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बलूच विद्रोहियों के हमले में पाक सुरक्षाबलों चार जवानों की मौत, दो अन्य लोग घायल

Date : 27-Sep-2021

इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूच विद्रोहियों के हमले में अर्धसैनिक बल के कम से कम चार जवानों की मौत हो गई। दो अन्य लोग घायल हो गए। ‘बलूचिस्तान मुक्ति सेना’ (बीएलए) ने इस हमले की जिम्मेदारी भी ले ली है। 

पाकिस्तानी मीडिया ग्रुप डॉन के मुताबिक, हरनाई जिले के खोस्त क्षेत्र में शनिवार को ‘फ्रंटियर कोर’ (एफसी) के एक वाहन पर हमला हुआ। बताया गया है कि जब एफसी के सैनिक गश्त लगा रहे थे, तभी उनके वाहन पर आईईडी विस्फोटक से हमला किया गया। इसमें चार सैनिकों की मौत हो गई। इसके अलावा दो अधिकारियों के घायल होने की भी बात सामने आई है।  घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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नतीजों से पहले ही एरिन ओ’टूले ने मानी हार, एक बार फिर प्रधानमंत्री बनेंगे ट्रूडो

Date : 22-Sep-2021

टोरंटो (एजेंसी)। कनाडा में आम चुनावों के पूर्ण नतीजे आने से पहले ही कंजरवेटिव पार्टी के नेता एरिन ओ`टूले ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए हार को स्वीकार किया और लिबरल पार्टी के नेता व वर्तमान प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को जीत की बधाई दी। 

बता दें, कनाडा में समयसीमा से दो साल पहले हुए आम चुनावों के नतीजे आना शुरू हो गए हैं। इसमें लिबरल पार्टी 157 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कंजरवेटिव पार्टी 121 सीटों पर आगे है। ऐसे में लिबरल पार्टी चुनावों में सबसे ज्यादा सीट हासिल करने में कामियाब होते दिख रही है, जिससे साफ है कि जस्टिन ट्रूडो एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठेंगे। 

00 सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से दूर 

भले ही इन चुनावों में जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी सबसे ज्यादा सीट हासिल करने में कामियाब होते दिख रही हो। फिर भी वह बहुमत से काफी पीछे रह गई। ऐसे मे संसद में कानूनों को पारित कराने व सत्ता में बैठने के लिए उन्हें विपक्षी दलों का सहारा लेना होगा। हालांकि, वह इतनी सीट जरूर हासिल कर लेंगे कि उन्हें पद से हटाने का खतरा नहीं रहेगा। 

00 49 भारतीय उम्मीदवार भी रेस में 

कनाडा में इस बार भारतीय मूल के 49 उम्मीदवार चुनावी दौड़ में शामिल हैं। 2019 में हुए पिछले चुनाव में यह संख्या करीब 50 थी। तब 20 भारतवंशी संसद पहुंचे थे। इनमें 18 सिख नेता शामिल थे। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपनी 36 सदस्यीय कैबिनेट में चार भारतवंशी सांसदों को मंत्री के तौर पर जगह दी थी। इनमें तीन सिख और एक हिंदू नेता भी शामिल थीं। ऐसे में भारतीय मुद्दे भी इन चुनावी परिणामों पर खासा असर रखते हैं। 

00 25 प्रतिशत हैं भारतीय 

कनाडा में सबसे अधिक भारतीय ही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा की कुल जनसंख्या के करीब 25 प्रतिशत भारतीय वहां बसे हैं। 2019 में जस्टिप ट्रूडो ने 3.4 लाख लोगों को स्थायी निवासी का दर्जा दिया था। ऐसे में जस्टिन ट्रूडो को सबसे ज्यादा लाभ भारतीय समुदाय से ही होने की संभावना है।

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राजधानी काबुल से रॉकेट से हमला, आईएसआईएस.खुरासान पर शक

