नक्सलियों की घर वापसी के लिए परिजनों की भावुक पुकार : “हथियार छोड़ो, वापस लौट आओ”

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सक्रिय नक्सलियों के परिवारों ने अब अपनों को वापस पाने के लिए एक मार्मिक पहल शुरू की है। जंगलों में भटक रहे इनामी नक्सलियों के परिजनों ने वीडियो संदेश जारी कर उनसे हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की है।
अपनों की सुरक्षा के लिए उमड़ा दर्द
सोशल मीडिया पर सामने आए इन वीडियो में परिजन तेलुगु और गोंडी भाषा में बात करते हुए नजर आ रहे हैं। विशेष रूप से 8-8 लाख रुपये के इनामी नक्सली ऊषा (उर्फ संगीता) और बलदेव (उर्फ बामन) के परिवारों ने हाथ जोड़कर उनसे समर्पण करने की विनती की है। वीडियो में एक माँ और भाई की सिसकियाँ साफ सुनी जा सकती हैं, जो कह रहे हैं कि “बहुत देर होने से पहले घर वापस आ जाओ।”
समर्पण की अपील के पीछे की मुख्य वजहें
इस भावुक अपील के पीछे वर्तमान के बदलते हालात एक बड़ी वजह माने जा रहे हैं:
सरकार की समयसीमा: शासन ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है, जिससे जंगलों में छिपे नक्सलियों के परिवारों में डर बैठ गया है।
सख्त अभियान: बस्तर और गरियाबंद के दुर्गम इलाकों में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और लगातार हो रही मुठभेड़ों ने नक्सलियों की घेराबंदी कर दी है।
सफल पुनर्वास: हाल ही में समर्पण कर चुके बड़े नक्सलियों (जैसे जानसी और सुनील) को सम्मानजनक जीवन मिलता देख, अन्य परिवारों की उम्मीदें भी जाग गई हैं।
पूर्व साथियों ने भी बढ़ाया हाथ
सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले 24 लाख के इनामी पूर्व नक्सलियों (जानसी, सुनील और दीपक) ने भी अपने पुराने साथियों को संदेश दिया है। उन्होंने बताया कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें एक सुरक्षित और बेहतर जीवन मिला है, और यही रास्ता सही है।
गरियाबंद-नुवापाड़ा डिवीजन में सक्रिय इन नक्सलियों के पास अब समय कम बचा है। यह अपील सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक मानवीय पुकार है जो बिखरते परिवारों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। अब देखना यह होगा कि अपनों के इन आंसुओं का असर बंदूकों के शोर पर कितना भारी पड़ता है।
















