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सर्व औषधि गुणों से युक्त ’मुनगा’… 6 जुलाई से पूरे प्रदेश में होगा इसका रोपण…

Date : 05-Jul-2020

रायपुर। छग ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में ’मुनगा’ की विशिष्टता प्रचारित हो चुकी है। इसे उगाने के लिए देश के ही कई हिस्सों में संघर्ष जारी है। इसके विपरीत छग एक ऐसा प्रदेश है, जहां पर मुनगा बड़ी आसानी से अपनी छटाएं बिखेगरता है। ’मुनगा’ एक ऐसा औषधि गुणों से युक्त वृक्ष है, जिसके पत्ते, फूल और फल के एक नहीं बल्कि कई गुण है। बतौर साग जितना यह स्वादिष्ट है, उससे भी कहीं ज्यादा यह दवाई निर्माण के लिए उपयोगी है। यही वजह है कि अब विश्वभर में इसकी मांग बढ़ती जा रही है।

छग सरकार ने इस बात को बेहतर तरीके से समझ लिया है, जिसकी वजह से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार वन विभाग द्वारा 6 जुलाई को राज्य भर में ‘मुनगा’ पौधरोपण का विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के समस्त शासकीय स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों और छात्रावास-आश्रमों में मुनगा के पौधे का रोपण किया जाएगा।

वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि यह अभियान मुख्यमंत्री बघेल के कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने में अहम् भूमिका निभाएगा। राज्य शासन द्वारा संचालित इस महत्वपूर्ण अभियान को शासन-प्रशासन के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों के सहयोग से सफल बनाना है। इस महत्वपूर्ण कार्य को अभियान का रूप देने के लिए राज्य भर में एक ही तिथि 6 जुलाई निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि मुनगा हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। राज्य के स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों और छात्रावास-आश्रमों में इसके रोपण से मुनगा की सहजता से उपलब्धता होगी वहीं इन संस्थाओं के परिसरों में हरियाली सहित पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने अभियान को सफल बनाने के लिए सभी वनमंडलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि पौष्टिकता से भरपूर मुनगा को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। यह डायबिटीज से लेकर कैंसर जैसे भयंकर बीमारियों तक के लिए चमत्कारी होता है। यह भी बताया जाता है कि मुनगा मल्टीविटामिन से भरपूर होता है। इसकी पत्तियों में प्रोटीन के साथ-साथ विटामिन बी-6, विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन ई पाया जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि इसमें आयरन, मैगनिशियम, पोटेशियम और जिंक जैसे मिनरल भी पाए जाते हैं।

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अब आपके बच्चे फेसबुक पर करेंगे पढाई…

Date : 05-Jul-2020

नयी दिल्ली (एजेंसी) । सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने अपने छात्रों और शिक्षकों को डिजिटल सेप्टी की ट्रेनिंग दिलाने के लिए फेसबुक के साथ करार किया है। जिससे कि छात्रों और शिक्षकों ऑनलाइन संभावित मुश्किलों से बचाया जा सके। ऑनलाइन क्लासेस और ई लर्निंग से छात्र में इंटरनेट का इस्तेमाल और ज्यादा बढ़ गया है। कोरोना वायरस का यह दौर ऑनलाइन छेड़छाड़, फेक न्यूज, भ्रामक सूचना और इंटरनेट के इस्तेमाल की लत में भी बढ़ोतरी की है।

इसी को देखते हुए सीबीएसई ने फेसबुक के साथ करार किया है जिसमें फेसबुक टीचर और छात्रों को फ्री में डिजिटल सेफ्टी की ट्रेनिंग देगा। इस ट्रेनिंग का पहला चरण अगस्त से नवंबर 2020 में शुरू होगा जो कि वर्चुअल मोड ट्रेनिंग होगी।

सीबीएसई और फेसबुक की इस ट्रेनिंग में भाग लेने वालों को कोर्स पूरा होने ई सर्टिफिकेट भी दोनों संस्थाओं की ओर से संयुक्त रूप से दिया जाएगा।

सीबीएसई और फेसबुक का यह ट्रेनिंग प्रोग्राम तीन हफ्तों का होगा जिसमें 10000 शिक्षकों को इंटरनेट पर आने वाली चुनौतियों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही 10 हजार स्टूडेंट्स को भी डिजिटल सेफ्टी के बारे में ट्रेन किया जाएगा।

