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पेट में गैस की समस्या : सामान्य पाचन प्रक्रिया या किसी बीमारी का संकेत?

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। पेट में गैस बनना एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है। आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति दिन भर में कई बार गैस पास करता है, जो पाचन तंत्र के सुचारू रूप से काम करने का संकेत है। लेकिन, जब यह समस्या असहज करने लगे या इसके साथ दर्द महसूस होने लगे, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

गैस बनने के मुख्य कारण

  1. अनजाने में हवा निगलना : अक्सर हम खाते या पीते समय अनजाने में अतिरिक्त हवा शरीर के अंदर ले लेते हैं। जो हवा डकार के जरिए बाहर नहीं निकल पाती, वह आंतों में जाकर गैस का रूप ले लेती है।
  2. खराब जीवनशैली और आदतें:

जल्दबाजी में भोजन: बिना ठीक से चबाए जल्दी-जल्दी खाना।

स्ट्रॉ का उपयोग: ड्रिंक्स के लिए स्ट्रॉ का इस्तेमाल करना।

अन्य आदतें: च्यूइंग गम चबाना, हार्ड कैंडी चूसना या पेन जैसी चीजें मुंह में डालने से भी हवा पेट में पहुँचती है।

  1. खान-पान का प्रभाव:

कार्बोनेटेड ड्रिंक्स: सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स और बियर में कार्बन डाइऑक्साइड होती है, जो पेट में भारीपन और गैस पैदा करती है।

विशिष्ट खाद्य पदार्थ: राजमा, छोले, मटर, गोभी और ब्रोकली जैसे हाई-फाइबर फूड गैस बना सकते हैं। (सुझाव: राजमा या दालों को पकाने से पहले 12 घंटे भिगोने से यह समस्या कम होती है)।

डेयरी और ग्लूटेन: कई लोगों का शरीर दूध (लैक्टोज) या गेहूं (गुलटेन) को पचा नहीं पाता, जिससे गैस की गंभीर समस्या होती है।

  1. सोते समय मुंह से सांस लेना: यदि आप सोते समय खर्राटे लेते हैं या मुंह खोलकर सांस लेते हैं, तो आप रात भर काफी हवा अंदर खींचते हैं, जो अगले दिन पेट में भारीपन का कारण बनती है।
  2. पाचन तंत्र की सुस्ती और कब्ज: उम्र बढ़ने के साथ पाचन धीमा हो जाता है। जब भोजन आंतों में लंबे समय तक पड़ा रहता है, तो बैक्टीरिया उस पर प्रतिक्रिया करते हैं जिससे गैस उत्पन्न होती है। कब्ज की स्थिति में यह समस्या और बढ़ जाती है।

क्या यह किसी गंभीर बीमारी का लक्षण है?

लगातार गैस बनना कभी-कभी सामान्य नहीं होता। यह निम्नलिखित स्थितियों का संकेत हो सकता है:

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS)

डायबिटीज या थायराइड की समस्या

आंतों में रुकावट या सूजन (क्रोहन्स डिजीज)

अल्सरेटिव कोलाइटिस

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको गैस के साथ नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें:

पेट में असहनीय दर्द या ऐंठन।

लगातार सूजन (Bloating) महसूस होना।

मल में खून आना या वजन का अचानक कम होना।

लगातार कब्ज या दस्त की शिकायत।

बार-बार जी मिचलाना या उल्टी होना।

सावधानी: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी उपचार से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

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