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कोरोना संकट के चलते इस साल 4.9 करोड़ अतिरिक्त लोग के अत्यंत गरीब होने की आशंका : संयुक्तराष्ट्र के महासचिव

Date : 12-Jun-2020

संयुक्तराष्ट्र,(एजेंसी). कोविड-19 संकट की वजह से इस साल करीब 4.9 करोड़ और लोग अत्यंत गरीबी के गर्त में जा सकते हैं। इतना ही नहीं वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हर एक प्रतिशत की गिरावट का असर लाखों बच्चों के विकास को अवरुद्ध करेगा।यह अंदेशा संयुक्तराष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने जताया है। उन्होंने देशों से वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए कहा है।गुतारेस ने चेतावनी दी कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो साफ है कि भीषण वैश्विक खाद्यान्न आपात स्थिति का जोखिम बढ़ रहा है। इसका दीर्घावधि में करोड़ों बच्चों और युवाओं पर असर हो सकता है।खाद्य सुरक्षा पर एक नीति जारी करते हुए उन्होंने मंगलवार को कहा, ‘‘ दुनिया की 7.8 अरब आबादी को भोजन कराने के लिए पर्याप्त से अधिक खाना उपलब्ध है। लेकिन वर्तमान में 82 करोड़ से ज्यादा लोग भुखमरी का शिकार हैं। और पांच वर्ष की आयु से कम के करीब 14.4 करोड़ बच्चों का भी विकास नहीं हो है। हमारी खाद्य व्यवस्था ढह रही है और कोविड-19 संकट ने हालात को बुरा बनाया है।गुतारेस ने कहा, ‘‘इस साल कोविड-19 संकट के चलते करीब 4.9 करोड़ और लोग अत्यंत गरीबी का शिकार हो जाएंगे। खाद्य और पोषण से असुरक्षित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वैश्विक जीडीपी में प्रत्येक प्रतिशत की गिरावट सात लाख अतिरिक्त बच्चों के विकास को अवरुद्ध करेगी।’’ 
उन्होंने कहा कि प्रचुर मात्रा में खाद्यान्न वाले देशों में भी खाद्य आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है।गुतारेस ने ‘तत्काल कार्रवाई’ करने की बात को दोहराया, ताकि इस महामारी के सबसे बुरे वैश्विक परिणामों को नियंत्रित किया जा सके।उन्होंने देशों से लोगों की जिंदगी और आजीविका बचाने के लिए काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि देशों को उन जगहों पर ज्यादा काम करने की जरूरत है जहां सबसे ज्यादा जोखिम है।उन्होंने कहा , ‘‘इसका मतलब यह है कि देशों को खाद्य और पोषण सेवाओं को अनिवार्य कर देना चाहिए जबकि खाद्य क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध करानी चाहिए।’’ (भाषा)

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अगले कई दशक तक भारत दुनिया का विनिर्माण और सेवाओं का प्रमुख केंद्र रहेगा : गौतम अडाणी

Date : 08-Jun-2020

नयी दिल्ली (एजेंसी). अरबपति उद्योगपति गौतम अडाणी का मानना है कि भारत पर दांव लगाने का इससे अच्छा समय नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि दर में हालिया गिरावट के बावजूद भारत दुनिया का प्रमुख उपभोग केंद्र होगा। साथ ही अगले कई दशक तक भारत दुनिया का विनिर्माण और सेवाओं का प्रमुख केंद्र रहेगा। 

बीते वित्त वर्ष 2019-20 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 4.2 प्रतिशत पर आ गई है, जो इसका करीब एक दशक का निचला स्तर है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों के साथ भारतीय रिजर्व बैंक का भी अनुमान है कि कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के चलते चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट आएगी। 

