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भारतीय-अमेरिकी चिकित्सक व समुदाय के नेता अजय लोढ़ा का कोरोना संक्रमण से निधन

Date : 24-Nov-2020

न्यूयॉर्क (एजेंसी)। भारतीय-अमेरिकी चिकित्सक एवं समुदाय के नेता अजय लोढ़ा का कोविड-19 संबंधी परेशानियों के चलते निधन हो गया। भारतीय मूल के अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन (एएपीआई) के पूर्व अध्यक्ष का पिछले आठ महीने से ‘क्लीवलैंड क्लिनिक’ में कोविड-19 संबंधी परेशानियों का इलाज चल रहा था और 21 नवम्बर को उन्होंने आखिरी सांस ली। वह 58 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी स्मिता, एक बेटा अमित और बेटी श्वेता हैं।

न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने ट्वीट किया, भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक प्रख्यात नेता डॉ. अजय लोढ़ा के निधन की खबर सुन बेहद दुखी हूं। वह हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे। उनकी मानवता, कृपालुता और समाज को उनका योगदान हमेशा सभी को प्रेरित करता रहेगा। एएपीआई के अध्यक्ष सुधाकर जोनलनागड्डा ने उन्हें एक दूरदर्शी नेता बताते हुए उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उनकी मृत्यु एएपीआई के इतिहास का सबसे काला दिन है। एएपीआई की नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. अनुपमा सुधाकर, जयपुर फुट यूएसए के अध्यक्ष प्रेम भंडारी, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित कई लोगों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। लोढा ने उत्तरी अमेरिका के राजस्थान एसोसिएशन और राजस्थान मेडिकल एलुमनी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और न्यूयॉर्क में फ्लशिंग अस्पताल में अनुसंधान विभाग के निदेशक के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी।

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पूरे इंग्लैंड में लागू लॉकडाउन को 2 दिसंबर को समाप्त करने की घोषणा की

Date : 22-Nov-2020

लंदन (एजेंसी)। हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पूरे इंग्लैंड में लागू लॉकडाउन को दो दिसंबर को समाप्त करने की घोषणा की है। इतना ही नहीं इसे आंशिक रुप से क्षेत्र के आधार पर प्रतिबंध की व्यवस्था फिर से लागू करने की योजना बनाई है। ब्रिटेन में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या स्थिर होती हुई प्रतीत हो रही है और ऐसे में इस कदम पर विचार किया जा रहा है।

जॉनसन के कार्यालय ने शनिवार देर रात बताया कि सरकार इंग्लैंड में स्थानीय आधार पर प्रतिबंध की तीन स्तरों वाली प्रणाली फिर से लागू करने की योजना बना रही है। इस प्रणाली के तहत विभिन्न क्षेत्रों में संक्रमण की गंभीरता के आधार पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। जॉनसन के कार्यालय के बयान के अनुसार सरकार ने पांच नवंबर को इंग्लैंड में चार सप्ताह का लॉकडाउन लागू किया था।

कैबिनेट प्रतिबंध हटाने संबंधी योजना पर आज विचार करेगी और प्रधानमंत्री सोमवार को संसद को विस्तार से इसकी जानकारी देंगे। जॉनसन के कार्यालय ने नियामकों द्वारा वायरस के टीके को मंजूरी देने की स्थिति में अगले सप्ताह राष्ट्रव्यापी कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने की योजना की भी पुष्टि की है। सरकार टीका आने तक संक्रमण को काबू करने के लिए जांच की संख्या बढ़ाएगी।

आपको बता दे कि जॉनसन ने 31 अक्टूबर को इंग्लैंड के लिए घरों में रहने के नये नियमों की घोषणा की थी कि इंग्लैंड में पांच नवंबर से लगभग दो दिसंबर तक प्रतिबंध लागू रहेंगे। ब्रिटेन में कोविड-19 संक्रमण के नए मामलों की संख्या में पिछले सात दिन में गिरावट आई है। इसमें पिछले सप्ताह की तुलना में इस सप्ताह 13.8 प्रतिशत कमी आई है। जिसके चलते ये बड़ा फैसला लिया गया है।

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कोरोना : दुनियाभर में पिछले 24 घंटे में मिले 6 लाख 59 हजार से भी ज्यादा नए कोरोना पॉजिटिव मरीज, वहीं 11 हजार 85 लोगों गवाई अपनी जान