डिजिटल सेफ्टी कैटेगरी के तहत छात्रों को इंस्टाग्राम टूलकिट के बारे में ट्रेन किया जाएगा। इसके लिए रजिष्ट्रेशन प्रकिया 6 जुलाई से 20 जुलाई तक चलेगी। शिक्षकों को ट्रेनिंग प्रोग्रम 10 अगस्त से शुरू होगा जबकि छात्रों के लिए यह कार्यक्रम 6 अगस्त से शुरू किया जाएगा।

सीबीएसई की इस पहल को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने भी सराहा है।

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कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने वाली टीम का हिस्सा बनीं भारतीय मूल की वैज्ञानिक चंद्रबाली दत्ता

Date : 01-Jun-2020

लंदन, (एजेंसी).  कोरोना वायरस से रक्षा करने वाले टीके की खोज करने की परियोजना पर काम कर रही ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की टीम का हिस्सा भारतीय मूल की एक वैज्ञानिक ने कहा कि वह इस मानवीय उद्देश्य का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस करती हैं जिसके नतीजों से दुनिया की उम्मीदें जुड़ी हैं। कोलकाता में जन्मी चंद्रबाली दत्ता विश्वविद्यालय के जेन्नेर इंस्टीट्यूट में क्लीनिकल बायोमैन्चुफैक्चरिंग फैसिलिटी में काम करती हैं जहां कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सीएचएडीओएक्स1 एनसीओवी-19 नाम के टीके के मानवीय परीक्षण का दूसरा और तीसरा चरण चल रहा है।क्वालिटी एस्युरेंस मैनेजर के तौर पर 34 वर्षीय दत्ता का काम यह सुनिश्चित करना है कि टीके के सभी स्तरों का अनुपालन किया जाए।दत्ता ने कहा, ‘‘हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि यह अगले चरण में कामयाब होगा, पूरी दुनिया इस टीके से उम्मीद लगा रही है।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘इस परियोजना का हिस्सा बनना एक तरह से मानवीय उद्देश्य है। हम गैर लाभकारी संगठन हैं, इस टीके को सफल बनाने के लिए हर दिन अतिरिक्त घंटों तक काम कर रहे हैं ताकि इंसानों की जान बचाई जा सकें। यह व्यापक तौर पर सामूहिक प्रयास है और हर कोई इसकी कामयाबी के लिए लगातार काम कर रहा है। मुझे लगता है कि इस परियोजना का हिस्सा होना सम्मान की बात हैं’’. दत्ता जीव विज्ञान के क्षेत्र में पुरुषों के प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए भारत में युवा लड़कियों को प्रेरित करना चाहती हैं।उन्होंने कहा, ‘‘मेरे बचपन का दोस्त नॉटिंघम में पढ़ाई कर रहा था जिसने मुझे प्रेरित किया और ब्रिटेन को समान अधिकारों, महिला अधिकारों के लिए जाना जाता है इसलिए मैंने लीड्स विश्वविद्यालय से जैव प्रौद्योगिकी में मास्टर्स करने का फैसला किया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह असली संघर्ष रहा - भारत छोड़ना और यहां आना। मेरी मां भी इससे खुश नहीं थीं लेकिन मेरे पिता हमेशा मेरे लिए महत्वाकांक्षी रहे और मैंने कहा कि मुझे अपने सपनों को पूरा करना चाहिए और समझौता नहीं करना चाहिए।’’  (भाषा) 

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नासा की अंतरिक्ष यात्रियों के साथ लगभग एक दशक में पहली अंतरिक्ष उड़ान के लिए पहुंचे टेस्ट पायलट

