कृषि

आधुनिक कृषि उपकरणों से सशक्त होते किसान और खेती का बदलता स्वरूप

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कृषि के क्षेत्र में एक नई क्रांति देखी जा रही है। किसान अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आधुनिक कृषि यंत्रों को अपना रहे हैं, जिससे न केवल उनकी आय बढ़ रही है बल्कि वे ‘विकसित भारत’ के संकल्प को भी मजबूती दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम की अनुदान योजनाओं ने इस बदलाव में मुख्य भूमिका निभाई है।

उन्नत तकनीक पर सरकारी प्रोत्साहन

राज्य सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक बोझ से बचाने के लिए विभिन्न कृषि उपकरणों पर भारी सब्सिडी (अनुदान) दी जा रही है। जुताई से लेकर कटाई तक, हर चरण के लिए बीज निगम किसानों को उनकी पसंद के आधुनिक उपकरण उपलब्ध करा रहा है।

अनुदान पर उपलब्ध मुख्य उपकरण:

मिट्टी तैयार करने हेतु: रोटावेटर और लेजर लैंड लेवलर।

बुआई और रोपाई हेतु: सीड ड्रिल और पैडी ट्रांसप्लांटर।

निराई-गुड़ाई हेतु: पावर वीडर और मल्चर।

कटाई और प्रसंस्करण हेतु: स्व-चलित रीपर और थ्रेशर।

किसानों की सफलता की कहानियाँ: तकनीक का कमाल
आधुनिक मशीनों के उपयोग से किसानों के अनुभव पूरी तरह बदल गए हैं। यहाँ कुछ प्रमुख उदाहरण दिए गए हैं:

कम लागत में तेजी से कटाई: बिलासपुर के किसान नारायण दल्लू पटेल बताते हैं कि स्व-चलित रीपर ने उनकी मेहनत कम कर दी है। जो काम पहले 12 मजदूर मिलकर पूरा दिन में करते थे, वह अब मात्र 2-3 घंटों में हो जाता है। इससे उनकी कटाई की लागत आधी रह गई है।

मिट्टी की बेहतर तैयारी: रायपुर के हीरालाल साहू के अनुसार, रोटावेटर के उपयोग से अब घंटों में खेत तैयार हो जाते हैं। इससे न केवल समय की बचत हुई है, बल्कि उनके उत्पादन में भी लगभग 25% की वृद्धि देखी गई है।

बीज की बचत और सटीक बुआई: खैरागढ़ के किसान लेखूराम छेदईया ने सीड ड्रिल का उपयोग शुरू किया है। इससे बीजों की 25% तक बचत हो रही है और सही गहराई पर बुआई होने से फसल की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

आधुनिक कृषि के प्रमुख लाभ

वैज्ञानिक पद्धति और मशीनों के समावेश से खेती अब अधिक लाभदायक व्यवसाय बनती जा रही है:

समय और श्रम की बचत: मशीनों के उपयोग से काम कम समय में और कम मजदूरों के साथ पूरा हो जाता है।

लागत में कमी: ईंधन और खाद का सटीक उपयोग होने से खेती का खर्च कम हुआ है।

बेहतर फसल गुणवत्ता: सटीक बुआई और कटाई से उपज की गुणवत्ता बढ़ती है, जिससे बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं।

लक्ष्य: आत्मनिर्भर किसान

वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 882 किसान इन अनुदान योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ उठा चुके हैं। बीज निगम का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देना और प्रदेश के हर किसान को तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।

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