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मारुति सुजुकी ने सभी कल पुर्जों को अब देश में ही बनाने का किया आह्वान

 नयी दिल्ली, (एजेंसी)। कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजुकी ने कल-पुर्जे बनाने वाली कंपनियों को वाहनों के इलेक्ट्रॉनिक्स तथा कुछ अन्य मुख्य कल-पुर्जे का देश में ही विनिर्माण शुरू करने का सुझाव दिया। मारुति सुजुकी ने कहा कि इससे इन कल-पुर्जों का आयात कम करने में मदद मिलेगी। इससे न सिर्फ मारुति को मदद मिलेगी बल्कि सरकार की मेक इन इंडिया मुहिम को भी समर्थन मिलेगा।
कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी केनिचि आयुकावा ने यहां एक्मा के वार्षिक सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं आपको (कल-पुर्जा उद्योग को) एक चुनौती और एक सुझाव देता हूं। कल-पुर्जों के हिसाब से मारुति सुजुकी के वाहन 90 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी होते हैं। लेकिन कुछ मुख्य कल-पुर्जे तथा इलेक्ट्रॉनिक्स का हमें अभी भी आयात करना पड़ता है। हम चाहते हैं कि ये सामान में भारत में निर्मित हों।’’ 
उन्होंने कहा कि यदि कोई कंपनी गुणवत्ता तथा भरोसे के साथ देश में ही ये सामान बनाये तो इससे न सिर्फ मारुति सुजुकी को बल्कि पूरे घरेलू वाहन उद्योग को मदद मिलेगी।
आयुकावा ने कहा कि भविष्य में सर्वश्रेष्ठ अवसरों को भुनाने का राज आंतरिक शोध एवं विकास क्षमता में निहित है।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि भारत को भविष्य की दुनिया में प्रतिस्पर्धी बनना है, तो मेरा सुझाव है कि आंतरिक शोध एवं विकास क्षमता को विकसित करने की शुरुआत करनी चाहिये, जो एक लंबी प्रक्रिया है तथा धीरे-धीरे परिणाम देती है। हमें धैर्य रखना होगा और प्रतिबद्ध रहना होगा।’’  (भाषा)

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बीमा आपकी बचत नहीं है !

-सीए सिंघई संजय जैन
”बीमा आग्रह की विषयवस्तु है“यह सन्देश आपने अनेकों बार बीमा कम्पनी के विज्ञापन के नीचे पढ़ा होगा किन्तु जैसे सिगरेट पर छपी चेतावनी स्मोकर के लिए फिजूल है, सब इसकी अनदेखी ही करते हैं। नब्बे फीसद लोगों ने बीमा इसलिए लिया होता है कि ”एजेन्ट का दबाव था - और मना करना ठीक नहीं लगा, सो जो पॉलिसी उसने दी हमने ले ली!“ बाकी दस फीसदी इसे बचत का उपकरण  मान कर इस भाव से लेते हैं कि ”चलो इसी बहाने कुछ तो बचने लगेगा!“ ये दोनो ही भाव अनुपयुक्त हैं। बीमा कभी भी बचत नहीं होता और यह दुर्घटना और मृत्यु जैसे आकस्मिक आघात से बचने का ही उपकरण होता है। इस भाव को न समझने और अपनी फाइनेन्शियल हेल्थ की अनदेखी करने के कारण अक्सर बीमा समय पड़ने पर या तो होता ही नहीं है और अगर होता भी है तो अपर्याप्त!

बीमा एक समझदारी भरा कदम है जिसे पूरी सावधानी और आकलन के बाद ही उठाया जाना चाहिये। सामान्यतया बीमे के समय जिन तथ्यों और सावधानियों की उपेक्षा की जाती है समय आने पर वे ही उसे सर्वथा अनुपयुक्त बना देते हैं और फिर यह भाव उपजता है कि ऐसे बीमे का क्या लाभ ? अच्छी फाइनेन्शियल हेल्थ के लिए यह बहुत आवश्यक है कि जब कभी भी आप किसी इन्श्योरेन्स एजेन्ट से मिलें तो उससे जल्दी से जल्दी छुटकारा पाने के भाव के बजाय अपनी अनुकूलता के हिसाब से उससे अप्वाइन्टमेन्ट फिक्स करें और पूरी रिसर्च के बाद ही अपनी जरूरत के हिसाब से प्लान का चयन करें। आजकल इन्टरनेट पर भी ऐसी बहुत सी साईट्स उपलब्ध हैं जो आपकी सहायता कर सकती हैं किन्तु व्यक्तिगत चर्चा से आपको अपने उन प्रश्नों के उत्तर भी मिल सकेंगे जिन्हे आप इन साईट्स पर नहीं खोज पाते हैं।