Date : 21-Nov-2020

वाशिंगटन (एजेंसी)। दुनियाभर में कोरोना संकट बरकरार है। हर दिन रिकॉर्ड स्तर पर कोरोना संक्रमण के मामले आ रहे हैं और संक्रमितों की जान जा रही है। दुनिया के 218 देशों में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 6 लाख 59 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। वहीं 11,085 लोगों की मौत भी हुई है। इससे पहले सबसे ज्यादा 6.60 लाख केस 13 नवंबर को आए थे और 19 नवंबर को 11,239 संक्रमितों की मौत हुई थी। बीते दिन दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में सबसे ज्यादा मौत हुई है। इसके बाद इटली, फ्रांस, पोलांड, मैक्सिको, भारत, ब्राजील, ब्रिटेन में मौत के सबसे ज्यादा केस आए।

00 4 करोड़ संक्रमित ठीक हुए
दुनिया में अबतक पांच करोड़ 78 लाख 95 हजार कोरोना मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, अब तक 13 लाख 76 हजार 806 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 4 करोड़ 97 हजार से ज्यादा लोग ठीक भी हो चुके हैं। 1 करोड़ 64 लाख 20 हजार लोग अभी भी कोरोना संक्रमित हैं, उनका इलाज चल रहा है।

कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की लिस्ट में अमेरिका सबसे ऊपर है। सबसे ज्यादा तेजी से मामले भी अमेरिका में बढ़ रहे हैं। अमेरिका में पिछले 24 घंटों में दो लाख से ज्यादा नए केस आए हैं। इसके बाद भारत का नंबर आता है। भारत में 90 लाख कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, यहां पिछले 24 घंटे में 46 हजार मामले बढ़े हैं। वहीं कोरोना से तीसरे सबसे ज्यादा प्रभावित देश ब्राजील में 24 घंटे में 37 हजार मामले दर्ज किए गए।
अमेरिका: केस- 12,274,726, मौत- 260,283
भारत: केस- 9,050,613, मौत- 132,764
ब्राजील: केस- 6,020,164, मौत- 168,662
फ्रांस: केस- 2,109,170, मौत- 48,265
रूस: केस- 2,039,926, मौत- 35,311
स्पेन: केस- 1,589,219, मौत- 42,619
यूके: केस- 1,473,508, मौत- 54,286
अर्जेंटीना: केस- 1,359,042, मौत- 36,790
इटली: केस- 1,345,767, मौत- 48,569
कोलंबिया: केस- 1,233,444, मौत- 34,929

दुनिया के 14 देशों में 20 हजार से ज्यादा कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें से 9 देश ऐसे हैं, जहां 40 हजार से ज्यादा मौत हुई है। दुनिया में 56 फीसदी लोगों की जान सिर्फ छह देशों में गई है। ये देश हैं- अमेरिका, ब्राजील, भारत, मैक्सिको, ब्रिटेन, इटली. वहीं दुनिया के 20 देशों में कोरोना संक्रमितों की संख्या 5 लाख के पार पहुंच चुकी है. इनमें इटली, पेरू, साउथ अफ्रीका, ईरान, जर्मनी, पोलांड और चिली भी शामिल है।

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा संक्रमितों के मामले में दूसरे नंबर पर है। यही नहीं सबसे ज्यादा मौत के मामले में तीसरे नंबर पर है. साथ ही भारत ऐसा छठा देश है जहां सबसे ज्यादा एक्टिव केस हैं। सबसे ज्यादा एक्टिव केस अमेरिका, फ्रांस, इटली, बेल्जियम और रूस में है।

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अमेरिका में एक मॉल के अंदर हुई गोलीबारी, आठ लोग घायल

Date : 21-Nov-2020

विस्कॉन्सिन (एजेंसी)। अमेरिका में एक मॉल के अंदर गोलीबारी हुई है। घटना में आठ लोग घायल हुए हैं. पुलिस के मुताबिक यह घटना शुक्रवार को विस्कॉन्सिन में स्थित एक मॉल में हुई। स्थानीय पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि घटना के बाद से गोलीबारी करने वाला शूटर लापता है। उसकी तलाश जारी है। घटना विस्कॉन्सिन राज्य के ववातोसा में मिल्वौकी के पास मेटफेयर मॉल में हुई है।

फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI)और ने ट्वीट किया है कि उनके अधिकारी स्थानीय पुलिस की कार्रवाई का समर्थन करते हुए घटनास्थल पर थे। वहीं, स्थानीय ववातोसा पुलिस ने एक बयान में कहा है कि जैसे ही सूचना पाकर पुलिसकर्मी वहां पहुंचे शूटर गायब हो चुका था। पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में शूटर की पहचान की गई है। वह 20 से 30 साल का एक श्वेत युवक है। पुलिस ने बताया कि घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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पाकिस्तान को लगा फ्रांस की तरफ से करारा झटका, फ्रांस ने किया फाइटर जेट्स अपग्रेड करने से किया इनकार

Date : 20-Nov-2020

पेरिस (एजेंसी)। पाकिस्तान को फ्रांस की तरफ से करारा झटका लगा है। दरअसल, पाकिस्तान ने हाल ही में अपने मिराज फाइटर जेट, एयर डिफेंस सिस्टम और अगोस्टा 90बी पनडुब्बियों को अपग्रेड करने के लिए फ्रांस से मदद मांगी थी। हालांकि अब फ्रांस ने पाकिस्तान की मदद करने से इनकार कर दिया है।

दरअसल, फ्रांस की सरकार ने फैसला किया है कि वो पाकिस्तान के मिराज-3 और मिराज-5 फाइटर जेट को भी अपग्रेड नहीं करेगा। फ्रांस की सरकार का ये फैसला पाकिस्तान के लिए एक बड़े झटके के समान है। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान के पास फ्रांस की फर्म दसौल्ट एविएशन के 150 मिराज फाइटर जेट हैं और अब इनमें से आधे ही काम करने के लायक हैं।
जानकारों का मानना है कि हाल ही में पाकिस्तान ने पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को समर्थन देने के मामले में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आलोचना की थी। जिसके बाद अब फ्रांस की ओर से पाकिस्तान का अनुरोध ठुकरा दिया गया है और पाकिस्तान की मदद करने से फ्रांस ने इनकार कर दिया है।

इसके अलावा फ्रांस ने कतर से भी कहा है कि वो पाकिस्तान की मदद न करे। फ्रांस ने कतर से कहा है कि वो पाकिस्तानी मूल के टेक्नीशियन्स को अपने फाइटर जेट पर काम न करने दे। फ्रांस ने कहा है कि वे फाइटर के बारे में तकनीकी जानकारी पाकिस्तान को लीक कर सकते हैं। वहीं ये फाइटर जेट भारत के डिफेंस की भी सबसे अहम कड़ी हैं। इसके अलावा पहले भी पाकिस्तान चीन के साथ संवेदनशील जानकारियां शेयर करता रहा है।

00 अनुरोध ठुकराया
बता दें कि पाकिस्तान पिछले कई दशकों से मिराज फाइटर जेट खरीदता रहा है। वहीं पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इनकी मरम्मत भी की जाती है। इसके अलावा फ्रांस की ओर से पाकिस्तान की फ्रेंच-इटालियन एयर डिफेंस सिस्टम को भी अपग्रेड करने के अनुरोध को ठुकरा दिया गया है।

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इटली में लोगों को जनवरी से कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाना होगा शुरू, भारत में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की कोरोना वैक्सीन के लिए फरवरी तक करना होगा इंतजार

Date : 20-Nov-2020

मिलान (एजेंसी)। कोरोना वायरस महामारी से बचने के लिए तमाम देशों की सरकारे लोगों को जल्द से जल्द वैक्सीन मुहैया करने की कोशिश में जुटी हुई हैं। इटली अपने लोगों को जनवरी से कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाना शुरू कर देगा। कोरोना वायरस आपातकाल के लिए इटली के विशेष अयुक्त ने बताया कि जो लोग वैक्सीन लगावाना चाहते हैं उन सभी लोगों को अगले साल सितंबर तक इसकी डोज मिल जाएगी। वहीं, भारत में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की कोरोना वैक्सीन अगले साल फरवरी से उपलब्ध होगी।

