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मैडागास्कर में मिली मेंढक की नई प्रजाति

Date : 06-Jan-2022

न्युज डेस्क (एजेंसी)। मैडागास्कर जैव विविधता और खासकर उभयचरों की विविधता से समृद्ध देश है। लेकिन हाल के वर्षों में जो नई उभयचर प्रजातियां खोजी गई हैं उन्हें अप्रकट प्रजाति की क्षेणी में रखा जाता है क्योंकि ये दिखने में तो पहले से ज्ञात प्रजातियों से बहुत मिलती-जुलती होती हैं और इन्हें अलग प्रजाति मात्र डीएनए की तुलना के आधार पर माना गया है।

लेकिन हाल ही में लुसिआना स्टेट युनिवर्सिटी के शोधकर्ता कार्ल हटर ने मैडागास्कर के एंडेसिबी-मैनटेडिया नेशनल पार्क में एक ऐसी मेंढक प्रजाति खोजी  है जो अन्य मेंढकों से एकदम अलग दिखती है। मेडागास्कर के वर्षा-वन के ऊंचे क्षेत्रों में पाया गया यह मेंढक आकार में बहुत छोटा है। इसकी त्वचा मस्सेदार और आंखें चटख लाल रंग की हैं।

देखा जाए तो इस नई मेंढक प्रजाति का मिलना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस इलाके को पहले ही काफी खंगाला जा चुका है। हटर और उनके सहयोगियों का सामना इस प्रजाति से पहली बार वर्ष 2015 में हुआ था। शोधकर्ताओं ने इस खोज को ज़ुओसिस्टेमेटिक्स एंड इवॉल्यूशन नामक जर्नल में प्रकाशित किया है और इस नई प्रजाति की विशिष्ट त्वचा को देखते हुए इसे गेफायरोमेंटिस मारोकोरोको (मलागासी भाषा में ऊबड़-खाबड़) नाम दिया है। इस अध्ययन में यह भी बताया गया है कि यह उभयचर एक अनूठी ध्वनि भी निकालता है। दो से चार पल्स के बाद एक लंबी ध्वनि इतनी मंद होती है कि कुछ मीटर दूर तक ही सुना जा सकता है। चूंकि इस निशाचर मेंढक की रहस्यमय प्रकृति भारी बारिश के बाद बाहर आने पर ही दिखती है, इसलिए इसके वर्गीकरण के लिए पर्याप्त नमूने और रिकॉर्डिंग एकत्रित करने में कई साल लगेंगे।

शोधकर्ताओं को लगता है कि यह प्रजाति विलुप्त होने के जोखिम में है क्योंकि इसे जंगल के सिर्फ चार टुकड़ों में पाया गया है, और जहां यह पाया गया है वहां झूम खेती (स्लेश एंड बर्न) का खतरा रहता है।

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बिहार में तीन हाथ और तीन पैर वाला एक अनोखा बच्चें ने लिया जन्म

Date : 31-Dec-2021

पटना (एजेंसी)। बिहार के गोपालगंज में आज एक अजीबोगरीब नवजात का जन्म हुआ। इस बच्चे को  जन्म के दौरान तीन हाथ और तीन पैर हैं। इसकी सूचना मिलते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी ।

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एक ऐसा श्मशान घाट जहां चिता पर लेटने वाले को सीधे मिलता है मोक्ष

Date : 30-Nov-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान श्मशान घाट में लाशों की कतार को आज भी देश नहीं भूला है। वह भयानक मंजर याद आते ही लोगों की रूह कांप उठती है. खैर…ये तो बात हो गई कोरोनाकाल की, लेकिन क्या आप जानते हैं, देश में एक ऐसा श्मशान घाट भी है, जहां चिता पर लेटने वाले को सीधे मोक्ष मिलता है। यह श्मशान घाट बाबा विश्वनाथ की नगर काशी में हैं। इसे मणिकर्णिका श्मशान घाट के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि दुनिया के ये इकलौता श्मशान घाट है, जहां चिता की आग ठंडी नहीं होती है।

