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एक एैसा पौधा जिसे छुने से जा सकती है जान

Date : 04-Sep-2020
हमारे पर्यावरण के लिए पेड़-पौधे कितने महत्वपूर्ण हैं ये तो सभी जानते हैं इसलिए लोग अपने घरों के आसपास हरियाली लाने के लिए भी पेड़-पौधे लगाते हैं। यूं तो पेड़-पौधे हमें कई तरह से फायदे पहुंचाते हैं, लेकिन कुछ पेड़-पौधे हमारे लिए काफी खतरनाक होते हैं। इन्हीं में से एक है जाइंट होगवीड, जो किलर ट्री (Killer tree) के नाम से भी जाना जाता है। गाजर की प्रजाति वाले इस पौधे का वैज्ञानिक नाम हेरकिलम मेंटागेजिएनम है। ये पौधा इतना जहरीला है कि इसे छूने भर से हाथों पर फफोले पड़ जाएंगे।
वैसे तो यह पौधा (Plant) देखने में इतना सुंदर लगता है कि अधिकांश लोगों का मन इसे छूने के लिए ललचा जाता है। इसे छूने के बाद ही 48 घंटे के अंदर इसके दुष्प्रभाव शरीर पर दिखने लगते हैं। वैज्ञानिको का मानना है कि यह पौधा सांप से भी ज्यादा जहरीला होता है। अगर आपने कभी इस पेड़ को स्पर्श कर दिया तो कुछ ही घंटों में आपको महसूस होगा कि आपकी पूरी त्वचा जलने लगी है। बता दें कि इस किलर ट्री की लंबाई अधिकतम 14 फीट तक होती है। ये पौधा ज्यादातर न्यूयार्क, पेंनसेल्वेनिया, ओहियो, मेरीलैण्ड, वाशिंगटन, मिशिगन और हेंपशायर में पाया जाता है।
इस पौधे को लेकर डॉक्टर्स (Doctors) का कहना है कि यदि कोई इस पौधे को स्पर्श कर ले तो उसकी आंखों की रोशनी जाने का खतरा भी बढ़ जाता है। अभी तक इस पौधे से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कोई सटीक दवा भी नहीं बन पाई है। जाइंट होगवीड के जहरीले होने का कारण है इसके अंदर पाए जाना वाला सेंसआइजिंग फूरानोकौमारिंस नामक रसायन, जो इसे खतरनाक बनाती है, लेकिन इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये वातावरण में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड (Oxygen and carbon dioxide) को बैलेंस करने में अपनी अहम भूमिका निभाता हैं।
 
 
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महिला को सांस लेने में हुई दिक्कत, फिर डॉक्टर भी देख हुए हैरान, जानिएं क्या है मामला

Date : 02-Sep-2020

मॉस्को (एजेंसी)। आप लोग कभी न कभी अजीबो गरीब मामला सुना या देखा जरूर होगा। लेकिन आज हम आप लोगो को एक ऐसे अजीबो गरीब एवं बहुत ही खतरनाक घटना की जानकारी बता रहे है जिसको सुनकर अच्छों - अच्छों के पसीना छूट जाये।
सांप का नाम सुनते ही हाँथ पैर में सिहरन पैदा हो जाता है। सांप चाहे विषैला हो या विषहीन हम सब उनसे बहुत डरते है। जैसा की हम अचानक से सांप देखते है तो घबरा जाते है। लेकिन उनका क्या हुआ होगा जिनके मुंह में 4 फ़ीट लम्बा सांप घुस जाये। जानिए इस अजीबो गरीब मामले के बारे में यहाँ।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है. वायरल हो रहा वीडियो रूस का है, जहां एक महिला के मुंह में 4 फीट लंबा सांप घुस गया. दरअसल, दागिस्तान के लेवाशी गांव में रहने वाली एक महिला अपने गार्डन में सो रहीं थीं। सोते हुए उनका मुंह खुला हुआ था। उसी दौरान चार फीट लंबा सांप मुंह के रास्ते उनके शरीर के अंदर चला गया।
इसके बाद महिला को सांस लेने में काफी तकलीफ होने लगी और उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया। जहां डॉक्टर्स ने एक ट्यूब के जरिये महिला के मुंह से 4 फीट लंबे सांप को निकाला। इलाज के दौरान वीडियो भी बनाया गया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला ऑपरेशन थिएटर में बेहोश नजर आ रही हैं, जबकि डॉक्टर्स उसके मुंह के अंदर से सांप को बाहर निकालते नजर आ रहे हैं. ट्यूब के जरिये सांप को बाहर निकाला गया.
सांप को बाहर निकाले जाने पर डॉक्टर के चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा है. वह कुछ सेकेंड के लिए डर जाती हैं और फिर सांप को हाथों में लेकर बॉक्स में डाल देती हैं. इस घटना के सामने आने के बाद रूस के दागेस्तान में प्रशासन ने लोगों से घरों के बाहर सोने के लिए मना किया है. महिला दागेस्तान में लेवाशी गांव की है, जो एक पहाड़ी क्षेत्र है. गांव के स्थानीय लोगों ने कहा है कि यह एक विचित्र घटना है. इससे पहले उन्होंने इस तरह की घटना के बारे में कभी नहीं सुना.