विशेष आयुक्त डोमेनिको अर्कुरी ने कहा कि यूरोपीय संघ के खरीद कार्यक्रम के माध्यम से जनवरी के मध्य तक फाइजर वैक्सीन की 3.4 मिलियन (34 लाख) खुराक मिल जाएगी, जो इटली के 6 कोरोड़ लोगों में से 16 लाख लोगों को वैक्सीन की दो खुराक देने के लिए प्रयाप्त है। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग लोगों और ज्यादा जोखिम वाले व्यक्तियों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी।

अर्कुरी ने कहा, `हम नहीं जानते हैं कि कितने लोग वैक्सीन लगवाना चाहते हैं, लेकिन हमारी आबादी के एक महत्वपूर्ण हिस्से को साल की पहली छमाही में या तीसरे तिमाही के अंत तक किसी भी कीमत पर टीका लगा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय की सिफारिशों के आधार पर सरकार संसद को सूचित करेगी जिसमें विभिन्न श्रेणियों के नागरिकों को खुराक दी जानी है।

00 47 हजार से अधिक लोगों की मौत
इटली में वैक्सीन लगाने के लिए आवश्यक सीरिंज और सुइयों के लिए शुक्रवार को बोली प्रक्रिया खोलने की योजना बनाई गई है। वैक्सीन लगाने के लिए तीन प्रकार की सीरिंज और कम से कम छह प्रकार की सुइयों की आवश्यकता होती है। ब्रिटेन के बाद यूरोप में इटली में कोरोना महामारी की वजह से 47,800 से अधिक लोगों की मौत हो चुकि है।

00 भारत में फरवरी तक वैक्सीन
वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ ने कहा कि कोरोना वैक्सीन अगले साल फरवरी से उपलब्ध होगी। वैक्सीन सबसे पहले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और बुजुर्ग लोगों को लगाई जाएगी। आम लोगों के लिए इसे अप्रैल से उपलब्ध करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संभवत: 2024 तक सभी भारतीयों का टीकाकरण कर दिया जाएगा। हर भारतीय को वैक्सीन उपलब्ध कराने में दो से तीन साल का समय लगेगा। इसका कारण सिर्फ आपूर्ति संबंधी बाध्यताएं नहीं हैं।

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अमेरिका-कनाडा में 24 घंटे में बिकीं ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ की 9 लाख प्रतियां

Date : 19-Nov-2020

वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की किताब ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ की अमेरिका और कनाडा में पहले 24 घंटे में 8,90,000 प्रतियां बिकी और इसके साथ ही यह आधुनिक इतिहास में सबसे अधिक बिकने वाला राष्ट्रपति संस्मरण बनने को तैयार है। पहले दिन हुई बिक्री ‘पेंगुइन रैंडम हाउस’ के लिए रिकॉर्ड है, जिसमें किताब को खरीदने के लिए पहले हुई बुकिंग, ई-बुक और ऑडियो की बिक्री भी शामिल है।

‘पेंगुइन रैंडम हाउस’ के प्रकाशक डेविड ड्रेक ने कहा -हम पहले दिन की बिक्री से खुश हैं। यह उस व्यापक उत्साह को दर्शाता है, जो पाठकों को (पूर्व)राष्ट्रपति ओबामा की बहुप्रतीक्षित पुस्तक के लिए था।’ ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ अभी ‘एमेजन’ और ‘बार्न्स एंड नोबल’ (डॉट कॉम) पर शीर्ष पर है ‘बार्नस एंड नोबल’ के सीईओ जेम्स डोंट ने कहा कि पहले दिन इसकी 50, 000 से अधिक प्रतियां बिकी और 10 दिन में 10 लाख प्रतियां बिकने की उम्मीद है।

ओबामा के 768 पृष्ठों के संस्मरण की कीमत 45 डॉलर है। किताब ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ में ओबामा ने 2008 के चुनाव प्रचार अभियान से लेकर राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले कार्यकाल के अंत में एबटाबाद (पाकिस्तान) में अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मारने के अभियान तक की अपनी यात्रा का विवरण दिया है। इस किताब के दो भाग हैं, जिनमें से पहला मंगलवार को दुनियाभर में जारी हुआ।

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अमेरिका : चीन के पास अगला दलाई लामा चुनने का कोई धार्मिक आधार नहीं

