छत्तीसगढ़

26 साल पुराना गृह निर्माण घोटाला : EOW ने तत्कालीन प्रबंधक को दबोचा, करोड़ों के गबन का है मामला

रायपुर। छत्तीसगढ़ में दशकों पुराने भ्रष्टाचार के मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। ईओडब्ल्यू ने सहकारी आवास संघ, भोपाल के तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप निखरा को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई करीब ₹1.86 करोड़ के उस गबन से जुड़ी है, जिसकी जड़ें 90 के दशक के उत्तरार्ध से जुड़ी हैं।

फर्जी दस्तावेजों से खड़ा किया गया ‘कागजी’ घोटाला

जांच में सामने आया है कि साल 1995 से 1998 के बीच सरकारी आवास योजना का लाभ असली जरूरतमंदों के बजाय फर्जी लाभार्थियों को दिया गया। आरोपी प्रदीप निखरा ने अपने साथियों के साथ मिलकर साजिश रची और 126 लोगों के नाम पर ₹1-1 लाख का फर्जी लोन स्वीकृत कराया।

इस घोटाले की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

अस्तित्वहीन निर्माण: जिन जमीनों और मकानों के नाम पर लोन लिया गया, धरातल पर उनका कोई नामो-निशान नहीं मिला।

फर्जी दस्तावेज: लोन लेने के लिए इस्तेमाल किए गए सभी कागजात और पहचान पत्र जाली पाए गए।

स्थान: यह पूरा खेल रायपुर के रायपुरा और पंडरीकांचा गांवों में मकान बनाने के नाम पर खेला गया था।

लगातार हो रही गिरफ्तारियां

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ईओडब्ल्यू पिछले कुछ समय से काफी सक्रिय है। इसी कड़ी में 18 मार्च को भी दो महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां की गई थीं:

थावरदास माधवानी (तत्कालीन अध्यक्ष)

बसंत कुमार साहू (आवास पर्यवेक्षक)

पृष्ठभूमि: इस घोटाले का खुलासा होने के बाद साल 2000 में पहली बार मामला दर्ज किया गया था। लंबे समय तक चली जांच के बाद अब एजेंसियां दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने के लिए तेजी से कदम उठा रही हैं।

निखरा की गिरफ्तारी के साथ ही इस घोटाले में शामिल अन्य कड़ियों को जोड़ने में जांच टीम को बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

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