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एक फल के नीले रंग का अद्भुत रहस्य, जाने कहा से आता है ये रंग

Date : 25-Aug-2020

युरोप में एक काफी लोकप्रिय झाड़ी है, लॉरस्टाइनस (विबर्नम टाइनस) और वहां कई बाग-बगीचों में शौक से लगाई जाती है। इसके चमकदार नीले फलों पर हर किसी की निगाहें ठहर जाती हैं। लेकिन युनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल की रॉक्स मिडलटन और उनके साथी इन फलों की रंगत के पीछे का कारण जानने को उत्सुक थे।
शोधकर्ताओं ने फलों की आंतरिक संरचना पता करने के लिए फल के ऊतक लिए और इनका अवलोकन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप में किया। अब तक कई वैज्ञानिकों को लगता था कि अन्य नीले फलों (जैसे ब्लूबेरी) की तरह लॉरस्टाइनस के फलों का नीला रंग भी किसी नीले रंजक से आता होगा। लेकिन करंट बायोलॉजी में उक्त शोधकर्ताओं ने बताया है कि इन फलों में सिर्फ वसा की छोटी बूंदें कई परतों में इस तरह व्यवस्थित होती हैं कि वे नीले रंग को परावर्तित करती हैं। ऐसे रंगों को स्ट्रक्चरल कलर (यानी संरचनागत रंग) कहा जाता है जो किसी पदार्थ की उपस्थिति की वजह से नहीं बल्कि पदार्थों की जमावट के कारण पैदा होते हैं।
वसा की बूंदों के नीचे गहरे लाल रंजक की एक परत भी थीए जो किसी भी अन्य तरंग लंबाई के प्रकाश को सोख लेती है और नीले रंग को गहरा बनाती है। शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से इन निष्कर्षों की जांच की और दर्शाया कि वास्तव में स्ट्रक्चरल कलर लॉरस्टाइनस के फलों का नीला रंग बना सकता है।
संभावना है कि लॉरस्टाइनस फलों का चटख रंग पक्षियों को इनमें उच्च वसा मौजूद होने का संकेत देता हो।
वैसे तो स्ट्रक्चरल कलर के उदाहरण जानवरों में काफी दिखते हैं। जैसे मोर पंख और तितली के पंखों के चटख रंग। लेकिन पौधों में ऐसे रंग कम ही देखे गए हैं। और ऐसा पहली बार ही देखा गया है कि इन रंगों के लिए वसा ज़िम्मेदार है। शोधकर्ताओं को लगता है कि ऐसी व्यवस्था कई अन्य पौधों में भी हो सकती है और उनके बारे में पता लगाया जाना चाहिए।

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बिच्छू के जहर से बनता है दवाई

Date : 22-Aug-2020

आप माने ना माने पर वाकई  एक जहर ऐसा है जिसकी एक लीटर की मात्रा 76 करोड़ के लगभग मिलती है। यानि अगर आपको करोड़ों रुपए कमाने हैं तो जहर का धंधा करना काफी मुफीद हो सकता है, पर ये आसान नहीं है, क्योकि इसके लिए एक खास नीले बिच्छू की जरूरत होती है। इस बिच्छू के जहर से विडसटाॅक्स नाम की दवाई बनाई  जाती है और कैंसर के लाइलाज रोग को जड़ से खत्म करने वाली इस दवाई  को क्यूबा में चमत्कारी दवा कहा जाता है।