अडाणी गैस लि. की वार्षिक रिपोर्ट में अडाणी ने कहा, ‘‘हमें यह समझना चाहिए कि कोई भी विचार पूरी तरह सही या गलत नहीं हो सकता। आज इस संकट के समय जरूरत ऐसी सरकार की है जो उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर निर्णय ले सके। साथ ही नई सूचनाएं आने पर खुद को उसके अनुकूल ढाल सके।’’ उन्होंने कहा कि कोविड-19 से पैदा हुए संकट के बीच भारत ने अच्छा काम किया है। वहीं अधिक संसाधनों वाले देशों को संघर्ष करना पड़ा है। अडाणी ने कहा कि इस वायरस से लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है, लेकिन मुझे यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि जो फैसले लिए गए हैं, यदि उनमें विलंब होता, तो आज हमारे सामने बड़ी आपदा खड़ी हो जाती, जिसका न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया पर असर पड़ता। 

गौतम अडाणी देश के प्रमुख उद्योग समूह अडाणी ग्रुप के प्रमुख हैं। बुनियादी ढांचा क्षेत्र का यह समूह बंदरगाह से लेकर बिजली क्षेत्र में काम कर रहा है। अडाणी ने कहा कि इस महामारी की वजह से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जीवन और नौकरियों पर संकट आया है। प्रवासी मजदूरों के संकट से पूरा देश दुखी है। लेकिन कुछ अज्ञात विकल्पों के परिणाम तो और बुरे होते। अडाणी ने कहा कि इस संकट के समय जिस तरह देश के नेताओं, चिकित्सकों, स्वास्थ्य सेवा कर्मियों, पुलिस, सेना, रेहड़ी-खोमचों वालों और नागरिकों ने एक-दूसरे को समर्थन दिया है, वह सराहनीय है।  (भाषा)

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विदेशी मुद्रा भंडार लगातार पाँचवें सप्ताह बढ़ता हुआ नये रिकॉर्ड स्तर पर पंहुचा

Date : 08-Jun-2020

मुंबई (एजेंसी). देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार पाँचवें सप्ताह बढ़ता हुआ नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है।रिजर्व बैंक द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, 29 मई को समाप्त सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा का देश का भंडार 3.44 अरब डॉलर बढ़कर 493.48 अरब डॉलर हो गया। इसमें लगातार पाँचवें सप्ताह वृद्धि हुई है। इससे पहले 22 मई को समाप्त सप्ताह में यह 3.01 अरब डॉलर बढ़कर 490.04 अरब डॉलर रहा था जो उस समय का सर्वाधिक स्तर था।विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति में 29 मई को समाप्त सप्ताह के दौरान 3.50 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और सप्ताहांत पर यह 455.21 अरब डॉलर पर रहा। इस दौरान स्वर्ण भंडार 9.7 करोड़ डॉलर घटकर 32.68 अरब डॉलर रह गया।आलोच्य सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास आरक्षित निधि 3.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.16 अरब डॉलर पर पहुँच गई जबकि विशेष आहरण अधिकार 1.43 अरब डॉलर पर स्थिर रहा।-वार्ता

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रिलायंस इंडस्ट्रीज कर्जमुक्त कंपनी बनने के अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर : रिपोर्ट