Date : 21-May-2020

केप केनवरल, (एजेंसी). नासा के लिए स्पेसएक्स के रॉकेट से अपनी ऐतिहासिक अंतरिक्ष उड़ान से ठीक एक हफ्ते पहले दो अंतरिक्ष यात्री बुधवार को केनेडी स्पेस सेंटर पहुंच गए। यह पिछले नौ साल के बाद अंतरिक्ष यात्रियों के साथ होने वाली पहली अंतरिक्ष उड़ान है।यह पहली बार है कि सरकार के बजाय कोई निजी कंपनी अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजेगी।नासा के टेस्ट पायलट डग हर्ली और बॉब बेन्कन स्पेस एजेंसी के एक विमान से ह्यूस्टन स्थित अपने घर से फ्लोरिडा पहुंचे।हर्ली ने पत्रकारों से कहा, ‘‘यह नासा और अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए अद्भुत समय है, एक बार फिर फ्लोरिडा से अमेरिकी चालक दल के सदस्यों को भेज रहे हैं और उम्मीद है कि यह अब से करीब एक हफ्ते में होगा।’’ बेन्कन ने कहा, ‘‘हम इसे एक अवसर के तौर पर देखते हैं लेकिन साथ ही यह अमेरिकी लोगों, स्पेसएक्स की टीम और नासा के सभी लोगों के लिए हमारी जिम्मेदारी है।’’ दोनों को स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से अगले बुधवार को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के लिए उड़ान भरनी है। (भाषा )

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लॉकडाउन से परेशानी में सुंदरबन के लोग, जहां एक ओर भूख का डर वहीं दुसरी ओर जान का खतरा

Date : 07-May-2020

स्पेशल स्टोरी। एक तरफ़ कुआँ और दूसरी तरफ़ खाई वाली कहावत तो बहुत पुरानी है। लेकिन कोरोना की वजह से जारी देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान यह कहावत पश्चिम बंगाल के सुंदरबन इलाक़े के लोगों पर एक बार फिर चिट्ठी हो रही है।सादडाउन के दौरान घरों में बंद रहने की वजह से उनकी कमाई ठप हो गई है। लेकिन घरों से निकल कर जंगल के भीतर जाने पर जान का ख़तरा है। इसी तरह वन विभाग ने इस साल जंगल के भीतर प्रवेश के लिए ज़रूरी परमिट पर पाबंदी लगा दी है।

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश सीमा से सटा सुंदरबन इलाक़ा अपनी जैविक विविधता और मैंग्रोव के जंगल के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यह दुनिया में रॉयल बंगाल टाइगर का सबसे बड़ा घर भी है। इलाक़े के 54 द्वीपों पर इंसानी बस्तियां हैं। कोरोना के डर से इनमें से कई द्वीपों ने ख़ुद को मुख्यभूमि से काट लिया। इनसे द्वीपों की भौगोलिक स्थिति अब तक उनके लिए रक्षा कवच बनी हुई है। बाहर से अब कोई भी पहुंच नहीं रहा है। पहले जो लोग देश के विभिन्न हिस्सों से आए थे, उन्हें भी जाँच के बाद 14 दिनों के लिए क्वारंटीन में रहना पड़ा था।ये द्वीपों पर रहने वाले लोग मुख्य रूप से खेती, मछली पकड़ने और जंगल से शहद एकत्र कर अपनी आजीविका चलाते हैं। लॉकडाउन की वजह से वन विभाग ने इस साल इन कामों के लिए जंगल में प्रवेश करने का परमिट नहीं दिया है।

अप्रैल से जून तक सबसे ज्यादा शहद निकाला जाता है। कई लोग चोरी-छिपे जंगल जाते हैं। अब इन लोगों के सामने हालत यह है कि जंगल में जाओ तो बाघ का शिकार बने और घर में रहो तो भूख का। लॉकडाउन लागू होने के बाद अब तक दो लोग बाघों का शिकार बन चुके हैं। इलाक़े के हज़ारों लोग जंगल के भीतर जाकर शहद एकत्र कर या मछली और केकड़े पकड़ कर उसे कोलकाता के बाज़ारों में बेच कर परिवार के लिए साल भर की रोज़ी-रोटी का जुगाड़ करते हैं। गोपाल मंडल (55) भी इनमें से एक हैं।
पाखिरमाला के रहने वाले मंडल कहते हैं, "वन विभाग ने इस साल परमिट नहीं दिया है। अगर हम घर में रहें तो देर-सबेर भूख मारेंगे और चोरी-छिपे जंगल में गए तो बाघ हमें मार देंगे। यह एक ख़तरनाक पेशा है। "