कितना प्रीमियम होना चाहिए ?
बीमा वह आर्थिक सुरक्षा है जो आपको किसी सम्भावित अनहोनी की दशा में एक छोटे से प्रीमियम, जो कि बीमित रकम से कई गुना छोटी राशि होती है, के एवज में मिलती है। अतः इसे ठीक से समझ लें कि यदि प्रीमियम बहुत कम है तो जरूरी नहीं है कि सुरक्षा भी उतनी ही कम हो। इसके लिए जरूरी यह समझना है कि वास्तव में प्रीमियम तय करने का आधार क्या है? दूसरे यह कि यह प्रीमियम आपको कितने समय तक देना होगा? सामान्य तौर पर मासिक, त्रैमासिक, अर्द्ध वार्षिक एवं वार्षिक विकल्प के साथ ही एकल प्रीमियम भी लिए जाते हैं जिसमें एक बार ही रकम अदा करके आप निश्चित अवधि के लिए बीमा सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं। ध्यान रहे कि प्रीमियम लम्बे समय तक बाकी रहने पर सुरक्षा कवच में छेद हो सकता है, इसलिए बीमा अपनी मासिक आय का 10 प्रतिशत से अधिक न चुनें। बहुत बड़ी आय वाले व्यक्ति भी इस सिद्धान्त का पालन करें और अधिकतम कवरेज के लिए एन्डोमेन्ट या फिर टर्म इन्श्योरेन्स का रूख करें।

सुरक्षा कवच कैसा हो ?
बीमा वास्तव में तब काम आता है जब आप काम के नहीं रहते। इसलिए सुरक्षा कवच इस तरह का चुनें जो कि आपके परिवार वाले समझ सकें और समय आने पर उसका लाभ भी ले सकें। यदि आप मध्यम आय के व्यक्ति हैं तो आपकी सालाना आय का कम से कम 14 गुना सुरक्षा आपको लेना चाहिये। ताकि बीमे की रकम के ब्याज से आपके परिवार का काम वैसा ही चलता रहे जैसा कि आपके रहने पर चल रहा है। वर्तमान में कई पेन्शन योजनाऐं भी आ गई हैं जिनमें एक तय रकम की ग्यारन्टी होती है। आप इन्हें भी चुन सकते हैं। किन्तु यह स्मरण रखें कि बीमे का कुल उद्येश्य संकट की घड़ी में आपके परिवार की आर्थिक सुरक्षा ही है, अतः मनी बैक, स्टाक बेस्ड जैसे लुभावने नारों से बच कर सही सुरक्षा चुनें।

क्या बीमे का लक्ष्य टैक्स बचत हो ?
यदि आपका बीमा आपको टैक्स में बचत देता है तो यह सोने में सुहागा है। यदि वह अच्छा रिटर्न देता है तो क्या कहने ! किन्तु कभी भी मात्र इन्ही लक्ष्यों के लिए बीमे का चयन अदूरदर्शी सोच सिद्ध होगी। बीमा लेते समय जांच लें कि वह आय कर विधान की किस धारा में छूट की पात्र है और छूट वास्तव में कितनी मिलेगी। किन्तु यदि आप धारा 80-सी के सभी विकल्पों में रुपये 1.50 लाख लगा चुके हैं तो मात्र इस कारण बीमे से नहीं बचिये कि जब टैक्स में छूट नहीं मिलनी तो बीमे का क्या लाभ ? बीमा का लक्ष्य टैक्स से छूट मात्र नहीं उससे बहुत ज्यादा है।

