भारत-कनाडा संबंधों में नई ऊर्जा : AI और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहमति, व्यापार पर ज़ोर

नई दिल्ली (एजेंसी)। कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में आई तल्खी के बाद, भारत और कनाडा के संबंधों में फिर से गर्माहट आनी शुरू हो गई है। हाल ही में भारत दौरे पर आईं कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं।
इन बैठकों में दोनों देशों ने व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वकांक्षी रोडमैप पर सहमति जताई। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। विदेश मंत्री आनंद का यह दौरा रिश्तों को पटरी पर लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
संबंधों में सुधार और खालिस्तान पर चिंता
हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री जयशंकर के साथ हुई मुलाकात के दौरान, अनीता आनंद ने दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और एक-दूसरे की रणनीतिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए, जल्द ही द्विपक्षीय व्यापार और निवेश पर मंत्रिस्तरीय बातचीत शुरू करने पर भी सहमति दी। यह भी माना जा रहा है कि भारतीय पक्ष ने इस बैठक में कनाडा में सक्रिय खालिस्तान समर्थक तत्वों की गतिविधियों पर अपनी चिंताएं स्पष्ट रूप से व्यक्त कीं।
बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की चिंताओं और संवेदनशीलताओं का सम्मान करते हुए, लोगों से लोगों के बीच के संबंधों और बढ़ती आर्थिक आवश्यकताओं के आधार पर एक मजबूत और संतुलित साझेदारी की ओर बढ़ेंगे।
AI, निवेश और खनिज तत्वों पर फोकस
दोनों विदेश मंत्रियों की बातचीत के बाद, भारत और कनाडा आर्थिक क्षेत्र में मिलकर काम करने के लिए सहमत हुए हैं, जिसके तहत जल्द ही मंत्रिस्तरीय वार्ता की शुरुआत होगी। इससे पिछले कुछ समय से रुकी हुई आर्थिक चर्चाएँ फिर से शुरू हो सकेंगी।
इसके अलावा, फरवरी में भारत में आयोजित होने वाले एआई शिखर सम्मेलन (AI Summit) में कनाडाई कंपनियों और वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा। इससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में दोनों देश संयुक्त रूप से काम कर सकेंगे।
द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने का निर्णय
निज्जर की हत्या के बाद उपजे विवाद के कारण भारत ने कनाडा से अपने राजनयिकों को वापस बुलाया था, जबकि कनाडा के राजनयिकों को भारत से निष्कासित कर दिया गया था, जिससे रिश्तों में बड़ी दरार आ गई थी। अब, दोनों विदेश मंत्रियों की इस बैठक के बाद राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से औपचारिक कूटनीतिक संबंधों का विस्तार होगा और दोनों देशों के बीच निर्णय लेने तथा गलतफहमियों को दूर करने में आसानी होगी।
यह वार्ता प्रधानमंत्री मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी के बीच जून में कनाडा के जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर हुई बैठक के चार महीने बाद हुई है।
















