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एक ऐसे गांव जहां सिर्फ महिलाएं रहती हैं, पुरुषों की एंट्री पर पूरी तरह से लगी रोक

Date : 16-Oct-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर चल रही हैं. इतना ही नहीं अपनी मेहनत और कड़े संघर्ष से मिलने वाली सफलता की बदौलत पुरुषों को कड़ी टक्कर भी दे रही हैं. आज इंटरनेशनल डे ऑफ रूरल वीमेन यानी ग्रामीण महिलाओं का दिन है। यूं तो ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष और तरक्की की खूब कहानियां आपने सुनी होगी, लेकिन ये थोड़ी हटकर है।

हम आपको आज एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां सिर्फ महिलाएं रहती हैं। पुरुषों की एंट्री पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है। गांव के तारो तरफ कंटीले तार लगे हुए हैं। अगर कोई जबरन घुसने की कोशिश करता है तो गांव की महिलाएं अपने अंदाज में उसे सजा भी देती हैं। ‘द गार्जियन’ ने केन्या में बसे इस उमोजा गांव पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है।

पूरे गांव में केवल महिलाएं रहती हैं। केवल पर्यटन के लिए आने वाले पुरुषों को ही गांव में एंट्री मिलती है।

गांव में रहने वाली ज्यादातर महिलाएं दुष्कर्म पीड़िता हैं। जिन्होंने जिंदगी में बहुत संघर्ष किया और तमाम तरह की प्रताड़नाएं झेली हैं। गांव की जेनी बताती हैं कि 1990 में सबसे पहले 15 महिलाएं इस गांव में रहने आईं। सभी महिलाएं ब्रिटिश सैनिकों की हवस का शिकार हुईं थीं। ब्रिटिश सैनिकों ने इन महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया था।

जेनी ने खुद की कहानी भी साझा की। कहती हैं, ‘मैं गांव के बाहर अपने जानवरों को चराने गई थी। इसी दौरान तीन ब्रिटिश सैनिकों ने मुझपर हमला कर दिया। तीनों ने एक-एक करके दुष्कर्म किया। मुझे काफी चोट भी आई। जब मैंने इसके बारे में अपने पति से कहा तो उसने भी डंडों से मुझे मारा। मैं दर्द से तड़प रही थी। फिर मैं अपने बच्चों के साथ यहां आ गई।’ गांव की स्थापना रेबेका लोलोसोली ने की है।

रेबेका को महिलाओं के लिए अलग गांव बनाने का आइडिया तब आया जब वो खुद पुरुष प्रताड़ना का शिकार हुईं। रेबेका बताती हैं, ‘मैं अपने गांव की महिलाओं उनके अधिकारों के बारे में बता रही थी। ये मेरे गांव के पुरुषों को पसंद नहीं आया और उन्होंने ग्रुप बनाकर मुझे बहुत मारा। कई दिनों तक मैं अस्पताल में रही। उस गांव में महिलाओं को बोलने और खुद से कुछ करने का हक नहीं था। इसलिए मैंने महिलाओं के लिए अलग गांव बनाने का फैसला लिया।

मैं घर छोड़कर यहां आ गई और यहां मैंने महिलाओं का एक नया संसार बनाया। इस संसार में महिलाओं को उनके अधिकार बताए जाते हैं। बच्चियों को संघर्ष करना सिखाया जाता है।’ इस गांव में अब 47 महिलाएं रहती हैं और 200 बच्चे हैं। अगर किसी का बेटा होता है उसे वह 18 साल तक गांव में रह सकता है, इसके बाद उसे गांव छोड़ना होता है। अब ये गांव एक तरह का टूरिस्ट प्लेस बन चुका है। यहां कई देशों से पर्यटक आते हैं।