Date : 01-Jun-2020

नयी दिल्ली, (एजेंसी). रिलायंस इंडस्ट्रीज कर्जमुक्त कंपनी बनने के अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है। पिछले कुछ सप्ताह के दौरान रिलायंस ने विभिन्न कंपनियों से अच्छा-खासा धन जुटाया है, जिससे उसके लिए शून्य ऋण वाली कंपनी बनने के लक्ष्य को पाना आसान हो गया है। एक ब्रोकरेज कंपनी की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि सऊदी अरामको के साथ रिलायंस के सौदे में देरी भी होती है, तो भी वह अपने पूरे शुद्ध कर्ज का भुगतान करने की स्थिति में होगी। अरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी के नियंत्रण वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी डिजिटल इकाई में अल्पांश हिस्सेदारी फेसबुक तथा निजी इक्विटी कंपनियों मसलन सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी, केकेआर और जनरल अटलांटिक को बेचकर कुल 78,562 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है। इसके अलावा कंपनी राइट्स इश्यू के जरिये भी 53,125 करोड़ रुपये जुटा रही है। 
कंपनी पर एडलवाइस पर एक शोध रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘हालिया सौदों के बाद हमने रिलायंस इंडस्ट्रीज के बही-खाते का विश्लेषण किया है। कंपनी ने पिछले माह के दौरान इक्विटी के रूप में 1.3 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। हमारा अनमान है कि यदि अरामको सौदे में देरी भी होती है, तो भी कंपनी 2020-21 में अपना समूचा 1.6 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध ऋण चुका पाएगी।’’ 
रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी का समायोजित शुद्ध कर्ज 2.57 लाख करोड़ रुपये कुछ ऊंचा है और इसे चुकाने में अधिक समय लगेगा। एडलवाइस ने कहा है कि कंपनी की दूरसंचार इकाई जियो का पूंजीगत खर्च काफी हद तक पूरा हो गया है। ऐसे में रिलायंस इंडस्ट्रीज तेल और गैस क्षेत्र से कम आय के बावजूद 2020-21 में 20,000 करोड़ रुपये का मुक्त नकदी प्रवाह (एफसीएफ) हासिल कर पाएगी। 
ब्रोकरेज कंपनी ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज जियो में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। इसके अलावा राइट्स इश्यू से मिलने वाली राशि, ईंधन के खुदरा कारोबार में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बीपी को 7,000 करोड़ रुपये में बेचने आदि के बाद कंपनी के पास 1.3 लाख करोड़ रुपये की नकदी होगी। ऐसे में कंपनी 2020-21 में कर्जमुक्त होने के लक्ष्य को हासिल कर पाएगी।’’  (भाषा)

 

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सुजुकी मोटर ने गुजरात संयंत्र में उत्पादन शुरू किया, कोविड-19 महामारी के चलते 23 मार्च से संयंत्र में उत्पादन रोक दिया था

Date : 25-May-2020

नयी दिल्ली (एजेंसी). मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने सोमवार को कहा कि सुजुकी मोटर गुजरात ने कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण दो महीने से अधिक समय तक बंद रहने के बाद फिर विनिर्माण शुरू कर दिया है। 
सुजुकी मोटर गुजरात (एसएमजी) एमएसआई के लिए ठेके पर कारों का निर्माण करती है।कंपनी को एसएमजी ने बताया है कि वह 25 मई से वाहनों का विनिर्माण फिर शुरू करेगी। कंपनी ने शेयर बाजार को बताया कि वह सख्ती से सभी सरकारी नियमों और दिशानिर्देशों का पालन करेगी। एसएमजी ने कोविड-19 महामारी के चलते 23 मार्च को हंसलपुर (गुजरात) संयंत्र में उत्पादन रोक दिया था।एमएसआई पहले ही मानेसर और गुरुग्राम में अपने दो संयंत्रों में परिचालन शुरू कर चुकी है।(भाषा) 

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कोविड-19 का प्रकोप खत्म होने के बाद भारत को बाजार के अनुकूल नजरिया अपनाना होगा: अमेरिकी राजनयिक