बताया जाता है कि यहां हर दिन करीब 300 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। यही नहीं, यहां पर मुर्दे को चिता पर लेटाने से पहले बकायदा टैक्स वसूला जाता है। संभवतः यह घाट दुनिया का पहला ऐसा श्मशान घाट है, जहां मुर्दे से टैक्स वसूला जाता है। इसके पीछे भी दिलचस्प कहानी है। बताया जाता है कि मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की कीमत चुकाने की परंपरा करीब तीन हजार साल पुराना है।

दरअसल, ‘टैक्स’ वसूलने की शुरुआत राजा हरिश्चंद्र के जमाने से ही है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक वचन के कारण राजा हरिश्चंद्र अपना राजपाट वामन भगवान को दान कर कल्लू डोम के यहां नौकरी कर रहे थे। इसी दौरान उनके बेटे की मौत हो गई। उनकी पत्नी जब बेटे को लेकर दाह संस्कार के लिए मणिकर्णिका श्मशान घाट पहुंची तो वचन से मजबूर हरिश्चंद्र ने पत्नी से दाह-संस्कार से पहले दान मांगे, क्योंकि कल्लू डोम का आदेश था कि बिना दान लिए किसी का भी दाह संस्कार नहीं करना है।

जबकि उनकी पत्नी के पास उस वक्त देने के लिए कुछ भी नहीं था। इसके बावजूद राजा हरिश्चंद्र ने बिना दान लिए दाह संस्कार करने को तैयार नहीं हुए। उसके बाद मजबूरी में उनकी पत्नी ने साड़ी का एक टुकड़ा फाड़ कर दे दिया। कहा जाता है कि आज भी वही परंपरा जारी है। आज भी यहां दान लिया जाता है लेकिन लेने के तरीके बदल गए हैं। यही कारण है कि आज की तारीख में लोग इसे ‘टैक्स’ कहते हैं।

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दुनिया की ऐसी जगह जहां किसी को हुआ ही नहीं कोरोना

Date : 27-Oct-2021

न्युज डेस्क (एजेंसी)। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को जकड़ लिया और इस महामारी में लाखों लोगों की मौतें तक हो गई और करोड़ों लोग संक्रमण का शिकार हुए।

इस वायरस की वजह से ज्यादातर देशों को लॉकडाउन लगाना पड़ा. कई देशों की अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो गई. कुछ लोगों के अपने बिछड़े तो कई महान हस्तियों की जान इस कोरोना के कारण चली गई. हालांकि, कई लोग ऐसे भी हैं, जो इस वायरस के प्रकोप से बच गए. आपको सुनकर हैरानी होगी कि एक ऐसी भी जगह रह गई जहां कोरोना पहुंचा ही नहीं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यूनाइटेड किंगडम के करीब एक ऐसा द्वीप है, जहां कोरोना वायरस नहीं पहुंच सका। इस द्वीप को अब लोग जीरो केस वाला आइलैंड के नाम से पहचानते हैं।

इस द्वीप का नाम सेंट हेलेना  द्वीप है. साल 2019 से लेकर अभी तक करोड़ों लोग संक्रमित हुए लेकिन इस जगह पर एक भी केस नहीं आया। यह द्वीप 121.7 km² क्षेत्रफल में फैला है. इस द्वीप की जनसंख्या करीब 5000 हैं। खास बात यह है कि यहां पर कोविड का कोई भी नियमों का पालन नहीं होता, क्योंकि यहां कोरोना पहुंचा ही नहीं। यहां पर लोग पहले की तरह आम जिंदगी जी रहे हैं. ना तो मास्क, ना ही सोशल डिस्टेंसिंग की जरूरत है, हालांकि, बाहर से आने वाले लोगों को कोविड के प्रोटोकॉल का पालन जरूरत करना होता है।

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एक ऐसे गांव जहां सिर्फ महिलाएं रहती हैं, पुरुषों की एंट्री पर पूरी तरह से लगी रोक

Date : 16-Oct-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर चल रही हैं. इतना ही नहीं अपनी मेहनत और कड़े संघर्ष से मिलने वाली सफलता की बदौलत पुरुषों को कड़ी टक्कर भी दे रही हैं. आज इंटरनेशनल डे ऑफ रूरल वीमेन यानी ग्रामीण महिलाओं का दिन है। यूं तो ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष और तरक्की की खूब कहानियां आपने सुनी होगी, लेकिन ये थोड़ी हटकर है।

