पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के ‘बंदर’ वाले बयान पर मचा बवाल, साहू समाज और डिप्टी सीएम ने जताई कड़ी आपत्ति

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानों की मर्यादा को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उपमुख्यमंत्री अरुण साव के खिलाफ की गई एक टिप्पणी ने अब तूल पकड़ लिया है। इस मामले में जहाँ एक ओर राजनीतिक पलटवार शुरू हो गया है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक स्तर पर भी विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत बिलासपुर के लिंगियाडीह में आयोजित एक सभा से हुई। यहाँ भूपेश बघेल ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव की कार्यशैली की आलोचना करते हुए उनकी तुलना ‘बंदर’ से कर दी। बघेल ने कटाक्ष करते हुए कहा कि साव केवल “उछल-कूद” कर रहे हैं और विकास के नाम पर पिछले दो वर्षों में मात्र 950 मीटर सड़क का निर्माण ही करा पाए हैं। सोशल मीडिया पर इस बयान का वीडियो वायरल होने के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है।
अरुण साव का पलटवार: “शब्दों की गरिमा का रखें ध्यान”
खुद पर हुई इस व्यक्तिगत टिप्पणी पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि:
राजनीति में आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन भाषाई मर्यादा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
भूपेश बघेल जैसे व्यक्ति से, जो प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, ऐसी “अक्षम्य” भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती।
सार्वजनिक जीवन में पद की गरिमा और शब्दों के चयन का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
साहू समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी
इस बयान के बाद साहू समाज में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। समाज ने इसे अपने नेता का अपमान मानते हुए मोर्चा खोल दिया है। समाज द्वारा लिए गए निर्णयों के अनुसार:
प्रदेश के सभी जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
भूपेश बघेल से सार्वजनिक रूप से माफी माँगने की मांग की जा रही है।
यदि माफी नहीं माँगी गई, तो समाज ने बड़े स्तर पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
