सुरक्षा अवधि कितनी हो ?
सामान्यतया 25-30 वर्ष की आयु वाले युवा यह सोचते हैं कि अभी मेरी उम्र ही क्या है जो मैं बीमे के बारे में सोचूं ? अभी तो मेरी शादी ही नहीं हुई! यह सोच हानिकारक ही है। बीमा सुरक्षा आप जितनी कम आयु में प्राप्त कर लेते हैं उतनी ही सस्ती पड़ती है। जैसे-जैसे आपकी आयु बढ़ती है प्रीमियम की दर बढ़ती जाती है। इसलिए आप जैसे ही नियमित रूप से कमाई करने लगें पहला अच्छा काम बीमा करना ही करें। स्मरण रहे कि कम आयु में भले ही आपका अपना परिवार न बना हो किन्तु जिन मां-बाप के परिवार के आप अंग हैं उन्हें अपने बुढ़ापे की सुरक्षा आपकी आर्थिक मजबूती ही में प्राप्त हो सकती है। बीमे की अवधि हमेशा सर्वाधिक ही चुनें। स्मरण रहे कि अपने रिटायरमेन्ट की आयु में आप बीमा सुरक्षा ले नहीं सकेंगे, क्योंकि अधिक आयु में बीमा सबसे मंहगा शगल हो जाता है। सो वैसे भी आप उस समय बीमा नहीं खरीद सकेंगे। इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि यदि आयु अधिक हो तो बीमा लेना नहीं है, वरन् इस आयु में तो बीमे की आवश्यकता सर्वाधिक होती है। बीमा सदैव उपलब्ध सर्वाधिक आयु तक का ही लेना चाहिये।

बीमे हेतु सावधानियां
- अपने बीमे की किश्त का भुगतान समय पर करें। यदि पॉलिसी बन्द भी हो गई हो तो जल्द से जल्द वापस चालू करा लें। सामान्यतया त्रैमासिक किश्त ठीक रहती है।
- यदि आवश्यक हो तो बीमा से पहले होने वाली स्वास्थ्य की जांच ठीक तरह से करायें। यह आपको आने वाली परेशानी से आगाह भी कर सकती है।
- बीमे में अपना नाम, पता, जन्मतिथि ही नहीं फोन नम्बर भी जांच लें। किसी गल्ती की दशा में तुरन्त सुधार करायें। वरना क्लेम में उलझन हो सकती है।

- बीमे में नामांकन अवश्य करायें। विवाह के बाद नामांकन में पत्नी का नाम दर्ज करालें। नामांकन की जानकारी ले लें कि क्या वह वही दर्ज है जो आपने चाहा।
- बीमे की पालिसी को सम्भाल कर ऐसी जगह रखें जहां से यह सुलभता से मिल सके। स्मरण रहे कि पालिसी पेमेन्ट की रसीद उतनी जरूरी नहीं है जितनी पालिसी का डाक्यूमेन्ट। हो सके तो उसे लॉकर में रखें जहां से वह आपके परिवार को तुरन्त मिल सकेगी।

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खाद्य तेल से बॉयोडीजल बनाने की योजना की 100 शहरों में शुरुआत

नयी दिल्ली, (एजेंसी).  सरकारी स्वामित्व वाली तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम ने देश के 100 शहरों में इस्तेमाल हो चुके खाना पकाने के तेल से बने बॉयोडीजल को खरीदने के लिए शनिवार को एक कार्यक्रम की शुरुआत की।पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने औपचारिक तौर पर इस कार्यक्रम की शुरुआत की। इस कार्यक्रम के तहत तीनों तेल विपणन कंपनियां इस्तेमाल हो चुके खाद्य तेल से बॉयोडीजल बनाने के लिए संयंत्रों की स्थापना को निजी इकाइयों से अभिरूचि पत्र आमंत्रित करेंगे।

शुरुआत में तेल विपणन कंपनियां इस प्रकार बायोडीजल को 51 रुपये प्रति लीटर की तय दर से खरीदेंगी। दूसरे साल में उसे बढ़ाकर 52.7 रुपये एवं तीसरे वर्ष में 54.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया जाएगा।मंत्री ने इस्तेमाल हो चुके खाद्य तेल के पुन:इस्तेमाल (आरयूसीओ) का स्टिकर एवं इस्तेमाल हो चुके खाना पकाने के तेल (यूसीओ) को एकत्र करने को लेकर एक मोबाइल ऐप की भी शुरुआत की।होटल और रेस्तरां अपने परिसरों में ऐसे स्टिकर लगाएंगे कि वे बॉयोडीजल उत्पादन के लिए यूसीओ की आपूर्ति करते हैं।