हम आपको आज एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां सिर्फ महिलाएं रहती हैं। पुरुषों की एंट्री पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है। गांव के तारो तरफ कंटीले तार लगे हुए हैं। अगर कोई जबरन घुसने की कोशिश करता है तो गांव की महिलाएं अपने अंदाज में उसे सजा भी देती हैं। ‘द गार्जियन’ ने केन्या में बसे इस उमोजा गांव पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है।

पूरे गांव में केवल महिलाएं रहती हैं। केवल पर्यटन के लिए आने वाले पुरुषों को ही गांव में एंट्री मिलती है।

गांव में रहने वाली ज्यादातर महिलाएं दुष्कर्म पीड़िता हैं। जिन्होंने जिंदगी में बहुत संघर्ष किया और तमाम तरह की प्रताड़नाएं झेली हैं। गांव की जेनी बताती हैं कि 1990 में सबसे पहले 15 महिलाएं इस गांव में रहने आईं। सभी महिलाएं ब्रिटिश सैनिकों की हवस का शिकार हुईं थीं। ब्रिटिश सैनिकों ने इन महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया था।

जेनी ने खुद की कहानी भी साझा की। कहती हैं, ‘मैं गांव के बाहर अपने जानवरों को चराने गई थी। इसी दौरान तीन ब्रिटिश सैनिकों ने मुझपर हमला कर दिया। तीनों ने एक-एक करके दुष्कर्म किया। मुझे काफी चोट भी आई। जब मैंने इसके बारे में अपने पति से कहा तो उसने भी डंडों से मुझे मारा। मैं दर्द से तड़प रही थी। फिर मैं अपने बच्चों के साथ यहां आ गई।’ गांव की स्थापना रेबेका लोलोसोली ने की है।

रेबेका को महिलाओं के लिए अलग गांव बनाने का आइडिया तब आया जब वो खुद पुरुष प्रताड़ना का शिकार हुईं। रेबेका बताती हैं, ‘मैं अपने गांव की महिलाओं उनके अधिकारों के बारे में बता रही थी। ये मेरे गांव के पुरुषों को पसंद नहीं आया और उन्होंने ग्रुप बनाकर मुझे बहुत मारा। कई दिनों तक मैं अस्पताल में रही। उस गांव में महिलाओं को बोलने और खुद से कुछ करने का हक नहीं था। इसलिए मैंने महिलाओं के लिए अलग गांव बनाने का फैसला लिया।

मैं घर छोड़कर यहां आ गई और यहां मैंने महिलाओं का एक नया संसार बनाया। इस संसार में महिलाओं को उनके अधिकार बताए जाते हैं। बच्चियों को संघर्ष करना सिखाया जाता है।’ इस गांव में अब 47 महिलाएं रहती हैं और 200 बच्चे हैं। अगर किसी का बेटा होता है उसे वह 18 साल तक गांव में रह सकता है, इसके बाद उसे गांव छोड़ना होता है। अब ये गांव एक तरह का टूरिस्ट प्लेस बन चुका है। यहां कई देशों से पर्यटक आते हैं।

पर्यटन के तौर पर आने वाले पुरुषों को गांव में घुसने की अनुमति है, लेकिन इसके लिए उन्हें फीस देना पड़ता है। गांव की महिलाएं समबुरू परंपरा के कपड़े और आभूषण तैयार करके उसे बाजार में बेचती हैं। बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी ये परंपरागत आभूषण और कपड़े काफी अच्छे लगते हैं।

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बिना चेहरे के पैदा हुई बच्ची, मौत को दी मात, डॉक्टरों ने कर दी थी मौत की भविष्वाणी

Date : 11-Oct-2021

ब्रासीलिया (एजेंसी)। कहते हैं कि जीवन और मौत ऊपर वाले के हाथ में होता है, ये बात बिना चेहरे के पैदा हुई बच्ची विटोरिया मार्चियोली के केस में सच साबित हुई है. डॉक्टरों ने इस बच्ची के पैदा होते ही मौत की ‘भविष्यवाणी’ कर दी थी. परिवार वालों की खुशी मातम में बदल गई थी, यहां तक कि बच्ची के अंतिम संस्कार की तैयारी होने लगी थी लेकिन कुदरत के करिश्मे ने मेडिकल साइंस को गलत साबित कर दिया. बच्ची आज भी जिंदा है.

ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम से पीड़ित है बच्ची

ब्राजील के बारा डी साओ फ्रांसिस्‍को में विटोरिया मार्चियोली का जन्म हुआ. यह बच्ची सामान्य बच्चों से बिल्कुल अलग थी. बच्ची के न आंख थी, न नाक, चेहरा ही नहीं था. जब डॉक्टरों ने बच्ची को देखा तो वो हैरान रह गए थे कि इस बच्ची का जन्म कैसे हो सकता है. डॉक्टरों की टीम ने टेस्ट के बाद बच्ची के मां-बाप से कहा कि यह बच्ची कुछ ही देर की मेहमान है. डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची का जीना असंभव है. डॉक्टरों के इतना बताते ही परिवार की खुशी मातम में बदल गई.

चेहरे की 40 हड्डियां विकसित ही नहीं हो पाई थीं

डॉक्टरों के मुताबिक ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम (Treacher Collins syndrome) के चलते उस छोटी सी बच्ची के चेहरे की 40 हड्डियां विकसित ही नहीं हो पाई थीं इसलिए उसके पास न तो आंख थीं और न ही नाक. बिना चेहरे के जीवन असंभव है. डॉक्टरों के इतना कहने और बच्ची की हालत देखने के बाद परिवार वाले भी मान चुके थे कि बच्ची कुछ ही देर की मेहमान है, कभी भी उसकी सांसें थम सकती हैं. परिवार वाले भारी मन से बच्ची के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने डॉक्टरों को गलत साबित कर दिया.

मौत को दी मात

रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों ने जिस बच्ची को कुछ ही मिनटों की मेहमान बताया था उस बच्ची ने मौत को मात दे दी. जब दो दिनों बाद भी बच्ची जिंदा थी तो फिर डॉक्टरों ने उसे विशेषज्ञों पास रेफर कर दिया. इसके बाद विटोरिया मार्चियोली की आंख, नाक और मुंह की आठ सर्जरी हो चुकी हैं. डॉक्टर समेत परिवार वाले उसका जीवन बेहतर बनाने के लिए लगातार कोशिशें कर रहे हैं. चूंकि बच्ची का इलाज काफी महंगा है इसलिए कई लोगों ने मदद के हाथ बढ़ाए. लोग इस बच्ची को नई जिंदगी देने के लिए अपनी-अपनी सामर्थ्य के हिसाब से दान दे रहे हैं. हाल ही में बच्ची ने अपना 9वां जन्मदिन बनाया है.

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जन्म लेते ही 1 दिन की बच्ची हो गई प्रेग्नेंट, देखकर डॉक्टर भी हैरान

Date : 31-Jul-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। क्या कभी आपने सुना है कि कोई बच्ची अपने मां के गर्भ से निकलते ही प्रेगेनेंट हो गई हो नहीं ना, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी ही खबर के बारे में बताने जा रहे हैं। बता दें कि, ये मामला इजरायल का है, जहां डॉक्टर्स की टीम तब हैरान रह गई जब उन्होंने पाया कि एक दिन की नवजात बच्ची के पेट में दूसरा बच्चा पल रहा था। आपको बता दें कि, पूरी दुनिया में 5 लाख बर्थ केस में एक ही ऐसा मामला आता है।

जानकारी के अनुसार, बच्ची का जन्म इस महीने की शुरुआत में इजरायल के आसुता मेडिकल सेंटर में हुआ था। इसके बाद डॉक्टर्स ने पाया कि बच्ची का पेट काफी अजीब सा है और उसके बाद उन्होंने बच्ची का एक्सरे करवाने का फैसला किया मगर एक्सरे रिपोर्ट में सामने आया कि बच्ची के पेट में दूसरा बच्चा पल रहा है, जिसको देखकर डॉक्टर्स भी हैरान रह गए।