Date : 17-Sep-2021

काबुल (एजेंसी)। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुवार शाम एक साथ कई रॉकेट दागे गए। यह रॉकेट काबुल में स्थित एक पावर स्टेशन के पास दागे गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, एक पॉवर प्लान्ट को निशाना बनाए जाने की कोशिश की गई थी, लेकिन इससे किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना है कि चमतलाह इलेक्ट्रिक सब स्टेशन को निशाना बनाया गया था, लेकिन हमलावरों का निशाना चूक गया। अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि इस पॉवर प्लान्ट को निशाना क्यों बनाया गया। तालिबान के कुछ लोग घटना के बाद यहां पहुंचे। पूर्व पुलिस अफसरों को भी स्पॉट पर बुलाया गया।

किसी भी संगठन ने अब तक हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन माना जा रहा है कि हमलावर शहर की इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई बंद करके शायद किसी दूसरी जगह हमला करना चाहते थे।

00 आईएसआईएस-खुरासान पर शक

रॉकेट हमले का शक आईएसआईएस-खुरासान ग्रुप पर जताया जा रहा है। इसी आतंकी संगठन ने 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट पर हमला किया था। इसमें 13 अमेरिकी सैनिकों समेत 170 लोगों की मौत हो गई थी। आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इसकी जिम्मेदारी ली थी। यह हमला ऐसे समय में हुआ था जब अमेरिकी सेना अफगानिस्तान से बाहर निकल रही थी। इस हमले के खिलाफ अमेरिका ने भी आतंकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए थे, जिसमें कुछ आतंकी मारे गए थे।

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पाकिस्तान चल रहा दोहरी चाल, मजबूत करने होंगे भारत के साथ संबंध : एंटनी ब्लिंकेन

Date : 14-Sep-2021

वाशिंगटन (एजेंसी)। पाकिस्तान और तालिबान के बीच गहरी होती दोस्ती अब कई देशों को अखरने लगी है। इसलिए अब अमेरिका ने फैसला किया है कि वह पाकिस्तान को लेकर अपने रिश्तों की समीक्षा करेगा और भविष्य में कैसे रिश्ते पाकिस्तान के साथ रखने हैं यह तय करेगा। 

विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने साफ किया कि तालिबान के साथ पाकिस्तान का जुड़ाव एक रणनीतिक चाल है। इसलिए अमेरिका पिछले 20 सालों में पाकिस्तान की भूमिका की समीक्षा करने के बाद ही कोई फैसला लेगा। 

00 भारत की मौजूदगी से पाकिस्तान को हुआ नुकसान 

ब्लिंकन ने अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी की सराहना की। उन्होंने सदन में विदेशी मामलों की समिति को जवाब देते हुए कहा कि अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी से पाकिस्तान को नुकसान हुआ है और खतरनाक गतिविधियों पर असर पड़ा है। रिपब्लिकन कांग्रेस सदस्य मार्क ग्रीन ने कहा कि आईएसआई जिस तरह से तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को खुलेआम समर्थन दे रहा है, ऐसे में भारत के साथ मजबूत संबंधों पर विचार करना चाहिए।

00 हक्कानी नेटवर्क के साथ पाकिस्तान का गठबंधन

संसद की विदेश मामलों की समिति में कांग्रेसी सांसद बिल कीटिंग ने कहा कि तालिबान को दोबारा से खड़ा करने में पाकिस्तान 2010 से मदद कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी सैनिकों की मौत में जिस हक्कानी नेटवर्क का हाथ था, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और इसी हक्कानी नेटवर्क के बीच गठबंधन है।

00 पाकिस्तान की भूमिका तय करेगी रिश्ते 

ब्लिंकन ने सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हम पाकिस्तान को बेहतर भूमिका निभाते हुए देखना चाहते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में उसकी भूमिका क्या होगी यह हमारे और इस्लामाबाद के रिश्ते को तय करेगा। उन्होंने कहा कि इस समय पाकिस्तान एक रणनीतिक चाल चल रहा है। एक तरफ वह तालिबान को पाल रहा है तो दूसरी और आतंकी गतिविधियों के खिलाफ हमारे अभियानों में साथ भी दे रहा है। 