Date : 19-Nov-2020

वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक ने कहा है कि चीन के पास अगला दलाई लामा चुनने का कोई धार्मिक आधार नहीं है और बौद्ध धर्म के तिब्बती अनुयायी सैकड़ों साल से अपना आध्यात्मिक नेता सफलतापूर्वक चुनते आए हैं। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अमेरिका के विशेष राजदूत (एम्बेसेडर एट लार्ज) सैमुएल डी ब्राउनबैक ने अक्टूबर में भारत की अपनी यात्रा को याद करते हुए एक कांफ्रेंस कॉल के दौरान कहा कि वह भारत के धर्मशाला में तिब्बती समुदाय से बात करने और उन्हें यह बताने गए थे कि अमेरिका चीन द्वारा अगला दलाई लामा चुने जाने के खिलाफ है। उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, उनके पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। उनके पास ऐसा करने का कोई धार्मिक आधार नहीं है। बौद्ध धर्म के तिब्बती अनुयायी सैकड़ों बरसों से अपना नेता सफलतापूर्वक चुनते आए हैं और उनके पास अब भी ऐसा करने का अधिकार है।

ब्राउनबैक ने कहा कि अमेरिका इस बात का समर्थन करता है कि धार्मिक समुदायों को अपना नेता चुनने का अधिकार है। उन्होंने कहा, इसमें अगले दलाई लामा भी शामिल हैं। ब्राउनबैक ने कहा, हमारा मानना है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का यह कहना सरासर गलत है कि उन्हें इसका (दलाई लामा चुनने का) अधिकार है। 14वें दलाई लामा (85) 1959 में तिब्बत से निर्वासित होकर भारत में रह रहे हैं। वह स्थानीय लोगों के विद्रोह पर चीनी कार्रवाई के बाद भारत आ गए थे। निर्वासन में रह रही तिब्बती सरकार हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से काम करती है। भारत में 1,60,000 से अधिक तिब्बती रहते हैं। ब्राउनबैक ने चीन पर धार्मिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा, इससे उन्हें आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मदद नहीं मिलेगी। ब्राउनबैक ने कहा कि चीन दुनिया को यह बताने की कोशिश कर रहा है कि यह आतंकवाद को रोकने की कोशिश है, लेकिन इससे वे और अधिक आतंकवादी पैदा करेंगे। उन्होंने कहा, आतंकवाद से निपटने का तरीका सभी को बंद करके रखना नहीं है। आतंकवाद से निपटने के लिए धार्मिक स्वतंत्रता देना आवश्यक है।

ब्राउनबैक ने चीन से अपील की कि वह उइगर, बौद्ध धर्म के तिब्बती अनुयायियों, इसाइयों और फालुन गोंग समेत विभिन्न आस्थाओं पर हमला करना बंद करे।

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बराक ओबामा ने पाकिस्तान सेना के आतंकी लिंक का किया बड़ा खुलासा

Date : 17-Nov-2020

वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि उन्होंने एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के ठिकाने पर छापा मारने के अभियान में पाकिस्तान को शामिल करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि यह खुला रहस्य था कि पाकिस्तान की सेना, खासकर उसकी खुफिया सेवा में कुछ तत्वों के तालिबान और संभवत: अलकायदा से संबंध थे और वे कई बार अफगानिस्तान और भारत के खिलाफ सामरिक पूंजी के तौर पर इनका इस्तेमाल करते थे।

ओबामा ने ए प्रोमिस्ड लैंड नामक अपनी किताब में राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल में एबटाबाद में मारे गए छापे की जानकारी दी है। अमेरिकी कमांडो के इस छापे में दुनिया का सर्वाधिक वांछित आतंकवादी लादेन दो मई, 2011 को मारा गया था। उन्होंने बताया कि इस अत्यधिक खुफिया अभियान का तत्कालीन रक्षा मंत्री रोबर्ट गेट्स और पूर्व उपराष्ट्रपति और मौजूदा निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने विरोध किया था। अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति ने बताया कि एबटाबाद में पाकिस्तानी सैन्य छावनी के बाहर एक पनाहगाह में लादेन के रहने की बात स्पष्ट हो जाने के बाद अलकायदा प्रमुख को मारने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि इस अभियान की गोपनीयता बनाए रखने की आवश्यकता ने चुनौती बढ़ा दी थी। ओबामा ने कहा, हम जानते थे कि यदि किसी को बिन लादेन के बारे में हमारे कदम की जरा सी भी भनक लग गई, तो मौका हमारे हाथ से चला जाएगा, इसी लिए पूरी संघीय सरकार में केवल कुछ ही लोगों को अभियान की योजना की जानकारी दी गई थी।