पर्यटन के तौर पर आने वाले पुरुषों को गांव में घुसने की अनुमति है, लेकिन इसके लिए उन्हें फीस देना पड़ता है। गांव की महिलाएं समबुरू परंपरा के कपड़े और आभूषण तैयार करके उसे बाजार में बेचती हैं। बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी ये परंपरागत आभूषण और कपड़े काफी अच्छे लगते हैं।

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बिना चेहरे के पैदा हुई बच्ची, मौत को दी मात, डॉक्टरों ने कर दी थी मौत की भविष्वाणी

Date : 11-Oct-2021

ब्रासीलिया (एजेंसी)। कहते हैं कि जीवन और मौत ऊपर वाले के हाथ में होता है, ये बात बिना चेहरे के पैदा हुई बच्ची विटोरिया मार्चियोली के केस में सच साबित हुई है. डॉक्टरों ने इस बच्ची के पैदा होते ही मौत की ‘भविष्यवाणी’ कर दी थी. परिवार वालों की खुशी मातम में बदल गई थी, यहां तक कि बच्ची के अंतिम संस्कार की तैयारी होने लगी थी लेकिन कुदरत के करिश्मे ने मेडिकल साइंस को गलत साबित कर दिया. बच्ची आज भी जिंदा है.

ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम से पीड़ित है बच्ची

ब्राजील के बारा डी साओ फ्रांसिस्‍को में विटोरिया मार्चियोली का जन्म हुआ. यह बच्ची सामान्य बच्चों से बिल्कुल अलग थी. बच्ची के न आंख थी, न नाक, चेहरा ही नहीं था. जब डॉक्टरों ने बच्ची को देखा तो वो हैरान रह गए थे कि इस बच्ची का जन्म कैसे हो सकता है. डॉक्टरों की टीम ने टेस्ट के बाद बच्ची के मां-बाप से कहा कि यह बच्ची कुछ ही देर की मेहमान है. डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची का जीना असंभव है. डॉक्टरों के इतना बताते ही परिवार की खुशी मातम में बदल गई.

चेहरे की 40 हड्डियां विकसित ही नहीं हो पाई थीं

डॉक्टरों के मुताबिक ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम (Treacher Collins syndrome) के चलते उस छोटी सी बच्ची के चेहरे की 40 हड्डियां विकसित ही नहीं हो पाई थीं इसलिए उसके पास न तो आंख थीं और न ही नाक. बिना चेहरे के जीवन असंभव है. डॉक्टरों के इतना कहने और बच्ची की हालत देखने के बाद परिवार वाले भी मान चुके थे कि बच्ची कुछ ही देर की मेहमान है, कभी भी उसकी सांसें थम सकती हैं. परिवार वाले भारी मन से बच्ची के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने डॉक्टरों को गलत साबित कर दिया.

मौत को दी मात

रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों ने जिस बच्ची को कुछ ही मिनटों की मेहमान बताया था उस बच्ची ने मौत को मात दे दी. जब दो दिनों बाद भी बच्ची जिंदा थी तो फिर डॉक्टरों ने उसे विशेषज्ञों पास रेफर कर दिया. इसके बाद विटोरिया मार्चियोली की आंख, नाक और मुंह की आठ सर्जरी हो चुकी हैं. डॉक्टर समेत परिवार वाले उसका जीवन बेहतर बनाने के लिए लगातार कोशिशें कर रहे हैं. चूंकि बच्ची का इलाज काफी महंगा है इसलिए कई लोगों ने मदद के हाथ बढ़ाए. लोग इस बच्ची को नई जिंदगी देने के लिए अपनी-अपनी सामर्थ्य के हिसाब से दान दे रहे हैं. हाल ही में बच्ची ने अपना 9वां जन्मदिन बनाया है.