00 सेना वापसी सही थी, वहां और दिन रहने से कुछ नहीं होता

अफगानिस्तान से जल्द सेना वापसी के सवाल पर ब्लिंकन ने कहा कि वहां पर कुछ और साल रहने से कुछ नहीं बदलने वाला था। हमने वहां पर करोड़ों निवेश किया है, जब इससे वहां की सेना और सरकार आत्मनिर्भर नहीं हुए तो आने वाले सालों में भी कुछ नहीं होता।

बीते कुछ महीनों से भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू के नेतृत्व में अमेरिकी कांग्रेस के प्रमुख सदस्यों एवं सीनेटरों से गहन संपर्क बनाया जा रहा है। कांग्रेस सदस्य स्कॉट पैरी ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिकी करदाताओं के पैसे से हक्कानी नेटवर्क और तालिबान का समर्थन करता है और अमेरिका को उसे अब और पैसा नहीं देना चाहिए तथा गैर नाटो सहयोगी का दर्जा भी उससे छीन लेना चाहिए।

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अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का सपना देखने वालों के लिए अच्छी खबर, ग्रीन कार्ड की राह हुई आसान

Date : 14-Sep-2021

वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का सपना देखने वालों के लिए अच्छी खबर है। एक नए विधेयक के वहां पारित होने से भारतीयों सहित लाखों लोगों को पूरक शुल्क का भुगतान करके ग्रीन कार्ड हासिल करने में मदद मिल सकती है।

देश में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का वर्षों से इंतजार कर रहे लाखों लोग, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय भी शामिल हैं पूरक शुल्क का भुगतान करके अमेरिका में वैध स्थायी निवास की उम्मीद कर सकते हैं। इसे यदि सुलह समझौता पैकेज में शामिल किया गया और कानून में पारित किया गया तो उन हजारों आईटी पेशेवरों को मदद मिलने की उम्मीद है जिन्हें लंबे समय से ग्रीन कार्ड का इंतजार है। 

00 विधेयक के पास होने पर लंबे वेटिंग पीरियड से मिलेगी निजात 

ग्रीन कार्ड को आधिकारिक तौर पर स्थायी निवासी कार्ड कहते हैं। यह अमेरिका में प्रवासियों को जारी किया जाने वाला दस्तावेज है जो इस बात का प्रमाण है कि उन्हें स्थायी रूप से अमेरिका में रहने का विशेषाधिकार दिया गया है। प्रतिनिधि सभा न्याय समिति द्वारा जारी बयान के मुताबिक एक रोजगार आधारित अप्रवासी आवेदक 5000 अमेरिकी डॉलर का पूरक शुल्क अदा कर स्थायी निवासी कार्ड हासिल कर सकता है।

मीडिया सूत्रों के अनुसार ईबी-5 श्रेणी (प्रवासी निवेशक) के लिए शुल्क 50,000 डॉलर है। ये प्रावधान 2031 में समाप्त हो रहे हैं। एक परिवार आधारित प्रवासी के लिए जो अमेरिकी नागरिक द्वारा प्रायोजित है और जिसकी प्राथमिकता तिथि दो वर्ष से अधिक है, उन्हें ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए 2500 डॉलर का भुगतान करना होगा।

00 पूरक शुल्क भुगतान करना होगा

बयान के अनुसार यदि आवेदक की प्राथमिकता तिथि दो वर्ष के भीतर नहीं है लेकिन उसका देश में उपस्थित रहना जरूरी है तो उन्हें 1500 अमेरिकी डॉलर का बतौर पूरक शुल्क भुगतान करना होगा। यह आवेदक द्वारा भुगतान किए गए किसी भी प्रशासनिक प्रसंस्करण शुल्क के अतिरिक्त होगा।

