EPFO की नई पहल : नौकरी बदलने पर अब नहीं टूटेगी ‘सर्विस कंटिन्यूटी’, बीमा क्लेम पाना हुआ आसान

न्युज डेस्क (एजेंसी)। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नौकरीपेशा लोगों और उनके आश्रितों के हक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। संगठन द्वारा जारी हालिया सर्कुलर के अनुसार, अब नौकरी बदलते समय बीच में आने वाली छुट्टियों को ‘सर्विस ब्रेक’ नहीं माना जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य मृत्यु के बाद मिलने वाले बीमा दावों में आने वाली तकनीकी बाधाओं को दूर करना है।
छुट्टियों की वजह से नहीं रुकेगा क्लेम
अक्सर देखा गया है कि जब कोई कर्मचारी एक संस्थान छोड़कर दूसरे संस्थान में शामिल होता है और इस दौरान शनिवार, रविवार या कोई सार्वजनिक अवकाश पड़ता है, तो उसे सेवा में अंतराल (Gap) मान लिया जाता था। इस मामूली तकनीकी कारण की वजह से कई बार परिवार को एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) और पेंशन के लाभ मिलने में कठिनाई होती थी।
अब EPFO ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि दो नौकरियों के बीच केवल साप्ताहिक अवकाश, राष्ट्रीय अवकाश या गजेटेड छुट्टियां आती हैं, तो इसे ‘निरंतर सेवा’ ही गिना जाएगा।
नए नियमों की मुख्य बातें:
60 दिनों का ग्रेस पीरियड: नौकरी बदलते समय यदि 60 दिनों तक का अंतराल होता है, तब भी सेवा को निरंतर माना जा सकता है।
न्यूनतम बीमा राशि में वृद्धि: EDLI योजना के तहत अब नॉमिनी को कम से कम 2.5 लाख रुपये (न्यूनतम भुगतान सीमा के आधार पर) और अधिकतम 7 लाख रुपये तक का लाभ मिलता है। हालिया स्पष्टीकरण के अनुसार, 50,000 रुपये तक के विशेष प्रावधानों को भी सरल बनाया गया है ताकि कम बैलेंस वाले खातों को भी राहत मिले।
विवादों का निपटारा: अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सर्विस की गणना करते समय अधिक संवेदनशीलता बरतें ताकि आश्रितों को दावों के लिए भटकना न पड़े।
आश्रितों को कैसे होगा लाभ?
पुराने नियमों में मामूली गैप के कारण कई बार बीमा क्लेम खारिज कर दिए जाते थे। अब यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु आखिरी योगदान के 6 महीने के भीतर होती है और वह रिकॉर्ड में सक्रिय है, तो उसके परिवार को बीमा का पूरा लाभ मिलेगा। यह बदलाव उन परिवारों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा जिन्होंने घर के मुख्य कमाने वाले को खो दिया है।
