मंडल के पिता और दो भाई शहद एकत्र करने के प्रयास में ही बाघों के शिकार बन चुके हैं। फिर भी मंडल जान हथेली में बारे में साल साल जंगल में जाते हैं.वह कहते हैं, "घर में तेल, मसल्स और दूसरी ज़रूरी चीजें ख़रीदने के पैसे नहीं हैं। सरकार की ओर से सहायता ज़रूर मिल रही है लेकिन वह नाकाफ़ी है।" पश्चिम बंगाल के शेफ वाइल्डलाइफ वार्डन आर.के. सिन्हा कहते हैं, "प्रजनन का सीज़न होने की वजह से अप्रैल से जून के बीच मछली पकड़ने और पर्यटन गतिविधियों पर रोक रहती है। इस दौरान सिर्फ़ शहद एकत्र करने वालों को जंगल में जाने की अनुमति दी जाती है। लेकिन लॉकडाउन की वजह से। साल वह भी बंद है।
विभाग इसके लिए हर साल तीन हज़ार लोगों को परमिट जारी करता है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे कहीं ज्यादा लोग बिना परमिट के बिना अवैध तरीकेक़े से जंगल में जाते हैं।
शहद एकत्र कर आजीविका चलाने वाले नीतीश मंडल कहते हैं, "शहद एकत्र करने के लिए अप्रैल पीक सीज़न होता है। लेकिन लॉकडाउन की वजह से हमें जंगल में जाने की अनुमति नहीं मिली है। पता नहीं अब हमारी संसार कैसे चलेगा?"
सरकार से राशन के ज़रिए मिलने वाले चावल-दाल पूरे परिवार के लिए कम पड़ रही है। उनका सवाल है कि पांच लोगों का परिवार 20 किलो चावल, चार किलो आटा और तीन किलो आलू में पूरा महीना कैसे गुजरा सकता है?
दूसरी ओर, वन विभाग प्रभाग जैसे लोगों की सहायता के लिए कुछ योजनाएं तो बना रहा है। लेकिन उन्हें मूर्त रूप देने में काफ़ी समय लगेगा।सुंदरबन टाइगर रिज़र्व के फ़ील्ड डायरेक्टर सुधीर दास कहते हैं, "हम स्थानीय लोगों को अतिरिक्त रोज़गार का मौक़ा देने के लिए कुछ योजनाएँ बना रहे हैं। लेकिन अभी भी प्रस्ताव का स्तर पर ही हैं।" कुछ ग़ैर-सरकारी संगठन भी इलाक़े के लोगों तक पहुँच गए हैं। लेकिन वह भी अब तक ज्यादातर द्वीपों तक नहीं पहुंच पाए। दादस बताते हैं, "लॉकडाउन की वजह से तमाम आंदोलनों वाले ठप हो जाने की वजह से रोज़ाना बाघ जंगल से बाहर निकलने लगे हैं। पहले बहुत मुश्किल से बाघ नज़र आते थे।"
सुंदरबन इलाक़े में पैदा होने वाली चिंताओं को लॉकडाउन से पहले तक रोज़ाना लोकल ट्रेनों के ज़रिए कोलकाता के डेल्टा बाज़ारों में पहुंचती थीं। अब आलम यह है कि सतर्कता तो बहुत हुई हैं। लेकिन लॉक'डाउन के चलते यह बाहर नहीं जा रहा है। परिणतन लोग स्थानीय एचपी बाज़ारों में लागत से बहुत कम क़ीमत पर इसे बेचने पर मजबूर कर रहे हैं। (बीबीसी)

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केन्या: एक विधवा मां की मजबूरी, भूखे बच्चों को बहलाने के लिए बर्तन में उबाले पत्थर