हालांकि विधेयक में कानूनी आव्रजन प्रणाली में स्थायी संरचनात्मक परिवर्तन शामिल नहीं हैं, जिसमें ग्रीन कार्ड के लिए एच-1बी वीजा का वार्षिक कोटा बढ़ाना और देशों के लिए सीमा का प्रावधान है। इस विधेयक के कानून बनने से पहले प्रावधानों को न्यायपालिका समिति, प्रतिनिधि सभा और सीनेट को पारित करना होगा और फिर राष्ट्रपति को इस पर हस्ताक्षर करना होगा।

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श्रीलंका के मशहूर गायक सुनील परेरा का कोरोना संक्रमण से निधन

Date : 11-Sep-2021

कोलंबो (एजेंसी)। श्रीलंका के मशहूर गायक सुनील परेरा का निधन हो गया है। बताया जा रहा है कि सुनील का निधन कोरोना से संबंधित बीमारियों के कारण हुआ है। वे 68 साल की उम्र में अंतिम सांस लिया है। सुनील अपने लाइफ में एक से एक शानदार गाने गाए है और श्रीलंका की जनता का खूब मनोरजंन किया था। सुनील के फैंस उनकी बेबाकी के कायल थे। श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे ने भी सुनील के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

महिंद्रा राजपक्षे ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, मेरा मानना ​​है कि सुनील परेरा को एक गायक और संगीत के क्षेत्र में उनके प्रदर्शन के लिए श्रीलंका के लोगों के दिलों में हमेशा याद किया जाएगा। आपको बता दें कि सुनील परेरा पिछले महीने कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए थे। उनका कोलंबो के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। पिछले हफ्ते वह अस्पताल से ठीक होकर घर लौटे, लेकिन कुछ समय बाद ही उन्हें फिर से अस्पताल ले जाया गया। उनकी तबीयत बिगड़ रही थीं। इलाज के दौरान सुनील परेरा का निधन हो गया।

कोरोना के चलते सार्वजनिक नहीं की थी निधन की खबर

परेरा का निधन सोमवार को हुआ था और कोरोनावायरस की स्थिति को देखते हुए उसी दिन उनका दाह संस्कार भी कर दिया गया। सुनील परेरा के अंतिम संस्कार में केवल परिवार के लोग और कुछ करीबी दोस्त ही शामिल हुए थे। सुनील परेरा के निधन की खबर उस समय कोरोना की स्थिति को देखते हुए सार्वजनिक नहीं की गई थी। अगर सुनील परेरा के फैंस को उनके निधन के बारे में पता चलता तो हजारों की संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन को पहुंच सकते थे, इसलिए परिवार और प्रशासन ने मिलकर कोरोनावायरस के चलते इस जानकारी को उस समय सार्वजनिक नहीं करना बेहतर समझा।

सुनील परेरा और उनका बैंड जिप्सी श्रीलंका में ही नहीं, बल्कि देश के बाहर भी काफी लोकप्रिय थे। सुनील ऐसे गाने लिखते और परफॉर्म करते थे, जो श्रीलंका की जिंदगी और राजनीति को बयां करते थे। उन्होंने चुनावों में होने वाली हिंसा, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और गरीबी पर कई गाने गाए हैं। इसके अलावा उन्होंने चुनावों में हारने वाले राजनेताओं, शराब पीने वाले पति और न जाने ऐसी ही कितने मुद्दों पर गाने गाकर लोगों का मनोरंजन किया।

श्रीलंकाई फिल्म क्रिटिक अरुणा सुनील परेरा को याद करते हुए कहती हैं कि सुनील परेरा ने अपने गानों के जरिए ये प्रस्तुत किया कि कैसे उन्होंने जीवन में चीजों का अनुभव किया। उन्होंने अपने खुद के अनुभव को बहुत ही सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाया, लेकिन यह बहुत ही मनोरंजक था। लोग उनके गानों और उनके प्रस्तुत करने के तरीके को काफी पसंद करते थे। वह अपनी रचनाओं में बहुत ईमानदार थे।