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जन्म लेते ही 1 दिन की बच्ची हो गई प्रेग्नेंट, देखकर डॉक्टर भी हैरान

Date : 31-Jul-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। क्या कभी आपने सुना है कि कोई बच्ची अपने मां के गर्भ से निकलते ही प्रेगेनेंट हो गई हो नहीं ना, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी ही खबर के बारे में बताने जा रहे हैं। बता दें कि, ये मामला इजरायल का है, जहां डॉक्टर्स की टीम तब हैरान रह गई जब उन्होंने पाया कि एक दिन की नवजात बच्ची के पेट में दूसरा बच्चा पल रहा था। आपको बता दें कि, पूरी दुनिया में 5 लाख बर्थ केस में एक ही ऐसा मामला आता है।

जानकारी के अनुसार, बच्ची का जन्म इस महीने की शुरुआत में इजरायल के आसुता मेडिकल सेंटर में हुआ था। इसके बाद डॉक्टर्स ने पाया कि बच्ची का पेट काफी अजीब सा है और उसके बाद उन्होंने बच्ची का एक्सरे करवाने का फैसला किया मगर एक्सरे रिपोर्ट में सामने आया कि बच्ची के पेट में दूसरा बच्चा पल रहा है, जिसको देखकर डॉक्टर्स भी हैरान रह गए।

दरअसल, बच्ची की मां के गर्भ में ट्विन्स थी मगर इनमें से एक ट्विन अपनी बहन के पेट में पलने लगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस बच्ची का जन्म नॉर्मल डिलीवरी से हुआ, मगर जब वो मां के पेट से बाहर आई, तो डॉक्टर्स को उसके पेट के अंदर कुछ होने का अहसास हुआ और उसके बाद जब अल्ट्रासाउंड करवा गया तो दूसरे बच्चे की बात कंफर्म हो गई। इसके बाद मेडिकल टीम तुरंत एक्टिव हो गई। जांच में दिखा कि बच्ची के पेट में छोटा सा भृम था। उसे तुरंत सर्जरी के जरिये बच्ची के पेट से बाहर निकाला गया।

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इस देश में शरीर में आग लगाकर की जाती है ​बीमारियों का इलाज, पढे पूरी खबर

Date : 30-Jul-2021

चीन (एजेंसी)। आपने अब तक देखा होगा कि डॉक्टर किसी भी बिमारी दवाई या जड़ी-बूटियों ठीक करते है। लेकिन कभी शरीर में आग लगाकर ​बीमारियों का इलाज करते देखा है? चीन में कुछ ऐसा ही होता है। यहां एक ऐसी विधा है, जो पिछले 100 साल से भी ज्यादा समय से चीन में इस्तेमाल हो रही है। इसे ‘फायर थेरेपी’ के तौर पर जाना जाता है।

खबरों के मुताबिक, पहले मरीज की पीठ पर जड़ी बूटियों से बना एक लेप लगाया जाता है और फिर उसे एक तौलिये से ढक दिया जाता है। फिर उस पर पानी और अल्कोहल का छिड़काव किया जाता है और मरीज के शरीर में आग लगा दिया जाता है। इलाज का यह तरीका चीन की प्राचीन मान्यताओं पर आधारित है, जिसके अनुसार शरीर में गर्मी और ठंडक के बीच सामंजस्य बिठाने पर जोर दिया गया है।

फायर थेरेपी को लेकर कई सवाल भी खड़े हो चुके हैं। इनमें अहम है कि इलाज करने वाले के पास सर्टिफिकेट है या नहीं। इलाज के दौरान किसी दुर्घटना से बचने के लिए किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था है?

