छत्तीसगढ़ में ‘विकसित भारत-गांव’ की नई पहल : 125 दिन का काम और समय पर भुगतान की गारंटी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से वीबी-जी राम जी (VB-G RAM J) कानून की घोषणा की। राज्य सरकार का यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को ‘विकसित गांव’ के जरिए धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
इस नए कानून की मुख्य विशेषताएं
इस अधिनियम के लागू होने से ग्रामीण रोजगार और कार्यप्रणाली में कई क्रांतिकारी बदलाव आएंगे:
रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी: जहाँ मनरेगा के तहत अब तक 100 दिनों का रोजगार मिलता था, वहीं अब इस नए कानून के अंतर्गत इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।
त्वरित भुगतान प्रणाली: अब मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान 7 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। पूर्व में 15 दिनों के बाद भी भुगतान मिलने में कठिनाइयां आती थीं।
विलंब पर अतिरिक्त मुआवजा: यदि किसी कारणवश 7 दिनों के भीतर भुगतान नहीं होता है, तो संबंधित लाभार्थी को अतिरिक्त हर्जाना (Extra Payment) दिया जाएगा।
कृषि कार्यों के लिए अवकाश: किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, बुआई और कटाई के सीजन के दौरान 60 दिनों के लिए काम बंद रखा जाएगा, ताकि वे अपनी खेती पर ध्यान दे सकें।
गांव का विकास और पलायन पर रोक
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर बनाना है। समय पर मजदूरी और अधिक रोजगार मिलने से गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन में भारी कमी आएगी। इसके अलावा, पारदर्शी व्यवस्था होने के कारण भ्रष्टाचार और कार्य में होने वाली अनियमितताओं की शिकायतों पर भी लगाम लगेगी।
“विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब हमारे गांव सशक्त होंगे। यह कानून श्रमिकों के सम्मान और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए समर्पित है।” — विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री
