विश्व जैव ईंधन दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा, 'कुकिंग ऑयल के अलावा अन्य कई प्रारूप में भी बॉयोडीजल उपलब्ध है। हम विश्व जैव ईंधन दिवस को वैकल्पिक ऊर्जा दिवस के रूप में मनाएंगे।" 

स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इस मौके पर यूसीओ से बॉयोडीजल के उत्पादन को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की।उन्होंने कहा कि खाना पकाने के इस्तेमाल हो चुके तेल के बार-बार इस्तेमाल से उच्च रक्तचाप, एथेरोस्क्लेरोसिस, अल्जाइमर और यकृत से जुड़ी बीमारियों का खतरा होता है। (भाषा)

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पाकिस्तान ने भारत-अफगानिस्तान व्यापार की संभावना खारिज की

इस्लामाबाद, (एजेंसी )।   पाकिस्तान की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वह अफगानिस्तान को वाघा सीमा के रास्ते भारत से वस्तुओं का आयात नहीं करने देगा क्योंकि सीमापार व्यापार एक द्विपक्षीय मुद्दा है, ना कि त्रिपक्षीय। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के वाणिज्यिक सलाहकार अब्दुल रजाक दाऊद ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही।द न्यूज ने दाऊद के हवाले से कहा, ‘‘हमने अफगानिस्तान से कहा है कि वाघा सीमा के जरिये व्यापार संपर्क नहीं जोड़े और वे इसके लिए तैयार हो गये हैं क्योंकि सीमापार व्यापार द्विपक्षीय मुद्दा है, त्रिपक्षीय नहीं।’’ 

इस महीने के आखिर में अफगानिस्तान का दौरा करने जा रहे दाऊद ने कहा कि अफगान पक्ष वाघा सीमा के माध्यम से संपर्क के मुद्दे को उठाने वाला है लेकिन उन्होंने साफ किया कि अफगानिस्तान को एक ऐसे मंच पर द्विपक्षीय मुद्दे को नहीं उठाना चाहिए जो त्रिपक्षीय नहीं है और वे इसके लिए तैयार हो गये।भारत के साथ व्यापार निलंबित करने के संबंध में पूछे गये सवाल पर दाऊद ने कहा कि वह सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद जवाब देंगे।(भाषा)

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प्रधानमंत्री किसान पेंशन योजना: 100 रुपए मासिक प्रीमियम पर किसानों को मिलेगा 3000 रुपये मासिक पेंशन

नई दिल्ली (एजेंसी). प्रधानमंत्री किसान पेंशन योजना के तहत सरकार ने नई स्कीम जारी की है।  प्रधानमंत्री किसान पेंशन योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को हर महीने औसत 100 रुपए मासिक प्रीमियम  देने होंगे और  60 साल की उम्र पूरा होने पर 3,000 रुपये मासिक पेंशन मिलेगी। सरकार ने कहा है कि इस योजना के तहत वह किसानों के पेंशन कोष के लिए बराबर का अंशदन करेगी। इस कोष का भारतीय जीवन बीमा  निगम मैनेज करेगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यों से 18 से 40 वर्ष की आयु के बीच के किसानों का पंजीकरण करने के लिए कहा है। योजना के तहत अगर कोई 29 साल की उम्र में जुड़ता है तो उसे 100 रुपये महीने का योगदान देना होगा। यानी उम्र कम होने पर योगदान कम देना होगा। 

5 करोड़ किसानों को शामिल करने की योजना 
नरेंद्र मोदी सरकार की किसान पेंशन योजना स्कीम में तीन साल में 5 करोड़ किसानों की शामिल करने की योजना है। इससे सरकारी खजाने पर 10,774.5 करोड़ सालाना बोझ पड़ेगा। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से इसे जल्द जल्द से लागू करने के लिए कहा है।

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भारत ने पाकिस्तान से सबसे तरजीही राष्ट्र का दर्जा लिया वापस , व्यापार प्रतिबंध पर विचार

