छत्तीसगढ़

एनईपी-2020 नए छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : टंकराम वर्मा

रायपुर। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन पर आयोजित कार्यशाला केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह नए छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन 2047 के अनुरूप भारत को एक विकसित और समृद्ध राष्ट्र बनाने में इस नई शिक्षा नीति की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।

तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री खुशवंत साहेब ने अपनी बात रखते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक, कौशल-आधारित और रोज़गारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नीति छत्तीसगढ़ राज्य में तकनीकी शिक्षा को नई ऊँचाइयाँ देगी।

एनईपी-2020 क्रियान्वयन पर कार्यशाला

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के प्रभावी ढंग से लागू करने और मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में एक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन तकनीकी शिक्षा विभाग और स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई के संयुक्त प्रयासों से संपन्न हुआ।

तकनीकी शिक्षा में नवाचार और अनुसंधान को प्राथमिकता

मंत्री श्री वर्मा ने एनईपी-2020 को भारत की शिक्षा व्यवस्था को 21वीं सदी की ज़रूरतों के अनुरूप ढालने वाली क्रांतिकारी पहल बताया। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में तकनीकी शिक्षा संचालनालय के अधीन और स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी शासकीय और निजी महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया जा चुका है।

उन्होंने ज़ोर दिया कि एनईपी-2020 ने तकनीकी शिक्षा को नई दिशा प्रदान की है, जिसमें कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को विशेष महत्व दिया गया है। मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और इंडस्ट्री लिंक्ड करिकुलम जैसी नई व्यवस्थाएँ शिक्षा को अधिक लचीला और उपयोगी बना रही हैं। श्री वर्मा ने शिक्षकों को परिवर्तन का वास्तविक वाहक बताते हुए कहा कि उनकी सक्रिय भागीदारी से ही नीति के उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है।

कौशल, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश

मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि तकनीकी शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा, नवाचार और कौशल विकास को प्रायोगिक स्तर पर शामिल करना समय की माँग है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों और शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को प्रयोग, अनुसंधान और उद्यमिता के लिए प्रेरित करें, ताकि वे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान दे सकें।

उन्होंने यह भी बताया कि एनईपी-2020 के तहत तकनीकी शिक्षा का ढाँचा अधिक लचीला, उद्योगोन्मुखी और समकालीन बनाया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और इंडस्ट्री लिंक्ड करिकुलम जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

नीति के क्रियान्वयन में साझा सहयोग पर बल

कार्यशाला में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोज़गार विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्राध्यापकगण और तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए साझा समझ, समन्वय और नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण आवश्यक है, जिससे छत्तीसगढ़ राज्य में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को उच्च स्तर पर ले जाया जा सके।

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