Date : 02-May-2020

नैरोबी(एजेंसी). कोरोना वायरस दुनियाभर के देशों में कहर बन कर गिरा है। कोरोना काल के इस दौर में गरीबी और भुखमरी भी एक बड़ी चुनौती है, जिससे जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। ऐसा ही एक वाक्या केन्या में देखने को मिला, जहां आठ बच्चों की एक मां ने बर्तन में पत्थरों को उबाला। मां की तरफ से ऐसा इसलिए किया गया ताकी, वह बच्चों को यह विश्वास दिला सके कि खाना पक रहा है।महिला ने बताया कि उसने ऐसा इसलिए किया ताकी बच्चे खाना बनने के इंतजार में सो जाएं।किसावो ने बताया, ‘‘मुझे अपने सबसे छोटे बच्चे को यकीन दिलाना था कि खाना बन रहा है। वह भूख से रो रहा था। मेरे बाकी बच्चे थोड़े बड़े हैं।  जब मैंने उनसे कहा कि हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं है, तो वे समझ गए।’’ बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मोम्बासा में रहने वाली महिला पनिहा बहाती किसाव इन दिनों काफी मुश्किलों का सामना कर रही हैं। वह अनपढ़ हैं और घर चलाने के लिए वह लोगों के कपड़े धोती हैं। वह दो कमरे के घर में रहती हैं। इस घर में न तो पानी की सुविधा है और नहीं बिजली की। 
कोरोना वायरस के कारण लोग एक दूसरे से दूरी बना रहे हैं, जिसके कारण अब उनका काम छिन गया है। जब गरीब महिला की परेशानी को पड़ोसी ने देखा, तो उन्होंने मीडिया को इसकी जानकारी दी। इसके साथ ही मदद के लिए उन्होंने महिला का एक बैंक अकाउंट भी खोला।
जब इस महिला के बारे में केन्या के लोगों को पता चला, तब कई लोग मदद के लिए आगे आए। लोगों ने महिला के बैंक खाते और मोबाइल फोन के जरिए पैसा दान करना शुरू किया। किसावो एक विधवा है। उनके पति को साल भर पहले डाकुओं ने मार डाला था। 

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लव-स्टोरी: इरफान खान और उनकी पत्नि सुतापा की पहली मुलाकात प्यार में बदल गई और फिर शादी

Date : 02-May-2020

नई दिल्ली (एजेंसी).  इरफान खान (Irrfan Khan) ने 29 अप्रैल को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में आखिरी सांस लीं. उनके इस दुनिया से चले जाने के बाद फिल्म इंडस्ट्री से लेकर दुनियाभर के उनके फैंस में गम का माहौल छा गया. इस आखिरी समय में उनका परिवार उनके साथ था. इरफान की पत्नि सुतपा सिकदर उनको अपनी मजबूती बताते थे. इरफान के निधन के बाद अब उनके परिवार में उनकी पत्नि सुतापा सिकदर और उनके दो बेटे बाबिल और अयान हैं. उन्होंने कैंसर से जंग जीतने की इच्छा जाहिर करते हुए एक इंटरव्यू में कहा था कि 'वह अपनी पत्नी के लिए जिंदा रहना चाहते हैं.' जानते हैं इरफान और उनकी पत्नि की दिल को छू जाने वाली कुछ खास बातें...

इरफान खान ने साल 1995 में सुतापा सिकदर (Sutapa Sidkar) से शादी की थी. दिल्ली में जन्मी सुतापा एक इंडियन फिल्म और डायलॉग राइटर हैं. वह नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में इरफान की साथ स्नातक की पढ़ाई कर रही थीं तभी दोनों में दोस्ती की शुरुआत हुई जो आगे चलकर प्यार में बदल गई. उनकी फिल्म क्रेडिट में खामोशी: द म्यूजिकल, सुपारी और शब्‍द शामिल हैं. इस कपल को अपने कॉलेज के दिनों में प्यार हो गया और 23 फरवरी, 1995 को शादी के बंधन में बंध गए थे. इरफान जब अपनी मास्टर्स की डिग्री हासिल कर रहे थे तभी उन्हें दिल्ली के NSD से ऑडिशन कॉल आया. ऐसे में वह ऑडिशन देने जा पहुंचे. वह अपने ऑडिशन में पास हुए और इरफान को स्कॉलरशिप मिल गई. इरफान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा का हिस्सा बनने के लिए दिल्ली आ चुके थे. पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात सुतापा सिकदर से हुई. दोनों के बीच दोस्ती गहरी होती गई. दोनों एक जैसा सोचते थे ऐसे में जल्द ही सुतपा और इरफान रिलेशनशिप में आ गए. साल 1995 के फरवरी महीने में इस कपल ने सिंपल कोर्ट मैरेज कर ली और पति पत्नी के रूप में अपने जीवन की शुरुआत की.

