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भारत-चीन व्यापारिक संबंधों में बड़ा बदलाव : सरकारी ठेकों से हट सकती हैं पाबंदियां

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत सरकार चीन के साथ अपने आर्थिक संबंधों को एक नई दिशा देने की योजना बना रही है। सूत्रों के मुताबिक, पड़ोसी देशों (विशेषकर चीन) की कंपनियों पर सरकारी प्रोजेक्ट्स में बोली लगाने के लिए जो कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे, उनमें अब ढील दी जा सकती है। वित्त मंत्रालय उन नियमों को संशोधित करने पर विचार कर रहा है, जिनके तहत चीनी कंपनियों को भारत में काम करने के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता था।

पाबंदियों का इतिहास और वर्तमान स्थिति

2020 में गलवान घाटी में हुए सीमा विवाद के बाद, भारत ने सुरक्षा कारणों से चीनी निवेश और कंपनियों पर सख्त पहरा लगा दिया था। इन नियमों के कारण चीन की कंपनियां भारत के लगभग $700-750 बिलियन के विशाल सरकारी बाजार से बाहर हो गई थीं। किसी भी निविदा (Tender) में भाग लेने के लिए उन्हें विशेष सरकारी समिति से मंजूरी और राजनीतिक क्लियरेंस लेना अनिवार्य था।

अब रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इन पंजीकरण प्रक्रियाओं को समाप्त करने की तैयारी में है। हालांकि, इस पर अंतिम मुहर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा लगाई जाएगी।

ढील देने की मुख्य वजहें

विशेषज्ञों और सरकारी विभागों का मानना है कि इन पाबंदियों ने भारत के अपने विकास लक्ष्यों को प्रभावित किया है:

रुके हुए प्रोजेक्ट्स: कई विभागों ने शिकायत की है कि चीन से आने वाली मशीनों और उपकरणों की कमी के कारण महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अधर में लटकी हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में चुनौतियां: भारत अगले दशक में अपनी बिजली उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाना चाहता है। इसके लिए आवश्यक कलपुर्जे और तकनीक के लिए चीन पर निर्भरता एक बड़ी हकीकत है।

विशेषज्ञों की राय: पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली समिति ने भी विकास की गति को बनाए रखने के लिए इन नियमों में नरमी बरतने का सुझाव दिया है।

बदलता वैश्विक समीकरण और कूटनीति

चीन के प्रति भारत के इस नरम रुख को वैश्विक राजनीति में आए बदलावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में भारतीय सामानों पर बढ़ते टैरिफ और अमेरिका-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों ने भारत को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है।

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशें तेज हुई हैं। सीधी हवाई सेवाओं की बहाली और चीनी पेशेवरों के लिए वीजा नियमों को आसान बनाना इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। हालांकि, सरकार अभी भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मामले में पूरी सावधानी बरत रही है।

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