दरअसल, बच्ची की मां के गर्भ में ट्विन्स थी मगर इनमें से एक ट्विन अपनी बहन के पेट में पलने लगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस बच्ची का जन्म नॉर्मल डिलीवरी से हुआ, मगर जब वो मां के पेट से बाहर आई, तो डॉक्टर्स को उसके पेट के अंदर कुछ होने का अहसास हुआ और उसके बाद जब अल्ट्रासाउंड करवा गया तो दूसरे बच्चे की बात कंफर्म हो गई। इसके बाद मेडिकल टीम तुरंत एक्टिव हो गई। जांच में दिखा कि बच्ची के पेट में छोटा सा भृम था। उसे तुरंत सर्जरी के जरिये बच्ची के पेट से बाहर निकाला गया।

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इस देश में शरीर में आग लगाकर की जाती है ​बीमारियों का इलाज, पढे पूरी खबर

Date : 30-Jul-2021

चीन (एजेंसी)। आपने अब तक देखा होगा कि डॉक्टर किसी भी बिमारी दवाई या जड़ी-बूटियों ठीक करते है। लेकिन कभी शरीर में आग लगाकर ​बीमारियों का इलाज करते देखा है? चीन में कुछ ऐसा ही होता है। यहां एक ऐसी विधा है, जो पिछले 100 साल से भी ज्यादा समय से चीन में इस्तेमाल हो रही है। इसे ‘फायर थेरेपी’ के तौर पर जाना जाता है।

खबरों के मुताबिक, पहले मरीज की पीठ पर जड़ी बूटियों से बना एक लेप लगाया जाता है और फिर उसे एक तौलिये से ढक दिया जाता है। फिर उस पर पानी और अल्कोहल का छिड़काव किया जाता है और मरीज के शरीर में आग लगा दिया जाता है। इलाज का यह तरीका चीन की प्राचीन मान्यताओं पर आधारित है, जिसके अनुसार शरीर में गर्मी और ठंडक के बीच सामंजस्य बिठाने पर जोर दिया गया है।

फायर थेरेपी को लेकर कई सवाल भी खड़े हो चुके हैं। इनमें अहम है कि इलाज करने वाले के पास सर्टिफिकेट है या नहीं। इलाज के दौरान किसी दुर्घटना से बचने के लिए किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था है?

इस मामले में झांग फेंगाओ का कहना है कि कई बार लोगों को चोट भी आई है, कई बार मरीज के चेहरे और शरीर के दूसरे हिस्से थोड़े जल भी गए, लेकिन यह सही तरीकों की कमी की वजह से हुआ। मैंने हजारों लोगों को फायर थेरेपी सिखाई है, लेकिन कभी कोई हादसा नहीं हुआ।

झांग फेंगाओ का कहना है कि फायर थेरेपी मानव इतिहास में चौथी बड़ी क्रांति है। इसने चीनी और पश्चिम दोनों ही तरह की इलाज पद्धतियों को पीछे छोड़ा है। चूंकि भयंकर बीमारियों के इलाज में भारी-भरकम राशि खर्च करना हर किसी के बस की बात नहीं है, ऐसे में फायर थेरेपी उनके लिए कारगर और एक सस्ता इलाज है।

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बच्ची का शरीर धीरे.धीरे पत्थर में हो रहा तब्दील, बीमारी को देखकर डॉक्टर भी हैरान

Date : 02-Jul-2021

नई दिल्ली (एजेंसी)। 5 महीने की लेक्सी रॉबिंस के पेरेंट्स के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनकी बच्ची को ऐसी दुर्लभ बीमारी है, जिसका इलाज मिलना ही मुश्किल है। 31 जनवरी को बच्ची का जन्म हुआ था। उनके माता-पिता एलेक्स और डेव बेहद खुश थे, जब तक उन्हें बच्ची की इस गंभीर और लाइलाज बीमारी के बारे में नहीं पता था। बच्ची का शरीर धीरे-धीरे पत्थर में तब्दील हो रहा है। इस बीमारी को देखकर डॉक्टर भी हैरान है।

उसने दूसरे बच्चों की तरह ही एक्टिविटीज शुरू कीं और उनके पेरेंट्स को लगा कि उनका बच्चा काफी स्ट्रॉन्ग है.। पहले बच्ची के पैर में एक गोखरू जैसी चीज दिखी। इसके बाद जब बच्ची को डॉक्टर के पास ले जाया गया तो उसे फाइब्रोडिस्प्लेशिया आॅसिफिशियंस प्रोग्रेसिवा नाम की बीमारी होने का पता चला।