इरफान के इंतेकाल के बाद अब उनके परिवार में उनकी पत्नि सुतापा सिकदार और उनके दो बेटे बाबिल और अयान हैं. सुतपा ने अपने शौहर को याद करते हुए उनके फैंस और चाहने वालों के लिए एक मैसेज लिखा है. इरफान खान को अलविदा कहते हुए सुतपा ने लिखा, “मैंने कुछ खोया नहीं... मैंने हर तरह से पाया है.” 

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कोरोना के संक्रमण और उसके लक्षण सामने आने में कितना समय लगता है?

Date : 21-Mar-2020

दुनिया भर के 185 से भी ज़्यादा देशों में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले सामने आए हैं.विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे एक महामारी घोषित किया है.भारत और अमरीका ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए अपने यहां यात्रा प्रतिबंध लागू किए हैं.  कोरोना के संक्रमण और उसके लक्षण सामने आने में कितना समय लगता है? वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस से संक्रमण के बाद इसके लक्षण सामने आने में पांच दिनों का समय लगता है लेकिन कुछ लोगों में इसके लक्षण दिखने में इससे ज़्यादा वक़्त भी लग सकता है.विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के लक्षण 14 दिनों तक रहते हैं. लेकिन कुछ शोधकर्ताओं की राय में इसके लक्षण 24 दिनों तक रह सकते हैं. कोरोना वायरस से जुड़े कई सवाल जिनके जवाब आपको जानना चाहिए -

फ़्लू और कोरोना वायरस में क्या अंतर है?
कोरोना वायरस और फ़्लू (बुखार और संक्रामक जुकाम) के कई लक्षण एक जैसे हैं. बिना मेडिकल टेस्ट के इसके अंतर को समझना मुश्किल है.कोरोना वायरस के प्रमुख लक्षण बुखार और सर्दी ही है. फ्लू में अक्सर दूसरे लक्षण भी दिखाई देते हैं जैसे गले में दर्द.जबकि कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति को सांस की तकलीफ़ की शिकायत रहती है.

कोरोना से संक्रमण के बाद ठीक होने वाले लोग दोबारा संक्रमित नहीं होंगे?
फिलहाल ये कहना जल्दबाज़ी होगी. इस वायरस के बारे में अभी दिसंबर में ही पता चला है.वायरस संक्रमण के दूसरे मामलों से जुड़े अतीत के अनुभव बताते हैं कि रोग रोग प्रतिरोधकों के ज़रिये इससे बचाव किया जा सकता है. चीन से मिलने वाली कुछ रिपोर्टों में ये कहा गया है कि हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद भी कुछ लोगों के टेस्ट पॉज़िटिव पाए गए हैं पर हम उन टेस्ट को लेकर पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकते.हालांकि गौर करने वाली बात ये है कि ऐसे लोगों से अब संक्रमण का कोई ख़तरा नहीं था.

अस्थमा के मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक़?
हमारे श्वसन तंत्र या हमारी सांस लेने की प्रणाली में किसी भी तरह का संक्रमण, वो चाहे कोरोना वायरस ही क्यों न हो, अस्थमा की तकलीफ़ बढ़ा सकता है.
कोरोना वायरस को लेकर चिंतित अस्थमा के मरीज कुछ एहतियाती कदम उठा सकते हैं. इसमें डॉक्टर द्वारा सुझाए गए इनहेलर का इस्तेमाल भी शामिल है.
इससे कोरोना सहित किसी वायरस किसी वजह से पड़ने वाले अस्थमा के दौरे का ख़तरा कम होता है.

क्या कोरोना का संक्रमण फोन से भी हो सकता है?
माना जाता है कि कोरोना वायरस का संक्रमण छींकने या खांसने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हो सकता है. लेकिन जानकारों का कहना है कि ये वायरस किसी सतह पर भी अस्तित्व में रह सकता है और वो भी संभवतः कई दिनों तक.
इसलिए ये अहम है कि आपका फोन चाहे घर पर हो या दफ़्तर में पूरी तरह से बार-बार साफ़ हो. आजकल जो मोबाइल फोन आते हैं, उनके बारे में कहा जाता है कि वे वाटर रेजिस्टेंस होते हैं यानी पानी से उनको कम ख़तरा रहता है.अगर ऐसा है तो आप फोन को साबुन और पानी या फिर पेपर टॉवल से साफ़ कर सकते हैं लेकिन ऐसा करने से पहले ये ज़रूर जांच लें कि आपका फोन वाटर रेजिस्टेंस है या नहीं.

