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वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत : कम मुद्रास्फीति, उच्च वृद्धि

नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि दुनियाभर में जारी अस्थिरता और चुनौतियों के बीच, भारत एक ‘उच्च विकास और कम मुद्रास्फीति’ वाला मॉडल बन गया है, जो देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।

एचटी समिट के दौरान, प्रधानमंत्री ने भारत की विकास गाथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब वैश्विक विकास दर लगभग 3% है और जी7 देशों की अर्थव्यवस्थाएं लगभग 1.5% के आसपास हैं, ऐसे में भारत उच्च विकास और कम महंगाई का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

आर्थिक विकास की मजबूत रफ्तार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वर्ष 2025 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.6% और 2026 के लिए 6.2% कर दिया है। इसके अतिरिक्त, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने विकास अनुमान को संशोधित करते हुए 7.3% कर दिया है।

इससे पहले, जुलाई-सितंबर तिमाही में, भारत का सकल घरेलू उत्पाद छह तिमाहियों में अपनी सबसे तेज गति से 8.2% बढ़ा, जिसने बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया था।

महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) द्वारा मापी जाने वाली खुदरा मुद्रास्फीति (रिटेल इन्फ्लेशन) अक्टूबर में 0.25% के निचले स्तर पर पहुँच गई थी। आरबीआई ने इस सप्ताह अपने पूरे वर्ष के लिए सीपीआई पूर्वानुमान को 60 आधार अंकों से घटाकर 2% कर दिया है, जो केंद्रीय बैंक के 4% के लक्ष्य से काफी कम है।

प्रधानमंत्री ने पहले की अवधि में धीमी विकास दर को ‘हिंदू आस्था’ से जोड़े जाने की कड़ी आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि जब भारत 2-3% की वृद्धि के लिए संघर्ष कर रहा था, तब ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था। यह साबित करने के प्रयास किए गए थे कि भारत की धीमी प्रगति का कारण हिंदू सभ्यता और संस्कृति है, और पूरे समाज को अनुत्पादकता और गरीबी का टैग दिया गया था।

भारत बदल रहा है, भविष्य भी बदल रहा है

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का विकास केवल आर्थिक आंकड़ों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की मानसिकता, लचीलेपन और अन्य क्षेत्रों में आए मौलिक बदलावों को भी दर्शाता है।

उन्होंने कहा, “यह केवल आंकड़ों की बात नहीं है, यह एक मूलभूत बदलाव है जो भारत ने पिछले एक दशक में लाया है। यह लचीलेपन का बदलाव है, यह समाधान खोजने की मानसिकता बनाने का बदलाव है, यह आकांक्षाओं का बदलाव है। भारत न केवल आज बदल रहा है, बल्कि आने वाले कल को भी बदल रहा है।”

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