इस मामले में झांग फेंगाओ का कहना है कि कई बार लोगों को चोट भी आई है, कई बार मरीज के चेहरे और शरीर के दूसरे हिस्से थोड़े जल भी गए, लेकिन यह सही तरीकों की कमी की वजह से हुआ। मैंने हजारों लोगों को फायर थेरेपी सिखाई है, लेकिन कभी कोई हादसा नहीं हुआ।

झांग फेंगाओ का कहना है कि फायर थेरेपी मानव इतिहास में चौथी बड़ी क्रांति है। इसने चीनी और पश्चिम दोनों ही तरह की इलाज पद्धतियों को पीछे छोड़ा है। चूंकि भयंकर बीमारियों के इलाज में भारी-भरकम राशि खर्च करना हर किसी के बस की बात नहीं है, ऐसे में फायर थेरेपी उनके लिए कारगर और एक सस्ता इलाज है।

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बच्ची का शरीर धीरे.धीरे पत्थर में हो रहा तब्दील, बीमारी को देखकर डॉक्टर भी हैरान

Date : 02-Jul-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। 5 महीने की लेक्सी रॉबिंस के पेरेंट्स के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनकी बच्ची को ऐसी दुर्लभ बीमारी है, जिसका इलाज मिलना ही मुश्किल है। 31 जनवरी को बच्ची का जन्म हुआ था। उनके माता-पिता एलेक्स और डेव बेहद खुश थे, जब तक उन्हें बच्ची की इस गंभीर और लाइलाज बीमारी के बारे में नहीं पता था। बच्ची का शरीर धीरे-धीरे पत्थर में तब्दील हो रहा है। इस बीमारी को देखकर डॉक्टर भी हैरान है।

उसने दूसरे बच्चों की तरह ही एक्टिविटीज शुरू कीं और उनके पेरेंट्स को लगा कि उनका बच्चा काफी स्ट्रॉन्ग है.। पहले बच्ची के पैर में एक गोखरू जैसी चीज दिखी। इसके बाद जब बच्ची को डॉक्टर के पास ले जाया गया तो उसे फाइब्रोडिस्प्लेशिया आॅसिफिशियंस प्रोग्रेसिवा नाम की बीमारी होने का पता चला।

इस जेनेटिक डिसआॅर्डर में शरीर के अंदर मांस और कोशिकाएं खत्म होने लगती हैं और इसका स्थान हड्डियां ले लेती हैं। पहली बार अप्रैल में एक्सरे के बाद पता चला कि लेक्सी के पांव में गोखरू बना हुआ है और उसके हाथ के अंगूठे में भी डबल ज्वाइंट है।

डॉक्टरों ने ये भी बताया कि शायद बच्ची चल-फिर भी नहीं पाएगी। माता-पिता ने इंटरनेट पर बीमारी के बारे में काफी कुछ पढ़ा और बच्ची को स्पेशलिस्ट के पास लेकर गए। उसके तमाम जेनेटिक टेस्ट कराए गए और बच्ची को की पुष्टि हो गई।

-डॉक्टर भी बीमारी देखकर हैं हैरान

लिक्सी को उनके पेरेंट्स ने ब्रिटेन के सबसे बेहतरीन डॉक्टर को दिखाया और उन्होंने बच्ची की बीमारी देखते ही कहा कि अपने 30 साल के करियर में उन्हें कभी ऐसा केस देखने को नहीं मिला। इस बीमारी के चलते शरीर के कंकाल के बाहर भी हड्डियों का विकास होने लगता है और ये धीरे-धीरे मांसपेशियों और कोशिकाओं को भी खत्म करके उनकी जगह लेने लगती है।

इस स्थिति का मतलब है कि बच्ची न तो वैक्सीन या इंजेक्शन ले पाएगी, न ही दूसरे बच्चों की तरह दांतों से काम कर पाएगी। कान की हड्डी बढ़ने से वो बहरी भी हो सकती है, जबकि हाथों-पैरों की गतिविधि भी रुक सकती है। सबसे दुख की बात ये है कि बच्ची की इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है।

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प्रदेश के इस जिले में जन्मी बच्ची के दोनों पैर उल्टे, अस्पताल में छोड़कर भागे माता.पिता

Date : 23-Jun-2021

भोपाल (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के हरदा जिले में अनोखा मामला सामने आया है। यहां जन्मी एक बच्ची का पैर घुटने के पास से उल्टा है। इसके बाद जन्मी बच्ची को अस्पताल में छोड़कर माता-पिता भाग गये हैं। वहीं डॉक्टर इसे दुर्लभ मान रहे हैं।

