छत्तीसगढ़ में डिजिटल अरेस्ट के जरिए 32 करोड़ की ठगी, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में उठाया मुद्दा

रायपुर। देश भर में डिजिटल अरेस्ट (साइबर फ्रॉड) के झांसे में आकर 3,000 करोड़ रुपए गंवा दिए. यह आंकड़ा रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में पेश करते हुए सरकार का ध्यान साइबर ठगी के ट्रेंड ‘डिजिटल अरेस्ट’ की ओर खींचा. उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा बुजुर्ग और अकेले रहने वाले लोग इस फ्रॉड के झांसे में आए. साथ ही उन्होंने सरकार से ऐसे घोटालों को रोकने के लिए बैंकिंग में AI-इनेबल्ड फ्रिक्शन और साइबर ठगों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति बनाने की मांग भी की.
‘डिजिटल अरेस्ट एक बहुत बड़ी चुनौती है’
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया- ‘डिजिटल अरेस्ट एक बहुत बड़ी चुनौती है. SC के अनुसार भारत में ही पीड़ितों, जिनमें ज्यादातर बुज़ुर्ग थे, ने 3,000 करोड़ रुपए गंवा दिए. सितंबर 24 – मार्च 25 के बीच, एक महिला ने INR 32 करोड़ गंवा दिए. मैंने माननीय वित्त मंत्री से ऐसे घोटालों को रोकने के लिए बैंकिंग में AI-इनेबल्ड फ्रिक्शन (कूलिंग ऑफ- एस्क्रो) लागू करने का अनुरोध किया है.
साइबर फ्रॉड को लेकर चिंता
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में साइबर फ्रॉड को लेकर चिंता जाहिर की. उन्होंने बताया कि देशभर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘फाइनेंशियल फ्रॉड’ के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. यह सिर्फ साइबर अपराध नहीं, बल्कि लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और जीवनभर की मेहनत से जमा की गई संपत्ति पर सीधा हमला है.
उन्होंने कहा- ‘ऑनलाइन लुटेरे अब पुलिस अफसर बनकर वीडियो कॉल करते हैं, वर्दी में दिखाई देते हैं और फर्जी कार्रवाई का भय दिखाकर पीड़ितों से पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं.’ इसकी चपेट मे सबसे ज्यादा बुजुर्ग, अकेले रहने वाले लोग और वह लोग जो ज्यादा तकनीक के बारे में नहीं जानते हैं वो लोग आए. डिजिटल अरेस्ट के गिरोह ने लोगों की बचत, रिटायरमेंट फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट तक के पैसे लूट लिए.
छत्तीसगढ़ में 32 करोड़ की ठगी
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ में बीते 3 सालों में डिजिटल अरेस्ट की आड़ में ऑनलाइन ठगी के 40 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. साइबर ठगों ने करीब 32 करोड़ की ठगी की. इसके अलावा संसद में राजनांदगांव से सांसद संतोष पांडे ने खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की जोरदार मांग रखी.
















