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भारतीय उद्योगों की रफ्तार तेज : विनिर्माण और खनन क्षेत्र के दम पर दो साल के उच्चतम स्तर पर IIP

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत के औद्योगिक क्षेत्र के लिए अच्छी खबर है। नवंबर महीने में औद्योगिक उत्पादन (IIP) की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक है। इस तेजी का मुख्य श्रेय मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) और माइनिंग (खनन) क्षेत्रों के शानदार प्रदर्शन को जाता है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल (नवंबर 2024) की तुलना में औद्योगिक गतिविधियों में बड़ा सुधार देखा गया है। गौरतलब है कि इससे पहले नवंबर 2023 में 11.9 प्रतिशत की उच्चतम वृद्धि देखी गई थी।

वृद्धि के प्रमुख कारण और क्षेत्रवार प्रदर्शन

इस उछाल के पीछे सरकार द्वारा सितंबर 2025 में जीएसटी (GST) दरों में की गई कटौती को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। करों में कमी की वजह से मांग बढ़ी और विनिर्माण क्षेत्र को नए ऑर्डर्स मिलने में तेजी आई।

विनिर्माण (Manufacturing): इस क्षेत्र में 8 प्रतिशत की बढ़त देखी गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 5.5 प्रतिशत थी। कुल 23 में से 20 औद्योगिक समूहों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया।

खनन (Mining): खनन क्षेत्र ने भी 5.4 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दिखाई।

बिजली (Electricity): बिजली क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई। नवंबर में उत्पादन 1.5 प्रतिशत कम रहा, जबकि पिछले साल इसी समय इसमें 4.4 प्रतिशत की बढ़त थी।

संशोधित आंकड़े: अक्टूबर 2025 के विकास अनुमान को भी 0.4 प्रतिशत से बढ़ाकर अब 0.5 प्रतिशत कर दिया गया है।

भविष्य की चुनौतियां और अर्थशास्त्रियों की राय

इक्रा (ICRA) की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार, वैश्विक परिस्थितियां जैसे अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव भारतीय विनिर्माण के कुछ हिस्सों पर दिख सकता है। हालांकि, दिसंबर में बिजली की मांग बढ़ने से आने वाले आंकड़ों में सुधार की उम्मीद है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आधार प्रभाव (Base Effect) के सामान्य होने के कारण दिसंबर में IIP वृद्धि 3.5 से 5 प्रतिशत के बीच रह सकती है।

इस बढ़त का आम जनता पर क्या होगा असर?

औद्योगिक उत्पादन सिर्फ कागजी आंकड़ा नहीं है, इसका सीधा प्रभाव आम नागरिक के जीवन पर पड़ता है:

रोजगार के नए मौके: फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ने का मतलब है कि कामगारों और कुशल कर्मचारियों की मांग बढ़ेगी, जिससे बेरोजगारी कम हो सकती है।

आय में वृद्धि: उद्योगों की बेहतर स्थिति कर्मचारियों को बोनस और वेतन वृद्धि की ओर ले जाती है, जिससे लोगों की खरीदारी करने की क्षमता (Purchasing Power) बढ़ती है।

बाजार में स्थिरता: वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में स्थिरता आने की संभावना रहती है, जिससे महंगाई से कुछ राहत मिल सकती है।

छोटे व्यापारियों को लाभ: बड़े उद्योगों की प्रगति से उनसे जुड़ी सप्लाई चेन, ट्रांसपोर्ट और पैकेजिंग जैसे छोटे कारोबारों (MSMEs) को भी काम मिलता है।

अर्थव्यवस्था को मजबूती: अधिक टैक्स कलेक्शन के माध्यम से सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सार्वजनिक सुविधाओं पर अधिक निवेश कर पाएगी।

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