Date : 21-May-2020

वाशिंगटन, (एजेंसी ). एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक ने कहा है कि कोरोना वायरस संकट से पैदा हुई संभावनाओं का फायदा उठाने के लिए भारत को आर्थिक सुधार करने होंगे। दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विदेश विभाग की कार्यवाहक सहायक मंत्री एलिस वेल्स ने कहा कि अमेरिका व्यापार समझौता चाहता है, लेकिन भारत ऐसा नहीं कर पाया।उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाना चाहेंगी और ये वास्तव में भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है, जिसका बाजार के अनुकूल नजरिए के साथ फायदा उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका कारोबारी माहौल में सुधार के लिए भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। उन्होंने वाशिंगटन स्थित एक थिंकटैंक से कहा, ‘‘मैं कहना चाहती हूं कि हम व्यापार समझौते करते हैं... हमने देखा है कि भारत इन समझौतों को अभी तक नहीं कर पाया है।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘ये मुद्दा सिर्फ अमेरिका के साथ नहीं है। भारत इस मुद्दे का सामना यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, अन्य देशों के साथ भी कर रहा है।’’ उन्होंने कहा कि कंपनियां चीन के जोखिमों को कम करना चाहती हैं और इसलिए वास्तविक अर्थों में विविधीकरण का अवसर है।वेल्स कहा कि भारत सही नीतियां बनाकर और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाकर इन अवसरों का फायदा उठा सकता है। 
उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से अमेरिका भारत के साथ साझेदारी में इसे बढ़ावा देना चाहता है। अमेरिकी राजनयिक ने कहा, ‘‘लेकिन कुछ मुश्किल मुद्दे हैं और मौजूदा प्रशासन उन पर प्रगति करने के लिए प्रतिबद्ध है।’’ भारत और अमेरिका, पिछले दो वर्षों से एक व्यापार सौदे पर बातचीत कर रहे हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में कहा था कि इस पर जल्द ही हस्ताक्षर होने की संभावना है।
फरवरी में उनकी भारत यात्रा के दौरान इस समझौते की उम्मीद की जा रही थी, हालांकि दोनों देशों के बीच कुछ मतभेद बने हुए हैं।भाषा)

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कर्ज चुकाने में असमर्थ कंपनियों को दिवाला संहिता के तहत अब एक साल तक कोई नया मामला नहीं लिया जाएगा : वित्त मंत्री

Date : 17-May-2020

नयी दिल्ली, (एजेंसी). वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना वायरस महामारी के कारण कर्ज की किस्तें चुकाने में अपने को असमर्थ पा रही कंपनियों को दिवाला संहिता के तहत एक साल तक कार्रवाई से बचाने की रविवार को घोषणा की। उन्होंने कहा कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत एक साल तक कोई नयी दिवालिया प्रक्रिया शुरू नहीं की जायेगी। कोराना से उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने और आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत प्रधानमंत्री के 20 लाख करोड़ रुपये के मेगा पैकेज की पांचवी किस्त की घोषणाओं में आईबीसी संबंधी यह प्राधान भी शामिल किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इसके साथ ही, कोरोनो वायरस से संबंधित ऋण को डिफ़ॉल्ट की परिभाषा से बाहर रखा जायेगा।उन्होंने कहा कि लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) को लाभ पहुंचाने के लिये दिवाला शोधन प्रक्रिया शुरू करने के लिए फंसे कर्ज की न्यूनतम राशि एक लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि इसके लिये अध्यादेश लाया जायेगा।उन्होंने कंपनी कानून के कुछ प्रावधानों के उल्लंघन को गैर-आपराधिक बनाये जाने की भी घोषणा की। इसके तहत कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के बारे में जानकारी देने में चूक, निदेशक मंडल की रिपोर्ट की अपर्याप्ता, शेयर बाजारों को सूचना देने में देरी, सालाना आम बैठक में देरी समेत कई प्रक्रियात्मक चूकें तथा मामूली तकनीकी दिक्कतें शामिल हैं।
अर्थ दंड या हर्जाने के साथ समाधान योग्य उल्लंघनों में अधिकांश को आंतरिक न्याय निर्णय प्रक्रिया (आईएएम) के तहत रखा जाएगा। इस संबंध में अध्यादेश जारी किया जाएगा।उन्होंने कहा कि कंपनी कानून के तहत सात समाधान योग्य अपराधों को एक साथ हटाया जायेगा और इनमें से पांच को वैकल्पिक नियमों के तहत रखा जाएगा।इसके अलावा, सरकार ने कंपनियों को सीधे विदेशी बाजार में प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करने की मंजूरी दी।उन्होंने कहा कि निजी कंपनियां, जो शेयर बाजारों में गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर सूचीबद्ध कराती हैं, उन्हें सूचीबद्ध कंपनियों के रूप में नहीं माना जायेगा।(भाषा)

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अभिजीत बनर्जी ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बड़े प्रोत्साहन पैकेज की जरूरत