क्या कोरोना दरवाज़े के हैंडल से भी फैल सकता है?
अगर कोई संक्रमित व्यक्ति छींकते वक़्त मुंह पर हाथ रखता है और फिर उसी हाथ से वो किसी चीज़ को छूता है तो वो सतह विषाणु युक्त हो जाती है.दरवाज़े के हैंडल ऐसी सतहों के अच्छे उदाहरण हैं जिससे दूसरे लोगों को संक्रमण का ख़तरा हो सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस किसी सतह पर भी अस्तित्व में रह सकता है और वो भी कई दिनों तक.

मास्क पहनना कितना ज़रूरी?
हालांकि डॉक्टर लोग हमेशा ही मास्क पहने हुए दिखते हैं लेकिन इस बात के प्रमाण कम ही मिलते हैं कि आम लोगों के मास्क पहनने से चीज़ें बदल जाती हैं.ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए वो मास्क पहनने की सिफारिश नहीं करता है.फिर भी अपनी सुरक्षा के लिए मास्क पहनना जरुरी है. विशेषज्ञों की राय में साफ़-सफ़ाई जैसे कि नियमित रूप से हाथ धोना ज़्यादा असरदार है.

बच्चों के लिए कितना ख़तरा?
चीन से मिल रहे आंकड़ों के अनुसार बच्चे तुलनात्मक रूप से कोरोना संक्रमण से बचे हुए हैं.हालांकि जिन बच्चों को फेफड़े की बीमारी है या फिर अस्थमा है, उन्हें ज़्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है क्योंकि ऐसे मामलों में कोरोना वायरस हमला कर सकता है.ज़्यादातर बच्चों के लिए ये श्वसन संबंधी सामान्य संक्रमण की तरह है और इसमें ख़तरे जैसी कोई बात नहीं है.

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पत्नी को झूठ बोलकर प्रेमिका के साथ इटली गया युवक, जब कोरोना की चपेट में आया तो मामला फूटा

Date : 20-Mar-2020

रोम (एजेंसी)। कोरोना वायरस की डरा देने वाली कहानियों के बीच ब्रिटेन में एक दिलचस्प मामला सामने आया है। दरअसल, ब्रिटेन का एक शादीशुदा युवक पत्नी को धोखे में रखकर चोरी छिपे घूमने गया था, जहां वह कोरोना की चपेट में आ गया और पूरे मामले का भंडाफोड़ हो गया।
द सन की प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, 30 साल का यह युवक पत्नी को बताकर गया था कि वह कारोबारी यात्रा पर ब्रिटेन में ही दूसरे शहर जा रहा है। घर लौटने के बाद उसमें कोरोना के लक्षण दिखने लगे, जांच के बाद पाया गया कि वह संक्रमित है। पुलिस और स्वास्थ्यकर्मियों की पूछताछ में उसे बताना पड़ा कि वह ब्रिटेन में था ही नहीं, इटली में अपनी प्रेमिका के साथ था। 
पत्नी को इसकी भनक लगी तो मामले ने तूल पकड़ लिया। पत्नी का कहना है कि संक्रमित होने के कारण अभी वह कुछ नहीं बोलेगी। स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार, युवक की हालत स्थिर है और वह जल्द महामारी से उबर जाएगा। बता दें कि इटली में कोरोना का कहर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। यहां चीन से अधिक मौतें हो चुकी हैं। 

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सामूहिक विवाह : 230 नव दम्पत्तियों को गृहस्थ जीवन का मिला आशीर्वाद

Date : 02-Mar-2020

नारायणपुर। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत 230 वर-वधू एक ही मंडप के नीचे दाम्पत्य सूत्र में बंधे और साथ-साथ सुखमय जीवन जीने की शपथ ली।जिला मुख्यालय में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 230 नव दम्पत्तियों को जनसम्पर्क की मासिक पत्रिका भेंट की गई।

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