सुरक्षित यौन संबंध और स्वास्थ्य : यौन रोगों (STIs) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। यौन स्वास्थ्य हमारे समग्र जीवन का एक अहम हिस्सा है, लेकिन इसके बारे में जागरूकता की कमी अक्सर गंभीर समस्याओं का कारण बनती है। सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिसीज (STDs) या संक्रमण (STIs) शारीरिक संपर्क के माध्यम से फैलते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बीमारियों के बारे में सही जानकारी ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
- महिलाओं को संक्रमण का अधिक जोखिम
शारीरिक संरचना के कारण पुरुषों की तुलना में महिलाओं को यौन संक्रमण होने की संभावना अधिक होती है। महिलाओं के जननांग अधिक संवेदनशील होते हैं, जिससे बैक्टीरिया या वायरस आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। यदि समय पर इलाज न हो, तो यह पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
- सिर्फ एक या दो नहीं, 35 तरह के होते हैं संक्रमण
आमतौर पर लोग केवल HIV या सिफलिस के बारे में जानते हैं, लेकिन वास्तव में लगभग 35 विभिन्न प्रकार के STIs होते हैं। इनमें से मुख्य हैं:
ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV)
हर्पीज और गोनोरिया
हेपेटाइटिस-बी और क्लैमाइडिया
ध्यान दें: कुछ संक्रमण केवल शारीरिक संबंध से ही नहीं, बल्कि संक्रमित रक्त (Blood Transfusion) के जरिए भी फैल सकते हैं।
- फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) पर बुरा असर
अधूरी जानकारी या इलाज में देरी इनफर्टिलिटी यानी बांझपन का कारण बन सकती है। क्लैमाइडिया और गोनोरिया जैसे संक्रमण महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे गर्भधारण में समस्या आती है। पुरुषों में भी यह शुक्राणुओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
- ‘साइलेंट’ लक्षण: बिना लक्षण वाली बीमारियाँ
STI की सबसे खतरनाक बात यह है कि कई बार इनके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसे ‘एसिम्टोमैटिक’ स्थिति कहते हैं। हर्पीज और क्लैमाइडिया जैसे संक्रमण शरीर में होने के बावजूद महीनों तक पता नहीं चलते, जिससे अनजाने में यह पार्टनर तक भी पहुँच सकते हैं।
- शिशु के स्वास्थ्य पर खतरा
गर्भवती महिलाओं में STI का होना आने वाले बच्चे के लिए जोखिम भरा हो सकता है। HIV और हेपेटाइटिस-बी जैसे वायरस जन्म के दौरान या गर्भ में ही बच्चे को संक्रमित कर सकते हैं। इससे समय से पहले जन्म (Pre-mature birth) या बच्चे का वजन कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
बचाव के उपाय और सावधानी
प्रोटेक्शन का उपयोग: कंडोम का सही इस्तेमाल जोखिम को काफी हद तक कम करता है।
नियमित जांच: यदि आप सक्रिय यौन जीवन जी रहे हैं, तो साल में कम से कम एक बार अपनी जांच जरूर करवाएं।
खुली बातचीत: किसी भी असामान्य लक्षण (जैसे खुजली, दर्द या डिस्चार्ज) को नजरअंदाज न करें और बिना झिझक डॉक्टर से परामर्श लें।
