मंहगे जहरों की कहानी  और उनका दवाइयों में इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। हांलाकि इस समय इसके चर्चा में आने की वजह सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो है।  अपनी पोस्ट के साथ इसे हेशम अल-गलील नाम के फेसबुक पेज पर ये वीडियो डाला गया है। इसमें दी गई  जानकारी के चलते ये देखते ही देखते वायरल हो गया है। इस पोस्ट को अब तक 40 मिलियन बार से ज्यादा देखा जा चुका है, और  करीब 4 लाख 47 हजार लोगों ने इसे शेयर किया है। हेशम अल-गलील के फेसबुक पर लगभग 2,91,45,579 फॉलोअर्स हैं।

और भी हैं महंगे जहर 

इस वायरल पोस्ट में बताया गया है बिच्छू के एक लीटर जहर की कीमत 75 करोड़ 86 लाख 22 हजार 362 है। यानि ये बिच्छू का जहर थाईलैंड के विश्व प्रसिद्ध किंग कोबरा के जहर से भी महंगा है। मतलब मंहगे जहर और भी हैं।  किंग कोबरा के एक लीटर जहर की कीमत भारतीय मुद्रा में 30 करोड़ 24 लाख 540 रुपये है। बताया गया है कि बिच्छू के जहर में 50 लाख से भी ज्यादा ऐसे यौगिक मौजूद रहते हैं, जिन्हें पहचानना अभी बाकी है। इस रहस्य के खुलने के बाद चिकित्सा के क्षेत्र में बिच्छू के जहर का महत्व आैर अधिक हो जायेगा आैर कर्इ दूसरे असाध्य रोगों की दवाइयां बन सकेगी एेसी संभावना है।

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एक ग्रामीण के मकान में बड़ी तादाद में दिखें अजगर, गांव में मचा हडकंप

Date : 04-Aug-2020

कोरबा। कोरबा के नक्तिखार ग्राम पंचायत के भालूसटका में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक ग्रामीण के मकान में बड़ी तादाद में अजगर देखे गए। अजगर की सूचना मकान मालिक विवेक सिंह ने स्नेक रेस्क्यू की टीम को दी। मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने जब इतनी बड़ी तादाद में एक साथ अजगरों को देखा तो उनके भी पेशानी से पसीने टपकने लगे। टीम द्वारा सभी अजगरों का रेस्क्यू किया गया।स्नेक कैचर जितेंद्र सार्थी ने बताया कि घंटों मशक्कत के बाद खोदाई कर एक मादा अजगर के साथ 13 बेबी स्नेक साथ मिले। घटना की सूचना वन विभाग को दी गई है।

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प्रकृति का अजुबा : एक बकरी ने दो सिर वाले बच्चे को दिया जन्म

Date : 31-Jul-2020

अंबिकापुर। प्रकृति अजूबों से भरी पड़ी है. प्रकृति ने एक अजूबा अंबिकापुर के ग्राम चठीरमा में भी दिखाया है, जहां एक बकरी ने दो सिर वाले बच्चे को जन्म दिया है.

इस बकरे की तीन कान, चार आंखें हैं. बकरी दोनों सर से दूध पीती है और दोनों ही मुंह से आवाज निकालता है.

अंबिकापुर के चठीरमा निवासी देवशरण राम पंडा के घर में 2 दिन पहले जन्मे बकरी के बच्चे को देखने लोग काफी दूर से पहुंच रहे हैं. बकरी के मालिक देव शरण का कहना है कि यह अजूबा ही है. अब बकरे के देखभाल की जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गई है. क्योंकिं भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्या आ सकती है.

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जब अंडे की जगह मुर्गी ने दिया चूजे को जन्म

Date : 07-Jul-2020

नुआपाड़ा (एजेंसी) । ‘पहले मुर्गी आई या फिर पहले अंडा’ आज तक इस सवाल का जवाब किसी को नहीं मिला, लेकिन क्या कभी ये सुना है कि मुर्गी ने अंडे की जगह चूजे को जन्म दे दिया। जी हां ऐसा हुआ है ओडिशा के नुआपाड़ा में हुआ, जहां एक मुर्गी के चूजे को जन्म देने पर लोग हैरान रह गए।

जानकारी के अनुसार नुआपाड़ा जिले के इच्छापुर गांव में अंबिका मांझी के घर एक मुर्गी ने चूजे को जन्म दिया। हालांकि, जन्म के 10 मिनट बाद ही चूजे की मौत हो गई। इच्छापुर गांव में मुर्गी अपने 9 अंडों को सेने का काम कर रही थी। 