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तालिबान ने 9/11 की बरसी को देखते हुए अंतरिम सरकार ने आज का शपथग्रहण समारोह किया रद्द

Date : 11-Sep-2021

काबुल (एजेंसी)। अफगानिस्तान पर संपूर्ण कब्जा करने के बाद तालिबान अपने सबसे बड़े दुश्मन अमेरिका के सबसे बड़े जख्म को कुरेदने की फिराक में था। बताया जा रहा है कि तालिबान अमेरिका के 9/11 आतंकी हमले की बरसी के मौके पर शपथ-ग्रहण समारोह आयोजित करने वाला था लेकिन सहयोगियों के दबाव के बाद इसे रद्द कर दिया है।

ज्ञातव्य है कि अमेरिका में अब तक के हुए सबसे बड़े और भीषण आतंकी हमले 9/11 की आज बरसी है। इसी दिन वर्ष 2001 में अलकायदा के आतंकवादियों ने दो विमानों को न्यूयॉर्क शहर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, ट्विन टावर्स के साथ टकरा दिया, जिससे विमानों पर सवार सभी लोग तथा भवनों के अंदर काम करने वाले अन्य अनेक लोग भी मारे गए थे। इन हमलों में लगभग 3,000 लोग तथा 19 अपहरणकर्ता मारे गए थे। इस घटना से पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था, और इसके बाद अमेरिका का आतंकवाद के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान शुरू हुआ, जो अलकायदा के संरक्षक माने जाने वाले तालिबान के खिलाफ था, जो लगभग 20 साल तक चला।

अफगान सरकार के सांस्कृतिक आयोग के सदस्य इनामुल्ला समांगानी ने ट्विटर पर जानकारी देते हुए कहा कि नई अफगान सरकार का शपथ ग्रहण समारोह कुछ दिन पहले ही रद्द कर दिया गया था। लोगों को और भ्रमित न करने के लिए हमने नई सरकार गठन का फैसला लिया था और यह अब काम करना शुरू कर दिया है।

00 रूस ने शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने से कर दिया था इनकार 

तालिबान ने उद्घाटन समारोह में रूस, ईरान, चीन, कतर और पाकिस्तान को आमंत्रित किया था। हालांकि रूस ने कथित तौर पर कतर को सूचित कर दिया है कि अगर यह 9/11 की बरसी पर आयोजित होता है तो वह उद्घाटन समारोह में भाग नहीं लेगा। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और उसके नाटो सहयोगी कतर सरकार पर तालिबान को उद्घाटन समारोह पूरी तरह से आयोजित करने के खिलाफ सलाह देने के लिए दबाव डाल रहे थे, क्योंकि इस दिन को चुनना एक अमानवीय कदम के रूप में सामने आएगा।

बता दें कि तालिबान ने मंगलवार को अफगानिस्तान में एक अंतरिम सरकार की घोषणा की, जिसमें प्रमुख मंत्री पद शामिल हैं। एक समावेशी सरकार के उनके आश्वासन के बावजूद, नया मंत्रिमंडल पूरी तरह से कट्टरपंथी है और तालिबान की शरिया कानून की कठोर व्याख्या के अनुसार शासन करेगा।

00 तालिबान की 33 मंत्रियों की सरकार में 14 आतंकी 

तालिबान की 33 मंत्रियों की सरकार में 14 आतंकी हैं। कई उपमंत्री और गवर्नर भी इनमें शामिल हैं। प्रधानमंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद, उसके दोनों उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर और मौलवी अब्दुल सलाम हनफी जैसे कई नाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की काली सूची में शामिल हैं। वहीं अमेरिकी इनामी  सूची में भी इनके नाम हैं। रक्षामंत्री मुल्ला याकूब, विदेश मंत्री मुल्ला अमीर खान मुत्तकी और डिप्टी शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई भी आतंकियों में हैं।

