दुर्ग प्रशासन का सख्त कदम : आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त डॉक्टर एक साल के लिए जिला बदर

भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। अहिवारा क्षेत्र में दहशत का पर्याय बन चुके एक डॉक्टर को जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर एक वर्ष के लिए जिले की सीमाओं से निष्कासित (जिला बदर) कर दिया गया है।
क्लीनिक की आड़ में दबंगई
नंदिनी नगर पुलिस के अनुसार, आरोपी डॉ. दुष्यंत खोसला अहिवारा में एक क्लीनिक संचालित करता था। हालांकि, पेशे से डॉक्टर होने के बावजूद उसकी पहचान एक सेवादार के बजाय इलाके के रसूखदार बदमाश के रूप में बन चुकी थी। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि डॉक्टर अपनी दबंगई के बल पर लोगों के साथ मारपीट करता था और बेवजह उन्हें डरा-धमकाकर क्षेत्र में अशांति फैलाता था।
आपराधिक रिकॉर्ड और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, डॉ. खोसला के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत 5 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसकी लगातार बढ़ती असामाजिक गतिविधियों को देखते हुए पुलिस ने पहले उसे ‘गुंडा सूची’ में शामिल किया था, ताकि उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
क्यों लिया गया जिला बदर का निर्णय?
लगातार शिकायतों का अंबार: पुलिस की चेतावनी के बाद भी आरोपी के व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया।
आमजन में भय: स्थानीय लोग उसके खिलाफ बोलने से डरने लगे थे, जिससे सामाजिक माहौल बिगड़ रहा था।
कलेक्टर का आदेश: दुर्ग पुलिस की विस्तृत रिपोर्ट और अनुशंसा के आधार पर, जिलाधीश ने सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए डॉक्टर को एक साल के लिए जिला बदर करने का अधिकारिक फरमान सुनाया।
प्रशासन का संदेश: यह कार्रवाई उन तत्वों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो पेशेवर पहचान की आड़ में कानून को चुनौती देते हैं और सार्वजनिक शांति भंग करने का प्रयास करते हैं।
















