पोषण अभियान : महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य सुधार की दिशा में पूरे प्रदेश में चल रहा जागरूकता कार्यक्रम

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के कुशल मार्गदर्शन में, छत्तीसगढ़ राज्य में पोषण अभियान को ज़ोर-शोर से चलाया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, शिशुओं और किशोरियों के पोषण स्तर को बेहतर बनाना है। साथ ही, इसका लक्ष्य समुदायों को संतुलित आहार और सही पोषण के महत्व के बारे में जागरूक करना है।
कुपोषण और एनीमिया से मुक्ति की राह
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को सबसे ऊँची प्राथमिकता दे रही है। उनका मानना है कि पोषण अभियान कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जड़ से खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने इस बात पर ज़ोर दिया कि विभाग का लक्ष्य गाँव-गाँव तक पोषण का संदेश पहुँचाकर महिलाओं और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।
ज़िला स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम
कलेक्टरों और जिला कार्यक्रम अधिकारियों के नेतृत्व में, यह अभियान प्रदेश के सभी ज़िलों में लगातार प्रगति कर रहा है। इसी क्रम में, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर ज़िले के चौनपुर और ग्राम पंचायत कठौतिया में एक विशेष पोषण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस कार्यक्रम में, विशेषज्ञों और अधिकारियों ने महिलाओं को निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी:
बाल कुपोषण पर नियंत्रण: 0 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों में बौनापन (Stunting), कम वज़न (Underweight), और जन्म के समय कम वज़न (Low Birth Weight) की समस्या को रोकना और कुपोषण की दर को कम करना।
एनीमिया का निवारण: बच्चों, किशोरियों और 15-49 वर्ष की महिलाओं में एनीमिया के मामलों में कमी लाना।
मातृ पोषण: गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को कुपोषण के जोखिमों और उनके लिए संतुलित आहार के बारे में शिक्षित करना।
समग्र स्वास्थ्य सुनिश्चित करना: माताओं और बच्चों के लिए संतुलित पोषण को बढ़ावा देना और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करना।
समुदाय में पोषण का प्रसार
कार्यक्रम के समापन पर, उपस्थित महिलाओं को पौष्टिक नाश्ता कराया गया और उनसे यह आग्रह किया गया कि वे अपने परिवारों और समुदाय में भी पोषण के संबंध में मिली जानकारियों को फैलाएँ। यह अभियान केवल महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य स्तर को ही नहीं सुधार रहा है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में सही पोषण का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है।
