नयी दिल्ली, (एजेंसी ). जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान से व्यापार में 'सबसे तरजीही राष्ट्र (एमएफएन)' का दर्जा वापस ले लिया है। सूत्रों के मुताबिक, भारत सीमा शुल्क में वृद्धि, बंदरगाह से जुड़े प्रतिबंध और पाकिस्तान से आयातित वस्तुओं पर प्रतिबंध जैसे दंडात्मक कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है। सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पाकिस्तान का सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र यानी मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा वापस ले लिया गया है। 

इस कदम से पाकिस्तान द्वारा भारत को किए जाने वाले 48.8 करोड़ डॉलर (करीब 3,482.3 करोड़ रुपये) के सामान के निर्यात पर असर पड़ सकता है। तरजीही राष्ट्र का दर्जा वापस लेने के बाद भारत, पाकिस्तान से आने वाली वस्तुओं पर सीमा शुल्क बढ़ा सकेगा। सूत्रों ने कहा, "सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में तरजीही देश का दर्जा वापस लेने का फैसला किया गया है। सरकार सीमा शुल्क अधिनियम और विदेशी व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है।" 

उन्होंने कहा कि इन कानून के तहत सरकार कुछ सामानों के व्यापार को प्रतिबंधित कर सकती है, सीमा शुल्क में बड़ी वृद्धि कर सकती है और पाकिस्तानी वस्तुओं पर बंदरगाह से संबंधित प्रतिबंध लगा सकती है। पाकिस्तान से जो चीजें आयात की जाती हैं, उनमें मुख्य रूप से फल, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, खनिज संसाधन, लौह अयस्क और तैयार चमड़ा शामिल हैं।भारत ने पाकिस्तान को 1996 में यह दर्जा दिया था, लेकिन पाकिस्तान की ओर से भारत को ऐसा कोई दर्जा नहीं दिया गया। 

व्यापार एवं शुल्क पर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के आम समझौते (जीएटीटी) के तहत एमएफएन का दर्जा दिया गया था। भारत और पाकिस्तान दोनों ने इस पर हस्ताक्षर किए थे और दोनों डब्ल्यूटीओ के सदस्य हैं। तरजीही राष्ट्र समझौते के तहत, डब्लयूटीओ के सदस्य देश अन्य व्यापारिक देशों के साथ बिना किसी भेदभाव के व्यापार करने के लिए बाध्य हैं। खासकर सीमाशुल्क और अन्य शुल्कों के मामले में।इस दर्जे को वापस लेने का अर्थ है कि भारत अब पाकिस्तान से आने वाली वस्तुओं पर किसी भी स्तर तक सीमा शुल्क को बढ़ा सकता है।

पाकिस्तान ने 2012 में भारत को तरजीही देश का दर्जा देने की प्रतिबद्धता जताई थी लेकिन अंदरूनी विद्रोह के चलते बाद में मुकर गया था। पाकिस्तान ने कहा था कि वह भारत को एमएफएन के बजाए गैर-भेदभावपूर्ण बाजार पहुंच (एनडीएमए) का दर्जा देने पर काम कर रहा है। हालांकि, इसकी भी घोषण नहीं की गई। 

भारत-पाकिस्तान का कुल व्यापार 2016-17 में 2.27 अरब डॉलर से मामूली बढ़कर 2017-18 में 2.41 अरब डॉलर हो गया है। भारत ने 2017-18 में 48.8 करोड़ डॉलर का आयात किया था और 1.92 अरब डॉलर का निर्यात किया था।एक अन्य अधिकारिक सूत्र ने कहा, "भारत अपने फैसले के बारे में डब्ल्यूटीओ को सूचित करने के लिए बाध्य नहीं क्योंकि उसने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। भारत ने डब्ल्यूटीओ के अनुच्छेद 21 को लागू किया है।" 

सरकार जल्द ही पाकिस्तान से आने वाली वस्तुओं की एक सूची तैयार करेगी, जिनपर भारत सीमा शुल्क बढ़ाएगा।भारत मुख्य रूप से पाकिस्तान को कच्चा कपास, सूती धागे, डाई, रसायन, प्लास्टिक का निर्यात करता है।व्यापार विशेषज्ञों ने कहा कि इस फैसले का देश के द्विपक्षीय व्यापार पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि दोनों देशों के बीच का कारोबार सालाना तीन अरब डॉलर से भी कम का है। निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस फैसले का असर पाकिस्तान के उन उद्योगों पर पड़ेगा, जो कि भारत में निर्यात कर रहे हैं।