उन्होंने लिखा, हमारे सामने एक और रुकावट थी, हम भले ही कोई भी विकल्प चुनते, उसमें पाकिस्तान को शामिल नहीं किया जा सकता था। ओबामा ने कहा, हालांकि पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद विरोधी कई अभियानों में हमारे साथ सहयोग किया और अफगानिस्तान में हमारे बलों के लिए अहम आपूर्ति मार्ग मुहैया कराया, लेकिन यह खुला रहस्य था कि पाकिस्तान की सेना, खासकर उसकी खुफिया सेवाओं में कुछ तत्वों के तालिबान और संभवत: अलकायदा से भी संबंध थे। वे यह सुनिश्चित करने के लिए सामरिक पूंजी के तौर पर कभी-कभी उनका इस्तेमाल करते थे कि अफगान सरकार कमजोर बनी रहे और अफगानिस्तान पाकिस्तान के सबसे बड़े दुश्मन भारत के नजदीक न आने पाए।

उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान की सेना एबटाबाद परिसर से कुछ ही मील की दूरी पर थी, जिसके कारण इस बात की संभावना बढ़ गई थी कि पाकिस्तानियों को कुछ भी बताने से अभियान की जानकारी लीक हो सकती है। ओबामा ने लिखा कि वे एबटाबाद में भले ही कोई भी विकल्प चुनते, उन्हें सबसे खतरनाक तरीके से अपने सहयोगी के क्षेत्र में बिना अनुमति घुसना पड़ता और इससे राजनयिक संबंध भी दाव पर लगे थे और इसने जटिलताएं भी बढ़ा दी थीं। अंतिम चरणों में दो विकल्पों पर विचार किया गया कि हवाई हमला किया जाए या किसी विशेष मिशन को अधिकृत किया जाए, जिसके तहत एक टीम हेलीकॉप्टर से चोरी-छुपे पाकिस्तान जाएगी, परिसर पर छापा मारेगी और पाकिस्तानी पुलिस या सेना के प्रतिक्रिया देने से पहले वहां से निकल आएगी।

ओबामा और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने दूसरे विकल्प को चुना। ओबामा ने कहा कि इस अभियान के बाद उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई लोगों से फोन पर बात की, जिनमें से उनके लिए सबसे मुश्किल पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से बात करना था, जिन्हें पाकिस्तान की संप्रभुता के हनन के कारण आलोचनाओं का शिकार होना पड़ता। उन्होंने कहा, हालांकि मैंने जब उनसे बात की, तो उन्होंने बधाई दी और सहयोग देने का आश्वासन दिया।

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बराक ओबामा पुस्तक में लिखा, सोनिया ने मनमोहन सिंह को इसलिए चुना कि राहुल गांधी के लिए भविष्य में कोई चुनौती खड़ी न हो सके

Date : 17-Nov-2020

वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की किताब ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ एक हफ्ते में दूसरी बार चर्चा में है। किताब के एक हिस्से में सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राहुल गांधी का जिक्र है। ओबामा के मुताबिक, सोनिया ने मनमोहन सिंह को इसलिए प्रधानमंत्री बनाया, क्योंकि वो चाहती थीं कि राहुल गांधी के लिए भविष्य में कोई चुनौती खड़ी न हो सके।

ओबामा लिखते हैं- कई सियासी जानकार मानते हैं कि सोनिया ने मनमोहन को बहुत सोच समझकर पीएम बनाया। सिंह का कोई पॉलिटिकल बेस भी नहीं था। सोनिया नहीं चाहती थीं कि उनके 40 साल के पुत्र राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य को कोई खतरा हो। वे राहुल को कांग्रेस की कमान सौंपने के लिए भी तैयार कर रही थीं। चार दिन पहले इसी किताब (संस्मरण) का एक और हिस्सा सामने आया था। इसमें ओबामा ने कहा था- राहुल उस स्टूडेंट की तरह हैं, जो टीचर को इम्प्रेस करने के लिए तो उत्सुक (ईगर) है, लेकिन सब्जेक्ट का मास्टर होने के मामले में योग्यता या जुनून की कमी है। यह राहुल की कमजोरी है।

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