सामाजिक मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री बघेल का दिखा कड़ा रुख, आयोजकों को दी नसीहत

बालोद। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रविवार को बालोद जिले में आयोजित कुर्मी क्षत्रिय समाज के वार्षिक सम्मेलन में शामिल हुए। हालांकि, यह कार्यक्रम उस समय चर्चा का विषय बन गया जब मंच पर संबोधन के दौरान बघेल का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने आयोजकों को दो टूक शब्दों में कहा कि यदि वे सम्मान नहीं दे सकते, तो उन्हें आमंत्रित न किया करें।
राजनीतिक हस्तक्षेप पर छिड़ी बहस
विवाद की शुरुआत तब हुई जब बघेल मंच से अपनी बात रख रहे थे और समाज के कुछ पदाधिकारियों ने उन्हें टोकते हुए याद दिलाया कि यह एक सामाजिक मंच है, इसलिए यहाँ राजनीति से जुड़ी बातें नहीं होनी चाहिए। इस टोका-टाकी पर पूर्व मुख्यमंत्री नाराज हो गए। उन्होंने तर्क दिया कि वे किसानों की समस्याओं और उनके हितों पर चर्चा कर रहे थे, जिसे राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
“मिर्ची लग रही है” – बघेल का तीखा पलटवार
बघेल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर उनकी बातों से किसी को इतनी परेशानी हो रही है, तो उन्हें बुलाया ही क्यों गया? उन्होंने मंच पर मौजूद अन्य विचारधारा के लोगों की ओर इशारा करते हुए कहा कि शायद कुछ लोगों को उनकी बातें चुभ रही हैं। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी बातों के लिए कोई खेद व्यक्त नहीं करेंगे और समाज को नसीहत दी कि मेहमानों को बुलाकर उनका उचित सम्मान करना सीखना चाहिए।
वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
मंच से और बाद में मीडिया से चर्चा करते हुए भूपेश बघेल ने राज्य की भाजपा सरकार पर भी कड़े प्रहार किए। उन्होंने धान खरीदी की प्रक्रिया में हो रही देरी और अव्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन को घेरा। बघेल ने निम्नलिखित आरोप लगाए:
अव्यवस्था: धान भंडारण में गड़बड़ी और सुरक्षा में चूक के कारण नुकसान हो रहा है।
विफलता: बालोद में ट्रकों के गायब होने जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताया।
आशंका: उन्होंने दावा किया कि तय समय पर धान खरीदी पूरी नहीं हो पाएगी और लगभग 30 प्रतिशत किसान अपनी फसल बेचने से वंचित रह जाएंगे।
उनका आरोप है कि वर्तमान नीतियां किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर करने की दिशा में काम कर रही हैं।
