भारतीय विदेश व्‍यापार संस्‍थान (आईआईएफटी) के अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ राकेश मोहन जोशी ने कहा, "सरकार को सावधानीपूर्वक कदम उठाना चाहिए क्योंकि भारत का निर्यात, आयात की तुलना में अधिक है। यदि पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई करेगा तो इसका भारत पर ज्यादा असर होगा।" 

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बंदरगाह, जल परिवहन प्रणाली विकसित करना पहेली प्राथमिकता : गडकरी

चेन्नई,  (भाषा). केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को कहा कि देश में अब तक उपेक्षित किए जाते रहे बंदरगाह क्षेत्र के विकास पर उनकी सरकार का विशेष जोर है।उन्होंने कहा कि बंदरगाहों के पुनरोद्धार और जल परिवहन के विकास के लिए कई कदम उठाए गए हैं। देश के अधिकतर बंदरगाह लाभ कमा रहे हैं।सड़क परिवहन, राजमार्ग, जहाजरानी, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री गडकरी यहां भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जहाजरानी क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी किसी देश की प्रगति उसके बंदरगाहों के विकास पर निर्भर करती है। जहां तक भारत का प्रश्न है, यहां अभी तक इस क्षेत्र की काफी उपेक्षा हुई है। लेकिन अब हम इस पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

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जनवरी में निर्यात 3.74 प्रतिशत बढ़ा

नई दिल्ली (एजेंसी ).  इंजीनियरिंग, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, औषधि तथा रसायन जैसे क्षेत्रों के अच्छे प्रदर्शन से देश का निर्यात जनवरी में मामूली 3.74 प्रतिशत बढ़कर 26.36 अरब डॉलर रहा। जनवरी 2018 में निर्यात 25.41 अरब डालर था। नवंबर और दिसंबर 2018 में निर्यात लगभग स्थिर था।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले महीने आयात 41 अरब डॉलर रहा। इससे व्यापार घाटा कम होकर 14.73 अरब डॉलर पर आ गया।इससे पिछले वर्ष के इसी महीने में व्यापार घाटा 15.67 अरब डॉलर था।हालांकि दिसंबर, 2018 के 13 अरब डालर के मुकाबले इस साल जनवरी में व्यापार घाटा बढ़ गया। जनवरी में इंजीनियरिंग निर्यात में एक प्रतिशत, चमड़ा निर्यात में 0.33 प्रतिशत और रत्न एवं आभूषण निर्यात में 6.67 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी। वहीं पेट्रोलियम पदार्थों के निर्यात में 19 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी।

स्वर्ण आयात इस साल जनवरी में 38.16 प्रतिशत बढ़कर 2.31 अरब डॉलर रहा जो 2018 के इसी महीने में 1.67 अरब डॉलर था।भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (एफआईईओ) के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा है कि चुनौतिपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू मोर्चों पर कुछ चुनौतियों के कारण निर्यात में मामूली वृद्धि दर्ज की गयी है।उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार वृद्धि में नरमी आ रही है और चीन एवं दक्षिण एशियाई देशों सहित वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में कई तरह की चुनौतियां हैं। मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जनवरी के दौरान निर्यात 9.52 प्रतिशत बढ़कर 271.8 अरब डॉलर रहा। इस दौरान आयात भी 11.27 प्रतिशत बढ़कर 427.73 अरब डॉलर रहा।चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीने में व्यापार घाटा बढ़कर 155.93 अरब डॉलर रहा जो इससे पूर्व वित्त वर्ष 2017-18 की इसी अवधि में 136.25 अरब डॉलर रहा था।जनवरी में तेल आयात 3.59 प्रतिशत बढ़कर 11.24 अरब डॉलर रहा।

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छत्तीसगढ़ ’वयोश्रेष्ठ सम्मान-2018’से सम्मानित, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