बच्ची का वजन एक किलो 600 ग्राम है। आमतौर पर जन्म के समय बच्चे का वजन 2 किलो 700 ग्राम से 3 किलो 200 ग्राम तक होता है। बच्ची को स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट में रखा गया है। जन्मी बच्ची को देखकर डॉक्टर नर्स सभी परेशान हैं। डॉक्टरों का मानना है कि यह अब तक का अनोखा मामला है।

आपको बता दें कि खिरकिया ब्लॉक के झांझरी निवासी विक्रम की पत्नी पप्पी की डिलीवरी सोमवार दोपहर 12 बजे हुई। उसने बेटी को जन्म दिया। डिलीवरी सामान्य थी। जन्म के समय से ही बच्ची के दोनों पैर उल्टे हैं।

मामले में शिशु रोग विशेषज्ञ का कहना है कि 5 साल के कॅरियर में अब तक ऐसा केस नहीं आया। इंदौर-भोपाल के शिशु रोग विशेषज्ञों और हड्डी रोग विशेषज्ञों से भी चर्चा की। उनका कहना है कि यह मामला रेयर है। बच्ची का वजन 1 किलो 600 ग्राम है।

जन्म के बाद बच्ची डॉक्टरों की निगरानी में है और खतरे से बाहर है, लेकिन उसके माता-पिता उसे छोड़कर चले गए हैं। मंगलवार को अस्पताल परिसर में उन्हें तलाशा गया। माइक से अनाउसमेंट भी किया गया, लेकिन उनका पता नहीं चला।

इस तरह के मामले लाखों में एक होते हैं। आॅपरेशन के बाद घुटनों को सीधा किया जा सकता है। बच्ची को देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। अब तक इस तरह का मामला मैंने नहीं देखा है।

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जिले में पहली बार चारों विकासखंडों में ब्लैक राइस का उत्पादन कर रहे किसान

Date : 12-Jun-2021

दंतेवाड़ा। कृषि विभाग के एक्सटेंशन रिफॉर्म्स आत्मा योजना अंतर्गत जिले के चारों विकासखंडों में स्व-सहायता समूह को हल्दी एवं जिमीकंद (गजेंद्रा) की खेती को बढ़ावा देने के लिए 10 यूनिट हल्दी, 10 यूनिट जिमीकंद प्रदर्शन हेतु दिया जा रहा है, जिससे स्व-सहायता समूह के किसानों की आय में वृद्धि हो सके, इसके साथ ही इस वर्ष चारों विकासखंडों में ब्लैक राइस (जो मेडिसिनल गुणों से भरपूर है) के 49 कृषकों की 49 एकड़ में फसल प्रदर्शन किया जा रहा है। दंतेवाड़ा जिले में पहली बार चारों विकासखंडों में ब्लैक राइस का उत्पादन किया जा रहा है।

इस चावल की विशेषता यह है कि इसके उपयोग से हृदय को स्वस्थ एवं मजबूत रखने के लिए फार्मेशन इस्तेमाल फायदेमंद है। इसमें मौजूद फायटोकेमिकल कोलेस्ट्रोल के स्तर को नियंत्रित करते हैं, और कोलेस्ट्रॉल को घटाते हैं। साथ ही यह हृदय की धमनियों में आर्थोस्क्लेरोसिस फ्लेक फॉरमेशन की संभावना कम करता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक की संभावना कम होती है। मोटापा कम करने के लिए लोग चावल खाना लगभग छोड़ देते हैं, वही काले चावल बेहद फायदेमंद है, क्योकि काले चावल मोटापा को कम करने के लिए लाभदायक है। भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होने से कब्ज जैसी समस्याओं को समाप्त करता है। पेट फूलना या पाचन से जुड़ी अन्य समस्याओं में लाभ देता है। रोजाना भी इसका सेवन करने से कोई नुकसान नहीं होता है।

