छत्तीसगढ़

आस्था की ओर लौटे 50 से अधिक परिवार, पीढ़ापाल में हुआ भव्य ‘घर वापसी’ समारोह

कांकेर। छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक महत्वपूर्ण सामाजिक समाचार सामने आया है। जिले के पीढ़ापाल क्षेत्र में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान 50 से अधिक परिवारों ने पुनः सनातन धर्म को अपना लिया है। इस सामूहिक आयोजन में पीढ़ापाल सहित आसपास के गाँवों जैसे धनतुलसी, मोदे, साल्हेभाट, किरगापाटी और तरांदुल के ग्रामीण शामिल हुए।

परंपरागत रीति-रिवाजों से हुआ स्वागत

शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी ग्रामीणों ने अपने मूल धर्म में वापसी की। इस अवसर पर पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल था। स्थानीय समाज ने इन परिवारों का खुले दिल से स्वागत किया:

वैदिक अनुष्ठान: पंडितों द्वारा पूजा-अर्चना और शुद्धिकरण की प्रक्रिया संपन्न कराई गई।

भावुक स्वागत: बुजुर्गों ने परिवारों को आशीर्वाद दिया और महिलाओं ने पारंपरिक आरती उतारकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस जोड़ा।

सामुदायिक भोज: सभी के लिए सामूहिक प्रीतिभोज का भी आयोजन किया गया था।

स्वैच्छिक निर्णय और सांस्कृतिक जुड़ाव

वापसी करने वाले परिवारों का कहना है कि उन्होंने यह कदम बिना किसी बाहरी दबाव के, अपनी स्वेच्छा से उठाया है। ग्रामीणों ने साझा किया कि वे अपनी जड़ों, पारंपरिक त्योहारों और पुरानी सामाजिक मान्यताओं की कमी महसूस कर रहे थे। अपनी संस्कृति के प्रति इसी लगाव ने उन्हें वापस आने के लिए प्रेरित किया।

बढ़ता सामाजिक रुझान

विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों को बल मिलता है। गौर करने वाली बात यह है कि कांकेर में घर वापसी का यह कोई पहला मामला नहीं है; इससे पूर्व अंतागढ़ ब्लॉक के सारंडी गांव में भी कुछ लोगों ने सनातन धर्म में वापसी की थी।

निष्कर्ष: ग्रामीण अंचलों में अब अपनी मूल संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। कांकेर जिले की यह घटना वर्तमान में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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