रायपुर : मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से कल यहां मंत्रालय (महानदी भवन) स्थित उनके कार्यालय कक्ष में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती रमशीला साहू ने सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को राज्य के वरिष्ठ नागरिकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के सर्वश्रेष्ठ क्रियान्वयन के लिए ’वयोश्रेष्ठ सम्मान-2018’ से सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण मंत्री श्रीमती साहू सहित विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। श्रीमती साहू ने सम्मान स्वरूप प्राप्त प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह मुख्यमंत्री को सौंपा। ज्ञातव्य है कि एक अक्टूबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में उप राष्ट्रपति श्री एम.वेंकैया नायडू ने श्रीमती साहू को यह सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव श्री आर. प्रसन्ना और संचालक श्री संजय अलंग भी उपस्थित थे।

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9 माडा क्षेत्रों के 1080 गांवों में निवासरत राशन कार्डधारकों को भी हर महीने मिलेगा 2 किलो देशी चना 5 रुपए की दर पर

रायपुर : मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में अनेक निर्णय लिए गए, जो निम्नानुसार हैः-

 प्रदेश के 09 माडा क्षेत्रों के 1080 गांवों में निवासर्त समस्त अंत्योदय और प्राथमिकता वाले राशन कार्डधारकों को भी छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012 के तहत हर महीने प्रति राशन कार्ड 02 किलो देशी चना 05 रूपए प्रति किलो की दर से दिया जाएगा। लगभग एक लाख 27 हजार 114 राशन कार्ड धारक परिवारों को इसका लाभ मिलेगा।

          उल्लेखनीय है कि माडा क्षेत्र 10 हजार या उससे ज्यादा आबादी वाले  एक से ज्यादा राजस्व गांवों के ऐसे क्षेत्र को कहा जाता है, जहां 50 प्रतिशत या उससे अधिक जनसंख्या आदिवासियों की होती है। छत्तीसगढ़ के 07 जिलों में 09 माडा क्षेत्र हैं इनमें से रायगढ़ जिले में 02 माडा क्षेत्रों -गोपालपुर और सारंगढ़ में क्रमशः 33 और 100 गांव शामिल हैं। राजनांदगांव जिले के नचनिया माडा क्षेत्र में 77, बलोैदाबाजार जिले के माडा क्षेत्र बलौदाबाजार में 147,जांजगीर-चांपा जिले के रूजगा माडा क्षेत्र में 46, कबीरधाम जिले के कवर्धा माडा क्षेत्र 219, महासमुंद जिले के माडा क्षेत्र महासमुंद-1 में 200 और महासमुंद-2 में 215 तथा धमतरी जिले के गंगरेल माडा क्षेत्र में 43 गांव शामिल हैं। इन सभी माडा क्षेत्र के गांवों में अंत्योदय एवं प्राथमिकता वाले राशनकार्ड धारकों की संख्या एक लाख 27 हजार 114 है। अनुसूचित जनजाति बहुल इन माडा क्षेत्रों में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा और कमार समुदायों के लोग भी निवास करते हैं,उन्हें भी इसका लाभ मिलेगा।

 छत्तीसगढ़ स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयीन शैक्षणिक आदर्श सेवा नियम 2018 को प्रदेश में लागू किया जाएगा। इसके अन्तर्गत चिकित्सा महाविद्यालयों और दंत चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए शिक्षकों की नियमित नियुक्ति के अधिकार स्वशासी समिति की कार्यकारिणी समिति को होंगे और नियुक्तियां पारदर्शी तरीके से होंगी, जिनके वेतन भत्तों के भुगतान की व्यवस्था स्वंय के राजस्व से करने केे लिए महाविद्यालय समर्थ रहेगा। यह भी प्रावधान किया गया है कि चयनित शिक्षक अपने-अपने कॉलेजों में ही कार्य करेंगे और उनकी सेवाएं अस्थानांतणीय होंगी। इन नियमों के तहत अधिष्ठाता, प्राचार्य और अस्पताल अधीक्षक जैसे प्रशासनिक पदों पर भर्ती नहीं की जाएगी। पूर्व से कार्यरत एवं लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित नियमित  शिक्षकों की सेवा शर्तें पूर्ववत रहेंगी।

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