इसी दौरान मुर्गी उस जगह से हटकर दूसरे जगह पर जाकर बैठ गई। काफी देर बाद भी जब वो वहां से नहीं उठी तो लोगों ने वहां जाकर देखा, तो पता लगा कि  मुर्गी ने एक चूजे को जन्म दिया था। लोगों ने आसपास देखा की कहीं कोई टूटा हुआ अंडा तो नहीं है, लेकिन वहां ऐसा कुछ भी नहीं मिला।

इस घटना को लेकर नुआपाड़ा जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.त्रिलोचन ढल ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी घटना कभी नहीं देखी है, लेकिन उन्होंने बताया कि संभवत: मुर्गी के प्रजनन तंत्र में ही वो अंडा बाहर आने की जगह विकसित हो गया होगा। जिससे चूजे का जन्म हुआ। इस मामले में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि शरीर से बाहर आने के बाद 21 दिनों तक मुर्गी अपने अंडे को सेती है जिससे चूजे का जन्म होता है।  

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सर्व औषधि गुणों से युक्त ’मुनगा’… 6 जुलाई से पूरे प्रदेश में होगा इसका रोपण…

Date : 05-Jul-2020

रायपुर। छग ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में ’मुनगा’ की विशिष्टता प्रचारित हो चुकी है। इसे उगाने के लिए देश के ही कई हिस्सों में संघर्ष जारी है। इसके विपरीत छग एक ऐसा प्रदेश है, जहां पर मुनगा बड़ी आसानी से अपनी छटाएं बिखेगरता है। ’मुनगा’ एक ऐसा औषधि गुणों से युक्त वृक्ष है, जिसके पत्ते, फूल और फल के एक नहीं बल्कि कई गुण है। बतौर साग जितना यह स्वादिष्ट है, उससे भी कहीं ज्यादा यह दवाई निर्माण के लिए उपयोगी है। यही वजह है कि अब विश्वभर में इसकी मांग बढ़ती जा रही है।

छग सरकार ने इस बात को बेहतर तरीके से समझ लिया है, जिसकी वजह से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार वन विभाग द्वारा 6 जुलाई को राज्य भर में ‘मुनगा’ पौधरोपण का विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के समस्त शासकीय स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों और छात्रावास-आश्रमों में मुनगा के पौधे का रोपण किया जाएगा।

वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि यह अभियान मुख्यमंत्री बघेल के कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने में अहम् भूमिका निभाएगा। राज्य शासन द्वारा संचालित इस महत्वपूर्ण अभियान को शासन-प्रशासन के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों के सहयोग से सफल बनाना है। इस महत्वपूर्ण कार्य को अभियान का रूप देने के लिए राज्य भर में एक ही तिथि 6 जुलाई निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि मुनगा हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। राज्य के स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों और छात्रावास-आश्रमों में इसके रोपण से मुनगा की सहजता से उपलब्धता होगी वहीं इन संस्थाओं के परिसरों में हरियाली सहित पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने अभियान को सफल बनाने के लिए सभी वनमंडलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि पौष्टिकता से भरपूर मुनगा को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। यह डायबिटीज से लेकर कैंसर जैसे भयंकर बीमारियों तक के लिए चमत्कारी होता है। यह भी बताया जाता है कि मुनगा मल्टीविटामिन से भरपूर होता है। इसकी पत्तियों में प्रोटीन के साथ-साथ विटामिन बी-6, विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन ई पाया जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि इसमें आयरन, मैगनिशियम, पोटेशियम और जिंक जैसे मिनरल भी पाए जाते हैं।

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अब आपके बच्चे फेसबुक पर करेंगे पढाई…

Date : 05-Jul-2020

नयी दिल्ली (एजेंसी) । सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने अपने छात्रों और शिक्षकों को डिजिटल सेप्टी की ट्रेनिंग दिलाने के लिए फेसबुक के साथ करार किया है। जिससे कि छात्रों और शिक्षकों ऑनलाइन संभावित मुश्किलों से बचाया जा सके। ऑनलाइन क्लासेस और ई लर्निंग से छात्र में इंटरनेट का इस्तेमाल और ज्यादा बढ़ गया है। कोरोना वायरस का यह दौर ऑनलाइन छेड़छाड़, फेक न्यूज, भ्रामक सूचना और इंटरनेट के इस्तेमाल की लत में भी बढ़ोतरी की है।

