ई-केवाईसी के फेर में फंसा हजारों गरीबों का निवाला, राजनीतिक पारा चढ़ा

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में राशन कार्डों के ई-केवाईसी (e-KYC) अपडेट न होने का मुद्दा अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है। जिले के लगभग 70 हजार से अधिक पात्र हितग्राहियों को नवंबर माह का राशन नहीं मिल पाया है, जिसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
राज्य शासन के निर्देशानुसार, राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। रायगढ़ जिले में पिछले छह महीनों से यह अभियान चलाया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार:
कुल लक्ष्य: 3,30,000 राशन कार्डों से जुड़े 10,60,630 सदस्य।
पूरी हुई केवाईसी: अब तक 9,86,039 लोगों का सत्यापन हो चुका है।
प्रभावित लोग: ई-केवाईसी न होने के कारण शुरुआत में 74,833 लोगों का राशन रोका गया था। प्रक्रिया के बाद कुछ नाम हटे, लेकिन अभी भी 70 हजार से अधिक लोग राशन से वंचित हैं।
विपक्ष के तीखे वार
कांग्रेस ने इस स्थिति को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि तकनीकी प्रक्रियाओं के बहाने गरीबों को उनके बुनियादी अधिकार से वंचित करना “सुशासन” नहीं बल्कि “कुशासन” है।
“सरकार गरीबों के हक के साथ खिलवाड़ कर रही है। ई-केवाईसी के नाम पर राशन रोकना सीधे तौर पर वादाखिलाफी है। प्रशासन को तुरंत भौतिक सत्यापन कर राशन वितरण शुरू करना चाहिए।” — प्रकाश नायक, पूर्व विधायक
प्रशासन का पक्ष
दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा है कि राशन रोकने का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि डेटा को पारदर्शी बनाना है। अधिकारियों के मुताबिक:
अधिकांश लंबित मामले एपीएल (APL) श्रेणी के हैं।
कुछ मामलों में बच्चों और बुजुर्गों के बायोमेट्रिक्स की समस्या आ रही है।
जैसे ही हितग्राही अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूर्ण करेंगे, उनका नाम ब्लैकलिस्ट से हटाकर राशन बहाल कर दिया जाएगा।
फिलहाल, राशन की दुकानों पर सन्नाटा और सियासत में उबाल है। देखना यह होगा कि प्रशासन इन हजारों परिवारों तक राहत पहुँचाने के लिए क्या वैकल्पिक रास्ता निकालता है, या यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक आंदोलन बनेगा।
