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पाकिस्तान के एफडीई ने एक अधिसूचना जारी कर महिला शिक्षकों के जींस और टाइट कपड़े पहनने पर लगा दी रोक

Date : 10-Sep-2021

इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान के संघीय शिक्षा निदेशालय (एफडीई) ने एक अधिसूचना जारी कर महिला शिक्षकों के जींस और टाइट कपड़े पहनने पर रोक लगा दी है। इसके अलावा पुरुष शिक्षकों को जींस और टी-शर्ट पहनने से रोकने के लिए भी अधिसूचना जारी की है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में शिक्षा निदेशक ने सोमवार को स्कूल और कॉलेजों के प्राचार्यों को एक पत्र भेजा है। पत्र में प्राचार्यों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि प्रत्येक स्टाफ अपना पहनावा सही करे जिससे कि समाज में एक अच्छा संदेश जाए। पत्र में नियमित बाल कटवाने, दाढ़ी ट्रिमिंग, नाखून काटने, शॉवर और इत्र के उपयोग जैसे अच्छे उपायों के बारे में भी कहा गया है।

00 पाकिस्तान शिक्षा विभाग ने दी सफाई

पाकिस्तान शिक्षा विभाग का कहना है कि हमने रिसर्च के दौरान यह पाया है कि पहनावे का असर लोगों के विचार पर उससे कहीं ज्यादा होता है, जितना  समझा जाता है। पहला प्रभाव तो छात्रों के व्यक्तित्व पर ही होता है। हमने यह तय किया है कि महिला शिक्षक अब से जींस या टाइट्स नहीं पहन सकेंगी। पुरुष शिक्षकों के भी जींस और टी-शर्ट पहनने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जा रही है। उन्हें क्लास रूम और लैब्स में टीचिंग गाउन्स या कोट्स पहनना जरूरी होगा।

00 शुरू हुआ विरोध

शिक्षा विभाग के इस फरमान के खिलाफ विरोध की आवाजें उठने लगी हैं । कुछ लोगों का कहना है कि जिस मुल्क का प्रधानमंत्री ही यौन शोषण के लिए महिलाओं के लिबास को दोष देता हो, वहां तो इस तरह के फरमान जारी होने ही थे। लेकिन, उन्हें यह बताना चाहिए कि तीन साल की बच्चियों के साथ होने वाले रेप और मर्डर के लिए कौन से नियम लागू होते हैं।

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इंडोनेशिया के बैंटन प्रांत की जेल में लगी आग, 40 लोगों की मौत

Date : 08-Sep-2021

बैंटन (एजेंसी)। इंडोनेशिया के बैंटन प्रांत की एक जेल में आग लगने से 40 लोगों की मौत हो गई है, कानून और मानवाधिकार मंत्रालय के जेल विभाग की एक प्रवक्ता रीका अपरिंती ने इस घटना की जानकारी देते हुए कहा, ” फिलहाल आग लगने के कारण की जांच की जा रही है. ” उन्होंने कहा कि आग बुधवार तड़के एक से दो बजे के बीच लगी और अधिकारी अभी भी जेल को खाली करा रहे हैं।

दरअसल एक सरकारी प्रवक्ता और मीडिया रिपोर्टों ने कहा कि इंडोनेशिया के बैंटन प्रांत की एक जेल में बुधवार की सुबह एक भीड़भाड़ वाले ब्लॉक में आग लग गई, जिसमें कम से कम 40 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए. रिका अपरिंती ने कहा कि आग तंगेरंग जेल ब्लॉक सी में दोपहर 1 से 2 बजे लगी आग बुझा दी गई थी और अधिकारी अभी भी उस जगह को खाली कर रहे थे।

