Chhattisgarh

पोते की पढ़ाई के लिए रखे पैसे को रिटायर्ड शिक्षक दास ने दान कर दिया

कांकेर :- भानुप्रतापपुर बंग समाज के अध्यक्ष , सेवा निवृत्त शिक्षक मनोतोष कुमार दास द्वारा कारोना वायरस (कोविड 19 ) की महामारी से देश मे जो भयावह स्थिति निर्मित हो रही है । देश के लोग जिस प्रकार कोरोना के संक्रमण के शिकार व आइसोलेशन हो रहे है इसे देखते हुए अपने नाती के पढ़ाई के लिए रखे पैसे को देश के कल्याण के लिए समर्पित करते हुए एक लाख रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में दान दिया जिसकी भानुप्रतापपुर बंग समाज ने काफी सराहना की । बंगबंधु पत्रिका न्यूज इस जनसरोकार के फैसले के प्रति आभार व्यक्त करता है।

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कोरोना के संक्रमण और उसके लक्षण सामने आने में कितना समय लगता है?

दुनिया भर के 185 से भी ज़्यादा देशों में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले सामने आए हैं.विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे एक महामारी घोषित किया है.भारत और अमरीका ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए अपने यहां यात्रा प्रतिबंध लागू किए हैं.  कोरोना के संक्रमण और उसके लक्षण सामने आने में कितना समय लगता है? वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस से संक्रमण के बाद इसके लक्षण सामने आने में पांच दिनों का समय लगता है लेकिन कुछ लोगों में इसके लक्षण दिखने में इससे ज़्यादा वक़्त भी लग सकता है.विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के लक्षण 14 दिनों तक रहते हैं. लेकिन कुछ शोधकर्ताओं की राय में इसके लक्षण 24 दिनों तक रह सकते हैं. कोरोना वायरस से जुड़े कई सवाल जिनके जवाब आपको जानना चाहिए -

फ़्लू और कोरोना वायरस में क्या अंतर है?
कोरोना वायरस और फ़्लू (बुखार और संक्रामक जुकाम) के कई लक्षण एक जैसे हैं. बिना मेडिकल टेस्ट के इसके अंतर को समझना मुश्किल है.कोरोना वायरस के प्रमुख लक्षण बुखार और सर्दी ही है. फ्लू में अक्सर दूसरे लक्षण भी दिखाई देते हैं जैसे गले में दर्द.जबकि कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति को सांस की तकलीफ़ की शिकायत रहती है.

कोरोना से संक्रमण के बाद ठीक होने वाले लोग दोबारा संक्रमित नहीं होंगे?
फिलहाल ये कहना जल्दबाज़ी होगी. इस वायरस के बारे में अभी दिसंबर में ही पता चला है.वायरस संक्रमण के दूसरे मामलों से जुड़े अतीत के अनुभव बताते हैं कि रोग रोग प्रतिरोधकों के ज़रिये इससे बचाव किया जा सकता है. चीन से मिलने वाली कुछ रिपोर्टों में ये कहा गया है कि हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद भी कुछ लोगों के टेस्ट पॉज़िटिव पाए गए हैं पर हम उन टेस्ट को लेकर पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकते.हालांकि गौर करने वाली बात ये है कि ऐसे लोगों से अब संक्रमण का कोई ख़तरा नहीं था.

अस्थमा के मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक़?
हमारे श्वसन तंत्र या हमारी सांस लेने की प्रणाली में किसी भी तरह का संक्रमण, वो चाहे कोरोना वायरस ही क्यों न हो, अस्थमा की तकलीफ़ बढ़ा सकता है.
कोरोना वायरस को लेकर चिंतित अस्थमा के मरीज कुछ एहतियाती कदम उठा सकते हैं. इसमें डॉक्टर द्वारा सुझाए गए इनहेलर का इस्तेमाल भी शामिल है.
इससे कोरोना सहित किसी वायरस किसी वजह से पड़ने वाले अस्थमा के दौरे का ख़तरा कम होता है.

