन्होंने बृहस्पतिवार को पहली रात काटी और शुक्रवार को अपने दिन की शुरुआत अहाते में टहलकर तथा चाय और दलिये के हल्के नाश्ते के साथ की।सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस नेता को बृहस्पतिवार को जेल में लाया गया और वह ज्यादा सो नहीं सके।सूत्रों ने बताया कि पूर्व मंत्री ने जेल के अहाते में टहलकर और कुछ धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के बाद सुबह करीब छह बजे चाय, दलिये और दूध का हल्का नाश्ता किया। उन्हें अखबार भी दिए गए।आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में एक अदालत ने उन्हें दो सप्ताह की न्यायिक हिरासत में भेजा है।उन्होंने बताया कि उनका वकील दोपहर में उनसे मुलाकात कर सकता है।जेल के अधिकारियों ने बताया कि कांग्रेस नेता को अलग कोठरी और वेस्टर्न शौचालय के अलावा कोई विशेष सुविधाएं नहीं मिलेगी। ये विशेष सुविधाएं उन्हें उनके अनुरोध पर अदालत ने दी हैं।अदालत ने उन्हें जेल में अपने साथ चश्मा, दवाएं ले जाने की अनुमति दी और निर्देश दिया कि उन्हें तिहाड़ जेल में अलग कोठरी में रखा जाए क्योंकि उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है।
अन्य कैदियों की तरह वह जेल के पुस्तकालय में जा सकते हैं और निश्चित अवधि के लिए टेलीविजन देख सकते हैं।सूत्रों ने बताया कि चिदंबरम ने आज हल्का नाश्ता किया। गत रात को उन्होंने जेल के मेन्यू के अनुसार रोटियां, दाल, सब्जी और चावल खाए।पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री चिदंबरम को राउज एवेन्यू में एक विशेष सीबीआई अदालत से बृहस्पतिवार को नीले रंग की पुलिस बस में जेल में लाया गया। यह अजीब इत्तेफाक है कि उन्हें जेल नंबर 7 में बंद किया गया है जहां उनका बेटा आईएनएक्स मीडिया मामले में ही पिछले साल 12 दिनों तक रहा था।अधिकारियों ने बताया कि जेल को पहले ही तैयार कर दिया गया था क्योंकि जेल अधिकारियों को आभास था कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के खिलाफ चल रहे अदालती मामलों के मद्देनजर उन्हें यहां लाया जा सकता है।जेल नंबर 7 में दरअसल वे कैदी रहते हैं जो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामलों का सामना करते हैं।मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को भी इस जेल में बंद किया गया है। ईडी अगस्ता वेस्टलैंड और एक बैंक धोखाधड़ी के मामले में उनकी जांच कर रही है। 

अधिकारियों ने बताया कि अभी तिहाड़ जेल में 17,400 कैदी हैं जिनमें करीब 14,000 विचाराधीन कैदी शामिल हैं।31 दिसंबर 2018 तक तिहाड़ जेल में 14,938 पुरुष और 530 महिलाएं बंद थी जो 31 दिसंबर 2017 के मुकाबले 2.20 प्रतिशत अधिक संख्या है।विचाराधीन कैदियों की संख्या बढ़ने के कारण यह बढ़ोत्तरी हुई है।तिहाड़ जेल में दिवंगत कांग्रेस नेता संजय गांधी, पूर्व जेएनयूएसयू नेता कन्हैया कुमार, राजद प्रमुख लालू यादव, उद्योगपति सुब्रत रॉय, गैंगस्टर छोटा राजन और चार्ल्स शोभराज, सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई हाई-प्रोफाइल कैदी रह चुके हैं। निर्भया सामूहिक दुष्कर्म के दोषी भी इसी जेल में बंद हैं। (भाषा)

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आप को गुड बॉय बोलने का समय आ गया : अलका लांबा