काले चावल में एंथोसायनिन एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो कार्डियोवेस्कुलर और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाने में सहायक हैं। यह प्रतिरोध क्षमता में भी इजाफा करता है। इन चावलों का गहरा रंग इनमें मौजूद विशेष एंटीऑक्सीडेंट तत्व के कारण होता है जो आपकी त्वचा व आंखों के साथ ही दिमाग के लिए फायदेमंद होता है।

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प्रदेश के बिलासपुर में किसान ने खास तरह की उगाई गोभी, जिसको तीन गुना दाम पर लोग खरीदने के लिए तैयार

Date : 25-Mar-2021

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक किसान ने खास तरह की गोभी उगाई है, जिसको  तीन गुना दाम पर लोग खरीदने के लिए तैयार है. इस गोभी की खासियत क्या है, इसके बारे में हम आपको बताएं इससे पहले हम आपको किसान के बारे में बता रहे हैं।

बिलासपुर जिले के मल्हार के किसान जदुनंदन वर्मा इन दिनों चर्चा में हैं, क्योंकि उन्होंने अपने खेत में कुछ ऐसा किया है जो अमूमन देखने को नहीं मिलता. जदुनंदन वर्मा ने अपने खेतों पर कुदरती तौर पर गुलाबी और पीले रंग की गोभी उगाकर सभी को चौंका दिया है. खास बात यह है कि इनमें किसी भी तरह का बाहरी कलर इस्तेमाल नहीं किया गया है।

गुलाबी और पीले रंग की एक फूलगोभी पूरी तरह से नैचुरल है और ऑर्गेनिक खेती के जरिए इसे तैयार किया गया है. वर्मा ने बताया कि फिलहाल प्रयोग के तौर पर 60 डिसमिल में उन्होंने 300 पौधे लगाए थे. कुछ समय पहले उन्होंने स्विटजरलैंड की सिजेंटा कंपनी के बीज लिए थे और इसके बाद उन्होंने अपने खेतों में लगाया. वर्मा ने बताया कि उन्हें खेती में नए-नए प्रयोग करने का शौक है और इसी के चलते यह मुमकिन हो पाया है।

तीन गुना कीमत देकर गोभी खरीदने को तैयार हैं लोग

गुलाबी और पीले रंग की फूलगोभी की तस्वीरें जब सोशल मीडिया में आने लगी तो इलाके में जदुनंदन वर्मा की यह फसल चर्चा में आ गई. लोग वर्मा से यह फूल गोभी 3 गुना कीमत पर खरीदना चाहते हैं. जदुनंदन वर्मा ने बताया कि 6 से 7 रुपए प्रति किलो के हिसाब से वह सामान्य सफेद फूल गोभी बेचा करते थे, लेकिन अब इसे लोग 20 रुपए किलो तक का दाम देने के लिए तैयार हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में इसी तरह की फूलगोभी 80 रुपए किलो के दाम में बाजार में बिकती है. वर्मा की फसल तैयार है जल्द ही बाजार में भी आ जाएगी।

इम्यूनिटी बढ़ाने में ममदगार है ये फूलगोभी

वर्मा ने बताया कि कंपनी और कुछ एक्सपर्ट से चर्चा में पता चला कि अन्य फूलगोभी में प्रोटीन न के बराबर होता है, जबकि इसमें अधिक मात्रा में प्रोटीन होता है. इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, जिंक जैसे गुण पाए जाते हैं. यह बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद जरूरी हैं. यह गुण लोगों की इम्यूनिटी के लिए भी अहम माने गए हैं।

