मुआवजे के नाम पर घूस लेते नायब तहसील कार्यालय का लिपिक एसीबी के हत्थे चढ़ा

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई हुई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जरही स्थित नायब तहसील कार्यालय में कार्यरत एक बाबू (लिपिक) को रिश्वत की रकम स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी कर्मचारी मकान क्षतिपूर्ति की राशि जारी करने के बदले पीड़ित से कमीशन की मांग कर रहा था।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना कोटेया ग्राम के निवासी रमेश राजवाड़े से जुड़ी है। कुछ समय पहले आए आंधी-तूफान में रमेश का घर क्षतिग्रस्त हो गया था। शासन के नियमानुसार पटवारी ने नुकसान का सर्वे किया और नायब तहसील कार्यालय जरही में मुआवजे का प्रकरण तैयार किया गया। इस प्रक्रिया के तहत रमेश के लिए 80 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत हुई थी।
रिश्वत के लिए बनाया दबाव
आरोप है कि कार्यालय में पदस्थ लिपिक तोखन सिंह सोढ़ी ने इस स्वीकृत राशि को जारी करने के बदले रमेश से कुल 40 हजार रुपये की मांग की। पीड़ित ने विवश होकर पहले ही 15 हजार रुपये बाबू को दे दिए थे, लेकिन आरोपी बाकी के 25 हजार रुपये के लिए लगातार दबाव बना रहा था।
एसीबी का जाल और गिरफ्तारी
बार-बार की मांग से परेशान होकर रमेश राजवाड़े ने इसकी शिकायत एसीबी से की। शिकायत की पुष्टि होने के बाद टीम ने जाल बिछाया। रणनीति के तहत जैसे ही रमेश ने लिपिक को 25 हजार रुपये की शेष राशि सौंपी, पहले से तैयार एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया।
अहम जानकारी: कार्रवाई के दौरान जब आरोपी के हाथ धुलवाए गए, तो केमिकल के प्रभाव से पानी का रंग गुलाबी हो गया, जो रिश्वत लेने का पुख्ता प्रमाण है।
एसीबी ने आरोपी लिपिक के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। विभाग इस मामले में आगे की कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर रहा है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से तहसील कार्यालय के अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
















