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रूसी कच्चे तेल के आयात में बड़ी गिरावट : खरीदारों की सूची में भारत अब तीसरे स्थान पर

नई दिल्ली (एजेंसी)। दिसंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने रूस से होने वाले कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय कटौती की है। इस बदलाव के बाद, भारत अब रूस से ईंधन खरीदने वाले देशों की सूची में फिसलकर तीसरे स्थान पर आ गया है। ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (CREA) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर महीने में भारत का कुल हाइड्रोकार्बन आयात घटकर 2.3 अरब यूरो रह गया, जबकि पिछले महीने यह आंकड़ा 3.3 अरब यूरो था।

आयात में गिरावट के मुख्य कारण

रूस से तेल खरीद में आई इस कमी के पीछे कुछ प्रमुख व्यापारिक निर्णय रहे हैं:

रिलायंस इंडस्ट्रीज का बड़ा कदम: रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी ने दिसंबर में रूसी तेल के आयात को लगभग 50% तक कम कर दिया है।

सरकारी रिफाइनरियों की कटौती: सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भी रूस से अपनी खरीद में 15% की कमी दर्ज की है।

तुर्की की बढ़त: भारत में आई इस गिरावट के बीच तुर्की अब रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया है (2.6 अरब यूरो)। चीन अभी भी 6 अरब यूरो (48% हिस्सेदारी) के साथ शीर्ष पर बना हुआ है।

वैश्विक बाज़ार की स्थिति: प्रमुख डेटा

विवरण,सांख्यिकी / डेटा

भारत की आयात गिरावट,मासिक आधार पर 29% की कमी
चीन की हिस्सेदारी,रूस के कुल निर्यात का 48%
ब्रेंट क्रूड की कीमत,लगभग 60 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल (स्थिर)

वेनेजुएला संकट और तेल की कीमतों पर असर
क्रिसिल रेटिंग्स (CRISIL) के विश्लेषण के अनुसार, वेनेजुएला में चल रहे हालिया राजनीतिक या आर्थिक घटनाक्रमों का वैश्विक तेल कीमतों पर कोई खास प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

न्यूनतम वैश्विक हिस्सेदारी: दुनिया की कुल तेल आपूर्ति में वेनेजुएला का योगदान मात्र 1.5% है।

भारत पर प्रभाव: भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का 0.25% से भी कम हिस्सा वेनेजुएला से आयात करता है।

निष्कर्ष: जहाँ एक ओर भारत ने रूसी तेल पर अपनी निर्भरता को कम किया है, वहीं वैश्विक बाज़ार में तेल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। भारत की इस रणनीतिक कटौती का असर आने वाले समय में वैश्विक व्यापार समीकरणों पर भी दिखाई दे सकता है।

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