क्या कोरोना का संक्रमण फोन से भी हो सकता है?
माना जाता है कि कोरोना वायरस का संक्रमण छींकने या खांसने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हो सकता है. लेकिन जानकारों का कहना है कि ये वायरस किसी सतह पर भी अस्तित्व में रह सकता है और वो भी संभवतः कई दिनों तक.
इसलिए ये अहम है कि आपका फोन चाहे घर पर हो या दफ़्तर में पूरी तरह से बार-बार साफ़ हो. आजकल जो मोबाइल फोन आते हैं, उनके बारे में कहा जाता है कि वे वाटर रेजिस्टेंस होते हैं यानी पानी से उनको कम ख़तरा रहता है.अगर ऐसा है तो आप फोन को साबुन और पानी या फिर पेपर टॉवल से साफ़ कर सकते हैं लेकिन ऐसा करने से पहले ये ज़रूर जांच लें कि आपका फोन वाटर रेजिस्टेंस है या नहीं.

क्या कोरोना दरवाज़े के हैंडल से भी फैल सकता है?
अगर कोई संक्रमित व्यक्ति छींकते वक़्त मुंह पर हाथ रखता है और फिर उसी हाथ से वो किसी चीज़ को छूता है तो वो सतह विषाणु युक्त हो जाती है.दरवाज़े के हैंडल ऐसी सतहों के अच्छे उदाहरण हैं जिससे दूसरे लोगों को संक्रमण का ख़तरा हो सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस किसी सतह पर भी अस्तित्व में रह सकता है और वो भी कई दिनों तक.

मास्क पहनना कितना ज़रूरी?
हालांकि डॉक्टर लोग हमेशा ही मास्क पहने हुए दिखते हैं लेकिन इस बात के प्रमाण कम ही मिलते हैं कि आम लोगों के मास्क पहनने से चीज़ें बदल जाती हैं.ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए वो मास्क पहनने की सिफारिश नहीं करता है.फिर भी अपनी सुरक्षा के लिए मास्क पहनना जरुरी है. विशेषज्ञों की राय में साफ़-सफ़ाई जैसे कि नियमित रूप से हाथ धोना ज़्यादा असरदार है.

बच्चों के लिए कितना ख़तरा?
चीन से मिल रहे आंकड़ों के अनुसार बच्चे तुलनात्मक रूप से कोरोना संक्रमण से बचे हुए हैं.हालांकि जिन बच्चों को फेफड़े की बीमारी है या फिर अस्थमा है, उन्हें ज़्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है क्योंकि ऐसे मामलों में कोरोना वायरस हमला कर सकता है.ज़्यादातर बच्चों के लिए ये श्वसन संबंधी सामान्य संक्रमण की तरह है और इसमें ख़तरे जैसी कोई बात नहीं है.

Sports

न्यूजीलैंड ने भारत को सात विकेट से हराया, श्रृंखला 2-0 से जीती

क्राइस्टचर्च, (एजेंसी)।सितारों से सजी भारतीय टीम एक बार फिर कागजी शेर साबित हुई जिसे न्यूजीलैंड की अनुशासित टीम ने दूसरे और अंतिम टेस्ट में तीन दिन के भीतर सोमवार को यहां सात विकेट से हराकर श्रृंखला में 2-0 से क्लीनस्वीप किया।भारत के 132 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड ने 36 ओवर में तीन विकेट पर 132 रन बनाकर जीत दर्ज की।इससे पहले भारतीय टीम आज सुबह छह विकेट पर 90 रन से आगे खेलने उतरी और सुबह एक घंटे के अंदर ही उसकी दूसरी पारी 124 रन पर सिमट गई। बल्लेबाजी करते हुए मोहम्मद शमी को गेंद से चोट लगी और वह गेंदबाजी करने नहीं उतरे जिससे न्यूजीलैंड की राह आसान हो गई। सलामी बल्लेबाजों टाम ब्लंडेल (113 गेंद में 55 रन) और टाम लैथम (74 गेंद में 52 रन) ने पहले विकेट के लिए 103 रन की साझेदारी करके आसान जीत की नींव रखी।