Date : 05-May-2020

नयी दिल्ली, (एजेंसी ). नोबेल पुरस्कार विजेता और अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने कोरोना संकट की मार झेल रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बड़े प्रोत्साहन पैकेज की जरूरत पर जोर देते हुए मंगलवार को कहा कि देश की आबादी के एक बड़े हिस्से के हाथों में पैसे भी पहुंचाने होंगे। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद के दौरान बनर्जी ने यह भी कहा कि जरूरतमंदों के लिए तीन महीने तक अस्थायी राशन कार्ड मुहैया कराने, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की मदद करने और प्रवासी श्रमिकों की सहायता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है। 
इस संवाद के दौरान कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्यों को लॉकडाउन के संदर्भ में फैसले की छूट होनी चाहिए। गांधी ने उनसे पूछा कि क्या ‘न्याय’ योजना की तर्ज पर लोगों को पैसे दिए जा सकते हैं तो उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर।’’ साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर हम निचले तबके की 60 फीसदी आबादी के हाथों में कुछ पैसे देते हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा। यह एक तरह का प्रोत्साहन होगा।दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव के समय तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘न्याय’ योजना का वादा किया था। इसके तहत देश के करीब पांच करोड़ गरीब परिवारों को,प्रति परिवार सालाना 72 हजार रुपये देने का वादा किया गया था। 

मनरेगा और खाद्य सुरक्षा कानून जैसी संप्रग सरकार की योजनाओं पर बनर्जी ने कहा, ‘‘समस्या यह है कि संप्रग द्वारा लागू की गई ये अच्छी नीतियां भी वर्तमान समय में अपर्याप्त साबित हो रही हैं। सरकार ने उन्हें वैसा ही लागू कर रखा है। इसमें कोई किन्तु-परन्तु नहीं था। यह बहुत स्पष्ट था कि संप्रग की नीतियों का आगे उपयोग किया जाएगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ यह सोचना होगा कि जो इन योजनाओं के तहत कवर नहीं हैं उनके लिए हम क्या कर सकते हैं। ऐसे बहुत लोग हैं- विशेष रूप से प्रवासी श्रमिक हैं...अगर आधार के माध्यम से पीडीएस का लाभ मिलता तो लोगों को हर जगह लाभ मिलता। मुंबई में मनरेगा नहीं है, इसलिए वो इसके पात्र नहीं हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें देश की समग्र आर्थिक समृद्धि की रक्षा के बारे में आशावादी होना चाहिए।’’ बड़े प्रोत्साहन पैकेज की जरूरत पर जोर देते हुए बनर्जी ने कहा कि अमेरिका, जापान, यूरोप यही कर रहे हैं। हमने बड़े प्रोत्साहन पैकेज पर निर्णय नहीं लिया है। हम अभी भी जीडीपी का एक फीसदी पर हैं, अमेरिका 10 फीसदी तक तक चला गया है। हमें एमएसएमई क्षेत्र के लिए ज्यादा करने की आवश्यकता है।
उनके मुताबिक प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे को राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। इसे द्विपक्षीय रूप से संभालना मुश्किल है। यह एक ऐसी समस्या है, जिसका आप विकेंद्रीकरण नहीं करना चाहेंगे क्योंकि आप वास्तव में जानकारी एकत्र करना चाहते हैं।बनर्जी ने कहा, ‘‘ यदि लोग संक्रमित हैं तो आप नहीं चाहते कि वे पूरे देश में घूमें। मुझे लगता है कि ट्रेन पकड़ने या यात्रा करने से पहले, सरकार को ऐसे लोगों की जांच करानी चाहिए। यह एक मुख्य सवाल है और जिसे केवल केंद्र सरकार सुलझा सकती है।’’ 
इस पर अलग राय जाहिर करते हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘‘ बड़े फैसले राष्ट्रीय स्तर पर होने चाहिए। लेकिन लॉकडाउन के मामले में राज्यों को स्वतंत्रता देनी चाहिए। वर्तमान सरकार का दृष्टिकोण थोड़ा अलग है। वह इसे अपने नियंत्रण में रखना पसंद करती है। ये दो दृष्टिकोण हैं, जरूरी नहीं कि एक गलत और एक सही हो। मैं विकेंद्रीकरण पर जोर देता हूं।’’ 
बनर्जी ने यह भी कहा कि जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं उन्हें कम से कम तीन महीने के लिए अस्थायी राशन कार्ड जारी किए जाएं ताकि उन्हें अनाज मिल सके।गांधी के एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि जरूरतमंद तक पैसे पहुंचाने के लिए राज्य सरकारों और गैर सरकारी संगठनों की मदद ली जा सकती है।उन्होंने अमेरिका और ब्राजील के राष्ट्रपतियों का हवाला देते हुए कहा कि यह गलत धारणा है कि ऐसे संकट के समय ‘मजबूत व्यक्ति’ स्थिति से निपट सकता है।बनर्जी ने कहा, ‘‘यह (मजबूत नेतृत्व की धारणा) विनाशकारी है। अमेरिका और ब्राजील दो ऐसे देश हैं, जहां स्थिति बुरी तरह गड़बड़ हो रही है। ये दो तथाकथित मजबूत नेता हैं, जो सब कुछ जानने का दिखावा करते हैं, लेकिन वे जो भी कहते हैं, वो हास्यास्पद होता है।’’ उन्होंने कहा कि अगर कोई "मजबूत व्यक्ति" के सिद्धांत पर विश्वास करता है तो यह समय अपने आप को इस गलतफहमी से बचाने का है।(भाषा)