 नई दिल्ली, (एजेंसी)। कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से मुलाकात के कुछ दिनों बाद आप की असंतुष्ट विधायक अलका लांबा ने शुक्रवार को कहा कि अब आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का समय आ गया है।लांबा ने मंगलवार को सोनिया से मुलाकात की थी जिससे उनकी कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।लांबा ने शुक्रवार को ट्वीट किया, बा को आप को अलविदा कहने और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का समय गया है। मेरे लिए पिछले छह साल का सफ़र बड़े सबक सीखने वाला रहा। सभी का शुक्रिया। "चांदनी चौक से आप विधायक लांबा ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वे पार्टी छोड़ने और आगामी विधानसभा चुनाव निर्दलीय के रूप में लड़ने का मन बना चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि लांबा पिछले कुछ समय से आप विशेष रूप से पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कार्यशैली से नाराज़ चल रहे थे। केजरीवाल पर पार्टी में मनमानी करने का आरोप लगता है कि वह कई बार मुखर विरोध कर चुका है।
लांबा और आम आदमी पार्टी के बीच पिछले कुछ समय से टकराव की स्थिति जो शुरू हुई, वह किसी न किसी रूप में चलती रही है। लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्होंने अपने राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से जवाबदेही पूछा था। इसके बाद उन्हें पार्टी विधायकों के आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया गया था।
उन्होंने लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार करने से इनकार कर दिया था और उन्होंने केजरीवाल के रोडशो के दौरान मुख्यमंत्री की कार के पीछे चलने के लिए कहे जाने के बाद रोडशो में भाग नहीं लिया था।लांबा और आप के बीच सबसे पहले टकराव राजीव गांधी को दिए गए भारत रत्न सम्मान को वापस जाने के लिए संबंधित प्रस्ताव पारित करने के पार्टी के फैसले को लेकर हुआ था। लांबा ने पार्टी के प्रस्ताव पर आपत्तियां उठाई थीं।
उन्होंने दिसंबर 2018 में ट्वीट किया था कि आपने उन्हें प्रस्ताव का समर्थन करने को कहा, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया। लांबा ने कहा था कि वह इसके लिए किसी भी सजा का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक करियर कांग्रेस से शुरू किया था और आप में शामिल होने से पहले उन्होंने लगभग 20 साल विभिन्न भूमिकाओं में पार्टी की सेवा की। दिल्ली में अगले साल जनवरी में संभावित विधानसभा चुनाव के पहले लांबा ने आप छोड़ने की घोषणा कर कांग्रेस में एक बार फिर शामिल होने की अटकलों को हवा दे दी है।(भाषा)

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एनआरसी की अंतिम सूची जारी, 19 लाख से अधिक लोग सूची से बाहर

गुवाहाटी, (एजेंसी)। असम में बहुप्रतीक्षित नेशनल सिटिजन रजिस्टर यानि एनआरसी की अंतिम सूची शनिवार को जारी कर दी गई हैं ।  एनआरसी में 19 लाख से अधिक आवेदक अपना स्थान बनाने में विफल रहे। सूची से बाहर रखे गए इन आवेदकों का भविष्य अधर में लटक गया है क्योंकि एनआरसी असम में वैध भारतीय नागरिकों की पुष्टि से संबंधित है। इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने कोई दावा पेश नहीं किया था।अंतिम सूची में उन लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जो 25 मार्च 1971 से पहले असम के नागरिक हैं या उनके पूर्वज राज्य में रहते आए हैं।

एनआरसी के राज्य समन्वयक कार्यालय ने एक बयान में कहा कि 3,30,27,661 लोगों ने एनआरसी में शामिल होने के लिए आवेदन दिया था। इनमे से 3,11,21,004 लोगों को दस्तावेजों के आधार पर एनआरसी में शामिल किया गया है और 19,06,657 लोगों को बाहर कर दिया गया है।जिन लोगों के नाम एनआरसी से बाहर रखे गये है, वे इसके खिलाफ 120 दिन के भीतर विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) में अपील दर्ज करा सकते हैं। यदि वे न्यायाधिकरण के फैसलों से संतुष्ट नहीं होते हैं तो वे उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का रूख कर सकते है।असम सरकार पहले ही कह चुकी है जिन लोगों को एनआरसी सूची में शामिल नहीं किया गया उन्हें किसी भी स्थिति में हिरासत में नहीं लिया जाएगा, जब तक एफटी उन्हें विदेशी ना घोषित कर दे।

शामिल किए गए लोगों की पूरक सूची एनआरसी सेवा केंद्रों (एनएसके), उपायुक्त के कार्यालयों और क्षेत्राधिकारियों के कार्यालयों में उपलब्ध है, जिसे लोग कामकाज के घंटों के दौरान देख सकते हैं।
सूची जारी किये जाने की सूचना मिलने के बाद सैकड़ों की संख्या में लोग कार्यालयों के बाहर जमा होना शुरू हो गए। जिन लोगों के नाम सूची में थे, वे प्रसन्न थे और जिनके नाम नहीं थे, वे दुखी थे। सत्तारूढ़ भाजपा, विपक्षी कांग्रेस और आल असम स्टूडेंट यूनियन ने कहा है कि वे अंतिम नागरिकता सूची से असंतुष्ट हैं । असम सरकार में भाजपा के वरिष्ठ मंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि 1971 से पहले बांग्लादेश से भारत आए कई शरणार्थियों को एनआरसी सूची से बाहर निकाला गया।

असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने आरोप लगाया कि केन्द्र त्रुटिरहित एनआरसी लाने के लिए अपने कर्तव्य को निभाने में विफल रही है और असम के लोग ‘‘असहाय’’ महसूस कर रहे है।असम सरकार ने शनिवार को दावा किया कि कई वास्तविक भारतीय एनआरसी की अंतिम सूची से छूट गये है लेकिन उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि उनके पास एफटी में अपील करने का विकल्प उपलब्ध है।असम के संसदीय कार्य मंत्री चन्द्रमोहन पटवारी ने कहा कि सरकार एनआरसी सूची में स्थान नहीं पाने वाले भारतीय नागरिकों को कानूनी मदद उपलब्ध करायेगी।
पटवारी ने कहा, ‘‘एक बात निश्चित है कि कई वास्तविक भारतीय एनआरसी में छूट गये है। हालांकि उन्हें घबराने और चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। वे एफटी में अपील कर सकते हैं।’’ 
एनआरसी सूची जारी होने के मद्देनजर असम में स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए गुवाहाटी और दिसपुर समेत राज्य के कई क्षेत्रों में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगाई गई थी और शहरों तथा गांवों की सड़कों पर राज्य पुलिस के कर्मियों के अलावा केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों के 20 हजार से अधिक जवान गश्त कर रहे थे। (भाषा)

 

 

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मच्छर जनित बीमारी की रोकथाम के लिए केजरीवाल ने की डेंगू के खिलाफ विशेष अभियान की घोषणा

नई दिल्ली, (एजेंसी )। मच्छर जनित बीमारी की रोकथाम के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने  डेंगू के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करने की घोषणा की जिसमें लोगो  की व्यापक भागीदारी होगी। केजरीवाल ने कहा कि मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए वह खुद अपने मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के साथ कार्य करेंगे।केजरीवाल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, '' मैं दिल्ली के लोगों से अपील करता हूं कि वह एक सितंबर से 15 नवंबर तक प्रत्येक रविवार को अपना 10 मिनट का समय यह सुनिश्चित करने में दें कि उनके घर या आसपास में पानी को जमा होने से रोके क्यूकि  ऐसे पानी में ही डेंगू वाले मच्छर (dengue mosquito) पैदा होते हैं। '' मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल में मोहल्ला क्लीनिक और फीवर क्लीनिक स्थापित करने से डेंगू और चिकनगुनिया के मामलों में 80 प्रतिशत कमी आई है। उन्होंने कहा, यह यह हम यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि इस साल डेंगू और चिकनगुनिया से किसी की मौत न हो। ''(भाषा)

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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश शरद बोबड़े ने मुकदमे से पहले मध्यस्थता पर दिया जोर

नागपुर,( एजेंसी )। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश शरद बोबड़े ने मुकदमा दायर करने से पूर्व मध्यस्थता की जरूरत और लोगों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए कानूनी सहायता प्रणाली की भूमिका पर जोर दिया।
वह यहां 17वें अखिल भारतीय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में शनिवार को बोल रहे थे।न्यायाधीश बोबड़े ने कहा कि अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के बीच मध्यस्थता के जरिए 1,07,587 मामले निपटाए गए। गुजरात में हाल ही में एक दिन में 24,000 मामले निपटाए गए।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मध्यस्थता करने पर हमारा जोर है। इसलिए हम ‘मुकदमे से पूर्व मध्यस्थता’ करने की अनिवार्यता पर विचार कर रहे हैं जो केवल वाणिज्यिक विवादों तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए।’’ 
उन्होंने कहा कि देश में विधि विश्वविद्यालयों में मध्यस्थता में डिग्री, डिप्लोमा पाठ्यक्रम होने चाहिए।उन्होंने कहा, ‘‘समाज के कई वंचित वर्गों को यह तक नहीं पता है कि उनके पास कानून एवं कल्याणकारी योजनाओं के तहत कानूनी अधिकार हैं।’’ आंकड़ों का हवाला देते हुए न्यायाधीश बोबड़े ने कहा कि देश में करीब 80 फीसदी लोगों को कानूनी सहायता लेने का अधिकार है लेकिन यह आबादी के 0.05 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने राज्य विधि सेवा प्राधिकरणों की उनके काम के लिए प्रशंसा की और कहा कि इसे देशभर में उच्च न्यायालयों का सहयोग मिल रहा है। (भाषा)

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