इस श्रृंखला को जीतकर न्यूजीलैंड ने आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में 120 अंक हासिल किए और उसके कुल 180 अंक हो गए हैं। भारत हालांकि वेस्टइंडीज, दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश को हराकर 360 अंक के साथ शीर्ष पर चल रहा है।भारत ने न्यूजीलैंड दौरे पर टी20 श्रृंखला 5-0 से जीती थी लेकिन इसके बाद विराट कोहली की टीम को एकदिवसीय श्रृंखला में 0-3 और टेस्ट श्रृंखला में 0-2 से क्लीनस्वीप का सामना करना पड़ा।भारत के इस प्रदर्शन से एक बार फिर साबित हो गया कि कागजों पर उसका रिकार्ड भले ही कितना अच्छा हो लेकिन जब गेंद स्विंग और सीम करती है तो उसके बल्लेबाज धराशायी हो जाते हैं। इंग्लैंड में 2014 और 2018 तथा अब न्यूजीलैंड में टीम को ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा।श्रृंखला के हार के अंतर से अधिक समस्या यह है कि भारतीय बल्लेबाजों ने बिना संघर्ष किए घुटने टेक दिए।दो मैचों की श्रृंखला की चार पारियों में भारत की ओर से सिर्फ चार अर्धशतक लगे और इस दौरान सीम और स्विंग लेती गेंद के खिलाफ अजिंक्य रहाणे, मयंक अग्रवाल, कोहली, चेतेश्वर पुजारा और पृथ्वी शॉ  सहित लगभग सभी खिलाड़ियों की तकनीक पर सवाल उठे। (भाषा)

Astrology

क्या आपने भी सपने में दांत टूटते हुए देखा है? जानें सपने में दांत टूटना देखने के शुभ-अशुभ संकेत

ज्योतिषी। क्या आपने भी सपने में दांत टूटते हुए देखा है? हम सभी सपने देखते हैं. कभी अच्छे तो कभी बुरे, लेकिन सपने आते ज़रूर हैं. ज़्यादातर सपने देखकर हम भूल भी जाते हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हमारा देखा हुआ सपना हमें याद भी रहता है ओर किसी घटना को भी दर्शाता है. ऐसे विशेष सपनों का दिखना और उनका हमें याद रहना या तो आनेवाली किसी विशेष घटना की तरफ़ संकेत देता है या हमारे साथ हो चुकी घटना या हमारे आसपास के माहौल को दर्शाता है. ऐसा ही एक सपना है दांत टूटने का, जो अक्सर लागों को दिखाई देता है. आइए, जानते हैं दांत टूटने के सपने से जुड़े कुछ अर्थ. हम अक्सर अपने घर के बड़े-बुज़ुर्गों को कहते सुनते हैं कि सुबह के सपने अक्सर सच होते हैं. लेकिन सही मायने में ऐसा कोई भी सपना जिसमें कोई विशेष घटना या कोई वस्तु दिखाई दे, तो ऐसा सपना किसी ख़ास परिस्थिति जो हो घटित हो चुकी है या होनेवाली है, उसकी ओर संकेत देता है. 

 क्या होता है सपने में दांत टूटते देखना ?

आपने भी अक्सर ऐसा सुना होगा कि दांत टूटने का स्वप्न आनेवाली बीमारी, संकट या किसी कष्ट को दर्शाते हैं, पर क्या यह सच है? क्या सही में दांत टूटना आनेवाली किसी परेशानी की ओर संकेत करता है? नहीं, ये सच नहीं है. बचपन में जब हमारे दूध के दांत गिरते हैं, तो हमें उनके बदले नए और मज़बूत दांत मिलते हैं और ये नए दांत ज़िंदगीभर हमारे साथ रहते हैं. नए दांत तभी आते हैं, जब पुराने दांत टूट जाएं.

इसी तरह जब कोई व्यक्ति दांत टूटने का सपना देखता है, तो वह उसके जीवन में आनेवाले नए अवसरों की ओर इशारा करता है.

इसके अतिरिक्त यह भी मायने रखता है कि व्यक्ति ने सपना किन परिस्थितियों में देखा है. अगर हम सामान्य रूप से दांत टूटने का सपना देखें, तो दांत टूटने का स्वप्न एक बहुत अच्छा और नवीनता दर्शानेवाला स्वप्न माना गया है. अत: आपने भी यदि सपने में दांत टूटते देखा है, तो डरें नहीं, ये आपके लिए बहुत अच्छा संकेत है.