नशीली दवाओं से संबंधित अपराधियों को रखा गया था

उन्होंने कहा कि घटना वाले ब्लॉक में नशीली दवाओं से संबंधित अपराधियों को रखा गया था और उनकी क्षमता 122 लोगों की थी. हालांकि उसने यह नहीं बताया कि आग लगने के समय घटनास्थल पर कितने लोग मौजूद थे, लेकिन पुष्टि की कि जेल में भीड़भाड़ थी।

जानकारी के अनुसार, एक इमारत के ऊपर से आग की लपटों को बुझाने की कोशिश कर रहे अग्निशामकों के फुटेज दिखाए. प्रसारक ने बताया कि आग की लपेटो में 40 लोग मारे गए थे और 8 गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

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शिक्षा मंत्री नूरल्लाह मुनीर का विवादित बयान, कहा आज के वक्त में पीएचडी या किसी दूसरी मास्टर डिग्री का कोई फायदा नहीं

Date : 08-Sep-2021

काबुल (एजेंसी)। अफगानिस्तान में तालिबान ने अपनी अंतरिम सरकार का एलान कर दिया है। मुल्ला मुहम्मद हसन अखुंद को जहां देश का नया प्रधानमंत्री बनाया गया है, वहीं शेख मौलवी नूरल्लाह मुनीर को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है। इस बीच सरकार गठन के साथ ही तालिबानी फरमान भी आने शुरू हो गए हैं जिसमें नए शिक्षा मंत्री नूरल्लाह मुनीर का विवादित बयान भी शामिल है। मुनीर ने कहा है कि आज के वक्त में पीएचडी या किसी दूसरी मास्टर डिग्री का कोई फायदा नहीं है। मुनीर ने कहा कि हमलोगों के पास कोई डिग्री नहीं है फिर भी हम सरकार चला रहे हैं। ऐसे में आज के वक्त में किसी तरह की पीएचडी या मास्टर डिग्री की जरूरत नहीं है।

00 तालिबान ने शिक्षा के क्षेत्र में शुरू किया भेदभाव

बता दें कि तालिबान ने सत्ता में आने से पहले ही शिक्षा के क्षेत्र में कई बदलाव करने शुरू कर दिए थे। कॉलेज में लड़के-लड़कियों के बीच में पर्दा डाल दिया गया। कई जगहों पर लड़कियों और महिलाओं को सिर्फ बुजुर्ग या महिलाएं ही पढ़ा रही हैं। इसके अलावा तालिबान उन निजी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज पर नकेल कसना शुरू कर दिया है जिसने 2001 में तालिबान के शासन के खत्म होने के बाद आधुनिक शिक्षा पर बल दिया है।

तालिबान ने अपने फरमान में आगे लिखा है कि विश्वविद्यालय को अपनी सुविधाओं के अनुसार छात्राओं के लिए महिला शिक्षकों की भर्ती करने की जरूरत है। अगर ऐसा संभव नहीं है तो उन्हें ऐसे `बुजुर्ग पुरुषों` को नियुक्त करने की कोशिश करनी चाहिए जिनका चरित्र अच्छा हो। महिलाओं को अब पुरुषो से अलग होकर पढ़ना होगा, इसलिए वो पुरुष छात्रों से 5 मिनट पहले अपना काम निपटा लें ताकि उन्हें बाहर पुरुषों का सामना न करना पड़े।

00 जानिए अफगानिस्तान में किसे कौन सा मंत्रालय मिला

अफगानिस्तान में राजनीतिक संकट के बीच तालिबान ने मंगलवार देर शाम नई सरकार का एलान कर दिया। मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार के नए प्रधानमंत्री होगा। इसके अलावा मुल्ला बरादर को उप-प्रधानमंत्री, सिराजुद्दीन हक्कानी को कार्यवाहक गृहमंत्री, मुल्ला याकूब को रक्षा मंत्री और अमीर मुत्तकी को विदेश मंत्री बनाया गया है। खास बात यह है कि इस एलान के बाद तालिबान के सर्वोच्च नेता ने नई सरकार से शरिया कानून बनाए रखने के लिए कहा है।

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