इसी को देखते हुए सीबीएसई ने फेसबुक के साथ करार किया है जिसमें फेसबुक टीचर और छात्रों को फ्री में डिजिटल सेफ्टी की ट्रेनिंग देगा। इस ट्रेनिंग का पहला चरण अगस्त से नवंबर 2020 में शुरू होगा जो कि वर्चुअल मोड ट्रेनिंग होगी।

सीबीएसई और फेसबुक की इस ट्रेनिंग में भाग लेने वालों को कोर्स पूरा होने ई सर्टिफिकेट भी दोनों संस्थाओं की ओर से संयुक्त रूप से दिया जाएगा।

सीबीएसई और फेसबुक का यह ट्रेनिंग प्रोग्राम तीन हफ्तों का होगा जिसमें 10000 शिक्षकों को इंटरनेट पर आने वाली चुनौतियों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही 10 हजार स्टूडेंट्स को भी डिजिटल सेफ्टी के बारे में ट्रेन किया जाएगा।

डिजिटल सेफ्टी कैटेगरी के तहत छात्रों को इंस्टाग्राम टूलकिट के बारे में ट्रेन किया जाएगा। इसके लिए रजिष्ट्रेशन प्रकिया 6 जुलाई से 20 जुलाई तक चलेगी। शिक्षकों को ट्रेनिंग प्रोग्रम 10 अगस्त से शुरू होगा जबकि छात्रों के लिए यह कार्यक्रम 6 अगस्त से शुरू किया जाएगा।

सीबीएसई की इस पहल को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने भी सराहा है।

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कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने वाली टीम का हिस्सा बनीं भारतीय मूल की वैज्ञानिक चंद्रबाली दत्ता

Date : 01-Jun-2020

लंदन, (एजेंसी).  कोरोना वायरस से रक्षा करने वाले टीके की खोज करने की परियोजना पर काम कर रही ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की टीम का हिस्सा भारतीय मूल की एक वैज्ञानिक ने कहा कि वह इस मानवीय उद्देश्य का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस करती हैं जिसके नतीजों से दुनिया की उम्मीदें जुड़ी हैं। कोलकाता में जन्मी चंद्रबाली दत्ता विश्वविद्यालय के जेन्नेर इंस्टीट्यूट में क्लीनिकल बायोमैन्चुफैक्चरिंग फैसिलिटी में काम करती हैं जहां कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सीएचएडीओएक्स1 एनसीओवी-19 नाम के टीके के मानवीय परीक्षण का दूसरा और तीसरा चरण चल रहा है।क्वालिटी एस्युरेंस मैनेजर के तौर पर 34 वर्षीय दत्ता का काम यह सुनिश्चित करना है कि टीके के सभी स्तरों का अनुपालन किया जाए।दत्ता ने कहा, ‘‘हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि यह अगले चरण में कामयाब होगा, पूरी दुनिया इस टीके से उम्मीद लगा रही है।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘इस परियोजना का हिस्सा बनना एक तरह से मानवीय उद्देश्य है। हम गैर लाभकारी संगठन हैं, इस टीके को सफल बनाने के लिए हर दिन अतिरिक्त घंटों तक काम कर रहे हैं ताकि इंसानों की जान बचाई जा सकें। यह व्यापक तौर पर सामूहिक प्रयास है और हर कोई इसकी कामयाबी के लिए लगातार काम कर रहा है। मुझे लगता है कि इस परियोजना का हिस्सा होना सम्मान की बात हैं’’. दत्ता जीव विज्ञान के क्षेत्र में पुरुषों के प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए भारत में युवा लड़कियों को प्रेरित करना चाहती हैं।उन्होंने कहा, ‘‘मेरे बचपन का दोस्त नॉटिंघम में पढ़ाई कर रहा था जिसने मुझे प्रेरित किया और ब्रिटेन को समान अधिकारों, महिला अधिकारों के लिए जाना जाता है इसलिए मैंने लीड्स विश्वविद्यालय से जैव प्रौद्योगिकी में मास्टर्स करने का फैसला किया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह असली संघर्ष रहा - भारत छोड़ना और यहां आना। मेरी मां भी इससे खुश नहीं थीं लेकिन मेरे पिता हमेशा मेरे लिए महत्वाकांक्षी रहे और मैंने कहा कि मुझे अपने सपनों को पूरा करना चाहिए और समझौता नहीं करना चाहिए।’’  (भाषा) 

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