जदुनंदन ने बताया कि मैंने खुद इस गोभी को खाकर देखा है. प्रयोग के तौर पर इसका असल स्वाद समझने के लिए मैंने इसे सलाद के तौर पर खाया. इसके स्वाद में मुझे हल्कापन लगा जैसे सामान्य गोभी हल्की सी स्वाद में तेज होती है उसकी एक गंध होती है, मगर इस गोभी में ऐसा नहीं है।

कभी दूसरों के खेतों में थे मजदूर, आज कमा रहे लाखों रुपये

जदुनंदन वर्मा अपने गांव में अपनी खेती को लेकर बेहद मशहूर हैं, लेकिन कुछ साल पहले तक वह दूसरे के खेतों में मजदूरी करते थे. पलायन करके आसपास के जिलों में मजदूरी करने जाते थे. मगर अपनी मेहनत के दम पर इन्होंने 7 एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती शुरू की. धीरे-धीरे अपने काम को आगे बढ़ाया और अब इनका खुद का खेत है।

बनना चाहते थे वैज्ञानिक, अब बेटा पूरा करेगा सपना

जदुनंदन वर्मा बताते हैं कि इन्हें पढ़ने और खेती किसानी के नए-नए प्रयोगों को करने का बेहद शौक था. इसी वजह से वह कृषि वैज्ञानिक बनना चाहते थे. मगर गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले वर्मा को जिस उम्र में पढ़ाई करनी थी, तब हाथ में फावड़ा और कुदाली आ गई और वह मजदूरी करने लगे. मगर अब अपने बेटे को पढ़ा रहे हैं. कृषि वैज्ञानिक बनने का सपना बेटा रोहन पूरा करेगा. 12वीं के बाद अब वो एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी में एडमिशन की तैयारी में जुटा हुआ है।

जदुनंदन वर्मा ने बताया कि उनके पास गाय नहीं है, इस वजह से उनके पास गोबर नहीं होता. ऐसे में वो पड़ोसियों से गोबर लाकर ना सिर्फ खाद तैयार करते हैं बल्कि नीम के पत्ते और दूसरी चीजों से कुदरती कीटनाशक भी तैयार करते हैं. उन्होंने बताया कि उनके खेत में अब पहले के मुकाबले कम कीड़े लगते हैं. यह प्रयोग वो आसपास के दूसरे किसानों को भी सिखा रहे हैं, लेकिन यह थोड़ा मेहनत और समय देने वाला काम है इसलिए किसान अक्सर रासायनिक प्रोडक्ट की तरफ भागते हैं. वर्मा ने कहा कि मेरी कोशिश है कि मैं ऑर्गेनिक काम ही करूं यदि शासन की तरफ से कोई सहयोग मिले तो मैं शायद अपने काम को और बेहतर तरीके से कर पाऊंगा।

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इंसानियत को शर्मसार करने वाली खबर, 68 वर्षीय दरिंदे ने 40 कुत्तों के साथ किया रेप, गिरफ्तार

Date : 15-Mar-2021

मुंबई (एजेंसी)। देश में आए दिन ऐसी कई घटना सामने आती है, जिसे सुनकर रूह कांप उठती है। एक ऐसी ही घटना सामने आई है, जो इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक 68 वर्षीय दरिंदे ने कुत्तों के साथ रेप किया हैं। जी हाँ, सुनकर हैरानी होगी, लेकिन ऐसा ही हुआ है। इस हैवान ने जानवरों को अपने हवस का शिकार बनाया है। यह घटना सुनकर सबके होश उड़ गए हैं।

इस हैवान का नाम अहमद शाह बताया गया है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला बॉम्बे एनिमल राइट नामक संस्था के विजय मोहन मोहनानी ने दर्ज कराया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अहमद शाह अभी तक कई जानवरों के साथ इस तरह का दुष्कर्म कर चुका है। साथ ही उन्होंने बताया है कि आरोपी ने अब तक 30 से 40 कुत्तों का रेप कर चूका है।  मोहनानी के बयान और वीडियो के आधार पर डीएन नगर पुलिस ने कई धाराओं में मामला दर्ज कर दरिंदे को हिरासत में ले लिया है। जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जहां आरोपी को जमकर कोसा जा रहा है।