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कोवर्किंग क्षेत्र पर अस्थायी हो सकता है कोरोना वायरस महामारी का असर: उद्योग जगत

Date : 04-May-2020

बेंगलुरू, (एजेंसी). कोरोना वायरस महामारी के कारण लोगों के बाहर निकलने में तेज गिरावट से प्रभावित को-वर्किंग उद्योग का मानना है कि यह असर अस्थायी हो सकता है और कुछ कारकों के अनुकूल होने के कारण इस क्षेत्र में फिर से मांग बढ़ सकती है।
हालांकि हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करने वाले तथा आधुनिक कार्यस्थलों के लिये उत्प्रेरक के तौर पर देखे जाने वाले इस क्षेत्र के लिये चुनौतियां बनी हुई हैं, क्योंकि बड़े कारपोरेट अभी पाबंदियों के कारण विस्तार को लेकर आशावान नहीं हैं।
अभी घर से काम करने वाले कई कर्मचारियों ने संकेत दिये हैं कि वे कोरोना वायरस महामारी के कारण उत्पन्न स्थिति के सामान्य होने के बाद भी घर से ही काम करते रहेंगे। ऐसे में को-वर्किंग स्पेस को अब अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा।
315 वर्क एवेन्यू के चेयरमैन मानस मेहरोत्रा ने कहा कि कोरोना वायरस से संबंधित चिंताओं ने को-वर्किंग क्षेत्रों में लोगों की आमद कम की है जबकि यह क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों से तेज गति से बढ़ रहा था। उन्होंने कहा कि यह असर अस्थायी हो सकता है और तभी तक रह सकता है, जब तक सावधानियां बरतने की जरूरत रहेगी।
उनके अनुसार, कोई भी व्यवसाय अब अपने कर्मचारियों को पहले से कहीं अधिक लचीलापन प्रदान करने के लिये अपनी कार्य व्यवस्था पर पुनर्विचार करेगा। इससे को-वर्किंग क्षेत्र की मांग एक बार फिर से बढ़ेगी।
एनरॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के निदेशक व प्रमुख (परामर्श) आशुतोष लिमये ने कहा कि को-वर्किंग क्षेत्र को अगली कुछ तिमाहियों में मांग में कमी देखने को मिल सकती है, लेकिन इस क्षेत्र में सबसे तेज वापसी भी देखने को मिलेगा। एक बार जब महामारी का दबाव कम हो जाता है, तब कई व्यवसाय इन लचीले कार्यक्षेत्रों को फिर से शुरू करने की कोशिश करेंगे।
एनरॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी के अनुसार, शीर्ष शहरों में पारंपरिक कार्य स्थलों की तुलना में कोवर्किंग क्षेत्र से खर्च का बोझ 15 प्रतिशत कम होता है। पुणे जैसे शहरों में यह अंतर 33 प्रतिशत तक है। इस कारण स्टार्टअप और नये उद्यमों में को-वर्किंग स्पेस के प्रति विशेष झुकाव होता है।(भाषा)

