अमित बघेल की न्यायिक हिरासत 16 जनवरी तक बढ़ी, कई राज्यों में मामले दर्ज

रायपुर। रायपुर की एक स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को आरोपी अमित बघेल को राहत न देते हुए उनकी न्यायिक हिरासत 16 जनवरी तक बढ़ा दी है। बघेल को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया था। पुलिस ने उन पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, और अन्य लंबित प्रकरणों में सुनवाई के लिए उन्हें पुनः 12 जनवरी को न्यायालय के समक्ष लाया जाएगा।
अंतर्राज्यीय मामलों में भी गिरफ्तारी
अमित बघेल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। छत्तीसगढ़ के अलावा उनके खिलाफ भिलाई, छिंदवाड़ा और बेंगलुरु में भी प्राथमिकियाँ (FIR) दर्ज हैं। पुलिस प्रशासन ने संबंधित शहरों से दस्तावेजों की प्रतियां प्राप्त करने के बाद, न्यायिक अनुमति लेकर इन मामलों में भी औपचारिक रूप से उनकी गिरफ्तारी दर्ज कर ली है।
जमानत का कड़ा विरोध
सुनवाई के दौरान अग्रवाल समाज की ओर से अधिवक्ता और आपत्तिकर्ता अशोक कुमार अग्रवाल ने बघेल की जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया। कोर्ट के समक्ष छह प्रमुख बिंदुओं को रखते हुए उन्होंने दलील दी कि आरोपी के कृत्य की गंभीरता और समाज पर इसके प्रभाव को देखते हुए उन्हें रिहा करना उचित नहीं होगा।
विवाद की जड़: क्या है पूरा घटनाक्रम?
यह पूरा विवाद अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ था, जिसकी मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:
26 अक्टूबर 2025: रायपुर के VIP चौक पर स्थित ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ की प्रतिमा के साथ किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा तोड़फोड़ की गई। पुलिस के अनुसार, वह व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ था।
हंगामा और प्रदर्शन: इस घटना के विरोध में अमित बघेल अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे, जहाँ पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प हुई।
विवादित टिप्पणी: प्रदर्शन के दौरान बघेल द्वारा अग्रवाल और सिंधी समाज के विरुद्ध कथित तौर पर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया।
देशव्यापी आक्रोश: इन टिप्पणियों के बाद सिंधी और अग्रवाल समाज में भारी रोष फैल गया। रायपुर, रायगढ़, सरगुजा से लेकर पड़ोसी राज्यों तक विरोध प्रदर्शन हुए और बघेल के खिलाफ कई थानों में शिकायतें दर्ज कराई गईं।
फिलहाल, प्रशासन शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहा है और आरोपी को जेल भेज दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई अब 12 जनवरी को निर्धारित है।
