चेतवानी के बाद भी करता रहा दुष्कर्म 

रिपोर्ट्स की मानें तो, आरोपी अहमद शाह एक सब्जी विक्रेता है जो जुहू गली में रहता है। वहीं इस वारदात का वीडियो भी वायरल हो चूका है, जिसमें इस हैवान की गंदी करतूत साफ़ देखि जा सकती है। साथ ही यह भी बताया गया है कि स्थानीय लोगों ने कई बार आरोपी को इस बारे में चेतावनी दी थी लेकिन उसने हर बार इन्हें अनसुना कर दिया था।

जानवरों को आपत्ति नहीं 

खबर के अनुसार, पुलिस ने जब आरोपी से पूछताछ की, तो अहमद शाह ने कहा कि वह जानवरों को खाना देता है और उनके साथ रेप करता है। इसमें अगर जानवरों को कोई आपत्ति नहीं है तो यह क्राइम कैसे हुआ। उसका यह बयान लोगों का और भी खून खौला रहा है। वहीं, मोहनानी के मुताबिक, मंगलवार को उन्हें अहमद के इस कर्तोत को लेकर एक कॉल भी आया था। जहाँ उन्हें बताया कि एक व्यक्ति आवारा कुत्तों का रेप करता रहता है। सबूत के तौर पर उसने दिसंबर 2020 का एक वीडियो भी भेजा था, जिसे देखकर विजय मोहनानी चौंक गए थे। जिसके बाद इस बात की सुचना डीएन नगर पुलिस स्टेशन को दी गई। पुलिस अब जाँच में जुट गई है।

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तेलंगाना में हत्या का एक अनोखा मामला, जहां एक मुर्गे ने गलती से अपने मालिक को मार डाला, मुर्गे को कोर्ट में पेश करेगी पुलिस

Date : 28-Feb-2021

हैदराबाद (एजेंसी)। तेलंगाना में हत्या का एक अनोखा मामला सामने आया है, यहां पुलिस ने एक शख्स की हत्या के सिलसिले में एक मुर्गे को अपनी कस्टडी में रखा है। तेलंगाना के जगतियाल जिले में एक मुर्गे ने गलती से अपने मालिक को मार डाला। अब इसे पुलिस कोर्ट में पेश करेगी। हालांकि, पुलिस ने हत्या के आरोप के तहत मुर्गे को गिरफ्तार करने की खबरों को नकारा है।

बाद दें कि अवैध कॉक फाइट (मुर्गों के बीच की लड़ाई) की तैयारी के दौरान मुर्गे के पैर से बंधा एक चाकू से गलती से 45 साल के थानुगुल्ला सतीश की कमर के नीचे कट गया। यह घटना 22 फरवरी को लथुनुर गांव में उस समय हुई जब मुर्गे का मालिक सतीश अवैध कॉक फाइट के लिए मुर्गा लेकर आया था।

खबरों के मुताबिक, मुर्गे की लड़ाई के दौरान ही मुर्गे के पैर में बंधे चाकू से सतीश घायल हो गया। इसके बाद सतीश के शरीर से काफी खून बहने लगा। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। चूंकि इस राज्य में कॉक फाइट बैन है, इसलिए लोगों के एक समूह ने चोरी-छिपे गांव में येलम्मा मंदिर के पास मुर्गे की लड़ाई का आयोजन किया था।

इस घटना के बाद पुलिस मुर्गे को गोलापल्ली थाने में ले आई, जहां उसे रखा गया है, पुलिस ने इसके लिए भोजन की भी व्यवस्था की। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने मुर्गे को अपने मालिक की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर रखा है, मगर पुलिस ने इसका खंडन किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मुर्गे की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली है।
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