इस जेनेटिक डिसआॅर्डर में शरीर के अंदर मांस और कोशिकाएं खत्म होने लगती हैं और इसका स्थान हड्डियां ले लेती हैं। पहली बार अप्रैल में एक्सरे के बाद पता चला कि लेक्सी के पांव में गोखरू बना हुआ है और उसके हाथ के अंगूठे में भी डबल ज्वाइंट है।

डॉक्टरों ने ये भी बताया कि शायद बच्ची चल-फिर भी नहीं पाएगी। माता-पिता ने इंटरनेट पर बीमारी के बारे में काफी कुछ पढ़ा और बच्ची को स्पेशलिस्ट के पास लेकर गए। उसके तमाम जेनेटिक टेस्ट कराए गए और बच्ची को की पुष्टि हो गई।

-डॉक्टर भी बीमारी देखकर हैं हैरान

लिक्सी को उनके पेरेंट्स ने ब्रिटेन के सबसे बेहतरीन डॉक्टर को दिखाया और उन्होंने बच्ची की बीमारी देखते ही कहा कि अपने 30 साल के करियर में उन्हें कभी ऐसा केस देखने को नहीं मिला। इस बीमारी के चलते शरीर के कंकाल के बाहर भी हड्डियों का विकास होने लगता है और ये धीरे-धीरे मांसपेशियों और कोशिकाओं को भी खत्म करके उनकी जगह लेने लगती है।

इस स्थिति का मतलब है कि बच्ची न तो वैक्सीन या इंजेक्शन ले पाएगी, न ही दूसरे बच्चों की तरह दांतों से काम कर पाएगी। कान की हड्डी बढ़ने से वो बहरी भी हो सकती है, जबकि हाथों-पैरों की गतिविधि भी रुक सकती है। सबसे दुख की बात ये है कि बच्ची की इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है।

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प्रदेश के इस जिले में जन्मी बच्ची के दोनों पैर उल्टे, अस्पताल में छोड़कर भागे माता.पिता

Date : 23-Jun-2021

भोपाल (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के हरदा जिले में अनोखा मामला सामने आया है। यहां जन्मी एक बच्ची का पैर घुटने के पास से उल्टा है। इसके बाद जन्मी बच्ची को अस्पताल में छोड़कर माता-पिता भाग गये हैं। वहीं डॉक्टर इसे दुर्लभ मान रहे हैं।

बच्ची का वजन एक किलो 600 ग्राम है। आमतौर पर जन्म के समय बच्चे का वजन 2 किलो 700 ग्राम से 3 किलो 200 ग्राम तक होता है। बच्ची को स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट में रखा गया है। जन्मी बच्ची को देखकर डॉक्टर नर्स सभी परेशान हैं। डॉक्टरों का मानना है कि यह अब तक का अनोखा मामला है।

आपको बता दें कि खिरकिया ब्लॉक के झांझरी निवासी विक्रम की पत्नी पप्पी की डिलीवरी सोमवार दोपहर 12 बजे हुई। उसने बेटी को जन्म दिया। डिलीवरी सामान्य थी। जन्म के समय से ही बच्ची के दोनों पैर उल्टे हैं।

मामले में शिशु रोग विशेषज्ञ का कहना है कि 5 साल के कॅरियर में अब तक ऐसा केस नहीं आया। इंदौर-भोपाल के शिशु रोग विशेषज्ञों और हड्डी रोग विशेषज्ञों से भी चर्चा की। उनका कहना है कि यह मामला रेयर है। बच्ची का वजन 1 किलो 600 ग्राम है।

जन्म के बाद बच्ची डॉक्टरों की निगरानी में है और खतरे से बाहर है, लेकिन उसके माता-पिता उसे छोड़कर चले गए हैं। मंगलवार को अस्पताल परिसर में उन्हें तलाशा गया। माइक से अनाउसमेंट भी किया गया, लेकिन उनका पता नहीं चला।

इस तरह के मामले लाखों में एक होते हैं। आॅपरेशन के बाद घुटनों को सीधा किया जा सकता है। बच्ची को देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। अब तक इस तरह का मामला मैंने नहीं देखा है।

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