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आने वाले दिनों में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पर नहीं मिलेगी सब्सिडी! जानें क्या है वजह

Date : 03-May-2020

नई दिल्ली(एजेंसी). वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट का फायदा भले ही आम उपभेक्ता को न मिला पर सरकार को मिला है। तेल की कीमतों में कमी ने सरकार को लाभार्थियों के खातों में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पर सब्सिडी देने से बचाया है। मई से सरकार डाइरेक्ट ट्रांसफर बेनिफिट योजना के तहत सभी महानगरों में घरेलू एलपीजी ग्राहकों के खातों में सब्सिडी का भुगतान नहीं करेगी, जबकि सब्सिडी केवल परिवहन की बढ़ी हुई लागत वाले अन्य शहरों में 2-5 रुपये तक सीमित होगी और 8 करोड़ उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए लगभग 20 रुपये प्रति सिलेंडर होगी। सभी उपभोक्ताओं को 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर का भुगतान बाजार मूल्य के बराबर करना होगा। बता दें सरकार सब्सिडी को सीधे पात्र उपभोक्ताओं के खाते में स्थानांतरित करती है। बाजार और रसोई गैस के रियायती मूल्य के बीच के अंतर को सरकार सब्सिडी के रूप में देती है।  मार्च के मध्य से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के साथ वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 35 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कुछ समय के लिए 20 डॉलर से भी नीचे आ गई हैं। क्रूड में गिरावट के साथ-साथ एलपीजी की कीमतों में भी गिरावट आई है। इसके बाद गैर-सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 162.50 तक की गई है। एक मई से तेल कंपनियों ने दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 162.50 रुपये सस्ता कर दिया है। अब यह 581.50 रुपये प्रति सिलेंडर पड़ रहा है।
 देश के एक बड़े  सार्वजनिक क्षेत्र के तेल शोधनकर्ता और खुदरा विक्रेता कपंनी के एक अधिकारी ने कहा कि रसोई गैस के मौजूदा बाजार मूल्य पर सरकार को किसी भी तरह की सब्सिडी देने की आवश्यकता नहीं है। उज्जवला ग्राहकों के लिए केवल मामूली सब्सिडी की आवश्यकता हो सकती है।  बजट 2020-21 में एलपीजी सब्सिडी के लिए 37,256.21 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जो 2019-20 के लिए 34,085.86 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से 9 प्रतिशत अधिक है। एलपीजी के अलावा सरकार इस साल केरोसिन पर दी जाने वाली सब्सिडी को पूरी तरह से समाप्त कर सकती है।
सूत्रों ने के मुताबिक न केवल वैश्विक तेल बाजार में गिरावट आई है बल्कि तेल कंपनियों ने भी सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी की कीमतों में पिछले साल के आखिर से धीरे-धीरे 4-5 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की है। इसने बाजार और उत्पाद की रियायती कीमत के बीच अंतर को पाटने में भी मदद की है। एक विश्लेषक की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2019से जनवरी 2020 के दौरान, ओएमसी ने सब्सिडी वाले एलपीजी की कीमत में 63 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की। यह करीब-करीब प्रति माह औसतन 10 रुपये प्रति सिलेंडर पड़ रही है। जहां सरकार ने मौजूदा अवधि में अपने सब्सिडी बिल को कम किया है, वहीं पेट्रोल-डीजल उपभोक्ताओं को अब तक कोई लाभ नहीं मिला है। वास्तव में पंपों पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले 50 दिनों से नहीं बदली हैं, जब वैश्विक तेल की कीमतें 40 फीसदी से अधिक गिर गई हैं।

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